महाराष्ट्र निकाय चुनाव में गठबंधन उलझे, महायुति में खिचड़ी पकने लगी अजित पवार का कांग्रेस को ऑफर

महाराष्ट्र निकाय चुनाव में गठबंधन धुंधले पड़ गए हैं और कहें कि गठबंधन की खिचड़ी पक गई है तो गलत नहीं होगा। दरअसल निकाय चुनाव केलिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन अभी तक उम्मीदवारों के नामों का एलान नहीं हुआ है। गठबंधन भी तय नहीं हैं। ठाणे में अजित पवार कीपार्टी एनसीपी ने आरोप लगाया है कि भाजपा और शिवसेना के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर हो रही बातचीत में उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया है।ऐसे में एनसीपी ने अकेले दम पर चुनाव लड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया है। एनसीपी प्रवक्ता आनंद परांजपे ने दावा किया है कि भाजपा औरशिवसेना ने ठाणे में सीट बंटवारे पर बातचीत शुरू कर दी है लेकिन एनसीपी को बातचीत के लिए नहीं बुलाया गया है। परांजपे ने कहा कि उनकीपार्टी के जिलाध्यक्ष नजीब मुल्ला से अभी तक बातचीत के लिए न तो भाजपा और न ही शिवसेना ने संपर्क किया है। ऐसे में पार्टी ने अकेले दम परठाणे नगर निकाय चुनाव लड़ने का विकल्प भी खुला रखा है। हालांकि एनसीपी का ये भी कहना है कि अगर उन्हें सीट बंटवारे पर बातचीत के लिएबुलाया जाता है तो वे उसके लिए तैयार हैं। महाराष्ट्र के 29 नगर निकाय में चुनाव के लिए 15 जनवरी को मतदान होगा। चुनाव लड़ने का ऑफर दियाकांग्रेस के वरिष्ठ नेता सतेज पाटिल ने मंगलवार को दावा किया कि अजित पवार ने उनसे संपर्क किया है और पुणे निकाय चुनाव में एनसीपी औरकांग्रेस के गठबंधन में चुनाव लड़ने की मंशा जाहिर की। सतेज पाटिल ने कहा कि वे इस बात को प्रदेश नेतृत्व और स्थानीय स्तर के नेताओं के सामनेउठाएंगे। हालांकि पाटिल ये भी कहा कि कांग्रेस, महाविकास अघाड़ी के घटक दलों के साथ चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। वहीं पुणे के एनसीपीजिलाध्यक्ष सुभाष जगताप ने दावा किया है कि एनसीपी और एनसीपी एसपी पुणे में साथ चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। हालांकिएनसीपी एसपी के जिलाध्यक्ष प्रशांत जगताप ने इसे लेकर नाराजगी जताई है और वह पार्टी नेतृत्व के सामने इसे लेकर नाराजगी भी जताने वाले हैं।महाराष्ट्र में निकाय चुनाव के दूसरे चरण में गठबंधन की खिचड़ी पक गई है। सत्ताधारी महायुति में भाजपा और शिवसेना सीट बंटवारें पर बात कर रहीहैं, लेकिन एनसीपी इससे बाहर है। अब कांग्रेस ने कहा है कि अजित पवार ने पुणे में साथ मिलकर चुनाव लड़ने का ऑफर दिया है।
डिजिटल युग में सतर्क नागरिक ही सबसे बड़ी ताकत, फेक न्यूज से सावधान रहें, सच साझा करें राष्ट्रपति द्रौपदी की अपील

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और जिम्मेदारी की बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सुरक्षा बलों कीजिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी से ही मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि लोग अपने आसपास हो रही घटनाओं के केवलदर्शक नहीं बने, बल्कि सतर्क और सक्रिय भागीदार बनें। उन्होंने जन भागीदारी को लोगों के लिए केंद्रित सुरक्षा का आधार बताया। बता दें कि राष्ट्रपतिने यह बात इटेंलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के शताब्दी उपनिवेश व्याख्यान में कही, जिसका विषय था ‘जन-केंद्रित राष्ट्रीय सुरक्षा: विकसित भारत के निर्माणमें सामुदायिक भागीदारी’। इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार, गृह सचिव गोविंद मोहन और आईबी प्रमुखतपन कुमार डेका भी मौजूद थे। इस दौरान मुर्मू ने कहा कि सोशल मीडिया ने सूचना और संचार की दुनिया बदल दी है। इसके माध्यम से अच्छे औरबुरे दोनों तरह के प्रभाव फैल सकते हैं। उन्होंने नागरिकों से कहा कि वे सोशल मीडिया पर सच पर आधारित जानकारी साझा करें और गलत सूचनाओंसे बचाव करें। भविष्य में अपराध रोकने में मदद मिल सकतीइसके साथ ही राष्ट्रपति ने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार जागरूक नागरिकों की जानकारी के कारण सुरक्षा बल गंभीर संकट टालने में सफल रहेहैं। उन्होंने कहा कि भारत में पहले पुलिस और सरकारी कर्मचारियों के प्रति कुछ लोग दूरी महसूस करते थे, लेकिन विकसित देशों में लोग पुलिस कोभरोसेमंद और मददगार मानते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी पुलिस और आंतरिक सुरक्षा एजेंसियों का काम लोगों की सेवा करने की भावना से होनाचाहिए। मुर्मू ने ड्रग्स और कट्टरपंथ जैसी समस्याओं से निपटने में जनता की भागीदारी की अहमियत बताई। उन्होंने कहा कि आधुनिक सुरक्षा चुनौतियांअब डिजिटल और गैर-पारंपरिक स्वरूप की हैं। डिजिटल फ्रॉड और साइबर अपराध से निपटने के लिए घर, संस्थान और समुदाय स्तर पर सतर्कताजरूरी है। उन्होंने कहा कि नागरिक साइबर अपराध की जानकारी तुरंत संबंधित एजेंसियों तक पहुँचा सकते हैं और इससे भविष्य में अपराध रोकने मेंमदद मिल सकती है। साथ ही अंत में मुर्मू ने भरोसा जतायाराष्ट्रपति ने कहा कि सीमाओं पर तनाव, आतंकवाद, माओवादी हिंसा और साम्प्रदायिक कट्टरता जैसी परंपरागत सुरक्षा चुनौतियां अभी भी हैं। इसकेअलावा भौगोलिक तनाव, आर्थिक अस्थिरता और व्यापार बाधाएं भी आंतरिक सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए हर समस्या का हल हमारेविशेष संदर्भ के अनुसार ढूंढना और जनता की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है। मुर्मू ने पर्यावरण संरक्षण में भी जनता की भागीदारी का महत्व बताया। उन्होंनेकहा कि जलवायु परिवर्तन और सीमित प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव से लोगों में संघर्ष की संभावना बढ़ती है। राष्ट्रपति ने सुरक्षा एजेंसियों कीतारीफ करते हुए कहा कि नक्सलवाद को 31 मार्च, 2026 तक पूरी तरह खत्म करने का संकल्प लिया गया है। 2014 में 126 जिले नक्सलप्रभावित थे, अब केवल 11 जिले प्रभावित हैं और सबसे अधिक प्रभावित जिले केवल तीन रह गए हैं। इसके साथ ही अंत में मुर्मू ने भरोसा जताया किजनता की सक्रिय भागीदारी से भारत सतर्क, शांतिपूर्ण, सुरक्षित और समृद्ध देश की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
नोसा ब्रेक में खिलाड़ियों की शराबखोरी, इंग्लैंड टीम की छवि दांव पर, पेशेवर अनुशासन पर सवाल, ECB ने उठाया मामला

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एशेज सीरीज में एक और हार के बाद इंग्लैंड की टीम नई मुश्किल में घिरती नजर आ रही है। तीसरे टेस्ट में 82 रन से मिलीहार के बाद न सिर्फ सीरीज हाथ से निकल गई, बल्कि अब इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) को टीम के व्यवहार की जांच भी करनी पड़ रही है।आरोप है कि कप्तान बेन स्टोक्स और उनके साथी खिलाड़ियों ने सीरीज के बीच लिए गए ब्रेक के दौरान जरूरत से ज्यादा शराब का सेवन किया।तीसरे टेस्ट से पहले इंग्लैंड की टीम ने चार दिन का ब्रेक लिया और ऑस्ट्रेलिया के हॉलिडे रिसॉर्ट नोसा की यात्रा की। यह फैसला पहले ही कईऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट विशेषज्ञों की आलोचना झेल चुका था। अब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस दौरान कुछ खिलाड़ियों ने भारी मात्रामें शराब पी, जिससे टीम कल्चर और पेशेवर अनुशासन पर सवाल खड़े हो गए हैं। संस्कृति किसी की मदद नहीं करतीइन आरोपों के बाद इंग्लैंड के मैनेजिंग डायरेक्टर रॉब की ने साफ किया है कि मामले की जांच की जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआतीजानकारी के मुताबिक खिलाड़ी अच्छी तरह पेश आए थे। ईएसपीएन क्रिकइनफो ने रॉब की के हवाले से लिखा, ‘अगर ऐसी बातें सामने आती हैं किहमारे खिलाड़ी बाहर जाकर जरूरत से ज्यादा शराब पी रहे थे, तो निश्चित रूप से हम इसकी जांच करेंगे। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम के लिए अत्यधिकशराब पीना किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है और अगर हम इसकी जांच नहीं करते, तो यह हमारी विफलता होगी। लेकिन अब तक जो मैंने सुना है, उसके मुताबिक खिलाड़ी बहुत अच्छे व्यवहार में थे।’ रॉब की ने यह भी साफ किया कि वह टीम कल्चर में शराब की मौजूदगी के पूरी तरह खिलाफनहीं हैं, लेकिन इसकी एक सीमा होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘अगर यह मामला इतना बढ़ जाता है कि भारी शराबखोरी हो और माहौल किसी बैचलरपार्टी जैसा बन जाए, तो यह पूरी तरह अस्वीकार्य है। मैं खुद शराब नहीं पीता और मुझे लगता है कि किसी भी स्थिति में शराब पीने की संस्कृति किसीकी मदद नहीं करती।’ लेकिन अनौपचारिक रूप से यह एक वेक-अप कॉल जरूररॉब की ने कहा, ‘अगर नोसा ट्रिप का मतलब फोन से दूर रहना, बीच पर जाना, साथ खाना-पीना और कभी-कभार एक ड्रिंक लेना था, तो मुझे इससेकोई दिक्कत नहीं है, लेकिन अगर यह इससे आगे जाता है, तो फिर यह मेरे लिए समस्या बन जाती है।’ रॉब की ने यह भी खुलासा किया कि सीरीजसे पहले जैकब बेथेल और हैरी ब्रूक को टीम मैनेजमेंट ने अनौपचारिक चेतावनी दी थी। न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे वनडे की पूर्व संध्या पर दोनों काएक बार में शराब पीते हुए वीडियो सामने आया था। रॉब की ने कहा, ‘डिनर के साथ एक गिलास वाइन से मुझे कोई समस्या नहीं है। उससे ज्यादामुझे काफी गैरजरूरी लगता है। औपचारिक चेतावनी नहीं दी गई, लेकिन अनौपचारिक रूप से यह एक वेक-अप कॉल जरूर था।’ एडिलेड में हार केबाद इंग्लैंड की ऑस्ट्रेलिया में हार का सिलसिला लगातार चार टेस्ट तक पहुंच गया है। इंग्लैंड ने आखिरी बार 2011 में एंड्रयू स्ट्रॉस की कप्तानी मेंऑस्ट्रेलिया में टेस्ट मैच जीता था और तब सीरीज भी 3-1 से अपने नाम की थी। इसके बाद से खेले गए 18 टेस्ट में इंग्लैंड को 16 में हार मिली है, जबकि दो मुकाबले ड्रॉ रहे हैं। सीरीज में अभी दो टेस्ट बाकी हैं और बेन स्टोक्स की टीम की कोशिश होगी कि वह इज्जत बचाते हुए 5-0 की शर्मनाकहार से बचें। एशेज गंवाने के बाद इंग्लैंड टीम पर सीरीज के बीच नोसा ब्रेक के दौरान हद से ज्यादा शराब पीने के आरोप लगे हैं, जिसकी ईसीबी जांचकरेगी। मैनेजिंग डायरेक्टर रॉब की ने कहा कि अगर आरोप सही पाए गए तो यह अस्वीकार्य होगा।
राहुल गांधी के जर्मनी बयान पर सियासत गर्म, BJP प्रवक्ता शहजाद पूनेवाला ने लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के जर्मनी दौरे के दौरान दिए गए बयान पर देश में सियासत तेज है। जहां एक बार फिर भाजपा ने राहुल गांधी पर उनकेजर्मनी दौरे और कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयान को लेकर जमकर निशाना साधा है। भाजपा प्रवक्ता शाहजाद पूनावाला ने राहुल गांधी के दावोंपर आपत्ति जताते हुए कहा कि राहुल गांधी ने दावा किया कि हरियाणा चुनाव में एक महिला ने 200 बार वोट डाला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी नेयह नहीं कहा कि उसका नाम 200 बार सूची में आया, बल्कि सीधे कहा कि उसने 200 बार वोट किया। पूनावाला ने आगे कहा कि राहुल गांधी नेअपने दावों में यह भी कहा कि शकुन रानी नाम की एक महिला ने दो बार वोट डाला। इस पर उन्होंने सवाल उठाते हुए राहुल गांधी को चुनौती दी किवे उस महिला का नाम, पता और सबूत सार्वजनिक करें और बताएं कि आखिर कोई व्यक्ति 200 बार वोट कैसे डाल सकता है। सहयोगियों का और न ही पार्टी के भीतर पूरा भरोसापत्रकारों से बातचीत के दौरान भाजपा प्रवक्ता ने राहुल गांधी पर लोकतंत्र पर सवाल खड़ा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस तरह काबयान लोकतंत्र पर सवाल खड़े करते हैं और बिना सबूत के ऐसे आरोप लगाना गलत है। दूसरी ओर पूनावाला ने इमरान मसूद के बयान को लेकरकांग्रेस और राहुल गांधी पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इमरान मसूद ने साफ तौर पर कहा है कि अब उन्हें राहुल गांधी पर भरोसा नहींरहा। पूनावाला ने आगे कहा कि मसूद का नारा है ‘राहुल हटाओ, प्रियंका गांधी लाओ’। पूनावाला ने दावा किया कि इमरान मसूद अब प्रियंका गांधीको प्रधानमंत्री बनाने की बात कर रहे हैं। इसके साथ ही भाजपा प्रवक्ता ने यह भी कहा कि रॉबर्ट वाड्रा ने भी इस सोच का समर्थन किया है। उनकेमुताबिक इसका मतलब यह है कि राहुल गांधी न सिर्फ जनता का भरोसा खो चुके हैं, बल्कि अब उनके अपने साथी और पार्टी के अंदरूनी लोग भीउनसे संतुष्ट नहीं हैं। पूनावाला ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी के पास अब न जनता का समर्थन है, न सहयोगियों का और न ही पार्टी के भीतरपूरा भरोसा। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर सवाल बतायाइस दौरान पूनावाला ने ओडिशा के कांग्रेस नेता मोहम्मद मोकिम का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि मोकिम ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्षमल्लिकार्जुन खरगे को नेतृत्व से हटाने और प्रियंका गांधी को आगे लाने की बात कही थी, लेकिन इसके बाद उन्हें पार्टी से तुरंत निलंबित कर दियागया। पूनावाला ने कहा कि इससे साफ है कि पार्टी में राहुल गांधी पर भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है। राहुल गांधी के जर्मनी दौरे में दिए बयान परदेश की राजनीति गरमा गई है। भाजपा प्रवक्ता शाहजाद पूनावाला ने राहुल के उस दावे पर आपत्ति जताई, जिसमें हरियाणा चुनाव में एक महिला के200 बार वोट डालने की बात कही गई। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर सवाल बताया।
चक्रवात दितवाहा में भारत ने श्रीलंका को दिया 450 मिलियन डॉलर का सहायता पैकेज, राहत कार्यों में जुटी सेना और फंड

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि भारत चक्रवात दितवाहा के दौरान श्रीलंका के साथ खड़ा है और उसने 450 मिलियन अमेरिकीडॉलर के सहायता पैकेज का प्रस्ताव दिया है। जयशंकर इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष दूत के तौर पर श्रीलंका में हैं। उन्होंने श्रीलंका केविदेश मंत्री विजिता हेरथ के साथ बातचीत में यह बात कही। उन्होंने राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके को मोदी का एक पत्र भी सौंपा। एस जयशंकरने X पर पोस्ट किया, “चक्रवात दितवाह के दौरान श्रीलंका के साथ खड़े होने पर भारत को गर्व है।” वह दो दिन की श्रीलंका यात्रा पर हैं। इस दौरानउन्होंने कहा “जैसे ही श्रीलंका 2022 के आर्थिक संकट से उबर रहा था, इस प्राकृतिक आपदा ने नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। प्रधानमंत्री मोदी नेनिर्देश दिया कि हम अब श्रीलंकाई सरकार के साथ मिलकर उनकी प्राथमिकताओं पर काम करें। इस संबंध में, हमने 450 मिलियन अमेरिकी डॉलरका सहायता पैकेज प्रस्तावित किया है।”मध्यम अवधि में संभावित कमी को दूर करना शामिलउन्होंने कहा, “इस पैकेज में 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर की रियायती क्रेडिट लाइन और 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुदान शामिल होगा।” “इस पैकेज को श्रीलंका सरकार के साथ मिलकर अंतिम रूप दिया जा रहा है। हमारी सहायता में चक्रवात से सबसे ज़्यादा प्रभावित क्षेत्रों को शामिलकिया जाएगा, जिसमें पहला, सड़क, रेलवे और पुल कनेक्टिविटी का पुनर्वास और बहाली शामिल है।” “दूसरा, पूरी तरह से नष्ट हुए और आंशिक रूपसे क्षतिग्रस्त घरों के निर्माण के लिए सहायता। तीसरा, स्वास्थ्य और शिक्षा प्रणालियों के लिए सहायता, विशेष रूप से वे जो चक्रवात से क्षतिग्रस्तहुई हैं। चौथा, कृषि, जिसमें अल्प और मध्यम अवधि में संभावित कमी को दूर करना शामिल है। और पांचवां, बेहतर आपदा प्रतिक्रिया और तैयारी कीदिशा में काम करना।” चिकित्सा उपकरण भी प्रदान किए गएजयशंकर ने कहा कि नुकसान के पैमाने को देखते हुए, यह स्वाभाविक था कि भारत श्रीलंका की मदद के लिए आगे आया। उन्होंने कहा कि भारत काऑपरेशन सागर बंधु दितवाह के पहले ही दिन शुरू हो गया था। उन्होंने कहा, “हमारा विमानवाहक पोत INS विक्रांत और INS उदयगिरि कोलंबो मेंमौजूद थे और उन्होंने राहत सामग्री पहुंचाई, जिसके बाद हेलीकॉप्टर तैनात किए गए।” ऑपरेशन सागर बंधु ने 1,100 टन से अधिक राहत सामग्रीपहुंचाई, जिसमें सूखा राशन, टेंट, तिरपाल, स्वच्छता किट, ज़रूरी कपड़े और पानी शुद्धिकरण किट शामिल हैं। लगभग 14.5 टन दवाएं और चिकित्साउपकरण भी प्रदान किए गए, जबकि राहत कार्यों में सहायता के लिए 60 टन उपकरण श्रीलंका लाए गए। बड़ी संख्या में सेना के इंजीनियरों नेकिलिनोची में C-17 विमान द्वारा लाए गए बेली ब्रिज का निर्माण किया। श्रीलंका की मदद करने के दूसरे तरीकों के बारे में जयशंकर ने कहा किभारत श्रीलंका में भारतीय टूरिज्म को बढ़ावा देगा क्योंकि यह द्वीप देश एक महत्वपूर्ण टूरिज्म इकोनॉमी है। “इसी तरह, भारत से फॉरेन डायरेक्टइन्वेस्टमेंट में बढ़ोतरी इस मुश्किल समय में आपकी इकोनॉमी को बढ़ावा दे सकती है। हमने पहले भी श्रीलंका का मजबूत इरादा और लचीलापनदेखा है। भारत पहले से कहीं ज़्यादा मजबूती से श्रीलंका के साथ खड़ा है,
अनुपूरक बजट कागज़ों में, किसान आज भी खाद-इलाज के लिए भटक रहा: चौ. सुनील सिंह

लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह जी ने अन्नपूरक बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहां है कि यह अनुपूरक बजट किसानों के लिए नहीं, बल्कि घोषणाओं और फाइलों के लिए है.और इलाज के लिए भटक रहाकिसान आज भी खाद, बिजली, पानी, भुगतान और इलाज के लिए भटक रहा है। 24,496.98 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश कर सरकारआंकड़ों का ढोल पीट रही है, लेकिन ज़मीन पर सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। 8.08 लाख करोड़ के मूल बजट के बावजूद आज सरकार को फिरअनुपूरक बजट लाना पड़ रहा है, यह स्वयं स्वीकारोक्ति है कि योजनाएं सही तरीके से बनी ही नहीं। सरकार इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, पावर, हेल्थ, नगरविकास, महिला-बाल कल्याण और गन्ना किसानों के नाम पर बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन सवाल यह है कि— क्या किसानों को आज भी खाद, बिजली और गन्ना भुगतान समय पर मिल रहा है? इलाज की व्यवस्था सुधरीक्या सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर, दवाएं और इलाज की व्यवस्था सुधरी है? क्या नगर विकास के नाम पर शहरों की बदहाल सड़कों, जलभराव औरगंदगी से निजात मिली है?क्या महिला और बाल कल्याण केवल बजट पुस्तिका तक सीमित नहीं रह गया है? अनुपूरक बजट इस बात का प्रमाण है कि सरकार की नीतियांजमीनी जरूरतों से कटी हुई हैं। जब तक बजट का लाभ आखिरी व्यक्ति—किसान, मजदूर, महिला और युवा—तक नहीं पहुंचेगा, तब तक ऐसे बजटकेवल कागजी अभ्यास बनकर रहेंगे।सरकार को नए बजट लाने से पहले पुराने बजट के खर्च और उसके परिणामों पर श्वेत पत्र जारी करना चाहिए। जनता अब आंकड़ों से नहीं, जवाबदेहीसे शासन का मूल्यांकन करेगी।
ज्ञान ही भारत की सबसे बड़ी ताकत, भविष्य की टेक्नोलॉजी से बनेगा 5 ट्रिलियन डॉलर का भारत बोले नितिन गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को आईआईटी बॉम्बे में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनाने के लिए ज्ञान ही सबसे शक्तिशाली हथियार है। उन्होंने जोरदेकर कहा कि किसी भी देश का भविष्य उसकी भविष्य की टेक्नोलॉजी पर निर्भर करता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘आईआईटी और उनके छात्रों का देशके विकास और प्रगति में बहुत बड़ा योगदान है। सरकार में काम करते समय अगर हमें कोई चुनौती आती है, तो हम सबसे पहले आईआईटी से संपर्ककरते हैं। आईआईटी की विश्वसनीयता इतनी अच्छी है कि हमें जो समाधान मिलता है, उसे बड़े पैमाने पर स्वीकार किया जाता है। उन्होंने छात्रों कीसराहना करते हुए कहा आप ‘ज्ञान की पूंजी’ हैं।’ भविष्य की तकनीकों पर निर्भर करताउन्होंने आगे कहा, ‘देश की प्रगति, संसाधन, टेक्नोलॉजी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण भविष्य की टेक्नोलॉजी और ज्ञान है। किसीभी देश का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि उसके पास किस तरह की भविष्य की टेक्नोलॉजी है।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को साझाकरते हुए गडकरी ने कहा कि भारत को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने का मिशन ज्ञान के आधार पर ही पूरा होगा। उन्होंने ज्ञान को परिभाषितकरते हुए कहा कि उद्यमिता, विज्ञान, टेक्नोलॉजी, रिसर्च और कौशल का सामूहिक मिश्रण ही वास्तविक ज्ञान है। उन्होंने कहा इस संचित ज्ञान को’धन’ में परिवर्तित करना ही भारत का भविष्य है और यही देश की प्रगति की असली कुंजी साबित होगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने आईआईटीबॉम्बे में कहा कि भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए ज्ञान सबसे शक्तिशालीहथियार है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी देश का भविष्य उसकी भविष्य की तकनीकों पर निर्भर करता है।
ट्रेन किराया बढ़ा, सियासी घमासान तेज! खरगे का मोदी सरकार पर हमला – रेलवे बना लूट का जरिया

रेल मंत्रालय ने रविवार को ट्रेन की टिकट के दाम को बढ़ाने का एलान किया, जिसके बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। कांग्रेसके राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे मोदी सरकार पर आम लोगों से लूट करने का आरोप लगाया है। सोमवार को उन्होंने कहा कि सरकार ने एक सालमें दूसरी बार रेल किराया बढ़ाया है और यह बढ़ोतरी केंद्रीय बजट से ठीक पहले की गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए पोस्ट में खरगे नेलिखा कि मोदी सरकार के दौर में रेलवे की हालत खराब हो गई है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अलग रेलवे बजट खत्म होने से जवाबदेहीभी खत्म हो गई है। बता दें कि रेल मंत्रालय ने रविवार को ट्रेन टिकट के दाम बढ़ाने का एलान किया। नए नियमों के मुताबिक, साधारण श्रेणी में 215 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा पर प्रति किलोमीटर 1 पैसा बढ़ाया गया है। वहीं, मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों की नॉन-एसी क्लास और सभी ट्रेनों की एसीक्लास में प्रति किलोमीटर 2 पैसे की बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद से आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति बढ़ गई है। 2024-25 में दिसंबर तक 68 प्रतिशत फंड ही खर्च हुआकांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने आगे आरोप लगाया कि सरकार प्रचार में ज्यादा और काम में कम ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि रेलवे की सुरक्षा लगातारबिगड़ रही है। एनसीआरबी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि 2014 से 2023 के बीच रेलवे हादसों में 2.18 लाख लोगों की मौतहुई है। इतना ही नहीं खरगे ने रेल सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पांच साल से इसकी बातें हो रही हैं, लेकिन यह अब तक 3 प्रतिशत से भी कम रेल मार्गों और 1 प्रतिशत से कम इंजनों में ही लागू हो पाया है। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने रेलवे मेंखाली पदों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 3.16 लाख पद खाली पड़े हैं। युवाओं को स्थायी नौकरी नहीं मिल रही और ठेके पर भर्ती बढ़ रहीहै। खरगे ने यह भी आरोप लगाया कि रेलवे में प्रशिक्षण और मानव संसाधन विकास के लिए मिले फंड का पूरा इस्तेमाल नहीं किया गया। उनकेमुताबिक, 2023-24 में सिर्फ 42 प्रतिशत और 2024-25 में दिसंबर तक 68 प्रतिशत फंड ही खर्च हुआ। 700 करोड़ रुपये का राजस्व मिलाउन्होंने लोको पायलटों को पर्याप्त आराम न मिलने और अमृत भारत योजना के तहत स्टेशन विकास में देरी का भी जिक्र किया। खरगे ने कहा कि 453 स्टेशनों के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 1 स्टेशन का ही उन्नयन हुआ है।इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि रेलवे को 2,604 करोड़ रुपये का नुकसानहुआ है, जबकि वरिष्ठ नागरिकों की रियायतें खत्म कर उनसे 8,913 करोड़ रुपये वसूले गए। खरगे ने वंदे भारत ट्रेनों की रफ्तार पर भी सवाल उठाएऔर कहा कि 160 किमी प्रति घंटे के दावे के बावजूद इनकी औसत रफ्तार सिर्फ 76 किमी प्रति घंटे है। गौरतलब है कि रेल मंत्रालय ने कल बतायाकि बढ़ा हुआ किराया 26 दिसंबर 2025 से लागू होगा। हालांकि, उपनगरीय ट्रेनों के मासिक सीजन टिकट और 215 किलोमीटर तक की साधारणयात्रा पर कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, इस किराया बढ़ोतरी से 31 मार्च 2026 तक रेलवे को करीब 600 करोड़ रुपये कीअतिरिक्त आय होगी। वहीं, जुलाई 2025 में हुई पिछली बढ़ोतरी से अब तक 700 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है।
भारत–न्यूजीलैंड FTA से खुलेगा निवेश और रोजगार का रास्ता, 20 अरब डॉलर निवेश का भरोसा बोले पीयूष गोयल

भारत की व्यापार कूटनीति इस समय तेज रफ्तार में आगे बढ़ रही है। एक ओर अमेरिका के साथ बड़ी ट्रेड डील पर बातचीत तेजी से चल रही है।जबकि दूसरी तरफ भारत ने न्यूजीलैंड के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को सफलतापूर्वक अंतिम रूप दे दिया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयलने भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर मजबूत भरोसा जताया है। उन्होंने कहा यह समझौता सिर्फ व्यापार से जुड़े आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम लोगों के जीवन पर भी सकारात्मक असर डालेगा। इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में करीब 20 अरब डॉलर केनिवेश का भरोसा दिया है। यह निवेश मैन्युफैक्चरिंग, इन्फ्रास्ट्रक्चर, सर्विस सेक्टर और इनोवेशन से जुड़े क्षेत्रों में किया जाएगा। पैमाने पर रोजगार सृजित होतेकेंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को एक प्रेस वार्ता में कहा,भारत–न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू होने के बाद भारतीय निर्यातपर शून्य शुल्क का लाभ मिलेगा। इससे किसानों, एमएसएमई, कर्मचारियों, कारीगरों, महिला-नेतृत्व वाले उद्योग और युवाओं के साथ-साथटेक्सटाइल, कपड़ा, चमड़ा और फुटवियर जैसे श्रम प्रधान उद्योगों को सीधा फायदा पहुंचेगा। इस समझौते से इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, प्लास्टिक और केमिकल जैसे सेक्टर्स के लिए भी नए अवसर खुलेंगे और भारतीय उद्योगों की वैश्विक पहुंचमजबूत होगी। मंत्री गोयल के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के नेतृत्व में तथा उनके समकक्ष मंत्री टॉडमैक्ले के सहयोग से यह अहम समझौता महज 9 महीनों के रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया है। इस समझौता के लागू होते ही भारत से होने वाले सभीनिर्यात पर न्यूजीलैंड में शून्य शुल्क लागू हो जाएगा। यानी अब भारतीय उत्पादों पर वहां कोई आयात कर नहीं लगेगा। इसका सीधा असर यह होगाकि न्यूजीलैंड के बाजार में भारतीय सामान की कीमतें घटेंगी और वे पहले से ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे। इससे खास तौर पर कपड़ा, चमड़ा, फुटवियरऔर जेम्स-ज्वेलरी जैसे श्रम प्रधान क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है, जहां बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होते हैं। दोनों में सुधार का लाभ मिलेगागोयल ने कहा, यह फायदा केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छोटे और मझोले उद्यमों, कारीगरों और महिला उद्यमियों को भी सीधालाभ मिलेगा। अब ये वर्ग बिना अतिरिक्त अड़चनों के अपने उत्पाद सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा सकेंगे। इसके साथ ही इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल, फार्मा, मशीनरी और प्लास्टिक जैसे क्षेत्रों के लिए भी नए कमाई के अवसर बनेंगे। यह कदम भारत की मैन्युफैक्चरिंग ताकत को वैश्विकमंच पर मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण साबित होगा। उन्होंने आगे कहा कि, यह एफटीए किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्णकदम है। इसके जरिए न्यूजीलैंड के बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों के लिए नए अवसर खुलेंगे। इनमें फल, सब्जियां, कॉफी, मसाले, अनाज औरप्रोसेस्ड फूड उत्पाद शामिल हैं। कृषि उत्पादकता साझेदारी, उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना और न्यूजीलैंड की उन्नत कृषि तकनीकों तक पहुंच से भारतीयकिसानों को उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार का लाभ मिलेगा, जिससे उनकी आय बढ़ेगी। शहद, कीवी और सेब जैसे बागवानी उत्पादों परकेंद्रित विशेष पहलें इस क्षेत्र को और मजबूत करेंगी और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देंगी।
असम दौरे पर पीएम मोदी के भाषणों पर बवाल, गौरव गोगोई का आरोप ‘इतिहास तोड़ा-मरोड़ा, असम की भावनाएं अनदेखी’

असम दौरे के दौरान प्रधानमंत्री के भाषणों को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी ने राज्य में अपने संबोधनों में भारतीय इतिहास का तोड़ा-मरोड़ा रूप पेश किया। गोगोई ने गुवाहाटी में कहा कि प्रधानमंत्री के भाषण कांग्रेसपर हमले और इतिहास की व्याख्या को अपने हिसाब से ढालने तक सीमित रहे। गोगोई ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने असम के लोकप्रिय गायकजुबीन गर्ग को श्रद्धांजलि नहीं दी, जबकि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने श्रद्धांजलि दी थी, परिवार से भी मिले और न्याय की मांग की थी।कांग्रेस नेता आगे यह भी कहा कि इससे असम के लोगों की भावनाओं की अनदेखी झलकती है। गोगोई ने प्रधानमंत्री के उस दावे पर आपत्ति जताई, जिसमें कहा गया था कि आजादी से पहले असम को पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा बनाने की साजिश रची गई थी और कांग्रेस भी उसमें शामिल थी।प्रधानमंत्री ने कहा था कि इस साजिश के खिलाफ गोपीनाथ ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ खड़े होकर असम की पहचान बचाई। गोगोई ने आरोपलगाया कि इस तरह की बातें इतिहास को एकतरफा ढंग से पेश करती हैं। प्रधानमंत्री निर्देशक से लेकर मुख्य अभिनेता तक की भूमिका मेंकांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री लाइट्स, कैमरा और कोरियोग्राफ्ड समारोहों में इतने व्यस्त दिखे कि आम लोगों की पीड़ा और शोक दिखाई नहींदिया। उन्होंने दावा किया कि न तो जुबीन गर्ग के परिवार से मुलाकात हुई और न ही उनके लाखों प्रशंसकों के लिए संवेदना के शब्द कहे गए। गोगोईके अनुसार, ऐसा लगा जैसे असम के लोगों का दर्द प्रधानमंत्री की नज़र से ओझल है। गोगोई ने मणिपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के युवाओंको भी प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान ऐसा ही अनुभव हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि मणिपुर के लोग एक ऐसे “नाटक” के हिस्से बने, जिसमें प्रधानमंत्रीनिर्देशक से लेकर मुख्य अभिनेता तक की भूमिका में थे। इसके उलट राहुल गांधी ने मणिपुर का दो बार दौरा कर हिंसा पीड़ितों से मुलाकात की। राहुल गांधी ने ऐसा कियागोगोई ने कहा कि पूर्वोत्तर कोई नारा नहीं, बल्कि वहां के लोगों के खून-पसीने और बलिदान से भारत की धरती मजबूत हुई है। उन्होंने यह भी कहा किपूर्वोत्तर सम्मान चाहता है और वही समर्थन पाएगा जो उसकी संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करे। असम में प्रधानमंत्री का यह दौरा बीते सप्ताहांतहुआ था, जिसके बाद यह सियासी बयानबाज़ी सामने आई। असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर असम दौरे के दौरानइतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने गायक जुबीन गर्ग को श्रद्धांजलि नहीं दी, जबकि राहुल गांधी नेऐसा किया।