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अखिलेश यादव का भाजपा पर हमला, दालमंडी डिमोलिशन और व्यापारियों पर दबाव लोकतंत्र के खिलाफ

अखिलेश यादव ने लखनऊ में भाजपा पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में लोग खुलकर कारोबार नहीं कर पा रहे हैं। इनकी नीति है किलोगों को इतना डरा दो कि वो अपनी बात न कह सकें। क्या ये कोई सरकार करती है। अरे, सबको अपनी बात कहने का हक है। सरकार की नजर अबदालमंडी पर है। एक दुकान बनाने में जमाने लग जाते हैं ये लोग पल भर में इसे तोड़ना चाहते हैं। भाजपा की बहुत संकीर्ण सोच हैं। ये साजिश कर रहीहै। ये चौड़ीकरण के नाम पर लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं। इनती सोच बहुत नकरात्मक है। किसी की जीविका छीनने का इनको अधिकारी कैसे मिलगया। ये लोग अधिकारियों के जरिए दबाव बनाते हैं। अखिलेश यादव ने कहा, दौली के सांसद और दाल मंडी के व्यापारी आए हैं। सरकार के फैसलेकी वजह से व्यापारियों पर संकट आया है। ये पॉलिटिकल डिमोलिशन है। क्योंकि वो वहां से चुनाव नहीं जीत पा रहे हैं। बीजेपी ने वाराणसी कोक्योटो बनाने का दावा किया था। लोगों को परेशान कैसे किया जाए। इस पर काम हो रहा है। पॉलिटिकल प्रोजेक्ट के लिए डिवाइड एंड रूल कीनीति अपना रही है। सिरप वाले सब पकड़े जाएंगेसरकार को ऐसे शहरों का दौरा करना चाहिए। दाल मंडी वाले दुकानदारों को दरें नहीं। दुकान तो दे देंगे, ग्राहक कहां से देंगे। बीजेपी की सोच संकीर्णहै, वो चौड़ीकरण कैसे कर रहे हैं। ये नकारात्मक सोच वाले हैं। बीजेपी अधिकारियों के माध्यम से डरना, धमकाना चाहते हैं। मॉल बेच दिया। ये बेचनेवाले लोग हैं। वरुणा का रिवरफ्रंट रोक दिया। आज मेट्रो जितनी चल रही हैं, वो सपा की देन है। वाराणसी की मेट्रो का डीपीआर हमने तैयार कियाथा। वाराणसी के मेट्रो को बीजेपी ने रोका है। अकबरनगर लखनऊ में डिमोलिशन कर दिया। अपनी जगह के लिए मनचाहा मुआवजा लिया। कईसाल आगे या कई हजार साल पीछे की बात करते है। वो समय आएगा, जब अधिकारियों से वसूला जाएगा। जनता को दुख देंगे, तो चुनाव हारेंगे।नाले पर रिवरफ्रंट बना रहे हैं। दालमंडी में नहीं जीतती है, इसलिए डिमोलिशन किया जा रहा है। सरकार जाने वाली है। मेरठ के व्यापारियों को बीजेपीने रिटर्न गिफ्ट दिया है। सपा इनको हराने के लिए पूरी तरह तैयार है। 2024 में चुनाव आयोग भी उनके साथ था। अयोध्या की जनता ने बीजेपी कोहराया। अब तक की सबसे करप्ट सरकार है। सिरप वाले सब पकड़े जाएंगे। लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का हकइससे पहले अखिलेश यादव ने कहा था कि भाजपा सरकार में प्रदेश की कानून-व्यवस्था बर्बाद हो गई है। अपराधी खुलेआम हत्याएं कर रहे हैं। लूटऔर अपहरण की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। भाजपा राज में न व्यापारी सुरक्षित है और न बेटियां। सरकार के पास भाषणों की तुकबंदी औरखोखले दावों के अलावा कुछ नहीं है। मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री तक कानून-व्यवस्था को लेकर झूठे दावे करते हैं, हालांकि जमीनी सच्चाई भाजपासरकार की पोल खोल रही है। एटा के सकीट थाना क्षेत्र में बीए प्रथम वर्ष की छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई। प्रयागराज में जार्जटाउनथाने के पास फतेहपुर में तैनात सूचना विभाग के उपनिदेशक का शव मिला। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पूरी व्यवस्था ध्वस्त कर प्रदेश को अराजकताके रास्ते पर धकेल दिया है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार कारोबारियों को इतना डरा रही है कि वे अपनी बात खुलकर नहींकह पा रहे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का हक है, और सरकार का काम डर फैलाना नहीं होना चाहिए।

राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल का पंचायती राज चुनावों में देरी पर बड़ा बयान, अस्थिरता फैलने की चेतावनी “जानें क्या है पूरा मामला”

पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में देरी पर राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल का बड़ा बयान सामने आया है। शुक्रवार को शिमला स्थित एजी ऑफिस मेंऑडिट वीक का शुभारंभ करने पहुंचे राज्यपाल ने मीडिया से बात करते हुए यह कहा राज्य चुनाव आयुक्त अनिल खाची ने आज बंद लिफाफे में मुझेरिपोर्ट सौंपी है। पंचायत चुनाव समय पर न होना चिंता का विषय। मंत्री कह रहे हैं कि समय पर चुनाव होने चाहिए, अधिकारी और सात जिलों केडीसी कह रहे हैं कि अभी चुनाव करवाना संभव नहीं। राज्यपाल ने कहा कि मंत्री बड़ा है या अधिकारी। राज्यपाल ने कहा कि अगर समय से विधानसभाचुनाव ना हो तो अस्थिरता फैल जाती है। हिमाचल में पंचायती राज चुनाव निर्वाचन आयोग और सरकार को मिलकर करने हैं। दोनों को इस बारे मेंगंभीरता से विचार करते हुए कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्री कह रहे हैं चुनाव समय से होंगे, लेकिन सात जिलों के डीसी ने चुनावकरवाने के लिए स्थिति ठीक नहीं होने का हवाला दिया है। यह दोनों बयान विरोधाभासी हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शुक्रवार सुबह हीराज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने उनसे मुलाकात की है। उन्होंने एक बंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट भी दी है। भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग की ओरअभी उन्होंने रिपोर्ट को देखा नहीं है। राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था का बिगड़ना चिंताजनक है। देवभूमि हिमाचल में इस प्रकार कीघटनाएं नहीं होनी चाहिए। सरकार प्राथमिकता के आधार पर स्थिति को संभाले। हिमाचल को देवभूमि कहा जाता है, सरकार को देवभूमि की पवित्रताको बनाए रखना चाहिए। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि वित्तीय व्यवस्था को पारदर्शी और जनहितकारी बनाने में लेखा विभाग की महत्वपूर्णभूमिका है। यह विभाग अपनी तथ्य आधारित रिपोर्ट और विभागों को वित्तीय सुझावों के जरिये लोक कल्याणकारी सुशासन की आधारशिला का कामकरता है। राज्यपाल शुक्रवार को पांचवें लेखा सप्ताह के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन भारतीयलेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग की ओर से किया गया। ऑडिट वीक 2025 का आयोजन विभाग की राष्ट्रीय लेखा एवं लेखा परीक्षा अकादमी, प्रधानमहालेखाकार (ऑडिट) और प्रधान महालेखाकार (लेखांकन एवं अनुश्रवण) द्वारा किया जा रहा है।दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ कियाराज्यपाल ने कहा कि लेखा विभाग लोकतंत्र का एक अनिवार्य स्तंभ है जो जवाबदेही, सुशासन, सार्वजनिक संस्थानों का विधि हित और जनहित मेंइस्तेमाल सुनिश्चित करता है। हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय और विकासशील राज्य की वित्तीय व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारू बनाए रखने में इसविभाग का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारे राज्य में भौगोलिक, संरचनात्मक, पर्यावरण जोखिम और आपदाओं से जुड़ी चुनौतियां अधिकजटिल है। ऐसे में ऑडिट की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती ताकि योजनाओं और परियोजनाओं का प्रभाव जमीनी स्तर पर सही रूप में नागरिकोंतक पहुंच सके। राष्ट्रीय लेखा परीक्षा एवं लेखा अकादमी (एनएएए) शिमला के महानिदेशक एस आलोक ने उद्घाटन संबोधन में बताया कि विभागद्वारा लेखा परीक्षा को आसान और कागज रहित बनाने के लिए हाइब्रिड और रिमोट ऑडिट जैसे अहम कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि ऑडिटका मतलब केवल आपत्तियां करना नहीं है बल्कि सरकारी निधि के पारदर्शी और जिम्मेदारी पूर्ण व्यय के साथ नागरिक केंद्रित एवं लक्ष्य आधारितव्यय का जरिया भी है। इससे पहले राज्यपाल ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में प्रधान महालेखाकार पुरुषोत्तम तिवारी, वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।

सोनिया विहार ऑनशोर प्रोजेक्ट दिल्ली के रिवर टूरिज़्म को नई पहचान देगा – कपिल मिश्रा बोले

परियोजना की समीक्षा के लिए उच्च–स्तरीय बैठक आयोजितदिल्ली सरकार के कला, संस्कृति, भाषा एवं पर्यटन मंत्री श्री कपिल मिश्रा की अध्यक्षता में ‘सोनिया विहार ऑनशोर सुविधा परियोजना’ की विस्तृतसमीक्षा दिल्ली सचिवालय में की गई। इस बैठक में IWAI, डीडीए, दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली पर्यटन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठकका उद्देश्य यमुना तट पर विकसित की जा रही ऑनशोर सुविधाओं और रिवर टूरिज़्म परियोजनाओं की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन करना था। रिवर टूरिज़्म कॉरिडोर और क्रूज/फेरी सर्विस की प्रगति पर गहन चर्चाबैठक में प्रमुख रूप से Onshore Facility, River Tourism Corridor तथा प्रस्तावित क्रूज और फेरी सर्विस पर हुई प्रगति की समीक्षा की गई।अधिकारियों ने आवश्यक अनुमतियों, साइट सर्वे, पर्यावरणीय मानकों और निर्माण-पूर्व गतिविधियों पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। मंत्री ने सभीविभागों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि हर गतिविधि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के पर्यावरणीय निर्देशों के अनुरूप हो। सभी विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोरबैठक में यह निर्णय लिया गया कि IWAI, दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली पर्यटन (DTTDC) के बीच इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन को और मजबूतकिया जाएगा, ताकि परियोजना तेजी से धरातल पर उतर सके। मंत्री कपिल मिश्रा ने स्पष्ट कहा कि यह एक बहु-विभागीय प्रोजेक्ट है, इसलिए सभीइकाइयों के बीच तालमेल अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिया कि काम में किसी भी प्रकार की देरी न हो और सभी कार्य समय-सीमा के भीतरउच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएँ। यमुना तट पर विकसित होंगी आधुनिक पर्यटन सुविधाएँबैठक के दौरान प्रस्तुत योजना के अनुसार, सोनिया विहार में आधुनिक ऑनशोर सुविधाओं का एक विस्तृत परिसर विकसित किया जाएगा। इसमेंटिकट काउंटर, वेटिंग हॉल, रूफटॉप रेस्तरां, सुविनियर शॉप्स, फूड ज़ोन, बच्चों के लिए प्ले जोन, एम्फीथिएटर, यमुना आरती स्थल और यमुना के मध्यस्थित म्यूज़िकल वॉटर फाउंटेन जैसे आकर्षण शामिल होंगे। यह प्रोजेक्ट न केवल दिल्ली की पर्यटन क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि यमुना को सांस्कृतिकऔर मनोरंजक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाएगा। दिल्ली के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण परियोजनापर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने परियोजना के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यमुना को दिल्ली की नई पहचान बनाना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है।उन्होंने कहा कि ‘सोनिया विहार ऑनशोर प्रोजेक्ट’ राजधानी के रिवर टूरिज़्म को नई दिशा और नई पहचान देगा। उन्होंने आगे कहा कि सभी विभागों कोमिलकर, तेज़ी से और पूरी गुणवत्ता के साथ काम करना होगा ताकि यह परियोजना निर्धारित समय में पूरी हो सके। इसे दिल्ली के भविष्य का एकमहत्वपूर्ण प्रोजेक्ट बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार इसे पूरी गति से आगे बढ़ाएगी।

हाईकोर्ट का फैसला डेढ़ लाख परिवारों के घरों में रोशनी लेकर आया – दुर्गेश पाठक

प्रस्ताव का असर हाईकोर्ट ने आप सरकार के फैसले को माना आधारदिल्ली हाईकोर्ट ने एमसीडी की बुक्ड प्रॉपर्टी को बिजली कनेक्शन देने का महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि यहवही प्रस्ताव है जिसे 2024 में आप सरकार ने एमसीडी सदन में पास किया था। हाईकोर्ट ने उसी प्रस्ताव को संज्ञान में लेते हुए उन परिवारों को बड़ीराहत दी है, जो वर्षों से बिजली के लिए संघर्ष कर रहे थे। दुर्गेश पाठक ने कहा कि यह फैसला उन लोगों की जीत है जिनका जीने का बुनियादीअधिकार लंबे समय से अधूरा था। आप सरकार की पहल 2021 में पानी, 2024 में बिजली का अधिकारअरविंद केजरीवाल सरकार ने 2021 में बुक्ड प्रॉपर्टी को पानी देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। इस कदम के बाद लोगों ने कहा कि पानी तभीसार्थक है जब घरों में बिजली भी हो। इसी मांग को समझते हुए आप सरकार ने 2024 में बिजली कनेक्शन देने का प्रस्ताव एमसीडी में पारितकराया। यही प्रस्ताव आगे चलकर हाईकोर्ट के फैसले की नींव बना और आज लाखों लोगों को राहत दे रहा है। भाजपा के शासनकाल में सीलिंग और अवैध वसूली का आरोपदुर्गेश पाठक ने बताया कि 2007 से 2022 तक एमसीडी में भाजपा की सरकार रही। इस अवधि में हजारों लोग अपनी मेहनत की कमाई से बनेछोटे–छोटे घरों में रहते थे, लेकिन भाजपा शासन ने लगभग डेढ़ लाख घरों को सील कर दिया। इन परिवारों से अवैध रूप से पैसे वसूले जाते थे औरबिजली–पानी का कनेक्शन देने की अनुमति भी नहीं दी जाती थी। आप नेताओं का आरोप है कि बुक्ड प्रॉपर्टी भाजपा के भ्रष्टाचार का बड़ा अड्डा बनचुकी थी। पानी के अधिकार ने बदली तस्वीर अब बिजली भी बना मौलिक आवश्यकता2021–22 में दिल्ली सरकार की अधिसूचना ने यह सुनिश्चित किया कि हर नागरिक को पानी का अधिकार मिले। इस अधिसूचना के बाद झुग्गियों सेलेकर अनधिकृत कॉलोनियों और बुक्ड प्रॉपर्टी तक सभी को पानी देना शुरू हुआ। लेकिन बिजली के बिना यह सुविधा अधूरी थी। जब बिल्डिंगविभाग ने एनओसी देने से इनकार किया, तब लोगों ने कोर्ट का रुख किया और आप सरकार ने एमसीडी में दोबारा संघर्ष शुरू किया। एमसीडी में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव बना राहत का रास्ता2023 में एमसीडी में आप सरकार बनने के बाद मामला आगे बढ़ा। 26 फरवरी 2024 को आप द्वारा लाया गया प्रस्ताव सदन में सर्वसम्मति से पारितहुआ, जिसमें बीएसईएस राजधानी, बीएसईएस यमुना और टाटा पावर को बुक्ड प्रॉपर्टी को बिजली कनेक्शन देने का निर्देश दिया गया। यह वहीप्रस्ताव है जिसे अब हाईकोर्ट ने वैध माना है और 1.50 लाख घरों को बिजली देने का रास्ता खोल दिया है। भाजपा पर क्रेडिट चोरी का आरोप और सीलिंग हटाने की मांगविधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला आप सरकार की दूरदर्शिता का नतीजा है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह दूसरोंके काम का क्रेडिट लेने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा को सच में जनता की चिंता है तो वह उन घरों की सीलिंग हटाकर रजिस्ट्रीकराए, तभी उसे जनता का भरोसा मिलेगा। हाईकोर्ट ने बिजली कनेक्शन की अनुमति दे दी है, अब भाजपा को आगे कदम बढ़ाना चाहिए। जनता के हित में आम आदमी पार्टी की निरंतर लड़ाईजनकपुरी वार्ड के पार्षद प्रवीण कुमार ने बताया कि गरीब और मध्यमवर्गीय लोग अपनी जिंदगी की कमाई से छोटे–छोटे मकान बनाते हैं, लेकिनभाजपा शासन में उन्हें सीलिंग और भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ा। बिजली कनेक्शन के लिए लोग वर्षों भटके। इन्हीं समस्याओं को समझते हुए आपने एमसीडी में प्रस्ताव रखा और आज हाईकोर्ट की जीत से हजारों परिवारों को राहत मिली है। आप नेताओं ने कहा कि यह संघर्ष जनता के अधिकारऔर सम्मान के लिए था और आगे भी रहेगा।

भारत बनेगा ग्लोबल ग्रोथ इंजन, स्थिर नीति, कम मुद्रास्फीति और डिजिटल सुधारों पर बोले केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को आश्वासन दिया कि भारत आने वाले वर्षों में एक स्थिर नीतिगत माहौल, निरंतर नियामक सरलीकरण, मज़बूतआर्थिक विकास और बहुत ही मध्यम मुद्रास्फीति प्रदान करता रहेगा। उन्होंने कहा कि ये स्थितियां निवेशकों के लिए आदर्श हैं। सिंगापुर में ब्लूमबर्ग न्यूइकोनॉमी फोरम में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए वैष्णव ने एक स्थिर, जिम्मेदार और नवाचार-संचालित डिजिटल और आर्थिक भविष्य केलिए भारत के दृष्टिकोण के बारे में बताया। देश के मजबूत आर्थिक बुनियादी ढांचे पर प्रकाश डालते हुए, वैष्णव ने कहा, “उच्च विकास और मध्यममुद्रास्फीति के साथ, भारत आने वाले वर्षों में एक स्थिर नीति व्यवस्था, निरंतर सरलीकरण, अच्छी वृद्धि और बहुत ही मध्यम मुद्रास्फीति प्रदान करतारहेगा – एक ऐसी स्थिति जिसका हर निवेशक इंतज़ार कर रहा है।” इसके अलावा, उन्होंने वैश्विक निवेशकों को अगले साल नई दिल्ली में होने वाले न्यूइकोनॉमी फ़ोरम में शामिल होने का निमंत्रण दिया, और वैश्विक आर्थिक परिवर्तन में एक प्रमुख चालक बनने के लिए भारत की तत्परता को रेखांकितकिया। 2025 में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति तेजी से गिरकर 0.25 प्रतिशत हो गई2025 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी 47.89 लाख करोड़ रुपये थी। यह पिछले वर्ष की इसी तिमाही के 44.42 लाख करोड़रुपये से 7.8 प्रतिशत सालाना की वृद्धि है। यह वृद्धि सेवाओं, विनिर्माण और निर्माण क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन से प्रेरित थी। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष(आईएमएफ) ने हाल ही में भारत के विकास अनुमान को संशोधित किया, इसे इस वर्ष के लिए 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया।दूसरी ओर, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2025 में भारत की खुदरा मुद्रास्फीतितेजी से गिरकर 0.25 प्रतिशत हो गई, जो वर्तमान सीपीआई श्रृंखला की साल-दर-साल सबसे कम मुद्रास्फीति है। तेज़ी से बदलती तकनीकों के साथ विकसित होने के लिए डिजाइन किया गयाउभरती डिजिटल वास्तविकताओं से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करते हुए, मंत्री ने सोशल मीडिया के अनियंत्रित प्रभाव, जिसमें डीपफेक, सिंथेटिकसामग्री और तेजी से बढ़ाई गई अफवाहें शामिल हैं, के कारण नागरिकों और संस्थानों के बीच विश्वास के क्षरण पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने ज़ोरदेकर कहा कि प्लेटफ़ॉर्म को अपने द्वारा होस्ट और प्रसारित की जाने वाली सामग्री की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए, और यह सुनिश्चित करना चाहिए किइससे व्यक्तियों, समुदायों या व्यापक सामाजिक ताने-बाने को कोई नुकसान न पहुंचे।उन्होंने डिजिटल शासन के प्रति भारत के ‘तकनीकी-कानूनी’ दृष्टिकोण की व्याख्या करते हुए कहा कि हाल ही में अधिसूचित डेटा संरक्षण अधिनियमसिद्धांत-आधारित है, जिसे नवाचार को बाधित किए बिना तेज़ी से बदलती तकनीकों के साथ विकसित होने के लिए डिजाइन किया गया है।

अनिल अंबानी ग्रुप पर ईडी की सबसे बड़ी कार्रवाई, 1,400 करोड़ की नई अटैचमेंट, कुल जब्ती 9,000 करोड़ के पार

ईडी ने अनिल अंबानी और उनकी रिलायंस ग्रुप की कंपनियों से जुड़े परिसंपत्तियों पर एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 1,400 करोड़ रुपये कीनई अस्थायी अटैचमेंट की है। सूत्रों के मुताबिक, ताजा कदम के बाद इस मामले में जब्त संपत्तियों का कुल मूल्य बढ़कर लगभग 9,000 करोड़ रुपयेहो गया है। एजेंसी ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निरोध कानून (पीएमएलए) के तहत की है। अटैच की गई संपत्तियां नवी मुंबई, चेन्नई, पुणे औरभुवनेश्वर में स्थित बताई जा रही हैं। इससे पहले एजेंसी ने इसी जांच के हिस्से के रूप में 7,500 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की थीं। यह जांचरिलायंस ग्रुप की विभिन्न इकाइयों में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी है, जिनका नेतृत्व अनिल अंबानी करते हैं। म्यूचुअल फंडों में निवेश करने के लिए किया गयाइस महीने की शुरुआत में, एजेंसी के विशेष कार्य बल ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड औररिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामलों की चल रही जांच के सिलसिले में पीएमएलए के तहत नवी मुंबई में धीरूभाई अंबानीनॉलेज सिटी (डीएकेसी) में 4,462.81 करोड़ रुपये मूल्य की 132 एकड़ से अधिक जमीन कुर्क की थी। धन शोधन की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 406 और 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (2) सहपठित 13 (1) (डी) के तहत दर्ज एफआईआर से उत्पन्न हुई है, जिसमें आरकॉम, अनिल अंबानी और अन्य का नाम शामिल है।ईडी के अनुसार, आरकॉम और उसकी समूह कंपनियों ने 2010 से 2012 के बीच घरेलू और विदेशी दोनों तरह के ऋण लिए, जिनकी कुल बकायाराशि 40,185 करोड़ रुपये थी। पांच बैंकों ने तब से समूह के खातों को धोखाधड़ी वाला घोषित कर दिया है। जांच से पता चला है कि एक संस्थाद्वारा लिए गए ऋणों का इस्तेमाल समूह की अन्य कंपनियों के ऋणों को चुकाने, संबंधित पक्षों को हस्तांतरित करने, या ऋण शर्तों का उल्लंघन करतेहुए म्यूचुअल फंडों में निवेश करने के लिए किया गया।कुल मूल्य बढ़कर लगभग 9,000 करोड़ रुपये हो गयाएजेंसी ने आरोप लगाया कि 13,600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ऋणों को सदाबहार बनाने के लिए डायवर्ट की गई, 12,600 करोड़ रुपयेसंबंधित पक्षों को दिए गए, और लगभग 1,800 करोड़ रुपये सावधि जमा और म्यूचुअल फंडों में निवेश किए गए, जिन्हें बाद में समाप्त कर समूह कीसंस्थाओं को हस्तांतरित कर दिया गया। ईडी ने बिल डिस्काउंटिंग तंत्र के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग और विदेशी धन प्रेषण के माध्यम से विदेशों में धनकी कथित हेराफेरी का भी पता लगाया। एजेंसी ने वित्तीय अपराध के मामलों को आगे बढ़ाने और यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धतादोहराई कि अपराध से प्राप्त धन की वसूली की जाए व उसे सही दावेदारों को वापस किया जाए। ईडी ने पीएमएलए के तहत अनिल अंबानी समूह सेजुड़ी नवी मुंबई, चेन्नई, पुणे और भुवनेश्वर स्थित संपत्तियों को अटैच किया है। सूत्रों के मुताबिक, ताजा कदम के बाद इस मामले में जब्त संपत्तियों काकुल मूल्य बढ़कर लगभग 9,000 करोड़ रुपये हो गया है।

बंगाल में SIR पर सियासी तूफ़ान ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को लिखा कड़ा पत्र, बीएलओ की मौत को बताया ‘असहनीय दबाव’ का नतीजा

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले जारी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान पर सियासी बवाल मचाहुआ है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा कि वर्तमान एसआईआर न केवल बिना योजनाका, अराजक, बल्कि खतरनाक भी है। उन्होंने कहा कि यह चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनावआयोग को लिखे पत्र में कहा कि एसआईआर के ‘कुप्रबंधन’ की मानवीय कीमत अब असहनीय है। ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआरको रोकने की मांग पर जोर देते हुए हाल ही में एक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) की आत्महत्या के मामले को उठाया। संबंध में स्पष्टता की कमीममता बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया में कथित कुप्रबंधन को लेकर चुनाव आयोग को लिखे पत्र में कहा कि मुझे तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई की उम्मीदहै। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बुनियादी तैयारियों, पर्याप्त योजना और स्पष्ट संचार के अभाव ने बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को पंगु बनादिया है। पश्चिम बंगाल की सीएम ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल के सीईओ धमकी दे रहे हैं और एसआईआर में लगे बीएलओ को अनुचितकारण बताओ नोटिस जारी कर रहे हैं। अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि प्रशिक्षण में गंभीर कमी और प्रक्रिया के लिए आवश्यक अनिवार्य दस्तावेजों केसंबंध में स्पष्टता की कमी के कारण यह प्रक्रिया संरचनात्मक रूप से अस्थिर है। एसआईआर प्रक्रिया की वजह से वह काफी मानसिक तनाव मेंममता बनर्जी ने जलपाईगुड़ी में 48 वर्षीय बीएलओ शांति मुनि इक्का की आत्महत्या को असहनीय दबाव का नतीजा बताया। उन्होंने दावा किया किएसआईआर की वजह से राज्य में अब तक 28 लोगों की मौत हो चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शांति मुनि अपने घर के सामने दो पेड़ों केबीच एक बांस पर फांसी के फंदे से झूलती मिली थीं। शांति के पति ने दावा किया है कि एसआईआर प्रक्रिया की वजह से वह काफी मानसिक तनावमें था। उन्होंने कहा कि एसआईआर के फॉर्म बंगाली भाषा में थे, जिसे वह पढ़ नहीं सकती थी।

राष्ट्रपति–राज्यपाल की शक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, विधेयकों पर मंजूरी की समयसीमा तय नहीं कर सकती न्यायपालिका

सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को राष्ट्रपति के उस संदर्भ पर अपना फैसला सुनाया है, जिसमें पूछा गया था कि क्या कोई सांविधानिक अदालत, राज्यविधानसभाओं से पारित विधेयकों को मंजूरी देने के लिए राज्यपालों और राष्ट्रपति के लिए समय-सीमा तय कर सकती है। इस मामले में मुख्यन्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर की संविधान पीठ ने 10 दिनों तक दलीलें सुनीं और 11 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति और राज्यपाल को राज्यविधानसभा से पारित विधेयकों पर अनुमोदन देने के लिए न्यायपालिका कोई समयसीमा तय नहीं कर सकती। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई कीअगुवाई वाली संविधान पीठ ने राष्ट्रपति की तरफ से अनुच्छेद 143 के तहत भेजे गए 14 संवैधानिक प्रश्नों पर अपनी राय देते हुए कहा कि यह विषयसंवैधानिक पदाधिकारियों के विवेक और संघीय ढांचे की मर्यादा से जुड़ा है। अदालत ने माना कि विधायी प्रक्रिया में राष्ट्रपति और राज्यपाल कीभूमिका ‘संवैधानिक कर्तव्य’ है, पर न्यायिक हस्तक्षेप के जरिए इसकी समय सीमा तय नहीं की जा सकती। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी रेखांकितकिया कि अत्यधिक देरी लोकतांत्रिक शासन की आत्मा को क्षति पहुंचाती है, इसलिए इन पदों से अपेक्षा है कि वे उचित समय के भीतर निर्णय लें। ऐसी कोई समय सीमा तय नहींराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मई में संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट से राय मांगी थी। उन्होंने पूछा था कि क्या न्यायालय यह तय करसकता है कि राष्ट्रपति या राज्यपाल को बिलों पर कब तक निर्णय लेना चाहिए। राष्ट्रपति ने अपने पांच पन्नों के संदर्भ पत्र में 14 सवाल रखे हैं, जिनका जवाब सुप्रीम कोर्ट से मांगा गया है। यह सवाल मुख्य रूप से अनुच्छेद 200 और 201 से जुड़े हैं, जिनमें राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियोंका जिक्र है। 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु विधानसभा से पास हुए बिलों पर फैसला देते हुए पहली बार यह कहा था कि राष्ट्रपति कोराज्यपाल की तरफ से भेजे गए किसी भी बिल पर तीन महीने के भीतर निर्णय लेना होगा। यह फैसला अपने आप में ऐतिहासिक माना गया क्योंकिइससे पहले ऐसी कोई समय सीमा तय नहीं थी।

प्रधानमंत्री मोदी की जी20 शिखर सम्मेलन यात्रा, वैश्विक आर्थिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर भारत की सक्रिय भूमिका

दक्षिण अफ्रीका में होने जा रहे जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन से पहले भारत सरकार ने इस दौरे को वैश्विक आर्थिक और सामरिक मुद्दों पर गहराई सेचर्चा का महत्वपूर्ण अवसर बताया है। विदेश मंत्रालय के सचिव (ईआर) सुधाकर दलेला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 से 23 नवंबर तकजोहांसबर्ग की यात्रा करेंगे, जहां वे जी20 नेताओं की बैठक में भाग लेंगे। सुधाकर दलेला ने बताया कि यह जी20 सम्मेलन पहली बार अफ्रीकी धरतीपर आयोजित हो रहा है। राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के निमंत्रण पर होने वाला यह कार्यक्रम भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2023 मेंसफल अध्यक्षता के बाद भारत अपनी प्राथमिकताओं की निरंतरता इस मंच पर रख सकेगा। यह प्रधानमंत्री मोदी का दक्षिण अफ्रीका का चौथाआधिकारिक दौरा होगा। इससे पहले वे 2016 में द्विपक्षीय दौरे पर और 2018 व 2023 में ब्रिक्स सम्मेलनों के लिए गए थे। पर्यावरणीय असुरक्षाओं को कम करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगीदलेला ने कहा कि जी20 अब अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर विचार-विमर्श का प्रमुख मंच बन चुका है। यह समूह दुनियाकी 85 प्रतिशत जीडीपी और लगभग तीन-चौथाई आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने बताया कि इस मंच पर ऐसे विषयों पर विशेष फोकसकिया जाएगा जिनका सीधा असर वैश्विक स्थिरता पर पड़ता है। इसमें सतत विकास लक्ष्यों पर प्रगति, वैश्विक प्रशासनिक संस्थाओं में सुधार, पर्यावरणऔर जलवायु चुनौतियों का समाधान तथा डिजिटल खाई को पाटने जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं।सचिव दलेला ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका ने अपने जी20 एजेंडा के लिए चार प्रमुख प्राथमिकताएं तय की हैं। इनमें आपदा प्रबंधन क्षमता कोमजबूत करना, कम आय वाले देशों के कर्ज संकट को दूर करना, न्यायसंगत ऊर्जा परिवर्तन के लिए वित्त जुटाना और समावेशी वृद्धि के लिए महत्वपूर्णखनिजों का उपयोग बढ़ाना शामिल है। उन्होंने कहा कि यह प्राथमिकताएं वैश्विक आर्थिक और पर्यावरणीय असुरक्षाओं को कम करने में निर्णायकभूमिका निभाएंगी। मजबूत करने का अवसर माना जा रहादलेला के मुताबिक भारत इस सम्मेलन में अपनी अध्यक्षता के दौरान उठाए गए मुद्दों को आगे बढ़ाएगा। भारत विशेष रूप से विकासशील देशों कीआवाज को मजबूत करने, डिजिटल सार्वजनिक ढांचा मॉडल को साझा करने, जलवायु न्याय की अवधारणा को मजबूती देने और वैश्विक संस्थाओं मेंसमावेशी सुधार की मांग को प्रमुखता से उठाएगा। भारत का मानना है कि टिकाऊ विकास और आर्थिक संतुलन तभी संभव है, जब वैश्विक मंचों परसमान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो। दलेला ने कहा कि प्रधानमंत्री की यह यात्रा भारत-दक्षिण अफ्रीका संबंधों को भी मजबूत करेगी। दोनों देश ब्रिक्स, जी20 और ग्लोबल साउथ जैसे मंचों पर समान सोच साझा करते हैं। सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय मुलाकातों, बहुपक्षीय चर्चाओं और वैश्विकघोषणाओं के जरिए भारत अपनी कूटनीतिक सक्रियता को और बढ़ाएगा। यह दौरा अंतरराष्ट्रीय सहयोग, स्थिरता और समावेशी विकास के भारत केदृष्टिकोण को मजबूत करने का अवसर माना जा रहा है।

लखनऊ में शुरू हो रहा 19वां राष्ट्रीय जंबूरी, 40 हजार प्रतिभागियों के स्वागत की तैयारियां पूरी

राजधानी लखनऊ में 23 से 29 नवंबर के बीच 19वें राष्ट्रीय जंबूरी का आयोजन किया जा रहा है। डिफेंस एक्सपो में चलने वाले स्काउट गाइड के इससात दिवसीय आयोजन में देश भर से 40 हजार से ज्यादा मेहमान लखनऊ आने वाले हैं। बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी टीमके साथ तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने खुद निरीक्षण कर तैयारियों को परखा। आयोजन में 30 हजार स्काउट गाइड कैडेट तो करीब 10 से 15 हजार अन्य लोग होंगे। मेहमानों के स्वागत व ठहरने के लिए वृंदावन योजना स्थित डिफेंस एक्सपो ग्राउंड में बड़े स्तर पर टेंट सिटी बनाई जा रहीहै। देश के विभिन्न राज्यों से 30 हजार से ज्यादा प्रतिभागी, 2000 विदेशी प्रतिभागी, पांच हजार अधिकारी व अन्य स्टाफ भी शामिल हो रहे हैं। योगी आदित्यनाथ ने खुद आयोजनस्थल का निरीक्षण कियाकुल संख्या 40 हजार पार होने की उम्मीद है। इनके लिए 4500 से ज्यादा टेंट, 1600 शौचालय, 1600 स्नानागर, 35 हजार लोगों की क्षमता काएरिना स्टेडियम, 100 बिस्तर का अस्पताल, 15 डिस्पेंसरी बनाई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, टेंट सिटी व अन्य निर्माण के लिए 45 करोड़ रुपयेखर्च किए जा रहे हैं। इसके अलावा आसपास के होटल व बाजारों में भी रौनक छाने लगी है। डिफेंस एक्सपो मैदान में नागरिक सुविधाओं के अलावाभव्य जंबूरी मेला भी लगेगा। इसके लिए 100 दुकानों का जंबूरी बाजार बन रहा है। इस बाजार के संचालक पवन गुप्ता ने बताया कि 100 में 85 स्टॉलनुमा दुकानों की बुकिंग हो गई है। शेष 15 की बुकिंग एक-दो दिन में हो जाएगी। फूड कोर्ट में 7000 लोगों के बैठने की व्यवस्था रहेगी। स्टॉलसे ही 500 परिवारों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। राजधानी लखनऊ में 23 नवंबर से चलने वाले सात दिवसीय राष्ट्रीय जंबूरी में करीब 40 हजार लोग शामिल होंगे। बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद आयोजनस्थल का निरीक्षण किया।