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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि उनके प्रतिनिधि ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि ये चर्चाएं सक्रिय रूप से जारी हैं और इनसे सभी के लिए बहुत अच्छे नतीजे निकल सकते हैं। ट्रंप के इस बयान से संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक जुड़ाव बना हुआ है। अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने भी इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत चल रही है। विटकॉफ ने यह बात ट्रंप के गोल्फ क्लब में एक कार्यक्रम के दौरान कही। उनका कहना है कि इस बातचीत का मकसद क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए संभावित रास्तों की तलाश करना है। हालांकि, ट्रंप का यह ताजा रुख उनके पिछले बयानों से थोड़ा अलग है। एक दिन पहले उन्होंने ईरान के प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि वह कल्पना भी नहीं कर सकते कि ईरान का प्रस्ताव स्वीकार करने लायक होगा। ट्रंप के अनुसार, ईरान ने मानवता के खिलाफ किए गए अपने कामों की अभी तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है। ट्रंप ने एक फोन कॉल के दौरान भी दोहराया कि वह ईरान के प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ईरान समझौता तो करना चाहता है, लेकिन उनकी शर्तें ऐसी हैं जिन्हें माना नहीं जा सकता। ट्रंप ने यह भी कहा कि उनका सैन्य अभियान बहुत सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है।

परमाणु मुद्दे से जुड़ी कोई बात शामिल नहीं
दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि उन्हें पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका का जवाब मिल गया है। ईरान इस समय अमेरिका के नजरिए की समीक्षा कर रहा है और अंतिम फैसला होने के बाद अपनी प्रतिक्रिया देगा। बघाई ने साफ किया कि ईरान का 14-सूत्रीय प्रस्ताव केवल क्षेत्र में युद्ध खत्म करने के लिए है। इसमें परमाणु मुद्दे से जुड़ी कोई बात शामिल नहीं है।

आंतरिक शक्ति पर भरोसा करते
ईरान का मुख्य ध्यान इस समय लेबनान सहित पूरे क्षेत्र में लड़ाई रोकने पर है। बघाई ने उन खबरों को भी खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगें हटाने की बात है। उन्होंने कहा कि ऐसी खबरें कुछ मीडिया संस्थानों ने मनगढ़ंत तरीके से फैलाई हैं। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी दबाव या समय सीमा के तहत बातचीत नहीं करेगा। उनके प्रस्तावित ढांचे के अनुसार, पहले लड़ाई रुकनी चाहिए और फिर 30 दिनों के भीतर सभी बारीकियों पर चर्चा होनी चाहिए। सुरक्षा की गारंटी के मुद्दे पर बघाई ने कहा कि वे केवल दूसरे पक्ष के वादों पर नहीं, बल्कि अपनी आंतरिक शक्ति पर भरोसा करते हैं।

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