
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 11 वर्षों की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि मोदी सरकार ने एकदशक से अधिक समय तक विदेश यात्राओं और अंतरराष्ट्रीय छवि निर्माण में ऊर्जा झोंकी, लेकिन जब आज भारत को विश्व समुदाय के सहयोग औरसमर्थन की सबसे अधिक आवश्यकता है, तब वह समर्थन नज़र नहीं आ रहा है।
सुप्रिया श्रीनेत ने अपने वक्तव्य में कहा – 11 साल से नरेंद्र मोदी जी इस देश के प्रधानमंत्री हैं। इस दौरान उन्होंने विदेशी दौरे, ग्लोबल इवेंट्स और मित्रराष्ट्रों के साथ रिश्ते बनाने पर विशेष जोर दिया। लेकिन आज जब देश संकट की घड़ी में है, तब वही राष्ट्र हमारा साथ देने की बजाय भारत से दूरी बनारहे हैं।
अमेरिका की यात्रा चेतावनी बनी बहस का केंद्र – सुप्रिया श्रीनेत ने अमेरिका द्वारा भारत के लिए जारी की गई लेवल-2 ट्रैवल एडवाइजरी को लेकर भीगंभीर चिंता जताई। इस एडवाइजरी में अमेरिका ने कहा है कि-महिलाएं अकेले भारत यात्रा पर न जाएं।, अमेरिकी सरकारी कर्मचारी बिना अनुमतिभारत नहीं आ सकते।, भारत में रेप और यौन हमलों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो टूरिस्ट स्थलों तक में हो सकते हैं। यह चेतावनी ऐसे समय में आईहै जब भारत सरकार दावा करती है कि भारत अब विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर है। लेकिन अमेरिका का यह कदम न केवल भारत की अंतरराष्ट्रीय छविको नुकसान पहुंचाता है, बल्कि देश में महिलाओं की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
पाकिस्तान को लाल कालीन, भारत को चेतावनी? – सुप्रिया श्रीनेत ने अमेरिका के दोहरे रवैये पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि आज जबअमेरिका भारत को महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चेतावनी दे रहा है, उसी समय वह पाकिस्तान के जनरलों का स्वागत कर रहा है, उनके लिए लालकालीन बिछा रहा है। क्या यही है मोदी जी की 11 साल की विदेश नीति की उपलब्धि?
‘Howdy Modi’, ‘नमस्ते ट्रम्प’ और खोखली उम्मीदें- सुप्रिया श्रीनेत ने मोदी सरकार के भव्य विदेशी इवेंट्स का भी जिक्र करते हुए कहा-‘Howdy Modi’, ‘नमस्ते ट्रम्प’, और ‘अबकी बार, ट्रम्प सरकार’ जैसे इवेंट्स पर करोड़ों खर्च किए गए। लेकिन सवाल यह है कि आज उस खर्च और दिखावे सेहमें क्या मिला? उन्होंने पूछा कि क्या ये सारे आयोजन केवल प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत ब्रांडिंग के लिए थे या भारत के सामरिक हितों के लिए?
सुप्रिया श्रीनेत का बयान सिर्फ विदेश नीति की आलोचना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि अगर हमारी प्राथमिकताएं केवल इवेंट और छवि निर्माणतक सीमित रहीं, तो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की विश्वसनीयता और साख को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। भारत को केवल इमेज नहीं, बल्किइम्पैक्ट की जरूरत है — और वह तब आएगा जब विदेश नीति जनहित और राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर संचालित होगी, न कि निजी ब्रांडिंग के इवेंट्ससे।