अमेरिका की ट्रंप सरकार यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की पर इस्तीफे का बना रही दबाव, आखिरकार कौन ले सकता है जेलेंस्की की जगह?

ट्रंप प्रशासन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज ने कहा कि किसी भी व्यावहारिक वार्ता के लिए यूक्रेन को क्षेत्रीय रियायतें देनी होगीं. औरजेलेंस्की की का नेतृत्व शांति समझौते में बांधा बन सकता है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रमुख सहयोगियों ने सुझाव दिया है. कि अगरयूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की रुस के साथ शांति वार्ता करने से इनकार करते हैं. तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए यह विवादस्पद मांग वॅाशिंगटनमें हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद आई है. इस बैठक में ट्रंप और उपराष्ट्रपति जे.डी वेंस की जेलेंस्की के साथ तीखी बहस हो गई बैठक में जेलेंस्कीकी के रुस के साथ बातचीत से इनकार करने और अमेरिकी समर्थन के प्रति कथित आभार की कमी को लेकर तीखी बहस हुई है. जिसके बादप्रस्तावित खनिज सौदे पर हस्ताक्षर भी नहीं हो सके. ट्रंप प्रशासन की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्टज ने कहा कि किसी भी व्यावहारिक वार्ताके लिए यूक्रेन को क्षेत्रीय रियायतें देनी होगीं. और जेलेंस्की का नेतृत्व शांति समझौते में बाधा बन सकता है. अमेरिकी स्पीकर ने की व्यक्त की रायअमेरिकी हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने इसी तरह की राय व्यक्त की है. और उन्हें तो समझदारी दिखानी होगी और कृतज्ञता के साथ वार्ता की मेजपर लौटना होगा या फिर किसी और देश की बागडोर संभालती होगी. अमेरिका दबाव ही जवाब में जेलेंस्की की ने ब्रिटिश मीडिया से कहा मुझे हटानाइतना आसान नहीं होगा. सिर्फ चुनाव करना काफी नहीं है आपको यह भी सुनिश्चित करना होगा कि चुनाव ना लड़ सकूं. यह थोड़ा कठिन होगा इसकामतलब है. कि मुझे ही बात करनी होगी उन्होंने यह भी कहा कि अगर यूक्रेन को नाटो की सदस्यता मिल जाती है वह राष्ट्रपति पद छोड़ने के लिए तैयारहै. रिपब्लिकन सीनेटर लिशा ने जताई चिंताजेलेंस्की से इस्तीफे की मांग ने वैश्विक स्तर प्रतिक्रियाएं बटोरी है. अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने इस प्रस्ताव की आलोचना करते हुए इसे भयानकविचार बताया और कहा कि यूक्रेन के लोकतंत्र का भविष्य बाहरी ताकतों द्वारा तय नहीं किया जाना चाहिए. रिपब्लिकन सीनेटर लिशा ने भी चिंताजाताई है. अमेरिका का यूक्रेन पर दबाव कहीं रूस के पक्ष में न चला जाए. जिससे अमेरिका की वैश्विक छवि को नुकसान हो सकता है. डेमोक्रेटिकसीनेटेर किस मर्फी ने ट्रंप प्रशासन पर हमला बोलते हुए कहा व्हाइट हाउस अब क्रेमिलन का एक अंग बन चुका है.
कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा हाईकमान करेगा मतभेदों का फैसला,बीजेपी का आरोप कुर्सी के पीछे है लड़ाई

कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने डीके शिवकुमार को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. खड़गे ने कहा कि उन्हें एक न एक दिन कड़ी मेहनत का इनाममिलेगा. आज या कल वे सीएम पद की बागडोर संभालेंगे. वीरप्पा मोहिली ने शिवकुमार के पक्ष में बयान दिया. उन्होंने कहा कि कुमार को सीएम पदसे बने से कोई नहीं रोक सकता. लेकिन इसको लेकर भाजपा ने निशाना साधा है. कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री बनने कीवीरप्पा मुइली के दावे पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पुनावाला ने तंज कसा है. उन्होंने इसे कांग्रेस में कुर्सी के लिए आंतरिक लड़ाई बताया है. हालांकि डीके शिवकुमार ने वीरप्पा मुइली के बयान पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उन्होंने इसे मोइली की व्यक्तिगत राय का करार दिया. शिवकुमार को राज्य का मुख्यमंत्री बनने से कोई नहीं रोक सकता. क्योंकि इस मामले में पहले ही तय कर लिया गया है. किशोर कुमार का मुख्यमंत्रीपद संभालना केवल समय की बात है. क्योंकि ऐसा होना तय है इस पर भाजपा नेता शहजाद पुणे वाला ने कहा कि कांग्रेस सत्ता और राजनीति केलिए लड़ती है. लेकिन लोगों को भूल जाते हैं कर्नाटक में अंदरूनी लड़ाई चल रही है. कांग्रेस अंदर से टूट चुकी है और उन्हें बस सत्ता की परवाह है. शिवकुमार करते थे सिद्दरमैया पर हमलाइससे पहले कभी सिद्दारमैया डीके शिवकुमार पर हमला करते हैं. कभी शिवकुमार सिद्धारमैया और खड़गे जी पर हमला करते हैं. इस बीच कौन कर्नाटकके मुख्यमंत्री डीके कुमार ने कांग्रेस नेता एवं वीरप्पा मोहिनी ने उनके बारे में दिए गए बयान के बारे में पूछे जाने पर टिप्पणी करने से मना कर दिया. डीके कुमार ने इसको लेकर कहा इस पर टिप्पणी पर वह कुछ नहीं करना चाहते हैं. मैं कार्यकर्ताओं की बैठक में था. मैं सभी बूथ अध्यक्ष को शपथदिलाने गया था. क्योंकि मुझे पार्टी अध्यक्ष के तौर पर पूरे राज्य का दौरा करना है. मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि किसी को बोलना नहीं चाहिए. मैंइसका पालन करूंगा. इससे पहले कर्नाटक के मंत्री प्रियांक ने डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की अटकलें पर कहा न तो शिवकुमार और न किसीऔर के दावा किया है. क्यों आज या कल मुख्यमंत्री पद की बागडोर संभालेंगे. उन्होंने कहा कि उन्हें उनकी कड़ी मेहनत का इनाम मिलेगा. हाई कमानइसका फैसला करेगा दूसरी ओर सिद्दामैया के करीबी माने जाने वाले कई मंत्री और नेताओं ने किसी भी नेतृत्व परिवर्तन की संभावना को खारिज करतेहुए दावा किया है. कि मौजूदा मुख्यमंत्री पद पर बनी रहेंगे. और पूरे पांच साल कार्य संभारेंगे. मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने कहा कि वह कांग्रेस आलाकमानके निर्देशों का पालन करेंगे. जिसका निर्णय राज्य में नेतृत्व परिवर्तन पर अंतिम है. मोहिली या कोई और क्या कहता है. यह महत्वपूर्ण नहीं हैआलाकमान जो कहता है वहीं अंतिम है.
पंजाब में किसान आंदोलन तेज, बैठक के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान नाराज होकर हुए बाहर, किसानों का विरोध जारी

पंजाब में किसानों द्वारा अपनी मांगों को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है। इसी बीच, सोमवार को संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) राजनीतिकऔर मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच चंडीगढ़ में करीब दो घंटे तक बैठक चली, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। बैठक के दौरान मुख्यमंत्रीभगवंत मान बीच में ही उठकर चले गए, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई। प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि बैठक के दौरान मुख्यमंत्री गुस्सा हो गए थे और इसी कारण बैठक बीच में छोड़ दी। सीएम भगवंत मान का पक्षमंगलवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने बैठक इसलिए समाप्त की क्योंकि किसान नेताओं ने बातचीत केसाथ-साथ विरोध प्रदर्शन जारी रखने की बात कही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के कारण राज्य को आर्थिक नुकसान हो रहा है, और इसेलगातार जारी रखना सही नहीं है। प्रदर्शनों पर मुख्यमंत्री की चिंतामुख्यमंत्री मान ने राज्य में ‘रेल रोको’ और ‘सड़क रोको’ जैसे विरोध प्रदर्शनों को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि इन प्रदर्शनों से पंजाबको भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है और यह राज्य की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब धीरे-धीरे “धरना प्रदेश” बनता जारहा है। सीएम की चेतावनी – “कार्रवाई करने से नहीं डरता”भगवंत मान ने कहा कि बतौर मुख्यमंत्री उन्हें 3.5 करोड़ जनता के हितों की रक्षा करनी होगी। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपने विरोध केतरीके पर पुनर्विचार करें। उन्होंने कहा— “मेरी नरमी को कमजोरी मत समझिए। अगर जरूरत पड़ी तो मैं कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटूंगा।” बैठक का घटनाक्रममुख्यमंत्री ने बताया कि बैठक के दौरान उन्होंने किसानों से पूछा कि क्या वे अगले दिन (5 मार्च) भी प्रदर्शन जारी रखेंगे। जब किसानों ने हां में जवाबदिया, तो उन्होंने बैठक को निरर्थक बताते हुए बीच में ही छोड़ दिया। अगर आप पहले से ही तय कर चुके हैं कि प्रदर्शन जारी रहेगा, तो फिर बैठक का क्या फायदा? मैं बैठक से चला गया और उन्हें कहा कि वे अपनामोर्चा जारी रख सकते हैं।” किसान नेताओं का दावा – सीएम ने दिखाई नाराजगी वहीं, किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान असामान्य रूप से गुस्से में थे। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने इससे पहलेकिसी हाई-लेवल मीटिंग में ऐसा गुस्सा नहीं देखा। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें उकसाने की कोशिश की।
अबू आजमी के औरंगजेब पर बयान से मचा सियासी घमासान, दी सफाई – कहा, ‘अगर किसी को ठेस पहुंची तो माफी मांगता हूं’

समाजवादी पार्टी के नेता अबू आसिम आजमी के औरंगजेब को लेकर दिए गए बयान के बाद से राजनीतिक माहौल गरम है। उनके इस बयान कीआलोचना हो रही है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की गई है। बढ़ते विवाद के बीच आजमी ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने छत्रपतिशिवाजी महाराज या संभाजी महाराज के खिलाफ कुछ भी अपमानजनक नहीं कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके शब्दों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने वही बातें कही हैं, जो इतिहासकारों और लेखकों ने औरंगजेब केबारे में लिखी हैं। अगर उनके बयान से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची है, तो वह बिना शर्त माफी मांगते हैं और अपने बयान को वापस लेते हैं। शिवाजी और संभाजी महाराज पर टिप्पणी से इनकारअबू आजमी ने कहा कि वह शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज के खिलाफ कुछ भी कहने की कल्पना भी नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी कहा किप्रशांत कोराटकर और राहुल सोलापुरकर ने शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज को लेकर जो बातें कहीं हैं, उस पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।कानूनी कार्रवाई और अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएँमहाराष्ट्र के ठाणे में अबू आजमी के खिलाफ औरंगजेब पर दिए बयान को लेकर केस दर्ज किया गया है। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी और उदित राज नेभी इस मुद्दे पर अपने विचार रखे हैं। राशिद अल्वी ने कहा कि औरंगजेब ने जहां मंदिरों को नुकसान पहुंचाया, वहीं उसने मंदिरों को दान भी दिया था। उन्होंने सवाल उठाया कि 500 सालबाद इस मुद्दे को उठाने की प्रासंगिकता क्या है और क्या यह सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है। कांग्रेस नेता उदित राज ने अबू आजमी के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इतिहास में बड़े शासकों द्वारा छोटे शासकों पर अत्याचार किएजाते थे, और केवल औरंगजेब को निशाना बनाना सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हिन्दू शासकों में भी कई क्रूर राजा हुए हैं, लेकिन सिर्फऔरंगजेब पर ध्यान केंद्रित करना गलत है।औरंगजेब पर अबू आजमी का बयानअबू आजमी ने कहा था कि वह औरंगजेब को क्रूर, अत्याचारी या असहिष्णु शासक नहीं मानते। उन्होंने दावा किया कि फिल्मों और अन्य माध्यमों सेमुगल शासकों की छवि को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। उनके इस बयान के बाद से राजनीतिक हलकों में बवाल मच गया है और विभिन्नदलों के नेता इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
यूपी विधानसभा में सीएम योगी का सपा पर हमला, महाकुंभ की सफलता, संभल के धार्मिक स्थलों और सुरक्षा व्यवस्था पर दिया जोर

यूपी विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने महाकुंभके सफल आयोजन को रेखांकित करते हुए कहा कि यह एक चमत्कारिक आयोजन था, जिसमें 66 करोड़ श्रद्धालु शामिल हुए और बिना किसीअपराध की घटना के सुरक्षित घर लौटे। सीएम योगी ने कहा कि महाकुंभ की गूंज न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है और इससे देशकी अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। संभल के धार्मिक स्थलों को पुनः खोजने का दावाअपने संबोधन के दौरान सीएम योगी ने संभल जिले का जिक्र करते हुए कहा कि एक साजिश के तहत वहां के 68 तीर्थ स्थलों और 19 कूपों (प्राचीनजलस्रोतों) की पहचान मिटाने की कोशिश की गई थी। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने इन 68 तीर्थों में से 54 को फिर से खोज निकाला और19 कूपों की भी पहचान की। सांप्रदायिकता के आरोपों का दिया जवाबसीएम योगी ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि सरकार को सांप्रदायिक कहने वालों को महाकुंभ की ओर देखना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमाराआदर्श ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे संतु निरामया’ है, जो महाकुंभ में पूरी तरह परिलक्षित हुआ। इस आयोजन में किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, क्षेत्र, मत या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं हुआ।” महाकुंभ से जुड़ी एक नाविक परिवार की सफलता की कहानीसीएम योगी ने महाकुंभ के दौरान एक नाविक परिवार की सफलता का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि इस परिवार के पास 130 नौकाएं थीं, जिससे उन्होंने 45 दिनों में 23 लाख रुपये की कमाई की। प्रतिदिन उनकी आय 50 से 52 हजार रुपये तक पहुंच गई थी। इस दौरान मुख्यमंत्री नेसमाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव पर तंज कसते हुए कहा कि वे महाकुंभ जाना चाहते थे, लेकिन चूक गए। सनातन धर्म और अर्थव्यवस्था को बताया महाकुंभ से लाभान्वितयोगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ को भारत की विरासत और विकास का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह आयोजन सनातन धर्म के लिए गौरव की बात है।उन्होंने बताया कि महाकुंभ केवल आध्यात्मिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये का लाभ होनेकी उम्मीद है। महाकुंभ में महिलाओं की सुरक्षा पर जोर सीएम योगी ने कहा कि महाकुंभ के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद थी। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में 33 करोड़ महिलाएं शामिल हुईं, लेकिन छेड़खानी या अपराध की एक भी घटना नहीं घटी। साथ ही, उन्होंने कहा कि यह महाकुंभ उनके लिए अग्निपरीक्षा के समान था, जिसमें उनकीसरकार ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। संभल के धार्मिक स्थलों को पुन स्थापित करने की प्रतिबद्धतासंभल के धार्मिक स्थलों को पुनः स्थापित करने के सरकार के प्रयासों पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने बस वही मांगा जो हमारा था। 56 वर्षोंमें संभल के शिव मंदिर में जलाभिषेक नहीं हुआ था, लेकिन अब वहां यह संभव हो रहा है। हम अपनी विरासत को पुनर्जीवित करने का कार्य कर रहेहैं।”
बिहार विधानसभा में तेजस्वी यादव और सम्राट चौधरी के बीच तीखी नोकझोंक

बिहार विधानसभा में उस समय माहौल गरमा गया जब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के बीच तीखी बहस छिड़ गई।तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी से उनके पिता शकुनी चौधरी द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे पर की गई टिप्पणी को लेकर सवाल पूछा। इस परसम्राट चौधरी ने जवाबी हमला करते हुए कहा कि पहले यह बताएं कि आपके पिता (लालू प्रसाद यादव) ने मुख्यमंत्री के बारे में क्या कहा था। इसबयान के बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया और दोनों नेताओं के बीच वाकयुद्ध तेज हो गया। तेजस्वी और सम्राट के बीच जुबानी जंगसम्राट चौधरी ने अपनी सीट पर खड़े होकर तेजस्वी यादव को जवाब दिया, जिसके बाद तेजस्वी ने पलटवार करते हुए कहा, “पहले तो आप बीजेपीको कोसते थे, अब उनके साथ खड़े हैं।” इस बयान पर बीजेपी विधायकों ने विरोध जताते हुए सदन में हंगामा किया। इसी दौरान मुख्यमंत्री नीतीशकुमार के करीबी मंत्री ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि वे पहले भी तेजस्वी के साथ काम कर चुके हैं और जहां भी रहते हैं, वहां काम ही करते हैं। इस परतेजस्वी यादव ने तंज कसते हुए कहा, “विजय चौधरी मलाई खाते हैं।” विवाद बढ़ने पर स्पीकर को करना पड़ा हस्तक्षेपतेजस्वी यादव और सम्राट चौधरी के बीच बहस और तीखी होती चली गई। सम्राट चौधरी ने तेजस्वी पर आरोप लगाया कि उनके पिता लालू प्रसादयादव ने बिहार को लूटा और उन्हें (सम्राट चौधरी को) जेल भिजवाया था। इस आरोप के बाद दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई, जिससे सदन में माहौल और तनावपूर्ण हो गया। इस दौरान स्पीकर नंदकिशोर यादव ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों नेताओं को शांत करने की कोशिश की। तेजप्रताप की चेतावनी और सदन में हंगामाजब सदन में बीजेपी विधायकों ने हंगामा बढ़ाया, तो तेजस्वी के बड़े भाई तेजप्रताप यादव खड़े हुए और बीजेपी विधायकों को चेतावनी दी कि वे शोर-शराबा बंद करें। हालांकि, राजद विधायकों ने हस्तक्षेप कर तेजप्रताप को शांत कराया। मुख्यमंत्री की सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिशतेजस्वी यादव अपने भाषण के दौरान लगातार ऐसे मुद्दे उठा रहे थे, जिनसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार पर सवाल खड़े हों। उन्होंने सम्राट चौधरीपर निशाना साधते हुए तंज कसा, जिससे सम्राट चौधरी भड़क उठे और तेजस्वी पर तीखे हमले किए। सम्राट चौधरी ने लालू यादव पर बिहार को लूटनेऔर गरीबों का शोषण करने का आरोप लगाया, जिससे बहस और ज्यादा बढ़ गई।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला, मियां-तियां’ या ‘पाकिस्तानी’ कहना अनुचित, लेकिन IPC धारा 298 के तहत अपराध नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय से जुड़ी एक टिप्पणी पर अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी को ‘मियां-तियां’ या ‘पाकिस्तानी’ कहना अनुचित होसकता है, लेकिन यह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 298 के तहत धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा अपराध नहीं माना जाएगा। शीर्षअदालत ने यह टिप्पणी एक आरोपी को दोषमुक्त करते हुए की और कहा कि हालांकि इस तरह की भाषा गलत हो सकती है, लेकिन आपराधिकमुकदमा चलाने के लिए आवश्यक कानूनी शर्तें पूरी नहीं होतीं। यह मामला झारखंड के बोकारो जिले के चास स्थित उप-विभागीय कार्यालय से जुड़ा था, जहां एक उर्दू अनुवादक और कार्यवाहक क्लर्क (जो सूचनाका अधिकार कानून के तहत कार्य कर रहे थे) ने आरोप लगाया कि जब वे RTI आवेदन से संबंधित जानकारी देने गए, तो आरोपी ने उनके धर्म कोलेकर अपमानजनक टिप्पणी की और उनके आधिकारिक कार्यों में बाधा पहुंचाने की कोशिश की। इस शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफIPC की धारा 298, 353 (लोक सेवक पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) और 504 (जानबूझकर अपमान करना) के तहत मामला दर्जकिया गया। झारखंड हाईकोर्ट ने आरोपी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट नेहाईकोर्ट के इस फैसले को पलटते हुए आरोपी को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि IPC की धारा 353 (लोक सेवक पर हमला) के तहत कोई सबूत नहीं मिला है और केवल ‘मियां-तियां’ या ‘पाकिस्तानी’ कहने से धार्मिक भावनाएं ठेस पहुंचाने का अपराध नहीं बनता। सुप्रीम कोर्टने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि IPC की धारा 298 के तहत किसी को सजा देने के लिए यह आवश्यक है कि आरोपी ने जानबूझकर धार्मिकभावनाओं को आहत करने के इरादे से अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया हो। अदालत ने कहा कि हालांकि यह टिप्पणी अनुचित थी, लेकिन इसेआपराधिक मुकदमे का आधार नहीं बनाया जा सकता। इसी के साथ आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
महाराष्ट्र में राजनीतिक हलचल, धनंजय मुंडे ने मंत्री पद से दिया इस्तीफा

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री धनंजय मुंडे का इस्तीफा ले लिया है। परली से एनसीपी विधायकधनंजय मुंडे के करीबी सहयोगी वाल्मीक कराड पर बीड जिले के एक सरपंच की हत्या का मास्टरमाइंड होने का आरोप है। सीआईडी जांच में इसमामले का खुलासा हुआ, जिसके बाद राज्य में राजनीतिक माहौल गरमा गया। सरपंच की बर्बर हत्या: सीआईडी चार्जशीट के खुलासेसीआईडी द्वारा दाखिल चार्जशीट के अनुसार, 9 दिसंबर को बीड जिले के संतोष देशमुख नामक सरपंच का अपहरण किया गया। उन्हें घंटों तकअत्याचार और मारपीट का शिकार बनाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, लोहे की रॉड से बेरहमी से पीटने के अलावा, उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप सेप्रताड़ित किया गया। जब अपहरणकर्ताओं को लगा कि सरपंच की मौत हो चुकी है, तो उन्होंने उन्हें मृत समझकर फेंक दिया। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने इसअपराध के 15 वीडियो और 8 तस्वीरें खींचीं और वीडियो कॉल के जरिए घटना को लाइव भी किया। बाद में, जब यह फुटेज सोशल मीडिया परवायरल हुए, तो यह उनके खिलाफ सबसे बड़ा सबूत बन गया। जबरन वसूली रोकने के प्रयास बने मौत की वजहजांच में खुलासा हुआ कि संतोष देशमुख अपने क्षेत्र में जबरन वसूली के खिलाफ थे। वह एक पवनचक्की ऊर्जा कंपनी अवाडा से जबरन वसूली केप्रयासों को रोकने की कोशिश कर रहे थे। उन्हें डर था कि अगर धमकियां और रंगदारी जारी रही तो अवाडा और अन्य कंपनियां अपना काम बंद करदेंगी, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। अवाडा दफ्तर में हमलाचार्जशीट के अनुसार, हत्या से तीन दिन पहले, 6 दिसंबर को, कराड और उसके गुर्गों ने अवाडा के स्थानीय कार्यालय में कर्मचारियों पर हमला कियाथा। जब सरपंच देशमुख और अन्य लोग वहां पहुंचे तो उन्होंने इस हमले को रोकने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों को लगा किदेशमुख उनकी जबरन वसूली योजनाओं के लिए बाधा बन रहे हैं, इसलिए उनकी हत्या की साजिश रची गई। लगातार दी जा रही थी धमकियांसरपंच संतोष देशमुख को कई बार धमकियां दी गई थीं, लेकिन उन्होंने झुकने से इनकार कर दिया। आखिरकार, 9 दिसंबर को उनका अपहरण करलिया गया और उनकी निर्मम हत्या कर दी गई। गिरफ्तारियां और कानूनी कार्रवाई इस मामले में अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक आरोपी अभी भी फरार है। 27 फरवरी को सीआईडी ने बीड जिलान्यायालय में 1200 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इस चार्जशीट में सरपंच की हत्या, अवाडा कंपनी से जबरन वसूली और कंपनी के सुरक्षा गार्ड परहमले के तीन अलग-अलग मामले शामिल हैं। आरोपियों पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत भी केस दर्ज किया गया है। इस घटना के कारण राज्य में राजनीतिकभूचाल आ गया, जिससे धनंजय मुंडे को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।
पीएम मोदी का वनतारा वन्यजीव बचाव केंद्र दौरा, शेर के शावकों संग बिताया समय, वन्यजीव संरक्षण की सराहना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में जामनगर स्थित वनतारा वन्यजीव बचाव केंद्र का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ अनंत अंबानी भी मौजूद थे, जिन्होंने पीएम मोदी को केंद्र का भ्रमण कराया। शेर के शावकों के साथ समय बितायाअपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने शेर के शावकों के साथ वक्त बिताया। वीडियो में उन्हें शावकों को दुलारते और बोतल से दूध पिलाते हुए देखागया। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का अवलोकनपीएम मोदी ने केंद्र की विभिन्न चिकित्सा सुविधाओं का निरीक्षण किया। यहां वन्यजीवों के उपचार के लिए एमआरआई, सीटी स्कैन, आईसीयू जैसीअत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध है। इसके अलावा, केंद्र में एनेस्थेसिया, कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, एंडोस्कोपी, डेंटिस्ट्री, और आंतरिक चिकित्सा जैसीसेवाएं भी दी जाती हैं। दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण की पहलप्रधानमंत्री ने यहां एशियाई शेर, सफेद शेर, बादलदार तेंदुआ, और काराकल जैसे संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण कार्यों को भी देखा। उन्होंने इनवन्यजीवों के पुनर्वास प्रयासों की सराहना की। वन्यजीवों के साथ संवादकेंद्र में पीएम मोदी ने स्वर्णिम बाघ, हिम तेंदुआ, सफेद शेर और अन्य दुर्लभ जानवरों के साथ बातचीत की। उन्होंने ओकापी, चिंपांजी और ओरंगुटानके साथ भी समय बिताया। इसके अलावा, पीएम ने दरियाई घोड़े, मगरमच्छ, जिराफ, और गैंडा शावक को भी करीब से देखा। विशेष प्रजातियों का अवलोकनप्रधानमंत्री मोदी ने केंद्र में मौजूद बड़ा अजगर, दो सिर वाला सांप, दो सिर वाला कछुआ, टैपिर, तेंदुए के शावक, विशाल ओटर, बंगो (एंटीलोप), सील और हाथियों को भी देखा। हाथी अस्पताल का निरीक्षणउन्होंने यहां स्थित दुनिया के सबसे बड़े हाथी अस्पताल का दौरा किया, जहां हाथियों के इलाज और पुनर्वास की अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।इसके अलावा, उन्होंने जल चिकित्सा तालाब का भी निरीक्षण किया, जो गठिया से पीड़ित हाथियों के इलाज में सहायक है। बचाए गए पक्षियों को आज़ादी दी प्रधानमंत्री ने अपने दौरे के दौरान उन पक्षियों को भी मुक्त किया, जिन्हें पहले केंद्र में बचाया गया था। उन्होंने केंद्र के डॉक्टरों, सहायक कर्मचारियोंऔर कार्यकर्ताओं से बातचीत कर उनके कार्यों की सराहना की। वनतारा वन्यजीव बचाव केंद्र न केवल वन्यजीवों के उपचार और पुनर्वास के लिए समर्पित है, बल्कि यह संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण में भीमहत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।