आम आदमी पार्टी सरकार के तीन साल पूरे, केजरीवाल और भगवंत मान ने हरमंदिर साहिब में टेका मत्था

अमृतसर। आम आदमी पार्टी (AAP) की पंजाब सरकार के तीन साल पूरे होने पर राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान नेसचखंड श्री हरमंदिर साहिब में मत्था टेककर आशीर्वाद लिया। केजरीवाल अपनी पत्नी सुनीता केजरीवाल के साथ दस दिन की विपश्यना साधना केबाद अमृतसर पहुंचे थे। अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने गुरु साहिब के चरणों में सबकी खुशहाली, सुख-समृद्धि और उन्नति कीप्रार्थना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भगवंत मान भी अपने परिवार के साथ मौजूद रहे। नशा और भ्रष्टाचार के खिलाफ युद्धमीडिया से बातचीत में केजरीवाल ने कहा कि पंजाब में नशा और भ्रष्टाचार सबसे बड़ी समस्याएं हैं और आम आदमी पार्टी की सरकार ने तीन करोड़पंजाबियों के साथ मिलकर इनके खिलाफ युद्ध छेड़ा है। उन्होंने कहा कि यह न्याय की लड़ाई है और गुरु महाराज से शक्ति और मार्गदर्शन की प्रार्थनाकी है ताकि सरकार लोगों की सेवा करती रहे। रंगला पंजाब बनाने का संकल्पमुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य पंजाब को नशा मुक्त बनाकर शानदार शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदानकरना है। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल द्वारा दी गई गारंटियों और पार्टी की सोच के अनुरूप सरकार काम कर रही है। भगवंत मान ने बताया कि सरकार नशा और भ्रष्टाचार के खिलाफ योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई कर रही है। युवाओं को रोजगार देने के प्रति प्रतिबद्धताजताते हुए उन्होंने कहा कि अब तक 55 हजार से अधिक नौकरियां दी जा चुकी हैं। गुरु नगरी में आभार व्यक्तभगवंत मान ने एक्स पर लिखा कि गुरु नगरी अमृतसर में अरविंद केजरीवाल के साथ सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में मत्था टेकने का सौभाग्य प्राप्तहुआ। उन्होंने पंजाब और पंजाबियों के कल्याण के लिए प्रार्थना की और सरकार के तीन साल पूरे होने पर परमात्मा का धन्यवाद किया। आम आदमी पार्टी की सरकार ने 16 मार्च 2022 को शहीद-ए-आजम भगत सिंह के जन्मस्थल खटकड़ कलां में शपथ ली थी। सरकार का संकल्प हैकि नेक नीयत और ईमानदारी के साथ पंजाब को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाया जाए।
मऊगंज हिंसा: ASI समेत दो की हत्या पर बवाल, मुख्यमंत्री ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में शनिवार (14 मार्च) को दो गुटों के बीच हुए विवाद में दर्दनाक घटना घटी। इस हिंसक झड़प मेंएक सहायक उप निरीक्षक (ASI) रामचरण गौतम सहित दो लोगों की हत्या कर दी गई। घटना को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा दुखव्यक्त किया है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। घटना का कारण: अपहरण के बाद भड़की हिंसामिली जानकारी के अनुसार, सनी द्विवेदी नामक युवक के अपहरण की सूचना पर शाहपुर थाना पुलिस ग्राम गडरा पहुंची थी। पुलिस टीम युवक कोबचाने का प्रयास कर रही थी, तभी आक्रोशित भीड़ ने हमला कर दिया। इस हमले में ASI रामचरण गौतम सहित सनी द्विवेदी की भी मौत हो गई। मुख्यमंत्री का बयान: सख्त कार्रवाई के निर्देशमुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए इसे बेहद अमानवीय और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X परशोक संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि इस जघन्य अपराध में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों को दिए निर्देशमुख्यमंत्री ने DIG रीवा और SP मऊगंज को धारा 163 लागू कर स्थिति को नियंत्रण में लेने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ADG रीवा जोन को मौकेपर भेजा गया है, जबकि DGP स्वयं घटनास्थल पर पहुंचकर आवश्यक निर्देश देंगे। घटना की पृष्ठभूमि: हत्या के संदेह में अपहरणमऊगंज SP रसना ठाकुर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कुछ समय पहले अशोक कुमार नामक व्यक्ति की मृत्यु हुई थी। स्थानीयलोगों को संदेह था कि सनी द्विवेदी ने उसकी हत्या की है, हालांकि जांच में यह सामने आया कि अशोक कुमार की मौत एक दुर्घटना में हुई थी। इसीसंदेह के आधार पर कुछ लोगों ने सनी द्विवेदी का अपहरण कर लिया था। जब पुलिस उसे छुड़ाने पहुंची, तो विवाद हिंसा में बदल गया और इसदर्दनाक घटना को अंजाम दिया गया। दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाईमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार किसी भी प्रकार की हिंसा और कानून व्यवस्था को बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।उन्होंने कहा कि इस घटना में शामिल अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
बलूचिस्तान में बड़ा हमला: पाकिस्तानी सेना पर बलूच आतंकियों का काफिले पर हमला

पाकिस्तान में एक बार फिर बड़ा आतंकी हमला हुआ है। इस बार बलूच आतंकियों ने पाकिस्तान सेना को निशाना बनाया है। हमले की घटनाबलूचिस्तान के नोश्की इलाके में हुई, जहां सुरक्षाबलों के काफिले पर हमला किया गया। इस हमले की तुलना भारत में हुए पुलवामा हमले से की जारही है। हमला: सुरक्षाबलों के काफिले पर बम और ग्रेनेड से हमलाहमले में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उसकी फिदायी इकाई मजीद ब्रिगेड ने नोश्की में आरसीडी हाईवे पर रखशानमिल के पास आत्मघाती हमला किया। जानकारी के अनुसार, काफिले में सात बसें और दो कारें थीं। एक बस को वाहन-जनित इम्प्रोवाइज्डएक्सप्लोसिव डिवाइस (VBIED) से निशाना बनाया गया, जो आत्मघाती हमले का संकेत देता है। दूसरी बस को क्वेटा से ताफ्तान जाते समय रॉकेटसंचालित ग्रेनेड (RPG) से हमला कर नष्ट कर दिया गया। हताहतों की संख्या: विरोधाभासी दावेपाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में पांच जवान मारे गए और 13 अन्य घायल हुए हैं। वहीं, बलूच लिबरेशन आर्मी ने दावा किया है किहमले में करीब 90 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं। नोश्की के SHO सुमालानी ने भी आशंका जताई है कि मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ सकतीहै, क्योंकि कई घायलों की हालत गंभीर है। बलूच लिबरेशन आर्मी का बयानBLA ने हमले के बाद एक बयान जारी करते हुए कहा कि उनकी मजीद ब्रिगेड ने इस हमले को अंजाम दिया। हमले में आठ बसों वाले काफिले कोनिशाना बनाया गया, जिसमें से एक बस विस्फोट में पूरी तरह नष्ट हो गई। BLA के अनुसार, फतेह दस्ते ने दूसरी बस को घेरकर उसमें सवार सभीसैनिकों को मार गिराया। घायल सैनिकों का उपचारहमले में घायल जवानों को नोश्की और FC कैंप में उपचार के लिए ले जाया गया है। कई घायलों की हालत गंभीर होने के कारण मृतकों की संख्यामें और वृद्धि की आशंका है।
निर्वाचन आयोग का बड़ा कदम, वोटर आईडी और आधार लिंकिंग पर पुनर्विचार

देश में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों का स्थायी और वैज्ञानिकसमाधान निकालने की ठान ली है। आयोग अब वोटर आईडी (EPIC) को आधार से लिंक करने की योजना पर पुनर्विचार कर रहा है। इस कदम काउद्देश्य उन मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करना है जो एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत हैं। केंद्र सरकार के साथ बैठकनिर्वाचन आयोग ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के साथ मिलकर एक नई योजना तैयार की है। आगामी मंगलवार को आयोग के उच्चाधिकारियों, केंद्रीयगृह सचिव, विधि सचिव और UIDAI के सीईओ के साथ महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक में वोटर आईडी से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चाकी जाएगी। मुख्य निर्वाचन आयुक्त का बयानमुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस पहल को आवश्यक बताते हुए कहा कि इससे फर्जी मतदाताओं के नाम सूची से हटाने में मदद मिलेगी।उनका मानना है कि एक ही मतदाता के नाम और पहचान को सही करने के लिए यह कदम उठाना महत्वपूर्ण है। विपक्षी दलों के आरोपयह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (UBT), एनसीपी (SCP) और बीजेडी जैसे कई राजनीतिक दलों ने एक ही EPIC नंबर वाले मतदाताओं के मुद्दे को उठाया है। आयोग ने स्वीकार किया है कि कुछ राज्यों में खराब अल्फान्यूमेरिक सीरीज के कारण गलती से एक हीनंबर दोबारा जारी कर दिया गया था, लेकिन इसे फर्जीवाड़ा नहीं माना जा सकता। जिला स्तर पर बैठकेंनिर्वाचन आयोग ने 800 से अधिक जिलों में जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्थानीय राजनीतिक दलों के साथ मिलकर 5,000 से अधिक बैठकों का आयोजन करें। इन बैठकों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं को 31 मार्च तक आयोग को प्रस्तुत किया जाएगा। आधार और वोटर आईडी लिंकिंग पर पुनर्विचार2023 में सुप्रीम कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका (PIL) के जवाब में आयोग ने स्पष्ट किया था कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आधारनंबर अनिवार्य नहीं है। हालांकि, अब आयोग विभिन्न हितधारकों के साथ चर्चा कर इस पर कानूनी और तकनीकी समाधान निकालने की दिशा में कामकर रहा है। संभावना है कि आधार और पैन की तरह ही आधार और वोटर आईडी को लिंक करने का प्रावधान लागू किया जा सकता है।
तेज प्रताप यादव के सुरक्षाकर्मी का वर्दी में डांस, पुलिस ने हटाया ड्यूटी से बिना हेलमेट स्कूटी चलाने पर 4000 का चालान

पटना में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेज प्रताप यादव के सुरक्षाकर्मी द्वारा वर्दी में डांस करने का मामला तूल पकड़ चुका है। इस घटना के वीडियोके वायरल होने के बाद पटना पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया है। वर्दी में ठुमके लगाने वाले कांस्टेबल दीपक कुमार को सुरक्षा ड्यूटी से हटा दिया गयाहै और उन्हें लाइन हाजिर कर दिया गया है। डांस का वीडियो हुआ वायरलसोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में देखा गया कि तेज प्रताप यादव मंच से कांस्टेबल दीपक कुमार का नाम लेकर उन्हें डांस करने के लिए कहतेहैं। तेज प्रताप मजाकिया लहजे में कहते हैं, “डांस नहीं करोगे तो सस्पेंड कर दिए जाओगे, बुरा ना मानो होली है।” वीडियो के सार्वजनिक होते हीपुलिस विभाग हरकत में आ गया और कांस्टेबल को तुरंत ड्यूटी से हटा दिया गया। पुलिस की सख्ती: तेज प्रताप का चालान कटातेज प्रताप यादव के खिलाफ भी कार्रवाई हुई है। जिस स्कूटी से वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पहुंचे थे, उसका चालान काट दिया गया है।चालान की कुल राशि 4,000 रुपये है। चालान के पीछे की वजहपटना ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, तेज प्रताप यादव द्वारा चलाई गई स्कूटी का न तो बीमा था और न ही प्रदूषण प्रमाण पत्र। इसके अलावा, उन्होंनेहेलमेट भी नहीं पहना था। ट्रैफिक पुलिस एसएचओ ब्रजेश कुमार चौहान ने बताया कि सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद यह कार्रवाईकी गई। स्कूटी मोहम्मद कमरुद होदा के नाम पर रजिस्टर्ड पाई गई। होली के दिन हुआ था विवाद15 मार्च को होली के मौके पर तेज प्रताप यादव ने अपने सरकारी आवास पर होली मिलन समारोह आयोजित किया था। समारोह के बाद उन्होंनेस्कूटी से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास का रुख किया और वहां पहुंचकर नीतीश कुमार को “पलटू चाचा” कहकर संबोधित किया। कानून से ऊपर कोई नहींइस पूरे मामले में पटना पुलिस ने साफ संदेश दिया है कि चाहे कोई भी हो, कानून का पालन करना अनिवार्य है। तेज प्रताप यादव और उनकेसुरक्षाकर्मी दोनों के खिलाफ कार्रवाई करके पुलिस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डी की कड़ी चेतावनी, फेक न्यूज फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई, पत्रकारिता की आड़ में अपमान बर्दाश्त नहीं

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने हाल ही में विधानसभा में एक तीखा बयान दिया है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्रीपोस्ट करने वालों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें सार्वजनिक रूप से शर्मसार कियाजाएगा। आलोचना स्वीकार, लेकिन परिवार पर हमला अस्वीकार्यमुख्यमंत्री रेड्डी ने स्पष्ट किया कि आलोचना का स्वागत है, लेकिन परिवार के सदस्यों को निशाना बनाना पूरी तरह अनुचित है। हाल ही में दो महिलापत्रकारों की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उनके और उनके परिवार के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां की जा रही हैं।उन्होंने सवाल उठाया कि सार्वजनिक जीवन में होने के बावजूद उनके परिवारों को क्यों निशाना बनाया जा रहा है। पत्रकारिता की आड़ में अपमानजनक सामग्री पर रोकमुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पत्रकारिता के नाम पर अपमानजनक सामग्री फैलाने की प्रवृत्ति को रोकना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब तकइस तरह के कृत्यों पर लगाम नहीं लगाई जाएगी, वे चुप नहीं बैठेंगे। सख्त लहजे में चेतावनी: “लाखों लोग सड़कों पर उतर आएंगे”विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री रेड्डी ने कड़े शब्दों में कहा कि अगर कोई सोचता है कि वे मुख्यमंत्री होने के कारण चुप रहेंगे, तो यह गलतफहमी है।उन्होंने चेतावनी दी कि उनके कहने पर लाखों लोग सड़कों पर उतर आएंगे और ऐसे लोगों को सबक सिखाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कियाकि वे कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई करेंगे। फर्जी पत्रकारों की पहचान के लिए लिस्ट बनाने का आदेशमुख्यमंत्री रेड्डी ने आईटी मंत्री डी. श्रीधर बाबू और सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी को मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची तैयार करनेका निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग इस सूची में शामिल नहीं होंगे, उन्हें पत्रकार नहीं बल्कि अपराधी माना जाएगा और उनके खिलाफ कड़ीकार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया पर फेक न्यूज फैलाने वालों पर सख्त रुखमुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर झूठी खबरें फैलाने वालों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि नकाब पहनकर झूठी जानकारी फैलाने वालों कापर्दाफाश किया जाएगा। यूट्यूब चैनल शुरू कर लेने मात्र से कोई पत्रकार नहीं बन सकता।वित्तीय संकट पर भी जताई चिंताविधानसभा में मुख्यमंत्री रेड्डी ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार को हर महीने कर्मचारियों को वेतन देने मेंकठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों की डीए (महंगाई भत्ता) मांग को न्यायोचित मानते हुए उन्होंने कर्मचारियों से राज्य की मौजूदाआर्थिक स्थिति को देखते हुए अधिक दबाव न बनाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के इन बयानों से स्पष्ट है कि वे फेक न्यूज और पत्रकारिता की आड़ में हो रहे दुरुपयोग के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के लिएप्रतिबद्ध हैं। साथ ही उन्होंने राज्य की वित्तीय चुनौतियों को भी गंभीरता से लिया है।
शिक्षा और विज्ञान अपनाए बिना भविष्य अंधकारमय,नितिन गडकरी का मुस्लिम समाज को संदेश

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी अपने साफगोई भरे बयानों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने मुस्लिम समाज को लेकर एक बार फिर बेबाक टिप्पणीकी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा की सबसे अधिक आवश्यकता यदि कहीं है, तो वह मुस्लिम समाज में है। शिक्षा पर विशेष जोरगडकरी ने कहा कि मुस्लिम समाज में चाय की टपरी, पान ठेला, कबाड़ी की दुकान, ट्रक ड्राइवर और क्लीनर जैसे व्यवसाय ही प्रमुखता से दिखाई देतेहैं। ऐसे में शिक्षा का प्रसार आवश्यक है ताकि इस समाज से भी इंजीनियर, डॉक्टर, आईएएस और आईपीएस जैसे पेशेवर निकल सकें। मस्जिद और विज्ञान के बीच संतुलननितिन गडकरी ने मस्जिद में नमाज पढ़ने के महत्व को नकारा नहीं, बल्कि विज्ञान और तकनीकी शिक्षा को आत्मसात करने पर जोर दिया। उन्होंने कहाकि चाहे मस्जिद में एक बार नहीं, सौ बार नमाज पढ़ें, लेकिन यदि विज्ञान और तकनीकी को नहीं अपनाया गया तो भविष्य अंधकारमय हो सकता है। नागपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज का जिक्रगडकरी ने बताया कि जब वे महाराष्ट्र में विधायक थे, तो उन्हें एक इंजीनियरिंग कॉलेज का प्रबंधन मिला। उन्होंने इस कॉलेज को नागपुर स्थित अंजुमनइस्लाम संस्था को सौंप दिया। जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने ऐसा क्यों किया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समाज को शिक्षा की अत्यधिकआवश्यकता है। डॉक्टर अब्दुल कलाम का आदर्शनितिन गडकरी ने अपने भाषण में पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि एक न्यूक्लियर साइंटिस्ट के रूप में डॉक्टर कलामने पूरे विश्व में भारत का नाम रोशन किया। उन्होंने बताया कि जाति, पंथ, धर्म या भाषा से व्यक्ति महान नहीं बनता, बल्कि उसके गुण उसे महान बनातेहैं। भेदभाव का विरोधगडकरी ने स्पष्ट किया कि वे जाति, धर्म, पंथ या भाषा के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं करते। उन्होंने राजनीति में चल रही बातों पर टिप्पणीकरते हुए कहा कि वोट देना या न देना जनता का अधिकार है, लेकिन वे अपने सिद्धांतों पर अडिग रहेंगे। नितिन गडकरी का यह बयान समाज में शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रेरणादायक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
अबकी बार अमेरिका के राष्ट्रपाति डोनाल्ड ट्रंप का 43 देशों पर वार, क्या पाक का नाम भी आ सकता है लिस्ट में

डोनाल्ड ट्रंप आए दिन किसी न किसी को निशाना बनाने के वजह से सुर्खियों में बने हुए है अब ट्रंप किन देशों को आने वाले समय में निशाना बनासकते है दरअसल अमेरिका में जिन तीन वर्ग में देशों पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी की जा रही है उनमें कहां- कौन से देश को रखे जानें की अटकलें है. डोनाल्ड ट्रंप 2017 की तरह ही इस बार फिर दुनियाभर के कई देशों पर यात्रा प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहे है हालांकि इस बार अमेरिका कीलिस्ट में छह से साक देश नहीं बल्कि करीब 43 देशों को शामिल किया है. इस बार ट्रंप प्रशासन ने अलग-अलग पर कई देश के नागरिकों के अमेरिकाआने पर पाबंदी लगाने की तैयारी कर ली है प्रतिबंधों का असर भी अलग-अलग स्तर पर होगा. डोनाल्ड ट्रंप ने 20 जनवरी को जब राष्ट्रपति पद कीशपथ ली थी.तब उन्होनें एक कार्यकारी आदेश जारी किया था. ट्रंप ने देशों की लिस्ट तैयार करने के लिए किया था ऐलानदरअसल इसमें ट्रंप ने विदेश मंत्री के साथ कैबिनेट सदस्यों से ऐसे देशों की लिस्ट तैयार करने के लिए कहा था. जो कि अपने नागरिकों को लेकर कमजानकारी देते है और इसके चलते अमेरिका के पास उन्हें वीजा देने या इसे नकारने के लिए पूरा ब्योरा नहीं होता. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका में ऐसे देशोंके नागरिकों पर आशिंक या पूर्ण रुप से प्रतिबंध लगाने की तैयारी की जा सकती है अपने इस कदम के पीछे इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था किवह उन बाहरी लोगों से अमेरिका नागरिकों की रक्षा करना चाहते है जिनका इरादा अमेरिका में आतंकी हमले करना व राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफकरना,नफरती विचारधारा को बढ़ावा देना या गलत कारणों से आव्रजन कानूनों का फायदा उठाना हो.इस आदेश के तहत व्हाइट हाउस को 60 दिन केअंदर उन सभी देशों के नाम मिलने थे. जो कि अपने नागरिकों की जांच से जुड़ी पूरी जानकारी नहीं देते. यह अवधि अगले हफ्ते खत्म होने वाली है.इनदेशों को अमेरिका जाने वाले यात्रियों की पूरी जानकारी देना जरूरी होगा. पासपोर्ट जारी करने से पहले सुरक्षा मानक मजबूत करने होंगे. प्रतिबंधितदेशों के लोगों को नागरिकता बेचने वाले देशों को अपनी कमियां दूर करनी होगी.विदेश मंत्रालय ने लिस्ट कर ली था तैयारइसके बाद ही वह यलो लिस्ट से बाहर आ सकते हैं बताया गया है कि अमेरिका विदेश मंत्रालय ने यह लिस्ट कुछ अब तो पहले ही तैयार कर ली थी. इन्हें फिलहाल अलग-अलग देशों के दूतावासों को समीक्षा के लिए भेजा दिया गया है. और सुरक्षा अधिकारी और खुफियां एजेंसीयां इस लिस्ट परअपने इनपुट भेज सकती है. व्हाइट हाउस जरूरत के हिसाब से लिस्ट में शामिल देशों में बदलाव भी कर सकते हैं. डोनाल्ड ट्रंप की दूसरे कार्यकाल में लेजा रहे यात्रा प्रतिबंधों का दायरा काफी बड़ा है. जहां पहले कार्यकाल में ट्रंप सिर्फ सात मुस्लिम देशों पर प्रतिबंध का ऐलान किया था. वही इस बारलिस्ट में अलग-अलग वर्ग में 43 देश को शामिल किया गया है. ट्रंप ने 2017 के प्रतिबंधों से पहले ही साफ कर दिया था कि उनका निशानाइस्लामिक देश होंगे.अब इनमें अधिकतर देश अफ्रीका के थे. हालांकि अमेरिकी अदालतों ने इस प्रतिबंध के कई हिस्सों को अवैध करार दिया था. आखिरकार 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने यात्रा प्रतिबंधों के नए प्रारूप को मंजूरी दे दी थी. 2021 में राष्ट्रपति बनने के बाद जो बाइडन ने प्रतिबंधों कोखत्म कर दिया था. साथ ही सख्त निगरानी प्रणाली को भी समाप्त करने का आदेश दिया गया था.
लश्कर को लगा सबसे बड़ा झटका, पाकिस्तान में किया गया हाफिज सईद का करीबी आतंकी अबु कताल ढेर

आतंकी अबु कताल, हाफिज सईद का बेहद करीबी था.हाफिज मंबई हमले का मास्टरमाइंड है.26/11 मुंबई आतंकी हमले में 166 लोगों की मौत हुईथी.लश्कर-ए-तैयबा के 10 पाकिस्तानी आतंकियों ने मुंबई के कई स्थानों पर हमला किया था.पाकिस्तान में आतंकी संगठन लश्कर को बड़ा झटकालगा है. मोस्टवांटेड आतंकी अबू कताल सिंघी की हत्या कर दी गई है. यह घटना शनिवार रात 8:00 बजे की है अबू कताल ने भारत में कई बड़े हमलोंको खत्म होने को अंजान दिया है.NIA ने उसे वांटेड घोषित किया था आठवीं समेत तमाम सुरक्षा एजेंसियों के लिए आतंकी बड़ा सिर दर्द बन गया था. आतंकी अबू कताल ,हाफिज सईद का भी बेहद करीबी था.हाफिज मुंबई हमले का मास्टरमाइंज है.26/11 मुंबई हमले में 166 लोगों की मौत हुईथी.लश्कर-ए-तैयबा के 10 पाकिस्तान और भारत के बीच रिश्ते बिगड़ गए.दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए.हाफिज सईद ने ही जम्मूकश्मीर पर बड़े हमले करने की जिम्मेदारी अबु को दी थी. हाफिज ने ही अबु को लश्कर का चीफ कमांडर बनाया था.हाफिज सईद ही अबु को देता था. जिसके बाद वो कश्मीर पर बड़े हमले को अंजाम देता था. तीर्थ यात्रियों पर किया था हमलाइससे पहले 9 जून को जम्मू कश्मीर रियासी के शिव-खोड़ी मंदिर से लौट रहे तीर्थयात्रियों की बस पर आतंकियों ने हमला किया था.उस हमले का एकमास्टरमाइंड भी अबु कताल सिंघी ही था.इसके अलावा,कश्मीर में कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड भी अबू कताल को माना गया.एनआईए ने 2023 के राजौरी हमले में अबू कताल को जिम्मेदार ठहराया था. दरअसल एनआईए ने जनवरी 2023 में राजौरी में हुए हमले के लिए 5 लोगों के खिलाफआरोपपत्र दाखिल किए थे.जिनमें लश्कर के 3 पाकिस्तानी आतंकी भी शामिल थे.1 जनवरी 2023 को राजौरी जिले में ढांगरी गांव में नागरिकों परआतंकवाद हमला हुआ था.उसके अगले दिन आईईडी विस्फोट हुआ था.हमलों में दो बच्चों सहित सात लोग मारे गए थे.और कई अन्य गंभीर रुप सेघायल हो गए थे.आरोपपत्र में शामिल तीन आतंकी लश्कर के कर्ताधर्ता बताए गए.जिनकी पहचान सैफुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट उर्फ अली हबीबुल्लाहउर्फ नुमान समेत कताल सिंघी के रुप में की गई है.अबु कताल और साजिद जट्ट पाकिस्तानी नागरिक थे. जबकि कासिम 2002 के आसपासपाकिस्तान चला गया था.और वहां लश्कर के आतंकवादी समूहों में शामिल हो गया था.
LG केंद्र,और ब्यूरोक्रेट्स के खिलाफ केस लिए जाएंगे वापस, दिल्ली सरकार ने लिया बड़ा फैसला

दिल्ली में सत्ता परिवर्तन के साथ ही एक बड़ा फैसला लिया गया है जिससे अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कुछ कम होगा. रेखा गुप्ता के नेतृत्ववाली दिल्ली सरकार ऐसे सभी मुकदमों को वापस लेने जा रही है जो आम आदमी पार्टी ने नेतृत्व वाली पूर्व सरकार और उसके तत्कालीन मंत्रियों द्धाराएलजी,केंद्र और ब्यूरोक्रेट्स के खिलाफ दायर किए गए.इसके लिए प्रक्रिया शुरु कर दी गई है एक हफ्ते के भीतर, संबधित अदालतों के जजों केसामने अर्जी दायर की जाएगी.अलग-अलग मामलों में अलग-अलग तारीख पर सुनवाई होनी है इसलिए अलग से अर्जी दायर कर संबधित अदालत सेउनमें जल्द सुनवाई की मांग की जाएगी.अदालतों में संबंधित सरकारों को प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों ने भी इस बात की पुष्टि की.एक वकील नेकहा अभी ऐसा कोई औपचारिक आदेश तो नहीं मिला है पर हां तय जरुर हुआ है कि मिलकर चलना है और ऐसा कोई काम नहीं करना है जिससेजनहित से जुड़े कामों में बाधा पैदा हो.ऐसा बयान एक दूसरे वकील ने भी दिया. उन्होनें कहा कि ये ऐसे मामले है जिनकी न पहले कोई जरुरत थी. और न अब सस्ता बदलने के बाद उन्हें जारी रखने की कोई वजह बची है उन्होनें कहा,ये मामले न केवल संसाधनों की बर्बादी है बल्कि राजनीति से भीप्रेरित है जिनका मकसद दिल्ली सरकार की योजनाओं और परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाना है.हालांकि सरकारी सूत्रों ने दावा किया है कि कानूनविभाग ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा उसमें की इस तरह के मुकदमे न केवल ब्यूरोक्रेसी के लिए मुश्किल पैदा की,बल्कि प्रशासन को भी पंगु बनादिया.जिससे नीतिगत फैसले लेने में और परियोजनाओं पर काम करने में भी देरी हुई है. एलजी सचिवालय से मिली गई है मंजूरीप्रस्ताव को एलजी सचिवालय से मंजूरी मिल गई है और केस वापस लेने और कार्यवाही शुरु कर दी गई है.स्वास्थ्य विभाग ने अर्जी दायर कर अपने पूर्वमंत्री सौरभ भारद्धाड द्धारा दायर केस को वापस लेने की अदालत से इजाजज मांगी है इन सब में से आठ से नौ मामले AAP मंत्रियों द्धारा ही दाखिलकिए गए है.विधि विभाग के इंटरनल नोट में इसका जिक्र है.उसके मुताबिक,2014 में सत्ता में आने के बाद,तत्कालीन सरकार ने प्रभारी मंत्री द्धारा भारतसरकार के खिलाफ बड़ी संख्या में अदालती मामले दायर किए गए थे.जिसमें संविधान के अनुच्छेद 239 और 239AA और GNCTD एक्ट,1991 के प्रावधानों के दायरे से बाहर उसके अधिकार पर सवाल उठाया गया था.इनमें से कुछ मामले दिल्ली विघुत नियामक आयोग के चेयरमैन, दिल्लीजल बोर्ड के लिए फंडिग,दिल्ली दंगो के मामलों में वकीलों की नियक्ति,विदेश में शिक्षकों का प्रशिक्षण और यमुना प्रदूषण पर हाई लेवस कमिटीआदि से जुड़े है.वर्तमान में लंबित कानूनी चुनौतियों में सबसे अहम दिल्ली सरकार अधिनियम 2023 को चुनौती देने वाली याचिका है जिसने राष्ट्रीयराजधानी में अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग को संभालने के लिए एक नया वैधानिक प्रधिकरण बनाया है.याचिका में एलजी को सरकारीवकीलों की नियुक्ति का अधिकार देने के केंद्र के फैसले को चुनौती दी गई है. मार्च 2023 में दायर एक याचिका में एलजी के उस फैसले को चुनौतीदी गई थी.जिसमें स्कूली शिक्षकों को कुछ शर्तों के साथ प्रशिक्षण के लिए फिनलैंड भेजने की अनुमति दी गई थी.