आप का बीजेपी पर हमला, सौरभ भारद्वाज बोले झुग्गीवासियों से किया वादा तोड़ा,भाजपा उजाड़ रही है गरीबों के घर

नई दिल्ली: दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी पर झुग्गीवासियों को उनके घरों से बेदखल करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टीके प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने सोमवार को एक प्रेस वार्ता में कहा कि चुनाव से पहले ‘जहां झुग्गी, वहीं मकान’ की गारंटी देने वाली भाजपा अबसत्ता में आते ही अपने वादे से पीछे हट गई है। जहां झुग्गी, वहीं मकान” की गारंटी निकली झूठीसौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि जंगपुरा के मद्रासी कैंप में भाजपा कार्यकर्ताओं ने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से गारंटी कार्ड बांटे थे, जिसमेंलिखा था कि झुग्गी की जगह पर ही पक्के मकान दिए जाएंगे। लेकिन अब डीडीए द्वारा वहां के निवासियों को दिल्ली से 40-50 किलोमीटर दूरबवाना में घर दिए जाने की योजना बनाई जा रही है। रोज़गार और शिक्षा पर संकटउन्होंने बताया कि मद्रासी कैंप में रहने वाले अधिकांश लोग तमिलनाडु से हैं और स्थानीय इलाकों में घरेलू काम, ठेकेदारी, रेडी आदि के ज़रिए जीवनयापन करते हैं। उनके बच्चे पास के स्कूलों में पढ़ते हैं, जिनमें तमिल भाषा की शिक्षा दी जाती है। यदि उन्हें बवाना भेजा जाता है तो उनकी आजीविकाऔर बच्चों की शिक्षा दोनों पर गंभीर असर पड़ेगा।बवाना के घरों की हालत दयनीयसौरभ भारद्वाज ने बताया कि कई लोग बवाना जाकर वहां के मकानों की स्थिति देख चुके हैं। न सिर्फ ये मकान झुग्गियों से बेहद दूर हैं, बल्कि उनमेंपीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। “भाजपा सरकार को बताना चाहिए कि ये लोग खारा पानी पीकर कैसे जिएंगे?” उन्होंनेसवाल उठाय चुनाव से पहले झुग्गी में रातें बिताईं, अब कर रहे हैं बेघरAAP नेता ने याद दिलाया कि चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा नेता खुद झुग्गियों में रात बिताते थे और ‘झुग्गी सम्मान यात्रा’ निकालते थे। उन्होंने कहाकि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पहले ही आगाह किया था कि यदि भाजपा सत्ता में आई तो गरीबों के सिर से छत छीन ली जाएगी – और अबवही हो रहा है। तमिलनाडु के लोगों से की अपीलमद्रासी कैंप के निवासियों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए भारद्वाज ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और तमिल जनता से अपील कीकि वे भाजपा के इस दोहरे चरित्र को पहचानें। उन्होंने कहा, “एक तरफ भाजपा तमिलनाडु में वोट मांग रही है, वहीं दिल्ली में 40-50 साल से बसेतमिल मूल के लोगों को उजाड़ रही है।” 5 किलोमीटर के दायरे में मकान देने की मांगप्रेस वार्ता के अंत में सौरभ भारद्वाज ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि झुग्गीवासियों को उनकी मौजूदा जगह से अधिकतम 5 किलोमीटर के भीतर हीपुनर्वास किया जाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) की गाइडलाइंस भी यही कहती हैं, और इसी के तहत पुनर्वासकिया जाना चाहिए।
EWS प्रमाण पत्र जारी करने पर रोक नहीं, घोटाले की जांच से घबराई AAP बोले वीरेंद्र सचदेवा

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष श्री वीरेंद्र सचदेवा ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के प्रमाण पत्र बनवाने पर कोईप्रतिबंध नहीं लगाया है। उन्होंने कहा कि इस विषय में अफवाह फैलाना आम आदमी पार्टी की एक सोची-समझी रणनीति है। AAP नेताओं की भूमिका पर उठे सवालश्री सचदेवा ने कहा कि सौरभ भारद्वाज जिस प्रकार इस विषय पर लगातार बयानबाज़ी कर रहे हैं, उससे यह संदेह गहराता है कि EWS प्रमाण पत्रघोटाले की जांच में न केवल उनका, बल्कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के कई विधायकों के नाम सामने आ सकते हैं। फर्जी प्रमाण पत्रों के ज़रिए बड़े पैमाने पर हुआ घोटालादिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि 2015 से 2024 के बीच आम आदमी पार्टी की सरकार में न केवल फर्जी EWS प्रमाण पत्र, बल्किफर्जी जाति प्रमाण पत्र भी बनवाए गए, जिनका उपयोग स्कूलों में दाखिलों और अस्पतालों में इलाज जैसी सरकारी सुविधाओं के लिए किया गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की पहल पर बौखलाई AAPश्री सचदेवा ने कहा कि जब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इन घोटालों की शिकायतों को गंभीरता से लिया और सख्त गाइडलाइंस बनाने के निर्देश दिए, तबAAP ने भ्रम फैलाना शुरू कर दिया कि EWS प्रमाण पत्र बनना बंद हो गया है, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। भाजपा ने पहले ही घोटाले को किया था उजागरवीरेंद्र सचदेवा ने बताया कि 18 दिसंबर 2024 को भाजपा ने इस पूरे फर्जीवाड़े को सार्वजनिक किया था, लेकिन इसके बावजूद “आप” सरकार नेकिसी भी दोषी पर कोई कार्रवाई नहीं की, क्योंकि पार्टी की पूरी मशीनरी इसमें शामिल थी। राजनीति में प्रासंगिक बने रहने के लिए दे रहे रोज़ बयानश्री सचदेवा ने सौरभ भारद्वाज पर कटाक्ष करते हुए कहा कि चुनाव हारने के बाद उन्होंने खुद को बेरोजगार नेता घोषित कर दिया था और अब वह रोज़एक नया बयान देकर अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को लाभ मिलता रहेगाअंत में, श्री सचदेवा ने भरोसा दिलाया कि दिल्ली के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को EWS प्रमाण पत्र और उससे मिलने वाले लाभों में कोई बाधानहीं आएगी। केवल उसके दुरुपयोग को रोकने के लिए ही नई गाइडलाइंस तैयार की जा रही हैं।
शिकोहपुर जमीन घोटाला मामला, ईडी के सामने पेश हुए रॉबर्ट वाड्रा, लगाए राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप

ईडी के सामने रॉबर्ट वाड्रा की पेशीहरियाणा के शिकोहपुर ज़मीन घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रॉबर्ट वाड्रा को मंगलवार को पूछताछ के लिए बुलाया। यह दूसरी बार था जबउन्हें समन जारी किया गया। पहली बार 8 अप्रैल को बुलाया गया था, लेकिन वाड्रा उस दिन पेश नहीं हुए थे। अब ईडी, मनी लॉन्ड्रिंग रोकथामअधिनियम (PMLA) के तहत उनका बयान दर्ज कर रही है। वाड्रा बोले: डरने वाला नहीं, जवाब देता रहूंगाईडी दफ्तर से बाहर आने के बाद वाड्रा ने मीडिया से कहा कि वे किसी एजेंसी या सरकार से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा, “मैंने सभी सवालों केजवाब दिए हैं, लेकिन ये जांच कभी खत्म भी होनी चाहिए। बीस साल पुराने दस्तावेज मांगना कहां तक उचित है?” उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ ईडी का दुरुपयोग किया जा रहा है और यह पूरा मामला राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है।सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोपरॉबर्ट वाड्रा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी वे जनता के हक की बात करते हैं, तब उन्हें दबाया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कियदि गिरफ्तारी की नौबत आई तो वे उसके लिए भी तैयार हैं। क्या है शिकोहपुर जमीन घोटाला?यह मामला वर्ष 2008 का है, जब हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार थी। वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड कोगुरुग्राम के शिकोहपुर में 3.53 एकड़ जमीन मात्र 7.50 करोड़ रुपये में कॉलोनी डेवलप करने के लिए दी गई थी। हरियाणा सरकार ने 2.70 एकड़ जमीन पर कॉलोनी निर्माण की अनुमति दी थी, लेकिन आरोप है कि कॉलोनी विकसित करने के बजाय वाड्रा कीकंपनी ने यह जमीन 2012 में डीएलएफ यूनिवर्सल लिमिटेड को 58 करोड़ रुपये में बेच दी। इससे कंपनी को बड़ा मुनाफा हुआ। लाइसेंस ट्रांसफर को नहीं मिली थी अंतिम मंजूरीहालांकि, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने जमीन का लाइसेंस ट्रांसफर करने की अंतिम अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद जमीन का सौदा कियागया, जो अब जांच के घेरे में है।
अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू, तवी आरती बनी श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आकर्षण

अमरनाथ यात्रा इस वर्ष 3 जुलाई, गुरुवार से आरंभ होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी श्रद्धालु पूरे भक्ति भाव के साथ इस यात्रा को पूर्णकर बाबा बर्फानी के दर्शन करते हैं, उन्हें पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की ओर मार्ग प्रशस्त होता है। पौराणिक कथा से जुड़ी है अमरनाथ गुफाऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, अमरनाथ की गुफा वह पवित्र स्थान है जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व की गाथा सुनाई थी। कहाजाता है कि उस समय एक जोड़ा कबूतर भी वहां मौजूद था, जिन्होंने यह दिव्य कथा सुन ली और वे भी अमर हो गए। यही कारण है कि यह गुफाभक्तों के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है। तवी आरती में उमड़ा जनसैलाबबैसाखी के अवसर पर तवी नदी के तट पर आयोजित भव्य आरती में पांच हजार से अधिक लोगों ने भाग लिया। जम्मू के आयुक्त ने इस आयोजन कोएक विशेष और नियमित परंपरा के रूप में स्थापित करने की बात कही है। अमरनाथ यात्रा के दौरान विशेष आकर्षण बनेगी तवी आरतीआयुक्त ने बताया कि अमरनाथ यात्रा के दौरान तवी आरती न केवल श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक आध्यात्मिक केंद्र बनेगी, बल्कि जम्मू कीसांस्कृतिक पहचान को भी समृद्ध करेगी। स्थानीय व्यापार को मिलेगा प्रोत्साहनउन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि इस प्रकार के आयोजनों से न केवल धार्मिक भावना सशक्त होगी, बल्कि तटवर्ती क्षेत्रों में स्थानीय व्यापारिकगतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे क्षेत्र के आर्थिक विकास में योगदान होगा।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार: इलाहाबाद हाई कोर्ट की ‘मुसीबत को न्योता’ टिप्पणी पर जताई नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट का स्वत: संज्ञानसुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की उस टिप्पणी को असंवेदनशील करार दिया है, जिसमें बलात्कार पीड़िता को ही जिम्मेदार ठहराते हुए कहा गयाथा कि उसने “खुद ही मुसीबत को आमंत्रित किया।” न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने टिप्पणी को अनुचितबताया और न्यायिक पदों पर बैठे लोगों को बयान देते समय सावधानी बरतने की सलाह दी।हाई कोर्ट का विवादास्पद बयानइलाहाबाद हाई कोर्ट ने बलात्कार के एक आरोपी को जमानत देते हुए कहा था कि शिकायतकर्ता ने शराब के प्रभाव में आरोपी के घर जाकर खुद कोजोखिम में डाला, जिससे उसने “खुद ही परेशानी को न्योता दिया।” इस बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर आपत्ति जताई और दो टूक कहा कि ऐसेमामलों में जजों को शब्दों के चयन में अत्यधिक सतर्क रहना चाहिए। कासगंज केस से जुड़ा है मामलायह मामला उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले का है, जहां 12 जनवरी 2022 को एक महिला ने शिकायत दर्ज करवाई थी। उसके अनुसार, वह अपनी 14 वर्षीय बेटी के साथ घर लौट रही थी, तभी गांव के तीन युवकों ने उन्हें रोका और बेटी को जबरन बाइक पर बैठा लिया। रास्ते में तीनों आरोपियों नेउसके साथ यौन हमले का प्रयास किया, लेकिन शोर सुनकर ग्रामीणों के आने पर फरार हो गए।सुप्रीम कोर्ट ने दोहराई संवेदनशीलता की जरूरतसुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि “महिला ने खुद मुसीबत को न्योता दिया” जैसा बयान न केवल असंवेदनशील है, बल्कि यह पीड़िता कोदोषी ठहराने जैसा है। अदालत ने कहा कि न्यायालयों को निर्णय देते समय बेहद सोच-समझ कर टिप्पणी करनी चाहिए, क्योंकि उनका प्रभाव समाजपर गहरा पड़ता है। पहले भी आया था ऐसा मामलायह पहला मौका नहीं है जब इलाहाबाद हाई कोर्ट के किसी आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई है। इससे पहले 17 मार्च को भी हाई कोर्ट कीएक टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया था, जिसमें छेड़छाड़ के एक मामले को दुष्कर्म के दायरे में न मानने की बात कही गई थी। उस आदेशपर भी सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी।
मुर्शिदाबाद हिंसा, पिता-पुत्र की हत्या के दोनों आरोपी गिरफ्तार

मुर्शिदाबाद में हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान पिता और पुत्र की हत्या के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किएगए दोनों युवक सगे भाई हैं और जाफराबाद इलाके के रहने वाले हैं। इनकी पहचान कालू नदाब और दिलदार नदाब के रूप में हुई है। घटना के बाददोनों आरोपी फरार हो गए थे। इनमें से एक को बांग्लादेश की सीमा के पास से पकड़ा गया, जबकि दूसरे को बीरभूम जिले से गिरफ्तार किया गया। हिंसा पर नियंत्रण, लेकिन तनाव बरकरारपश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के भांगर क्षेत्र में वक्फ अधिनियम में संशोधन के विरोध में शुरू हुए प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया था। इसीके तहत मुर्शिदाबाद जिले में भी 11 और 12 अप्रैल को सुती, समसेरगंज, धुलियां और जंगीपुर जैसे इलाकों में सांप्रदायिक झड़पें हुईं। इन घटनाओं मेंकम से कम तीन लोगों की जान चली गई और सैकड़ों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए। पुलिस का दावा है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण मेंहै, लेकिन इलाके में अभी भी तनाव व्याप्त है। राहत शिविर में शरण लेने को मजबूर पीड़ितहिंसा के बाद घर से विस्थापित हुए लोग मालदा जिले में बनाए गए राहत शिविरों में रह रहे हैं। लालपुर इलाके में स्थित शिविर में ठहरे लालचंद मंडलने बताया, “हम शनिवार को यहां पहुंचे। हमारा पूरा घर जलकर खाक हो गया। अगर फिर से हिंसा हुई, तो हम कैसे घर लौट पाएंगे? हम सरकार सेशांति बहाल करने की अपील करते हैं।” खाना खा रहे थे, तभी हमला हुआराहत शिविर में रह रही रूपा मंडल ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा, “हमें यहां आए चार दिन हो गए हैं। दोपहर का खाना खा रहे थे, तभी कुछलोग हमारे घर में घुस आए और लूटपाट करने लगे। उसके बाद उन्होंने आग लगा दी। बीएसएफ जवानों ने हमें सुरक्षित यहां पहुंचाया। हम चाहते हैंकि हमें हमारे घर के नुकसान का मुआवजा मिले।”
लखनऊ में कैट कार्यक्रम,सीएम योगी ने रूल ऑफ लॉ को सुशासन की पहली शर्त बताया

कैट लखनऊ खंडपीठ के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री का संबोधनराजधानी लखनऊ में सोमवार को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की लखनऊ खंडपीठ के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नेभाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सुशासन की मूल शर्त है—कानून का शासन (Rule of Law)। यह प्रक्रिया समयबद्ध, सुलभ और सरलहोनी चाहिए, ताकि एक सामान्य कर्मचारी भी अपनी बात रख सके और उसे समय पर न्याय मिल सके। सुनवाई में समयबद्धता और मेरिट का हो ध्यानमुख्यमंत्री ने कहा कि कानून का शासन ऐसा होना चाहिए जिसमें हर व्यक्ति को न्याय मिल सके। मामलों की सुनवाई समय पर हो और निस्तारणयोग्यता के आधार पर किया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या काफी अधिक है, ऐसे में ट्रिब्यूनल की भूमिकाऔर अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। डॉ. आंबेडकर की जयंती पर न्याय के संकल्प की बातसीएम योगी ने बताया कि यह दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती है। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने दलितों और वंचितों को न्याय दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया, और इस दिशा में ट्रिब्यूनल एक प्रभावी माध्यम हो सकता है। कैट की अहम भूमिका पर बलमुख्यमंत्री ने बताया कि अब लखनऊ स्थित इस खंडपीठ से 16 जिलों के केंद्रीय कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिन कर्मियोंको किसी मजबूरी में यहां आना पड़ेगा, उन्हें समय पर न्याय अवश्य मिलेगा। उपस्थित गणमान्य व्यक्तिइस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, कैट नई दिल्ली के अध्यक्ष न्यायमूर्ति रणजीत मोरे, लखनऊ खंडपीठ के विभागाध्यक्ष न्यायमूर्ति अनिलकुमार ओझा और प्रशासनिक सदस्य संजय कुमार भी मौजूद रहे। 6700 में से 6000 से अधिक मामले निस्तारितसीएम योगी ने बताया कि वर्ष 2014 से 2025 तक लखनऊ पीठ ने 6700 मामलों में से 6000 से अधिक का सफलतापूर्वक निस्तारण किया है।उन्होंने कहा कि यदि दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर चर्चा की जाए, तो कई मामलों का शीघ्र समाधान संभव है। 34 लाख राजस्व मामलों का निस्तारण सीएम ने यह भी बताया कि वर्ष 2017 में प्रदेश में 33 लाख राजस्व मामले लंबित थे और आठ वर्षों में 10 लाख नए मामले जुड़े। इनमें से अनेकछोटे स्तर के मामलों को सरकार ने समय पर मेरिट के आधार पर निपटाया। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन मॉनिटरिंग के जरिये अब तक कुल 34 लाखमामलों का समाधान किया गया है। कैट भवन के निर्माण के लिए सरकार की तत्परताकेंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी की सराहना करते हुए कहा कि लखनऊ में कैट का भव्य भवन उनके प्रयासों की देन है।उन्होंने बताया कि भवन के लिए 1825 वर्गफुट भूमि का आवंटन सीएम योगी ने बिना किसी विलंब के किया, जिस पर 18 करोड़ रुपये की लागत सेनिर्माण कार्य पूरा हुआ।