ભારત પાકિસ્તાન તણાવ વચ્ચે વડાપ્રધાન નરેન્દ્રમોદી ના નિવા સ્થાને બેઠક, સૈન્ય ને ટાર્ગેટ નક્કી કરીને જવાબ આપવાની છૂટ.

પહેલગામમાં 22 એપ્રિલે થયેલા આતંકવાદી હુમલા બાદ આજે (બુધવાર, 30 એપ્રિલ) કેન્દ્રીય મંત્રીમંડળની પહેલી બેઠક યોજાશે. પહેલગામ આતંકવાદી હુમલામાં 26 લોકો માર્યા ગયા હતા, જેમાં મોટાભાગના પ્રવાસીઓ હતા. આજે સવારે 11 વાગ્યે પ્રધાનમંત્રી નરેન્દ્રમોદીની અધ્યક્ષતામાં એક બેઠક બોલાવવામાં આવી છે. આ સાથે, આજે સુરક્ષા બાબતો સમિતિ CCS ની બેઠક પણ યોજાશે.પીએમ મોદીએ સેનાને આપી ખુલ્લી છૂટ ગઈકાલે એટલે કે મંગળવારે (29 એપ્રિલ) વડા પ્રધાન નરેન્દ્ર મોદીએ એક ઉચ્ચ-સ્તરીય બેઠકની અધ્યક્ષતા કરી. તેમણે આતંકવાદ સામે’જોરદાર પ્રહાર’ કરવા માટે સેનાને ખુલ્લી છૂટ આપી દીધી છે. આ બેઠકમાં રક્ષા મંત્રી રાજનાથ સિંહ, રાષ્ટ્રીય સુરક્ષા સલાહકાર અજિતડોભાલ, ચીફ ઓફ ડિફેન્સ સ્ટાફ જનરલ અનિલ ચૌહાણ તેમજ સેના, નૌકાદળ અને વાયુસેનાના વડાઓ પણ હાજર રહ્યા હતા.
Deven Bharti Appointed as New Mumbai Police Commissioner, A Look at His Journey

In a major administrative move, the Maharashtra government has appointed 1994-batch IPS officer Deven Bharti as the new Commissioner of Mumbai Police. Bharti, who previously served as the Special Commissioner of Police, replaces Vivek Phansalkar, who retired on April 30 after completing his three-year tenure. A Trusted Aide of CM FadnavisKnown for his sharp administrative […]
आज अक्षय तृतीया के शुभ अवसर से होगी चारधाम यात्रा की शुरुआत,खुलेंगें गंगोत्री और युमुनोत्री के कपाट

आज अक्षय तृतीया पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो जाएगा. मां गंगा की भोगमूर्तिविग्रह डोली मुखबा गांव से मंगलवार पूर्वाह्न 11:57 बजे अभिजीत मुहूर्त में गंगोत्री धाम के लिए रवाना हुई. मां गंगा की विग्रह डोली रात को भैरो घाटीमें विश्राम करेगी. बुधवार सुबह अक्षय तृतीया पर मां गंगा की डोली गंगोत्री धाम पहुंचेगी जहां विधिविधान के साथ सुबह 10:30 बजे मंदिर के कपाटखोल दिए जाएंगे. वहीं यमुनोत्री धाम में मां यमुना के आगमन और मां यमुना के मायके खरसाली गांव में यमुना जी की विदाई की तैयारियां जोरों परहैं. अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर मां यमुना की डोली सुबह 8:30 बजे शीतकालीन प्रवास खरसाली गांव से यमुनोत्री धाम के लिए रवाना होगी औरधाम में पहुंचकर स्नान आदि के बाद 11.55 पर श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे.चारधाम यात्रा मार्ग को 15 सुपर जोन, 41 जोनऔर 217 सेक्टरों में बांटा गया है पुलिस ने यात्रा मार्ग पर इस बार कुल 624 सीसीटीवी कैमरों को भी सक्रिय किया है. यात्रा मार्ग पर नौ एएसपी औरडीएसपी स्तर के अधिकारियों को अलग-अलग स्थानों पर कैंप करने के निर्देश दिए गए हैं. अर्द्धसैनिक बलों की गई मांगइसके साथ ही इस साल पहली बार 10 कंपनी अर्द्धसैनिक बलों की मांग भी केंद्र सरकार से की गई है सबसे महत्वपूर्ण यातायात प्लान को लेकर बारबड़ी तैयारियों का दावा किया गया है. इस साल पहले से ही प्लान ए बी और सी के आधार पर यातायात प्रबंधन किया जाएगा. इसके तहत विभिन्नमार्गों पर भीड़ और अत्यधिक भीड़ होने पर वैकल्पिक मार्गों को चिह्नित किया गया है. इन पर अधिकारियों और कर्मचारियों को भी तैनात किया गया है. केदारनाथ के लिए सोनप्रयाग, गौरीकुंड, भीमबली, लिचौंली और रुद्र प्वाइंट में पांच प्रीपेड बुकिंग काउंटर बनाए गए हैं. इसी तरह यमुनोत्री के लिएजानकीचट्टी में जिला पंचायत की ओर से प्रीपेड काउंटर स्थापित किया गया है यमुनोत्री के लिए घोड़े -खच्चर संचालकों को नंबर युक्त जैकेट प्रदानकी जा रही है और एक दिन में केवल एक ही बार धाम तक आवागमन की अनुमति होगी.श्रद्धालुओं की यात्रा, सुखद और आरामदायक हो. इसके लिए सड़क परिवहन से लेकर हेली और घोड़े खच्चरों की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. पशुपालन विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं पूरी तरह स्वस्थ घोड़े खच्चरों को ही यात्रा में भेजा जाए साथ ही यात्रा मार्ग पर भी घोड़े खच्चरों कास्वास्थ्य परीक्षण किया जाए.
भारत बना रहा सैन्य कार्यवाही की योजना, पाकिस्तान का डर से हुआ बुरा हाल

पाकिस्तान ने बुधवार को दावा किया कि उसके पास “विश्वसनीय खुफिया जानकारी” है कि भारत अगले 24-36 घंटों में उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाईकी योजना बना रहा है. पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार का यह बयान पीएम मोदी द्वारा शीर्ष रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक के बादआया है. इस बैठक में पीएम मोदी ने सशस्त्र बलों की पेशेवर क्षमता पर भरोसा जताया और कहा कि उन्हें कार्रवाई के तरीके लक्ष्य और समय तय करनेकी पूरी छूट दी गई है.जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा कि भारत सरकार पहलगाम में हाल ही में हुएआतंकवादी हमले में पाकिस्तान की संलिप्तता के बारे में निराधार आरोपों के आधार पर पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने की तैयारी कर रहीहै. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान खुद आतंकवाद का शिकार रहा है और उसने हमेशा इसके सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की निंदा की है. मंत्रियों की हुई बैठकउन्होंने कहा कि इस्लामाबाद ने विशेषज्ञों के एक तटस्थ आयोग द्वारा “विश्वसनीय, पारदर्शी और स्वतंत्र” जांच की पेशकश की है.जिससे पहलगाम हमले की हकीकत का पता लगाया जा सके.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देश के शीर्ष रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और तीनों सेनाओं के प्रमुख शामिल हुए. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान भी इस बैठक का हिस्सा थे. बैठक करीब डेढ़ घंटे तक चली. सरकारी सूत्रों के अनुसार बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवादपर करारी चोट करना हमारा राष्ट्रीय संकल्प है. पीएम मोदी ने सशस्त्र बलों की पेशेवर क्षमताओं पर पूरा विश्वास और भरोसा जताया. प्रधानमंत्री ने कहाउन्हें (सशस्त्र बलों को) हमारी प्रतिक्रिया के तरीके लक्ष्य और समय तय करने की पूरी स्वतंत्रता है. भारत-पाकिस्तान का तनाव चरम सीमा परबीते सप्ताह पहलगाम में आतंकी हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है. इस हमले के बाद पीएम मोदी ने कहा था किभारत आतंकवादियों और उनके समर्थकों की पहचान कर उनका पता लगाकर उन्हें दंडित करेगा. पीएम ने साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए यह भी कहाथा कि भारत पृथ्वी के आखिरी छोर तक आतंकियों को खदेड़ देगा. इस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कूटनीतिक हमले को तेज करदिए है.हमले के अगले दिन कैबिनेट सुरक्षा समिति (सीसीएस) की बैठक भी हुई थी. इस बैठक में बताया गया कि इस आतंकी हमले के तार सीमा पारसे जुड़े हुए हैं साथ ही यह भी कहा गया कि यह हमला ऐसे समय हुआ है जब जम्मू-कश्मीर में चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न हुए हैं और राज्य धीरे-धीरेआर्थिक प्रगति की ओर बढ़ रहा है.
दिसंबर से गैर कश्मीरियों को बना रहे थे आतंकी निशाना, आतंकियों की हमला करने की बहुत पहले से थी साजिश “जानें क्या है मामला”

खुफिया एजेंसियों की जांच के दौरान पहलगाम हमले में दो पाकिस्तानी आतंकियों हाशिम मूसा उर्फ सुलेमान और अली भाई के शामिल होने कीजानकारी सामने आई है. इनमें से हाशिम मूसा पाकिस्तानी फौज की स्पेशल फोर्स का पैरा कमांडो रहा है और अब प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा का सदस्य है. वह पिछले साल अक्तूबर में गंदरबल और बारामूला हमले में भी शामिल था. खुफिया एजेंसियों को पता चला है कि वहदिसंबर से कश्मीर में गैर-कश्मीरियों पर किसी बड़े हमले की फिराक में था. हमलावरों में शामिल हाशिम मूसा का कनेक्शन सीधे तौर पर पाकिस्तानीसुरक्षा बलों से रहा है. पाकिस्तानी सेना के स्पेशल सर्विस ग्रुप (एसएसजी) ने पैरा-कमांडो रहे मूसा को भारत पर हमले में मदद करने के इरादे से हीलश्कर में शामिल कराया था. हाशिम मूसा अक्तूबर 2024 में गांदरबल के गगनगिर और बारामूला के बूटा पथरी में हुए आतंकी हमलों में भी हाशिममूसा शामिल रहा है. दहशतगर्दों ने बनाया था निशानागगनगिर में छह गैर-स्थानीय लोग और एक डॉक्टर दहशतगर्दों का निशाना बने थे और बूटा पथरी में दो भारतीय सैन्यकर्मी बलिदान हो गए और दोपोर्टर को भी अपनी जान गंवानी पड़ी थी. इन घटनाओं में पाकिस्तान में प्रशिक्षित दो स्थानीय आतंकियों जुनैद अहमद और अरबाज मीर का नाम सामनेआया था जिन्हें नवंबर और दिसंबर 2024 में सुरक्षा बलों ने अलग-अलग मुठभेड़ों में मार गिराया था. इसके बाद से ही मूसा कश्मीर घाटी में बड़े हमलेकी तैयारी में जुट गया था.मूसा के पाकिस्तानी सेना से जुड़े होने की जानकारी पहलगाम हमले के बाद हिरासत में लिए गए संदिग्ध ओवरग्राउंड वर्कर्स(ओजीडब्ल्यू) यानी आतंकियों के स्थानीय सहयोगियों से पूछताछ के दौरान सामने आई है। इस तथ्य ने एक बार फिर पाकिस्तान का नापाक चेहराउजागर कर दिया है. इन्हीं कश्मीरी ओवरग्राउंड वर्कर्स ने उन आतंकियों की रसद की व्यवस्था करके और टोही में मदद की थी पहलगाम आतंकी हमलेमें आईएसआई की भूमिका के साथ-साथ कश्मीर में पहले हुए कई हमलों में भी मूसा की भूमिका रही है. कश्मीर में पहले का आतंकी हमलाकश्मीर में अक्टूबर 2024 में गांदरबल के गागनगीर में हुए हमले में शामिल था. इसमें छह गैर-स्थानीय लोग और एक डॉक्टर मारे गए थे इसके अलावाबारामूला के बुटा पथरी में हुए हमले में दो सेना के जवान और दो सेना के पोर्टर मारे गए थे इस हमले में मूसा की भूमिका रही है.भारतीय सुरक्षाएजेंसियों का मानना है कि मूसा का सैन्य अतीत पहलगाम हमले में पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई की संलिप्तता का स्पष्ट सबूत है. यह पहलामौका नहीं जब किसी पाकिस्तानी एसएसजी कमांडो की इस तरह की घटना में संलिप्तता सामने आई है. एसएसजी पैरा-कमांडो को गैर-परंपरागत युद्धका कड़ा प्रशिक्षण दिया जाता है. उन्हें ऐसे हमलों के लिए शारीरिक और मानसिक तौर पर तैयार किया जाता है और ये अत्याधुनिक हथियार चलाने मेंभी सक्षम होते हैं.मूसा तीनों हमलों में एक आम अपराधी के रूप में उभरा है पाकिस्तान में प्रशिक्षित दो अन्य स्थानीय आतंकवादी जुनैद अहमद भट औरअरबाज मीर भी गगनगीर और बूटा पथरी हमलों में शामिल थे. लेकिन नवंबर और दिसंबर 2024 में सुरक्षा बलों के साथ अलग-अलग मुठभेड़ों में उन्हेंमार गिराया गया था. इन दोनों आतंकियों को मारे जाने से बाद से मूसा कश्मीर में बाहरी लोगों को निशाना बनाने के आतंकी मिशन को आगे बढ़ाने काकाम कर रहा है.
पहलगाम हमले को लेकर UNSC में हो सकती है चर्चा, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने की नौ देशों के विदेश मंत्रियों से खास बातचीत

पहलगाम हमले को लेकर दुनियाभर से भारत को मिल रहे समर्थन के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को नौ घंटे में नौ देशों के विदेशमंत्रियों के साथ फोन पर बात की. विदेश मंत्री ने उन्हें आतंकवाद के प्रति भारत की शून्य सहिष्णुता की नीति से अवगत कराया.जयशंकर कीअल्जीरिया, ग्रीस, गुयाना, पनामा, स्लोवानिया, सिएरा लियोन और सोमालिया के विदेश मंत्रियों के साथ फोन पर बातचीत ऐसे समय पर हुई. जबयूएनएससी ने 25 अप्रैल को एक बयान जारी करके पहलगाम हमले की कड़ी आलोचना की थी हालांकि इस बयान को पर्याप्त नहीं माना गया. समझा जाता कि सुरक्षा परिषद में एक बार फिर पहलगाम हमले के मुद्दे पर चर्चा की जा सकती है.विदेश मंत्री ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट मेंबताया कि गुयाना के विदेश मंत्री ह्यूग हिल्टन टॉड, स्लोवानियाई विदेश मंत्री तंजा फाजोन, सियरा लियोन के विदेश मंत्री टिम कब्बा और पनामा केविदेश मंत्री जेवियर मार्टिनेट के साथ फोन पर बातचीत हुई. इस दौरान आतंकवाद से सख्ती से निपटने की जरूरत पर बात हुई उन्होंने हमले कीआलोचना करने और भारत के साथ एकजुटता दिखाने के लिए उनका आभार भी जताया.जयशंकर ने बताया कि अल्जीरियाई विदेश मंत्री अहमदअत्ताफ के साथ द्विपक्षीय साझेदारी मजबूत करने पर भी चर्चा हुई. उन्होंने बताया कि भारत जल्द ही उनका स्वागत करने के लिए तत्पर है. जॉर्ज गेरापेट्राइटिस से हुई फोन पर बातचीतदरअसल इससे पहले उनकी ग्रीस के अपने समकक्ष जॉर्ज गेरापेट्राइटिस से भी फोन पर बात हुई. इन सात देशों के अलावा डेनमार्क पाकिस्तान औरकोरिया गणराज्य यूएनएससी के अस्थायी सदस्य है.वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी विदेश मंत्री एस. जयशंकर से फोन पर बात की. उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि कानूनी तरीकों से इन हमलों के लिए जवाबदेही सुनिश्चितकरना जरूरी है उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई.गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने मंगलवार को नियमितसंवाददाता सम्मेलन में कहा मैं आज सुबह महासचिव की कुछ फोन कॉल की जानकारी देना चाहता हूं. गुटेरेस ने विदेश मंत्री जयशंकर और पाकिस्तानके प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से अलग-अलग फोन पर बात की. महासचिव ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की दोबारा कड़ीनिंदा की. उन्होंने कहा कि इन हमलों के लिए कानूनी तरीकों से न्याय और जवाबदेही तय की जानी चाहिए. भारत और पाकिस्तान के बढ़ते तनाव को लेकर जताई चिंताउन्होंने कहा गुटेरेस ने भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई और जोर दिया कि किसी भी तरह के टकराव की स्थिति सेबचना जरूरी है. क्योंकि इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। जारिक ने कहा महासचिव ने तनाव कम करने के किसी भी प्रयास में मदद देने की इच्छाजताई.गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी. इस घटना में पाकिस्तान काहाथ होने की बात सामने आई है. भारत ने कुल चार आतंकियों में से दो के पाकिस्तानी होने का खुलासा किया है. भारत ने इस घटना के मद्देनजरपाकिस्तान पर एक के बाद एक कार्रवाई जारी रखी है और सिंधु जल समझौता तोड़ने के बाद सोमवार को पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल्स से जुड़ी सामग्रीको भी बैन करने का फैसला किया है.
पहलगाम आतंकी हमले को लेकर कांग्रेस पार्टी ने दी बड़ी चेतावनी, कहा पार्टी नियमों का करे पालन “जानें क्या है मामला”

पहलगाम आतंकी हमले को लेकर सियासत शुरू हो गई है. पर्यटकों को धर्म पूछकर गोली मारने को लेकर विधायकों के सवाल उठाने पर कांग्रेस घिरगई है जिसके बाद अब कांग्रेस ने मंगलवार को अपने नेताओं को पहलगाम आतंकी हमले पर पार्टी की आधिकारिक रुख से इतर बयानबाजी करने परकड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्षों, विधायक दल के नेताओं, महासचिवों, प्रभारियों, सांसदों, विधायकों/विधान परिषद सदस्यों, विभिन्न विभागों और संगठनों के प्रमुखों कोलिखे पत्र में सार्वजनिक संचार में अत्यंत अनुशासन और एकरूपता बरतने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि पहलगाम घटना पर अनुचित बयान देने सेबचें.यह पत्र कुछ कांग्रेस नेताओं के विवादास्पद बयानों के बाद आया है जिनके कारण भाजपा ने कांग्रेस पर आतंकवादियों की ओर से बोलने काआरोप लगाकर हमला बोला. वेणुगोपाल ने पत्र में कहा कि कांग्रेस पहलगाम के आतंकी हमले से गहरी पीड़ा में है और इस दुख की घड़ी में राष्ट्र केसाथ अटूट एकजुटता के साथ खड़ी है. हमारी हो रही संकल्प शक्ति की परीक्षाउन्होंने कहा इस महत्वपूर्ण समय में जब हमारी सामूहिक संकल्प शक्ति की परीक्षा हो रही है भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को एकता, परिपक्वता औरजिम्मेदारी का प्रतीक बनना चाहिए.उन्होंने कहा कि पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने 24 अप्रैलको एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया. जिसमें पहलगाम हमले पर पार्टी का स्पष्ट और सुविचारित रुख सामने रखा गया इस प्रस्ताव को इस मामलेपर पार्टी के रुख की सभी सार्वजनिक अभिव्यक्तियों के लिए एकमात्र आधार के रूप में माना जाना चाहिए. ऐसे में यह निर्देश दिया जाता है कि सभीटिप्पणियां, वक्तव्य वह चाहे पार्टी नेताओं, प्रवक्ताओं, मीडिया पैनलिस्टों या कांग्रेस सोशल मीडिया विभाग के आधिकारिक हैंडल द्वारा होंसीडब्ल्यूसी के प्रस्ताव का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए. पदाधिकारियों को सार्वजनिक संवाद में अनुशासन बनाए रखने का आदेशइसको लेकर वेणुगोपाल ने कहा कि सभी पदाधिकारियों को सार्वजनिक संवाद में अत्यंत अनुशासन और निरंतरता बनाए रखने का निर्देश दिया जाताहै. उन्होंने कहा कि पार्टी की ओर से बोलने के लिए अधिकृत लोगों को प्रस्ताव में कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा बताई गई स्थिति तक ही सीमित रहनाचाहिए. अपने नेताओं को सख्त चेतावनी देते हुए वेणुगोपाल ने कहा कि इस निर्देश का उल्लंघन करने पर बिना किसी अपवाद के सख्तअनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.इससे पहले, कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने भी अपने नेताओं को हिदायत दी थी. उन्होंनेकहा था कि कुछ कांग्रेस नेता मीडिया से बात कर रहे हैं जो कांग्रेस के विचारों को नहीं दर्शाते हैं. जयराम रमेश ने एक पोस्ट में लिखा इस संवेदनशीलसमय में इस बात पर कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि कांग्रेस कार्यसमिति का प्रस्ताव, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधीके बयान और अधिकृत एआईसीसी पदाधिकारियों के विचार ही कांग्रेस की स्थिति को दर्शाते हैं.
9 मई को विजय दिवस परेड में शामिल होंगे पीएम मोदी, रुस जाने की यात्रा की रद्द

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है. इस बीच खबर आ रही है किप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना रूस दौरा स्थगित कर दिया है. प्रधानमंत्री 9 मई को मॉस्को में होने वाली विजय दिवस परेड में शामिल नहीं होंगे पीएममोदी को विजय दिवस परेड के लिए रूस ने आमंत्रित किया था.क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने बुधवार को बताया कि प्रधानमंत्री मोदी अगलेमहीने मॉस्को में आयोजित होने वाले विजय दिवस की 80वीं वर्षगांठ समारोह में शामिल नहीं होंगे. स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 9 मई केकार्यक्रम में पीएम मोदी की जगह भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह प्रतिनिधित्व कर सकते हैं.राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मोदी के अलावा चीन केराष्ट्रपति शी जिनपिंग को विजय दिवस समारोह में शामिल होने और रेड स्क्वायर पर विजय परेड देखने के लिए आमंत्रित किया था. शी ने पुष्टि की हैकि वह इस कार्यक्रम में शामिल होंगे. नेताओं की मेजबानी की तैयारीमॉस्को में करीब 20 विदेशी नेताओं की मेजबानी की तैयारी चल रही है.रूस नौ मई को द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर विजय का जश्न मनाता हैऔर इस वर्ष उसने 80वीं वर्षगांठ के समारोह में भाग लेने के लिए चुनिंदा मित्र देशों के नेताओं को आमंत्रित किया है.अक्तूबर 2000 में राष्ट्रपति पुतिनपहली बार नई दिल्ली आए थे और उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ रणनीतिक साझेदारी घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए थे. पिछले 25 वर्षों में यह साझेदारी नई दिल्ली और मॉस्को के बीच एक विशेष साझेदारी के रूप में विकसित हुई है.सीसीएस पहलगाम आतंकी हमलेका बदला लेने के लिए उपलब्ध सैन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकती है. 23 अप्रैल की सीसीएस बैठक में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई थीऔर सभी भारतीय बलों को उच्चतम सतर्कता बनाए रखने का निर्देश दिया गया था. भारत ने संकल्प लिया है कि पहलगाम हमले के दोषियों को न्यायके कटघरे में लाया जाएगा.प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई पहली सीसीएस बैठक में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कदम उठाए। इनमेंसिंधु जल समझौते को निलंबित करना, अटारी सीमा को बंद करना पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करना, उनके कई यूट्यूब चैनल और एक्स हैंडलपर पाबंदी लगाना शामिल है। इसके अलावा पाकिस्तानी नागरिकों को उनके देश लौटने का भी निर्देश दिया गया था.
1990 के मध्यस्थता और सुलह कानून के तहत फैसलों को संशोधित कर सकती है, कोर्ट का आया सुप्रीम फैसला

सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने यह तय करने के लिए बुधवार को फैसला सुनाया कि क्या अदालतें 1996 के मध्यस्थता और सुलहकानून के तहत मध्यस्थ फैसलों में संशोधन कर सकती हैं या नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने 4:1 बहुमत से फैसला सुनाया कि अदालतें मध्यस्थता और सुलह पर1996 के कानून के तहत मध्यस्थता फैसलों को संशोधित कर सकती हैं.मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की ओर से बहुमत से लिए गए फैसले में कहागया है कि ऐसे फैसलों को संशोधित करने की शक्ति का प्रयोग अदालतों की ओर से सावधानी के साथ किया जाना चाहिए. पीठ में मुख्य न्यायाधीश(सीजेआई) संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति संजय कुमार, न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह शामिलहैं.सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी को मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस फैसले का असर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ फैसलों परपड़ेगा. मामले में 13 फरवरी को अंतिम सुनवाई शुरू हुई थी. जिसे इससे पहले 23 जनवरी को तीन जजों की पीठ ने बड़ी पीठ को भेजा था.अरविंद दातार और टीम ने दी दलीलअरविंद दातार और उनकी टीम ने दलील दी कि अदालतों के पास धारा 34 के तहत मध्यस्थ फैसलों को रद्द करने का अधिकार है. अदालतें उन फैसलोंमें संशोधन भी कर सकती हैं क्योंकि यह उनके विवेकाधिकार का हिस्सा है. वहीं दूसरे पक्ष के वकीलों ने कहा कि कानून में ‘संशोधन’ शब्द नहींहै.इसलिए अदालतों को ऐसा कोई अधिकार नहीं दिया जा सकता जो लिखा ही नहीं है. सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि 1996 का कानून एक’पूर्ण और उद्देश्यपूर्ण’ कानून है. जो मध्यस्थता से जुड़े सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है. उन्होंने कहा कि इस कानून में संशोधन काअधिकार न होना एक जानबूझकर लिया गया विधायी निर्णय है. धारा 34 के अनुसार मध्यस्थ फैसलों को प्रक्रिया में गड़बड़ी सार्वजनिक नीति काउल्लंघन या अधिकार क्षेत्र की कमी जैसे कुछ सीमित कारणों के आधार पर ही रद्द किया जा सकता है। धारा 37 उन अपीलों से जुड़ी है. जोमध्यस्थता से जुड़े फैसलों के खिलाफ (जैसे कि फैसला रद्द न करने पर) अदालत में की जाती हैं. इन दोनों धाराओं का उद्देश्य अदालतों की भूमिका कोसीमित करना है. ताकि मध्यस्थता प्रक्रिया तेज और प्रभावी रहे.
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुआ पाकिस्तान सम्मेलन को लेकर जमकर बवाल, जानें क्या है पूरा मामला

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के साउथ एशिया इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित ‘पाकिस्तान सम्मेलन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. छात्रों ने इस आयोजन कीआलोचना करते हुए कहा कि इससे राज्य प्रायोजित आतंकवाद को वैधता मिल सकती है खासकर उस समय जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हालही में एक दर्दनाक आतंकी हमला हुआ. जिसे छात्रों ने धार्मिक आधार पर किया गया नरसंहार बताया.पाकिस्तान सम्मेलन को लेकर हावर्ड यूनिवर्सिटीकी छात्रा सुरभि तोमर ने अपनी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि पहलगाम में जो हुआ वह एक धर्म-आधारित लक्षित हत्या थी. ऐसे समय में जबहार्वर्ड ऐसे लोगों को बुलाता है. जिन्होंने वैचारिक रूप से ऐसे हमलों को जायज़ ठहराया है. तो यह खतरा होता है कि हमारे कैंपस में आतंक समर्थकविचारों को वैधता मिल जाए.उन्होंने कहा कि यह आयोजन पहले से तय था और यह घटना संयोगवश उसी समय के आसपास हुई. लेकिन फिर भीइस तरह के वक्ताओं को बुलाना उचित नहीं है. अमेरिका विदेश मंत्री ने की मांगदरअसल इसको लेकर उन्होंने बताया कि छात्रों ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मांग की है कि ऐसे अधिकारियों को वीजा न दिया जाए जोआतंक से जुड़े विचारों का समर्थन करते हों. इसके साथ ही सुरभि ने आगे कहा कि धार्मिक कारणों से हुए हमले के बाद चुप रहना गलत है. हमने 65 देशों के छात्रों से समर्थन पाया. उन्होंने कहा कि हमने पीड़ितों की गवाही पढ़ी और नैतिक जिम्मेदारी समझते हुए बोलने का फैसला लिया.इसकेअलावा एक अन्य छात्रा रश्मिनी कोपरकर ने भी निराशा जताई. साथ ही कहा कि इस आयोजन में भाग लेने वाले मेहमानों ने पहलगाम हमले की न तोनिंदा की और न ही कोई संवेदना दिखाई. उन्होंने कहा कि हम अपेक्षा कर रहे थे कि कार्यक्रम में शामिल अधिकारी संवेदनशीलता दिखाएंगे और हमलेकी निंदा करेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ कई मेहमान ऐसे देशों से आए थे जो वर्षों से आतंकवाद को बढ़ावा देते रहे हैं.बढ़ते विवाद के बीच हार्वर्डयूनिवर्सिटी के साउथ एशिया इंस्टीट्यूट ने एक आधिकारिक बयान जारी कर आयोजन का बचाव किया. संस्थान ने कहा कि ‘पाकिस्तान सम्मेलन’ छात्रों और उनके फैकल्टी सलाहकार द्वारा स्वतंत्र रूप से आयोजित की गई थी और इसमें किसी दाता से सलाह नहीं ली गई थी. साथ ही बयान में यहभी कहा गया कि हम पहलगाम हमले से प्रभावित भारत के नागरिकों के साथ दुख साझा करते हैं और गहरी संवेदना प्रकट करते हैं.