ट्रंप–ममदानी मुलाकात पर थरूर की टिप्पणी से सियासी घमासान, भाजपा ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर साधा निशाना

कांग्रेस सांसद शशि थरूर के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और न्यूयॉर्क मेयर जोहरान ममदानी की मुलाकात को लेकर किए गए पोस्ट को भाजपा नेहाथोंहाथ लिया है। भाजपा ने शनिवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल दागा कि क्या लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को ‘संदेशसमझ में आएगा’? शशि थरूर ने अमेरिका में राजनीतिक साझेदारी के प्रदर्शन की तारीफ की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस मेंन्यूयॉर्क के नवनिर्वाचित मेयर और अपने कट्टर आलोचकों में से एक जोहरान ममदानी से मुलाकात वाली एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर नेमतदाताओं की इच्छा का सम्मान करने और राष्ट्र के बेहतर हित के लिए काम करने की बात कही थी. लोकतंत्र को इसी तरह काम करना चाहिएकांग्रेस नेता ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘लोकतंत्र को इसी तरह काम करना चाहिए। बयानबाजी पर बिना किसी रोक-टोक के चुनावों में अपने नजरिये केलिए जोश से लड़ें, लेकिन एक बार जब चुनाव खत्म हो जाए और लोग अपना जनादेश दे दें, तो उस देश के साझा हितों में एक-दूसरे के साथ सहयोगकरना सीखें जिसकी सेवा करने का आप दोनों ने संकल्प लिया है। मैं भारत में भी ऐसा ही देखना चाहूंगा – और मैं अपनी भूमिका निभाने की कोशिशकर रहा हूं।”कांग्रेस सांसद की इस टिप्पणी को चुनाव बाद आपसी सहयोग की बड़ी अपील के तौर पर देखते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला नेराहुल गांधी पर निशाना साधा। शहजाद पूनावाला ने थरूर की पोस्ट को टैग करते हुए कहा, ‘एक बार फिर शशि थरूर ने कांग्रेस को याद दिलाया हैकि परिवार को नहीं, बल्कि भारत को प्राथमिकता देनी चाहिए। लोकतांत्रिक तरीके से बर्ताव करना चाहिए, न कि हारे हुए लोगों की तरह। लेकिनक्या राहुल गांधी को संदेश मिलेगा? शशि थरूर के खिलाफ एक और फतवा?” भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधाऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब शशि थरूर के किसी बयान या टिप्पणी पर भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा हो। हाल ही में एक कार्यक्रम मेंप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की तारीफ करने पर उनकी पार्टी के नेताओं ने कड़ी आलोचना की थी। कांग्रेस के पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने थरूर कोपाखंडी बताते हुए सवाल पूछा था कि आप कांग्रेस में क्यों हैं? कांग्रेस कई मौकों पर विपक्षी नेताओं की तारीफ करने की वजह से तिरुवनंतपुरम केसांसद थरूर से दूरी बना कर चलती है। कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि ये बयान उनके निजी हैसियत से दिए गए हैं और पार्टी का इससे लेना-देनानहीं है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब शशि थरूर के किसी बयान या टिप्पणी पर भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा हो। हाल ही में एककार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की तारीफ करने पर उनकी पार्टी के नेताओं ने कड़ी आलोचना की थी।
क्या कांग्रेस अब भारत-विरोधी ताक़तों के साथ खुलकर खड़ी हो रही है?-गौरव भाटिया ने उठाए गंभीर सवाल

कांग्रेस पार्टी के हालिया राजनीतिक रुख और उसके अंतरराष्ट्रीय सम्पर्कों ने देश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठप्रवक्ता गौरव भाटिया ने पार्टी पर आरोप लगाया है कि वह ऐसे व्यक्तियों और संगठनों से हात मिला रही है, जो भारत की छवि, नीति और संवैधानिकमूल्यों पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। उनके अनुसार यह स्थितियाँ केवल संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं। अंतरराष्ट्रीय चेहरों से कांग्रेस की नजदीकी—एक उभरता पैटर्नगौरव भाटिया ने कहा कि कांग्रेस की गतिविधियाँ पिछले कुछ वर्षों में एक निश्चित पैटर्न का संकेत देती हैं। पहले इल्हान उमर, फिर जॉर्ज सोरास औरअब मिचेल बेचेलेट ये सभी ऐसे नाम हैं जिन्होंने बार-बार भारत की नीतियों या उसकी संप्रभुता पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि कांग्रेस पहले इनलोगों को परोक्ष समर्थन देती थी, लेकिन अब वह पूरी तरह खुले मंच पर उनके साथ खड़ी दिखाई दे रही है। यह न केवल कांग्रेस की सोच में बदलावदिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि वह किस दिशा में जा रही है। इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार पर विवाद भारत के मंच पर भारत–विरोधी आवाज़?इसी संदर्भ में इंदिरा गांधी शांति, निरस्त्रीकरण और विकास पुरस्कार–2024 की समारोह भी चर्चा में रहा। कार्यक्रम भारत के नाम से आयोजित हुआ, मंच भारत का था, पुरस्कार भारत की पूर्व प्रधानमंत्री के नाम से था, लेकिन सम्मान चिली की पूर्व राष्ट्रपति मिचेल बेचेलेट को दिया गया जो भारत कीआंतरिक नीतियों पर खुलकर सवाल उठा चुकी हैं। गौरव भाटिया ने कहा कि यह निर्णय देश की जनता को आहत करता है, क्योंकि एक विदेशी नेता, जिसने भारतीय संसद द्वारा पारित CAA पर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की, उसे भारत के नाम पर सम्मानित किया गया। उनका कहना है कियह कदम कांग्रेस की राजनीतिक मंशाओं को उजागर करता है। क्या मिचेल बेचेलेट की याचिका कांग्रेस के संकेत पर दायर हुई?इस पुरस्कार से एक और सवाल उभरा जिस व्यक्ति ने भारत के नागरिकता कानून को लेकर न्यायालय में चुनौती दी, क्या उसके पीछे कांग्रेस की कोईभूमिका थी? गौरव भाटिया ने कहा कि मिचेल बेचेलेट भारतीय नागरिक नहीं हैं, फिर भी उन्होंने भारत की नीति पर आपत्ति जताने के लिए अदालत कादरवाज़ा खटखटाया। यह स्वाभाविक है कि लोग यह पूछें कि क्या यह कदम सोनिया गांधी या राहुल गांधी के समर्थन या सुझाव से उठाया गया था। प्रधानमंत्री की टिप्पणी और कांग्रेस की वैचारिक दिशाप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि कांग्रेस का DNA मुस्लिम माओवादी कांग्रेस बन चुका है। गौरव भाटिया ने इस टिप्पणी का उल्लेखकरते हुए कहा कि माओवादी सोच अराजकता और कानून-विरोध की प्रतीक रही है। यदि कांग्रेस अब उन व्यक्तियों को बढ़ावा दे रही है जिनकीविचारधारा भारत की संवैधानिक व्यवस्था को चुनौती देती है, तो यह स्वाभाविक है कि देश में चिंता बढ़े। यह रुझान केवल वैचारिक विचलन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों के प्रति संवेदनहीनता भी दर्शाता है। कांग्रेस की राजनीति का केंद्र क्या अब केवल सत्ता है?गौरव भाटिया का कहना है कि कांग्रेस आज केवल सत्ता की लालसा में डूबी हुई दिखाई देती है। देशहित, नीति, लोकतांत्रिक संस्थाएँ इन सबकीउपेक्षा कांग्रेस की रणनीति से साफ दिखती है। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी द्वारा मिचेल बेचेलेट को सम्मानित करना न केवल राजनीतिक रूप सेअसंवेदनशील था, बल्कि यह कदम प्रत्येक भारतीय की गरिमा को भी ठेस पहुँचाता है। भारत के मंच पर ऐसे व्यक्ति को सम्मानित करना, जो बार-बारभारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बोलता रहा है, कांग्रेस की मानसिकता को उजागर करता है। कांग्रेस किस दिशा में बढ़ रही है?गौरव भाटिया ने कहा कि कांग्रेस पार्टी एक समय में भारत की मुख्यधारा की राजनीतिक शक्ति थी, लेकिन आज वह अपने वैचारिक मार्ग से पूरी तरहभटक चुकी है। उनके अनुसार कांग्रेस अब विदेशी विचारों और समूहों के सहारे भारत की राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है, जोलोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक है। उन्होंने कहा कांग्रेस के DNA में अब भारत-विरोध खुलकर दिखाई देने लगा है। यह स्थिति गंभीर भी है औरचिंताजनक भी। कांग्रेस के व्यवहार को देखते हुए जनता भी सवाल पूछ रही है क्या यह पार्टी अब भी भारत के हितों की राजनीति करती है, या फिर वहसिर्फ सत्ता के लिए किसी भी सीमा तक जाने को तैयार है?
क्या SIR से ममता बनर्जी घबरा गई हैं?—गुरु प्रकाश पासवान का बड़ा बयान

पश्चिम बंगाल में विशेष पहचान पुनरीक्षण (SIR) को लेकर लगातार विवाद खड़ा किया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता गुरु प्रकाशपासवान ने इसे ममता बनर्जी की राजनीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि एक स्पष्ट, शांतिपूर्ण और संवैधानिक प्रक्रिया पर बेवजह संदेह पैदा किया जारहा है। सर्वोच्च न्यायालय पहले ही कर चुका है SIR को संवैधानिक घोषितगुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि SIR कोई नई या संदेहास्पद प्रक्रिया नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय कई बार इसे पूरी तरह संवैधानिक, आवश्यक औरऐतिहासिक प्रक्रिया बता चुका है। इसके बावजूद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार शंका और विरोध का माहौल बना रही हैं। उनकेअनुसार, यह सीधे-सीधे संविधान की भावना के खिलाफ है और जनता को भ्रमित करने का प्रयास है। अन्य राज्यों में शांति, लेकिन बंगाल में तनाव क्यों?गुरु प्रकाश पासवान ने बताया कि बिहार में SIR पूरी तरह शांतिपूर्वक चल रही है। लोगों में कोई तनाव नहीं है, कोई विरोध नहीं है, और सभी प्रक्रियाको सकारात्मक रूप से स्वीकार कर रहे हैं। अन्य राज्यों में भी यह प्रक्रिया सहज और सरल रूप से चल रही है। तो फिर केवल पश्चिम बंगाल में ही इतनाशोर-शराबा क्यों? उनका स्पष्ट आरोप है कि यह भ्रम फैलाने और राजनीतिक लाभ लेने की रणनीति है। बीएलओ और अधिकारियों को धमकी—एक गंभीर आरोपगुरु प्रकाश पासवान ने तृणमूल कांग्रेस पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों को खुले तौर पर डराया और धमकाया जा रहा है।बीएलओ को आदेशों का पालन न करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, और उन्हें भयभीत किया जा रहा है ताकि SIR बाधित हो सके। उन्होंने कहाकि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि जब एक कर्मचारी सिर्फ अपने काम के लिए परेशान किया जाए, तो यह लोकतांत्रिक ढांचे पर सीधा प्रहारहै। खेला होगा की हिंसा का स्मरण और नया खतरागुरु प्रकाश पासवान ने याद दिलाया कि खेेला होगा के नाम पर पहले भी पश्चिम बंगाल में भयंकर हिंसा हुई थी, जिसका असर आम लोगों ने झेलाथा। उनका प्रश्न है क्या ममता बनर्जी SIR प्रक्रिया को रोकने के लिए फिर से वही माहौल तैयार करना चाहती हैं? क्या फिर से भय और तनाव कीराजनीति शुरू करने का प्रयास हो रहा है? घुसपैठियों की भागदौड़ और तुष्टिकरण की राजनीति पर निशानागुरु प्रकाश पासवान ने दावा किया कि SIR की घोषणा होते ही बंगाल में घुसपैठियों में भगदड़ मच गई। उनके अनुसार, यह स्पष्ट संकेत है कि ममताबनर्जी ने वर्षों से घुसपैठियों को अपना वोटबैंक बनाकर तुष्टिकरण की राजनीति चलाई है। उन्होंने कहा कि इस बार यह राजनीति सफल नहीं होनेवाली है और सत्य सामने आने लगा है। संविधान सर्वोपरि ममता बनर्जी नहींगुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि कोई भी नेता संविधान से ऊपर नहीं हो सकता। यदि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी SIR जैसी संवैधानिक प्रक्रिया को रोकनेकी कोशिश कर रही हैं, तो यह लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए अत्यंत हानिकारक है। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों की तरह बंगाल को भी इस प्रक्रियाको ईमानदारी से स्वीकार करना चाहिए। बंगाल में विरोध, पीछे की वजह क्या है?गुरु प्रकाश पासवान के अनुसार, SIR को लेकर जो घबराहट और विरोध बंगाल में दिख रहा है, वह तुष्टिकरण और वोटबैंक की राजनीति का परिणामहै। जब पूरा देश शांतिपूर्वक प्रक्रिया का पालन कर रहा है, तो केवल बंगाल में ही अविश्वास और अवरोध क्यों? उनके अनुसार, यह राजनीतिकरणनीति है, जिसका उद्देश्य जनता को भ्रमित करना और सत्य को दबाना है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे संविधान पर विश्वास रखें और किसी भीतरह की अफवाहों या दुष्प्रचार में न आएँ।
दिल्ली सरकार ने रोड कटिंग पर धूल नियंत्रण के लिए कड़े कदम तेज़ किए-मनजिंदर सिंह सिरसा

दिल्ली में सर्दियों के आगमन के साथ ही प्रदूषण का स्तर बढ़ने का खतरा हमेशा बना रहता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ताके नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने इस वर्ष के विंटर एक्शन प्लान पर अत्यधिक ज़ोर दिया है। इसी अभियान के तहत पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसाने रोड कटिंग, निर्माण कार्यों और ध्वस्तीकरण गतिविधियों से होने वाली धूल को प्रदूषण का एक प्रमुख कारण बताते हुए उसके नियंत्रण के लिए कड़ेऔर प्रभावी कदमों की घोषणा की है। धूल को स्रोत पर रोकने की ज़रूरत पर सरकार का फोकसपर्यावरण मंत्री ने स्पष्ट कहा कि दिल्ली में PM2.5 का सबसे बड़ा स्रोत धूल है, जो सड़क निर्माण, खुदाई और निर्माण कार्यों के दौरान बड़ी मात्रा मेंहवा में फैलती है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यदि दिल्ली की हवा को वास्तव में साफ़ करना है, तो धूल को वहीं रोकना होगा जहाँ वह पैदाहोती है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ़ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा का अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा है, क्योंकि हवा में मौजूद महीन कणसीधे फेफड़ों और हृदय पर प्रभाव डालते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि DPCC के धूल नियंत्रण से जुड़े सभी नियमों का पालन अनिवार्य रूप से कियाजाएगा और किसी भी तरह की ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार अब इस दिशा में ज़मीन पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए पूरीतरह तैयार है।निरीक्षणों में तेजी और पूरी दिल्ली में 2000 टीमों की तैनातीसिरसा ने सूचित किया कि इस वर्ष मॉनिटरिंग को पहले की तुलना में कई गुना अधिक मज़बूत किया गया है। दिल्ली सरकार की लगभग दो हज़ार टीमेंलगातार निर्माण स्थलों, रोड कटिंग पॉइंट्स और डंपिंग क्षेत्रों पर नजर रख रही हैं। ये टीमें दिन-रात निरीक्षण करती हैं और कहीं भी धूल नियंत्रण केनियमों में कमी पाई जाने पर तुरंत कार्रवाई करती हैं। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसी भी एजेंसी, विभाग या ठेकेदार को यह सोचने की आवश्यकता नहींकि नियमों का उल्लंघन करने के बाद उन्हें समय मिल जाएगा। इस बार प्रत्येक उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी और यह कार्रवाईइतनी सख़्त होगी कि दोबारा किसी को नियम तोड़ने का मन न बने। DPCC के कड़े नियमों को लागू करने पर सरकार की दृढ़तादिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने रोड कटिंग और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रित करने के लिए कई महत्वपूर्ण मानक तय किए हैं। इनमानकों का उद्देश्य निर्माण स्थल के हर चरण में धूल को फैलने से रोकना है। सड़कों पर चल रही खुदाई में धूल को रोकने के लिए ऊँचे विंड बैरियरलगाए जा रहे हैं, ताकि उड़ती हुई मिट्टी सीधे सड़क पर या आसपास के क्षेत्रों में न फैले। निर्माण सामग्री को लगातार ढका और गीला रखा जा रहा हैताकि वह हवा में न उड़ सके। उस सामग्री को ढोने वाले सभी वाहनों को पूरी तरह ढककर चलाना आवश्यक है और उनके लिए PUC प्रमाणनअनिवार्य कर दिया गया है। धूल नियंत्रित करने के लिए नियमित पानी के छिड़काव और साफ़-सफाई को भी प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है। इसकेअलावा निर्माण क्षेत्रों में काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए उन्हें मास्क और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना भी अब अनिवार्य है।दिल्ली सरकार ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि धूल नियंत्रण अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं है बल्कि जनस्वास्थ्य की रक्षा का महत्वपूर्णअभियान है। उल्लंघनों पर सख़्त कार्रवाई और जुर्माने की कठोर व्यवस्थादिल्ली सरकार ने यह भी बताया कि धूल नियंत्रण के नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी मुआवज़ा लगाया जा रहा है, जिसकी राशि पाँच लाखरुपये तक पहुँच सकती है। सरकार ने पिछले कुछ सप्ताहों में कई निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया और नियमों का पालन न करने वाले 50 सेअधिक बड़े प्रोजेक्ट्स को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। मंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य नियमों का पालन करवाना है, न किचालान करना। लेकिन यदि कोई संस्था या ठेकेदार जनहित और पर्यावरण सुरक्षा की उपेक्षा करेगा, तो उस पर कठोरतम कार्रवाई ज़रूर होगी। यहकदम दिल्ली की हवा को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। दिल्ली की सड़कों की बड़े पैमाने पर मैकेनिकल सफाईप्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली सरकार रोजाना करीब तीन हज़ार किलोमीटर सड़कों की मैकेनिकल रोड स्वीपर से सफाई करा रही है। इसप्रक्रिया में न केवल धूल हटाई जाती है बल्कि सड़क की सतह पर जमा महीन पार्टिकल्स को भी साफ़ किया जाता है, जो हवा में उड़कर PM2.5 कोबढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही दिल्ली की सीमाओं पर उन सभी ट्रकों को रोका जा रहा है जो बिना वैध कागज़ात या बिना PUC प्रमाणन के प्रवेशकरने की कोशिश करते हैं। प्रदूषणकारी वाहनों की जांच के लिए ट्रैफिक पुलिस और पर्यावरण विभाग संयुक्त अभियान चला रहे हैं। कम्युनिटी किचन के माध्यम से बायोमास जलाने की घटनाओं पर रोकसिरसा ने बताया कि निर्माण स्थलों पर मजदूरों द्वारा बायोमास या कचरा जलाने की समस्या को समाप्त करने के लिए सरकार ने एक अभिनव कदमउठाया है। इस समय दिल्ली में 305 कम्युनिटी किचन सक्रिय हैं, जहाँ रोजाना 5000 से अधिक मजदूरों और वाहन चालकों को भोजन उपलब्धकराया जाता है। यह पहल न केवल प्रदूषण रोकने में सहायक है बल्कि मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा और स्वच्छता को भी सुनिश्चित करती है। नागरिकों के सहयोग की अपीलपर्यावरण मंत्री ने अंत में कहा कि दिल्ली सरकार अपने स्तर पर प्रदूषण को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, लेकिन इस अभियान में नागरिकोंकी भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दिल्लीवासी खुले में कूड़ा जलाने या आग लगाने से बचें और यदि कहीं ऐसा होता हुआ दिखे, तोतुरंत संबंधित विभाग को सूचित करें। उन्होंने कहा कि दिल्ली का वातावरण तभी स्वच्छ होगा जब सरकार, विभाग और नागरिक—तीनों मिलकरसामूहिक प्रयास करेंगे।
डॉ. विक्रांत भूरिया ने उठाई SIR प्रक्रिया और आदिवासी संकट पर गहरी चिंता

देशभर में आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों पर गंभीर सवाल उठाते हुए ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस के चेयरमैन डॉ. विक्रांत भूरिया ने कहा कि सरकारकी जल्दबाज़ी और योजनाओं की खामियों का सबसे बड़ा शिकार आदिवासी बन रहे हैं। उन्होंने SIR प्रक्रिया को आदिवासियों को सिस्टम से बाहरकरने की सोची-समझी रणनीति बताया। SIR की जल्दबाज़ी से आदिवासियों को सबसे अधिक नुकसानडॉ. भूरिया ने कहा कि इस बार SIR यानी स्पेशल समरी रिविज़न की पूरी प्रक्रिया इतनी तेज़ी और जल्दबाज़ी में की गई कि आदिवासी समाज कोसबसे ज्यादा चोट पहुंची है। SIR को ऐसे समय में लागू किया गया जब आदिवासी समुदाय का बड़ा हिस्सा घरों पर मौजूद ही नहीं था और रोज़गारकी तलाश में राज्यों के बाहर या दूर-दराज़ इलाकों में पलायन पर था। उनके अनुसार, सरकार को मालूम था कि आदिवासी समुदाय की उपस्थितिगांवों में कम है, फिर भी प्रक्रिया को उसी अवधि में लागू किया गया ताकि अधिक से अधिक आदिवासियों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा सकें।उन्होंने कहा कि SIR का समय और गति दोनों दर्शाते हैं कि यह केवल चुनावी प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि एक राजनीतिक गणित था जिसमें आदिवासीसमाज को धीरे-धीरे वोटिंग अधिकार से बाहर किया जा रहा है। पलायन से खाली गांवों को बनाया गया बहानाडॉ. भूरिया ने बताया कि जिन इलाकों में SIR की प्रक्रिया चलाई गई, वहाँ स्थिति बेहद चिंताजनक है। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में 70% से भी ज्यादागांव खाली पड़े हैं। रोजगार, मेहनत-मजदूरी और जीवनयापन के लिए आदिवासी बड़ी संख्या में अपने मूल गांव छोड़ देते हैं। ऐसे में SIR की प्रक्रियामें न तो वे अपनी उपस्थिति दर्ज करा पाए और न ही अपने नाम सूची में बने रहने की पुष्टि कर सके। कई घरों में केवल बुजुर्ग महिलाएं या छोटे बच्चेमौजूद थे, जिन्हें न प्रक्रिया की जानकारी थी, न यह समझ कि क्या करना है। भूरिया ने कहा कि इस हालात का फायदा उठाकर अनेक जगहों परआदिवासियों के नाम सीधे काट दिए गए, आपत्तियाँ दर्ज नहीं की गईं और उन्हें वोटर लिस्ट से बाहर कर दिया गया। आदिवासियों को वोटिंग प्रक्रिया से बाहर करने की सिस्टमैटिक कोशिशडॉ. भूरिया ने आरोप लगाया कि यह संयोग नहीं, बल्कि एक सिस्टमैटिक रणनीति है। SIR की प्रक्रिया को ऐसे समय में लागू किया गया जबआदिवासी समुदाय घर पर नहीं था। इससे स्पष्ट हो जाता है कि एक राजनीतिक उद्देश्य के तहत उन्हें चुनावी प्रक्रिया से बाहर किया जा रहा है। उन्होंनेकहा कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश है, जिससे आदिवासियों की राजनीतिक भागीदारी कमजोर हो और उनकालोकतांत्रिक अधिकार खत्म हो जाए। उनके शब्दों में यह साधारण गलती नहीं, बल्कि आदिवासियों को व्यवस्थित तरीके से वोट देने का अधिकार सेदूर करने की साजिश है। BLO पर बढ़ा दबाव, कई जगह तनाव की स्थितिSIR प्रक्रिया में BLO की भूमिका और हालात पर भी उन्होंने चिंता जताई। उन्होंने बताया कि कई BLO बिना सही प्रशिक्षण के इस प्रक्रिया में लगादिए गए, उन पर अत्यधिक काम का दबाव डाला जा रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में उन्हें बड़े विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। कुछ क्षेत्रों मेंअत्यधिक तनाव और दबाव के कारण BLO के आत्महत्या जैसे दर्दनाक मामले भी सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रशासनिक कुप्रबंधन काभयावह परिणाम है, जिसे सरकार छिपाने की कोशिश कर रही है। आदिवासियों के अधिकार और अस्तित्व पर गंभीर हमलाडॉ. विक्रांत भूरिया के अनुसार, SIR प्रक्रिया ने यह साबित कर दिया है कि आदिवासी समुदाय को लगातार हाशिये पर धकेला जा रहा है। उनकीजनगणना, उनकी उपस्थिति, उनके वोट, उनकी पहचान—हर स्तर पर उनकी अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल वोटर लिस्ट कामामला नहीं है, बल्कि लोकतंत्र में आदिवासी समाज की भागीदारी और उनके संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने सरकार से SIR प्रक्रिया को दोबारा और न्यायपूर्ण तरीके से करने की मांग की और कहा कि आदिवासियों को इस तरह सिस्टम से बाहर करने की कोई भी कोशिशलोकतंत्र के लिए खतरा है।