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दिल्ली में हुई स्वराज कौशल की शोकसभा, बेटी बांसुरी स्वराज सहित राजनीतिक और कानूनी हस्तियों नेताओं ने दी अंतिम श्रद्धांजलि

सरिता साहनी07 दिसंबर 2025, नई दिल्ली भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज के पिता, वरिष्ठ वकील और पूर्व मिजोरम राज्यपाल स्वराज कौशल का गुरुवार को निधन हो गया। वे 73 वर्ष के थे।स्वराज कौशल का जन्म 12 जुलाई 1952 को हिमाचल प्रदेश के सोलन में हुआ था। अपने जीवन में उन्होंने कानून और राजनीति के क्षेत्र मेंउल्लेखनीय योगदान दिया और समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाई।स्वराज कौशल सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता थे। उन्होंने वर्षों तक वकालत के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया और कानून के प्रति उनकी गहरी समझऔर न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें विशेष बनाती थी। वे केवल एक कुशल वकील ही नहीं, बल्कि समाज सेवा और देशभक्ति के क्षेत्र में भीसक्रिय रहे। स्वराज कौशल स्वर्गीय सुषमा स्वराज के पति थे, जो भारत की पूर्व विदेश मंत्री रही हैं। उनके परिवार में उनकी बेटी बांसुरी स्वराज भीशामिल हैं, जो वर्तमान में भाजपा सांसद हैं। भारत के सबसे कम उम्र के राज्यपाल बनेउनके निधन से राजनीतिक और कानूनी समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया (एक्स) पर अपने संदेश मेंलिखा: श्री स्वराज कौशल जी के निधन से दुख हुआ है। वे भारत के सबसे कम उम्र के राज्यपाल बने और मिजोरम के लोगों पर अपने कार्यकाल केदौरान गहरा प्रभाव छोड़ा। एक सांसद के रूप में उनके विचार भी महत्वपूर्ण रहे। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनकी बेटी बांसुरी और परिवार केअन्य सदस्यों के साथ हैं। ॐ शांति। निधन से देश ने एक संवेदनशील, ईमानदार और प्रभावशाली व्यक्तित्व खो दियास्वराज कौशल का राजनीतिक जीवन भी अत्यंत सक्रिय और प्रभावशाली रहा। वे भारत के सबसे कम उम्र के राज्यपाल बने और मिजोरम के लोगों केबीच अपने कार्यकाल के दौरान गहरा प्रभाव छोड़ा। उन्होंने अपने प्रशासनिक कौशल और दूरदर्शिता के जरिए राज्य में कई महत्वपूर्ण पहल की। उनकीशोकसभा समारोह आज यानी 7 दिसंबर को दिल्ली के PSOI क्लब, चाणक्यपुरी में आयोजित की गई. यह शोकसभा दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजेतक चली। इस अवसर पर उनके परिवारजन, करीबी मित्र और विभिन्न राजनीतिक व कानूनी हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह में उनकेयोगदान और व्यक्तित्व की चर्चा करते हुए उपस्थित लोगों ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। स्वराज कौशल ने अपने जीवन में कानून और राजनीति केक्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके निधन से देश ने एक संवेदनशील, ईमानदार और प्रभावशाली व्यक्तित्व खो दिया है। उनकी उपलब्धियों औरउनके व्यक्तित्व की छवि हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगी।

दिल्ली एआई ग्राइंड भविष्य की तकनीक की ओर दिल्ली का बड़ा कदम

सरिता साहनी07 दिसंबर 2025, नई दिल्ली दिल्ली में एआई शिक्षा की नई लहरदिल्ली सरकार ने दिल्ली एआई ग्राइंड की शुरुआत करके देश में एक नया इतिहास बनाया है। यह भारत का पहला ऐसा शहर-केंद्रित एआई औरइनोवेशन मूवमेंट है, जो दिल्ली के बच्चों और युवाओं को भविष्य की तकनीकी दुनिया के लिए तैयार करेगा। इस पहल से 1,000 से अधिक स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के पाँच लाख से ज्यादा छात्र लाभ ले सकेंगे। इसका लक्ष्य है कि हर छात्र एआई को समझे, सीखे और इसे अपने जीवनमें उपयोग करने लायक बने। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का दृष्टिकोण तकनीक से सशक्त होगी दिल्लीकार्यक्रम के उद्घाटन पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली ने एआई शिक्षा में देश में सबसे पहले कदम बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी द्वारा तकनीक को बढ़ावा देने की प्रेरणा से दिल्ली ने इस दिशा में काम तेज किया है। उनका मानना है कि नई तकनीक का लाभ हर बच्चा, हर कक्षा और हर समुदाय तक पहुँचना चाहिए। दिल्ली, राजधानी होने के नाते, यह जिम्मेदारी निभाने को तैयार है। एआई ग्राइंड क्या है सीखने और नवाचार का बड़ा आंदोलनदिल्ली एआई ग्राइंड सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसा आंदोलन है जो पूरी शिक्षा व्यवस्था को बदलने की क्षमता रखता है। इस अभियान केतहत छात्रों को एआई सीखने का मौका मिलेगा। वे डिजाइन थिंकिंग, समस्या को समझने, समाधान के तरीके खोजने और छोटे-बड़े प्रोटोटाइप बनानेजैसी क्षमता विकसित करेंगे। शिक्षा संस्थानों में एक ऐसा माहौल बनाया जाएगा, जहाँ छात्र अपने विचारों से वास्तविक जीवन की समस्याओं का हलढूँढ सकें। धीरे-धीरे ये संस्थान छोटे-छोटे इनोवेशन लैब्स में बदल जाएँगे। शिक्षा मंत्री आशीष सूद का भविष्य–तैयारी मॉडलशिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा कि यह पहल आने वाले एआई दशक को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। आनेवाले चार महीनों में हजारों शिक्षकों को एआई मेंटर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे स्कूलों में एआई सीखने का मजबूत माहौल बन सकेगा।उन्होंने बताया कि छात्रों द्वारा कई नए मॉडल और प्रोटोटाइप विकसित किए जाएँगे, जिन्हें विशेषज्ञों और उद्योग जगत के साथ मिलकर आगे बढ़ायाजाएगा। इसके अलावा दिल्ली के युवाओं के विचारों के आधार पर एक राष्ट्रीय इनोवेशन दस्तावेज भी तैयार होगा, जिसे पूरे देश में साझा कियाजाएगा। इससे दिल्ली एआई आधारित शिक्षा सुधारों की प्रयोगशाला के रूप में स्थापित होगी। युवाओं के लिए 10 मुख्य क्षेत्रों में काम करने का अवसरयह कार्यक्रम 10 से 25 वर्ष तक के युवाओं को विभिन्न सामाजिक और औद्योगिक क्षेत्रों में कार्य करने का मौका देगा। इनमें परिवहन, स्वास्थ्य, पर्यटन, ऊर्जा, पर्यावरण, शिक्षा, सुशासन, खाद्य प्रणाली, जल प्रबंधन और सार्वजनिक सेवाएँ शामिल हैं। इन क्षेत्रों में वास्तविक समस्याएँ होंगी, जिन पर छात्र अपने समाधान पेश करेंगे। इससे उन्हें सीखने, सोचने और समाज के लिए नया कुछ बनाने का अवसर मिलेगा। इनोवेशन मॉडल विचार से लेकर जमीन तक लागू होने की प्रक्रियादिल्ली एआई ग्राइंड एक वार्षिक आंदोलन होगा, जो हर साल नई शुरुआत के साथ आगे बढ़ेगा। इसके अंतर्गत कई चरण होंगे। पहले छात्रों कोएआई और इनोवेशन की समझ दी जाएगी। फिर उन्हें अपने-अपने जिलों में भाग लेने का मौका मिलेगा। बाद में शहर-स्तर पर उनके कामों कोदिखाया जाएगा। जो विचार अच्छे होंगे, उन्हें पायलट रूप में लागू करने की कोशिश की जाएगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह है कि किसी भी छात्र काविचार सिर्फ कागज़ पर न रह जाए, बल्कि उसे वास्तविक रूप दिया जाए। एआई शिक्षा का उद्देश्य बच्चे बनें तकनीक के निर्मातासूद ने कहा कि बच्चों को सिर्फ एआई का उपयोग करना नहीं आना चाहिए, बल्कि उन्हें यह भी समझना चाहिए कि तकनीक कैसे काम करती है औरउसे बेहतर कैसे बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चे सिर्फ उपभोक्ता न रहें, बल्कि तकनीक के ऐसे निर्माता बनें जो समाज की समस्याओं कोसमझकर नए समाधान तैयार कर सकें। एआई का जिम्मेदार उपयोग, पक्षपात को पहचानना और सुधारना जैसी सीखें भी इस कार्यक्रम के माध्यम सेदी जाएँगी। इसरो अंतरिक्ष यात्री का प्रेरक संदेशइस अवसर पर इसरो के अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अपने विचार रखते हुए कहा कि दिल्ली का यह कदम देश के भविष्य के लिए बहुतमहत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब नेतृत्व तकनीक और शिक्षा पर ध्यान देता है, तभी देश विकसित भारत 2047 की दिशा में आगे बढ़ सकता है।उनके अनुसार ऐसे कार्यक्रम आने वाले समय में छात्रों की सोच और क्षमता दोनों को नई दिशा देंगे। कार्यक्रम की खास झलकियाँ रचनात्मकता और तकनीक का संगमकार्यक्रम में कई विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षक, उद्योग प्रतिनिधि और सैकड़ों छात्र शामिल हुए। इस मौके पर दिल्ली एआई ग्राइंड का ब्रोशरजारी किया गया। स्कूल के बच्चों ने एआई पर आधारित जिंगल प्रस्तुत किया, जिससे कार्यक्रम में ऊर्जा और उत्साह भर गया। छात्र अपने बनाए पेपरप्रोटोटाइप लेकर मंच पर आए और अपने विचारों का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में आधिकारिक टीज़र भी लॉन्च किया गया। इसके अलावाInnovation Bus on Wheels को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, जो पूरे शहर में एआई आंदोलन को पहुँचाने का काम करेगी। दिल्ली की नई पीढ़ी अब एआई युग का नेतृत्व करने को तैयारदिल्ली एआई ग्राइंड एक मजबूत शुरुआत है, जो आने वाले समय में दिल्ली को एआई शिक्षा और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनाएगी। यह पहल छात्रोंमें आत्मविश्वास, रचनात्मकता और तकनीकी समझ दोनों को बढ़ाएगी। यह कार्यक्रम दिल्ली के बच्चों को सिर्फ तकनीक का उपयोग करना नहीं, बल्कि तकनीक को बनाने और समाज की भलाई के लिए आगे बढ़ाने की दिशा में तैयार करेगा।

दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण पर सबसे बड़ा एक्शन — पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिए कड़े निर्देश

सरिता साहनी07 दिसंबर 2025, नई दिल्ली दिल्ली सरकार का व्यापक मिशन साफ़ हवा, सुरक्षित भविष्यदिल्ली सरकार ने प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए एक बड़े और लगातार चलने वाले अभियान की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व मेंयह मिशन अब पूरे साल चलने वाला कार्यक्रम बन चुका है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने हाल ही में अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठककर स्पष्ट किया कि प्रदूषण रोकने के लिए अब किसी भी विभाग या एजेंसी की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। इंडस्ट्रीज़ का सात दिन में सर्वे गैर–अनुरूपित यूनिट्स पर ज़ीरो टॉलरेंसबैठक में सबसे अहम निर्णय यह लिया गया कि दिल्ली के सभी ज़िलों में मौजूद इंडस्ट्रीज़ का पूरा सर्वे सिर्फ़ सात दिनों में पूरा किया जाए। इसकाउद्देश्य यह है कि कौन-सी इंडस्ट्रीज़ कानूनी नियमों का पालन नहीं कर रहीं, उनकी तुरंत पहचान हो सके। कई इलाकों में बिना अनुमति, रिहायशी क्षेत्रोंमें या गैर-अनुरूपित ज़ोन में चल रही इंडस्ट्रीज़ प्रदूषण का बड़ा कारण बनती हैं। इसलिए मंत्री सिरसा ने निर्देश दिया कि ऐसे सभी यूनिट्स पर तुरंतकार्रवाई हो और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें बंद भी किया जाए। MCD को मैदान–स्तर पर निरीक्षण का आदेशMCD के डिविजनल कमिश्नर को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे नॉन-कनफॉर्मिंग इंडस्ट्रियल एरिया और दिल्ली में चल रही सभी निर्माण साइट्सका विस्तृत सर्वे करवाएँ। निर्माण स्थलों पर धूल उड़ना, कचरे का सही प्रबंधन न होना और सुरक्षा उपायों की कमी जैसे कारणों से प्रदूषण बढ़ जाताहै। इसलिए अब हर निर्माण स्थल की जाँच होगी और जहाँ भी नियमों का पालन नहीं मिलेगा, वहाँ जुर्माने और सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी। सड़कों और खाली प्लॉट्स से उठने वाली धूल पर सख़्त नियंत्रणदिल्ली की हवा में धूल की बड़ी मात्रा सड़कों की खराब स्थिति और खाली पड़े प्लॉट्स में जमा होती मिट्टी के कारण फैलती है। पर्यावरण मंत्री ने सभीविभागों को निर्देश दिया कि ऐसे सभी स्थानों की पूरी सूची तुरंत तैयार की जाए। सड़क की मरम्मत के काम को तेज़ किया जा रहा है और गड्ढों को भरनेकी प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है। इस साल अब तक 42,000 से अधिक गड्ढे भरे जा चुके हैं, जो पिछले साल की तुलना में दोगुने से भीअधिक है। यह धूल नियंत्रण की दिशा में बड़ी उपलब्धि है। DPCC की सख़्त कार्रवाई जुर्माने और साइट्स बंद करने से बढ़ी जवाबदेहीपिछले कुछ दिनों में DPCC की टीमें लगातार निरीक्षण कर रही हैं। इन निरीक्षणों में कई निजी और सरकारी दोनों तरह की एजेंसियाँ नियमों कापालन करते नहीं पाई गईं। 1,756 निर्माण स्थलों की जाँच में 556 नोटिस जारी किए गए और लगभग सात करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया।इसके साथ ही 48 निर्माण साइट्स को बंद किया गया। सरकारी एजेंसियों जैसे DDA, DSIIDC, MCD, PWD और DMRC पर भी नियमों केउल्लंघन के चलते एक करोड़ रुपये का नोटिस जारी किया गया। यह पहली बार है जब सरकारी विभागों पर भी इतनी कड़ी कार्रवाई हुई है, जिससे यहसंदेश गया है कि कानून सबके लिए बराबर है। रिहायशी इलाकों में अवैध इंडस्ट्रीज़ पर निगरानी बढ़ीदिल्ली के कई रिहायशी इलाकों में बिना अनुमति इंडस्ट्रीज़ चलती रही हैं, जो हवा में धुआँ और जहरीले तत्व छोड़कर लोगों की सेहत को नुकसानपहुँचाती हैं। DPCC की टीमें ऐसे स्थानों की नियमित पहचान कर रही हैं। पर्यावरण मंत्री ने कहा कि रिहायशी क्षेत्रों में अवैध इकाइयों को किसी भीकीमत पर नहीं चलने दिया जाएगा और इन पर लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। सड़क निर्माण, सफ़ाई और EV नीति से मिली नई गतिदिल्ली सरकार ने सड़क निर्माण और सफ़ाई पर भी तेज़ी से काम किया है। साफ़ सड़कों से न सिर्फ़ धूल कम फैलती है बल्कि शहर का जीवन भीबेहतर होता है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों का असर भी साफ़ दिख रहा है। दिसंबर 2024 में दिल्ली में 3.46 लाखइलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत थे, जो नवंबर 2025 तक बढ़कर 4.54 लाख हो गए। यह वृद्धि बताती है कि दिल्ली की EV नीति सफल हो रही है औरइससे प्रदूषण कम करने में मदद मिल रही है। खुले में कचरा और बायोमास जलाने पर पूरी तरह रोकखुले में कचरा या बायोमास जलाना भी प्रदूषण का बड़ा कारण बनता है। इसे रोकने के लिए 1,823 टीमें तैनात की गई हैं, जिनमें से 633 टीमेंविशेष रूप से ओपन बर्निंग रोकने में लगी हैं। दिल्ली सरकार मजदूरों को ठंड से बचाने के लिए इलेक्ट्रिक हीटर भी वितरित कर रही है ताकि वे आगजलाने पर मजबूर न हों। अब तक 1,407 RWAs को 3,377 हीटर दिए जा चुके हैं और कुल 10,000 हीटर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वैज्ञानिक अध्ययन और इनोवेशन से मिलेगा भविष्य का समाधानदिल्ली सरकार IIT Delhi और IITM के साथ मिलकर एक सोर्स एपॉर्शनमेंट स्टडी शुरू करने जा रही है, जिससे यह पता लगाया जा सकेगा किदिल्ली में प्रदूषण के मुख्य स्रोत कौन से हैं। साथ ही सरकार द्वारा शुरू किए गए इनोवेशन चैलेंज में 278 सुझाव आए, जिनमें से 200 को आगे कीप्रक्रिया के लिए चुना गया है। विशेषज्ञ इन सुझावों का मूल्यांकन करेंगे ताकि प्रदूषण कम करने के नए और प्रभावी उपाय लागू किए जा सकें। जनरेटरों पर सख़्त नियम रेट्रोफिटिंग अनिवार्यBS-IV और उससे नीचे के सभी जनरेटरों में एंटी-पॉल्यूशन डिवाइस लगाना अब ज़रूरी कर दिया गया है। बिना रेट्रोफिटिंग के कोई भी जनरेटर चलानेकी अनुमति नहीं होगी। यह बदलाव दिल्ली की हवा को साफ़ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सभी विभागों और नागरिकों की संयुक्त ज़िम्मेदारीपर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने स्पष्ट कहा है कि दिल्ली की हवा को साफ़ करना सिर्फ़ सरकार का काम नहीं, बल्कि सभी विभागों, एजेंसियोंऔर नागरिकों की ज़िम्मेदारी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के विज़न के अनुसार दिल्ली को ऐसा शहर बनाना है जहाँ साफ़ हवा सिर्फ़ सपना न रहे, बल्किलोगों की रोज़मर्रा की हकीकत बने। यह अभियान दिल्ली की हवा को सुरक्षित और प्रदूषण-मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है और आने वालेसमय में इसके और अधिक सकारात्मक परिणाम देखने की उम्मीद है।