कनाडा से प्रत्यर्पित पाकिस्तानी युवक पर न्यूयॉर्क में यहूदी समुदाय पर हमले की साजिश का आरोप, अमेरिका की कोर्ट में पेशी आज

International News: कनाडा में रह रहे एक पाकिस्तानी नागरिक को अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया है. इस पाकिस्तानी पर अमेरिका के न्यूयॉर्क मेंयहूदियों के खिलाफ बड़े सामूहिक हत्याकांड की साजिश रचने का आरोप है। आरोपी हमास के इस्राइल पर 7 अक्तूबर को किए गए आतंकी हमलेकी पहली वर्षगांठ पर अमेरिका में हमला करने की साजिश रच रहा था.आरोपी की पहचान शाहजेब खान उर्फ शाहजेब जादून (20 वर्षीय) के रूप मेंहुई है. शाहजेब को मंगलवार को कनाडा से अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया शाहजेब पर न्यूयॉर्क के सदर्न डिस्ट्रिक्ट में एक यहूदी सेंटर में हमले कीसाजिश रचने का आरोप है. अमेरिका के न्याय विभाग ने जारी किया बयानअमेरिका के न्याय विभाग ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी. शाहजेब के खिलाफ इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक और अल-शाम जैसे आतंकीसंगठनों को समर्थन और संसाधन उपलब्ध कराने और आतंकी गतिविधियों में शामिल होने जैसे आरोप लगे हैं. शाहजेब खान को बुधवार को अदालतमें पेश किया जाएगा एफबीआई निदेशक काश पटेल ने भी सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में दावा किया कि शाहजेब ने कथित तौर परअमेरिका की सीमा में घुसकर यहूदी समुदाय पर हमले की साजिश रची. काश पटेल ने कहा कि हमास के इस्राइल पर किए गए 7 अक्तूबर के हमलेकी पहली वर्षगांठ पर शाहजेब ने भी सामूहिक हत्याकांड की योजना बनाई थी. अमेरिका के अटॉर्नी जे क्लेटन ने बताया कि खान ने अत्याधुनिकहथियारों से हमले की योजना बनाई थी और उसने ज्यादा से ज्यादा यहूदी लोगों को निशाना बनाना चाहता था. आरोपी आईएसआईएस के समर्थन मेंऐसा करने वाला था फिलहाल अमेरिकी जांच एजेंसियां अब आरोपी से पूछताछ करेंगी.
स्विट्जरलैंड दौरे पर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, मुक्त व्यापार समझौते से भारत को 100 अरब डॉलर के निवेश की उम्मीद

International News: भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल स्विट्जरलैंड दौरे पर हैं। भारत और स्विट्जरलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते परहाल ही में मुहर लगी है और सितंबर से यह समझौता लागू हो जाएगा. इसी को लेकर बात करने के लिए पीयूष गोयल स्विट्जरलैंड में हैं. गोयल नेसमझौते को लेकर कहा कि इससे दोनों देशों को फायदा होगा और भारत स्विट्जरलैंड का विश्वसनीय सहयोगी बनकर उभरेगा. गोयल ने कहा है कि’स्विट्जरलैंड में 100 अरब डॉलर का निवेश आने की उम्मीद है. आज स्विट्जरलैंड की 1500 से ज्यादा कंपनियां रिसर्च, प्रीसिशन, मैन्युफैक्चरिंग औरइंजीनियरिंग के काम में लगी हुई हैं. इन कंपनियों को उपकरण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं. गोयल ने कहा कि ‘मेरी यहां कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथबैठक हुई जो काफी अच्छी रही दोनों देशों में कई क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं हैं. जिनमें अंतरिक्ष, इंजीनियरिंग और खाद्य प्रसंस्करण और कृषि जैसेक्षेत्र शामिल हैं. भारत को मिल सकता है तकनीक फायजाभारत को स्विट्जरलैंड की तकनीक से फायदा मिल सकता है. हमारे पास दक्ष लोग हैं हमारे यहां श्रम सस्ता भी है भारत स्विट्जरलैंड का विश्वसनीयसहयोगी बनेगा. पीयूष गोयल ने बताया कि ‘भारत की कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत हो रही है. यूरोपीय संघ के साथहमारी मंत्री स्तर की तीन बैठकें हो चुकी हैं और जल्द ही मुक्त व्यापार समझौते पर सहमति बनने की उम्मीद हैय न्यूजीलैंड के साथ भी जल्द बातचीतपूरी हो सकती हैं अमेरिका के साथ भी चर्चा चल रही है और सितंबर 2025 तक इसके होने की उम्मीद है. पेरू और चिली के साथ भी बात चल रही है. स्विट्जरलैंड की आर्थिक मामलों की मंत्री हेलेना एर्टीडा से सवाल किया गया कि क्या वे भारत को चीन के विकल्प के तौर पर देखती हैं? इस परउन्होंने कहा कि ‘हम दुनिया में सभी जगह व्यापार करना चाहते हैं. हालांकि हमारी प्राथमिकता भारत है क्योंकि भारत के एक लोकतंत्र है और भारततेजी से विकास कर रहा है साथ ही भारत में बड़ा उपभोक्ता बाजार है. इसलिए हमारी रुचि भारत में ज्यादा है हमें भारत की क्षमताओं में पूरा विश्वास है.
सुरक्षा और विदेश नीति पर संसद में बहस की मांग, कांग्रेस ने पीएम मोदी से पूछा क्या विपक्ष को लिया जाएगा विश्वास में? जानें क्या है पूरा मामला

Indian Politics: विदेश से लौटे सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से पीएम नरेंद्र मोदी की मुलाकात के बाद कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं. कांग्रेस ने पूछा किक्या अब सरकार देश की सुरक्षा और विदेश नीति को लेकर संसद के मानसून सत्र में बहस कराएगी? क्या प्रधानमंत्री कम से कम सभी राजनीतिक दलोंके नेताओं की बैठकों की अध्यक्षता करेंगे और चीन-पाकिस्तान के संबंध में भारत की आगे की रणनीति पर उन्हें विश्वास में लेंगे.कांग्रेस महासचिवजयराम रमेश ने कहा कि अब प्रधानमंत्री ने स्वयं 32 देशों में भेजे गए सात संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के सदस्यों से मुलाकात की है. तो क्या वह कम सेकम अब सभी राजनीतिक दलों के नेताओं की बैठकों की अध्यक्षता करेंगे. क्या वे चीन और पाकिस्तान दोनों के संबंध में भारत की भविष्य की रणनीतिऔर सिंगापुर में सीडीएस के खुलासे को लेकर विपक्षी दलों को उन्हें विश्वास में लेंगे?उन्होंने पूछा कि क्या प्रधानमंत्री संसद के आगामी मानसून सत्र में पहलगाम घटना के बाद देश की सुरक्षा और विदेश नीति की चुनौतियों पर पूर्ण बहसकराने के लिए तैयार होंगे. विशेष सत्र मांग को किया खारिजसरकार विपक्षी गठबंधन इंडिया की संसद के विशेष सत्र मांग को खारिज कर चुकी है. क्या प्रधानमंत्री पहलगाम के आतंकियों को न्याय के दायरे मेंलाने के लिए कोशिश करेंगे.रमेश ने यह भी पूछा कि क्या विदेश मंत्री एस जयशंकर के पिता के सुब्रह्मण्यम की अध्यक्षता वाली कारगिल समीक्षासमिति जैसे विशेषज्ञों का एक समूह गठित किया जाएगा. जो ऑपरेशन सिंदूर का विस्तार से विश्लेषण करेगा और उभरते सैन्य प्लेटफार्मों औरप्रौद्योगिकियों तथा संकट की स्थिति में सामरिक संचार के लिए राष्ट्रीय क्षमताओं के निर्माण सहित युद्ध के भविष्य पर अपनी सिफारिशें देगा. रमेश नेकहा कि इसके बाद क्या रिपोर्ट को संशोधनों के बाद – संसद में रखा जाएगा? जैसे कि कारगिल समीक्षा समिति की रिपोर्ट फरवरी 2000 में रखी गईथी।प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से मुलाकात की थी.इसमें सांसद और पूर्व राजनयिक शामिल थे वे पहलगामहमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकवाद के खतरे को खत्म करने की आवश्यकता पर भारत का संदेश देने के लिए अलग-अलग देशों की यात्रापर गए थे.
राहुल गांधी ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, वंचित छात्रों की छात्रवृत्ति में देरी और छात्रावासों की बदहाली पर जताई चिंता

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर वंचित समुदायों के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति में देरी की ओर ध्यान दिलाया है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने पत्र में देश के दलित, अनुसूचित जनजाति, अति पिछड़ा वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक छात्रोंके हित में फैसले लेने की अपील की है. उन्होंने कहा कि आवासीय छात्रावासों की स्थिति ‘दयनीय’ है. कांग्रेस सांसद ने मैट्रिक पास करने के बादहाशिए पर पड़े समुदायों के छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति के भुगतान में होने वाली देरी का मुद्दा भी उठाया. राहुल गांधी ने पीएम मोदी से की है अपीलराहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि छात्रों से जुड़े इन दो मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने की अपील की है उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि हाशिएपर पड़े समुदायों से आने वाले 90 प्रतिशत छात्रों की शिक्षा में छात्रवृत्ति और छात्रावास के कारण बाधा आती है. अपने बिहार दौरे के अनुभव काउल्लेख कर राहुल ने कहा, बिहार के दरभंगा में आंबेडकर छात्रावास के हाल के दौरे के दौरान छात्रों ने शिकायत की. एक ही कमरे में 6-7 छात्रों कोरहने के लिए मजबूर होना पड़ता है शौचालय बदहाल हैं पीने का पानी भी असुरक्षित है भोजनालय की सुविधा नहीं मिलती. पुस्तकालयों या इंटरनेटजैसी बुनियादी सेवाएं भी नदारद हैं. राहुल ने कहा, हाशिए पर पड़े समुदायों से आने वाले छात्रों को मैट्रिक के बाद सही समय पर छात्रवृत्ति नहीं मिलरही है. बिहार का उदाहरण देते हुए राहुल ने अपने पत्र में दावा किया कि छात्रवृत्ति पोर्टल तीन साल तक ठप रहा 2021-22 में किसी भी छात्र कोछात्रवृत्ति नहीं मिली.
गोवा में डॉक्टरों की हड़ताल खत्म, सीएम ने मानी सभी मांगे स्वास्थ्य मंत्री ने मांगी माफी जानें क्या है पूरा मामला

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा है कि उनकी सरकार ने हड़ताल कर रहे डॉक्टरों की सभी सात मांगें मान ली हैं. सीएम ने गोवा मेडिकल कॉलेजमें हड़ताल कर रहे डॉक्टरों से मुलाकात की मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमने डॉक्टरों की सभी मांगें मान ली हैं. ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होनीचाहिएहाल ही में गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे गोवा मेडिकल कॉलेज में औचक निरीक्षण पर पहुंचे थे। इस दौरान शिकायतें मिलने पर स्वास्थ्य मंत्रीने गोवा मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रुद्रेश कुट्टीकर को डांट दिया था. इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टर के खिलाफ सख्त भाषा काइस्तेमाल किया। साथ ही डॉक्टर को निलंबित भी कर दिया. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो हंगामा हो गया. डॉक्टरों ने स्वास्थ्यमंत्री से माफी की मांग की. उतरे स्वास्थ्य मंत्री के विरोध मेंइंडियन मेडिकल एसोसिएशन और गोवा एसोसिएशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स जैसे संगठन भी स्वास्थ्य मंत्री के विरोध में उतर आए. मामला बढ़ता देखसीएम ने डॉक्टर का निलंबन रद्द कर दिया. हालांकि डॉक्टरों का गुस्सा शांत नहीं हुआ और उन्होंने हड़ताल शुरू कर दी। हंगामा होने पर स्वास्थ्य मंत्रीविश्वजीत राणे ने भी माफी मांग ली. एक सोशल मीडिया पोस्ट में राणे ने लिखा, ‘गोवा मेडिकल कॉलेज के दौरे पर मैंने जो कठोर शब्द कहे थे. उसकेलिए मैं डॉ. कुट्टीकर से दिल से माफ़ी मांगता हूं. उस पल, मेरी भावनाएं मेरी अभिव्यक्ति पर हावी हो गईं और जिस तरह से मैंने हालात को हैंडल कियाउसके लिए मुझे गहरा खेद है. मंगलवार को सीएम से मुलाकात के बाद डॉक्टरों ने हड़ताल वापस ले ली. सीएम ने भी डॉक्टरों की सभी मान लींहड़ताल वापस लेने पर सीएम ने डॉक्टरों को धन्यवाद दिया और कहा कि वे समय-समय पर डॉक्टरों की समस्याओं को सुनते रहेंगे.
अनुशासनहीनता पर कांग्रेस का बड़ा फैसला, दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह 6 साल के लिए पार्टी से किया निष्कासित

MP Latest News: मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह पर पार्टी ने बड़ा एक्शन लिया है. पार्टी ने लक्ष्मण सिंह को 6 साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया है जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले के बाद लक्ष्मण सिंह ने राहुल गांधी, उमर अब्दुल्ला और रॉबर्ट वाड्राको लेकर बयान दिए थे. उनके यह ही बयान अब उन पर भारी पड़ गए हैं. जारी पत्र में कहा गया है कि लक्ष्मण सिंह के राहुल गांधी, उमर अब्दुल्लाऔर रोबर्ट वाड्रा को लेकर दिए गए बयानों को पार्टी ने अनुशासनहीनता मानता है. इसी के चलते अब उन्हें पूरे 6 साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्तादिखाया गया है. दरअसल कांग्रेस पार्टी से लक्ष्मण को 6 साल के लिए निष्कासित करने के लिए कांग्रेस की डिसिप्लिनरी कमिटी के अध्यक्ष सांसदतारिक अनवर ने आला कमान को सिफारिश भेजी थी. लिया जा चुका है एक्शनलगातार यह बात सामने आ रही थी कि उन्हें पार्टी से बाहर निकाला जा सकता है हालांकि अब यह एक्शन लिया जा चुका है. कांग्रेस मीडिया विभागके अध्यक्ष मुकेश नायक ने बताया कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने लक्ष्मण सिंह को 6 वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। उनकीप्राथमिक सदस्यता भी निरस्त कर दी गई है. नायक ने कहा कि यह संदेश है कि डिसिप्लिन सबके लिए है. अनेक बार लक्षण सिंह ने पार्टी को असहजकर देने वाले बयान दिए थे पिछला बयान था कि राहुल गांधी सोनिया गांधी आतंकवादियों के साथ खड़े हैं. इस बयान को बर्दाश्त नहीं किया गयाऔर उनको निष्कासित कर दिया गया है. नायक ने कहा कि कांग्रेस भाजपा की तरह नहीं है. अनिशासनहीनता करने पर दिखाया जाएगा बाहर का रास्तादरअसल जहां मंत्री विजय शाह इस तरह के बयान के बाद भी बैठे हैं. लक्ष्मण सिंह को उसी दल में भाजपा डालेगी जिसमें सुरेश पचौरी पड़े हुए हैं. कांग्रेस में अनुशासनहीनता बरदाश्त नहीं किया जाएगा कोई भी हो. अनुशासनहीनता करने पर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा. लक्ष्मण सिंह ने24 अप्रैल को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, रॉबर्ट वाड्रा और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के खिलाफ बयान दिया था. उन्होंनेउमर अब्दुल्ला को आतंकवादियों से मिले होने का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि हमारे नेताओं को सोच-समझकर बोलना चाहिए नहीं तोचुनावों में उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा अगर पार्टी को मुझे निकालना है तो आज ही निकाल दें.
एलन मस्क ने ट्रंप पर दिए बयानों पर जताया अफसोस, बोले सोशल मीडिया पर ज्यादा लंबा खिच गया विवाद

International News: अमेरिका में राजनीतिक उथल-पुथल के संकेतों के बीच एलन मस्क के तेवर नरम पड़ते दिख रहे हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप केसमर्थक रहे अरबपति उद्योगपति एलन मस्क अब उनकी नीतियों की मुखर आलोचना करने के करीब एक हफ्ते बाद अपने बयानों पर अफसोस जताया. उन्होंने कहा कि एक्स पर जारी वार-पलटवार का मामला लंबा खिंच गया. ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप को लेकर उन्होंने जो भी बयान दिए. इसका उन्हेंगहरा अफसोस है। गौरतलब है कि दोनों दिग्गजों के बीच यह टकराव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किए गए सिलसिलेवार पोस्ट से बीते पांच जून सेशुरू हुई थी. बता दें कि मस्क ने ट्रंप के साथ सीधे टकराव के बीच अपनी अंतरिक्ष परियोजनाओं को बंद करने का एलान कर दिया था.ट्रंप को भीपत्रकारों के बीच लगातार मस्क से टकराव के मुद्दे पर बोलते देखा गया. पत्रकारों ने किया एलान मुझे है पसंद एलन मस्कविवाद की शुरुआत उस समय हुई जब सबसे पहले ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा मुझे एलन हमेशा पसंद रहे हैं. मैं चाहूंगा कि वे बिल कीबजाय मेरी आलोचना करें. क्योंकि बिल अविश्वसनीय है। यह हमारे देश के इतिहास में सबसे बड़ी कटौती है. यह लगभग 1.6 ट्रिलियन डॉलर कीकटौती है यह सबसे बड़ी कर कटौती है लोगों पर लगने वाले टैक्स बहुत कम हो जाएंगे. हम उस बिल में ऐसी चीजें कर रहे हैं जो अविश्वसनीय हैं. एलन इसलिए परेशान हैं क्योंकि हमने इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल (EV) से जुड़े फैसले लिए. इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बहुत अधिक धन दिया जा रहा था. कटौती के बाद मस्क को मुश्किल समय का सामना करना पड़ रहा है वे चाहते हैं कि सरकार सब्सिडी के रूप में अरबों डॉलर का भुगतान करे.ट्रंप केबयान के मस्क ने एक्स पर लिखा अगर उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन नहीं किया होता. तो ट्रंप 2024 का राष्ट्रपति चुनाव हार जाते. मस्क ने दावाकिया कि ऐसी स्थिति में डेमोक्रेट्स को अमेरिकी संसद की प्रतिनिधि सभा में बहुमत मिल जाता और संसद के ऊपरी सदन यानी सीनेट में रिपब्लिकनपार्टी सिर्फ 51-49 के अंतर से सीनेट में बढ़त बना पाती.
ઇન્ટરનેશનલ હ્યુમન રાઇટ્સ દ્વારા શ્રીકુંજ આવાસ સોસાયટીમાં થતી હેરાનગતિના મુદ્દાનું નિરાકરણ

અમે તમને જણાવવા માંગીએ છીએ કે શ્રીકુંજ આવાસ સોસાયટીમાં થતી હેરાનગતિ અંગેની ચિંતાઓનો સફળતાપૂર્વક ઉકેલ લાવવામાંઆવ્યો છે. માનવ અધિકાર ટીમ – શ્રી પ્રબલ દેવ (ઉપપ્રમુખ, ગુજરાત), શ્રી જયેશ પ્રજાપતિ (જિલ્લા પ્રમુખ, વડોદરા), અને શ્રી જેમ્સમેકવાન (કાનૂની સલાહકાર, માનવ અધિકાર) – ના હસ્તક્ષેપથી અમારા વરિષ્ઠ નાગરિકો અને અન્ય રહેવાસીઓને અસર કરતી સમસ્યાનાઉકેલ માટે જરૂરી પગલાં લેવામાં આવ્યા હતા.આ પરિસ્થિતિમાં બે બાળકો ધરાવતા પરિવારનો સમાવેશ થતો હતો જેમને તેમના માતાપિતાએ એકલા છોડી દીધા હતા, જેના કારણેસમાજમાં અશાંતિ ફેલાઈ હતી. બાળકોની તકલીફના કારણે વિક્ષેપ સર્જાયો હતો, જેના કારણે રહેવાસીઓમાં અસુવિધા અને ચિંતા ફેલાઈહતી. સત્તાવાર અરજી દ્વારા મામલો પોલીસ કમિશનર સુધી પહોંચાડ્યા પછી, જેપી પોલીસ સ્ટેશન દ્વારા તાત્કાલિક કાર્યવાહી કરવામાંઆવી હતી. સગીરને સલામતી માટે અસ્થાયી રૂપે બાળ ગૃહમાં રાખવામાં આવી હતી, અને માતાપિતાને જવાબદારી લેવા માટે વિનંતીકરવા માટે કાનૂની પગલાં લેવામાં આવ્યા હતા. જરૂરી કાર્યવાહી અને સતત પ્રયાસો પછી, માતાપિતા પાછા ફર્યા અને તેમના બાળકોનો કબજો લીધો, અને ઘર યોગ્ય માલિકને પાછુંસોંપવામાં આવ્યું. આ ઠરાવથી બાળકોનું કલ્યાણ તો થયું જ છે, પણ સમાજમાં શાંતિ અને સંવાદિતા પણ ફરી સ્થાપિત થઈ છે.આ પ્રક્રિયા દરમિયાન તમામ રહેવાસીઓના સમર્થન અને સહકારની અમે પ્રશંસા કરીએ છીએ. દરેક માટે સલામત અને શાંતિપૂર્ણ જીવનવાતાવરણ બનાવવા માટે સાથે મળીને કામ કરવા બદલ આભાર.
कालकाजी भूमिहीन कैंप पर बुलडोज़र कार्रवाई:20-30 सालों से बसे गरीबों को उजाड़ने की तैयारी-अतिशी

दिल्ली के कालकाजी क्षेत्र में स्थित भूमिहीन कैंप में बीते कुछ दिनों से चल रही घटनाओं ने दिल्ली की राजनीति में हलचल मचा दी है। वर्षों से इसइलाके में रह रहे सैकड़ों परिवारों को बेदखल करने की तैयारी प्रशासन द्वारा की जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे 20 से 40 वर्षों सेयहां रह रहे हैं, उनके बच्चे यहीं स्कूल जाते हैं, वे यहीं मेहनत-मजदूरी कर जीवन चला रहे हैं। लेकिन अब बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें हटाया जारहा है।भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता रेखा गुप्ता ने हाल ही में दावा किया था कि “कोई भी झुग्गी टूटी नहीं है, और टूटेगी भी नहीं।” लेकिन महज 48 घंटे के भीतर ही इस बयान की सच्चाई सामने आ गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दिल्ली पुलिस और डीडीए ने मिलकर एक योजनाबद्ध ढंग सेझुग्गियों को घेर लिया और लोगों को जबरन बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी। बीजेपी नेताओं का तर्क है कि वे कोर्ट के आदेश का पालन कररहे हैं। लेकिन स्थानीय निवासियों का दावा है कि जब उन्होंने कोर्ट में घर देने की मांग की तो सरकार ने खुद फ्लैट आवंटन का विरोध किया। कोर्ट नेइस आधार पर आदेश दिया कि इन बस्तियों को हटाया जाए। सवाल यह उठता है कि जब सरकार खुद कोर्ट में कहती है कि वह मकान नहीं दे सकती, तो फिर गरीबों को कहां बसाया जाएगा? सरकार द्वारा 1862 फ्लैट आवंटित किए गए, लेकिन वहां रह रहे हजारों लोगों में से अधिकतर को मकाननहीं मिला। वहीं से कुछ ही दूरी पर टीडीएस के बनाए 324 फ्लैट खाली पड़े हैं, जिन्हें इन लोगों को दिया जा सकता था। बीजेपी ने चुनावी वादों मेंकहा था कि झुग्गी में रहने वालों को उसी जगह पर मकान दिया जाएगा, लेकिन आज वह वादा सिर्फ जुमला बनकर रह गया।महिलाओं और बच्चों के साथ पुलिस की सख्ती- विरोध करने पर महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की और लाठीचार्ज जैसी घटनाएं सामने आईं। कईमहिलाओं ने आरोप लगाया कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने भी महिलाओं से दुर्व्यवहार किया। एक महिला, सीता देवी, ने बताया कि उनकी साथी महिलाकी पीठ पर लाठी मारी गई जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। घटनास्थल पर जब विपक्षी नेता और विधायक पहुंचे, तो उन्हें मिलने से भी रोकागया। महिला नेताओं के साथ भी दुर्व्यवहार हुआ। डीसीपी साउथ और अन्य अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने लोकतंत्र की गरिमा का उल्लंघनकिया और जनता की आवाज को दबाने का प्रयास किया।दिल्ली में इस तरह से बसी झुग्गियों को उजाड़ना केवल एक प्रशासनिक कार्यवाही नहीं है, बल्कि यह एक मानवीय संकट है। यह घटना दर्शाती है किकिस तरह सत्ता और सिस्टम मिलकर गरीबों की आवाज को दबा रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वह केवल कोर्ट के आदेशों की आड़ में कार्रवाई करनेकी बजाय, वैकल्पिक आवास, पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन की गारंटी दे। वरना यह मुद्दा केवल कालकाजी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दिल्लीकी आत्मा को झकझोर कर रख देगा
भारतीय छात्रों के साथ अमेरिका में दुर्व्यवहार: भारत कब उठाएगा सख्त कदम? सुप्रिया श्रीनेत

भारत आज वैश्विक मंच पर एक मजबूत और उभरती शक्ति के रूप में स्थापित हो चुका है। हमारे छात्र, वैज्ञानिक, डॉक्टर और प्रोफेशनल्स पूरी दुनियामें अपनी मेहनत और प्रतिभा से देश का नाम रोशन कर रहे हैं। लेकिन हाल ही में अमेरिका में एक भारतीय छात्र के साथ हुए बर्बर और अपमानजनकव्यवहार ने न सिर्फ मानवाधिकारों की अवहेलना की है, बल्कि भारत की संप्रभुता और गरिमा को भी चुनौती दी है।अपमान की हदें पार – एक भारतीय मूल का छात्र, जो बेहतर भविष्य की तलाश में अमेरिका गया था, उसे न केवल बेवजह रोका गया, बल्कि एयरपोर्टपर जमीन पर पटककर अपराधी की तरह हथकड़ी पहनाई गई। घंटों पूछताछ और टॉर्चर किया गया। यह व्यवहार किसी लोकतांत्रिक देश में स्वीकार्यनहीं हो सकता। यह घटना कोई पहली नहीं है। बीते कुछ वर्षों में भारतीय छात्रों के वीज़ा रद्द होने, बैंक खाते फ्रीज़ किए जाने और बिना कारण जबरनदेश निकाला देने जैसी घटनाएं कई बार सामने आई हैं।अमेरिका की दोहरी नीति- भारत को ‘रणनीतिक साझेदार’ कहने वाला अमेरिका एक ओर पाकिस्तान जैसे आतंक समर्थक देश के नेताओं की तारीफकरता है, वहीं भारतीय युवाओं को अपमानित करता है। शहबाज़ शरीफ को “काबिल प्रधानमंत्री” कहकर सम्मानित किया जाता है, लेकिन भारत केप्रधानमंत्री की अनदेखी की जाती है। क्या यह भारत-अमेरिका संबंधों की सही तस्वीर है? सरकार की चुप्पी सवालों के घेरे में हर बार जब ऐसी कोईघटना होती है, भारत सरकार सिर्फ एक औपचारिक बयान जारी करके अपने कर्तव्यों की इतिश्री समझ लेती है। आखिर कब तक यह चुप्पी चलतीरहेगी? क्या प्रधानमंत्री को अमेरिकी नेतृत्व से इस पर सीधा जवाब नहीं मांगना चाहिए? क्या विदेश मंत्रालय को अमेरिकी अधिकारियों के सामने कड़ीआपत्ति नहीं दर्ज करानी चाहिए। यह केवल छात्र नहीं, भारत की अस्मिता का सवाल है- हर भारतीय जो विदेश में रहता है, वह भारत की संस्कृति, मूल्यों और गरिमा का प्रतिनिधित्व करता है। उसके साथ किया गया अन्याय पूरे देश के आत्मसम्मान पर आघात है। यह केवल एक छात्र का मामलानहीं है, बल्कि यह हमारे राष्ट्रीय चरित्र और प्रतिष्ठा का विषय है। भारत को अब यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि वह मित्रता के नाम पर अपमान सहन नहींकरेगा। अमेरिका को यह सख्त संदेश देना चाहिए कि भारतीय मूल के लोगों के साथ होने वाला व्यवहार सुधरे, अन्यथा इसका असर द्विपक्षीय संबंधोंपर पड़ेगा। भारत कोई ‘वोट बैंक’ या ‘बाजार’ नहीं, बल्कि आत्मगौरव और गरिमा से युक्त देश है — और उसे वैसा ही सम्मान दिया जाना चाहिए।