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पहलगाम आतंकी हमले को लेकर कांग्रेस पार्टी ने दी बड़ी चेतावनी, कहा पार्टी नियमों का करे पालन “जानें क्या है मामला”

पहलगाम आतंकी हमले को लेकर सियासत शुरू हो गई है. पर्यटकों को धर्म पूछकर गोली मारने को लेकर विधायकों के सवाल उठाने पर कांग्रेस घिरगई है जिसके बाद अब कांग्रेस ने मंगलवार को अपने नेताओं को पहलगाम आतंकी हमले पर पार्टी की आधिकारिक रुख से इतर बयानबाजी करने परकड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्षों, विधायक दल के नेताओं, महासचिवों, प्रभारियों, सांसदों, विधायकों/विधान परिषद सदस्यों, विभिन्न विभागों और संगठनों के प्रमुखों कोलिखे पत्र में सार्वजनिक संचार में अत्यंत अनुशासन और एकरूपता बरतने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि पहलगाम घटना पर अनुचित बयान देने सेबचें.यह पत्र कुछ कांग्रेस नेताओं के विवादास्पद बयानों के बाद आया है जिनके कारण भाजपा ने कांग्रेस पर आतंकवादियों की ओर से बोलने काआरोप लगाकर हमला बोला. वेणुगोपाल ने पत्र में कहा कि कांग्रेस पहलगाम के आतंकी हमले से गहरी पीड़ा में है और इस दुख की घड़ी में राष्ट्र केसाथ अटूट एकजुटता के साथ खड़ी है. हमारी हो रही संकल्प शक्ति की परीक्षाउन्होंने कहा इस महत्वपूर्ण समय में जब हमारी सामूहिक संकल्प शक्ति की परीक्षा हो रही है भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को एकता, परिपक्वता औरजिम्मेदारी का प्रतीक बनना चाहिए.उन्होंने कहा कि पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने 24 अप्रैलको एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया. जिसमें पहलगाम हमले पर पार्टी का स्पष्ट और सुविचारित रुख सामने रखा गया इस प्रस्ताव को इस मामलेपर पार्टी के रुख की सभी सार्वजनिक अभिव्यक्तियों के लिए एकमात्र आधार के रूप में माना जाना चाहिए. ऐसे में यह निर्देश दिया जाता है कि सभीटिप्पणियां, वक्तव्य वह चाहे पार्टी नेताओं, प्रवक्ताओं, मीडिया पैनलिस्टों या कांग्रेस सोशल मीडिया विभाग के आधिकारिक हैंडल द्वारा होंसीडब्ल्यूसी के प्रस्ताव का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए. पदाधिकारियों को सार्वजनिक संवाद में अनुशासन बनाए रखने का आदेशइसको लेकर वेणुगोपाल ने कहा कि सभी पदाधिकारियों को सार्वजनिक संवाद में अत्यंत अनुशासन और निरंतरता बनाए रखने का निर्देश दिया जाताहै. उन्होंने कहा कि पार्टी की ओर से बोलने के लिए अधिकृत लोगों को प्रस्ताव में कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा बताई गई स्थिति तक ही सीमित रहनाचाहिए. अपने नेताओं को सख्त चेतावनी देते हुए वेणुगोपाल ने कहा कि इस निर्देश का उल्लंघन करने पर बिना किसी अपवाद के सख्तअनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.इससे पहले, कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने भी अपने नेताओं को हिदायत दी थी. उन्होंनेकहा था कि कुछ कांग्रेस नेता मीडिया से बात कर रहे हैं जो कांग्रेस के विचारों को नहीं दर्शाते हैं. जयराम रमेश ने एक पोस्ट में लिखा इस संवेदनशीलसमय में इस बात पर कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि कांग्रेस कार्यसमिति का प्रस्ताव, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधीके बयान और अधिकृत एआईसीसी पदाधिकारियों के विचार ही कांग्रेस की स्थिति को दर्शाते हैं.

9 मई को विजय दिवस परेड में शामिल होंगे पीएम मोदी, रुस जाने की यात्रा की रद्द

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है. इस बीच खबर आ रही है किप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना रूस दौरा स्थगित कर दिया है. प्रधानमंत्री 9 मई को मॉस्को में होने वाली विजय दिवस परेड में शामिल नहीं होंगे पीएममोदी को विजय दिवस परेड के लिए रूस ने आमंत्रित किया था.क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने बुधवार को बताया कि प्रधानमंत्री मोदी अगलेमहीने मॉस्को में आयोजित होने वाले विजय दिवस की 80वीं वर्षगांठ समारोह में शामिल नहीं होंगे. स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 9 मई केकार्यक्रम में पीएम मोदी की जगह भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह प्रतिनिधित्व कर सकते हैं.राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मोदी के अलावा चीन केराष्ट्रपति शी जिनपिंग को विजय दिवस समारोह में शामिल होने और रेड स्क्वायर पर विजय परेड देखने के लिए आमंत्रित किया था. शी ने पुष्टि की हैकि वह इस कार्यक्रम में शामिल होंगे. नेताओं की मेजबानी की तैयारीमॉस्को में करीब 20 विदेशी नेताओं की मेजबानी की तैयारी चल रही है.रूस नौ मई को द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर विजय का जश्न मनाता हैऔर इस वर्ष उसने 80वीं वर्षगांठ के समारोह में भाग लेने के लिए चुनिंदा मित्र देशों के नेताओं को आमंत्रित किया है.अक्तूबर 2000 में राष्ट्रपति पुतिनपहली बार नई दिल्ली आए थे और उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ रणनीतिक साझेदारी घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए थे. पिछले 25 वर्षों में यह साझेदारी नई दिल्ली और मॉस्को के बीच एक विशेष साझेदारी के रूप में विकसित हुई है.सीसीएस पहलगाम आतंकी हमलेका बदला लेने के लिए उपलब्ध सैन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकती है. 23 अप्रैल की सीसीएस बैठक में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई थीऔर सभी भारतीय बलों को उच्चतम सतर्कता बनाए रखने का निर्देश दिया गया था. भारत ने संकल्प लिया है कि पहलगाम हमले के दोषियों को न्यायके कटघरे में लाया जाएगा.प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई पहली सीसीएस बैठक में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कदम उठाए। इनमेंसिंधु जल समझौते को निलंबित करना, अटारी सीमा को बंद करना पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करना, उनके कई यूट्यूब चैनल और एक्स हैंडलपर पाबंदी लगाना शामिल है। इसके अलावा पाकिस्तानी नागरिकों को उनके देश लौटने का भी निर्देश दिया गया था.

1990 के मध्यस्थता और सुलह कानून के तहत फैसलों को संशोधित कर सकती है, कोर्ट का आया सुप्रीम फैसला

सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने यह तय करने के लिए बुधवार को फैसला सुनाया कि क्या अदालतें 1996 के मध्यस्थता और सुलहकानून के तहत मध्यस्थ फैसलों में संशोधन कर सकती हैं या नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने 4:1 बहुमत से फैसला सुनाया कि अदालतें मध्यस्थता और सुलह पर1996 के कानून के तहत मध्यस्थता फैसलों को संशोधित कर सकती हैं.मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की ओर से बहुमत से लिए गए फैसले में कहागया है कि ऐसे फैसलों को संशोधित करने की शक्ति का प्रयोग अदालतों की ओर से सावधानी के साथ किया जाना चाहिए. पीठ में मुख्य न्यायाधीश(सीजेआई) संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति संजय कुमार, न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह शामिलहैं.सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी को मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस फैसले का असर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ फैसलों परपड़ेगा. मामले में 13 फरवरी को अंतिम सुनवाई शुरू हुई थी. जिसे इससे पहले 23 जनवरी को तीन जजों की पीठ ने बड़ी पीठ को भेजा था.अरविंद दातार और टीम ने दी दलीलअरविंद दातार और उनकी टीम ने दलील दी कि अदालतों के पास धारा 34 के तहत मध्यस्थ फैसलों को रद्द करने का अधिकार है. अदालतें उन फैसलोंमें संशोधन भी कर सकती हैं क्योंकि यह उनके विवेकाधिकार का हिस्सा है. वहीं दूसरे पक्ष के वकीलों ने कहा कि कानून में ‘संशोधन’ शब्द नहींहै.इसलिए अदालतों को ऐसा कोई अधिकार नहीं दिया जा सकता जो लिखा ही नहीं है. सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि 1996 का कानून एक’पूर्ण और उद्देश्यपूर्ण’ कानून है. जो मध्यस्थता से जुड़े सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है. उन्होंने कहा कि इस कानून में संशोधन काअधिकार न होना एक जानबूझकर लिया गया विधायी निर्णय है. धारा 34 के अनुसार मध्यस्थ फैसलों को प्रक्रिया में गड़बड़ी सार्वजनिक नीति काउल्लंघन या अधिकार क्षेत्र की कमी जैसे कुछ सीमित कारणों के आधार पर ही रद्द किया जा सकता है। धारा 37 उन अपीलों से जुड़ी है. जोमध्यस्थता से जुड़े फैसलों के खिलाफ (जैसे कि फैसला रद्द न करने पर) अदालत में की जाती हैं. इन दोनों धाराओं का उद्देश्य अदालतों की भूमिका कोसीमित करना है. ताकि मध्यस्थता प्रक्रिया तेज और प्रभावी रहे.

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुआ पाकिस्तान सम्मेलन को लेकर जमकर बवाल, जानें क्या है पूरा मामला

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के साउथ एशिया इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित ‘पाकिस्तान सम्मेलन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. छात्रों ने इस आयोजन कीआलोचना करते हुए कहा कि इससे राज्य प्रायोजित आतंकवाद को वैधता मिल सकती है खासकर उस समय जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हालही में एक दर्दनाक आतंकी हमला हुआ. जिसे छात्रों ने धार्मिक आधार पर किया गया नरसंहार बताया.पाकिस्तान सम्मेलन को लेकर हावर्ड यूनिवर्सिटीकी छात्रा सुरभि तोमर ने अपनी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि पहलगाम में जो हुआ वह एक धर्म-आधारित लक्षित हत्या थी. ऐसे समय में जबहार्वर्ड ऐसे लोगों को बुलाता है. जिन्होंने वैचारिक रूप से ऐसे हमलों को जायज़ ठहराया है. तो यह खतरा होता है कि हमारे कैंपस में आतंक समर्थकविचारों को वैधता मिल जाए.उन्होंने कहा कि यह आयोजन पहले से तय था और यह घटना संयोगवश उसी समय के आसपास हुई. लेकिन फिर भीइस तरह के वक्ताओं को बुलाना उचित नहीं है. अमेरिका विदेश मंत्री ने की मांगदरअसल इसको लेकर उन्होंने बताया कि छात्रों ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मांग की है कि ऐसे अधिकारियों को वीजा न दिया जाए जोआतंक से जुड़े विचारों का समर्थन करते हों. इसके साथ ही सुरभि ने आगे कहा कि धार्मिक कारणों से हुए हमले के बाद चुप रहना गलत है. हमने 65 देशों के छात्रों से समर्थन पाया. उन्होंने कहा कि हमने पीड़ितों की गवाही पढ़ी और नैतिक जिम्मेदारी समझते हुए बोलने का फैसला लिया.इसकेअलावा एक अन्य छात्रा रश्मिनी कोपरकर ने भी निराशा जताई. साथ ही कहा कि इस आयोजन में भाग लेने वाले मेहमानों ने पहलगाम हमले की न तोनिंदा की और न ही कोई संवेदना दिखाई. उन्होंने कहा कि हम अपेक्षा कर रहे थे कि कार्यक्रम में शामिल अधिकारी संवेदनशीलता दिखाएंगे और हमलेकी निंदा करेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ कई मेहमान ऐसे देशों से आए थे जो वर्षों से आतंकवाद को बढ़ावा देते रहे हैं.बढ़ते विवाद के बीच हार्वर्डयूनिवर्सिटी के साउथ एशिया इंस्टीट्यूट ने एक आधिकारिक बयान जारी कर आयोजन का बचाव किया. संस्थान ने कहा कि ‘पाकिस्तान सम्मेलन’ छात्रों और उनके फैकल्टी सलाहकार द्वारा स्वतंत्र रूप से आयोजित की गई थी और इसमें किसी दाता से सलाह नहीं ली गई थी. साथ ही बयान में यहभी कहा गया कि हम पहलगाम हमले से प्रभावित भारत के नागरिकों के साथ दुख साझा करते हैं और गहरी संवेदना प्रकट करते हैं.

Book Launch: Lakshya UPSC Chronicles Inspiring Journeys of Young IAS Officers Union Education Minister Dharmendra Pradhan Unveils the Motivational Work by Senior IAS Officer Dr. Sajjan Yadav

New Delhi, April 29, 2025:Amidst the nationwide buzz surrounding UPSC toppers, senior IAS officer and acclaimed author Dr. Sajjan Yadav unveiled his latest book “Lakshya UPSC – Inspiring Stories of Young IAS Officers”. The book launch ceremony was held at Constitution Club, New Delhi, with Union Education Minister Dharmendra Pradhan as the chief guest. The […]

पाकिस्तान ने भारत के संभावित हमलों से बचने के लिए उठाए कड़े कदम

कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के सात दिन बाद, पाकिस्तान अपने सुरक्षा उपायों को और सख्त कर रहा है। इसहमले के बाद भारत की ओर से सैन्य प्रतिक्रिया की आशंका जताई जा रही है, जिससे पाकिस्तान में तनाव और भय का माहौल है। ऐसे में, पाकिस्तानीसेना भारत के किसी भी संभावित हमले से बचने के लिए विभिन्न कदम उठा रही है।पाकिस्तान का रडार सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयरजानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान ने भारतीय एयरस्ट्राइक की पहचान करने के लिए अपने रडार सिस्टम को सियालकोट सेक्टर में फॉरवर्ड लोकेशनोंपर तैनात करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा, पाकिस्तान ने फिरोजपुर से सटे क्षेत्रों में भारतीय सेना की गतिविधियों का पता लगाने के लिएइलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम भी तैनात किया है। यह कदम भारतीय सेना की हरकतों पर निगरानी रखने के लिए उठाए गए हैं। हाल ही में पाकिस्तानने अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज 58 किलोमीटर की दूरी पर चोर कंटोनमेंट में TPS-77 रडार तैनात किया था। पाकिस्तान की सीजफायर उल्लंघन की लगातार कोशिशेंपाकिस्तान ने लगातार पांचवें दिन सीजफायर का उल्लंघन किया और एलओसी (लाइन ऑफ कंट्रोल) पर फायरिंग की। पाकिस्तानी सेना ने कुपवाड़ा, बारामूला और अखनूर सेक्टरों में बिना किसी उकसावे के फायरिंग की। हालांकि, भारतीय सेना ने पाकिस्तान के हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया औरस्थिति को नियंत्रण में रखा। पहलगाम आतंकी हमला और भारत की सख्त कार्रवाई22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसारन घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 17 लोग घायल हो गए थे।इस हमले में आतंकियों ने जानबूझकर लोगों को निशाना बनाया था। इसके बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की कैबिनेटकमेटी (CCS) की बैठक हुई, जिसमें भारत ने एक बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई की। सिंधु जल संधि का स्थगनकैबिनेट कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 1960 की सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए। यह पहला अवसर थाजब भारत ने इस संधि को स्थगित किया है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि यह स्थगन तब तक जारी रहेगा, जब तक पाकिस्तानआतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता।

चीन के लियाओनिंग प्रांत में रेस्टोरेंट में आग, 22 की मौत, 3 घायल

चीन के उत्तर-पूर्वी लियाओनिंग प्रांत के लियाओयांग शहर में मंगलवार, 29 अप्रैल 2025 को एक रेस्टोरेंट में भीषण आग लगने से 22 लोगों की मौतहो गई और 3 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर 12:25 बजे हुई, जब रेस्टोरेंट में अचानक आग लग गई। आग की घटना और बचाव कार्यस्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लियाओयांग के बाइटा जिले में स्थित यह रेस्टोरेंट दो या तीन मंजिला था। आग की लपटें खिड़कियों औरदरवाजों से बाहर निकल रही थीं, जिससे स्थिति गंभीर हो गई। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 22 दमकल गाड़ियों और 85 दमकलकर्मियों को मौके पर भेजा। दमकलकर्मियों ने लगभग 18 मिनट में आग पर काबू पा लिया, लेकिन तब तक यह घटना बड़ा रूप ले चुकी थी। मृतकों और घायलों की स्थितिस्थानीय अस्पतालों में भर्ती किए गए घायलों की हालत स्थिर बताई जा रही है, हालांकि उनमें से कुछ की स्थिति अभी भी गंभीर है। मृतकों के परिवारोंको सरकारी मदद की घोषणा की गई है, और उन्हें तत्काल सहायता प्रदान की जा रही है। घटना के तुरंत बाद, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नेस्थानीय अधिकारियों से घायलों का उचित इलाज करने और मृतकों के परिवारों को समर्थन देने का निर्देश दिया।जांच और प्रशासनिक प्रतिक्रियाघटना के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, आग रेस्टोरेंट के रसोईघर से शुरू हुई थी। स्थानीय पुलिसने रेस्टोरेंट के मालिक को हिरासत में लिया है और घटना की जांच जारी है। चीनी अधिकारियों ने घटना की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांचसमिति का गठन किया है। सुरक्षा मानकों पर सवालयह घटना चीन में सार्वजनिक सुरक्षा के उपायों पर एक सवाल खड़ा करती है। पहले भी चीन में कुछ स्थानों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारणइस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त सुरक्षा मानकों का पालन किया जाना चाहिए। सरकारी निर्देश और भविष्य के उपायचीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने और भविष्य मेंऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आदेश दिया है। इसके अलावा, सरकार ने इस बात का आश्वासन दिया है कि इस मामलेमें दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय प्रशासन का आश्वासनलियाओयांग शहर की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद, स्थानीय प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं कोरोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे सुरक्षा मानकों के पालन में सहयोग करें और किसीभी संदिग्ध गतिविधि की सूचना दें।

सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से किया इनकार, राष्ट्रीय सुरक्षा को बताया प्रमुख कारण

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पेगासस जासूसी मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए तकनीकी समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने सेइनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि इस रिपोर्ट में राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की संप्रभुता से जुड़ी संवेदनशील जानकारियाँ हैं, जिन्हें सार्वजनिक मंचपर लाना उचित नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, ऐसी जानकारी का सार्वजनिक खुलासा देश की सुरक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुँचा सकता है औरयह कदम न्यायोचित नहीं होगा। इस रिपोर्ट को लेकर अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इसके कुछ हिस्सों को ही सीमित रूप में साझा किया जासकता है, लेकिन पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा सकती। पेगासस विवाद वर्ष 2021 में सामने आया था जब एक अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता परियोजना ‘पेगासस प्रोजेक्ट’ के तहत यह खुलासा हुआ कि भारतसहित कई देशों में पेगासस स्पायवेयर का उपयोग पत्रकारों, राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अन्य प्रमुख व्यक्तियों की जासूसी केलिए किया गया। यह स्पायवेयर इज़राइली कंपनी एनएसओ ग्रुप द्वारा विकसित किया गया है और यह मोबाइल फोन में गुप्त रूप से घुसकर कॉल, मैसेज, लोकेशन और अन्य निजी जानकारी तक पहुंच बना सकता है। इस खुलासे के बाद भारत में काफी हंगामा हुआ और कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्टमें दायर की गईं, जिनमें सरकार से जवाब और जांच की मांग की गई। इन याचिकाओं के जवाब में अक्टूबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने एक स्वतंत्र तकनीकी समिति का गठन किया, जिसे 29 मोबाइल फोनों की जांच काजिम्मा सौंपा गया। समिति ने 2022 में अपनी रिपोर्ट में बताया कि पांच डिवाइसेज़ में ‘मैलवेयर’ जरूर पाया गया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो सका किवह पेगासस ही था। इसके अलावा, समिति ने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र सरकार ने जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं किया। इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने को लेकर विपक्षी दलों ने लगातार दबाव बनाया है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया कि मोदीसरकार ने राजनीतिक विरोधियों और पत्रकारों की निगरानी कर लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों का उल्लंघन किया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर‘देशद्रोह’ का आरोप लगाया और गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफे की मांग की। वहीं सरकार ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि कोई भीनिगरानी कानून के तहत और राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में की गई होगी। पेगासस विवाद ने केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर भी हलचल मचा दी थी। फ्रांस, मैक्सिको, हंगरी और इज़राइल सहित कई देशों में भी इसस्पायवेयर के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई कि ऐसे सॉफ्टवेयर का प्रयोग नागरिक स्वतंत्रता औरगोपनीयता के अधिकारों पर हमला है। इस मामले में संयुक्त राष्ट्र समेत कई संस्थाओं ने भी पारदर्शी जांच की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से देखा जा सकता है, लेकिन यह भी सच है कि इससे पारदर्शिता और सरकार की जवाबदेही कोलेकर जनता में शंका उत्पन्न होती है। पेगासस प्रकरण ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा किया है कि तकनीक के इस युग में नागरिकों की निजता औरसुरक्षा के बीच संतुलन कैसे साधा जाए। अदालत के इस निर्णय के बाद भी पेगासस से जुड़ा विवाद थमा नहीं है और यह मुद्दा राजनीतिक औरसामाजिक बहस का केंद्र बना हुआ है।

कोलकाता रेप-मर्डर केस: पीड़िता के पिता ने CBI जांच पर उठाए गंभीर सवाल, कहा- अपराधियों को बचा रही है एजेंसी

घटना का विवरण: अस्पताल परिसर में मिली महिला डॉक्टर की लाशकोलकाता के एक प्रमुख अस्पताल में 9 अगस्त 2024 को उस समय हड़कंप मच गया जब वहां एक 31 वर्षीय महिला डॉक्टर की लाश संदिग्धहालात में मिली। वह अस्पताल में ही पोस्टग्रेजुएट मेडिकल छात्रा के रूप में कार्यरत थीं। शुरुआती जांच में यह सामने आया कि महिला के साथबलात्कार किया गया और फिर उसकी हत्या की गई। यह मामला देशभर में सुर्खियों में आ गया और महिला सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हो गए। मुख्य आरोपी की पहचान और सजाघटना के सिलसिले में पुलिस ने संजय रॉय नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जो कोलकाता पुलिस में सिविक वॉलंटियर था। अदालत में सुनवाई केबाद उसे दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई। लेकिन पीड़िता के परिजनों का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का अपराध नहीं था औरइस जघन्य कृत्य में कई अन्य लोग भी शामिल थे। CBI जांच पर उठे सवाल, पिता ने जताई नाराजगीपीड़िता के पिता ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एजेंसी जानबूझकर सच्चाई को छिपा रही है। उनका दावा है किCBI को अपराधियों की पहचान है, लेकिन फिर भी वो उन्हें बचा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी बेटी का मोबाइल फोन घटना के इतने महीनेबाद भी सक्रिय है और किसी के द्वारा उपयोग किया जा रहा है, जिससे जांच पर संदेह और बढ़ जाता है। सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी निशाने परमामले की जांच के दौरान अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और स्थानीय थाने के प्रभारी अभिजीत मंडल पर आरोप लगा कि उन्होंने सबूतों सेछेड़छाड़ की और एफआईआर दर्ज करने में देर की। CBI ने दोनों को गिरफ्तार तो किया, लेकिन समय पर चार्जशीट दाखिल न करने के कारण उन्हेंजमानत मिल गई। इससे पीड़िता के परिवार को और अधिक आघात पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और केंद्रीय बल की तैनातीइस संवेदनशील मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और जांच में लापरवाही को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार, पुलिस प्रशासन और अस्पतालप्रबंधन को आड़े हाथों लिया। न्यायालय ने अस्पताल परिसर में सुरक्षा बढ़ाने के लिए केंद्रीय सुरक्षाबलों की तैनाती का निर्देश भी दिया और CBI सेजांच की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी। जनता का आक्रोश और सड़क पर उतरे डॉक्टरघटना के बाद कोलकाता सहित देशभर में प्रदर्शन शुरू हो गए। डॉक्टरों ने हड़ताल की और “Reclaim the Night” जैसे अभियानों के माध्यम सेमहिला सुरक्षा की मांग की। आम नागरिकों और छात्र संगठनों ने भी पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए आवाज बुलंद की। न्याय की मांग अभी अधूरीपीड़िता के पिता का कहना है कि जब तक सभी दोषियों को कठोर सजा नहीं मिलती, तब तक उनकी बेटी को इंसाफ नहीं मिलेगा। उनका यह भीकहना है कि जांच एजेंसी पर उनका भरोसा टूट चुका है और वे चाहते हैं कि जांच पारदर्शी ढंग से की जाए।