दिल्ली स्कूल फीस एक्ट को कैबिनेट की मंजूरी: मनमानी फीस बढ़ोतरी पर लगेगी लगाम

दिल्ली सरकार ने अभिभावकों की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए स्कूल फीस को नियंत्रित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘दिल्ली स्कूल फीस एक्ट’ को मंजूरी दे दी गई है। अब राजधानी के निजी स्कूल मनमाने ढंगसे फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। इस निर्णय को लेकर अभिभावकों में काफी राहत और संतोष देखने को मिल रहा है। लंबे समय से फीस वृद्धि पर था विवाददिल्ली के कई निजी स्कूलों द्वारा हर साल फीस में अत्यधिक वृद्धि किए जाने को लेकर अभिभावकों में असंतोष बना हुआ था। अभिभावक संगठन इसमुद्दे को लगातार सरकार के समक्ष उठा रहे थे। शिकायतों के अनुसार, स्कूल मनमर्जी से ट्यूशन फीस के साथ-साथ एडमिशन फीस, डेवलपमेंट चार्जऔर अन्य शुल्कों में भी बेवजह बढ़ोतरी कर रहे थे, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा था। मुख्यमंत्री ने दिए थे लाइसेंस रद्द करने के निर्देशफीस वृद्धि की बढ़ती शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कुछ स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उनके लाइसेंस रद्दकरने के निर्देश दिए थे। इसके बाद इस मुद्दे पर व्यापक समीक्षा कर दिल्ली स्कूल फीस एक्ट का मसौदा तैयार किया गया और उसे कैबिनेट की मंजूरीमिल गई। नए एक्ट के तहत क्या होंगे बदलाव?इस कानून के अंतर्गत अब दिल्ली के किसी भी निजी स्कूल को फीस बढ़ाने से पहले सरकार की अनुमति लेनी होगी। स्कूलों को यह स्पष्ट करना होगाकि वे किस आधार पर फीस वृद्धि कर रहे हैं और उसकी क्या आवश्यकता है। इसके अलावा, फीस संरचना से जुड़ी सभी जानकारियाँ सार्वजनिक रूपसे वेबसाइट पर उपलब्ध करानी होंगी। नई गाइडलाइंस भी होंगी लागूमुख्यमंत्री ने बताया कि राजधानी के 1677 निजी स्कूलों के लिए जल्द ही नई गाइडलाइंस भी जारी की जाएंगी। इन दिशा-निर्देशों में फीस वृद्धि कीसीमा, अनुमति लेने की प्रक्रिया और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उपाय शामिल होंगे। सभी स्कूलों को इन निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा, और उल्लंघन की स्थिति में सख्त कार्रवाई की जाएगी।डीएम रिपोर्ट के बाद हुआ अहम फैसलामुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के बीच फीस को लेकर विवाद लगातार सामने आ रहे थे। इसके चलते सरकार नेजिला मजिस्ट्रेटों को निर्देश देकर स्कूलों का निरीक्षण करवाया था। डीएम द्वारा दी गई विस्तृत रिपोर्ट में फीस वृद्धि की अनियमितताएं सामने आईं, जिसके आधार पर सरकार ने यह कठोर लेकिन आवश्यक कदम उठाया है। अभिभावकों को मिली बड़ी राहतदिल्ली सरकार के इस फैसले से हजारों अभिभावकों को राहत मिलेगी जो लंबे समय से स्कूलों की फीस नीति को लेकर परेशान थे। यह कानून शिक्षाके अधिकार को सुरक्षित करने और शिक्षा को किफायती बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
Sonia Gandhi and Rahul Gandhi Meet Progressive International Delegation at 10 Janpath

New Delhi: Senior Congress leader Sonia Gandhi and Leader of Opposition in the Lok Sabha Rahul Gandhi met a delegation from the Progressive International at 10 Janpath, New Delhi, on Monday. Discussions focused on a wide range of global issues concerning democracy, social justice, and progressive collaborations. Focus on Strengthening Global Progressive AlliancesProgressive International, an […]
आईपीएल 2025 पहुंचा रोमांचक मोड़ पर, अब खेले गए 46 मैच “प्लेऑफ के लिए है दिलचस्प जंग”

IPL 2025: आईपीएल 2025 अब रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका है 46 मैच खेले जा चुके हैं और प्लेऑफ के लिए जंग दिलचस्प हो चुकी है. आठटीमों के बीच चार स्थानों के लिए लड़ाई है, राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपर किंग्स इस रेस से बाहर हो चुकी है हालांकि इस पूरे सीजन में काफीउतार चढ़ाव देखने को मिले हैं. कुछ टीमों ने अच्छी शुरुआत की लेकिन दूसरे हाफ में उसे बरकरार रखने में कामयाब नहीं हो पाए हैं. वहीं एक टीम हैजिसका पहले हाफ में खराब प्रदर्शन रहा था अब दूसरे हाफ में उन्होंने जबरदस्त वापसी की है. वहीं दो टीमें ऐसी हैं जिन्होंने शुरू से लेकर अभी तकअपने कंसिस्टेंट प्रदर्शन को बरकरार रखा है.आरसीबी की टीम अंक तालिका में शीर्ष पर है उसके 10 मैचों में सात जीत और 14 अंक हैं। वहीं, गुजरात12 अंक लेकर दूसरे स्थान पर है. मुंबई और दिल्ली के भी 12-12 अंक हैं लेकिन नेट रन रेट में गुजरात से पीछे है. एमआई तीसरे और दिल्ली चौथेस्थान पर है पंजाब किंग्स 11 अंक लेकर पांचवें लखनऊ सुपर जाएंट्स 10 अंक लेकर छठे स्थान पर है. तीन बार की चैंपियन कोलकाता नाइट राइडर्ससात अंक लेकर सातवें 2016 की चैंपियन सनराइजर्स हैदराबाद छह अंक लेकर आठवें स्थान पर है. पंजाब ने की थी शानदार शुरुआतराजस्थान और चेन्नई के चार-चार अंक हैं इस सीजन दिल्ली और पंजाब ने शानदार शुरुआत की थी. दिल्ली ने अपने शुरुआती छह में से पांच मैचजीते थे. टीम एक वक्त अंक तालिका में शीर्ष पर थी हालांकि छठे मैच के बाद इस टीम के प्रदर्शन में गिरावट आई और टीम अगले तीन में से सिर्फएक मैच जीत पाई है. वहीं पंजाब ने अपने शुरुआती सात में से पांच मैच जीते. हालांकि अगले दो मैच उनके पक्ष में नहीं रहे और टीम अंक तालिका मेंलुढ़क गई.आरसीबी के खिलाफ हार और एक मैच बारिश की वजह से धुलने से पंजाब को नुकसान हुआ है. अब जब प्लेऑफ की जंग रोमांचक होचली है ऐसे में इन दोनों टीमों को एड़ी चोटी का जोर लगानी होगी. अगर 16 अंक को क्वालिफिकेशन मार्क माना जाए तो दिल्ली को बाकी बचे पांचमें से कम से कम दो मैच जीतने होंगे. जबकि पंजाब को बाकी बचे पांच में से कम से कम तीन मैच जीतने होंगे. राह है काफी कठिनवहीं कोलकाता और सनराइजर्स के लिए अब प्लेऑफ में जगह बनाने की राह काफी कठिन है. हालांकि क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है लेकिन फिरभी जो समीकरण बन रहे हैं. उसमें इन्हें खुद की जीत के साथ-साथ अन्य टीमों के नतीजों पर भी निर्भर रहना होगा. केकेआर को अब पांच में से पांच मेंजीत की जरूरत है. वहीं सनराइजर्स को भी पांच में से पांच मैच जीतने हैं इसके बावजूद केकेआर अधिकतम 17 अंक और सनराइजर्स 16 अंक तकपहुंच सकेगी. इसके बाद इन्हें अन्य टीमों के नतीजों पर निर्भर रहना होगा. लखनऊ सुपर जाएंट्स ने भी सीजन की शुरुआत अच्छी की थी. लेकिन जैसे-जैसे टूर्नामेंट आगे बढ़ा टीम की कमजोरियां सामने आने लगी हैं. टीम के अगर शुरुआती तीन बल्लेबाज नहीं चलते हैं तो पूरी टीम ढह जाती है. अबअगर लखनऊ को प्लेऑफ में पहुंचना है तो उन्हें बाकी बचे चार में से कम से कम तीन मैच जीतने ही होंगे. एक भी हार से उन पर तलवार लटकजाएगी.
पहलगाम आतंकी हमले पर टिप्पणी को लेकर रॅाबर्ट वाड्रा ने दी सफाई, बोले मेरे इरादों को समझा गया गलत

वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के पति जानेमाने कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा ने पहलगाम आतंकी हमले पर अपनी हालिया टिप्पणी पर सफाई दी. उन्होंने सोमवार को कहा कि उनके इरादों को गलत समझा गया जिसे स्पष्ट करना उनकी जिम्मेदारी है. वाड्रा ने यह भी कहा कि वह पहलगाम हमले कीकड़ी निंदा करते हैं और भारत के साथ खड़े हैं.कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के बहनोई रॉबर्ट वाड्रा ने फेसबुक पर एक पोस्ट में लिखा, ‘चूंकि मेरेइरादों का मतलब निकाला गया, इसलिए मैं समझता हूं कि उन्हें स्पष्ट करना मेरी जिम्मेदारी है. मैं ईमानदारी पारदर्शिता और सम्मान के साथ खुद कोस्पष्ट करने के लिए प्रतिबद्ध हूं. मैंने कुछ दिनों तक मौन रहने का फैसला किया है. लेकिन इसे उदासीनता या देशभक्ति की कमी के रूप में नहीं समझाजाना चाहिए. वास्तव में यह मेरे देश के प्रति मेरे गहरे प्रेम, सत्य के प्रति मेरे गहरे सम्मान और समर्पण के प्रति मेरी प्रतिबद्धता के कारण है कि मैंनेबोलने से पहले चिंतन करने का समय लिया. मौन वह चरण है जहां जिम्मेदारी परिपक्व होती है भावनाएं शांत होती हैं और शब्दों को आवेगपूर्ण तरीकेसे चुनने के बजाय सावधानी से चुना जा सकता है.उन्होंने आगे लिखा मैं अपने विचारों के बारे में स्पष्ट होना चाहता हूं. पहलगाम हमले को लेकर करती हूं कड़ी निंदा-प्रियंका गांधीमैं पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करता हूं जिसने निर्दोष लोगों की जान ले ली और उनके परिवारों को तोड़ दिया. मैं भारत के साथखड़ा हूं और हमेशा ऐसा ही करूंगा इस हमले को रोकने के लिए कोई राजनीतिक, धार्मिक या वैचारिक तर्क नहीं है. उन्होंने कहा निर्दोष और निहत्थेलोगों के खिलाफ हिंसा को माफ नहीं किया जा सकता है.उन्होंने आगे कहा कि आतंकवाद किसी भी रूप में हो मानवता की आत्मा पर हमला है औरमनुष्य के बिना किसी भय के जीने के मौलिक अधिकार का हनन करता है. वाड्रा ने हमले में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की और सभी सेमहात्मा गांधी की अहिंसा का पालन करने की शिक्षाओं को याद रखने का आग्रह किया.उन्होंने कहा’कोई भी कारण, कोई भी तर्क निर्दोष लोगों के खूनबहाने को सही नहीं ठहरा सकता। मैं उन सभी के लिए शोक व्यक्त करता हूं जिनके जीवन खो गए जिनका भविष्य छीन लिया गया जिनके दिलअकल्पनीय दुख से भर गए और मैं सभी से महात्मा गांधी की शिक्षाओं को याद रखने का आग्रह करता हूं.उन्होंने कहा कि अहिंसा साहसी विकल्प है. रॉबर्ट वाड्रा ने पहलगाम हमले को दिया था कायरतापूर्ण करारहमारे देशवासियों की पीड़ा हमारी अपनी पीड़ा है. आज इस दुख की घड़ी में मैं एक ऐसी दुनिया बनाने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करता हूं.जहां कोईभी बच्चा कोई भी परिवार कोई भी समुदाय आतंक के साये में न रहे इससे पहले 23 अप्रैल को रॉबर्ट वाड्रा ने पहलगाम हमले को कायरतापूर्ण करारदिया था. उन्होंने कहा था कि इस तरह के हमले किसी भी वैध उद्देश्य को पूरा करने में विफल रहे हैं यह केवल सामाजिक विभाजन को गहरा करते हैं मैंइस घटना की निंदा करता हूं. ऐसी घटनाएं किसी मुद्दे को नहीं उठाती हैं नागरिकों पर हमला करके मुद्दों को उठाना कायरतापूर्ण तरीका है. धर्म औरराजनीति को अलग-अलग रहना चाहिए आतंकवादियों ने लोगों की पहचान की जांच करने के बाद उन्हें मार डाला क्योंकि उन्हें लगता है कि मुसलमानोंको दबाया जा रहा है.
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने नए स्टार्टअप को लेकर दिया जोर, कहा नौकरी की तलाश करने की बजाय उद्यमी बनना पसंद करे रहे है आज के युवा

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्टार्टअप पर जोर दिया उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में भारत की युवा पीढ़ी कीमानसिकता बदली है. अब युवा बहुराष्ट्रीय कंपनियों (एमएनसी) में नौकरी की तलाश करने के बजाय उद्यमी बनना पसंद कर रहे हैं. वॉशिंगटन डीसी मेंभारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और अमेरिका-भारत सामरिक भागीदारी मंच (यूएसआईएसपीएफ) द्वारा आयोजित अमेरिका-भारत आर्थिक मंचमें अपने भाषण में गर्वनर संजय मल्होत्रा ने कहा कि जब मैंने कॉलेज छोड़ा तो एमएनसी में नौकरी करना मेरा पसंदीदा विकल्प था. किसी ने भी अपनाखुद का उद्यम शुरू करने के बारे में नहीं सोचा था हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग और प्रबंधन स्नातक उद्यमिता और स्टार्ट-अप की ओर रुखकर रहे हैं.उन्होंने कहा कि उद्यमिता की इस बढ़ती संस्कृति ने भारत को एक मजबूत स्टार्ट-अप इकोसिस्टम बनाने में मदद की है. सरकारी पहलों का समर्थन है प्राप्तदेश में लगभग 150,000 मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप हैं जिन्हें स्टार्ट-अप इंडिया, डिजिटल इंडिया और अटल इनोवेशन मिशन जैसी सरकारी पहलों कासमर्थन प्राप्त है. आरबीआई गर्वनर ने कहा कि भारत में अब दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी संख्या में यूनिकॉर्न हैं जिनमें से कई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे उच्च तकनीक क्षेत्रों से उभर रहे हैं. भारत ने वैश्विक नवाचार सूचकांक में भी अपनी स्थिति में सुधार किया है यह2015 के 81वें स्थान से चढ़कर 2024 में 39वें स्थान पर आ गया है निम्न-मध्यम आय वाले देशों में भारत अब पहले स्थान पर है.उन्होंने कहा कि यहजानकर खुशी होती है कि भारत तेजी से नौकरी चाहने वालों की बजाय नौकरी देने वालों का देश बनता जा रहा है. सार्वजनिक वितरण प्रणाली कोआधार से जोड़ने जैसी विभिन्न योजनाओं के डिजिटलीकरण से भारी बचत हुई है. राज्य सरकारों को समय पर धन मिलने से केंद्र सरकार को अपनेनकदी प्रवाह को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में भी मदद मिली है. सरकारी खर्च की दक्षता में किया गया काफी सुधारदरअसल उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) जैसी पहलों ने सरकारी खर्च की दक्षता में काफी सुधार किया है जिससे मार्च2023 तक लगभग 40 बिलियन अमेरिकी डॉलर की बचत हुई है.उन्होंने कहा कि भारत में महिलाओं की श्रमबल में भागीदारी अंतरराष्ट्रीय औसत कीतुलना में काफी कम है। इस फासले को कम करने के लिए लड़कियों की शिक्षा कौशल विकास, कार्यस्थल पर सुरक्षा और सामाजिक बाधाएं दूरकरने की दिशा में प्रयास करने होंगे. आरबीआई गवर्नर ने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मझोली इकाइयों (एमएसएमई) का पांचवां हिस्सा महिलाओं केनियंत्रण में होने के बावजूद महिला उद्यमियों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के रुख को लेकर डरा पाकिस्तान, लेकिन अभी भी दे रहा गीदड़धमकी

पहलगाम आतंकी हमले को लेकर भारत के रुख को लेकर पाकिस्तान डरा हुआ है पाकिस्तान लगातार युद्ध की गीदड़भभकी तो दे रहा लेकिन मन हीमन वहां भारत की कार्रवाई को लेकर दहशत है. अब पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ ने अपने छोटे भाई और पाकिस्तान के पीएम शहबाजशरीफ को नसीहत दी है. पूर्व पीएम नवाज ने शहबाज शरीफ से कहा है कि वे कूटनीतिक तरीके से तनाव को कम करने पर जोर दें.रविवार कोपाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपने बड़े भाई और पूर्व पीएम नवाज शरीफ से मिलने के लिए उनके आवास पर पहुंचे. शहबाज ने नवाजशरीफ को भारत की ओर से लगाए गए कड़े प्रतिबंधों की दी जानकारी दी. साथ ही पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) की बैठक में लिएगए फैसलों के बारे में भी बताया. इस दौरान पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज भी मौजूद थीं. शहबाज ने अपने बड़े भाई को किसी भी आक्रमणका जवाब देने की तैयारियों के बारे में जानकारी दी.शहबाज ने कहा कि पहलगाम क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने के लिए आतंकी हमला भारतीयों नेकिया है.युद्ध के खतरों को दिया बढ़ावहीं सिंधु जल संधि को निलंबित करने के भारत के एकतरफा फैसले ने क्षेत्र में युद्ध के खतरे को बढ़ा दिया है. पाकिस्तान शांति के लिए प्रतिबद्ध हैलेकिन देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता. इस पर नवाज शरीफ ने कहा कि सरकार शांति बहाल करने के लिए सभी उपलब्धराजनयिक संसाधनों का इस्तेमाल करे. कूटनीतिक तरीके से तनाव कम करने पर जोर दिया जाए.इससे पहले पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ नेपहलगाम हमले की अंतरराष्ट्रीय जांच में चीन और रूस की भागीदारी की बात की. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि रूस या चीन या यहां तक किपश्चिमी देश इस संकट में बहुत ही सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं. वे एक जांच दल भी गठित कर सकते हैं जिसे जांच का काम सौंपा जाना चाहिएकि भारत झूठ बोल रहा हैं या सच उन्होंने कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय दल को इस बात का पता लगाने दें.पहलगाम हमले को लेकर भारत लगातारपाकिस्तान पर आरोप लगा रहा है.भारत ने पाकिस्तान पर सिंधू समेत लगाए कई प्रतिबंधभारत ने पाकिस्तान पर सिंधु जल संधि पर रोक समेत कई प्रतिबंध लगाए हैं वहीं पाकिस्तान हमले में संलिप्तता से इनकार कर रहा है. पाकिस्तान नेभारत के विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है.बीती 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित लश्कर ए तैयबा केसंगठन टीआरएफ के आतंकियों ने 26 निर्दोष पर्यटकों की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस घटना के बाद भारत सरकार ने सख्त कदम उठाते हुएसिंधु जल समझौता स्थगित कर दिया. साथ ही पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक संबंध भी कम कर लिए हैं. भारत ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त को एकहफ्ते में देश छोड़ने का निर्देश दिया है. आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना भी अलर्ट पर है.
“If Blood is Shed, More Will Flow on Their Side Than Ours”: Shashi Tharoor’s Rebuttal to Bilawal Bhutto

Tensions between India and Pakistan are always at a boiling point, and recently, this tension reached a new level when Pakistan’s Foreign Minister Bilawal Bhutto made a controversial statement. Bilawal Bhutto had said, “If India takes any action against Pakistan, a situation of bloodshed will arise.” This statement created a stir in Indian politics. Senior […]
पहलगाम हमले पर खड़गे का हमला, “मोदी गंभीर नहीं, सर्वदलीय बैठक में नहीं आए, बिहार में रैली करने में व्यस्त थे”

जम्मू और कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हाल ही में हुए आतंकवादी हमले पर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधतेहुए कहा कि प्रधानमंत्री हमले के प्रति गंभीर नहीं हैं। खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी हमले के बाद भी सर्वदलीय बैठक में शामिल होने केबजाय बिहार में एक रैली करने में व्यस्त थे। खड़गे ने यह बयान कांग्रेस पार्टी द्वारा आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में दिया, जहां उन्होंने सरकार कीआलोचना की और कहा कि प्रधानमंत्री का रुख राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति लापरवाह था। खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ यह आरोप भी लगाया कि जब देश को उनकी आवश्यकता थी, तब वह अपने चुनावी कार्यक्रमों में व्यस्त थे औरउन्होंने राजनीतिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी, जबकि देश में सुरक्षा की स्थिति गंभीर हो चुकी थी। “जब पहलगाम में हमारे सैनिकों पर हमलाहुआ, तब प्रधानमंत्री मोदी देश की सुरक्षा पर ध्यान देने के बजाय बिहार में चुनावी रैलियों में व्यस्त थे। यह एक गंभीर विषय है और प्रधानमंत्री का इसपर कोई ध्यान नहीं है,” खड़गे ने कहा।सर्वदलीय बैठक का मुद्दाखड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि सर्वदलीय बैठक बुलाने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी इसमें शामिल नहीं हुए, जो एक गंभीर औरसंवेदनशील मुद्दा था। खड़गे के अनुसार, मोदी की उपस्थिति की अनुपस्थिति ने इस मुद्दे की गंभीरता को और बढ़ा दिया। उन्होंने यह भी कहा कि मोदीको एक लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत देश के सभी राजनीतिक दलों को साथ लेकर निर्णय लेने चाहिए थे, लेकिन उनकी राजनीति मेंइस तरह की “लापरवाही” स्पष्ट रूप से झलकती है। कांग्रेस नेता ने यह भी बताया कि इस बैठक में पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होनी चाहिए थी, क्योंकि यह हमला पाकिस्तान के द्वारा प्रायोजितआतंकवाद का हिस्सा था। खड़गे ने यह सवाल उठाया कि क्यों प्रधानमंत्री मोदी ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर पार्टी राजनीति से ऊपर उठकर नहीं सोचते।उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रधानमंत्री ने सही समय पर इस बैठक में भाग लिया होता, तो इससे देश की एकजुटता और ताकत को और बढ़ावामिलता। पीएम मोदी की रैलियांप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिहार दौरे और चुनावी रैलियों पर खड़गे ने सवाल उठाते हुए कहा कि यह समय देश की सुरक्षा के लिए सामूहिक रूप सेएकजुट होने का था, न कि चुनावी कार्यक्रमों में व्यस्त रहने का। खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की प्राथमिकताएं गलत दिशा में हैं और यहदिखाता है कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा से ज्यादा अपनी राजनीतिक यात्रा की चिंता है। खड़गे ने कहा, “अगर प्रधानमंत्री को इस समय अपनी पार्टी और राज्यकी रैलियों से फुर्सत नहीं मिल रही, तो यह चिंता का विषय है।” खड़गे का प्रधानमंत्री से सवालकांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री से यह भी सवाल किया कि जब आतंकवाद की समस्या इतनी गंभीर हो, तो केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री को एक कदम आगेबढ़कर इस मामले को न केवल हल करना चाहिए, बल्कि पूरे देश को विश्वास दिलाना चाहिए। “हम प्रधानमंत्री से यह सवाल पूछते हैं कि अगर वोइतना व्यस्त हैं, तो क्या वो देश की सुरक्षा को प्राथमिकता देंगे या चुनावी रैलियों को?” खड़गे ने सवाल किया। कांग्रेस पार्टी का रुखकांग्रेस पार्टी ने हमेशा आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा पर अपनी चिंता जताई है और पार्टी नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी की नीतियां औरउनका रवैया आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में प्रभावी नहीं रहे हैं। खड़गे ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने कासमर्थन करती है, लेकिन वर्तमान सरकार के रवैये से यह साफ है कि राष्ट्रीय सुरक्षा उनके एजेंडे का हिस्सा नहीं है। इसके अलावा, खड़गे ने यह भी कहा कि इस प्रकार के हमले केवल कश्मीर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे देश के लिए खतरा हैं और सरकार कोइससे निपटने के लिए एक ठोस रणनीति बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री अपनी जिम्मेदारी निभाते और सर्वदलीय बैठक में भाग लेते, तो शायद देश को इस संकट से निपटने के लिए एक मजबूत रणनीति मिल सकती थी। सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ:प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ खड़गे का बयान देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। जहां एक तरफ कुछ राजनीतिक विश्लेषक खड़गे के बयान कोसही ठहरा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मोदी के समर्थक इसे राजनीतिक मौके पर निशाना साधने के तौर पर देख रहे हैं। कई ने यह भी कहा कि खड़गे काबयान केवल सरकार की आलोचना करने और राजनीतिक लाभ लेने का एक प्रयास था। सामाजिक मीडिया पर भी इस बयान को लेकर बहस तेज हो गई है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने खड़गे के बयान की निंदा की, जबकि कुछ नेप्रधानमंत्री की रैलियों की आलोचना की और खड़गे के दावे को सही ठहराया। यह मामला अब राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच भीचर्चा का विषय बन चुका है।
पहलगाम हमले के बाद सोशल मीडिया पर देशविरोधी पोस्ट, देशभर में बड़ी कार्रवाई

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले के बाद देश भर में सोशल मीडिया पर भड़काऊ और देश विरोधी पोस्ट डालने वालों केखिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है। सुरक्षा एजेंसियों ने सात राज्यों में छापेमारी कर 26 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तार लोगों में एकविधायक, एक पत्रकार, एक वकील और 23 छात्र शामिल हैं। इन सभी पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर हमले का समर्थन किया या फिरदेश विरोधी टिप्पणियां कीं, जिससे राष्ट्रीय एकता और शहीदों के सम्मान को ठेस पहुंची। जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोगों में उत्तर प्रदेश के एक क्षेत्रीय विधायक शामिल हैं, जिनके विवादास्पद बयान ने काफी हंगामा खड़ा करदिया। वहीं, दिल्ली से जुड़े एक प्रतिष्ठित अखबार के पत्रकार और एक उच्च न्यायालय के वकील को भी देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने केआरोप में पकड़ा गया है। 23 छात्रों को विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से कई ने सोशल मीडिया पर आतंकियोंके समर्थन में पोस्ट साझा किए थे। जांच में सामने आया है कि कई छात्र व्हाट्सएप ग्रुप और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए भड़काऊ सामग्री काप्रचार कर रहे थे, और कुछ पोस्ट तो पाकिस्तान समर्थक एजेंडे से प्रेरित नजर आए। गिरफ्तारियां जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और केरल जैसे सात राज्यों से हुई हैं। जम्मू-कश्मीर से सबसे ज्यादादस छात्रों को गिरफ्तार किया गया है। उत्तर प्रदेश में विधायक समेत तीन लोगों को, दिल्ली में एक पत्रकार और दो छात्रों को, जबकि महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल से भी कुछ छात्रों को पकड़ा गया है। सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की गंभीर धाराएँ लगाई गई हैं, जिनमेंदेशद्रोह (धारा 124A), सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास (धारा 153A), आपराधिक षड्यंत्र (धारा 120B) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियमकी धाराएं शामिल हैं। सरकार ने इस पूरे मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि देशविरोधी बयानों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गृह मंत्रालय केएक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर नफरत फैलाने की कोशिश करने वालों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी। सरकार कासाफ कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर देश की एकता और अखंडता से खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। हालांकि, कुछ छात्र संगठनों ने इन गिरफ्तारियों पर सवाल उठाए हैं और दावा किया है कि सभी छात्रों को एक ही तराजू में तौलना ठीक नहीं है। उन्होंनेमांग की है कि जिन छात्रों के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं हैं, उन्हें जल्द रिहा किया जाए। दूसरी ओर, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तार किए गएसभी व्यक्तियों के खिलाफ पर्याप्त डिजिटल सबूत मौजूद हैं और पूरी जांच प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है। सरकार ने इस प्रकरण के मद्देनजर फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर (अब X) और व्हाट्सएप जैसी सोशल मीडिया कंपनियों से संपर्क साधा है। विवादितपोस्टों और अकाउंट्स की जानकारी मांगी गई है ताकि कानूनी कार्रवाई को तेज किया जा सके। अब तक कई अकाउंट्स ब्लॉक कर दिए गए हैं औरअन्य पर नजर रखी जा रही है। सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे देशविरोधी सामग्री तुरंत हटाएं और संबंधित यूजर्स की पूरीजानकारी उपलब्ध कराएं। पहलगाम आतंकी हमले के बाद देश में उमड़े जनाक्रोश के बीच सोशल मीडिया पर देश विरोधी पोस्ट करने वालों के खिलाफ सरकार की सख्तकार्रवाई यह संकेत देती है कि भारत अब इस तरह के कृत्यों को बिल्कुल भी सहन नहीं करेगा। यह मामला एक बार फिर रेखांकित करता है कि सोशलमीडिया की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां और कार्रवाई देखने को मिलसकती हैं।
पहलगाम के गुनहगार को लेकर जम्मू-कश्मीर में बड़ा एक्शन, आतंकियों की मदद करने वाले दो लोगों को किया गया गिरफ्तार

पहलगाम में आतंकी हमले के बाद सुरक्षाबलों ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है आतंकियों के एनकाउंटर के बीच उन्हें पनाह देने वालों पर भीकार्रवाई की जा रही है. एएनआई से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कुलगाम जिले के कैमोह इलाके के थोकरपोरा में सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के दोसहयोगियों को गिरफ्तार किया.पहलगाम के गुनहगारों में शामिल लश्कर-ए-ताइबा के दो आतंकियों के घर जमींदोज हो गए हैं. सुरक्षाबलों ने आतंकीआसिफ शेख के त्राल स्थित घर और बिजबिहाड़ा स्थित आदिल ठोकर के घरों की वीरवार रात को तलाशी ली. इनमें बड़ी मात्रा में रखे गए विस्फोटकफटने से घर ध्वस्त हो गए.पहलगाम के बायसरन में 26 बेगुनाहों की जान लेने वाले हमलावरों में से तीन के सुरक्षा एजेंसियों ने स्केच जारी करने केबाद तस्वीरें भी जारी की हैं. सूत्रों के अनुसार प्रत्यक्षदर्शियों ने सुरक्षाबलों को जो बताता उसके आधार पर स्केच बनाए गए थे. हमले में तीन से चारआतंकवादी शामिल थे इनमें दो पाकिस्तानी और अन्य स्थानीय आतंकियों में आसिफ व आदिल भी शामिल हैं.आसिफ शेख ने गलत रास्ता चुना. परिवार की जिंदगी बर्बादइससे उसने अपनी और अपने परिवार की जिंदगी बर्बाद कर दी. आसिफ का घर त्राल के उसी इलाके में है जहां आतंकी बुरहान वानी रहता था कुछसमय पहले एक मुठभेड़ में मारे गए आतंकी की डायरी में आसिफ की हथियार के साथ तस्वीर मिली थी. आसिफ ने 2017-18 में पाकिस्तान में ट्रेनिंगली कुछ साल तक अंडरग्राउंड रहने के बाद 18 अप्रैल, 2022 से सक्रिय हुआ और तब से लश्कर के फरमान पर वारदात को अंजाम देता आ रहाहै.आतंकी आदिल 2018 में वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान भाग गया था. वहां उसने आतंकी कैंप में ट्रेनिंग ली और पिछले साल ही कश्मीर लौटा थावह भी लश्कर की नापाक मंसूबों को दक्षिण कश्मीर में अंजाम दे रहा था उसे युवाओं को आतंकवाद में भर्ती के लिए भी जिम्मेदारी दी गईथी.पहलगाम हमले में शामिल आतंकी आसिफ की बहन यासमीना ने कहा कि उसका भाई मुजाहिदीन है. उसने परिवार के निर्दोष सदस्यों को दंडितकिया जा रहा है राख हो चुके घर के पास पत्रकारों से बात करते हुए यासमीना ने कहा मेरा एक भाई जेल में है. दूसरा मुजाहिदीन है दो बहनें भी हैं. पुलिस ने लिया एक्शनदरअसल बीते दिन जब मैं ससुराल से यहां आई तो माता-पिता व भाई-बहन घर पर नहीं मिले. पुलिस उन्हें ले गई थी जब मैं यहां थी तो सुरक्षाबलआए और मुझे पड़ोसी के घर में जाने के लिए कहा उसके बाद घर ध्वस्त हो गया. कि मेरे भाई ने घर में विस्फोटक रखा वह जब आया ही नहीं तोरखेगा कहां से हमारी उसके साथ आखिरी बार 2021 में बात हुई थी. तब से कोई संपर्क नहीं हुआ उसने हम बहनों को बेसहारा छोड़ दिया था वहदिव्यांग पिता को भी छोड़कर चला गया.शोपियां के चोटीपोरा में एक सक्रिय शीर्ष लश्कर आतंकवादी कमांडर शाहिद अहमद कुट्टे के घर को सुरक्षाबलों ने जमींदोज कर दिया. शाहिद पिछले तीन से चार वर्षों से सक्रिय है और कई राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल है. शुक्रवार की रात सुरक्षाबलों ने कुलगाम के क्विमोह में आतंकी जाकिर गनी के घर को ध्वस्त कर दिया है जाकिर 2023 में लश्कर में शामिल हुआ था पहलगाम हमले केबाद अब तक सुरक्षाबलों ने कुल पांच आतंकियों के घरों को ध्वस्त कर दिया है.