हरियाणा बोर्ड परीक्षा में नकल और पेपर लीक का खुलासा, प्रशासन के दावों की पोल खुली

हरियाणा बोर्ड की परीक्षाओं के दौरान नकल और पेपर लीक के मामले सामने आ रहे हैं। 28 फरवरी से शुरू हुई 10वीं कक्षा की परीक्षा में नकल कीघटनाएं देखने को मिलीं, जहां परीक्षा केंद्रों पर बड़ी संख्या में लोग छात्रों को नकल कराने के लिए दीवारों पर चढ़ते नजर आए। गोहाना में खुलेआम नकल, सीसीटीवी में कैद हुई घटनासोनीपत जिले के गोहाना क्षेत्र में स्थित एक परीक्षा केंद्र पर नकल कराने की होड़ मच गई। सेंटर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों मेंCaptured तस्वीरोंमें साफ दिखा कि छात्रों के परिजन या अन्य लोग परीक्षा केंद्र की दीवारें फांदकर नकल कराने की कोशिश कर रहे थे। प्रशासन और पुलिस नकल रोकने में विफलहरियाणा शिक्षा विभाग द्वारा नकल मुक्त परीक्षा करवाने के दावों की पोल खुल गई। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा की सख्त व्यवस्था करने का दावा कियागया था, लेकिन हकीकत में नकल रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कई जगहों पर पुलिस बल की भी तैनाती नहीं दिखी, जिससेपरीक्षा केंद्रों पर अनुशासनहीनता बढ़ गई। हरियाणा बोर्ड 10वीं परीक्षा शेड्यूलहरियाणा बोर्ड की 10वीं कक्षा की परीक्षाएं 28 फरवरी से 19 मार्च 2025 तक सिंगल शिफ्ट में दोपहर 12:30 बजे से 03:00 बजे तक आयोजितकी जानी हैं। पहले ही दिन कई परीक्षा केंद्रों पर भीड़ इकट्ठी होकर नकल कराने की कोशिश करती दिखी, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता पर सवालउठने लगे हैं। हरियाणा बोर्ड 12वीं इंग्लिश का पेपर लीकइससे पहले 27 फरवरी को हरियाणा बोर्ड की 12वीं कक्षा के इंग्लिश पेपर लीक होने की घटना सामने आई थी। नूंह जिले के टपकन गांव में स्थितपरीक्षा केंद्र से पेपर लीक किया गया, जिसमें तीन परीक्षार्थियों और दो सुपरवाइजरों की मिलीभगत पाई गई। आरोप है कि इन लोगों ने मोबाइल सेपेपर की फोटो खींचकर उसे बाहर भेज दिया। मामले में सेंटर अधीक्षक की शिकायत पर नूंह सदर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। नकल और पेपर लीक पर सवालिया निशानबार-बार सामने आ रहे नकल और पेपर लीक के मामलों ने हरियाणा शिक्षा बोर्ड और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परीक्षाप्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है, ताकि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ न हो।
उत्तराखंड के चमोली में बड़ा हिमस्खलन, BRO कैंप प्रभावित, 47 मजदूर फंसे, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

उत्तराखंड के चमोली जिले के बद्रीनाथ क्षेत्र में शुक्रवार को भारी हिमस्खलन हुआ, जिससे भारत-तिब्बत सीमा के पास स्थित माणा गांव में बॉर्डर रोड्सऑर्गनाइजेशन (BRO) का कैंप इसकी चपेट में आ गया। इस घटना में 47 मजदूर अब भी बर्फ में फंसे हुए हैं। 10 मजदूरों का रेस्क्यू, 4 की हालत गंभीरहिमस्खलन के समय कैंप में कुल 57 मजदूर मौजूद थे, जिनमें से अब तक 10 को सुरक्षित निकाल लिया गया है। बचाए गए मजदूरों को माणा गांवस्थित सेना कैंप में पहुंचाया गया है। इनमें से 4 मजदूरों की हालत गंभीर बनी हुई है। राहत और बचाव कार्य जारी है, लेकिन दुर्गम इलाका औरलगातार हो रही बर्फबारी के कारण टीमों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। हादसे की वजह और घटनास्थल की स्थितियह हिमस्खलन शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे माणा और माणा पास के बीच हुआ, जब मजदूर सेना के मूवमेंट के लिए बर्फ हटाने का काम कर रहे थे।अचानक आए एवलांच ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। मौके पर घुटनों तक बर्फ जमी हुई है और लगातार हिमपात जारी है, जिससे बचाव कार्यप्रभावित हो रहा है। बचाव अभियान जारी, हेलीकॉप्टर सेवाएं बाधितचमोली के जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि राहत और बचाव कार्य जारी है। राज्य आपदा प्रबंधन सचिव विनोदसुमन ने बताया कि 65 सदस्यीय बचाव दल अभियान में जुटा हुआ है। खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर सेवाओं का उपयोग नहीं किया जा सकता, लेकिन मजदूरों को बचाने की पूरी कोशिश की जा रही है। बचाए गए मजदूरों को आईटीबीपी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मुख्यमंत्री का बयान, केंद्र सरकार से संपर्कउत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ITBP, SDRF और अन्य एजेंसियां लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी हुई हैं। खराब मौसम केकारण अभियान में कठिनाइयां आ रही हैं, लेकिन पूरा प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम अलर्ट पर हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालयऔर गृह मंत्रालय इस मामले पर लगातार संपर्क में हैं। NDRF और SDRF की टीमें मौके परघटना की सूचना मिलते ही NDRF और SDRF की टीमें मौके पर रवाना कर दी गईं। हालांकि, भारी बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम के चलते रेस्क्यूऑपरेशन में काफी दिक्कतें आ रही हैं। हिमस्खलन की पहले से चेतावनी जारी थीगुरुवार को ही इस इलाके में हिमस्खलन की संभावना जताई गई थी। चंडीगढ़ स्थित डिफेंस जियोइन्फॉर्मेटिक्स रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (DGRE) ने शाम5 बजे चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों के 2,400 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए हिमस्खलन की चेतावनीजारी की थी। इसके अलावा, देहरादून स्थित मौसम विभाग ने भी 3,500 मीटर से ऊंचे इलाकों में भारी बारिश और बर्फबारी का पूर्वानुमान लगायाथा। सतर्कता के बावजूद हादसाइन चेतावनियों के बाद राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) ने संबंधित जिलों के प्रशासन को सतर्क कर दिया था, लेकिन फिर भी यहहादसा हो गया। प्रशासन अब राहत कार्यों में तेजी लाने के प्रयास में जुटा हुआ है।
किसानों के हक से खिलवाड़: कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना, एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के मीडिया समन्वयक अभय दुबे ने केंद्र सरकार पर किसानों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारकेवल बैठकें कर भ्रम पैदा कर रही है लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी देने से बच रही है। उनका कहना है कि भाजपा सरकारकिसानों के हितों की अनदेखी कर रही है और उनके साथ अन्याय कर रही है। किसानों के अधिकारों से वंचित करने का आरोपअभय दुबे ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों के प्रति दुर्भावनापूर्ण रवैया अपनाए हुए है। पहले उनकी जमीनों पर कब्जे के लिए अध्यादेश लायागया, फिर कृषि कानून लागू किए गए, और जब किसानों ने विरोध किया तो सड़कों पर कीलें और कांटे बिछाए गए। अब जब किसान अपनी फसलोंके न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी मांग रहे हैं, तो सरकार उन्हें सिर्फ तारीखों का आश्वासन दे रही है। उन्होंने बताया कि सरकार ने 12 जुलाई2022 को एमएसपी को प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए एक समिति बनाई थी, जिसकी अब तक 7 बैठकें और उप-समितियों की 39 बैठकें होचुकी हैं, लेकिन अब भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।संसदीय समिति की सिफारिश और सरकार की अनदेखीसंसदीय स्थायी समिति (2024-25) ने 17 दिसंबर 2024 को अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि जब तक एमएसपी को कानूनी दर्जा नहीं मिलेगा, तबतक किसानों को वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा। रिपोर्ट में 13 नवंबर 2024 की बैठक का हवाला देते हुए कहा गया कि सरकार किसानों को केवलगुमराह कर रही है और कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। एमएसपी पर सरकारी दावों और हकीकत में अंतरसरकार 22 फसलों को एमएसपी पर खरीदने का दावा करती है, लेकिन वास्तव में केवल 0.05% फसलों की ही खरीद होती है। 2022-23 केआंकड़ों के अनुसार, गेहूं की 23% खरीद हुई, जबकि चने की केवल 0.37% और सूरजमुखी की बिल्कुल भी खरीद नहीं हुई। इसी तरह, सरसों कीखरीद महज 9.19% तक सीमित रही। एमएसपी मूल्यांकन में विसंगतियांकृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) ने रबी सीजन 2024-25 की रिपोर्ट में स्वीकार किया कि कई राज्यों द्वारा प्रस्तुत फसल लागत मूल्य अधिकहै, लेकिन सरकार इसे नजरअंदाज कर रही है। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में गेहूं की उत्पादन लागत ₹3527 प्रति क्विंटल है, लेकिन सरकार इसे₹4461 देने को तैयार नहीं है। वहीं, महाराष्ट्र में चने की लागत ₹5402 प्रति क्विंटल है, लेकिन सरकार ₹7119 प्रति क्विंटल देने से इंकार कर रहीहै। राजस्थान, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की लागत रिपोर्ट को भी अनदेखा किया गया है। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों की अनदेखीसंसदीय समिति ने बताया कि सरकार स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों (C2+50%) के अनुसार एमएसपी लागू नहीं कर रही है। हाल ही में घोषितरबी सीजन 2025-26 के एमएसपी में वृद्धि केवल 2.4% से 7% तक की गई है, जो किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है। कृषि बजट में कटौती2020-21 से 2024-25 तक कृषि बजट में लगातार कटौती देखी गई है, जिससे किसानों को सरकार की नीतियों का सीधा नुकसान हो रहा है। मोदीसरकार ने कृषि बजट के बड़े आंकड़े पेश किए, लेकिन वास्तविक खर्च बहुत कम रहा। अनुसूचित जाति के किसानों के लिए बजट में गिरावटदलित किसानों के लिए अनुसूचित जाति सब-प्लान (SCSP) के तहत आवंटित बजट में भारी कटौती की गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकारकृषि क्षेत्र में हाशिए पर खड़े किसानों की जरूरतों की अनदेखी कर रही है। किसानों से किए गए वादों का उल्लंघन2024 के चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के किसानों से सोयाबीन की खरीद ₹6000 प्रति क्विंटल करने का वादा किया था, लेकिन यह वादा पूरा नहीं किया गया। निष्कर्ष: किसानों के साथ अन्याय बंद करे सरकारअंत में, अभय दुबे ने कहा कि मोदी सरकार ने पिछले 9 वर्षों में खेती की लागत 25,000 रुपये प्रति हेक्टेयर बढ़ा दी, लेकिन किसानों को केवल₹6000 सालाना देकर उनकी समस्याओं को हल करने का दिखावा कर रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि एमएसपी की कानूनी गारंटी तुरंत दीजाए और किसानों के साथ हो रहे अन्याय को रोका जाए।
महाकुंभ 2025 का भव्य समापन, प्रधानमंत्री मोदी ने की योगी सरकार की सराहना

प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2025 ने आस्था और अध्यात्म के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया। यह 45 दिनों तक चला विश्व का सबसे बड़ाधार्मिक आयोजन रहा, जिसमें देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आंकड़ों के अनुसार, इस आयोजन में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं कीसंख्या 66 करोड़ से अधिक थी, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल करता है। विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजनमहाकुंभ 2025 में उमड़ी भीड़ ने इसे अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों की तुलना में कहीं आगे खड़ा कर दिया। जहां अर्बईन तीर्थ यात्रा में लगभग 2 करोड़, हज यात्रा में 25 लाख, रियो कार्निवल में 20 लाख और पुष्कर मेले में करीब 10 लाख लोग शामिल होते हैं, वहीं महाकुंभ में यह संख्या 66 करोड़ से अधिक पहुंच गई। यह आयोजन न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए सनातन संस्कृति की भव्यता और इसकी व्यापक स्वीकृति काप्रतीक बन गया। बेहतर प्रबंधन और प्रशासन की सतर्कतामहाकुंभ की सफलता का श्रेय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिया जा रहा है, जिनके नेतृत्व में इस आयोजन के लिए दो साल पहलेसे ही तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात प्रबंधन को लेकर प्रशासन ने व्यापक स्तर पर योजनाएं बनाई थीं। मुख्यमंत्री स्वयंहर प्रमुख स्नान पर्व से पहले व्यवस्थाओं की समीक्षा करते रहे और आवश्यक निर्देश जारी करते रहे। आंकड़ों में महाकुंभ 2025महाकुंभ 2025 के आयोजन को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर व्यवस्थाएं की गईं। प्रयागराज में लगभग 4,000 हेक्टेयर क्षेत्रमें इसे आयोजित किया गया। 9 लाख से अधिक साधु-संत, 10 लाख कल्पवासी, और 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु इस महापर्व का हिस्सा बने।यातायात प्रबंधन के लिए 13,830 विशेष ट्रेनें चलाई गईं, और 50 शहरों से सीधी ट्रेन कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा, 2,800 सेअधिक फ्लाइट सेवाएं चलाई गईं और सुरक्षा के लिए 50,000 से अधिक जवानों की तैनाती की गई। कुल आर्थिक गतिविधियों का आंकड़ा लगभग3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। मौनी अमावस्या पर भगदड़ और त्वरित कार्रवाईमौनी अमावस्या के दिन अत्यधिक भीड़ के कारण भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नेप्रयागराज पहुंचकर अधिकारियों की बैठक बुलाई और तत्काल जांच के आदेश दिए। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण के लिए नई रणनीतियां लागू कीं, जिससे आगे किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सका। प्रधानमंत्री मोदी की सराहनाप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस आयोजन की भव्यता और सफलता की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा की। उन्होंने इसे भारतकी सनातन संस्कृति की एकता और शक्ति का परिचायक बताया। प्रधानमंत्री ने मां गंगा, यमुना और सरस्वती से प्रार्थना करते हुए श्रद्धालुओं की सेवामें किसी भी कमी के लिए क्षमा भी मांगी। सफाईकर्मियों का सम्मान और स्वच्छता अभियानमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ की सफलता में योगदान देने वाले सफाईकर्मियों, स्वास्थ्यकर्मियों, नाविकों, बस चालकों और पुलिसकर्मियोंका विशेष रूप से सम्मान किया। उन्होंने अरैल घाट पर खुद झाड़ू लगाकर स्वच्छता का संदेश दिया और गंगा पूजन किया। इसके साथ ही, सफाईकर्मियों के लिए 10,000 रुपये के बोनस की घोषणा भी की गई। सनातन संस्कृति की भव्यता से विश्व अचंभितमहाकुंभ 2025 ने न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में सनातन संस्कृति की दिव्यता और एकता को दर्शाया। जाति, धर्म और भाषा के भेदभाव से ऊपरउठकर 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई, जो वैश्विक स्तर पर एक अद्वितीय दृश्य था। इस आयोजन ने भारतीय परंपराओं कीव्यापक स्वीकृति को और मजबूत किया। विपक्ष के आरोप और सरकार का जवाबमहाकुंभ के दौरान विपक्षी दलों, विशेष रूप से समाजवादी पार्टी (सपा), ने भगदड़ और अन्य घटनाओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा। विपक्ष नेदावा किया कि भगदड़ में कई श्रद्धालुओं की जान गई, जबकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह संख्या 30 थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इनआरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक दुष्प्रचार बताया। उन्होंने 2013 और 2025 के महाकुंभ आयोजनों की तुलना करते हुए कहा कि यहआयोजन भव्यता और सुचारू प्रबंधन का उदाहरण था। महाकुंभ 2025 की ऐतिहासिक उपलब्धिमहाकुंभ 2025 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह भारत की संस्कृति, श्रद्धा और एकता का अद्भुत संगम बना। इसकी सफलता ने विश्वपटल पर सनातन परंपराओं की महिमा को पुनः स्थापित किया। यह आयोजन प्रशासनिक दक्षता, धार्मिक भव्यता और भारतीय संस्कृति की शक्ति काप्रतीक बन गया।
प्रयागराज महाकुंभ 2025 का भव्य समापन: करोड़ों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

महाशिवरात्रि के अवसर पर बुधवार को प्रयागराज में आयोजित भव्य महाकुंभ का समापन हो गया। यह आयोजन 13 जनवरी से शुरू हुआ था औरइसमें देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। इस ऐतिहासिक मेले के दौरान लगभग 66.30 करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में आस्था कीडुबकी लगाई। अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि पर हुआ, जिसमें अकेले इस दिन 1.53 करोड़ से अधिक लोगों ने भाग लिया।स्वच्छता के लिए 15,000 सफाईकर्मियों ने निभाई अहम भूमिकामहाकुंभ के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया, जिसके लिए 15,000 सफाईकर्मियों की तैनाती की गई थी। इन कर्मियों ने चौबीसों घंटे कामकर मेले को स्वच्छ बनाए रखने में योगदान दिया। हालांकि, मौनी अमावस्या के दिन भगदड़ की दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई, जिसमें 30 लोगों की जान चलीगई। इस घटना के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई और उनकी भारी भीड़ लगातार उमड़ती रही।प्रमुख हस्तियों की रही उपस्थितिइस महाकुंभ में कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया, जिनमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल रहे।इसके अलावा, फिल्म, खेल और उद्योग जगत से जुड़ी कई बड़ी हस्तियों ने भी संगम में स्नान किया। सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमालमेले में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया। एआई आधारित कैमरे, एंटी-ड्रोन सिस्टम और अन्यडिजिटल उपकरणों के माध्यम से सुरक्षा पर विशेष नजर रखी गई। कुंभ के दौरान विवाद भी उठेमहाकुंभ के आयोजन के दौरान कुछ विवाद भी सामने आए। इनमें फिल्म अभिनेत्री ममता कुलकर्णी के महामंडलेश्वर बनने और गंगा जल की शुद्धता कोलेकर उठे सवाल प्रमुख रहे। सरकार ने गंगा जल की गुणवत्ता को लेकर सफाई दी और श्रद्धालुओं को आश्वस्त किया। वहीं, मौनी अमावस्या कीभगदड़ को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए, जबकि प्रशासन ने एआई कैमरों के आंकड़ों के जरिए श्रद्धालुओं की संख्या को प्रमाणिकबताया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रिय भूमिकामहाकुंभ के सफल आयोजन में उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 45 दिनों के दौरान 10 बार मेले का दौराकिया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इसके अलावा, उन्होंने लखनऊ और गोरखपुर से नियंत्रण कक्ष के जरिए भी निगरानी रखी, जिससे आयोजनसुचारू रूप से संपन्न हुआ।ऐतिहासिक आयोजन की सफलताअत्याधुनिक व्यवस्थाओं, प्रशासनिक सतर्कता और श्रद्धालुओं की अपार आस्था ने इस महाकुंभ को ऐतिहासिक बना दिया। कुछ विवादों औरचुनौतियों के बावजूद, यह आयोजन सफलता की मिसाल साबित हुआ और दुनिया भर के श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभवबन गया।
मोहन सिंह बिष्ट बने दिल्ली विधानसभा के डिप्टी स्पीकर, बीजेपी की सत्ता में वापसी के बाद बड़ी जिम्मेदारी

दिल्ली की मुस्तफाबाद विधानसभा सीट से विधायक मोहन सिंह बिष्ट को दिल्ली विधानसभा का डिप्टी स्पीकर चुना गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता नेउनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने समर्थन दिया। वर्तमान में दिल्ली विधानसभा के स्पीकर वरिष्ठ नेता विजेंद्र गुप्ता हैं। अनुभवी नेता मोहन सिंह बिष्टमोहन सिंह बिष्ट दिल्ली की राजनीति में एक अनुभवी नेता माने जाते हैं। वे करावल नगर विधानसभा सीट से कई बार विधायक रह चुके हैं। हालांकि, इस बार उन्होंने मुस्तफाबाद सीट से चुनाव लड़ा और आम आदमी पार्टी (AAP) के उम्मीदवार आदिल अहमद खान को 17,000 से अधिक वोटों केअंतर से हराया। करावल नगर से चुनावी सफरमोहन सिंह बिष्ट ने 1998 में करावल नगर विधानसभा सीट से पहला चुनाव जीता था और 2015 तक लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।2015 के चुनाव में उन्हें आम आदमी पार्टी के कपिल मिश्रा से हार का सामना करना पड़ा। बाद में कपिल मिश्रा बीजेपी में शामिल हो गए। 2020 में मोहन सिंह बिष्ट ने करावल नगर से फिर से जीत दर्ज की, लेकिन 2025 में पार्टी ने उन्हें मुस्तफाबाद से टिकट दिया, जहां उन्होंने सफलताहासिल की। इस बार करावल नगर से कपिल मिश्रा को बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने बड़े अंतर से जीत दर्ज की और रेखा गुप्ता की सरकार मेंमंत्री बने। दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी की शानदार वापसी2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 70 में से 48 सीटों पर जीत दर्ज कर सत्ता में वापसी की। आम आदमी पार्टी(AAP) को 22 सीटें मिलीं। इस जीत के साथ बीजेपी ने 27 साल बाद दिल्ली की सत्ता पर कब्जा जमाया।
ममता बनर्जी ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का लगाया आरोप, जिला स्तरीय कमेटी गठित

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित पार्टी बैठक मेंवोटर लिस्ट में फर्जी नाम जोड़े जाने को लेकर सतर्कता बरतने का निर्देश दिया। उन्होंने दावा किया कि बंगाल की मतदाता सूची में बाहरी लोगों कोशामिल किया गया है और इसे लेकर सख्त कदम उठाने की जरूरत है।फर्जी मतदाताओं को लेकर सतर्कताममता बनर्जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे वोटर लिस्ट में किसी भी गड़बड़ी पर नजर रखें। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर ध्यान देने केलिए टीएमसी नेता सुब्रत बक्सी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में जिलेवार कोर कमेटियां बनाई जाएंगी। ये कमेटियां हर तीन दिन में अपनी रिपोर्टकेंद्रीकृत समिति को सौंपेंगी। बीजेपी पर मतदाता सूची में हेराफेरी का आरोपसीएम ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर मतदाता सूची में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने हरियाणा औरगुजरात के फर्जी मतदाताओं को दिल्ली और महाराष्ट्र में चुनाव जिताने के लिए शामिल किया था। ममता बनर्जी का दावा है कि इसी तरह का षड्यंत्रपश्चिम बंगाल में भी रचा जा रहा है, जिससे 2026 के विधानसभा चुनावों को प्रभावित किया जा सके। डेटा एंट्री एजेंसियों पर संदेहममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने दो ऑनलाइन एजेंसियों”एसोसिएशन ऑफ ब्रिलियंट माइंड्स” और “कंपनी इंडिया 360″को इस कामके लिए नियुक्त किया है। उन्होंने कहा कि इन एजेंसियों ने डेटा एंट्री ऑपरेटरों और कुछ ब्लॉक स्तर के रिटर्निंग अधिकारियों के साथ मिलकर मतदातासूची में बाहरी लोगों के नाम जोड़े। उनका दावा है कि ये एजेंसियां अन्य राज्यों के मतदाताओं को बंगाल के ईपीआईसी नंबर (EPIC Number) सेजोड़ रही हैं। जिला स्तरीय कोर कमेटी का गठनमुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी इस तरह की साजिश को सफल नहीं होने देगी। उन्होंने घोषणा की कि प्रत्येक जिले में कोर कमेटीगठित की जाएगी, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची में की जा रही हेराफेरी की पहचान करना होगा। उन्होंने कहा, “फर्जी मतदाताओं की पहचान अगले 10 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी। अगर समिति इस काम में विफल रहती है, तो मैं खुद इसकीजांच करूंगी।” ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि बंगाल की मतदाता सूची में गड़बड़ी की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस पर कड़ी कार्रवाईकी जाएगी।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन का केंद्र पर निशाना, हिंदी और संस्कृत थोपने के प्रयास का विरोध

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने केंद्र सरकार पर हिंदी और संस्कृत को थोपने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राज्य अपनी भाषा औरसंस्कृति की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और हिंदी को जबरन लागू करने की अनुमति नहीं देगा। हिंदी थोपने का विरोधस्टालिन ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि हिंदी थोपने के प्रयासों का पुरजोर विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हिंदीकेवल एक मुखौटा है, जबकि संस्कृत इसके पीछे छिपी हुई असली रणनीति है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर आपत्तिडीएमके सरकार ने केंद्र की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में तीन-भाषा फॉर्मूले को हिंदी थोपने का जरिया बताया है। हालांकि, केंद्र सरकार इस आरोपको खारिज कर चुकी है। यह विवाद 1965 के हिंदी विरोधी आंदोलन की याद दिलाता है, जब डीएमके ने हिंदी के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया था। उत्तर भारतीय भाषाओं पर हिंदी के प्रभाव का आरोपस्टालिन ने दावा किया कि बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बोली जाने वाली कई भाषाएं, जैसे मैथिली, ब्रजभाषा, बुंदेलखंडी और अवधी, हिंदीके आधिपत्य के कारण कमजोर हो गई हैं। उन्होंने कहा कि द्रविड़ आंदोलन के प्रयासों से तमिल भाषा और संस्कृति की रक्षा संभव हो सकी है। शिक्षा नीति के माध्यम से हिंदी और संस्कृत थोपने का आरोपमुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का विरोध करते हुए कहा कि इसके जरिए हिंदी और संस्कृत को प्रमुखता देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंनेआरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में संस्कृत को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि अन्य भाषाओं की उपेक्षा की जा रही है। त्रिभाषा नीति को लेकर चिंतास्टालिन ने कहा कि यदि तमिलनाडु त्रिभाषा नीति को स्वीकार करता है, तो इससे मातृभाषा को नजरअंदाज कर दिया जाएगा और भविष्य में संस्कृतको बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि एनईपी के प्रावधानों में अन्य भारतीय भाषाओं की तुलना में संस्कृत को प्राथमिकता दी गई है, जिससे क्षेत्रीयभाषाओं को नुकसान हो सकता है। तमिल संस्कृति की रक्षा का संकल्पमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु में केवल दो-भाषा नीति ही लागू रहेगी, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री सी. एन. अन्नादुरई ने लागू किया था। उन्होंने आरोपलगाया कि केंद्र सरकार तमिल भाषा को खत्म कर संस्कृत थोपने की योजना बना रही है, लेकिन उनकी सरकार ऐसा नहीं होने देगी।
CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, दिल्ली में कथित शराब घोटाले की जांच करेगी PAC

दिल्ली विधानसभा में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं को उजागर करने वाली नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत की। अब यह रिपोर्ट आगे की जांच के लिए पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) को भेजी जाएगी, जो इसपर विचार-विमर्श कर अपनी रिपोर्ट विधानसभा अध्यक्ष को सौंपेगी। PAC करेगी रिपोर्ट की समीक्षाविधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने जानकारी दी कि इस रिपोर्ट की जांच के लिए 12 सदस्यों वाली पीएसी का गठन किया जाएगा। इस समिति मेंसत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोनों दलों के सदस्य शामिल होंगे। सीएजी रिपोर्ट में हुए खुलासों के आधार पर पीएसी कथित शराब घोटाले की विस्तृत जांच करेगी। इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करविधानसभा अध्यक्ष को सौंपेगी, जिसमें दोषियों के खिलाफ संभावित कार्रवाई की सिफारिशें शामिल होंगी। क्या होगी संभावित कार्रवाई?रिपोर्ट के आधार पर सदन यह निर्णय लेगा कि कथित अनियमितताओं के कारण हुए राजस्व नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कदमउठाए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, आबकारी नीति के निर्माण और उसके कार्यान्वयन में शामिल अधिकारियों, पूर्व मंत्रियों, और निजी व्यक्तियों कोसमन भेजा जा सकता है। संभावित रूप से इसमें पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आबकारी नीति तैयार करने वाले मंत्रियों के समूह (GoM) केपूर्व सदस्य भी शामिल हो सकते हैं। PAC क्या है?पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) एक संसदीय समिति होती है, जिसका गठन सरकार के राजस्व और व्यय की जांच के लिए किया जाता है। यहसमिति केंद्र और राज्य सरकारों के खर्चों का ऑडिट करती है ताकि वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। राज्यों की विधानसभाओं में भी इसीप्रक्रिया के तहत पीएसी गठित की जाती है, जिसमें सत्तारूढ़ दल और विपक्षी पार्टियों के विधायक सदस्य होते हैCAG रिपोर्ट के मुख्य बिंदुसीएजी की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि दिल्ली सरकार की आबकारी नीति में दी गई विभिन्न छूटों के चलते नियमों का उल्लंघन हुआ, जिससेसरकार को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। पीएसी इस रिपोर्ट की जांच कर यह तय करेगी कि इस कथित घोटाले में किन-किन व्यक्तियों कीभूमिका रही और क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।
पुणे में जमानत पर रिहा हिस्ट्रीशीटर ने बस में युवती के साथ किया दुष्कर्म,जानें कौन है आरोपी दत्तात्रेय रामदास गाड़े?

Pune Rape Case: पुणे से एक दिल को दहला देने वाली खबर सामने आई है दरअसल पूणे के सबसे व्यस्त स्वारगेट बस स्टैंड पर मंगलवार कीसुबह करीब 26 वर्ष की युवती के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है.जिसमें चौकानें बाली सबसे बड़ी बात ये है कि इस बस स्टैंड के सामनेपुलिस चौकी भी है जो करीब सौ मीटर की दूर पर ही है. ऐसे में भी आरोपियों को किसी बात का डर नहीं है. दरअसल यह घटना मंगलवार की सुबहकरीब साढ़े पांच बजे से छह बजे के बीच की है जब पुणे में काम करने वाली एक युवती अपने गांव फलटण जाने के लिए स्वारगेट बस स्टैंड पर पहुंचीहुई थी.स्वारगेट पुणे के सबसे व्यस्त बस अड्डों में से एक है यहां से लगभग पूरे राज्यों में बसों का आना जाना होता है.युवती फलयण जाने वाली बसस्टैंड पर खड़ी थी. तभी एक युवक ने आकर उससे अपनी पहचान बनाई आरोपी ने महिला को दीदी कहकर पुकारा.फिर उससे पूछा कहां जाना है. युवती ने अपनी उसे जाने की जानकारी दी. तो युवक ने उसे गुमराह किया उसने बताया कि बस तो दूसरी जगह खड़ी है वह उसे बस अड्डे के दूसरी तरफसूनसान जगह ले गया जहां पर शिव शाही एसी बस खड़ी थी. बस के अंदर लाइटें नहीं जल रही थी.युवती को बस के अंदर जाने से झिझक तो हुईलेकिन आरोपी ने उसे समझाता कि यह बस है.दुष्कर्म के बाद आरोपी हुआ फरारयुवती के बस में चढ़ने के बाद वह भी पीछे से बस में चढ़ गया और उसके साथ दुष्कर्म किया. इसके बाद वह बस से फरार हो गया.युवती ने इस घटनाकी जानकारी अपनी एक सहेली को दी उसने पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराने की सलाह दी. युवती ने पुलिस थाने पहुंचकर अपने साथ हुई घटना को पुलिसको जानकारी दी और रिपोर्ट दर्ज करवाई.स्वारगेट पुलिस अधिकारी ने आरोपी की पहचान दत्तात्रेय रामदास के नाम से की है. दरअसल दत्तात्रेय रामदासगाडे के खिलाफ पुणे और आस पास के इलाकों में चोरी , डकैती और चेन स्नैचिंग के आधा दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज है.दत्तात्रेय को 2019 से एकअपराध में जमानत पर बाहर निकाल दिया था. राष्ट्रीय महिला आयोग ने बस के अंदर युवती से हुए दुष्कर्म मामले को स्नत:संज्ञान लिया है. उन्होनेंडीजीपी से एफआईआर की कापी के साथ तीन दिनों के भीतर कार्यवाही रिपोर्ट भेजने को कहा है.