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प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर भारत पहुंचेगी यूरोप की कमीशन अध्यक्ष, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट समेत कई खास मुद्दों पर होगी चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर यूरोपीय कमीशन के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लियेन 27 फरवरी यानी आज 2 दिन की भारत यात्रा पर आएगीं. वहपीएम मोदी से मुलाकात करेंगीं और भारत यूरोपीय यूनियन व्यापार परिषद में भाग लेंगे इस दौरान फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर भी चर्चा की जाएगी. दरअसलउर्सुला वॅान डेर के साथ यूरोपीय संघ का एक आयुक्त कॉलेज होगा. इस डेलिगेशन में यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के 27 अधिकारी शामिल होंगे. यूरोपीय संघ के अधिकारियों के मुताबिक इस यात्रा के प्लान कई महीनों पहले बनाया जा रहा था. इसकी घोषणा 21 जनवरी को दवोस में की गईथी. पीएम मोदी और उर्सुला वॅान डेर शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगें. दरअसल ये उर्सुला की तीसरी भारत यात्रा है. इस यात्रा के दौरानभारत और यूरोपीय संघ में ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी परिषद की दूसरी मंत्री स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी. इसके साथ यूरोपीय आयुक्त और उनकेभारतीय समकक्षों के बीच द्विपक्षीय मंत्री स्तरीय बैठकें होंगी. उर्सूला लियेन की तीसरी भारत यात्राइससे पहले वह अप्रैल 2022 में द्विपक्षीय यात्रा के लिए और सितंबर 2023 में G20 नेताओं के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आ चुकीहै. उर्सुला यूरोपीय कमीशन की पहली महिला प्रमुख है.यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. दोनों पक्षों के बीच 2023 में कुल129 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था. यह केवल भारतीय व्यापार का 12.2 प्रतिशत है. वहीं भारत यूरोपीय संघ का 9वां सबसे बड़ा व्यापारिकसाझेदार भी है. पिछले दशक में यूरोपीय संघ और भारत के बीच वस्तुओं के व्यापार में लगभग 90% की वृद्धि हुई है. भारत में लगभग 6,000 यूरोपीय कंपनियां भी मौजूद हैं. यूरोपीय संघ और भारत के बीच सेवाओं का व्यापार 2023 में 62 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था जो 2020 में31 मिलियन डॉलर था. भारत के साथ मजबूती के संबंधयूरोपीय यूनियन के भारत आ रहे प्रतिनिधिमंडल के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने कहा कि ईयू अध्यक्ष ऊर्सुला वॅान डेर लेयन की आगामी यात्रा यूरोप औरभारत के बीच मजबूत संबंधों को रेखांकित करती है. दरअसल इस दौरे का मुख्य उद्देश्य यह रेखांकित करना है कि ईयू भारत के साथ अपने संबंधों कोकितना महत्व देता है यूरोपीय संघ और भारत के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण सप्ताह होगा.ईयू की अध्यक्ष और उनकी टीम जो कि यूरीपीय आयोग कीपूर्ण सरकार के बराबर है. दो दिनों की बातचीत के लिए हम दिल्ली आ रहे है.उन्होनें कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि हम दोनों एक दूसरे को नसिर्फ पसंदीदा साझेदार के रुप में देखते है बल्कि अच्छाई की ताकत के रुप में भी देखते है.

कांग्रेस नेता शशी थरुर की एक पोस्ट से कांग्रेस हुई बैचेन,क्या केरल में हो सकती है बदलाव की तैयारी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर एक बार फिर चर्चा में है. उन्होंने अपने एक्स पोस्ट पर ब्रिटेन के विदेश मंत्री जोनाथन रेनॅाल्ड्स और केंद्रीय मंत्री पीयूषगोयल के साथ अपनी एक सेल्फी को सोशल मीडिया पर साझा किया. इसके बाद केरल कांग्रेस में अटकलों का दौर तेज हो गया. उन्होंने अपनी पोस्टमें लिखा कि जोनाथन के साथ उनके भारतीय समकक्ष पीयूष गोयल की मौजूदगी में उनको बातचीत करके काफी अच्छा लगा. शशि थरूर ने भारतऔर ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता फिर से शुरू होने का स्वागत किया. साथ उन्होंने प्रियंका गांधी की हाल ही में की गई उस अपीलका भी समर्थन किया जिसमें ऋण के रूप में वितरित किए गए धन को अनुदान में बदलने और आपदा पीड़ितों के लिए खर्च की गई सीमा को बढ़ाने कीबात कही है. शशि थरुर ने अपनी एक्स पर पोस्ट पर ब्रिटेन के विदेश मंत्री जोनाथन रेनॅाल्ड्स और केंद्रीय वाणिज्य एवं युवा उद्योग मंत्री पीयूष गोयलके साथ अपनी एक सेल्फी शेयर करते हुए लिखा कि जोनाथन के साथ उनके भारतीय समकक्ष एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी में बातचीतकरके उनको अच्छा लगा. शशि थरुर ने सोशल मीडिया पर साझा की तस्वीरेंउन्होनें कहा कि ये लंबे समय से रुकी हुई एफटीए वार्ता फिर से शुरू हो गई है. यह बहुत स्वागत योग्य है. दरअसल सोमवार को भारत और ब्रिटेन नेएक ऐसे मुक्त व्यापार समझौते पर बात फिर से शुरू की. जो संतुलित पारस्परिक रूप से लाभकारी और दूरदर्शी है भारत ब्रिटेन एफडीए वार्ता 13 जनवरी 2022 को शुरू की गई थी. दिसंबर 2023 तक वार्ता को शुरु की गई थी.इसके बाद 10 जनवरी 2024 को 14वें दौर की वार्ता शुरू की गईथी. लेकिन ब्रिटेन में चुनावों के कारण मई 2024 से है वार्ता रोक दी गई थी. बायनाड की सांसद प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्रलेकर अनुरोध किया था. इस पत्र में 30 जुलाई 2024 को केरल जिले में चूरलमाला और मुंडक्कई में आए विनाशकारी भूस्खलन के पीड़ितों के लिएतत्काल और बिना शर्त वित्तीय सहायता का अनुरोध किया गया था. अपने पत्र में उन्होंने राहत को अपर्याप्त बताया था और फंड से जुड़ी शर्तों परनिराशा व्यक्त की थी.

फिटनेश को लेकर उत्तराखंड सरकार कर रही फोकस, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने किया ऐलान” 1 मार्च से शुरु होगा योगा महोत्सव

Uttrakhand Yog Festival: उत्तराखंड के ऋषिकेश में 1 से लेकर 7 मार्च तक अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का आयोजन किया जाएगा. इसआयोजन का शुभारंभ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे. इस दौरान महोत्सव को भव्य बनाने के लिए जोरों शोरों से तैयारी चल रही है. आयोजन में देश-विदेश के योगाचार्य सड़क एवं प्रतिभागी योगासन और ध्यान विधियों का अभ्यास कराएंगे. इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम औरआध्यात्मिक संत के प्रवचन का भी यहां पर आयोजन कराया जाएगा.पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुसार उत्तराखंड को योग कि वैश्विक राजधानीके रूप में स्थापित करने के उद्देश्य है. जीएमवीएन पर्यटन विभाग द्वारा 1 मार्च से 7 मार्च तक गंगा रिजॉर्ट ऋषिकेश में अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव काआयोजन किया जाएगा. दरअसल इसका उद्घाटन एक मार्च को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे. योगाचार्य देंगें प्रशिक्षणउत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि आयोजन में देश-विदेश की ख्याति प्राप्त योगाचार्य और प्रतिभागी प्रतिदिन विभिन्न सत्र में योगप्रशिक्षण देंगे. इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम और आध्यात्मिक संत के प्रवचन भी कराए जाएंगे. महोत्सव में आध्यात्मिक जगत की प्रतिष्ठितहस्तियों भी अपने विचार साझा करेंगे. उत्तराखंड को पूरी दुनिया में योग और आध्यात्मिक की भूमि के रूप में पहचाना जाए. ऋषिकेश न केवल योग कीअंतरराष्ट्रीय राजधानी है बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का प्रतीक भी है. अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव से पूरी दुनिया को भारतकी प्राचीन विधा का लाभ मिल सकेगा.इस खास मौके पर महोत्सव के दौरान प्रतिदिन विभिन्न सत्रों में योग प्रशिक्षण दिया जाएगा.इसके अलावासांस्क्रतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियों भी करवाई जाएगी.इसके साथ ही अध्यात्मिक संतो के प्रवचन भी होगें. सीएम पुष्कर सिंह धामी ने लोगों सेअपील की. कि मैं सभी योग प्रेमियों और साधकों से महोत्सव मैं भाग लेने का आहान करता हूं.

वित्त वर्ष 2025 से लेकर 2026 तक भारत की आर्थिक स्थिति में होगा सुधार, वृद्धि दर पहुंच जाएगी 6.4 प्रतिशत के पार

भारत की आर्थिक वृद्धि वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 में 6.4 प्रतिशत की दर से बढ़ाने की संभावना है. जिसमे एसएंडपी ग्लोबल मार्केटइंटेलिजेंस के नवीनतम पूर्वानुमान में सामने आया है. कि यह अनुमान वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और घरेलू नीतिगत बदलावों के बावजूद भारत कीस्थिर प्रगति को दर्शाता है. यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक के 6.6 प्रतिशत के अनुमान के करीब है. लेकिन एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के बदले 6.8 प्रतिशत के पूर्वानुमान से थोड़ा काम है. मौद्रिक और राजकोषीय नीतियों, मुद्रास्फीति की प्रवृत्ति और सरकारी खर्च इस वृद्धि को प्रभावित करेंगे. भारतकी आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख कारक आरबीआई और सरकार की नीतियों का सहयोग सहयोगात्मक दृष्टिकोण है.दरअसल फरवरी 2025 मेंआरबीआई ने लगभग 5 वर्षों में पहली बार रेपो दर को 25 आधार अंकों की कटौती के साथ 6.25 प्रतिशत कर दिया. इस कदम का उद्देश्य निवेशको बढ़ावा देना है. जिससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी. 2025 के केंद्रीय बजट में कर राहत उपायों को शामिल किया गया है. जिसमें आमआदमी की आय में वृद्धि होगी. और उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा मिलेगा. RBI कर सकता है कटौतीइस ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस को उम्मीद है. कि अप्रैल 2025 में आरबीआई 25 आधार अंकों की एक और कटौती कर सकता है. जिससे घरेलू मांगको और बढ़ावा मिलेगा. यह नीतिगत प्रयास वैश्विक अस्थिरता के प्रभाव को कम करने और भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिर वृद्धि सुनिश्चित करने में मददकरेगी. वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति बनी हुई है. मौद्रिक और राजकोषीय समर्थन स्थिर होते मुद्रा स्थिति और प्रमुख क्षेत्र मेंवृद्धि की संभावनाओं के साथ देश सतत आर्थिक विस्तार की ओर अग्रसर है. आने वाले वर्ष यह तय करेंगे कि नीतिगत हस्तक्षेप भारत की आर्थिक गतिको लंबे समय तक बनाए रखने में कितने प्रभावित साबित होते हैं.दरअसल ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस ने भारत की जीडीपी को लेकर बढ़ती हुई दरों कोलेकर वित्त वर्ष 2026 में 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. जिसको लेकर आरबीआई ने फरवरी में रेपो दर को 25 के आधार के अंक घटाकर6.25 प्रतिशत कर दिया गया ताकि उधारी और निवेश को प्रोत्साहित किया जा सके.दरअसल इसमें सरकारी उपाय केंद्रीय बजट 2025 में कर राहतभी दी गई है जिसको लेकर लोंगो के आय और मांग में वृद्धि हो सके.

“बांगलादेश खतरे में ” सेना प्रमुख वकर-उज-जमान ने दी चेतावनी, देश की अराजकता के लिए हम खुद है जिम्मेदार

बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकर-उज जमान ने कहा कि देश में राष्ट्रीय एकता और अनुशासन की सख्त जरूरत है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगरसमाज में झगड़ा और खून खराब जारी रहा तो देश की स्वतंत्रता और अखंडता खतरे में पढ़ सकती है. देश में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर चिंता जतातेहुए उन्होंने कहा कि राजनीति उथल-पुथल के कारण हालात और भी खराब होते जा रहे हैं. एक सैन्य कार्यक्रम के दौरान जनरल जमान ने कहा जोअराजकता हमने देखी है. दरअसल उसके लिए कोई और जिम्मेदार नहीं है वह हमारी खुद की बनाई हुई है. पुलिस बल की क्षमता पर भी सवाल भीउन्होनें उठाए और बताया कि कई अधिकारी डर में जी रहे हैं. क्योंकि उनके साथी यह तो जेल में है या उन पर मुकदमे चल रहे हैं. सेना प्रमुख ने कहाकि देश में राष्ट्रीय एकता और अनुशासन की सख्त जरूरत है. सेना प्रमुख ने दी चेतावनीसेना प्रमुख जनरल वकर- उज जमान ने इस पर चेतावनी दी. उन्होनें कहा कि अगर समाज में झगड़ा और खून खराब आज भी जारी रहा तो देश कीस्वतंत्रता और अखंडता खतरे में पढ़ सकती है. अगर आप आपसी मतभेद भुला कर एक नहीं हुए और एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते रहे तो देशका अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा. बीते कुछ महीनो में बांग्लादेश में हिंसा तोड़फोड़ और दंगे आए दिन बढ़ रहे हैं. फरवरी में हालात इतने खराब हो गएथे. कि सुरक्षा बलों को ऑपरेशन डेविल हंट नाम से एक बड़ा अभियान चलाना पड़ा था. इसमें करीब 8,600 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गयाथा. अंतरिम सरकार का कहना है कि यह लोग देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे थे. छात्र आंदोलन के बाद छोड़ना पड़ा था शेख हसीना को पदपिछले अगस्त में छात्र आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी. जिसके बाद से पुलिस को गिरफ्तारी और न्यायिक शक्तियांमिल गई थी. इस दौरान सेना पर गायब करने, हत्या और यातना के आरोप भी लगाए गए थे. कि इन आरोपों की जांच जरूर हो. और दोषियों को सजामिलनी चाहिए नहीं तो हम फिर उसी से चक्र में फंस जाएंगे. सेना प्रमुख ने लोगों से नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने नेतृत्व वाली अंतरिमसरकार का समर्थन करने की अपील की उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव 2025 के अंत या 2026 की शुरुआत में कराए जाएंगे. इसी बीच छात्रआंदोलन के प्रमुख नेता नाहिद इस्लाम ने अंतिम सरकार से इस्तीफा

विश्वकर्मा पूजा के मौके पर पश्चिम बंगाल सरकार नहीं करेंगी छुट्टी, ईद के मौके पर करेंगी डवल छुट्टी”विवाद के बाद ममता ने दी सफाई” जानेंक्या है गंभीर मामला

कोलकाता में विश्वकर्मा पूजा को लेकर बवाल मचा हुआ है. दरअसल कोलकाता नगर निगम की ओर से जारी एक आदेश में साफ लिखा गया था. कि17 सितंबर 2025 को विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी नहीं की जाएगी. क्योंकि इस छुट्टी के बदले ईद उल फितर की छुट्टी बढ़ा दी गई है. इस आदेश केअनुसार राज्य में ईद उल फितर की छुट्टी 31 मार्च 2025 से लेकर 1 अप्रैल तक घोषित कर दी गई थी. लेकिन अब यह विवादों में घिरा हुआ है. आदेश जारी कर विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी रद्द कर दी गई. और ईद की एक दिन की छुट्टी बढ़ा कर दो दिन कर दी गई नगर निगम के इस आदेश परजमकर बवाल हो रहा है. नगर निगम का यह आदेश हिंदी मीडियम स्कूलों के लिए था. बवाल इतना बढ़ चुका है. कि कोलकाता नगर निगम ने इसआदेश को रद्द कर दिया. इसके बाद कोलकाता नगर निगम ने इस आदेश को जारी करने वाले शिक्षा विभाग के अधिकारी को कारण बताओं नोटिसजारी किया. कोलकाता नगर निगम ने कहा कि यह अनजाने में हुई टाइपिंग की गलती थी. 25 फरवरी को जारी इस नोटिस पर केएमसी के शिक्षाविभाग के मुख्य प्रबंधक के नाम से हस्ताक्षर जारी किए गए हैं. विश्नकर्मा पूजा की छुट्टी पर विवाददरअसल विश्वकर्मा पूजी की छुट्टी 17 सितंबर को दी जाती है. कोलकाता नगर निगम की ओर से जारी आदेश में साफ लिखा गया था. कि 17 सितंबर2025 को विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी नहीं रहेगी. क्योंकि इस छुट्टी के बदले ईद उल फितर की छुट्टी बढ़ा दी गई है. इस आदेश के अनुसार राज्य में ईदउल फितर की छुट्टी 31 मार्च 2025 और 1 अप्रैल 2025 को घोषित की गई थी. छुट्टियों में बदलाव के पहले के ज्ञापन की आलोचना करते हुएविपक्षी बीजेपी ने आरोप लगाया है. कि वह राज्य में सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस द्वारा राजनीति लाभ के लिए तुष्टिकरण का एक उदाहरण है.आदेश सक्षमअधिकारी की सहमति के लिए बिना जारी किए गए थे. कोलकाता नगर निगम अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए चूक के लिए जिम्मेदारअधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्यवाही कर रहा है. क्योंकि यह आदेश बिना किसी परमिशन के जारी किया गया था. इसलिए इस आदेश कोरद्द कर दिया गया है. कोलकाता नगर निगम ने दिया बयानकोलकाता नगर निगम ने अब इस पर बयान देते हुए कहा कि अब जब छुट्टियों की नई लिस्ट जारी की जाएगी. तो राज्य सरकार की छुट्टियों की सूचीको मौजूदा मानडंडो के अनुसार बनाई रखते हुए एक संशोधित और सटीक आदेश आने वाले समय में जारी करेगी. इस पर बीजेपी का कहना है. किउन्होंने इस मुद्दे को उठाया ताकि केएमसी को इस आदेश को रद्द करने के लिए बाध्य होना पड़ा. बीजेपी के महासचिव जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कहाकि यह विश्वास करने योग्य नहीं है. कि नगर निगम अधिकारी विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी रोकने और ईद और ईद-उल-फितर की छुट्टी बढ़ाने के निर्णय सेअनभिज्ञ थे. इससे पहले भी पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने महाकुंभ को मृत्यु कुंभ कहकर एक विवाद पैदा कर दिया था. महाकुंभ को मृत्युकुंभ से जोड़ दिया यह विवाद तब शुरू हुआ जब उन्होंने 18 फरवरी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ मेलेको मृत्यु कुंभ कह दिया.

दिल्ली शराब घोटाले में भाजपा की भी संलिप्तता, कांग्रेस ने की व्यापक जांच की मांग

नई दिल्ली: कांग्रेस ने दिल्ली की शराब नीति से जुड़े घोटाले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की भूमिका पर सवाल उठाते हुए इसकी व्यापक जांचकी मांग की है। पार्टी का कहना है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में भाजपा नेताओं और तत्कालीन उप-राज्यपाल की भूमिका सेजुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को नजरअंदाज कर दिया गया। कांग्रेस ने इस घोटाले को लेकर भाजपा के खिलाफ दी गई लिखित शिकायत की जांच करानेऔर लोक लेखा समिति (पीएसी) के जल्द गठन की मांग की है। भाजपा और आप की मिलीभगत का आरोपदिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव और वरिष्ठ नेता संदीप दीक्षित ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि कांग्रेस पहले से ही इस नीति में अनियमितताओंको लेकर आशंकित थी। यादव ने बताया कि कांग्रेस ने जांच एजेंसियों को इस संबंध में लिखित शिकायत दी थी, जिसमें भाजपा की संलिप्तता केसबूत भी शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आम आदमी पार्टी (आप) की मिलीभगत के कारण कैग रिपोर्ट पर विधानसभा में चर्चानहीं हो रही है। शराब नीति में बदलाव और अनियमितताओं पर उठे सवालयादव ने कैग रिपोर्ट की कुछ अनसुलझी बातों पर प्रकाश डालते हुए पूछा कि एक वर्ष के भीतर तीन आबकारी निदेशकों को क्यों बदला गया? दिल्लीमें नए शराब ब्रांड्स को बढ़ावा देने के पीछे की मंशा क्या थी, और इस पर जांच क्यों नहीं हुई? उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन उप-राज्यपाल नेशराब नीति को मंजूरी दी थी, लेकिन इस पर आज तक कोई जांच नहीं हुई। मास्टर प्लान का उल्लंघन कर शराब के ठेके कैसे दिए गए, और बिनानगर निगम की अनुमति के ठेके कैसे खोले गए, इस पर भी सवाल खड़े किए। शराब नीति से राजस्व को हुआ भारी नुकसानकांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी सरकार ने झूठ बोलकर जनता को गुमराह किया कि नई शराब नीति से राजस्व में वृद्धि होगी, जबकि कैग रिपोर्ट में सामने आया कि 2002 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। यादव ने कहा कि इस नीति के तहत कुछ ब्रांड्स को जानबूझकर बढ़ावादिया गया, जिनके कारखाने पंजाब में हैं, जहां आप की सरकार है। उन्होंने इसे बाजार प्रतिस्पर्धा में हेरफेर बताते हुए इसे आपराधिक जांच के दायरे मेंलाने की मांग की। पीएसी की अध्यक्षता को लेकर आपत्तियांदेवेंद्र यादव ने कहा कि पारंपरिक रूप से पीएसी की अध्यक्षता विपक्ष के नेता के पास होती है, लेकिन दिल्ली में सत्ताधारी दल इसका नेतृत्व करताआया है। उन्होंने इस पर आपत्ति जताई और सार्वजनिक मंच पर इस रिपोर्ट पर विस्तृत चर्चा की मांग की। शराब नीति में पक्षपात और बाजार में धांधलीसंदीप दीक्षित ने कहा कि शराब नीति को बार-बार बदला गया और जहां पहले 77 कंपनियां इस व्यवसाय में थीं, उनकी संख्या घटकर 14 रह गई।उन्होंने आरोप लगाया कि ये 14 कंपनियां आपस में संबंध रखती हैं और उन क्षेत्रों से जुड़ी हैं, जहां आम आदमी पार्टी के नेताओं का प्रभाव है। दीक्षितने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने शराब पर आबकारी शुल्क हटाकर 30-40% की कर चोरी को कानूनी मान्यता दे दी।भाजपा और आम आदमी पार्टी की मिलीभगत की जांच होसंदीप दीक्षित ने आरोप लगाया कि दिल्ली में कुछ ब्रांड्स को जबरन बढ़ावा दिया गया और कई ब्रांड्स को दबाया गया, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धाको नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि भाजपा और आम आदमी पार्टी की मिलीभगत से यह घोटाला हुआ है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कांग्रेस ने इस पूरे मामले में गहराई से जांच की मांग करते हुए कहा कि जो भी लोग इस लूट में शामिल हैं, उन्हें सख्त सजा दी जानी चाहिए।

रायबरेली दौरे पर पहुंचे राहुल गांधी , लोगों की समस्याएं सुनी और समाधान का भरोसा दिया

राहुल गांधी रायबरेली दौरे के दौरान बुनकरों, कारीगरों और महिलाओं से मुलाकात की। बुनकरों और कारीगरों ने शिकायत की कि उन्हें उनकी मेहनतका उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, जबकि महिलाओं ने महंगाई को लेकर अपनी परेशानियां साझा कीं। बेरोजगारी और भेदभाव से परेशान दलित युवादलित युवाओं के साथ संवाद के दौरान बेरोजगारी और भेदभाव के मुद्दे प्रमुख रूप से सामने आए। युवाओं ने बताया कि डिग्री हासिल करने के बावजूदउन्हें नौकरियां नहीं मिल रही हैं।अग्निवीर योजना पर सरकार से सवालअग्निवीर योजना को लेकर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यदि सरकार युवाओं से देश के लिए बलिदान की अपेक्षा रखती है, तो उनके परिवार कीजिम्मेदारी भी उठानी चाहिए। भूमि विवाद और शिक्षक भर्ती घोटाले पर चिंताग्रामीणों के भूमि विवादों को लेकर उन्होंने पुलिस से हस्तक्षेप की मांग की। वहीं, 69,000 शिक्षक भर्ती घोटाले पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा किअब तक ओबीसी, एससी और एसटी अभ्यर्थियों को न्याय नहीं मिल सका है। जनता के लिए हमेशा रहेंगे उपलब्धउन्होंने रायबरेली की जनता को भरोसा दिलाया कि वे हमेशा उनके लिए हाज़िर रहेंगे और जरूरत पड़ने पर उनकी आवाज़ बुलंद करेंगे।

चीन-ताइवान में फिर बढ़ा तनाव, ‘लाइव फायर’ ड्रिल के जवाब में ताइवान की सेना अलर्ट

चीन और ताइवान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। चीन द्वारा ताइवान के पास ‘लाइव फायर’ सैन्य अभ्यास शुरू करने के ऐलान केबाद ताइवान ने अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रखा है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने चीन के इस कदम को “खतरनाक” बताते हुए उसकी कड़ी निंदा कीहै। चीन ने ताइवान के चारों ओर बढ़ाई सैन्य गतिविधियांताइवान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, चीन ने द्वीप के चारों ओर 32 सैन्य विमान तैनात किए हैं और दक्षिण में लगभग 40 समुद्री मील (74 किमी) कीदूरी पर ‘लाइव फायर’ ड्रिल शुरू कर दी है। इस स्थिति को देखते हुए ताइवान ने अपनी नौसेना, वायु सेना और थल सेना को सतर्क रहने और निगरानीतेज करने का निर्देश दिया है। ताइवान ने चीन के दावों को किया खारिजचीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान इन दावों को लगातार खारिज करता आया है। ताइवान का कहना है कि केवल वहांके नागरिक ही अपने भविष्य का निर्णय ले सकते हैं और चीन को इस फैसले का सम्मान करना चाहिए। नए साल पर शी जिनपिंग की चेतावनीचीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी न्यू ईयर स्पीच में ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन करने वाली ताकतों को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहाथा कि ताइवान और चीन का एकीकरण अवश्यंभावी है और इसे कोई नहीं रोक सकता। ताइवान ने इसे चीन द्वारा द्वीप पर अपनी सैन्य उपस्थितिबढ़ाने का प्रयास बताया है। लाई चिंग-ते के सत्ता में आने के बाद बढ़ा तनाव2024 में लाई चिंग-ते के ताइवान का राष्ट्रपति बनने के बाद से चीन और ताइवान के बीच तनाव और बढ़ गया है। चीन उन्हें “अलगाववादी” मानता हैऔर ताइवान की स्वतंत्रता की वकालत करने वाला नेता करार देता है। चीन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह ताइवान को अपने नियंत्रण में लेने केलिए बल प्रयोग से पीछे नहीं हटेगा। राष्ट्रपति लाई के कार्यभार संभालने के बाद से चीन तीन बार बड़े सैन्य अभ्यास कर चुका है। क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतराचीन और ताइवान के बीच बढ़ता तनाव पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी इस स्थिति पर नजरबनाए रखी है और कई देशों ने शांति व कूटनीतिक हल निकालने की अपील की है।

बिहार में बीजेपी का बढ़ता दबदबा, कैबिनेट विस्तार में सातों सीटें मिलीं

दिल्ली में जीत दर्ज करने के बाद अब बीजेपी की नजरें बिहार पर टिकी हैं। पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन मेंसोशल इंजीनियरिंग पर काम शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में, बिहार में नीतीश कैबिनेट का विस्तार होने जा रहा है, जिसमें सातों खाली पद बीजेपीकोटे में दिए गए हैं। कैबिनेट विस्तार में बीजेपी को पूरा समर्थनशुरुआत में चर्चा थी कि कैबिनेट में बीजेपी से तीन और जेडीयू से दो नए चेहरों को शामिल किया जाएगा। हालांकि, अब यह साफ हो गया है कि सभीसात सीटें बीजेपी को दी जा रही हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुनाव से पहले यह बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। कैबिनेट में बीजेपी का बढ़ता प्रभाववर्तमान में, नीतीश सरकार में कुल 29 मंत्री हैं। इनमें 14 बीजेपी, 13 जेडीयू, 1 HAM और 1 निर्दलीय मंत्री शामिल हैं। अब कैबिनेट विस्तार केबाद बीजेपी के मंत्रियों की संख्या 21 हो जाएगी, जबकि जेडीयू के 13 मंत्री बने रहेंगे। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार में बीजेपी की भूमिकापहले से अधिक प्रभावशाली हो गई है।सियासी समीकरण: कौन कितना मजबूत?विश्लेषकों का मानना है कि इस विस्तार के जरिए एनडीए सरकार में शक्ति संतुलन स्पष्ट रूप से बीजेपी के पक्ष में झुकता दिख रहा है। भले हीमुख्यमंत्री नीतीश कुमार जेडीयू से हैं, लेकिन मंत्रिमंडल में सबसे अधिक संख्या बीजेपी की होगी। दो उपमुख्यमंत्री (सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा) और 21 मंत्रियों के साथ बीजेपी सरकार में प्रमुख भूमिका निभा रही है। कैसे बनी सहमति?बीजेपी और जेडीयू के शीर्ष नेताओं के बीच हुई बैठक में यह तय किया गया कि जेडीयू का मंत्री कोटा पहले ही पूरा हो चुका है, जबकि बीजेपी केपास अब भी विस्तार की गुंजाइश थी। इसी वजह से खाली सातों सीटें बीजेपी के हिस्से में आईं। बीजेपी ने फिर बनाया नीतीश को ‘बड़ा भाई’2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 125 सीटें जीती थीं, जिसमें बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। इसके बावजूद, गठबंधन धर्मनिभाते हुए बीजेपी ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी