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जून तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% पर पहुंची, भारत बनी सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था राजकोषीय घाटा 29.9% तक बढ़ा

सरकार ने जून तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े जारी कर दिए हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश का सकल घरेलू उत्पाद वित्तीयवर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत बढ़ा है. एक साल पहले यह आंकड़ा 6.5 प्रतिशत था सरकार की ओर से जारी आंकड़ों में यह भी बताया गयाहै कि देश का बजटीय घाटा या राजकोषीय घाटा बढ़कर 29.9% पर पहुंच गया है. अप्रैल-जून में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहीअमेरिका की ओर से विनाशकारी टैरिफ लगाए जाने से पहले बीती पांच तिमाहियों में सबसे अधिक है. बना हुआ प्रमुख अर्थव्यवस्थासरकारी आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र के अच्छे प्रदर्शन केकारण हुई. भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है, क्योंकि अप्रैल-जून की अवधि में चीन की जीडीपी वृद्धि 5.2 प्रतिशत थी. आंकड़ों के अनुसार, पिछली उच्चतम जीडीपी वृद्धि 2024 के जनवरी-मार्च में 8.4 प्रतिशत थी. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर सेशुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, कृषि क्षेत्र में 3.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो 2024-25 की अप्रैल-जून अवधि में 1.5 प्रतिशत थी. अनुमान लगाया था 6.5 प्रतिशतहालांकि, वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि मामूली रूप से बढ़कर 7.7 प्रतिशत हो गई, जबकि एक साल पहले इसीअवधि में यह 7.6 प्रतिशत थी. इस महीने की शुरुआत में, भारतीय रिजर्व बैंक ने 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहनेका अनुमान लगाया था, जिसमें पहली तिमाही 6.5 प्रतिशत, दूसरी तिमाही 6.7 प्रतिशत, तीसरी तिमाही 6.6 प्रतिशत और चौथी तिमाही 6.3 प्रतिशत थी. शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस वित्त वर्ष के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में भारत का राजकोषीय घाटा 4.68 लाख करोड़ रुपये रहा. यह वार्षिक अनुमान का 29.9% है देश का राजकोषीय घाटा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 17.2% से बढ़कर1.5 लाख करोड़ रुपये हो गया. अप्रैल से जुलाई तक कुल प्राप्तियां 10.95 लाख करोड़ रुपये रहीं। वहीं, कुल व्यय 15.63 लाख करोड़ रुपये रहा. यह चालू वित्तीय वर्ष वर्ष के बजट लक्ष्य का क्रमशः 31.3% और 30.9% है.

बिहार में महिला सशक्तिकरण की नई पहल, नीतीश सरकार ने ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ को दी मंजूरी

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने 2005 में सत्तासंभालने के बाद से ही महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं और अब इसी दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने एक्स अकाउंट (पूर्व में ट्विटर) पर महिला सशक्तिकरण को लेकर एक बड़ी घोषणा की. उन्होंने लिखा किनवंबर 2005 में सरकार बनने के बाद से ही महिलाओं को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. अब महिलाएं अपनीमेहनत से न केवल राज्य के विकास में योगदान दे रही हैं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रही हैं. आर्थिक स्थिति और मजबूत होगीमुख्यमंत्री ने बताया कि इसी मिशन को आगे बढ़ाते हुए कैबिनेट की बैठक में ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ को मंजूरी दी गई है. इस योजना काउद्देश्य राज्य के हर परिवार की एक महिला को उनकी पसंद का रोजगार शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नेकहा कि इस योजना से महिलाओं की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी. साथ ही राज्य के भीतर ही बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध होंगे, जिससे लोगोंको मजबूरी में बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी.बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिला सशक्तिकरण के लिए नई पहल की घोषणा की है। कैबिनेट की बैठक में ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगारयोजना’ को मंजूरी दी गई है.

सीएम योगी का विपक्ष पर वार माफिया-राज, दंगों और पलायन के लिए बताया जिम्मेदार, विकास और खिलाड़ियों को समर्थन की दी बड़ी सौगात

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सपा, कांग्रेस और बसपा के शासनकाल में गुंडागर्मी और माफियाराज चरम पर था. सपा सरकार में हर जनपदमें एक माफिया को पाला गया था. विकास के धन की बंदरबांट हो रही थी लूट घसोट चरम पर था गरीबों के लिए आने वाले पैसे पर डाका डालाजाता था. सीएम योगी ने कहा कि पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करना सूरज पर थूंकने जैसा है. यह पीएम का नहीं देश की 140 करोड़ जनता का अपमान है जनता इसका जवाब कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को देगी। सीएम योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को प्रतापगढ़ में साढ़े पांचअरब की परियोजनाओं का लोकापर्पण और शिलान्यास करने के बाद जनसभा को संबोधित कर रहे थे. हिंदुओं को पलायन करने पर किया मजबूरयोगी आदित्यनाथ ने कहा कि सपा और कांग्रेस का एनडी गठबंधन भारत विरोधी गठबंधन है. यह देश की आन बान शान के साथ खिलवाड़ करनेवाला गठबंधन है 140 करोड़ जनता के प्रति नहीं भारत के सांविधानिक संस्थाओं को अपमान करने वाला गठबंधन है. सत्ता में आने पर देश और प्रदेशमें अराजकता पैदा करने वाले कांग्रेस और सपा के लोग आज लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं. इनके शासन काल में प्रदेश को दंगों की आग में झोंक दियागया था. सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सपा और कांग्रेस के शासन काल में हुए दंगों की जो आंशिक रिपोर्ट आई है वह चौंकाने वाली है किसतरह से प्रदेश में दंगों की साजिश रची गई और बहुसंख्यक समाज पर अत्याचार किया गया. हिंदुओं को पलायन करने पर मजबूर किया गया. खिलाड़ी कर सके देश की नाम रोशनसीएम योगी ने कहा कि प्रदेश की डबल इंजन सरकार में बिना भेदभाव के विकास हो रहा है. गरीबों को योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है. सशक्तिकरण के माध्यम से हम आगे बढ़ रहे हैं. प्रदेश में छह करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं बिना भेदभाव के आवास योजना का लाभ मिलरहा है. पीएम आवास योजना का सबसे ज्यादा लाभ प्रतापगढ़ जनपद के लोगों को मिला. बिना किसी का नाम लिए सीएम योगी ने कहा कि पीएममोदी के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग करना पूरे देश का अपमान है देश की जनता अपने को अपमानित महसूस कर रही है. सीएम योगी ने कहा कि मेरठमें स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय में पहला सत्र आज से शुरू हो रहा है भाजपा ने हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद्र को सम्मान देने का कार्य किया है. उनके नामपर खेल के सबसे बडे़ पुरस्कार की घोषणा की गई है. अब पूरे प्रदेश के हर मंडल में एक स्पोर्ट्स कॉलेज का निर्माण कराया जाएगा ताकि प्रतिभाशालीखिलाड़ी देश का नाम रोशन कर सकें.

हरियाणा में लागू होगी ‘दीन दयाल उपाध्याय लाडो लक्ष्मी योजना’, 25 सितंबर से महिलाओं को मिलेंगे ₹2100 प्रतिमाह

हरियाणा में दीन दयाल उपाध्याय लाडो लक्ष्मी योजना लागू करने की घोषणा कर दी गई है. योजना 25 सितंबर से लागू होगी. सीएम नायब सैनी कीअध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इसका एलान किया गया. कैबिनेट की बैठक के बाद प्रेस कांफ्रेंस में सीएम सैनी ने कहा कि कैबिनेट ने महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा और सम्मान के लिए दीन दयाल लाडोलक्ष्मी योजना को लागू करने का निर्णय लिया. पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयंती पर 25 सितंबर 2025 से इस योजना का शुभारम्भ होगा. सीएम ने बताया कि इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2100 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी. 25 सितंबर को हरियाणाकी 23 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं को इस योजना का लाभ मिलेगा. इसमें विवाहित और अविवाहित दोनों ही तरह की महिलाओं कोलाभ मिलेगा.योजना का भी मिलेगा अतिरिक्त लाभपहले चरण में, उन परिवारों को शामिल किया गया है, जिनकी पारिवारिक वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम है. आने वाले समय में, चरणबद्धतरीके से अन्य आय समूह को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा. योजना का लाभ लेने के लिए अविवाहित महिला का या विवाहित महिला केपति का हरियाणा में पिछले 15 साल से मूल निवासी होना अनिवार्य होगा. इस योजना के तहत एक परिवार में महिलाओं की संख्या पर कोई प्रतिबंधनहीं होगा. यदि एक परिवार में तीन महिलाएं हैं, तो उन तीनों महिलाओं को लाभ मिलेगा. सीएम ने कहा कि सरकार द्वारा पहले से चलाई जा रही ऐसीनौ योजनाओं, जिनमें आवेदिका को पहले से ही अधिक राशि की पेंशन का लाभ मिल रहा है, उन्हें लाडो लक्ष्मी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। स्टेज 3 और 4 कैंसर पीड़ित मरीजों (महिलाओं),सूचीबद्ध 54 दुर्लभ बीमारियों, हीमोफिलिया, थैलेसिलमिया और स्किन सेल से पीड़ित मरीजों को पहले सेपेंशन मिल रही है. इन महिलाओं को इस योजना का भी अतिरिक्त लाभ भी मिलेगा. पेंशन योजना के लिए हो जाएगें पात्रजिस दिन कोई अविवाहित लाभार्थी 45 वर्ष की आयु पूरा करेगी उस दिन वे ऑटोमैटिक विधवा और निराश्रित महिला वित्तीय सहायता योजना केलिए पात्र हों जाएंगी. जिस दिन लाभार्थी महिला 60 वर्ष की आयु की होगी, उस दिन वे ऑटोमैटिक वृद्धावस्था सम्मान भत्ता पेंशन योजना के लिएपात्र हो जाएगी. सीएम ने कहा कि हमारा अनुमान है कि पहले चरण में लगभग 19-20 लाख महिलाओं को इस योजना का लाभ मिलेगा. आने वाले 6 या 7 दिनों मेंयोजना की गजट नोटिफिकेशन कर देंगे. साथ ही एक ऐप भी लॉन्च करेंगे, जिसके जरिए पात्र लाभार्थी महिलाएं घर बैठे ही इस योजना के लिएआवेदन कर सकती हैं.हर संभावित पात्र महिला को हम एसएमएस करेंगे कि आप उस ऐप पर आवेदन कर दें. सभी पात्र महिलाओं की सूची सभी पंचायत और वार्डों मेंप्रकाशित की जाएगी. सभी ग्राम सभाओं और वार्ड सभाओं को सूची पर कोई भी आपत्ति दर्ज करने का अधिकार होगा. लाडो लक्ष्मी योजना परमुख्यमंत्री की घोषणा पर भूपेंद्र हुड्डा ने पूछा कि क्या लगभग एक वर्ष की देरी का एरियर सरकार देगी. सरकार ने पहले सभी महिलाओं को प्रतिमाह2100 रुपये देने का वादा किया था, लेकिन अब सरकार ने महिलाओं की श्रेणी निर्धारित कर दी.

ममता बनर्जी की चेतावनी जब तक हूं जिंदा, किसी को नहीं छीनने दूंगी मताधिकार “नहीं सहेंगें अब हम भाषाई आतंक”

बिहार के बाद अन्य राज्यों में गहन मतदाता पुनरीक्षण को लेकर सियासी विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. विपक्ष इसे लेकर लगातार मोदीसरकार और चुनाव आयोग का विरोध कर रहा है इस बीच, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने खुले शब्दों में चेतावनी दी है. उन्होंने कोलकाता मेंतृणमूल कांग्रेस की छात्र शाखा की एक रैली को संबोधित करते कहा कि वह किसी को भी लोगों का मताधिकार नहीं छीनने देंगी. कोलकाता मेंतृणमूल कांग्रेस की छात्र शाखा की रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा ने मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम हटानेके उद्देश्य से सर्वेक्षण करने के लिए देश भर से पश्चिम बंगाल में 500 से ज्यादा टीमें तैनात की हैं. रैली में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए ममताबनर्जी ने कहा कि अब आपको खुद जांच करनी होगी कि आपका नाम अभी भी मतदाता सूची में है या कट गया है. भाषाई आतंक को नहीं करेंगें बर्दाश्तउन्होंने आगे कहा कि जब तक मैं जिंदा हूं, किसी को भी लोगों का मताधिकार नहीं छीनने दूंगी. सीएम बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग राज्यसरकार के अधिकारियों को धमका रहा है. उन्होंने दावा किया कि आयोग का अधिकार क्षेत्र केवल चुनाव के दौरान के तीन महीनों तक है, पूरे सालनहीं. आगे बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बंगालियों द्वारा निभाई गई भूमिका को भुलाने कीकोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि अगर बंगाली भाषा ही नहीं है, तो राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत किस भाषा में लिखे गए हैं? वे चाहते हैं कि लोग स्वतंत्रतासंग्राम में बंगालियों की ऐतिहासिक भूमिका को भूल जाएं। हम इस भाषाई आतंक को बर्दाश्त नहीं करेंगे. भाजपा है भ्रष्टाचार में लिप्तइस दौरान सीएम ममता ने बिना नाम लिए वीर सावरकर पर भी गंभीर आरोप लगाए उन्होंने सावरकर को अंग्रेजो का एजेंट बताते हुए कहा कि उन्होंनेजेल से बाहर निकलने के लिए वचन दिए था. ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जहां उनके प्रशासन ने कई सामाजिककल्याणकारी पहल चलाईं हैं, वहीं केंद्र की भाजपा सरकार विकास के नाम पर भ्रष्टाचार में लिप्त है. ममता बनर्जी ने कहा कि हम महिलाओं के लिए’लक्ष्मी भंडार’ योजना लेकर आए हैं, जबकि भाजपा के पास ‘भ्रष्टाचार भंडार’ है. उन्होंने केंद्र पर भाई-भतीजावाद करने का आरोप लगाते हुए कहा किभाजपा सरकार देश को लूट रही है.ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जहां उनके प्रशासन ने कई सामाजिक कल्याणकारी पहल चलाईं हैं, वहीं केंद्र की भाजपासरकार विकास के नाम पर भ्रष्टाचार में लिप्त है.

थानों से गवाही पर वकीलों का विरोध जारी, एलजी के नोटिफिकेशन के खिलाफ सड़कों पर उतरे वकील

दिल्ली के पुलिस थानों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए गवाही देने की अनुमति देने के उपराज्यपाल के नोटिफिकेशन के खिलाफ वकीलों का न्यायिकबहिष्कार छठे दिन भी जारी है. इस दौरान वकीलों ने अपना गुस्सा सड़कों पर निकाला. वहीं, बुधवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में वकीलों ने एलजी कापुतला फूंका और नारे लगाए. निचली अदालतों के वकीलों के पक्ष में दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने भी अपना समर्थन जताते हुए बुधवार कोकाम के दौरान वकीलों को काली पट्टी पहनने का आह्वान किया. वहीं, बुधवार को हुई कोऑर्डिनेशन कमिटी की बैठक में हड़ताल को बृहस्पतिवार औरशुक्रवार को भी जारी रखने का निर्णय लिया गया. नई दिल्ली बार एसोसिएशन के सचिव तरुण राणा ने कहा कि शुक्रवार दोपहर 12 बजेउपराज्यपाल भवन के बाहर सभी बार एसोसिएशनों के वकील प्रदर्शन करेंगे. बुधवार को तीस हजारी, रोहिणी, कड़कड़डूमा, द्वारका, साकेत, राउजएवेन्यू और पटियाला हाउस जिला अदालतों में कोई सुनवाई नहीं हुई. नोटिफिकेशन है जनता के खिलाफजमानत याचिकाएं, गवाही और क्रॉस-एग्जामिनेशन (जिरह) समेत कई महत्वपूर्ण मामले स्थगित कर दिए गए. फरियादी और उनके परिवार वालेअदालत परिसरों के बाहर भटकते नजर आए. वकीलों की अनुपस्थिति के चलते उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी। अदालत परिसरों के बाहर वकीलों नेविरोध प्रदर्शन किए. वकीलों ने बुधवार को पटियाला हाउस कोर्ट के बाहर सड़कों पर प्रदर्शन किया. कड़कड़डूमा कोर्ट के वकीलों ने कृष्णा नगर रेडलाइट पर जाम लगा दिया था. लगभग दिल्ली की सभी निचली अदालतों में वकीलों ने न्यायिक बहिष्कार के तहत अलग-अलग तरीके से विरोधप्रदर्शन किया। वकीलों ने कोर्ट परिसर में पुलिस और सरकारी वकीलों समेत ईडी, सीबीआई और नायब कोर्ट को प्रवेश नहीं करने दिया.कड़कड़डूमाकोर्ट के वकील ने बताया कि यह नोटिफिकेशन जनता के खिलाफ है. निर्दिष्ट स्थान पर किया गया घोषितहड़ताल के चलते पब्लिक प्रॉसिक्यूटर्स, ईडी और सीबीआई के अधिकारी भी कोर्ट में नहीं पहुंचे. कई हिरासत संबंधी जरूरी मामले ही सुने गए, लेकिनअधिकांश ट्रायल स्थगित हो गए हैं. उन्होंने बताया, नोटिफिकेशन न्यायिक स्वतंत्रता और निष्पक्ष सुनवाई के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि यहनोटिफिकेशन 15 जुलाई 2024 के केंद्रीय गृह मंत्रालय के सर्कुलर का उल्लंघन करता है. थाने को डेजिग्नेटेड प्लेस बनाना पुलिस को अतिरिक्तशक्ति देगा, जहां क्रॉस-एग्जामिनेशन प्रभावी नहीं हो सकेगा. हमारी हड़ताल फरियादियों के हित में है. दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना द्वाराजारी अधिसूचना के खिलाफ वकीलों का विरोध जारी है जिसमें पुलिस थानों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्षों को साक्ष्य दर्ज करने के लिए निर्दिष्ट स्थानघोषित किया गया है.

WCL 2025 बना IPL के बाद दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा देखी जाने वाली क्रिकेट लीग, पाकिस्तान सेमीफाइनल विवाद से भी छाया रहा टूर्नामेंट

क्रिकेट के बढ़ते ग्लोबल आकर्षण का एक नया उदाहरण हाल ही में सामने आया है. वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स (WCL 2025) ने दर्शकों केमामले में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. यह लीग अब दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा देखी जाने वाली क्रिकेट लीग बन गई है, जिसने खुदको इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के बाद स्थापित किया है. इस लीग में जमकर विवाद देखने को मिले थे और खूब बवाल भी हुआ था. दक्षिणअफ्रीका चैंपियंस ने इस लीग का खिताब अपने नाम किया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, WCL 2025 के प्रसारण ने रिकॉर्ड व्यूअरशिप दर्ज की. इस टूर्नामेंट ने करोड़ों दर्शकों को आकर्षित किया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी जबरदस्त एंगेजमेंट देखा गया. यह पहली बार है जब किसी नईक्रिकेट लीग ने इतने कम समय में इतना बड़ा मुकाम हासिल किया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स के इस सीजन नेवैश्विक स्तर पर 409 मिलियन (40.9 करोड़) दर्शक बटोरे, जो पिछले सीजन की तुलना में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है. दिग्गजों की लीग नेपाकिस्तान की फिसड्डी पाकिस्तान सुपर लीग को भी पछाड़ दिया है. सेमीफाइनल खेलने से कर दिया इनकारक्रिकेट की दुनिया में IPL अब भी व्यूअरशिप और लोकप्रियता के मामले में नंबर वन बना हुआ है. हालांकि, WCL ने जिस तेजी से दर्शकों के बीचजगह बनाई है, उसने सभी को चौंका दिया है. यह अब IPL के ठीक बाद दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा देखी जाने वाली क्रिकेट लीग बन चुकी है. WCL में कई देशों के खिलाड़ी शामिल हुए, जिसने इसकी वैश्विक पहचान को और मजबूत किया। खासकर एशियाई और यूरोपीय मार्केट में इसकीपहुंच बढ़ी है. क्रिकेट को नए दर्शक वर्ग तक ले जाने में WCL अहम साबित हुई है. युवराज सिंह, हरभजन सिंह, यूसुफ पठान, रॉबिन उथप्पा, एबीडिविलियर्स, क्रिस गेल, ब्रेट ली, ड्वेन ब्रावो और कीरोन पोलार्ड जैसे बड़े स्टार्स शामिल हुए थे. डिविलियर्स के शतकों ने तो फैंस का दिल जीत लियाथा. भारतीय टीम ने पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय खेल संबंधों को लेकर देश के रुख का हवाला देते हुए पड़ोसीदेश के खिलाफ डब्ल्यूसीएल के ग्रुप चरण के मुकाबले और सेमीफाइनल दोनों में खेलने से इनकार कर दिया था. छू रहा है नई ऊंचाइयों कोइससे पाकिस्तान में खलबली मच गई थी इसके बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने विश्व चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स (डब्ल्यूसीएल) केआयोजकों पर पक्षपात करने का आरोप लगाते हुए भविष्य में इस टूर्नामेंट में अपने खिलाड़ियों की भागीदारी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा कीथी. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले वर्षों में WCL दुनिया की टॉप स्पोर्ट्स लीग्स में शामिल हो सकती है. इसकेआयोजकों ने भी भविष्य में और बड़े कदम उठाने की योजना बनाई है ताकि लीग की लोकप्रियता को और बढ़ाया जा सके. इस तरह WCL 2025 नेयह साबित कर दिया है कि क्रिकेट का जादू अब सिर्फ कुछ देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह ग्लोबल स्पोर्ट के रूप में नई ऊंचाइयों को छू रहा है.

बिहार NDA में सीटों का संग्राम भाजपा कोटे में मांझी-चिराग, जदयू के हिस्से में 100 सीटें तय “जदयू से संतुलन साधने की तैयारी”

लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान जब चिराग पासवान की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में पुनर्वापसी हुई थी और सीटों को लेकर पेच फंसा था तभीमामले को सुलझाते हुए बिहार विधानसभा चुनाव में बेहतर का आश्वासन दिया गया था. यह आश्वासन सिर्फ चिराग को नहीं मिला था. जीतन राममांझी, उपेंद्र कुशवाहा को भी मिला था और, सारे आश्वासन भारतीय जनता पार्टी की तरफ से मिले थे. सो, बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीएके अंदर सीटों के बंटवारे का गणित भी भाजपा के खाते में है अभी कोटा तय हुआ है, सीटें नहीं। सीटों पर बात फाइनल करने के बाद एलान होगा. यहअब बहुत जल्द होने वाला है उसके पहले समझाने का दौर चलना है. एनडीए के अंदर इस बार सीटों का बंटवारा इस तरह से हो रहा है कि जनता दलयूनाईटेड एक तरफ है और दूसरी तरफ भाजपा व बाकी दल. एनडीए में बिहार विधानसभा की 243 में से 100 सीटें जदयू को मिल रही हैं. जदयू इसेबढ़ाने की कोशिश में है, लेकिन भाजपा उसे इतने पर राजी कराने की कोशिश में है. भाजपा के कोटे में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिन्दुस्तानीआवाम मोर्चा (सेक्युलर) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा है. मांझी पर कर रहे है भरोसाभाजपा को 143 सीटों में से अपने पास 100+ रखकर बाकी को बांटना है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने ताजा दिल्ली दौरे में इसपर बात करने केलिहाज से भी तैयारी कर गए थे. सीट बंटवारे में जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा की अहम भूमिका है. जदयू अभी अपनी सीटें भी घोषितनहीं कर रहा है, क्योंकि एनडीए की एकता दिखाने के लिए भाजपा पहले अपने कोटे के सभी दलों को समझा कर तैयार कर लेगी, फिर यह होगा. एनडीए में सीटों का बंटवारा कोटे पर कई बार हो चुका है इस बार भी वही हुआ है बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में जीतन राम मांझी की पार्टी- हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी- जनता दल यूनाईटेड के खाते में थी. यही कारण है कि 2020 के जनादेश सेउलट जब नीतीश कुमार महागठबंधन के मुख्यमंत्री बने तो मांझी उस तरफ थे। विपक्षी एकता के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब सारा सीन बना रहेथे तब वह मांझी पर भरोसा नहीं कर रहे थे. केंद्रीय मंत्री पद की मिली जिम्मेदारी23 जून 2023 को विपक्षी दलों की पटना में बैठक से पहले मांझी के बेटे संतोष सुमन ने महागठबंधन सरकार से इस्तीफा दे दिया था. उसके बादजदयू के अंदर बहुत कुछ हुआ और दिसंबर 2023 में जब नीतीश कुमार ने पार्टी की कमान अपने पास ली तो अगले महीने, यानी जनवरी 2024 में वहफिर से एनडीए में वापस आ गए. मांझी के बेटे संतोष सुमन ने जब इस्तीफा दिया था. तभी से वह एक तरह से भाजपा कोटे में हैं. जदयू से अलग, एनडीए में साथ इस बीच मांझी के साथ विधानसभा में जो हुआ और वह केंद्र में भाजपा के सहारे जितनी ताकत से बैठे- वह सभी ने देखा मांझी कोइसी ताकत का हवाला देकर भाजपा सीटों के लिए समझाने की तैयारी में है. लोक जनशक्ति पार्टी बनाने वाले दिवंगत रामविलास पासवान लंबे समयतक एनडीए में रहे थे. उनके निधन के बाद भाई पशुपति कुमार पारस और बेटे चिराग पासवान के बीच दूरियां बनीं. तात्कालिक फायदा पारस कोमिला और वह केंद्र में मंत्री बन गए बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू को बिहार में तीसरे नंबर की पार्टी बनाने में कामयाब रहे चिराग पासवान कोभाजपा फिर से अपने साथ ला रही है. यह साफ दिखने वाली बात पारस नहीं समझ सके और खुद ही केंद्रीय मंत्री का पद छोड़कर निकल गए। इसकेबाद न उनकी एनडीए में वापसी हुई और न महागठबंधन में भाव मिला ऐसे में लोजपा के एक हिस्से, यानी लोजपा (रामविलास) को लोकसभा मेंचुनिंदा सीटें मिलीं और जीत भी इससे उनका नंबर बढ़ा और केंद्रीय मंत्री पद की ताकत मिली.

ई-रिक्शा में चालक का नाम-नंबर जरूरी, महिला सुरक्षा को लेकर सख्त हुईं महिला आयोग अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने ई रिक्शा में छेड़छाड़ की घटनाओं को लेकर निर्देश दिया है कि हर ई रिक्शा मेंचालक का नाम और मोबाइल नंबर अंकित होना चाहिए. बृहस्पतिवार को बाराबंकी दौरे पर महिला आयोग की अध्यक्ष ने अफसरों के साथ बैठक मेंमौजूद एडिशनल एसपी विकास चंद्र त्रिपाठी को तुरंत निर्देशित किया कि आदेश का पालन हर हाल में कराया जाए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भी इसमामले में गंभीर हैं. उन्होंने महिला हेल्पलाइन 1090 और 181 की कार्यप्रणाली की समीक्षा कराने का आश्वासन भी दिया. सभी थानों में महिला डेस्कको और मजबूत करने की बात कही ताकि महिलाएं बिना डर के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें. डॉ. चौहान ने बातचीत में कहा कि आयोग पूरीसंकल्पबद्धता के साथ काम कर रहा है और किसी भी महिला अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने निरीक्षण के दौरान कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिकाविद्यालयों में पढ़ाई और रहन-सहन की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया. संवेदनशील बनाने की कही बातउन्होंने कहा कि छात्राओं के साथ भोजन कर वह खुद स्थिति देखना चाहेंगी. गर्भवती महिलाओं और किशोरियों की स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यानदेने, आशा बहुओं व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को संवेदनशील बनाने की बात भी कही गई. की समस्या अनसुनी नहीं छोड़ी जाएगी उद्योगों में महिलाओंकी कमी को देखते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमिता योजना में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा. उन्होंने माना किउद्योग के प्रति महिलाओं में जागरूकता की कमी है, जिसे दूर करने की दिशा में प्रयास होंगे. इसके लिए महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, कंप्यूटर प्रशिक्षण जैसे कौशलों से जोड़ने की योजना है. कार्यप्रणाली बदल गई पूरी तरहविशेष स्किल डेवलपमेंट सेंटर खोले जाने पर भी विचार हो रहा है अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने निरीक्षण के दौरान कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिकाविद्यालयों में पढ़ाई और रहन-सहन की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया उन्होंने कहा कि छात्राओं के साथ भोजन कर वह खुद स्थिति देखना चाहेंगी. गर्भवती महिलाओं और किशोरियों की स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान देने, आशा बहुओं व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को संवेदनशील बनाने की बातभी कही गई। डॉ. चौहान ने कहा कि महिला आयोग अब हर सप्ताह जिलों का दौरा करता है और शिकायतों की विशेष मॉनिटरिंग रोज की जाती है. पिछली सरकारों की तुलना में इस सरकार में आयोग की कार्यप्रणाली पूरी तरह बदल गई है.

राज्य नहीं दे सकते राष्ट्रपति-राज्यपाल के फैसलों को चुनौती, केंद्र सरकार का सुप्रीम कोर्ट में बयान

केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि राज्य सरकारें उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका (मामला) नहीं कर सकतीं जो राष्ट्रपतिया राज्यपाल ने विधानसभा से पास हुए विधेयकों पर लिया हो, चाहे राज्य यह कहे कि इससे लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है. केंद्रसरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह बात चीफ जस्टिस (सीजेआई) बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधानपीठ के सामने कही संविधान पीठ में जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर भी शामिल थे। मेहताने कहा कि राष्ट्रपति इस बात पर सुप्रीम कोर्ट की राय लेना चाहती हैं कि क्या राज्य सरकारें संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत ऐसी याचिकाएं दायरकर सकती हैं. होता है मौलिक अधिकारों का उल्लंघनउन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति यह भी जानना चाहती हैं कि संविधान के अनुच्छेद 361 का दायरा क्या है। यह अनुच्छेद कहता है कि राष्ट्रपति याराज्यपाल अपने अधिकारों और कर्तव्यों के निर्वहन के लिए किसी भी अदालत के प्रति जवाबदेह नहीं होंगे. मेहता ने संविधान पीठ को बताया कि इनसवालों पर पहले भी चर्चा हुई है लेकिन राष्ट्रपति का मत है कि अदालत की स्पष्ट राय जरूरी है, क्योंकि भविष्य में ऐसा मामला फिर उठ सकता हैउन्होंने कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत राज्य सरकार की ओर से राष्ट्रपति या राज्यपाल के फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार नहीं की जासकती न तो कोर्ट ऐसे मामलों में कोई निर्देश दे सकता है और न ही इन फैसलों को अदालत में चुनौती दी जा सकती है उन्होंने आगे कहा, अनुच्छेद 32 का उपयोग तब किया जाता है जब मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है. संवैधानिक संस्था के आदेशलेकिन सांविधानिक ढांचे में राज्य सरकार खुद मौलिक अधिकार नहीं रखती राज्य सरकार की भूमिका यह है कि वह अपने नागरिकों के मौलिकअधिकारों की रक्षा करे. सॉलिसिटर जनरल ने आठ अप्रैल के उस फैसले का भी जिक्र किया. जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर राज्यपालसमयसीमा के भीतर विधेयकों पर फैसला नहीं करते तो राज्य सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं. इस पर सीजेआई गवई ने कहा कि वह आठअप्रैल के दो जजों के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन यह भी कहा कि राज्यपाल का किसी विधेयक को छह महीने तक लंबित रखना सहीनहीं है मेहता ने जवाब में कहा कि अगर एक सांविधानिक संस्था अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करती, तो इसका मतलब यह नहीं कि कोर्ट दूसरीसांविधानिक संस्था को आदेश दे.