गांव बनेंगे स्मार्ट, विकास दिखे ज़मीन पर डिप्टी सीएम केशव मौर्य की अधिकारियों को दी चेतावनी

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने गांवों के समग्र व संतुलित विकास के लिए अधिकारियों को कागजी घोड़ा दौड़ाने की आदत से बाज आने कीचेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि विकास कार्य धरातल पर दिखने चाहिए। गांवों व ग्रामीणों को हर हाल में सशक्त, स्वावलंबी व आत्मनिर्भर बनाना है. स्मार्ट सिटी की तरह गांवों को भी स्मार्ट बनाने पर जोर देते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि इससे संबंधित कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतीजाए. डिप्टी सीएम शनिवार को राजधानी स्थित योजना भवन में प्रदेश सभी मुख्य विकास अधिकारियों (सीडीओ) के साथ ग्राम्य विकास विभाग केयोजनाओं की समीक्षा कर रहे थे. उन्होंने विभाग के अधिकारियों को निष्क्रिय स्वंय सहायता समूहों को सक्रिय करने प्रधानमंत्री आवास योजना(ग्रामीण) के क्रियान्वयन को और अधिक पारदर्शी व निष्पक्ष बनाने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने पीएमजीएसवाई की एफडीआर तकनीक से बनाई जा रहीसड़कों की नियमित रूप से निगरानी करने और गांवो के युवा बेरोजगारों को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना से जोड़ने पर भी फोकस करनेको कहा है. पंजीकृत कराने के भी दिए निर्देशकेशव ने सीडीओ गांवों के विकास कार्यों की जमीनी हकीकत को परखने के साथ ही मनरेगा से कराए गये पुराने कार्यों का ठीक से मरम्मत कराने के भीनिर्देश दिए हैं. साथ ही पीएम आवास योजना के लाभार्थियों को अनुमन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पोर्टल शुरू करने और ग्रामीणों कीसमस्याओं का त्वरित निस्तारण के लिए ग्राम चौपालों के आयोजन में ढिलाई न बरतने को कहा है.डिप्टी सीएम ने ग्रामीणों को खेती के साथ उद्यमों से जोड़ने, गांवों को सड़कों से जोड़ने व गलियां व नालियों के कार्य मनरेगा से कराने और मनरेगा में100 दिन कार्य करने वाले श्रमिकों को बीओसीडब्ल्यू बोर्ड में पंजीकृत कराने के भी निर्देश दिए हैं. पांचवे संस्करण का किया विमोचनबैठक में ग्राम्य विकास राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम के अलावा अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य संस्करण विभाग बीएल मीणा, सचिव एवंआयुक्त ग्राम्य विकास विभाग गौरी शंकर प्रियदर्शी, यूपीआरआरडीए के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अखंड प्रताप सिंह समेत अन्य अधिकारी भीमौजूद रहे. इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलम) में बेहतर कार्य करने वाले तीन मुख्य मुख्य विकासअधिकारियों (सीडीओ) को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इनमें वाराणसी के सीडीओ प्रथम, अंबेडकर नगर के सीडीओ द्वितीय और बिजनौर सेसीडीओ तीसरे स्थान पर रहे. वहीं, मनरेगा के तहत खेल मैदान बनाने में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभिन्न जिलों के 11 खंड विकास अधिकारियोंबीडीओ को भी सम्मानित किया गया. इसके अलावा डिप्टी सीएम ने एनआरएलएम डैशबोर्ड का शुभारंभ किया और ग्राम्य विकास विभाग कीत्रैमासिक पत्रिका के पांचवें संस्करण का विमोचन किया.
कारगिल विजय दिवस पर जे. पी. नड्डा ने किया वीर जवानों को नमन, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ प्रदर्शनी का किया उद्घाटन

कारगिल विजय दिवस के पावन अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्डा ने देश के वीर जवानों को नमन किया और दिल्ली मेंएक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। यह प्रदर्शनी कारगिल युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित है, जो हमारे वीर सैनिकों के साहस, पराक्रम औरबलिदान को दिखाती है। कार्यक्रम में नड्डा ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि कारगिल विजय दिवस हमारे देश की वीरता और एकताका प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब दुश्मन ने ऊंची पहाड़ियों पर कब्जा करने की कोशिश की, तब हमारी सेना ने कठिन से कठिन हालात में भी हार नहींमानी और दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ हमारे सैनिकों की वीरता की एक विशेष गाथा है, जिसेहर भारतीय को जानना और समझना चाहिए। यह प्रदर्शनी हमारे शहीदों और युद्ध में शामिल जवानों को श्रद्धांजलि देने का एक छोटा प्रयास है। प्रदर्शनी में कारगिल युद्ध से जुड़े फोटो, दस्तावेज, हथियार, सैनिकों की वर्दियाँ और उनके बहादुरी के किस्से दिखाए गए। इसे देखकर लोग भावुक होगए और देशभक्ति की भावना से भर उठे।नड्डा ने यह भी कहा कि हमें अपने सैनिकों पर गर्व है, और देश की सेवा करना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे देश कीसेवा और सुरक्षा के लिए हमेशा तैयार रहें। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, जिनमें पूर्व सैनिक, छात्र, सामाजिक संगठनों के सदस्य औरभाजपा कार्यकर्ता मौजूद थे। सभी ने शहीदों को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके बलिदान को याद किया। इस तरह कारगिल विजय दिवस का यह आयोजन न केवल शहीदों को श्रद्धांजलि देने का अवसर बना, बल्कि देश के नागरिकों में राष्ट्रभक्ति की भावनाको भी और मजबूत
मोदी सरकार का संवैधानिक संकट और न्यायपालिका के सवाल एक गहरी पड़ताल – अभिषेक सिंघवी

देश की राजनीति इन दिनों एक गंभीर संवैधानिक बहस से गुजर रही है। यह बहस केवल किसी एक नेता या दल के बारे में नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्रकी सेहत और भविष्य को लेकर है। हाल ही में उच्च न्यायपालिका के एक न्यायाधीश को लेकर संसद में पेश किए गए प्रस्ताव और उस पर सरकार कीप्रतिक्रिया ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। संवैधानिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ का आरोप21 जुलाई 2025 को कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने राज्यसभा में एक महत्वपूर्ण और संवैधानिक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें न्यायमूर्ति यशवंत वर्माके व्यवहार और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उनके विरुद्ध जांच समिति गठित करने की मांग की गई थी। इस प्रस्ताव पर 63 राज्यसभा सांसदोंके हस्ताक्षर थे, वहीं लोकसभा में इसी प्रकार के प्रस्ताव पर 152 सांसदों के हस्ताक्षर थे। सभापति का बयान और मंत्री की स्वीकृतिउपराष्ट्रपति और राज्यसभा के तत्कालीन सभापति जगदीप धनखड़ जी ने स्वयं सदन में कहा कि उनके पास राज्यसभा के 50 से अधिक सांसदों द्वाराहस्ताक्षरित प्रस्ताव आया है, जिससे स्पष्ट होता है कि यह संख्या नियमों के अनुसार पर्याप्त है। उन्होंने सचिव को यह निर्देश भी दिया कि यह जांचाजाए कि क्या लोकसभा में भी इसी दिन ऐसा ही प्रस्ताव लाया गया है। इस बीच, जब उन्होंने औपचारिक रूप से कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सेयह पूछा कि क्या लोकसभा में यह प्रस्ताव लाया गया है, तो मंत्री ने ‘हां’ में उत्तर दिया। फिर भी क्यों नहीं बनी जांच समिति?अब सवाल यह उठता है कि जब दोनों सदनों में प्रस्ताव लाया गया था, और सभी संवैधानिक औपचारिकताएं पूरी की गई थीं, तो फिर न्यायिक जांचसमिति का गठन क्यों नहीं किया गया? क्या सरकार ने जानबूझकर संवैधानिक प्रक्रिया में कोई खामी छोड़ी ताकि यह मामला अदालत में जाकरखारिज हो सके? संविधान के साथ खिलवाड़ या राजनीतिक चालबाज़ी?इस पूरे मामले में एक बात साफ नजर आती है – सरकार की तरफ से बार-बार भ्रम की स्थिति पैदा की गई। पहले कहा गया कि प्रस्ताव मौजूद है, फिर यह कहा जाने लगा कि प्रस्ताव मान्य नहीं है। इसके बाद उपराष्ट्रपति धनखड़ जी का अचानक इस्तीफा और सरकार की चुप्पी ने लोगों को औरभी संदेह में डाल दिया। कानून मंत्री और सरकार की भूमिका पर सवालअगर लोकसभा में प्रस्ताव नहीं लाया गया था, तो फिर मंत्री मेघवाल ने ‘हां’ क्यों कहा? और अगर प्रस्ताव लाया गया था, तो फिर उसे आगे बढ़ाने मेंदेरी क्यों हुई? इन सवालों से यह आभास होता है कि सरकार इस मुद्दे को लेकर या तो गंभीर नहीं थी या जानबूझकर इसे लटकाना चाहती थी। भाजपा की असुरक्षा और राजनीति का चेहरायह पूरा प्रकरण एक तरफ मोदी सरकार की संवैधानिक प्रक्रिया से दूरी, न्यायपालिका पर दबाव और राजनीतिक असहिष्णुता को उजागर करता है, वहीं दूसरी ओर यह भी दिखाता है कि वर्तमान सरकार किस हद तक राजनीतिक लाभ के लिए संवैधानिक संस्थाओं को भी नजरअंदाज कर सकती है।कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा उठाया गया यह मुद्दा केवल एक न्यायाधीश के आचरण से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह देश के लोकतांत्रिक मूल्यों, न्यायव्यवस्था की स्वतंत्रता और सरकार की जवाबदेही से भी सीधा जुड़ा हुआ है। यह स्पष्ट है कि मोदी सरकार बार-बार संवैधानिक प्रक्रियाओं को अपनी सुविधा अनुसार मोड़ने की कोशिश करती रही है। न्यायपालिका को अपनेनियंत्रण में लेने का यह प्रयास न केवल लोकतंत्र के लिए खतरनाक है, बल्कि आने वाले समय में इससे देश की संस्थाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। यहसमय है जब जनता को सतर्क होकर सरकार से जवाब मांगना चाहिए — ताकि संविधान और न्याय व्यवस्था सुरक्षित रह सके।
दलित समाज के पूज्य मंदिर को तोड़ने जा रही है भाजपा सरकार – सौरभ भारद्वाज

आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अब सरकार दिल्ली के ऐतिहासिक स्वामी हैदर दास मंदिर को तोड़ने कीतैयारी में है। यह मंदिर मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित है और दलित समाज के लिए आस्था और सम्मान का केंद्र है। आम आदमीपार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने शनिवार को प्रेस वार्ता कर इस मामले पर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया। 1930 से पहले बना मंदिर, दलित महापुरुषों की समाधियों का स्थलसौरभ भारद्वाज ने बताया कि यह मंदिर 1930 में बने इरविन अस्पताल से भी पहले का बना हुआ है। जब अंग्रेजों के समय इरविन अस्पताल (जो अबलोक नायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल कहलाता है) का निर्माण हो रहा था, तब वहां काम करने वाले मजदूर भी इस मंदिर में आकर विश्राम करतेथे। इस मंदिर में स्वामी हैदर दास जी और कई अन्य दलित संतों की समाधियां हैं। यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि दलित समाज का एक ऐतिहासिकऔर धार्मिक धरोहर है। साथ ही यहां एक धर्मशाला भी है, जहाँ आज भी मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने आए मरीजों के परिजनठहरते हैं। भाजपा सरकार ने मंदिर को बताया अवैध, 7 दिन में तोड़ने का नोटिससौरभ भारद्वाज ने बताया कि भाजपा सरकार ने इस मंदिर को अचानक गैरकानूनी (अवैध) घोषित कर दिया है और इसके लिए सात दिन के अंदर खुदसे तोड़ने का नोटिस भेजा है। यह फैसला दलित समाज को गहरी चोट पहुंचाने वाला है। सौरभ जी ने कहा कि कुछ दिन पहले ही शालीमार बाग केजैन मंदिर पर बुलडोजर चलाया गया और अब दलित समाज के मंदिर को भी निशाना बनाया जा रहा है। इससे पहले 2019 में तुगलकाबाद मेंरविदास मंदिर भी गिराया गया था। मंदिर अतिक्रमण नहीं, हमारी विरासत हैसौरभ भारद्वाज ने दिल्ली की मुख्यमंत्री के बयान पर भी सवाल उठाया, जिनके अनुसार अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की ज़मीन से अतिक्रमणहटाया जाएगा। सौरभ जी ने कहा कि मंदिर को अतिक्रमण बताना सरासर गलत है। उन्होंने कहा, यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक स्थल है, बल्कि सेवा काकेंद्र भी है। गरीबों के लिए धर्मशाला चलती है। इसे अवैध कहना दलित समाज का अपमान है। भाजपा सरकार दलितों के मंदिर तोड़ने पर तुली है– विशेष रविइस मौके पर मौजूद करोलबाग से विधायक विशेष रवि ने भी कहा कि भाजपा सरकार का रवैया दलितों के प्रति हमेशा नकारात्मक रहा है। उन्होंने कहाकि जैसे रविदास मंदिर गिराया गया था, वैसे ही अब स्वामी हैदर दास मंदिर को भी तोड़ा जा रहा है। “जब तुगलकाबाद में मंदिर गिरा, तब प्रधानमंत्री नेदोबारा मंदिर बनवाने का वादा किया था, लेकिन अब तक मंदिर नहीं बना। अब फिर से भाजपा सरकार दलित समाज के एक और मंदिर पर बुलडोजरचलाने की तैयारी में है दलित समाज अब जाग चुका है – सौरभ भारद्वाजआम आदमी पार्टी ने साफ कहा कि दलित समाज अब जागरूक और एकजुट है। किसी भी हालत में यह मंदिर नहीं टूटने देंगे। सौरभ भारद्वाज ने कहाकि यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और सेवा का प्रतीक है।उन्होंने भाजपा को चेतावनी दी कि अगर मंदिर को तोड़ने कीकोशिश की गई, तो पूरा दलित समाज सड़कों पर उतर आएगा और इस अन्याय का पुरजोर विरोध करेगा।भाजपा सरकार द्वारा भेजे गए इस तोड़फोड़ के नोटिस को लेकर आम आदमी पार्टी ने बड़ा मुद्दा उठाया है। यह सिर्फ एक मंदिर का मामला नहीं है, बल्कि दलित समाज के सम्मान और अस्तित्व का सवाल है। आम आदमी पार्टी और दलित समाज मिलकर इस ऐतिहासिक मंदिर को बचाने के लिएपूरी ताकत से खड़े हैं।
दिल्ली को कूड़े से नहीं मिल रही मुक्ति, मजलिस पार्क में बन रहा है चौथा कूड़े का पहाड़ – अंकुश नारंग

आम आदमी पार्टी के नेता अंकुश नारंग ने भाजपा पर लगाया गंभीर आरोप, कहा सफाई के नाम पर दिल्ली को गंदगी में झोंका जा रहा है दिल्ली मेंसफाई और सुंदरता के बड़े-बड़े दावे करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सच्चाई एक बार फिर सामने आ गई है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठनेता और एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने शनिवार को भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली को साफ करने की बजाय भाजपामजलिस पार्क में चौथा कूड़े का पहाड़ खड़ा कर रही है। अंकुश नारंग ने खुद मजलिस पार्क मेट्रो स्टेशन के पास बनाए जा रहे नए कूड़े के पहाड़ कादौरा किया और वहां की हालत देखी। उन्होंने बताया कि जब वह अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे, उसी वक्त दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) की एक गाड़ीवहां सिल्ट और गंदगी फेंकने आई थी। गाड़ी के चालक और अन्य कर्मचारियों ने यह स्वीकार किया कि बीते एक महीने से वहां रोजाना कूड़ा औरसिल्ट डाली जा रही है। भाजपा पर लगाया सीधा आरोपअंकुश नारंग ने कहा कि यह इलाका सिविल लाइंस जोन में आता है, जहां से भाजपा के राजा इकबाल सिंह मेयर हैं और चेयरमैन गुलाब सिंह राठौरभी भाजपा से ही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के ये दोनों नेता मिलकर मजलिस पार्क में एमसीडी का सारा कूड़ा डलवा रहे हैं। उन्होंने तंजकसते हुए कहा, भाजपा ने अब सीएम कूड़ा योजना शुरू कर दी है, जिसमें दिल्ली को चौथा कूड़े का पहाड़ दिया जा रहा है। ये लोग सिर्फ फोटोखिंचवाने और दिखावा करने में लगे हैं। हकीकत यह है कि दिल्ली की साफ-सफाई के नाम पर आम जनता को गंदगी और बीमारी दी जा रही है। लोगों को हो रही भारी परेशानीअंकुश नारंग ने बताया कि मजलिस पार्क, जहांगीरपुरी, आदर्श नगर, बुराड़ी और बादली जैसे इलाकों के बीच यह कूड़ा जमा किया जा रहा है। इसजगह को पहले पार्क बनाया जाना था, लेकिन अब यहां कूड़े का ढेर लग रहा है। बारिश के मौसम में यहां बदबू, मच्छर और गंदगी से बीमारियां फैलनेका खतरा है।उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार कूड़ा हटाने की बजाय नए पहाड़ खड़ा कर रही है। उन्होंने पूछा, क्या यही भाजपा की सुंदर दिल्ली योजना है? क्या अबकूड़े के पहाड़ को ही हेरिटेज साइट बना दिया जाएगा? एमसीडी में उठेगा यह मुद्दाअंकुश नारंग ने साफ कहा कि आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को एमसीडी में जोरदार तरीके से उठाएगी। साथ ही वे मुख्यमंत्री, महापौर और निगमआयुक्त को चिट्ठी लिखकर इस कूड़े के पहाड़ को तुरंत हटाने की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि यह जगह आउटर रिंग रोड और मेट्रो स्टेशन के पास है, जिससे लोगों को बार-बार कूड़े की बदबू झेलनी पड़ती है। इतना ही नहीं, यहां आसपास रहने वाले परिवारों का जीवन भी इस गंदगी से प्रभावित होरहा है। आप नेताओं की मौजूदगीइस दौरे में आम आदमी पार्टी के कई पार्षद और नेता भी शामिल थे। पार्षद अजीत सिंह यादव, जोगिंदर, पप्पू, टिम्सी शर्मा और अजय शर्मा ने भीमौके पर स्थिति का जायजा लिया और भाजपा की कार्यप्रणाली की निंदा की। अंकुश नारंग ने कहा कि आम आदमी पार्टी दिल्ली को साफ औरस्वस्थ रखने के लिए लगातार संघर्ष कर रही है, लेकिन भाजपा सरकार सिर्फ दिखावा करती है। कूड़े के पहाड़ हटाने की बजाय नए पहाड़ बनाए जा रहेहैं, जिससे दिल्ली की छवि और जनता की सेहत दोनों को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे भाजपा के इस दिखावे को समझेंऔर उनके झूठे दावों से सावधान रहें।
दिल्ली में तीज महोत्सव की शानदार शुरुआत – मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मंत्री कपिल मिश्रा ने दी महिलाओं को तीज की सौगात

दिल्ली हाट पीतमपुरा में तीज महोत्सव 2025 की भव्य शुरुआत हो गई। दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता और संस्कृति मंत्री श्री कपिल मिश्राने इस तीन दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ किया। यह महोत्सव 25 जुलाई से 27 जुलाई तक चलेगा। महिलाओं के लिए खास पर्व, खास आयोजनमुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि तीज सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि हमारी परंपरा, संस्कृति और महिला सम्मान का प्रतीक है। यह त्योहार महिलाओंके चेहरे पर मुस्कान लाता है, और यह आयोजन उसी मुस्कान को और सुंदर बनाने की कोशिश है।उन्होंने कहा, जब मेरी बहनें उत्सव मनाने आती हैं, तो न उन्हें धूप लगती है, न बरसात। वे पूरे उत्साह के साथ त्योहार को जीवंत बना देती हैं। मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा – यह दिल्ली की पहचान हैकला और संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा, यह आयोजन केवल मेला नहीं, बल्कि दिल्ली की सांस्कृतिक शक्ति और महिला सशक्तिकरण काप्रतीक है। यह मेला हर महिला को खुले दिल से आमंत्रण देता है। कोई टिकट नहीं, कोई शुल्क नहीं। बस आइए और दिल्ली की संस्कृति का आनंदलीजिए। तीज महोत्सव में क्या है खास 100 से ज्यादा रंग-बिरंगे स्टॉल, महिलाओं के लिए पारंपरिक मेहंदी, बिंदी, और सजावट की सामग्री, चाट-पकौड़ी से लेकर देशी मिठाइयों तक हरस्वाद, पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य सुंदर झूले और रंग-बिरंगे कपड़े, बच्चों के लिए खेल, कहानी और मजेदार गतिविधियाँ, महिलाओं की क्विजऔर नारा प्रतियोगिता जिनमें नकद पुरस्कार महिलाओं के लिए अवसर और उत्सव दोनोंइस मेले में कई स्टॉल महिलाओं द्वारा ही लगाए गए हैं। यह महिला उद्यमियों को आगे बढ़ने का मौका भी देता है। हर स्टॉल पर उनकी मेहनत, हुनरऔर आत्मनिर्भरता की झलक मिलती है। सांस्कृतिक राजधानी बन रही है दिल्लीकपिल मिश्रा ने कहा कि दिल्ली अब केवल प्रशासन की राजधानी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक राजधानी बनने की राह पर है। तीज जैसे त्योहारइस बदलाव का प्रतीक हैं। यह मेला दिल्ली की आत्मा से जुड़ता है। सभी के लिए खुला, सभी का अपना मेलातीज महोत्सव सभी के लिए है चाहे छोटे बच्चे हों, बुजुर्ग महिलाएं हों या युवतियां। हर कोई इस मेले में अपनी पहचान देखता है। यहां हँसी, उमंग, रंगऔर रिश्तों का मिलन होता है। मुख्यमंत्री का संदेशमुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली की सभी महिलाओं से कहा कि वे तीनों दिन इस मेले में ज़रूर आएं, अपने परिवार के साथ समय बिताएं और त्योहारकी खुशी साझा करें। उन्होंने कहा, तीज हमारी संस्कृति का आईना है, इसे हम सब मिलकर और सुंदर बना सकते हैं।दिल्ली हाट पीतमपुरा में चल रहा तीज महोत्सव ना केवल आनंद का अवसर है, बल्कि यह महिलाओं की भागीदारी, संस्कृति का सम्मान और सामूहिकऊर्जा का उत्सव भी है। यह आयोजन बताता है कि दिल्ली बदल रही है – और यह बदलाव परंपरा और आधुनिकता, दोनों को साथ लेकर चल रहा है।
पीयूष गोयल का बयान – प्रधानमंत्री ने बढ़ाया भारत का सम्मान, यूके से हुआ ऐतिहासिक समझौता

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने आज कारगिल विजय दिवस के अवसर पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी कीनेतृत्व क्षमता, देश के प्रति उनके समर्पण और भारत-यूके के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर विस्तार से चर्चा की। कारगिल के वीरों को नमनगोयल ने कहा, आज का दिन देश के लिए गर्व और भावुकता से भरा है। हम उन सभी वीर सैनिकों को नमन करते हैं जिन्होंने कारगिल युद्ध में अपनेप्राणों की आहुति दी। उनकी बहादुरी हमें यह याद दिलाती है कि भारत की एक-एक इंच भूमि कितनी मूल्यवान है। अटल जी के समय कारगिल युद्धहुआ और आज मोदी जी के समय पाकिस्तान को फिर से कड़ा उत्तर दिया गया। प्रधानमंत्री सबसे लोकप्रिय नेतापीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी को विश्व भर में सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय नेता के रूप में स्वीकार किया गया है। उन्हें अब तक 27 देशों से सम्मान प्राप्त हो चुका है। यह सम्मान भारत के बढ़ते सम्मान और प्रधानमंत्री के सशक्त नेतृत्व का प्रमाण है। भारत और ब्रिटेन के बीच बड़ा व्यापार समझौताकेंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत और ब्रिटेन के बीच जो व्यापार समझौता हुआ है वह बहुत बड़ा और ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा यह समझौता भारत केअपने नियमों और शर्तों पर हुआ है। इसमें लगभग 99 प्रतिशत वस्तुएं ऐसी हैं जिनपर अब कोई कर नहीं लगेगा। यह समझौता संतुलित है, जिससेदोनों देशों को समान लाभ होगा। इसमें दूध, पशुपालन और कृषि जैसे क्षेत्रों को सुरक्षा दी गई है। व्यापारी, मजदूर और छोटे उद्यमों को मिलेगा लाभपीयूष गोयल ने बताया कि कपड़ा, जूते, फर्नीचर, दवाई, आभूषण जैसे क्षेत्रों में अब भारतीय वस्तुएं बिना किसी कर के ब्रिटेन में बेची जा सकेंगी।कोल्हापुरी चप्पल जैसे भारत के विशेष उत्पादों को विदेशों में बेचा जाएगा तो भारत का नाम लेना अनिवार्य होगा। छोटे उद्योग अब सीधा वैश्विकबाजार तक पहुंच पाएंगे। सेवा क्षेत्र को मिलेगा विशेष लाभउन्होंने यह भी बताया कि अब जो भारतीय नागरिक तीन वर्ष के लिए ब्रिटेन जाकर सेवा देंगे, उनके वेतन का हिस्सा भारत में जमा होगा। पहले इस परलगभग 25 प्रतिशत की कटौती होती थी, अब यह पैसा सुरक्षित रहेगा। यह विशेष रूप से उन लाखों लोगों के लिए लाभदायक होगा जो विदेशों मेंकाम करते हैं। पुराने समझौते भारत के लिए नुकसानदायक थेगोयल ने कांग्रेस पार्टी की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा – कांग्रेस ने आसियान देशों के साथ जो व्यापार समझौते किए, उनमें भारत काअधिक नुकसान हुआ। वे देश भारत में अपना सामान सस्ता बेचते थे लेकिन अपना बाजार नहीं खोलते थे। हमने अब उन पुराने समझौतों पर फिर सेचर्चा शुरू कर दी है। जयराम रमेश पर कटाक्षकांग्रेस के नेता जयराम रमेश पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, कांग्रेस अब ऐसे लोगों को ढूंढ रही है जिनको अब कोई गंभीरता से नहीं सुनता।पीयूष गोयल के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत न केवल आंतरिक रूप से मज़बूत हुआ है, बल्कि विदेशों में भी देश की छवि बहुतऊँची हुई है। नया व्यापार समझौता केवल आर्थिक लाभ नहीं, बल्कि देश की आत्मनिर्भरता और गौरव का प्रतीक है।
भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया बोले – मोदी जी को 27 देशों ने दिया सम्मान, जबकि कांग्रेस ने भ्रष्ट नेताओं को बनाया अपना आदर्श

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी अब ओबीसीसमाज के नाम पर सिर्फ राजनीति कर रही है, जबकि असल में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे ओबीसी नेता का हमेशा अपमान ही किया है। गौरवभाटिया ने कहा कि राहुल गांधी ने जिस सम्मेलन में ओबीसी समाज की बात की, वहां उन्हीं लोगों को ‘आदर्श’ बताया जिनके ऊपर बड़े-बड़े घोटालों केआरोप लगे हैं। उन्होंने कहा, राहुल गांधी के लिए सिद्धारमैया और भूपेश बघेल जैसे नेता आदर्श हैं, जिन पर गंभीर घोटाले के आरोप हैं। सिद्धारमैया परमुड़ा स्कैम का आरोप है और भूपेश बघेल और उनके बेटे पर भी कई घोटालों की जांच चल रही है। यहां तक कि भूपेश बघेल के बेटे की गिरफ्तारीतक हो चुकी है। ओबीसी समाज को लेकर कांग्रेस की दोहरी नीतिगौरव भाटिया ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ओबीसी समाज के नाम पर दिखावा कर रही है, जबकि असल में उसने हमेशा ओबीसी नेताओं का अपमानकिया है। उन्होंने कहा, हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी स्वयं ओबीसी समाज से आते हैं, लेकिन राहुल गांधी और उनकी पार्टी ने बार-बार उनका अपमानकिया। कांग्रेस ये सोचती है कि अगर किसी के ऊपर घोटाले या स्कैम के आरोप नहीं हैं, तो वो नेता आदर्श नहीं हो सकता। यही कांग्रेस की भ्रष्ट सोचहै। मोदी जी को मिला वैश्विक सम्मानभाटिया ने यह भी बताया कि एक ग्लोबल सर्वे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “दुनिया का सबसे भरोसेमंद नेता” बताया गया है। उन्होंने कहा कि मोदी जीने प्रधानमंत्री और गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में देश की जो सेवा की है, उसे पूरी दुनिया मान रही है। 27 देशों ने मोदी जी को और भारत को सम्मानदिया है। आज पूरी दुनिया में नेता बदलते रहते हैं, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री मोदी जी हमेशा नंबर 1 रहते हैं। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर भी हमलागौरव भाटिया ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, इन दोनों नेताओं के बीचलड़ाई इस बात की है कि एटीएम को कैसे खाली किया जाए और पैसों का कैसे बंटवारा हो। ये सिर्फ कुर्सी और पैसा देख रहे हैं, जनता की सेवाकरना इनका मकसद नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का असली चेहरा वही है जो कर्नाटक में दिख रहा है – पैसा, सत्ता और भ्रष्टाचार। और ऊपर सेइन्हीं लोगों को राहुल गांधी ‘आदर्श’ बताते हैं। नकली गांधी परिवार‘ की तिजोरी भरने में लगे हैं नेतागौरव भाटिया ने कहा कि कांग्रेस के नेता अब सिर्फ एक ही काम में लगे हैं – ‘नकली गांधी परिवार’ की तिजोरी भरना। उन्होंने कहा, इनका एक हीमकसद है ज्यादा से ज्यादा घोटाले करना और ऊपर बैठे लोगों को खुश करना। इनका कल्चर ही भ्रष्टाचार का है। गौरव भाटिया के इन बयानों से साफहै कि भाजपा ने अब कांग्रेस और राहुल गांधी को सीधा घेरने की रणनीति अपनाई है। उन्होंने ओबीसी समाज के अपमान, भ्रष्टाचार और प्रधानमंत्रीमोदी की वैश्विक प्रतिष्ठा जैसे मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाया है। साथ ही ये भी साफ किया कि भाजपा का संकल्प है – भ्रष्टाचार मुक्त भारत।
वीरेंद्र सचदेवा ने कारगिल विजय दिवस पर दी शहीदों को श्रद्धांजलि, कहा – हमारी सेना का शौर्य हर भारतीय के लिए गर्व की बात है

दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने आज सुबह इंडिया गेट स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर कारगिल विजय दिवस के अवसर पर देश के वीर शहीदोंको श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर उनके साथ बीजेपी सांसद कमलजीत सेहरावत और वरिष्ठ नेता योगेंद्र चंदोलिया भी मौजूद रहे। श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान वीरेंद्र सचदेवा ने कहा किमैं कारगिल विजय दिवस के पावन अवसर पर दिल्ली और देश की जनता को दिल से बधाई देता हूं। यह दिन हमारी सेना के साहस, बलिदान औरगौरव की याद दिलाता है। जिस तरह भारतीय सैनिकों ने दुर्गम पहाड़ियों में दुश्मनों को करारी शिकस्त दी, वह आज भी हर भारतीय के दिल में गर्व पैदाकरता है।उन्होंने बताया कि यह युद्ध तीन महीने तक चला और इसमें भारतीय सेना ने पूरी ताकत और हौसले के साथ पाकिस्तान की सेना और आतंकवादियों कासामना किया। इस ऐतिहासिक जीत में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के मजबूत नेतृत्व की भी अहम भूमिका रही। वीरेंद्र सचदेवा ने कहा किकारगिल विजय दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि यह हमारे वीर जवानों के शौर्य को हर दिन याद करने का दिन है। आज जब हम देश कीसीमाएं सुरक्षित देखते हैं, तो इसके पीछे हमारे वीर जवानों की कुर्बानी है। हमें सेना के शौर्य को रोज़ याद करना चाहिए और उन्हें दिल से सलाम करनाचाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है और सीमाओं कीसुरक्षा को और मजबूत किया है। अंत में उन्होंने सभी शहीदों को नमन करते हुए कहाआज का दिन हम सबके लिए प्रेरणा का स्रोत है। हम सभी वीर जवानों की शहादत को नमन करते हैं और उनके बलिदान को कभी नहीं भूलेंगे। यहीसच्ची श्रद्धांजलि है।इस अवसर पर बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, नेता और आम लोग मौजूद रहे और सभी ने कारगिल के वीरों को श्रद्धा से याद किया। माहौलदेशभक्ति से भरा हुआ था और हर चेहरे पर वीर जवानों के लिए सम्मान और गर्व साफ नजर आ रहा था।
चुनाव आयोग का बड़ा फैसला पूरे देश में शुरू होगा मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण, विपक्ष ने जताई आशंका

चुनाव आयोग द्वारा बिहार में किए जा रहे मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण का विपक्ष द्वारा संसद से लेकर सड़क तक विरोध किया जा रहा है. भारी विरोधके बावजूद चुनाव आयोग ने शुक्रवार को बड़ा एलान किया। दरअसल चुनाव आयोग ने कहा है कि देशभर में मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण का कामअब शुरू करने का फैसला किया गया है और जल्द ही इसके लिए शेड्यूल जारी कर दिया जाएगा. चुनाव आयोग ने बीती 24 जून को ही इस संबंध मेंआदेश जारी कर दिया था और कहा था कि संवैधानिक कर्तव्य के तहत और मतदाता सूची की अखंडता और सुरक्षा के लिए यह मतदाता सूची के गहनपुनरीक्षण का काम किया जाएगा. अब चुनाव आयोग ने उसकी शुरुआत कर दी है. चुनाव आयोग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि ‘मतदाता सूचीकी अखंडता को बनाए रखना निष्पक्ष और मुक्त चुनाव के लिए आधारभूत जरूरत है। जनप्रतिनिधि कानून, 1950 और रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टोरलरूल्स, 1960 के तहत योग्यता, मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया और तरीके की जानकारी दी गई है. लोगों को मिल सके मताधिकारपिछले महीने 24 जून को निर्वाचन आयोग ने बिहार में विशेष मतदाता गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का निर्देश दिया था। यह 25 जून से 26 जुलाई2025 के बीच होना है. चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में फर्जी, अयोग्य और दो जगहों पर पंजीकृत मतदाताओं को हटाने के उद्देश्य सेपुनरीक्षण किया जा रहा है. वहीं विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि चुनाव आयोग इस विशेष गहन पुनरीक्षण के जरिए पिछले दरवाजे से लोगों कीनागरिकता की जांच कर रहा है. साथ ही विपक्ष का आरोप है कि इसकी आड़ में बड़े पैमाने पर लोगों से मतदान का अधिकार छीना जा सकता है. हालांकि चुनाव आयोग ने आश्वासन दिया है कि अगर कोई व्यक्ति मतदाता सूची से बाहर हो जाए, तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि उसकीनागरिकता समाप्त हो गई है. चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि कानून और संविधान के तहत उसे यह अधिकार प्राप्त है कि वह नागरिकता से जुड़ेदस्तावेज मांग सके, ताकि लोगों को ‘मताधिकार’ मिल सके. पुनरीक्षण को लेकर किया जा रहा था विरोधविपक्ष द्वारा मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण करने का भारी विरोध किया जा रहा है. बिहार विधानसभा और संसद में इस मुद्दे पर हंगामा जारी है। विपक्षके विरोध और आलोचना के बीच चुनाव आयोग ने कुछ सवाल उठाते हुए कहा कि ‘भारत का संविधान, भारतीय लोकतंत्र की मां है. तो क्या विरोध सेडरकर चुनाव आयोग को कुछ लोगों के दबाव में भ्रमित हो जाना चाहिए और उन लोगों का रास्ता साफ कर देना चाहिए, जो मृत मतदाताओं के नामपर फर्जी मतदान करते हैं? जो मतदाता स्थायी तौर पर पलायन कर गए हैं, जो मतदाता फर्जी या विदेशी हैं, क्या उन्हें संविधान के खिलाफ जाकर, पहले बिहार में और फिर पूरे देश में मतदान करने दें?’ दावा किया जा रहा है कि पुनरीक्षण में बिहार में कम से कम 56 लाख मतदाताओं के नाम कटसकते हैं. इसमें 20 लाख मतदाताओं का निधन हो चुका है. 28 लाख ऐसे मतदाताओं की पहचान की गई जो अपने पंजीकृत पते से स्थाई रूप सेपलायन कर गए हैं. वहीं, एक लाख मतदाता ऐसे हैं जिनका कुछ पता नहीं है. 7 लाख मतदाता एक से अधिक स्थान पर पंजीकृत पाए गए हैं.