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बाराबंकी के अवसानेश्वर महादेव मंदिर में करंट लगने से भगदड़, 2 श्रद्धालुओं की मौत, 38 घायल

यूपी के बाराबंकी में अवसानेश्वर महादेव मंदिर में रविवार की आधी रात टिनशेड के पोल में करंट आने से भगदड़ मचने से दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई. जबकि, 38 घायल हो गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेकर जांच रिपोर्ट तलब की है. इसके बाद अयोध्या मंडल के कमिश्नर गौरव दयाल और आईजी प्रवीण कुमार मौके पर पहुंचे. उन्होंने डीएम-एसपी के साथ घटनास्थल का निरीक्षणकरके जानकारी ली। उन्होंने घटना के समय मौके पर तैनात सुरक्षाकर्मियों से बात की. मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए. राज्यमंत्री सतीश शर्मा ने भी घटनास्थल का दौरा किया. उन्होंने अस्पताल में घायलों से मुलाकात करके उनका हाल जाना. इस मौके पर उन्होंने कहाकि यह अत्यंत दुखद घटना है. मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता दने का आश्वासन दिया. घायलों का समुचित इलाज करने के निर्देश दिए. प्रशासन की ओर से मौके की निगरानी बढ़ा दी गई है व्यवस्थाओं की पुनः समीक्षा की जा रही है. पोल से लगे भागनेसावन के तीसरे सोमवार को भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए मंदिर में आधी रात से ही भीड़ लगी थी. गोमती नदी में स्नान करकेश्रद्धालु 12 बजे से ही मंदिर की तरफ बढ़ते गए और लाइन लगती गई. मंदिर परिसर और बाहर का क्षेत्र श्रद्धालुओं की भीड़ से खचाखच भर गया. आधी रात 1.30 बजे मंदिर के कपाट खुले तो श्रद्धालु बम बम भोले के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ने लगे. करीब आधे घंटे बाद लगभग 2.00 बजेमंदिर के बाहर गैलरी में लगे टिन शेड के पोल में करंट उतर गया. झटका लगा तो श्रद्धालु बचाव के लिए पोल से दूर भागने लगे. भीड़ अधिक होने केकारण कुछ ही देर में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई. सूचना पर पुलिस-प्रशासन राहत बचाव में जुटा लोगों को समझाकर शांत किया जाता, तब तकअफरातफरी बढ़ गई थी. जांच के दिए आदेशपुलिस ने एंबुलेंस से घायलों को अस्पताल पहुंचाना शुरू किया सभी को सीएचसी हैदरगढ़ और त्रिवेदीगंज भेजा गया। वहां डॉक्टरों और स्टाफ नेतत्काल इलाज शुरू किया. त्रिवेदीगंज सीएचसी में लोनीकटरा थाना क्षेत्र के मुबारकपुर निवासी प्रशांत (22) और एक अन्य युवक की मौत हो गई. बाकी 38 घायलों में से सात की हालत गंभीर बताई जा रही है उन्हें हायर सेंटर के लिए रेफर किया गया है. बाराबंकी के अवसानेश्वर मंदिर में भगदड़मामले का संज्ञान लेते हुए सीएम योगी ने रिपोर्ट तलब की है. घटना के बाद कमिश्नर-IG व राज्यमंत्री ने मौका मुआयना करके जायजा लिया. अस्पताल जाकर घायलों का हाल जाना. करीब आधे घंटे बाद टिन शेड के पोल में करंट उतरने से भगदड़ मच गई. पुलिस और प्रशासन ने राहत औरबचाव कार्य शुरू किया और घायलों को अस्पताल भेजा. बाराबंकी के अवसानेश्वर महादेव मंदिर में करंट लगने से भगदड़ मच गई, जिसमें दो श्रद्धालुओंकी मौत हो गई और 38 अन्य घायल हो गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लिया और जांच के आदेश दिए हैं.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का किया दावा, 22 मिनट में 100 से अधिक आतंकवादी ढेर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर हो रही बहस के दौरान उसकी सफलता की बात पर जोर दिया. बहस कीशुरुआत में रक्षा मंत्री ने कहा कि मैं देश के लिए जान कुर्बान करने वाले बहादुर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं इसके बाद उन्होंने ऑपरेशनसिंदूर के महत्वपूर्ण पहलूओं के बारे में जानकारी दी. राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारे वीर सैनिकों ने यह ऑपरेशन सिर्फ 22 मिनट में पूरा किया औरइसमें 100 से ज्यादा आतंकियों, उनके ट्रेनर्स और हैंडलर्स को मार गिराया गया राजनाथ सिंह ने बताया कि पहलगाम आतंकी हमले के तुरंत बादभारतीय सशस्त्र बलों ने जवाबी कार्रवाई की. हैंडलर गए मारेउन्होंने कहा कि हमारी सेना ने एक साथ नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए. इस ऑपरेशन में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, और हिज्बुलमुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों से जुड़े 100 से अधिक आतंकवादी, उनके ट्रेनर, हैंडलर और सहयोगी मारे गए. रक्षा मंत्री ने बताया कि ये पूराऑपरेशन सिर्फ 22 मिनट में संपन्न हुआ। हमारी सेना की योजना और समन्वय बहुत ही शानदार था. उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के तुरंतबाद भारतीय सशस्त्र बलों ने नौ आतंकवादी ठिकानों पर एक साथ सटीक और संगठित हमले किए. इस ऑपरेशन में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे प्रमुख आतंकी समूहों के लगभग 100 आतंकवादी, उनके ट्रेनर और हैंडलर मारे गए. देश की सुरक्षा का बताया आधारराजनाथ सिंह ने कहा कि सेना की योजना, रणनीति और समन्वय की बदौलत यह ऑपरेशन इतनी जल्दी और सफलतापूर्वक पूरा किया गया. उन्होंनेभारतीय सेना की तत्परता और कुशलता को देश की सुरक्षा का आधार बताया. इस बहस के दौरान विपक्ष ने ऑपरेशन सिंदूर और हाल की सुरक्षानीतियों पर सरकार से सवाल किए, वहीं सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी सख्त नीति और कार्रवाई का बचाव किया। रक्षा मंत्री के इस बयानसे संसद में सुरक्षा से जुड़ी बहस में नई ऊर्जा आई है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर जोर देते हुए बताया किभारतीय सेना ने मात्र 22 मिनट में 100 से अधिक आतंकवादियों को खत्म कर सटीक जवाबी कार्रवाई की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार कोलोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर जारी बहस के दौरान इसकी सफलता पर जोर देते हुए बताया कि भारतीय सेना ने इस ऑपरेशन को मात्र 22 मिनट में अंजाम दिया। उन्होंने उन वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने देश के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना आतंकवाद के खिलाफसाहसिक कार्रवाई की.

डोनाल्ड ट्रंप ने थाईलैंड-कंबोडिया युद्धविराम पर काम किया, कहा भारत-पाक विवाद की तुलना में आसान है मामला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने थाईलैंड और कंबोडिया के बीच युद्धविराम समझौता कराने की कोशिश की है और उन्हें उम्मीद है किदोनों देशों के बीच युद्ध जल्दी रुक जाएगा ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने पहले भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद को सुलझाया है लेकिन इनकीतुलना में थाईलैंड और कंबोडिया में युद्धविराम कराना उनके लिए आसान है. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ बैठक केदौरान ट्रंप ने पत्रकारों से बात की. इस दौरान उन्होंने कहा कि वह थाईलैंड और कंबोडिया पर व्यापार का दबाव बना रहे हैं ताकि वे लड़ना बंद कर दें. ट्रंप ने कहा, ‘हम थाईलैंड और कंबोडिया के साथ व्यापार करते हैं. लेकिन अब मैं सुन रहा हूं कि वे एक-दूसरे से लड़ रहे हैं. मुझे लगता है यह विवादसुलझाना आसान होगा, क्योंकि मैंने भारत-पाकिस्तान और सर्बिया-कोसोवो जैसे देशों के बीच भी समझौता कराया है. मिला है आत्मविश्वासकंबोडिया और थाईलैंड ने दिन में पहले ही एक-दूसरे पर तोपखाने से हमला करने का आरोप लगाया, जबकि ट्रंप ने कुछ ही घंटों पहले कहा था किदोनों देश युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं. इससे पहले शनिवार रात, ट्रंप ने दोनों देशों के नेताओं से फोन पर बात की थी जिसके बाद दोनों पक्षों नेकहा कि वे सीमा विवाद को खत्म करने के लिए बातचीत शुरू करने के लिए तैयार हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, थाईलैंड और कंबोडिया के बीच यहविवाद लगभग 100 साल से भी ज्यादा पुराना है जब औपनिवेशिक काल के फ्रांस ने पहली बार दोनों देशों के बीच सीमा तय की थी. ट्रंप ने बतायाकि उन्होंने दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों से कहा’जब तक आप शांति नहीं करते, अमेरिका आपसे कोई व्यापार नहीं करेगा. उन्होंने दावा किया कि इसचेतावनी के बाद दोनों नेता समझौते को तैयार हो गए. ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें अपने पुराने प्रयासों, जैसे भारत और पाकिस्तान के बीच हाल कीलड़ाई को रोकने में मिली सफलता से आत्मविश्वास मिला है. शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व होगा स्थापितअमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह पहले भी भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद को सुलझा चुके हैं और इन दोनों देशों की तुलना मेंथाईलैंड और कंबोडियो के बीच युद्धविराम समझौता कराना आसान है. उन्होंने यह भी कहा कि वह दोनों के बीच युद्धविराम समझौता कराने कीकोशिश कर रहे हैं और उम्मीद जताई कि यह लड़ाई जल्द रुक जाएगी. ट्रंप ने यह भी कहा कि वह व्यापार के जरिए दबाव बनाकर शांति स्थापितकरना चाहते हैं। उनका मानना है कि युद्धविराम से न केवल क्षेत्रीय स्थिरता आएगी, बल्कि आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा. अमेरिका की इसमध्यस्थता से उम्मीद जताई जा रही है कि थाईलैंड और कंबोडिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम किया जा सकेगा और भविष्य मेंशांतिपूर्ण सह-अस्तित्व स्थापित होगा.

‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने विज्ञान और अकादमिक उपलब्धियों पर जताया गौरव, बोले देश के लिए गर्व की बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जुलाई अंक में भारत की वैज्ञानिक और अकादमिक उपलब्धियों पर प्रसन्नताजताई. उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का भारत विज्ञान के क्षेत्र में नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है।प्रधानमंत्री ने हाल ही में हुए इंटरनेशनल केमिस्ट्रीओलंपियाड में भारतीय छात्रों की शानदार सफलता का जिक्र करते हुए देवेश पंकज, संदीप कुची, देबदत्त प्रियदर्शी और उज्ज्वल केसरी को बधाई दी. जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया. पीएम मोदी ने बताया कि भारत गणित के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत उपस्थितिदर्ज करा रहा है। इंटरनेशनल मैथमेटिकल ओलंपियाड में भारतीय छात्रों ने अब तक तीन गोल्ड, दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल हासिल किए हैं, जोदेश की अकादमिक प्रतिभा का प्रमाण है. आयोजित होगा सबसे बड़ा आयोजनउन्होंने आगे बताया कि अगले महीने मुंबई में इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमी और एस्ट्रोफिजिक्स ओलंपियाड का आयोजन होने जा रहा है. जो अब तक कासबसे बड़ा आयोजन होगा. पीएम मोदी ने गर्व के साथ कहा, “भारत अब ओलंपिक ही नहीं, ओलंपियाड में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. भारत ने नकेवल विज्ञान बल्कि गणित की दुनिया में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है. हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित इंटरनेशनल मैथमेटिकलओलंपियाड (IMO) में भारतीय छात्रों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 स्वर्ण, 2 रजत और 1 कांस्य पदक अपने नाम किए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने‘मन की बात’ में INSPIRE-MANAK अभियान का जिक्र करते हुए बताया कि यह पहल स्कूली बच्चों में नवाचार (Innovation) को प्रोत्साहितकरने के लिए शुरू की गई है. बच्चों का किया जाता है चयनइस योजना के तहत हर स्कूल से पांच बच्चों का चयन किया जाता है जो अपने नए और अनोखे आइडिया पेश करते हैं। अब तक लाखों बच्चे इसअभियान से जुड़ चुके हैं और चंद्रयान-3 की सफलता के बाद इसमें भाग लेने वाले बच्चों की संख्या दोगुनी हो गई है. चंद्रयान‑3 की सफलता के बादइस पहल में शामिल बच्चों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है. इससे युवा वर्ग में विज्ञान और अनुसंधान के प्रति रुचि और उत्साह बढ़ा है. कार्यक्रम मेंपीएम मोदी ने यह उल्लेख किया कि भारत ने 3 गोल्ड, 2 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज पदक प्राप्त किया. इससे यह सिद्ध होता है कि भारत गणित की दुनियामें भी अपनी उन्नत उपस्थिति दर्ज करा रहा है. सुविज्ञ छात्रों — देवेय पंकज भैया (जलगाँव) और संदीप कुची (हैदराबाद) — को गोल्ड, जबकि देबदत्तप्रियदर्शी (भुवनेश्वर) और उज्ज्वल केसरी (नई दिल्ली) को सिल्वर मेडल प्रदान किया गया.

स्टालिन की केंद्र से मांग ₹2,151 करोड़ SSA फंड बिना शर्त तुरंत जारी करें, हम अपनी दो-भाषा नीति पर अडिग

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार से समग्र शिक्षा योजना (एसएसए) के तहत 2,100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जल्द जारीकरने की मांग की है. यह मांग मुख्यमंत्री की ओर से वित्त मंत्री थंगम थेन्नारासु ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन सौंपकर की. मामलेमें तमिलनाडु सरकार ने साफ किया है कि वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) के तीन-भाषा फार्मूले को स्वीकार नहीं करेगी और तमिल तथाअंग्रेजी की अपनी दो-भाषा नीति को ही जारी रखेगी. ज्ञापन में कहा गया कि केंद्र द्वारा जरूरी फंड जारी न करने से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होरहा है. ज्ञापन सौंपा पीएम कोज्ञापन में मांग की गई कि केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 2,151.59 करोड़ रुपये की राशि और 2025-26 की पहली किस्त बिना पीएमपीएम श्री योजना पर हस्ताक्षर की शर्त के जल्द मंजूर करे। बता दें कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन फिलहाल स्वास्थ्य कारणों से अस्पताल में भर्तीहैं. उनकी स्वीकृति से यह ज्ञापन प्रधानमंत्री को सौंपा गया. पीएम मोदी दो दिन की यात्रा पर तमिलनाडु में हैं.इसके साथ ही तमिलनाडु सरकार की ओर से केंद्र को दिए गए ज्ञापन में कुछ अहम अन्य मांगों पर भी जोर दिया गया है. इसमें कोयंबटूर और मदुरै मेट्रोरेल परियोजनाओं को 50:50 हिस्सेदारी पर मंजूरी देने, चेन्नई में उपनगरीय रेल सेवाओं में बढ़ोतरी. नावों के छुड़वाने की अपीलतमिलनाडु के मछुआरों की गिरफ्तारी के मामलों का स्थायी समाधान के साथ-साथ श्रीलंका की हिरासत में मौजूद मछुआरों और उनकी नावों कोछुड़वाने की अपील की गई है. यह ज्ञापन तमिलनाडु सरकार की राज्य के हितों को लेकर गंभीरता और केंद्र से सहयोग की अपेक्षा को दर्शाता है. तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने केंद्र से समग्र शिक्षा योजना के तहत 2151 करोड़ रुपये बिना शर्त जल्द जारी करने को कहा राज्य ने राष्ट्रीयशिक्षा नीति (एनईपी 2020) के तीन-भाषा फार्मूले को ठुकराकर तमिल-अंग्रेजी दो-भाषा नीति पर जोर दिया। इसके लिए एक ज्ञापन राज्य सरकार नेपीएम मोदी को सौंपा हैं।केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रद्युम्न का कहना है कि SSA फंड तभी जारी होंगे जब राज्य NEP और PM‑SHRI स्कूलपरियोजनाओं को स्वीकार करे—जो तमिलनाडु ने ठुकरा दिया है.

13 साल बाद मातोश्री पहुंचे राज ठाकरे, उद्धव से मुलाकात ने बढ़ाई गठबंधन की संभावनाएं

महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे बंधुओं की नजदीकी लगातार बढ़ रही है. इसकी बानगी रविवार को एक बार फिर देखने को मिली जब मनसे प्रमुख राजठाकरे, उद्धव ठाकरे को जन्मदिन की बधाई देने मातोश्री पहुंचे गौरतलब है कि राज ठाकरे करीब 13 साल बाद मातोश्री पहुंचे. शिवसेना यूबीटी प्रमुखउद्धव ठाकरे और पार्टी सांसद संजय राउत ने मातोश्री के द्वार पर आकर राज ठाकरे का स्वागत किया. राज ठाकरे ने उद्धव ठाकरे को जन्मदिन की बधाईदेते हुए फूलों का गुलदस्ता भी भेंट किया. इससे पहले राज ठाकरे साल 2012 में मातोश्री पहुंचे थे. उस वक्त उद्धव ठाकरे की एंजियोप्लास्टी हुई थी. तब राज ठाकरे ने मातोश्री पहुंचकर शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे का हालचाल जाना था.राज ठाकरे ने साल 2005 में शिवसेना छोड़ी थी और शिवसेना छोड़ने के बाद से आज से पहले तक राज ठाकरे सिर्फ एक ही बार मातोश्री गए थे. यहीवजह है कि जब रविवार को राज ठाकरे मातोश्री पहुंचे तो महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारे में इसकी खूब चर्चा हो रही है. दोनों भाइयों की इसमुलाकात को रिश्तों में जमी बर्फ के तेजी से पिघलने के तौर पर देखा जा रहा है. दिया सकारात्मक संदेशमहाराष्ट्र में मराठी मानुष और तीन भाषा नीति के मुद्दे पर हुई राजनीति ने राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के साथ आने की जमीन तैयार की. एक इंटरव्यू मेंराज ठाकरे ने मराठी मानुष के मुद्दे पर उद्धव ठाकरे के साथ आने के संकेत दिए. जिस पर उद्धव ठाकरे ने भी सकारात्मक जवाब दिया. हालांकि इसकेबाद दोनों पार्टियों की तरफ से हुई बयानबाजी से थोड़ी संशय की स्थिति बनी, लेकिन जैसे ही सरकार ने तीन भाषा नीति के अपने स्टैंड से पीछे हटनेका एलान किया तो शिवसेना यूबीटी और मनसे ने इसे अपनी जीत के तौर पर पेश किया. इसके बाद मनसे और शिवसेना यूबीटी की संयुक्त रैली काएलान किया गया. 5 जुलाई को मुंबई में हुई इस रैली में 20 साल बाद दोनों भाई राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एक मंच पर दिखाई दिए थे। संयुक्तरैली में साथ आने के बाद जब ऐसा लग रहा था कि दोनों भाई आगामी निकाय चुनाव में गठबंधन कर सकते हैं. तो तभी हाल ही में उद्धव ठाकरे ने एकबयान से चौंका दिया. दरअसल उन्होंने शिवसेना यूबीटी से गठबंधन के सवाल पर कोई टिप्पणी नहीं की. हालात देखकर किया जाएगा फैसलाउन्होंने कहा कि निकाय चुनाव में गठबंधन का फैसला हालात देखकर किया जाएगा. अब राज ठाकरे के मातोश्री पहुंचने से दोनों पार्टियों के उनकार्यकर्ताओं और समर्थकों को काफी राहत पहुंची होगी. जो मनसे और शिवसेना के बीच गठबंधन चाहते हैं. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार कोशिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे को उनके जन्मदिन पर बधाई दी और महाराष्ट्र की जनता के लिए उनके साथ मिलकर लड़ने की उम्मीद जताई।राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा पोस्ट में लिखा कि ‘शिवसेना अध्यक्ष और इंडी गठबंधन के सहयोगी उद्धव ठाकरे जी को उनकेजन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं. लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा, ‘आप स्वस्थ रहें, दीर्घायु हों और हम महाराष्ट्र की जनता के हितोंऔर अधिकारों के लिए मिलकर लड़ेंगे.’ रविवार को राज ठाकरे मातोश्री पहुंचे तो महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारे में इसकी खूब चर्चा शुरू हो गई. दोनों भाइयों की इस मुलाकात को रिश्तों में जमी बर्फ के तेजी से पिघलने और मनसे और शिवसेना यूबीटी के संभावित गठबंधन से जोड़कर देखा जारहा है.

मायावती का तीखा वार कांग्रेस-एनडीए दोनों ओबीसी समाज के लिए भरोसेमंद नहीं कांग्रेस और “बीजेपी दोनों पर जमकर बरसीं”

बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर बयान जारी कर कहा कि कांग्रेस ओबीसी समाज की विश्वासपात्र पार्टी नहीं है. कांग्रेस केदिल में कुछ है जुबान पर कुछ है उन्होंने कहा कि एनडीए का भी ओबीसी के प्रति यही हाल है. मायावती के बयान को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उसबयान के संदर्भ में देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने कहा था कि सत्ता में रहते हुए जाति जनगणना न करवाना कांग्रेस की गलती थी. आगे उन्होंने ये भीकहा था कि जो काम ओबीसी के लिए अब तक नहीं कर पाया उसे दोगुनी स्पीड से करूंगा. मायावती ने बयान दिया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्षद्वारा यह स्वीकार करना कि देश के विशाल आबादी वाले अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) समाज के लोगों की राजनीतिक व आर्थिक आशा, आकांक्षा वआरक्षण सहित उन्हें उनका संवैधानिक हक़ दिलाने के मामलों में कांग्रेस पार्टी खरी व विश्वासपात्र नहीं रही है कोई नई बात नहीं है बल्कि यह दिल मेंकुछ व जुबान पर कुछ और जैसी स्वार्थ की राजनीति ज्यादा लगती है. रवैया को कौन है भुला सकतावास्तव में उनका यह बयान उसी तरह से जगजाहिर है जैसाकि देश के करोड़ों शोषित, वंचित व उपेक्षित एससी/एसटी समाज के प्रति कांग्रेस पार्टी काऐसा ही दुखद व दुर्भाग्यपूर्ण रवैया लगातार रहा है और जिस कारण ही इन वर्गों के लोगों को फिर अन्ततः अपने आत्मसम्मान व स्वाभिमान तथा अपनेपैरों पर खड़े होने की ललक के कारण अलग से अपनी पार्टी बहुजन समाज पार्टी बनानी पड़ी है.कुल मिलाकर इसके परिणामस्वरूप कांग्रेस पार्टी यूपी सहित देश के प्रमुख राज्यों की सत्ता से लगातार बाहर है और अब सत्ता गंवाने के बाद इन्हें इनवर्गों की याद आने लगी है जिसे इनकी नीयत व नीति में हमेशा खोट रहने की वजह से घड़ियाली आंसू नहीं तो और क्या कहा जाएगा, जबकि वर्तमानहालात में बीजेपी के एनडीए का भी इन वर्गों के प्रति दोहरे चरित्र वाला यही चाल-ढाल लगता है.उन्होंने आगे कहा कि वैसे भी एससी/एसटी वर्गों कोआरक्षण का सही से लाभ व संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को भारतरत्न की उपाधि से सम्मानित नहीं करने तथा देशकी आजादी के बाद लगभग 40 वर्षों तक ओबीसी वर्गों को आरक्षण की सुविधा नहीं देने तथा सरकारी नौकरियों में इनके पदों को नहीं भरकर उनकाभारी बैकलॉग रखने आदि के जातिवादी रवैयों को भला कौन भुला सकता है. वर्गों की रही सच्ची हितैशीजो कि इनका यह अनुचित जातिवादी रवैया अभी भी जारी है इतना ही नहीं बल्कि इन सभी जातिवादी पार्टियों ने आपस में मिलकर एससी, एसटी वओबीसी आरक्षण को किसी ना किसी बहाने से एक प्रकार से निष्क्रिय एवं निष्प्रभावी ही बना दिया है.इस प्रकार दलितों, आदिवासियों व अन्य पिछड़ोंके बहुजन समाज को सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक तौर पर गुलाम व लाचार बनाए रखने के मामलों में सभी जातिवादी पार्टियां हमेशा से एक हीथैली के चट्टे-बट्टे रहे हैं. जबकि अम्बेडकरवादी पार्टी बीएसपी सदा ही इन वर्गों की सच्ची हितैषी रही है और यूपी में चार बार बसपा के नेतृत्व में रहीसरकार में सर्वसमाज के गरीबों, मजलूमों के साथ-साथ बहुजन समाज के सभी लोगों के जानमाल व मजहब की सुरक्षा व सम्मान तथा इनके हित एवंकल्याण की भी पूरी गारंटी रही है। अर्थात् देश के बहुजनों का हित केवल बीएसपी की आयरन गारंटी में ही निहित है. अतः खासकर दलित, आदिवासी व अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी समाज) के लोग खासकर कांग्रेस, सपा आदि इन विरोधी पार्टियों के किसी भी बहकावे में नहीं आयें यहीउनकी सुख, शान्ति व समृद्धि हेतु बेहतर है.

गांव बनेंगे स्मार्ट, विकास दिखे ज़मीन पर डिप्टी सीएम केशव मौर्य की अधिकारियों को दी चेतावनी

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने गांवों के समग्र व संतुलित विकास के लिए अधिकारियों को कागजी घोड़ा दौड़ाने की आदत से बाज आने कीचेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि विकास कार्य धरातल पर दिखने चाहिए। गांवों व ग्रामीणों को हर हाल में सशक्त, स्वावलंबी व आत्मनिर्भर बनाना है. स्मार्ट सिटी की तरह गांवों को भी स्मार्ट बनाने पर जोर देते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि इससे संबंधित कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतीजाए. डिप्टी सीएम शनिवार को राजधानी स्थित योजना भवन में प्रदेश सभी मुख्य विकास अधिकारियों (सीडीओ) के साथ ग्राम्य विकास विभाग केयोजनाओं की समीक्षा कर रहे थे. उन्होंने विभाग के अधिकारियों को निष्क्रिय स्वंय सहायता समूहों को सक्रिय करने प्रधानमंत्री आवास योजना(ग्रामीण) के क्रियान्वयन को और अधिक पारदर्शी व निष्पक्ष बनाने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने पीएमजीएसवाई की एफडीआर तकनीक से बनाई जा रहीसड़कों की नियमित रूप से निगरानी करने और गांवो के युवा बेरोजगारों को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना से जोड़ने पर भी फोकस करनेको कहा है. पंजीकृत कराने के भी दिए निर्देशकेशव ने सीडीओ गांवों के विकास कार्यों की जमीनी हकीकत को परखने के साथ ही मनरेगा से कराए गये पुराने कार्यों का ठीक से मरम्मत कराने के भीनिर्देश दिए हैं. साथ ही पीएम आवास योजना के लाभार्थियों को अनुमन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पोर्टल शुरू करने और ग्रामीणों कीसमस्याओं का त्वरित निस्तारण के लिए ग्राम चौपालों के आयोजन में ढिलाई न बरतने को कहा है.डिप्टी सीएम ने ग्रामीणों को खेती के साथ उद्यमों से जोड़ने, गांवों को सड़कों से जोड़ने व गलियां व नालियों के कार्य मनरेगा से कराने और मनरेगा में100 दिन कार्य करने वाले श्रमिकों को बीओसीडब्ल्यू बोर्ड में पंजीकृत कराने के भी निर्देश दिए हैं. पांचवे संस्करण का किया विमोचनबैठक में ग्राम्य विकास राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम के अलावा अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य संस्करण विभाग बीएल मीणा, सचिव एवंआयुक्त ग्राम्य विकास विभाग गौरी शंकर प्रियदर्शी, यूपीआरआरडीए के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अखंड प्रताप सिंह समेत अन्य अधिकारी भीमौजूद रहे. इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलम) में बेहतर कार्य करने वाले तीन मुख्य मुख्य विकासअधिकारियों (सीडीओ) को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इनमें वाराणसी के सीडीओ प्रथम, अंबेडकर नगर के सीडीओ द्वितीय और बिजनौर सेसीडीओ तीसरे स्थान पर रहे. वहीं, मनरेगा के तहत खेल मैदान बनाने में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभिन्न जिलों के 11 खंड विकास अधिकारियोंबीडीओ को भी सम्मानित किया गया. इसके अलावा डिप्टी सीएम ने एनआरएलएम डैशबोर्ड का शुभारंभ किया और ग्राम्य विकास विभाग कीत्रैमासिक पत्रिका के पांचवें संस्करण का विमोचन किया.

कारगिल विजय दिवस पर जे. पी. नड्डा ने किया वीर जवानों को नमन, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ प्रदर्शनी का किया उद्घाटन

कारगिल विजय दिवस के पावन अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्डा ने देश के वीर जवानों को नमन किया और दिल्ली मेंएक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। यह प्रदर्शनी कारगिल युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित है, जो हमारे वीर सैनिकों के साहस, पराक्रम औरबलिदान को दिखाती है। कार्यक्रम में नड्डा ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि कारगिल विजय दिवस हमारे देश की वीरता और एकताका प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब दुश्मन ने ऊंची पहाड़ियों पर कब्जा करने की कोशिश की, तब हमारी सेना ने कठिन से कठिन हालात में भी हार नहींमानी और दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ हमारे सैनिकों की वीरता की एक विशेष गाथा है, जिसेहर भारतीय को जानना और समझना चाहिए। यह प्रदर्शनी हमारे शहीदों और युद्ध में शामिल जवानों को श्रद्धांजलि देने का एक छोटा प्रयास है। प्रदर्शनी में कारगिल युद्ध से जुड़े फोटो, दस्तावेज, हथियार, सैनिकों की वर्दियाँ और उनके बहादुरी के किस्से दिखाए गए। इसे देखकर लोग भावुक होगए और देशभक्ति की भावना से भर उठे।नड्डा ने यह भी कहा कि हमें अपने सैनिकों पर गर्व है, और देश की सेवा करना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे देश कीसेवा और सुरक्षा के लिए हमेशा तैयार रहें। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, जिनमें पूर्व सैनिक, छात्र, सामाजिक संगठनों के सदस्य औरभाजपा कार्यकर्ता मौजूद थे। सभी ने शहीदों को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके बलिदान को याद किया। इस तरह कारगिल विजय दिवस का यह आयोजन न केवल शहीदों को श्रद्धांजलि देने का अवसर बना, बल्कि देश के नागरिकों में राष्ट्रभक्ति की भावनाको भी और मजबूत

मोदी सरकार का संवैधानिक संकट और न्यायपालिका के सवाल एक गहरी पड़ताल – अभिषेक सिंघवी

देश की राजनीति इन दिनों एक गंभीर संवैधानिक बहस से गुजर रही है। यह बहस केवल किसी एक नेता या दल के बारे में नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्रकी सेहत और भविष्य को लेकर है। हाल ही में उच्च न्यायपालिका के एक न्यायाधीश को लेकर संसद में पेश किए गए प्रस्ताव और उस पर सरकार कीप्रतिक्रिया ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। संवैधानिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ का आरोप21 जुलाई 2025 को कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने राज्यसभा में एक महत्वपूर्ण और संवैधानिक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें न्यायमूर्ति यशवंत वर्माके व्यवहार और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उनके विरुद्ध जांच समिति गठित करने की मांग की गई थी। इस प्रस्ताव पर 63 राज्यसभा सांसदोंके हस्ताक्षर थे, वहीं लोकसभा में इसी प्रकार के प्रस्ताव पर 152 सांसदों के हस्ताक्षर थे। सभापति का बयान और मंत्री की स्वीकृतिउपराष्ट्रपति और राज्यसभा के तत्कालीन सभापति जगदीप धनखड़ जी ने स्वयं सदन में कहा कि उनके पास राज्यसभा के 50 से अधिक सांसदों द्वाराहस्ताक्षरित प्रस्ताव आया है, जिससे स्पष्ट होता है कि यह संख्या नियमों के अनुसार पर्याप्त है। उन्होंने सचिव को यह निर्देश भी दिया कि यह जांचाजाए कि क्या लोकसभा में भी इसी दिन ऐसा ही प्रस्ताव लाया गया है। इस बीच, जब उन्होंने औपचारिक रूप से कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सेयह पूछा कि क्या लोकसभा में यह प्रस्ताव लाया गया है, तो मंत्री ने ‘हां’ में उत्तर दिया। फिर भी क्यों नहीं बनी जांच समिति?अब सवाल यह उठता है कि जब दोनों सदनों में प्रस्ताव लाया गया था, और सभी संवैधानिक औपचारिकताएं पूरी की गई थीं, तो फिर न्यायिक जांचसमिति का गठन क्यों नहीं किया गया? क्या सरकार ने जानबूझकर संवैधानिक प्रक्रिया में कोई खामी छोड़ी ताकि यह मामला अदालत में जाकरखारिज हो सके? संविधान के साथ खिलवाड़ या राजनीतिक चालबाज़ी?इस पूरे मामले में एक बात साफ नजर आती है – सरकार की तरफ से बार-बार भ्रम की स्थिति पैदा की गई। पहले कहा गया कि प्रस्ताव मौजूद है, फिर यह कहा जाने लगा कि प्रस्ताव मान्य नहीं है। इसके बाद उपराष्ट्रपति धनखड़ जी का अचानक इस्तीफा और सरकार की चुप्पी ने लोगों को औरभी संदेह में डाल दिया। कानून मंत्री और सरकार की भूमिका पर सवालअगर लोकसभा में प्रस्ताव नहीं लाया गया था, तो फिर मंत्री मेघवाल ने ‘हां’ क्यों कहा? और अगर प्रस्ताव लाया गया था, तो फिर उसे आगे बढ़ाने मेंदेरी क्यों हुई? इन सवालों से यह आभास होता है कि सरकार इस मुद्दे को लेकर या तो गंभीर नहीं थी या जानबूझकर इसे लटकाना चाहती थी। भाजपा की असुरक्षा और राजनीति का चेहरायह पूरा प्रकरण एक तरफ मोदी सरकार की संवैधानिक प्रक्रिया से दूरी, न्यायपालिका पर दबाव और राजनीतिक असहिष्णुता को उजागर करता है, वहीं दूसरी ओर यह भी दिखाता है कि वर्तमान सरकार किस हद तक राजनीतिक लाभ के लिए संवैधानिक संस्थाओं को भी नजरअंदाज कर सकती है।कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा उठाया गया यह मुद्दा केवल एक न्यायाधीश के आचरण से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह देश के लोकतांत्रिक मूल्यों, न्यायव्यवस्था की स्वतंत्रता और सरकार की जवाबदेही से भी सीधा जुड़ा हुआ है। यह स्पष्ट है कि मोदी सरकार बार-बार संवैधानिक प्रक्रियाओं को अपनी सुविधा अनुसार मोड़ने की कोशिश करती रही है। न्यायपालिका को अपनेनियंत्रण में लेने का यह प्रयास न केवल लोकतंत्र के लिए खतरनाक है, बल्कि आने वाले समय में इससे देश की संस्थाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। यहसमय है जब जनता को सतर्क होकर सरकार से जवाब मांगना चाहिए — ताकि संविधान और न्याय व्यवस्था सुरक्षित रह सके।