मेघालय की बेटी रिफिनीस वारजरी ने रचा इतिहास, एवरेस्ट फतह कर दिखाई उड़ान फिर भी मां की चाय दुकान पर करती हैं काम

सड़क किनारे चाय और नूडल्स परोसने से लेकर सभी सातों महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटियों को फतह करने का सपना, मेघालय की रिफिनीस वारजरीकी कहानी हौसलों की ऊंची उड़ान की कहानी है. 20 साल की पर्वतारोही वारजरी ने हाल ही में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़करकीर्तिमान रच दिया है. इसके साथ ही वारजरी मेघालय की सबसे युवा पर्वतारोही बन गई हैं जो माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर चुकी हैंरिफिनीस अपनी इस उपलब्धि पर गौरवान्वित हैं. लेकिन साथ ही उन्होंने अपने पैरों को जमीन पर ही रखा है. न केवल शारीरिक सहनशक्ति औरमानसिक ताकत, बल्कि उनकी विनम्रता और गर्मजोशी भरे स्वभाव ने भी कई लोगों का दिल जीत लिया है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के साथ बातचीत मेंरिफिनीस ने उम्मीद जताई कि उनकी यात्रा कई लोगों को प्रेरित करेगी. साधारण परिवार से रखती है ताल्लुकखासकर उन महिलाओं को जो छोटे शहरों या पिछड़े परिवारों से आती हैं और बड़े सपनों का पीछा कर रही हैं रिफिनीस का जन्म मेघालय के ईस्टखासी हिल्स जिले के नॉन्गथिमाई इलाके में हुआ था. लेकिन अब रिफिनीस और उनका परिवार शिलॉन्ग के बाहरी इलाके में रहता है. रिफिनीस एकसाधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं और उनकी मां सड़क किनारे चाय और नूडल्स की दुकान चलाती हैं वहीं उनके पिता चिकन बेचते हैं. माउंटएवरेस्ट नापने के बाद रिफिनीस को कई सम्मान और पहचान मिल चुकी है. लेकिन अभी भी रिफिनीस ने अपने आप को विनम्र बनाए रखा है और वेअभी भी अपनी मां की दुकान पर काम करती हैं. जहां वे टेबल साफ करने से लेकर लोगों को चाय परोसने जैसे काम करती हैं रिफिनीस ने कहा कि’पहाड़ हमें विनम्र रहना सिखाते हैं. जब मैं माउंट एवरेस्ट पर खड़ी थी तो मुझे अहसास हुआ कि हम कितने छोटे और महत्वहीन हैं ये एक सबक है जिसेमैं साथ लेकर आई हूं और इसे सभी के साथ साझा कर रही हूं. रिफिनीस की सफलता पर उसके परिजन भी बेहद खुश और गौरवान्वित हैं उन्होंने उम्मीदजताई की रिफिनीस को कोई सरकारी नौकरी मिल जाए ताकि वह अपने परिवार की मदद कर सके. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि वे नहीं चाहते किरिफिनीस अब सपने देखना बंद कर दे. बहन ने जताई खुशीरिफिनीस की बहन उसकी सफलता से बेहद खुश है. वंचित परिवारों के बच्चों के लिए अपने संदेश में रिफिनीस ने कहा कि ‘आपकी पृष्ठभूमि आपकीमहत्वाकांक्षा को कभी सीमित नहीं करनी चाहिए. खुद पर विश्वास रखें और आगे बढ़ते रहें. रिफिनीस की सफलता पर मेघालय के सीएम कोनराडसंगमा ने उन्हें सम्मानित किया. साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी बधाई दी और रिफिनीस को भारत की युवा पीढ़ी के जुझारूपन का उदाहरणबताया। कई सरकारी विभाग भी रिफिनीस को सम्मानित कर चुके हैं. रिफिनीस का जन्म ईस्ट खासी हिल्स जिले के नॉन्गथिमाई गाँव में हुआ। वर्तमानमें उनका परिवार शिलॉन्ग के बाहरी इलाके में रहता है उनकी मां सड़क किनारे चाय और नूडल्स की दुकान चलाती हैं. जबकि उनके पिता चिकनविक्रेता हैं बचपन से ही कठिनाइयों के बीच पली-बढ़ीं रिफिनीस ने कभी हार नहीं मानी. रिफिनीस की बहन और परिजन बेहद खुश हैं। परिवार चाहताहै कि उन्हें सरकारी नौकरी मिले, जिससे वह अपने माता-पिता की मदद कर सकें. लेकिन वे यह भी नहीं चाहते कि रिफिनीस अपने सपनों का पीछाकरना छोड़ दे.
कर्नाटक सरकार ने रोका एयरोस्पेस पार्क के लिए भूमि अधिग्रहण, नारा लोकेश ने दिया आंध्र प्रदेश में निवेश का न्योता

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एयरोस्पेस पार्क के लिए बंगलूरू के नजदीक देवनहल्ली इलाके में भूमि अधिग्रहण का काम रोक दिया है. दरअसलकिसान और सामाजिक संगठन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ कई महीनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. अब इसे लेकर आंध्र प्रदेश सरकार के मंत्री औरसीएम चंद्रबाबू नायडू के बेटे नारा लोकेश ने तीखा तंज कसा है और एयरोस्पेस उद्योग से अपील की है कि वे आंध्र प्रदेश में निवेश करें. जैसे हीकर्नाटक सरकार ने भूमि अधिग्रहण रोकने का आदेश जारी किया. वैसे ही आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करएयरोस्पेस उद्योग से जुड़े लोगों को आंध्र प्रदेश में निवेश करने की पेशकश कर दी, नारा लोकेश ने लिखा कि ‘प्रिय एयरोस्पेस उद्योग, इसके बारे मेंसुनकर दुख हुआ. आपके लिए है बेहतर उपायलेकिन मेरे पास आपके लिए एक बेहतर उपाय है. आप आंध्र प्रदेश में निवेश क्यों नहीं करते? हमारी एयरोस्पेस नीति काफी लुभावनी है और हमबेहतर इनसेंटिव दे सकते हैं. साथ ही हमारे पास 8000 एकड़ तैयार जमीन है वो भी बंगलूरू के बिल्कुल बाहर। मुझे उम्मीद है कि आप जल्द हीबातचीत की मेज पर दिखेंगे. ‘गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार ने किसानों और अन्य संगठनों के 1200 दिन चले भारी विरोध प्रदर्शन के बाद बंगलूरूके नजदीक देवनहल्ली तालुक में 1777 एकड़ जमीन के अधिग्रहण का फैसला वापस ले लिया. सीएम सिद्धारमैया ने मंगलवार को इसका एलानकिया और कहा कि सरकार ने पीछे हटने का फैसला किया है. लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि अगर किसान भूमि अधिग्रहण के लिए सहमति जताते हैं तोसरकार उनसे सही दाम पर जमीन खरीदने के लिए तैयार है। सीएम ने कहा कि ‘यह जमीन बंगलूरू के पास है. जहां अच्छी खेती होती है और यह कईकिसानों की आजीविका का साधन है. इसलिए हमने अधिग्रहण रद्द करने का फैसला किया है. चूंकि यह जमीन हवाई अड्डे के पास हरित पट्टी में है. इसलिए किसानों ने सरकार से इसे अधिग्रहित न करने का आग्रह किया था और इस योजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किए थे. छूट दी जा रही है जमीन के लिएहालांकि सीएम ने साफ किया कि यह छूट सिर्फ इस जमीन के लिए दी जा रही है और कहीं और ये छूट नहीं मिलेगी. कर्नाटक सरकार ने किसानों औरअन्य संगठनों के 1200 दिन चले भारी विरोध प्रदर्शन के बाद बंगलूरू के नजदीक देवनहल्ली तालुक में 1777 एकड़ जमीन के अधिग्रहण का फैसलावापस ले लिया. जैसे ही कर्नाटक सरकार ने भूमि अधिग्रहण रोकने की घोषणा की. वैसे ही आंध्र प्रदेश के मंत्री और मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के बेटेनारा लोकेश ने इसे लेकर एक राजनीतिक और व्यावसायिक तंज कस दिया. कर्नाटक सरकार का यह फैसला जहां किसान हितों की जीत के रूप मेंदेखा जा रहा है. वहीं आंध्र प्रदेश इसे औद्योगिक अवसर के रूप में भुनाना चाहता है. इससे यह साफ संकेत मिलता है कि राज्यों के बीच औद्योगिकनिवेश आकर्षित करने की होड़ और भी तेज़ हो सकती है. कर्नाटक में भूमि अधिग्रहण रोकने का फैसला सामाजिक दृष्टि से सराहनीय है. लेकिन इससेऔद्योगिक नीति और प्रतिस्पर्धा में एक नया अध्याय जुड़ गया है. अब देखना होगा कि क्या एयरोस्पेस सेक्टर आंध्र प्रदेश की पेशकश को स्वीकारकरता है या कर्नाटक कोई नई रणनीति अपनाता है.
भाषा विवाद के बीच चंद्रबाबू नायडू की नसीहत, पीवी नरसिम्हा राव ने 17 भाषाएं थी सीखी “वो थे एक बहुभाषाविद नेता”

भाषा विवाद के बीच आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार को कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव हिंदी समेत 17 भाषाएंजानते थे.’पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव का जीवन और विरासत’ विषय पर व्याख्यान देते हुए मुख्यमंत्री नायडू ने उन्हें एक महान राजनेता औरदूरदर्शी व्यक्ति के रूप में याद किया. उन्होंने कहा कि पूरे तेलुगु समुदाय को उन पर गर्व है. नायडू ने कहा कि उनके और नरसिम्हा राव के बीच बहुतअच्छे संबंध थे. राव का जिक्र करते हुए नायडू ने कहा, ‘वह एक छात्र नेता, एक स्वतंत्रता सेनानी और 17 भाषाओं में पारंगत विद्वान थे. उन्होंने कहा, ‘अब हम सब सोच रहे हैं कि आपको हिंदी क्यों सीखनी चाहिए? उन्होंने न केवल हिंदी सीखी, बल्कि 17 भाषाएं भी सीखीं. इस तरह वह एक महानव्यक्ति बन गए. कर्नाटक जैसे राज्यों में विरोधआंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की साथी पार्टी के मुखिया की यह टिप्पणी भाषा विवाद के बीच आई है. राष्ट्रीय शिक्षा नीतिके तहत त्रि-भाषा फॉर्मूले का तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में विरोध हुआ है. महाराष्ट्र में तो भाजपा नीत सरकार को हिंदी को तीसरीभाषा बनाने का फैसला वापस तक लेना पड़ा था. दक्षिणी राज्यों के कई नेताओं ने भी केंद्र पर ‘हिंदी थोपने’ का आरोप लगाया है. आंध्र प्रदेश केमुख्यमंत्री की यह टिप्पणी भाषा विवाद के बीच आई है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत त्रि-भाषा फॉर्मूले का तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्योंमें विरोध हुआ है. मुख्यमंत्री नायडू ने अमरावती में ‘पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव का जीवन और विरासत’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में बोलतेहुए कहा कि राव का जीवन यह साबित करता है कि भाषा सीखना विभाजन का कारण नहीं, बल्कि समावेश और विकास का माध्यम है. केंद्र सरकार पर हिंदी थोपने का आरोपयह बयान ऐसे समय आया है जब कई दक्षिणी राज्य, विशेष रूप से तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र, केंद्र सरकार पर “हिंदी थोपने” का आरोप लगाचुके हैं. भले ही तेलुगु देशम पार्टी (TDP) केंद्र में एनडीए की सहयोगी है लेकिन चंद्रबाबू नायडू ने इस मुद्दे पर सीधा टकराव नहीं, बल्कि इतिहास सेउदाहरण पेश करते हुए एक विचारोत्तेजक सन्देश दिया. उन्होंने कहा कि भारत में भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं बल्कि सांस्कृतिक पहचानऔर राजनीतिक विमर्श का भी मुद्दा बन चुकी है। इस बीच चंद्रबाबू नायडू की नरसिम्हा राव को श्रद्धांजलि और उनकी बहुभाषिकता का उल्लेख एकसुलझे हुए दृष्टिकोण का परिचायक है जहाँ भाषाएं सीखना विवाद नहीं संवाद का माध्यम बन सकती हैं. यह बयान ऐसे समय आया है जब राष्ट्रीयशिक्षा नीति (NEP) में प्रस्तावित त्रि-भाषा फॉर्मूले को लेकर दक्षिणी राज्यों समेत कई हिस्सों में तीखा विरोध हो रहा है. नायडू की यह टिप्पणी इसमुद्दे को लेकर एक संतुलित और प्रेरणात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है.
ISS मिशन में भारतीय वैज्ञानिक शुभांशु शुक्ला की बड़ी उपलब्धि, माइक्रो ग्रैविटी में किए 7 अनोखे प्रयोग

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर अपने मिशन के दौरान भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने जो वैज्ञानिक प्रयोग किए. वे न केवलभारत के लिए बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष अनुसंधान समुदाय के लिए भी नई दिशा के संकेत हैं. शुभांशु ने आईएसएस में माइक्रो ग्रैविटी पर भारत के नेतृत्ववाले सात प्रयोग किए. इनमें मूंग और मेथी के बीज का अंकुरण (रविकुमार होसमणि और सुधीर सिद्धापुरेडी के नेतृत्व में), साइनोबैक्टीरिया और सूक्ष्मशैवाल पर शोध और स्टेम सेल अनुसंधान शामिल थे. नासा के अनुसार, अंतरिक्ष में मानव शरीर की प्रतिक्रियाएं कोशिकाओं की जैविक क्रिया औरस्वचालित स्वास्थ्य निगरानी जैसे क्षेत्रों से जुड़े प्रयोग किए गए थे. ये प्रयोग भविष्य में चंद्रमा, मंगल और लंबे स्पेस अभियानों के लिए नींव तैयार करसकते हैं. इन प्रमुख प्रयोगों में शुभांशु की अग्रणी भूमिका रही शुभांशु ने एक्सिओम की मुख्य वैज्ञानिक लुसी लो के साथ बातचीत में इसरो के सहयोगसे हुए शोध पर गर्व व्यक्त किया. उन्होंने छात्रों और स्टेम समुदायों के साथ भी बातचीत की. मजाक में खुद को कहा वाटर बेंडरशुभांशु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इसरो केंद्रों से शौकिया रेडियो के माध्यम से भी जुड़े. उन्होंने पानी के साथ एक शून्य-गुरुत्वाकर्षण प्रदर्शन भी किया. जिसमें एक तैरता हुआ पानी का बुलबुला बनाया और मजाक में खुद को वाटर बेंडर कहा. स्टेम सेल डिफरेंशिएशन इन माइक्रो ग्रेविटी प्रयोग केअंतर्गत शुभांशु ने अंतरिक्ष में मानव स्टेम सेल को विशिष्ट ऊतकों जैसे हृदय और मस्तिष्क कोशिकाओं में बदलने की प्रक्रिया का अध्ययन किया. माइक्रो ग्रेविटी में जैविक विभेदन की इस क्षमता का उपयोग भविष्य में कैंसर और न्यूरो संबंधी रोगों के इलाज में हो सकता है. शुभांशु ने बताया था किअंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं होने से मांसपेशियों का क्षरण होता है. हमारा प्रयोग है कि क्या कोई सप्लीमेंट देकर इसे रोका जा सकता है। इसकाफायदा पृथ्वी पर रहने वाले उन लोगों को भी होगा, जिनमें उम्र बढ़ने की वजह से मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं. आईएसएस पर विशुद्ध प्रोटीनअणुओं को क्रिस्टल के रूप में जमाकर यह परीक्षण किया गया कि उनकी संरचना अंतरिक्ष में कैसे अधिक स्थिर होती है. यह दवाओं के विकास वसटीक फार्मास्युटिकल डिजाइन के क्षेत्र में बड़ी छलांग माना जा रहा है. यह विशेष रूप से भारत प्रायोजित प्रयोग था जिसमें भारतीय मूल के आंतों केजीवाणु (माइक्रोबायोम) को माइक्रो ग्रैविटी में रखकर यह देखा गया कि उनकी प्रतिरक्षा क्षमता और संरचना पर क्या असर होता है. संकेतो को करता है रियल टाइम को रिकॅार्डमिशन के दौरान शुभांशु ने एक ऑटोमेटेड मेडिकल स्कैनिंग सिस्टम का प्रयोग किया जो धड़कन, तापमान, और रक्तचाप जैसे संकेतों को रियल टाइममें रिकॉर्ड करता था. यह अंतरिक्ष में डॉक्टर की अनुपस्थिति में स्वास्थ्य प्रबंधन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है. स्पेस हाइड्रोपोनिक्स पर आधारितइस प्रयोग में शुभांशु ने आईएसएस के ‘वेजी लैब’ में पौधों की वृद्धि और प्रकाश संश्लेषण की दर की निगरानी की। इसका लक्ष्य भविष्य में स्पेसफार्मिंग और मंगल कृषि की व्यावहारिकता को परखना था. शुभांशु के साथ अमेरिका के पेगी वेटसन ने हड्डियों के घनत्व पर गुरुत्वहीनता के प्रभाव परविश्लेषण किया. पोलैंड के स्लावोस उजनास्की ने अंतरिक्ष विकिरण से कोशिका क्षति और डीएनए रिपेयर मॉड्यूल पर शोध किया। हंगरी के तिबोरकपू ने हार्ट रेट वेरिएबिलिटी व ऑक्सीजन के पैटर्न का अध्ययन किया. जो हृदय व रक्तवाहिकाओं के स्वास्थ्य के लिए बेहद उपयोगी साबित हुआ. अंतरिक्ष में ईईजी कैप और ब्रेनवेव रिकॉर्डिंग सिस्टम का उपयोग कर शुभांशु और उनके साथियों ने मस्तिष्क की तरंगों और नींद चक्र पर पड़ने वालेप्रभावों का विश्लेषण किया. यह अध्ययन दीर्घकालिक अंतरिक्ष यात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य मॉडल के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है.
राज ठाकरे ने मनसे कार्यकर्ताओं से बोले, शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के साथ गठबंधन का फैसला सही होगा सही समय पर “राजनीतिक समीकरण शिवसेना-मनसे एक साथ?

महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की गठबंधन की अटकलें तेज है. ऐसे में मनसे के अध्यक्ष राज ठाकरे ने मंगलवारको पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वह शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के साथ गठबंधन पर फैसला उचित समय पर लेंगे. बता दें कि राज ठाकरे नेये बात नासिक जिले के इगतपुरी में 14 से 16 जुलाई तक चल रही मनसे पार्टी की तीन दिवसीय सम्मेलन में कही। पार्टी के इस बैठक में भविष्य कीरणनीति, आगामी स्थानीय निकाय चुनाव और संगठन को मजबूत करने पर चर्चा हो रही है. बता दें कि हाल ही में पांच जुलाई को राज ठाकरे औरउनके चचेरे भाई उद्धव ठाकरे एक राजनीतिक मंच पर साथ नजर आए थे. यह मौका था भाजपा सरकार द्वारा स्कूलों में पहली कक्षा से हिंदी भाषाअनिवार्य करने के आदेश को वापस लेने का जश्न मनाने का. इस मंच साझा करने के बाद से अटकलें तेज हो गई हैं कि दोनों दलों के बीच पुरानीदूरियां अब खत्म हो सकती हैं. शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने भी गठबंधन को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं. उन्होंने कहा कि राज ठाकरे औरउद्धव ठाकरे दोनों के बयान सकारात्मक हैं. पार्टी कार्यकर्ताओं को भी गठबंधन की उम्मीद है. राजनीतिक हल्कों में चर्चा गर्मउद्धव गुट के साथ गठबंधन को लेकर राज ठाकरे के रुख पर मनसे पार्टी के पदाधिकारी ने जानकारी दी. उन्होंने बताया कि राज ठाकरे ने कार्यकर्ताओं सेकहा कि शिवसेना (यूबीटी) के साथ गठबंधन को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. वे सही समय पर इस पर फैसला लेंगे।गौरतलब हैकि मुंबई नगर निगम चुनावों से पहले शिवसेना (यूबीटी) और एमएनएस के बीच संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा गर्म है. हालांकि राज ठाकरे ने अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है लेकिन उनके हाल के कदम और मुलाकातें इस ओर इशारा कर रही हैं कि भविष्य मेंमहाराष्ट्र की राजनीति में कुछ नया देखने को मिल सकता है. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने मंगलवार को पार्टी कार्यकर्ताओं सेकहा कि शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के साथ संभावित गठबंधन पर वह सही समय पर फैसला लेंगे. यह बयान पार्टी के नासिक जिले के इगतपुरी मेंचल रहे तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान आया. हालांकि उद्धव ठाकरे गठबंधन के पक्ष में संकेत दे चुके हैं. लेकिन राज ठाकरे ने अभी तक स्पष्ट रुखनहीं अपनाया है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ दिनों में राज ठाकरे और उनके चचेरे भाई उद्धव ठाकरे कई राजनीतिक मंचों पर एकसाथ नजर आए हैं. चुनावी रणनीति कर सकती है तैयारखासतौर पर 5 जुलाई को दोनों नेताओं की साझा उपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में इस संभावना को और बल दिया है कि दोनों पार्टियां पुरानी दूरियांभुलाकर मिलकर चुनावी रणनीति तैयार कर सकती हैं. 14 से 16 जुलाई तक चल रहे मनसे के इस तीन दिवसीय सम्मेलन में आगामी स्थानीय निकायचुनाव की रणनीति, संगठन को मजबूत करने के कदम और भविष्य की राजनीतिक दिशा पर विस्तार से चर्चा की गई. राज ठाकरे ने कार्यकर्ताओं कोस्पष्ट किया कि अभी गठबंधन पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. लेकिन वे पूरी गंभीरता से इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं और सही समय परइसका फैसला पार्टी के सामने रखेंगे. राज ठाकरे के इस बयान से साफ है कि मनसे शिवसेना (उद्धव गुट) के साथ गठबंधन को पूरी गंभीरता से देख रहीहै लेकिन फिलहाल अंतिम निर्णय वक्त आने पर ही लिया जाएगा. आगामी महीनों में महाराष्ट्र की राजनीतिक पटल पर इस गठबंधन से जुड़े नएघटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं. जो राज्य के चुनावी समीकरणों को बदल सकते हैं.
कांग्रेस मानसून सत्र में करेगी बड़ा हमला, पहलगाम हमला, ऑपरेशन सिंदूर, एसआईआर और जम्मूकश्मीर का मुद्दा रहेगा प्रमुख एजेंडा

कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने मंगलवार की सुबह की बैठक में तय किया कि वे आगामी मानसून सत्र (21 जुलाई से शुरू) में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चाकरेंगे. इनमें पहलगाम आतंकी हमला, बिहार में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने, महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, देश की सुरक्षा और अहमदाबाद में एअर इंडिया का विमान हादसा शामिल हैं. कांग्रेस संसदीय दल की बैठक सोनिया गांधी की अध्यक्षता में 10 जनपथ निवास पर हुई। इसमें पार्टी के नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रमोदतिवारी, जयराम रमेश, के सुरेश और मणिकम टैगोर जैसे नेता शामिल हुए. बैठक के बाद प्रमोद तिवारी ने बताया कि पहलगाम हमले में 26 लोग मारेगए और पार्टी प्रधानमंत्री से इस मामले पर जवाब मांगेगी. उन्होंने कहा कि हमला सुरक्षा की कमी और त्वरित प्रतिक्रिया टीम न होने की वजह से संभवहुआ. सरकार से जवाब मांगने का लिया फैसलाकांग्रेस यह सवाल उठाएगी कि जब हमारी सेना ने पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया (जिसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ कहा गया), तो उसीसमय अचानक भारत और पाकिस्तान के संघर्षविराम क्यों हुआ? बिहार एसआईआर को प्रमोद तिवारी ने लोकतंत्र के लिए खतरा बताया और कहा किइस पर चर्चा जरूर होगी. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने का मुद्दा भी उठाएंगे. महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा, बेरोज़गारी, महंगाई और अमेरिकी टैरिफ जैसे मुद्दे भी सत्र में शामिल होंगे. अमेरिका में जज यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग नोटिस पर भी कांग्रेसअन्य पार्टियों से बात करके सत्र में स्थिति स्पष्ट करेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि गैर‑भाजपा शासित राज्यों के साथ बराबरी का व्यवहार नहीं हो रहा हैऔर यह मुद्दा भी संसद में उठाया जाएगा. संसद का मानसून सत्र इस बार 21 जुलाई से शुरू होकर 21 अगस्त तक चलेगा। कांग्रेस एसआईआर कोअसांविधानिक बताकर इसे रद्द कराने की मांग करेगी और पहलगाम हमला तथा ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में बहस छेड़ेगी. कांग्रेस ने संसद के मानसूनसत्र में पहलगाम आतंकी हमले, ऑपरेशन सिंदूर के बाद अचानक हुए संघर्षविराम और बिहार में जारी एसआईआर जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाबमांगने का फैसला लिया है. आर्थिक नीतियों से जुड़े मुद्दों पर तीखी बहसपार्टी जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने, महिलाओं पर अत्याचार, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और अमेरिकी टैरिफ जैसे मामलों को भीमानसून सत्र में उठाएगी. बैठक में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, जयराम रमेश, प्रमोद तिवारी, मणिकम टैगोर और के. सुरेश जैसे वरिष्ठ नेताशामिल हुए. कांग्रेस संसदीय दल की इस अहम बैठक में यह फैसला हुआ कि पार्टी संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रीय सुरक्षा, लोकतंत्र, सामाजिक न्यायऔर आर्थिक नीतियों से जुड़े मुद्दों पर तीखी बहस छेड़ेगी. प्रमोद तिवारी ने बताया कि पार्टी इस हमले में मारे गए 26 नागरिकों की मौत के लिए सुरक्षामें चूक और त्वरित प्रतिक्रिया टीम (QRT) की कमी को जिम्मेदार ठहराएगी। साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि जब भारत ने पाकिस्तान पर ‘ऑपरेशनसिंदूर’ के तहत जवाबी कार्रवाई की उसी समय संघर्षविराम क्यों और कैसे हुआ? कांग्रेस ने इसे संविधान विरोधी और लोकतंत्र के लिए खतरनाककरार दिया है. पार्टी की मांग है कि इस प्रक्रिया को अविलंब रद्द किया जाए.
भारत ने 2030 से पहले ही हासिल किया हरित ऊर्जा लक्ष्य, 50% बिजली गैर-जीवाश्म स्रोतों से “PM मोदी ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देश की एक बड़ी पर्यावरणीय उपलब्धि का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि भारत ने 2030 के लक्ष्य से 5 सालपहले ही 50% बिजली क्षमता गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से हासिल कर ली है. यह भारत की हरित (ग्रीन) और टिकाऊ भविष्य की दिशा में मजबूतप्रतिबद्धता को दर्शाता है. प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह उपलब्धि भारत की प्रतिबद्धता और प्रयासों को दर्शातीहै जो हम एक हरे और टिकाऊ भविष्य की दिशा में कर रहे हैं. मामले में केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोमवार कोजानकारी दी थी कि भारत ने अब तक कुल 484.8 गीगावॉट (जीडब्ल्यू) बिजली उत्पादन क्षमता हासिल की है, जिसमें से 242.8 गीगावॉट (यानी50%) बिजली गैर-जीवाश्म ईंधन जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा से आ रही है. बता दें कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों परयह वादा किया था कि वह 2030 तक अपनी बिजली क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म ईंधनों से हासिल करेगा. भविष्य के लिए मजबूत प्रतिबद्धतालेकिन अब यह लक्ष्य 2025 में ही पूरा हो गया. जो पूरी दुनिया के लिए एक प्रेरणा है. गौरतलब है कि भारत सरकार बिजली क्षमता गैर-जीवाश्मईंधन स्रोतों से हासिल करने के लिए ढेरो कोशिशों पर जोर दे रही है. इसके लिए राष्ट्रीय सौर मिशन, पवन ऊर्जा परियोजनाएं, हाइड्रो और न्यूक्लियरपावर प्रोजेक्ट्स, और हरित हाइड्रोजन मिशन जैसे कई कदम सरकार लगातार उठा रही है. ऐसे में भारत सरकार की यह उपलब्धि दिखाती है कि भारतन सिर्फ अपने पर्यावरणीय वादों को निभा रहा है. बल्कि दुनिया के सामने एक उदाहरण भी पेश कर रहा है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एकसाथ कैसे किया जा सकता है. भारत ने 2030 के लक्ष्य से 5 साल पहले ही अपनी कुल बिजली उत्पादन क्षमता का 50% हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधनोंसे हासिल कर लिया है. प्रधानमंत्री मोदी ने इसे देश की हरित और टिकाऊ भविष्य के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता बताया. पर्यावरण संरक्षण एक साथ है संभवकेंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के अनुसार, कुल 484.8 गीगावॉट बिजली क्षमता में से 242.8 गीगावॉट अब सौर, पवन, जल और परमाणु ऊर्जा जैसेस्वच्छ स्रोतों से आती है. “यह मील का पत्थर हमारे हरित और टिकाऊ भविष्य की दिशा में किए गए प्रयासों और प्रतिबद्धता को दर्शाता है. भारत नेयह साबित कर दिया है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक साथ संभव है. केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी नेसोमवार को जानकारी दी कि भारत की वर्तमान कुल बिजली उत्पादन क्षमता 484.8 गीगावॉट (GW) है, जिसमें से 242.8 गीगावॉट, यानी 50%, अब सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा जैसे गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त की जा रही है. भारत ने COP21 पेरिस समझौते औरग्लासगो सम्मेलन में वादा किया था कि वह 2030 तक अपनी बिजली उत्पादन क्षमता का 50% हिस्सा स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों से प्राप्तकरेगा. यह लक्ष्य 2025 में ही हासिल कर लिया गया — जो न सिर्फ भारत के लिए, बल्कि दुनिया के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण है.
बिहार की शिक्षा व्यवस्था का हाल लॉटरी से प्रिंसिपल की नियुक्ति और छात्रों का उजड़ता भविष्य – कन्हैया कुमार

बिहार से हाल ही में एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहां कॉलेजों में प्रिंसिपल यानी प्रधानाचार्य की नियुक्ति लॉटरी के जरिए की गई। जीहां, आप सही पढ़ रहे हैं – पढ़ाई और शिक्षा जैसे गंभीर विषय में भी अब लॉटरी निकाली जा रही है। इतना ही नहीं, इस लॉटरी के बाद महिलाकॉलेजों में भी पुरुष प्रिंसिपल नियुक्त कर दिए गए। इस पूरे मामले पर जब लोगों ने सवाल उठाए, तो विश्वविद्यालय के कुलपति यानी वाइसचांसलर सफाई देने सामने आए। उन्होंने कहा कि शहर के कॉलेजों में प्रधानाचार्य बनने के लिए बड़े-बड़े लोगों की सिफारिश आती है, इसलिए उन्होंनेलॉटरी निकाली ताकि कोई पक्षपात न हो। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं है जिसमें लिखा हो कि महिला कॉलेज काप्रधानाचार्य पुरुष नहीं हो सकता। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ नियम में न होने से सब जायज हो जाता है? क्या महिला कॉलेज में लड़कियोंकी भावनाएं, सुरक्षा और सुविधा कोई मायने नहीं रखतीं? क्या यही सोचकर लड़कियों को पढ़ने भेजा जाता है कि कोई भी प्रिंसिपल बन जाएगा, चाहेउसकी समझ हो या नहीं? बिहार की शिक्षा व्यवस्था की सच्चाईबिहार में शिक्षा व्यवस्था का जो हाल है, उस पर एक पुरानी कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है –अंधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी, टके सेर खाजा।यानी, यहां जो जैसा चाहे, वैसा कर सकता है। कोई नियम, कोई व्यवस्था नहीं। आज बिहार में जो कॉलेज और विश्वविद्यालय चल रहे हैं, वे दिखने मेंतो ‘उच्च शिक्षा’ के केंद्र हैं, लेकिन असलियत में वहां पढ़ाई नाम की कोई चीज़ नहीं होती। छात्रों का भविष्य अंधेरे में है। कॉलेजों की असली तस्वीरचार कमरे वाले कॉलेज में हजारों छात्रों का नामांकन हो जाता है।, पढ़ाई के लिए जरूरी चीजें – जैसे किताबें, लाइब्रेरी, लैब कुछ भी नहीं होता।, कक्षाएं नियमित नहीं होतीं, कई बार महीनों तक क्लास नहीं लगती।, परीक्षा समय पर नहीं होती, सेशन सालों तक खिंचते हैं।कॉलेजों की इमारतें खस्ताहाल हैं, बैठने तक की जगह नहीं होती।छात्रों को सारी व्यवस्था खुद करनी पड़ती है – किताब खरीदनी, नोट्स ढूंढने, और प्रैक्टिकल खुद से करना।छात्र लाखों रुपये खर्च कर पढ़ाई के लिए आते हैं, लेकिन न उन्हें पढ़ाया जाता है, न समझाया जाता है, न किसी शिक्षक से सही मार्गदर्शन मिलता है। डिग्री के लिए भी रिश्वतइतना ही नहीं, जब छात्र पढ़ाई पूरी कर डिग्री लेने जाते हैं, तो उनसे ‘मिठाई’ के नाम पर रिश्वत मांगी जाती है। यानी, पढ़ाई के बाद भी डिग्री लेने केलिए जेब ढीली करनी पड़ती है। यह सब बताता है कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के जाल में फंसी हुई है। लॉटरी से प्रिंसिपल बनाना – क्या मजाक है?शिक्षा जैसे गंभीर क्षेत्र में लॉटरी से नियुक्ति करना, एक मजाक से कम नहीं है। यह दिखाता है कि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों केभविष्य की कोई चिंता नहीं है। असल में यह सिर्फ लॉटरी नहीं हैयह उस पूरी व्यवस्था की पोल खोलता है, जिसमें सिफारिश, घूस और पहुँच के आधार पर नियुक्तियाँ होती हैं। वाइस चांसलर भी वही बनते हैंजिनकी सरकार में पहुँच हो। ये लोग फिर कॉलेज को कमाई का जरिया बनाते हैं छात्रों से पैसा वसूलो, कमीशन ऊपर तक पहुंचाओ। क्या यही है विकास?आज जब प्रधानमंत्री बिहार आते हैं, तो कहते हैं कि बिहार विकास के रास्ते पर बढ़ रहा है। लेकिन सवाल यह है कि अगर यही विकास है, तो विनाशकिसे कहेंगे?जहां छात्रों को पढ़ाई न मिले, जहां शिक्षकों की नियुक्ति लॉटरी से हो,जहां छात्रों से रिश्वत ली जाए, जहां कॉलेज सिर्फ नाम के हों तो यह कैसा विकास है?कन्हैया कुमार की अपील जागो, सोचो और बदलाव लाओ कन्हैया कुमार, जो खुद भी बिहार से हैं और छात्रों की आवाज़ रहे हैं, साफ कहते हैं जिससरकार को आपकी चिंता नहीं, उसकी कुर्सी छीन लो। चुनाव हर 5 साल में इसलिए होते हैं ताकि जनता अपना नेता चुन सके। अगर कोई सरकारआपके बच्चों को शिक्षा न दे, आपके भविष्य की परवाह न करे, तो उसे बदलना ही होगा। बिहार में अपराध भी बढ़ रहा हैशिक्षा के साथ-साथ कानून व्यवस्था भी बदहाल है। हर दिन बिहार के किसी न किसी शहर में गोली चलती है। अपराधी खुलेआम घूमते हैं। पुलिसकुछ नहीं कर पाती। और सरकार के मंत्री कहते हैं – संगठित अपराध खत्म हो गया है असलियत यह है कि डबल इंजन सरकार की दिशा ही अलग-अलग है – एक इंजन दिखावे की बात करता है, दूसरा इंजन जनता को कुचलने का काम करता है। अब समय है बदलाव काबिहार के युवाओं से अपील है कि अब चुप बैठने का समय नहीं है।पढ़ाई चाहिए, रोजगार चाहिए, सुरक्षा चाहिए और सबसे ज़रूरी सम्मान चाहिएजो सरकार आपकी बात न सुने, उसे आप भी मत सुनो। अब समय है आवाज़ उठाने का, अब समय है व्यवस्था को बदलने का। अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चे बेहतर पढ़ें, नौकरी करें, जीवन में आगे बढ़ें – तो ऐसी व्यवस्था को बदलना होगा, जो उन्हें केवल अंधकार मेंधकेल रही है।बिहार के भविष्य की लड़ाई अब हर घर से लड़ी जाएगी। अब शिक्षा, रोजगार और न्याय के लिए आवाज़ उठेगी – मजबूती से, ईमानदारी से और पूरी ताकत से।
चीन से दोस्ती, देश की सुरक्षा से खिलवाड़ – सुप्रिया श्रीनेत ने मोदी सरकार से पूछे बड़े सवाल

आज पहलगाम आतंकी हमले को 85 दिन हो चुके हैं। इस हमले में 28 लोगों की जान गई, लेकिन अब तक एक भी आतंकवादी की गिरफ्तारी नहींहुई, और न ही किसी की पहचान सामने आई है। इस गंभीर स्थिति पर अब देश की जनता और विपक्षी नेता सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रियाश्रीनेत ने सरकार से कुछ सीधे और सख्त सवाल किए हैं। सेना ने खुद बताया चीन भी शामिल थादेश की सेना के उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने खुद कहा है हम पाकिस्तान से नहीं, बल्कि पाकिस्तान और चीन दोनों से लड़ रहेथे। चीन ने पाकिस्तान को मदद दी, जानकारी दी और हथियार भी दिए। इसका मतलब है कि जब हमारे जवान ऑपरेशन सिन्दूर चला रहे थे, तब चीनभी पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के खिलाफ काम कर रहा था। फिर विदेश मंत्री चीन क्यों गए?अब चौंकाने वाली बात ये है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर हाल ही में चीन की यात्रा पर गए और वहां राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। उन्होंनेचीन से रिश्तों को सुधारने की बात भी कही। सवाल है जब चीन हमारे दुश्मनों को मदद कर रहा है, तब हम उसके साथ दोस्ती क्यों दिखा रहे हैं? राहुल गांधी पहले ही चेतावनी दे चुके थेराहुल गांधी ने बहुत पहले संसद और जनता के बीच ये बात कही थी कि अगर चीन और पाकिस्तान साथ आए, तो भारत के लिए यह बहुत खतरनाकहोगा। आज वही हो रहा है। लेकिन सरकार ने उनकी बात को हल्के में लिया। ज्योति मल्होत्रा का मामला – क्या यह सिर्फ संयोग है?ज्योति मल्होत्रा नाम की महिला को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।यह महिला खुद को हरियाणा बीजेपी की सदस्य बताती थी।यह पाकिस्तान गई थी और वहां के खुफिया एजेंटों से मिली थी।ज्योति बीजेपी के कई कार्यक्रमों में शामिल हुई थी, जैसे कि वंदे भारत ट्रेन के उद्घाटन में।इसके पाकिस्तान हाई कमीशन में कार्यरत एक अधिकारी दानिश से गहरे संबंध थे।कहा जा रहा है कि जब ऑपरेशन सिन्दूर चल रहा था, तब भी वो पाकिस्तान के संपर्क में थी। क्या बीजेपी को यह नहीं पता था कि वह महिला कौनहै?क्यों उसे इतने बड़े सरकारी मंचों पर बुलाया गया?क्या इसके पीछे किसी का संरक्षण था? ऐसे कई मामले पहले भी आए हैं सामनेसुप्रिया श्रीनेत ने बताया कि ये पहली बार नहीं है जब ऐसे लोग बीजेपी से जुड़े पाए गए हैंध्रुव सक्सेना – बीजेपी आईटी सेल का सदस्य था, पकड़ा गया पाकिस्तान के लिए जासूसी करते हुए।बुरहान वानी – जिसे आतंकवादी माना जाता है, उसकी हत्या को बीजेपी नेताओं ने ‘दुर्घटना’ कहा।पठानकोट हमले की जांच के लिए पाकिस्तान की एजेंसी को भारत बुलाया गया।प्रधानमंत्री मोदी खुद पाकिस्तान चले गए थे, बिना देश को बताए।आसिया अंद्राबी, जो भारत विरोधी बातें करती थी, उसे ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान में जगह दी गई।डीआरडीओ अधिकारी प्रदीप कुरुलकर, जो संघ से जुड़ा था, पकड़ा गया पाकिस्तानी एजेंट से संपर्क में। अब देश पूछ रहा है क्या सरकार को जवाब देना नहीं चाहिए?सुप्रिया श्रीनेत ने मोदी सरकार से साफ सवाल पूछे जब सेना कह रही है कि चीन हमारे दुश्मन के साथ था, तो आप चीन से दोस्ती क्यों कर रहे हैं?विदेश मंत्री जयशंकर चीन के राष्ट्रपति से मिलकर क्या संदेश देना चाहते हैं?ज्योति मल्होत्रा को बीजेपी कार्यक्रमों में क्यों बुलाया गया?क्या सरकार ने उसके पाकिस्तान कनेक्शन की जांच की थी?28 शहीदों के परिवारों को अब तक इंसाफ क्यों नहीं मिला? चीन का बढ़ता असर और भारत की चुप्पीचीन ने पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान को 81% हथियार दिए।चीन ने भारत की ज़मीन पर गांव बसा लिए हैं। चीन ने हमारे नक्शों के नाम बदलदिए और हमारे भूभाग पर दावा किया।चीन ने अरुणाचल प्रदेश के 30 से अधिक इलाकों का नाम बदल दिया।भारत की सेना आज अपनी ही ज़मीन पर गश्त नहीं कर पा रही, क्योंकि चीन की सहमति का इंतजार करना पड़ता है। देश आज सवाल पूछ रहा है।क्या हम अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं?क्या 28 लोगों की शहादत का जवाब अब भी नहीं मिलेगा?क्या सरकार को सिर्फ चीन से व्यापार करना और रिश्ते सुधारना ज़रूरी लगता है?सुप्रिया श्रीनेत ने कहा है कि सरकार को संसद में जवाब देना चाहिए। देश की जनता को सच जानने का हक है। जब हमारे जवान तीन मोर्चों पर लड़रहे थे, तब सरकार चीन के साथ हाथ मिला रही थी।
लखनऊ में विश्व युवा कौशल दिवस पर भव्य कौशल मेला, CM योगी ने किया उद्घाटन “262 ITI होंगे अपग्रेड”

राजधानी लखनऊ में मंगलवार को विश्व युवा कौशल दिवस पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान पर कौशल मेले का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री योगीआदित्यनाथ ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया. यह आयोजन प्रदेश के 75 जिलों से कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्रों में एआई नवाचार से जुड़ेप्रशिक्षणार्थियों के लिए आयोजित किया गया. इस मौके पर MNIT इलाहाबाद के साथ कौशल विकास मिशन ने MOU भी किया. इससे कौशलप्रशिक्षण में स्मार्ट प्रौद्योगिकी को बढ़ावा और प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा. इस अवसर पर इंडस्ट्री पार्टनर को सम्मानित किया गया. 262 राजकीय आईटीआई को अपग्रेड करने के लिए टाटा के सुशील कुमार समेत कई ट्रेनिंग पार्टनर को भी सम्मानित किया गया. बदलने के लिए किए ये सभी प्रयासइस मौके पर सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कार्य और मानव संसाधन की कोई कमी नहीं है हमारे पास स्केल है. लेकिन उसे स्किल में बदलने केलिए ये सभी प्रयास प्रारंभ किए गए हैं. इसके अंतर्गत प्रदेश सरकार दो करोड़ युवाओं को सक्षम बनाने के लिए स्मार्ट फोन और टैबलेट उपलब्ध करारही है. कार्यक्रम में संबोधित करते हुए व्यावसायिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार ) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि सीएम युवा आइकन हैं. उनकाआगमन हमें ऊर्जा देगा। पीएम मोदी और सीएम योगी का सपना है कि युवा कैसे कुशल हो? नौकरी लेने वाला ही नहीं देने वाला भी बने। युवाओं केबिना 10 खराब डालर की अर्थव्यवस्था बनाना संभव नहीं है.आईटीआई को पहले तबेले में तब्दील कर दिया था ट्रेनिंग नहीं होती थी सीएम के नेतृत्वमें सुधार किया गया. 60 आईटीआई को बेहतर किया गया. टाटा के सहयोग से आठ हजार करोड़ लगाकर 212 आईटीआई को अपग्रेड कर रहे हैं. अत्याधुनिक क्षेत्र में प्रशिक्षण दे रहे हैं. ट्रेनिंग देकर भेज रहे है इंडस्ट्रीयुवाओं को ट्रेनिंग देकर इंडस्ट्री में भी भेज रहे हैं. भवनों को बेहतर किया गया है प्रदेश के किसी भी आईटीआई में नई तकनीकी के साथ काम करते हुएमिलेंगे. पांच जिले में टाटा के सहयोग से इनक्यूबेशन सेंटर बनने हैं इसमें एक मुजफ्फरनगर में भी है। आईटीओटी में आधा दर्जन नए ट्रेड में प्रशिक्षण देरहे हैं. सीएम स्वरोजगार योजना में पांच लाख तक का ऋण दे रहे हैं 600 इंटर कॉलेज में प्रोजेक्ट प्रवीण चल रहा है. आईटीआई करने वाले युवाप्रशिक्षण के बाद बेरोजगार नहीं रहेंगे. इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, MSME मंत्री राकेश सचान, राज्यमंत्री मन्नू कोरी, मुख्य सचिवमनोज कुमार सिंह, सीएम के सलाहकार अवनीश अवस्थी, कौशल विकास विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम समेत अन्य लोग उपस्थित रहे. विश्वयुवा कौशल दिवस पर लखनऊ में कौशल मेले का आयोजन किया गया. सीएम योगी ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौके पर 15 यूथ आइकनको सम्मानित किया गया.मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उद्घाटन करते हुए ज़ोर दिया कि UP के पास कार्यबल तो है लेकिन उसे कौशल में परिवर्तितकरने की आवश्यकता है जिसकी शुरुआत ये पहलें कर रही हैं.इस मौके पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, MSME मंत्री राकेश सचान, राज्य मंत्री मन्नूकोरी, मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह, एवं सलाहकार अवनीश अवस्थी मौजूद रहे.