भारत को चौथा सबसे समान देश बताने पर कांग्रेस का पलटवार, बताया सरकार की ‘बौद्धिक बेईमानी’ और आंकड़ों की हेराफेरी

एक रिपोर्ट में भारत को चौथा सबसे समान देश बताए जाने पर कांग्रेस पार्टी ने सवाल उठाए हैं और इसे सरकार की धोखाधड़ी और बौद्धिक बेईमानीकरार दिया है. कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार आंकड़ों की हेराफेरी करके देश में बढ़ती असमानता की वास्तविकता को नहीं टाल सकती। दरअसलविश्व बैंक ने एक रिपोर्ट जारी की है. जिसमें बताया गया है कि भारत में साल 2011-12 से लेकर 2022-23 के बीच तेजी से असमानता घटी है. रिपोर्ट में भारत को दुनिया में चौथा सबसे समान देश बताया गया है कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि ‘आप क्रोनोलॉजीसमझिए. चेतावनी संकेतों की गई पहचानविश्व बैंक ने गरीबी और समानता पर अप्रैल 2025 में रिपोर्ट जारी की. इसके तुरंत बाद कांग्रेस ने बयान जारी किया जिसमें विश्व बैंक द्वारा भारत मेंगरीबी और असमानता के लिए बताए गए कई चेतावनी संकेतों की पहचान की गई. जिसमें सरकारी आंकड़ों में असमानता को कम करके आंकने कीचेतावनी भी शामिल थी. इस रिपोर्ट के तीन महीने बाद 5 जुलाई को मोदी सरकार और उनके समर्थकों ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की. जिसमें दावाकिया गया कि भारत दुनिया के सबसे समान समाज वाले देशों में चौथे नंबर पर है. कांग्रेस का कहना है कि सरकार का डेटा सीमित उपलब्धता औरअनिश्चित गुणवत्ता वाला डेटा है. जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार ने विश्व बैंक की रिपोर्ट के विश्लेषण में लापरवाही बरती और यह पूरी तरहसे बौद्धिक बेईमानी है. रमेश ने कहा कि ‘जब हम दुनिया के मुकाबले भारत में आय समानता की तुलना करते हैं तो भारत का प्रदर्शन बेहद खराब है. भारत साल 2019 में दुनिया के 216 देशों में 176वें स्थान पर था. दूसरे शब्दों में भारत चौथा सबसे समान समाज नहीं है. यह असल में दुनिया में40वां सबसे असमान समाज है. भारत में आय असमानता बढ़ी है और मोदी राज में यह बेहद खराब हुई है. भारत में संपत्ति असमानता आय असमानताके मुकाबले ज्यादा है. बौद्धिक समन्वय की है कमीजयराम रमेश ने कहा कि इस सरकार में प्रतिभा की कमी है और बौद्धिक समन्वय की भी कमी है. पीआईबी को इस प्रेस विज्ञप्ति को तुरंत वापस लेनाचाहिए. विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का गिनी इंडेक्स 25.5 है. जो इसे स्लोवाकिया, स्लोवेनिया और बेलारूस के बाद दुनिया का चौथासबसे समान देश बनाता है। जयराम रमेश ने कहा कि ‘जब हम दुनिया के मुकाबले भारत में आय समानता की तुलना करते हैं तो भारत का प्रदर्शन बेहदखराब है. भारत साल 2019 में दुनिया के 216 देशों में 176वें स्थान पर था दूसरे शब्दों में भारत चौथा सबसे समान समाज नहीं है. यह असल मेंदुनिया में 40वां सबसे असमान समाज है.जब हम दुनिया के मुकाबले भारत में आय समानता की तुलना करते हैं तो भारत का प्रदर्शन बेहद ख़राब है. 2019 में भारत 216 देशों में 176वें स्थान पर था. दूसरे शब्दों में भारत चौथा सबसे समान समाज नहीं है. बल्कि दुनिया में 40वां सबसे असमानसमाज है.रमेश ने प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो से इस “भ्रामक” प्रेस विज्ञप्ति को तुरंत वापस लेने की मांग की. उन्होंने सरकार पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेशकरने का आरोप लगाया और कहा कि इससे जनता को गुमराह किया जा रहा है.
निशिकांत दुबे का बड़ा दावा, इंदिरा गांधी ने ब्रिटेन के साथ मिलकर किया था स्वर्ण मंदिर पर हमला “भाजपा सांसद ने कांग्रेस पर साधा निशाना”

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने 1984 के स्वर्ण मंदिर हमले को लेकर सनसनीखेज दावा किया है. उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधीने ब्रिटेन के साथ मिलकर स्वर्ण मंदिर पर हमला किया था. दुबे कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस के लिए सिख समुदाय सिर्फ खिलौना है. सिखों के कत्लेआम को छुपाने के लिए 2004 में मनमोहन सिंह को “कठपुतली प्रधानमंत्री” बनाया गया.भाजपा नेता अपने एक्स हैंडल पर गृह सचिवकी एक कथित रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा, 1984 में स्वर्ण मंदिर पर हमला ब्रिटेन के साथ मिलकर किया गया. ब्रिटिश सेना के अधिकारीअमृतसर में मौजूद थे कांग्रेस के लिए सिख समुदाय सिर्फ खिलौना है. तनाव बढ़ने का खतराउन्होंने यह भी दावा किया कि 1960 में करतारपुर साहिब पाकिस्तान को देने का समझौता सरदार स्वर्ण सिंह ने किया. 1984 में सिखों के कत्लेआमको छुपाने के लिए वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को बचाया गया और 2004 में मनमोहन सिंह को “कठपुतली प्रधानमंत्री” बनाया गया. भाजपा ने गृह सचिवकी एक कथित गोपनीय चिट्ठी साझा की जिसमें दावा किया गया है कि भारतीय अधिकारियों ने स्वर्ण मंदिर से सिख चरमपंथियों को हटाने के लिएब्रिटेन से सलाह मांगी थी. ये खत विदेश एवं राष्ट्रमंडल कार्यालय के निजी सचिव ब्रायन फॉल ने तत्कालीन गृह सचिव के निजी सचिव ह्यूग टेलर कोलिखा था. इस खत के जरिए निशिकांत ने अपने दावे को पुख्ता किया है. इसमें लिखा है. विदेश सचिव ने इस अनुरोध पर सहमति दी और ब्रिटिशप्रधानमंत्री की मंजूरी से एक शिरोमणि अकाली दल के अधिकारी ने भारत का दौरा किया। इस अधिकारी ने एक योजना बनाई. जिसे इंदिरा गांधी नेमंजूरी दी. योजना को जल्द लागू करने की संभावना थी. इसमें कहा गया है कि स्वर्ण मंदिर में इस कार्रवाई से पंजाब में सांप्रदायिक हिंसा भड़क सकतीथी. जिससे भारत और ब्रिटेन में सिख समुदाय के बीच तनाव बढ़ने का खतरा था.भूमिका हो जाती है उजागरखासकर अगर ब्रिटिश विशेष बल (एसएएस) की भूमिका उजागर हो जाती. इसलिए इस जानकारी को भारत और लंदन में गोपनीय रखा गया. विदेशसचिव ने इसे सीमित लोगों तक रखने की सलाह दी थी. इस पत्र की प्रति नंबर 10 डाउनिंग स्ट्रीट, रक्षा मंत्रालय और कैबिनेट कार्यालय को भेजी गईथी. भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इस पत्र को सार्वजनिक करते हुए कांग्रेस पर हमला बोला और कहा कि 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार को लेकरदेश को अधूरी जानकारी दी गई थी. उनका दावा है कि यह पत्र उस दौर की सच्चाई को सामने लाता है. जिसमें एक विदेशी ताकत की भागीदारी कीसंभावनाएं थीं।यह चिट्ठी अगर प्रमाणिक साबित होती है. तो 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार को लेकर सरकार की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय सलाह कीप्रकृति पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं. इससे राजनीतिक बहस और सिख समुदाय की संवेदनाएं एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ सकती हैं.ब्रिटेन मेंसिख हितधारकों और संसद में विपक्ष के नेताओं (जैसे जेरमी कॉर्बिन) ने आफत के खुलासे के बाद एक स्वतंत्र जांच की मांग की इस बात के आलोकमें कि UK की किसी भूमिका की वर्तमान जांच “कारगर और पारदर्शी” नहीं थी.
राजनाथ सिंह ने नियंत्रक सम्मेलन 2025 का किया उद्घाटन, बोले शांति का समय धोखा “रक्षा क्षेत्र में हो रणनीतिक निवेश” स्वदेशी उपकरणों और रक्षा वित्त सुधार पर दिया जोर”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा लेखा विभाग (डीएडी) द्वारा आयोजित नियंत्रक सम्मेलन का उद्घाटन किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केजरिये दुनियाभर ने हमारे सैनिकों का जज्बा और युद्ध प्रणाली को देखा आज हमारे रक्षा क्षेत्र पर पूरी दुनिया की नजर है.उन्होंने कहा कि दुनिया हमारेरक्षा क्षेत्र की ओर देख रही है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारे सैनिकों ने जो वीरता दिखाई है साथ ही जिस तरह से हमने अपने घरेलू उपकरणों कीक्षमताओं का प्रदर्शन किया है उससे हमारे स्वदेशी रक्षा उत्पादों की मांग में वृद्धि हुई है. 2024 में विश्व सैन्य व्यय बढ़कर 2.7 ट्रिलियन डॉलर सेअधिक हो गया है. इतना बड़ा बाजार हमारा इंतजार कर रहा है.रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज रक्षा क्षेत्र में जो परिवर्तनकारी बदलाव हो रहेहैं. वे पहले ऐसे नहीं थे आज के बदलाव गतिशील और अनिश्चित हैं। शांति का समय एक धोखा है. इसके अलावा कुछ नहीं मुझे लगता है कि हमसभी को शांति के समय में रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने पर चर्चा करनी चाहिए. लेकिन अचानक हम खुद को ऐसी स्थिति में पाते हैं जो हमें जगाती हैऔर हमें कुछ और करने की आवश्यकता का अहसास होता है. अचानक बढ़ जाती है आवश्यकताउन्होंने कहा कि अगर किसी उपकरण की अचानक आवश्यकता बढ़ जाती है. तो हम सभी को इस मुद्दे पर विचार करना चाहिए। यह सब शांति केसमय में करने की जरूरत है. वित्तीय प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए हम सभी को रक्षा अर्थशास्त्र में एक कदम और आगे बढ़ना चाहिए. इसके पीछेकारण यह है कि पूरा विश्व पुनः शस्त्रीकरण के एक नए युग की ओर बढ़ रहा है और इस क्षेत्र में कई पूंजी निवेश किए जा रहे हैं.राजनाथ सिंह ने कहाकि आपने नियंत्रक सम्मेलन आयोजित किया है लेकिन मुझे लगता है कि आपका दिमाग खुला और ग्रहणशील होना चाहिए। रक्षा लेखा विभाग कीजिम्मेदारी सिर्फ कागजों पर हिसाब-किताब रखना नहीं है, बल्कि यह हमारी सुरक्षा व्यवस्था का भी अहम हिस्सा है. जब आप ईमानदारी से काम करतेहैं तो इसका असर हमारी सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों तक भी पहुंचता है. उन्हें लगता है कि उनके पीछे एक सिस्टम है जो हर परिस्थिति मेंउनके साथ रहेगा. राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर आप हमारे रक्षा बजट को देखें तो यह दुनिया के कुछ देशों की जीडीपी से भी बड़ा है। जब लोगों कीमेहनत की कमाई का एक बड़ा हिस्सा रक्षा मंत्रालय को आवंटित किया जाता है तो हमारी जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है हमें प्रभावी विकास कीआवश्यकता है. हमारा रक्षा व्यय ऐसा होना चाहिए कि न केवल बजट बढ़े बल्कि हम इसका सही तरीके से उपयोग भी कर सकें. सही समय पर सहीउद्देश्य के लिए उचित तैनाती करके. उन्होंने कहा कि रक्षा अधिग्रहण परिषद ने पहली बार जैम पोर्टल से पूंजी खरीद की अनुमति दी है यह एकसराहनीय कदम है। मुझे यह भी बताया गया है कि विभाग रक्षा कर्मियों के लिए व्यापक वेतन प्रणाली और केंद्रीकृत डाटाबेस प्रबंधन पर काम कर रहाहै. 2025 सम्मेलन की कर रहा है मेजबानीरक्षा लेखा विभाग (डीएडी) सात से नौ जुलाई तक राष्ट्रीय राजधानी में नियंत्रक सम्मेलन 2025 की मेजबानी कर रहा है. इसमें चीफ ऑफ डिफेंसस्टाफ जनरल अनिल चौहान, तीनों सेनाओं के प्रमुख, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, वित्तीय सलाहकार (रक्षा सेवाएं) एसजी दस्तीदार और रक्षा लेखामहानियंत्रक डॉ मयंक शर्मा शामिल हो रहे हैं. यह सम्मेलन नीतिगत संवाद, रणनीतिक समीक्षा और संस्थागत नवाचार का एक प्रमुख मंच है. यह रक्षाऔर वित्त क्षेत्रों में रक्षा लेखा विभाग के शीर्षस्थ नेतृत्व, सिविल सेवकों, शिक्षाविदों, थिंक टैंक और हितधारकों को एक साथ लाता है. वहीं बात अगरइस सम्मेलन के उद्देश्य की करें तो यह सम्मेलन रक्षा और वित्त क्षेत्रों के विशेषज्ञों, प्रशासनिक अधिकारियों, थिंक टैंकों और शिक्षाविदों को एक मंचपर लाकर रक्षा वित्तीय प्रणाली की समीक्षा, सुधार और भविष्य की दिशा तय करने का काम करता है. वहीं इस बार का विषय वित्तीय सलाह, भुगतान, ऑडिट और रक्षा वित्त और अर्थशास्त्र के जरिए लेखांकन में बदलाव है. बता दें कि यह डीएडी को पारंपरिक अकाउंटिंग विभाग से बदलकरआधुनिक और रणनीतिक रक्षा वित्त संस्था के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. अब बात अगर इस सम्मेलन में मुख्य बिंदू की करें तोसम्मेलन में आठ उच्चस्तरीय सत्र (मंथन सत्र) होंगे, जिनमें बजट सुधार, आंतरिक ऑडिट में बदलाव, मूल्य निर्धारण (प्राइसिंग), संयुक्त शोध, औरक्षमता निर्माण जैसे विषयों पर चर्चा होगी. यह सत्र रक्षा उद्योग में आत्मनिर्भरता और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत वित्तीयसलाहकार (आईएफए) की भूमिका को और स्पष्ट करेंगे.
पाक जासूसी की आरोपी को केरल सरकार ने बुलाया, भाजपा का दावा और राज्य सरकार की सफाई आमने-सामने “पर्यटन विभाग ने की थी कन्नूर यात्रा की स्पॉन्सरशिप”

पाकिस्तान के लिए जासूसी के शक में गिरफ्तार ज्योति मल्होत्रा का केरल से भी कनेक्शन सामने आया है. आरटीआई में हुए खुलासे के बाद भाजपा नेआरोप लगाया है कि यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा ने केरल सरकार के बुलावे पर कन्नूर की यात्रा की थी. राज्य सरकार ने ही पर्यटन को बढ़ावा देने के लिएज्योति मल्होत्रा को आमंत्रित किया था ऐसा क्यों किया गया? इस पर केरल सरकार ने जवाब दिया है.भाजपा नेता के सुरेंद्रन ने आरोप लगाया किआरटीआई दस्तावेजों से पता चला है कि पाकिस्तान के लिए जासूसी के शक में पकड़ी गई ज्योति मल्होत्रा की कन्नूर यात्रा केरल पर्यटन ने प्रायोजितकी थी. इस विभाग को सीएम पिनाराई विजयन के दामाद चलाते हैं। यात्रा के दौरान ज्योति किससे मिली? कहां गई? असली एजेंडा क्या है? केरलपाक से जुड़े जासूस के लिए लाल कालीन क्यों बिछा रहा है? सीएम विजयन केरल को हमारे देश के आंतरिक और बाहरी खतरों के लिए एक सुरक्षितपनाहगाह में बदल रहे हैं. नहीं है पारिवारिक मामलाइसके बाद सुरेंद्र ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के दामाद द्वारा नियंत्रित केरल पर्यटन ने पाक से जुड़े जासूस की यात्रा को प्रायोजित क्यों किया? केरल की सुरक्षा आपका पारिवारिक मामला नहीं है.आरटीआई दस्तावेजों से यह साबित हुआ है इस पर केरल के पर्यटन मंत्री पीए मोहम्मद रियास नेकहा कि राज्य की वामपंथी सरकार और उसके मंत्री कभी भी जानबूझकर जासूसों को केरल में आमंत्रित नहीं करेंगे और उन्हें सभी सुविधाएं प्रदान करेंगे. हम इस तरह के प्रचार से डरते नहीं हैं. हम इस तरह के दुष्प्रचार को कोई महत्व नहीं देते क्योंकि जनता हमारे साथ है।हिसार की न्यू अग्रसेन कॉलोनीनिवासी यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में सिविल लाइन थाना पुलिस ने 17 मई को गिरफ्तार किया था. जिसके बाद उसे 5 दिन के रिमांड पर भेज दिया गया। इसके बाद 4 दिन के रिमांड पर भेजा गया. दो बार में 9 दिन के रिमांड पूरा होने के बाद 26 मईको उसे सिविल जज ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सुनील कुमार की अदालत में पेश किया गया था. 26 मई को अदालत ने ज्योति मल्होत्रा को 14 दिन केलिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया था. 14 दिन की यह न्यायिक हिरासत पूरी होने पर सोमवार 9 जून को उसे फिर से उसकी अदालत में पेशी हुई. पर्यटन न की प्रायोजितजिसके बाद उसे 23 जून तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा गया है भाजपा नेता के सुरेंद्रन ने आरोप लगाया कि आरटीआई दस्तावेजों से पता चलाहै कि पाकिस्तान के लिए जासूसी के शक में पकड़ी गई ज्योति मल्होत्रा की कन्नूर यात्रा केरल पर्यटन ने प्रायोजित की थी. इस विभाग को सीएमपिनाराई विजयन के दामाद चलाते हैं. हरियाणा के हिसार की रहने वाली यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में17 मई को गिरफ्तार किया गया था. आरोप है कि वह संवेदनशील सूचनाओं को पाक एजेंसियों तक पहुंचा रही थी. भाजपा नेता के. सुरेंद्रन ने बड़ाआरोप लगाते हुए दावा किया कि RTI दस्तावेजों से पता चला है कि आरोपी यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा की केरल के कन्नूर जिले की यात्रा, राज्यपर्यटन विभाग द्वारा प्रायोजित थी. उन्होंने यह भी कहा कि यह विभाग मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के दामाद के अधीन है. जिससे इस यात्रा और उसकेप्रायोजन पर और भी सवाल उठते हैं. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार हर पर्यटक को आमंत्रित करती है लेकिन यह कानूनी एजेंसियों की जिम्मेदारी है किवे किसी संदिग्ध की पहचान करें और कार्रवाई करें. यह मामला एक बार फिर राज्य की पर्यटन नीतियों, सुरक्षा उपायों, और राजनीतिक पारदर्शिता कोलेकर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गया है. अगर भाजपा के आरोप सही साबित होते हैं तो यह राज्य सरकार के लिए बड़ा झटका हो सकता है. वहीं यदिआरोप निराधार साबित होते हैं तो यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई के तौर पर देखा जाएगा.
ब्रिक्स की अमेरिका विरोधी नीतियों पर ट्रंप का अल्टीमेटम, सभी देशों पर लगेगा 10% अतिरिक्त टैरिफ

ब्राजील में चल रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिक्स देशों को बड़ी चेतावनी दे डाली. उन्होंने कहा कि अगरब्रिक्स देश अमेरिका विरोधी नीति का समर्थन करते हैं तो उन पर 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा ब्रिक्स सम्मेलन में ईरान पर अमेरिकाऔर इस्राइल के हमलों की निंदा किए जाने के बाद ट्रंप ने नाराजगी जताते हुए ब्रिक्स देशों को चेताया.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल परलिखा कि ब्रिक्स की अमेरिका विरोधी नीतियों से जुड़ने वाले किसी भी देश पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा. इस नीति में कोई अपवाद नहींहोगा इस मामले पर आपका ध्यान देने के लिए धन्यवाद. अमेरिका से नहीं कोई सीधा हमलाइसके बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि दुनिया भर के विभिन्न देशों के साथ अमेरिका के टैरिफ पत्रऔर समझौते सोमवार सात जुलाई को स्थानीय समयानुसार दोपहर 12:00 बजे (पूर्वी) से वितरित किए जाएंगे.ब्राजील में चल रहे ब्रिक्स शिखरसम्मेलन में शामिल देशों ने अमेरिका का नाम लिए बिना ईरान पर हुए हालिया हमले और व्यापार शुल्क (टैरिफ) की निंदा की. इस्राइल की मध्य पूर्वमें की जा रही सैन्य कार्रवाई की आलोचना की गई. सम्मेलन के पहले ब्रिक्स देशों ने अमेरिका पर सीधा हमला नहीं किया. लेकिन उन्होंने कहा किबढ़ते टैरिफ (शुल्क) से वैश्विक व्यापार पर बुरा असर पड़ रहा है और यह डब्ल्यूटीओ के नियमों के खिलाफ है. ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा नेनाटो की तरफ से सैन्य खर्च बढ़ाने के फैसले की आलोचना की. उन्होंने कहा कि शांति की तुलना में युद्ध में निवेश करना हमेशा आसान होताहै.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से टैरिफ को निलंबित किए जाने की समयसीमा नौ जुलाई को समाप्त हो रही है. इसे लेकर दुनियाभर केदेशों की चिंता बढ़ हुई है. पिछले दिनों ट्रंप ने कहा था कि नौ जुलाई के बाद वैश्विक टैरिफ से राहत नहीं मिलेगी. इसके बाद वह अधिकांश देशों परटैरिफ पर 90 दिवसीय रोक को बढ़ाने की योजना नहीं बना रहे हैं. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने 10-12 देशों को नए टैरिफ लगाने की सूचना देने के लिए पत्रसाइन कर दिए हैं. ब्राजील की मेजबानी में हुआजिन्हें सोमवार को भेजा जाएगा.गौरतलब है कि इस बार ब्रिक्स सम्मेलन ब्राजील की मेजबानी में हुआ, जिसमें पुराने 5 देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) के अलावा नए सदस्य देशों मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई और इंडोनेशिया ने हिस्सा लिया. ब्राजील ने 1 जनवरी 2025 कोब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली थी. इस बार की थीम रही- समावेशी और टिकाऊ वैश्विक शासन के लिए ग्लोबल साउथ का सहयोग मजबूतकरना.ब्राजील में चल रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल देशों ने अमेरिका का नाम लिए बिना ईरान पर हुए हालिया हमले और व्यापार शुल्क(टैरिफ) की निंदा की. इसे लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भड़क गए. उन्होंने ब्रिक्स देशों को नई चेतावनी दे डाली.ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल देशों नेअमेरिका की अनियत और एकतरफा टैरिफ” प्रक्रिया की कड़ी निंदा की है हालांकि अमेरिका का नाम लिए बिना.ट्रम्प ने संकेत दिया है कि नए टैरिफफैसले कानूनी पात्र देशों तक की सूची तैयार करके पत्रों के जरिए भेजे जाएंगे जो अभियान की स्पष्ट दिशा दिखाता है.
57 साल बाद ब्राजील दौरे पर पीएम मोदी ब्रिक्स सम्मेलन में आतंकवाद पर सख्त संदेश, क्यूबा से डिजिटल और आयुर्वेदिक सहयोग पर चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद अब ब्रासीलिया जाएंगे. जहां उन्हें राजकीय अतिथि का सम्मान दिया जाएगा. ब्राजील मेंभारत के राजदूत दिनेश भाटिया ने कहा कि यह 57 साल में पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री का ब्राजील का पहला राजकीय दौरा है. भाटिया नेकहा कि हमें उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच चार समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं, जिनमें अक्षय ऊर्जा, आतंकवाद से निपटना कृषि में अनुसंधानसहयोग साथ ही गोपनीय जानकारी का आदान-प्रदान के समझौते शामिल हैं.एक प्रेस वार्ता में भारत के आर्थिक संबंधों के सचिव दम्मू रवि ने ब्रिक्ससम्मेलन को लेकर कहा कि ‘तेजी से बदलती दुनिया में ब्रिक्स सम्मेलन की काफी अहमियत है. पाकिस्तान पर साधा निशानाभारत, ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य देश है और अगले साल ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत करेगा. प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स सम्मेलन में दोहराया कि 20वीं सदीके वैश्विक संगठनों में 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने की क्षमता का अभाव है. उन्होंने बहुपक्षीय संगठनों में सुधार के महत्व को रेखांकित किया. प्रधानमंत्री ने वैश्विक शासन संस्थाओं जैसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, आईएमएफ, विश्व बैंक और डब्लूटीओ में तत्काल सुधार की मांग की.दम्मू रवि नेकहा कि ‘ब्रिक्स सम्मेलन में सभी सदस्य देशों ने भारत का समर्थन किया और पहलगाम आतंकी हमले पर मजबूत समर्थन दिया. प्रधानमंत्री ने इस बातपर जोर दिया कि पहलगाम में हुआ आतंकी हमला पूरी मानवता पर हमला है. उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवादियों को वित्तपोषित करने उन्हें बढ़ावादेने और सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने वालों से कठोरतम तरीके से निपटा जाना चाहिए. यह हमारे पड़ोसी को साफ संदेश है. प्रधानमंत्री ने कहा किब्रिक्स बहुध्रुवीय विश्व को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. मिगुएल डियाज कानेल से भी की मुलाकातउन्होंने ब्रिक्स समूह में विज्ञान और अनुसंधान भंडार स्थापित करने पर विचार को लेकर भी कुछ सुझाव दिए.आर्थिक संबंधों के सचिव दम्मू रवि नेबताया कि प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स सम्मेलन से इतर क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज कानेल से भी मुलाकात की. इस मुलाकात में क्यूबा के राष्ट्रपति नेभारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और यूपीआई के संभावित फायदों में गहरी रुचि दिखाई. साथ ही क्यूबा आयुर्वेद को भी मान्यता दे सकता हैऔर अपने स्वास्थ्य सिस्टम में आयुर्वेदिक उपचार पद्धति को भी शामिल कर सकता है. दोनों नेताओं के बीच इसे लेकर बातचीत हुई. प्रधानमंत्री नेब्रिक्स सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया कि पहलगाम में हुआ आतंकी हमला पूरी मानवता पर हमला है. उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवादियों कोवित्तपोषित करने उन्हें बढ़ावा देने और सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने वालों से कठोरतम तरीके से निपटा जाना चाहिए. इस बीच प्रधानमंत्री मोदी नेपहलगाम हमले को “पूरी मानवता पर हमला” करार देते हुए कहा कि आतंकवादियों का वित्तपोषण और सुरक्षित आश्रय देने वालों को “कठोरतमतरीके” से निपटना चाहिए. यह स्पष्ट संदेश उन देशों के लिए भी था जो आतंक फैलाने वाले नेटवर्क को छुपाते हैं.
ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत COP-33 की मेजबानी को मिला व्यापक समर्थन,जलवायु परिवर्तन संरक्षण पर ब्रिक्स देशों ने दिखाई एकजुटता “भारत के नेतृत्व की तारीफ”

ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में हुए 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसे अहम मुद्दों पर गंभीर चर्चाहुई. इस दौरान ब्रिक्स देशों ने 2028 में भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी 33) की मेजबानी की दावेदारी का समर्थनकिया। मामले में ब्रिक्स नेताओं ने एक संयुक्त घोषणा में कहा कि वे पेरिस जलवायु समझौते के उद्देश्यों और यूएनएफसीसीसी के लक्ष्यों को लेकरपूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु संकट से निपटने के लिए बहुपक्षीयता जरूरी है और सभी देशों को अपने जलवायु वादों को निभानाचाहिए.साथ ही ब्रिक्स देशों ने 2025 में ब्राजील के शहर बेलें में होने वाले सीओपी-30 सम्मेलन के लिए भी पूरा समर्थन जताया. नेताओं ने उम्मीदजताई कि यह सम्मेलन जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक प्रयासों को नई दिशा देगा. सम्मेलन में ब्रिक्स जलवायु नेतृत्व एजेंडा को मंजूरी दी गई. सहयोग बढ़ाने पर दिया जोरजिसमें विकासशील देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए जलवायु समाधान तेजी से लागू करने और सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया. इसको लेकरनेताओं ने कहा कि सभी प्रकार के वनों का संरक्षण अत्यंत जरूरी है क्योंकि वे जैव विविधता, जल स्रोतों, मिट्टी और जलवायु संतुलन के लिए बेहदअहम हैं. इस दौरान भारत की ओर से बिग कैट्स एलायंस की अंतरराष्ट्रीय पहल का भी स्वागत किया गया. साथ ही ब्रिक्स देशों से बड़ी बिल्लियों(जैसे बाघ, शेर) के संरक्षण के लिए मिलकर काम करने की अपील की गई. इसके साथ ही ब्रिक्स नेताओं ने वैश्विक पर्यावरण सुविधा (जीईएफ) कीव्यवस्था में सुधार की मांग की ताकि विकासशील देशों को पर्यावरण परियोजनाओं के लिए अधिक न्यायसंगत और आसान पहुंच मिल सके. उन्होंनेआदिवासी समुदायों और स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने की भी बात कही.गौरतलब है कि अगले साल होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन की अध्यक्षताभारत करने वाला है। इसके लिए ब्रिक्स नेताओं ने भारत को शुभकामनाएं दीं और 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए भारत को समर्थनदिया. ब्रिक्स सम्मेलन में भारत को 2028 में सीओपी-33 की मेजबानी की दावेदारी को लेकर बड़ा समर्थन मिला. ब्रिक्स देशों ने जलवायु परिवर्तन सेनिपटने के लिए पेरिस समझौते की प्रतिबद्धता दोहराई. संरक्षण पर दिया जोरसाथ ही इस दौरान ब्राजील में होने वाले सीओपी-30 को भी समर्थन मिला और वनों के संरक्षण पर जोर दिया गया. ब्राजील की अध्यक्षता में, ब्रिक्सदेशों ने विकासशील देशों के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाने, पेरिस समझौते को लागू करने तथा जलवायु वित्त को $1.3 ट्रिलियन तक पहुंचाने पर जोरदियाब्रिक्स नेताओं ने UN सुरक्षा परिषद, IMF, तथा WTO में सुधार पर बल दिया, साथ ही संयुक्त रूप से पेरिस समझौते के लक्ष्यों कोप्रासंगिकता का जिक्र किया भारत और अन्य विकासशील देशों ने Global South के हितों को लेकर कार्बन उपयोग, अनुकूलन और वित्तीय सहायतामें न्याय का जोरदार रुख अपनाया BRICS ने न केवल आर्थिक या रणनीतिक मुद्दों पर एकजुटता दिखाई, बल्कि वैश्विक जलवायु कार्रवाई के क्षेत्र मेंभी एक नई दिशा मांगी. भारत को COP‑33 की मेजबानी के प्रस्ताव को व्यापक समर्थन मिलने के साथ, वैश्विक स्तर पर इसका महत्व और गतिबढ़ेगी। आगामी COP‑30 और COP‑33 को बरकरार रखने का यह कदम साबित करता है कि विकासशील देशों की आवाज अब निर्णायक होचुकी है.
तेजस्वी यादव के नेतृत्व में INDIA गठबंधन का बड़ा आंदोलन, 9 जुलाई को बिहार बंद का ऐलान मतदाता सूची में धांधली के खिलाफ चक्का जाम

इंडिया गठबंधन के नेताओं ने एकजुट होकर चुनाव आयोग के मतदाता पुनरीक्षण कार्य का विरोध किया गया है. सोमवार दोपहर इंडिया गठबंधन केनेताओं ने राजद कार्यालय में प्रेस कॉफ्रेंस किया. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि हमलोग नौ अप्रैल को पूरे बिहार में विशेष गहन मतदातापुनरीक्षण कार्यक्रम 2025 के विरोध में प्रदर्शन करेंगे. बिहार के हर जिले में चक्का जाम किया जाएगा. लोकतंत्र पर हमला किया जा रहा है. चुनावआयोग जैसी संवैधानिक संस्था का दुरुपयोग किया जा रहा है. बिहार के गरीबों, वंचितों, दलितों के मतदान के अधिकार से वंचित करने की साजिशरची जा रही है. उन्होंने कहा कि गरीब मतदाताओं के साथ अन्याय हो रहा है। इसके विरोध में हमलोग पूरे बिहार में चक्का जाम करेंगे. इसमें राहुलगांधी भी शामिल होंगे हमलोग पूरी मजबूती के साथ इस काम को पूरा करेंगे. कर सकते है सत्यापनतेजस्वी यादव ने कहा कि हमलोगों ने पहले भी यह सवाल पूछा था कि आज फिर से पूछ रहे हैं कि क्या बिहार विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षणकार्यक्रम 2025 के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़वाने के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग को केवल 11 दस्तावेज मांगने का ही अधिकार है? इसकासंवैधानिक एवं कानूनी आधार क्या है? क्या भारतीय निर्वाचन आयोग को यह अधिकार है कि वह केवल उन्हीं 11 दस्तावेजों को मान्य माने और किसीअन्य दस्तावेज को खारिज कर दे? तेजस्वी यादव ने कहा कि चुनाव आयोग पूरी तरह कंफ्यूज हैं. अलग-अलग बात कह रहे हैं. तेजस्वी ने कहा किनीतीश कुमार के राज में लोग दहशत में जीने को विवश हैं. तेजस्वी यादव ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने बताया कि प्रत्येक BLO के साथ चारस्वयंसेवक लगाए गए हैं. हमने पूछा कि ये वॉलियंटर्स कौन हैं और इनके चयन का मानदंड क्या है? क्या वो सरकारी कर्मचारी है अथवा अन्य लोग?? हमने माँग रखी कि चुनाव आयोग बीएलओ की तरह इन वॉलंटियर्स” की भी सूची प्रकाशित करें ताकि सभी लोग उनका सत्यापन कर सकें. शिक्षक कर चुके है परेशानतेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि BLO का काम कर रहे शिक्षक परेशान हो चुके हैं. डीएम कार्यालय से उन्हें लगातार फोन किया जा रहा है. वह दबावमें हैं. आप ही बताएं कि वह यह काम करें या स्कूल में पढ़ाएंगे. स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों को लोगों के घर-घर भेजकर मतदाता पुनरीक्षण का कामकरवाया जा रहा है. इंडिया गठबंधन ने बिहार में चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. सोमवार दोपहर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्वमें पूरा विपक्ष एकजुट हुआ. सभी नेताओं ने एक स्वर में नौ जुलाई को पूरे राज्य में चक्का जाम का एलान किया. इंडिया गठबंधन ने बिहार में चुनावआयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. तेजस्वी यादव के नेतृत्व में सोमवार को विपक्षी नेताओं ने पूरे राज्य में 9 जुलाई को चक्का जाम की घोषणाकी है. इसका उद्देश्य “कमजोर और पिछड़े वर्गों को मताधिकार से वंचित करने” की कथित साजिश का विरोध करना है. तेजस्वी यादव का यह कदम नकेवल चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा है. बल्कि यह जमीनी लोकतंत्र की संवेदनशीलता को भी उजागर करता है. शिक्षकों पर पड़ रहा सरकारी दबाव औरस्वयंसेवकों की पहचान पर उठ रही सवालें बिहार की राजनीतिक और सामाजिक गहराई को दर्शाते हैं.
पूर्व सांसद आनंद सिंह का निधन, यूपी की राजनीति ने खोया एक ‘राजा’ नेता सियासत का एक युग खत्म

केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह के पिता व पूर्व मंत्री आनंद सिंह उर्फ अन्नू भैया का रविवार की देर रात लखनऊ में एकाएक तबीयत खराबहोने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया. जहां उनका निधन हो गया यह खबर यहां पर आते ही लोगों में शोक की लहर दौड़ गई. आनंद सिंह का जन्म 4 जनवरी 1939 को हुआ था। गोंडा संसदीय क्षेत्र से 5वीं , 7वीं , 8वीं और 9वीं लोकसभा के लिए संसद सदस्य चुने गए थे. 2012 से 2017 तकमुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार में वह कृषि मंत्री भी रहे। इसके बाद से उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया था. उनकेपुत्र गोंडा से भाजपा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह वर्तमान में केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री है. यूपी के टाइगर के नाम से भी है जाना जातापूर्व मंत्री के करीबी केबी सिंह ने बताया कि राजा आनंद सिंह एक दो बार नहीं, चार बार सांसद रहे. पूर्वांचल की राजनीति में अपने सियासी दबदबे कोलोहा मनवाने वाले मनकापुर के राजा आनन्द सिंह को यूपी टाइगर के नाम से जाना जाता था. एक वक्त की बात थी कि कांग्रेस पार्टी उन्हें सादासिम्बल दे देती थी फिर आनंद सिंह जिसे चाहते नाम भरकर सिम्बल दे देते थे. जिसके सिर पर मनकापुर कोट का हाथ होता था वह सांसद, विधायक, जिला परिषद अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख बन जाता था. वर्ष 2012 में राजा आनंद सिंह ने गौरा विधान सभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के टिकट परचुनाव जीता और प्रदेश की अखिलेश सरकार में कृषि मंत्री बने थे. लेकिन अब वे राजनीति से सन्यास ले चुके थे. 1971 में आनंद सिंह गोंडा लोकसभासीट से निर्वाचित हुए इसके बाद 1980, 1984 और 1989 में भी वह कांग्रेस के टिकट पर गोंडा से सांसद बने. राम लहर में 1991 के आम चुनाव मेंबृजभूषण ने आनंद सिंह को शिकस्त दी. इसके बाद 1996 में उनकी पत्नी केतकी देवी सिंह ने भी बीजेपी के टिकट पर आनंद सिंह (एसपी उम्मीदवार) को एक बार फिर मात दी. इसके बाद से आनंद सिंह ने संसदीय चुनाव से दूरी बना ली. लड़े थे विधानसभा चुनावहालांकि बाद में विधानसभा चुनाव जरुर लड़े थे. विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह के पिता आनंद सिंह का रविवार देर रात लखनऊ में निधन हो गया. वह चार बार के सांसद होने के साथ अखिलेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं. इसके बाद 1996 में उनकी पत्नी केतकी सिंह को भी बीजेपी की टिकट परजीत मिली. आनंद सिंह ने उसके बाद लोकसभा चुनाव से दूरी बना ली हालांकि विधानसभा राजनीति में सक्रिय रहे. वे अखिलेश यादव सरकार में मंत्रीभी रहे वे वर्तमान विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह के पिता थे.आनंद सिंह उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस की एक मजबूत और प्रतिष्ठित आवाजमाने जाते थे. वे अखिलेश यादव सरकार में मंत्री भी रहे. वे वर्तमान विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह के पिता थे. राजनीतिक सक्रियता से दूर होने केबाद भी वे सार्वजनिक जीवन में सजग बने रहे और अपने क्षेत्र से जुड़ाव बनाए रखा.
संगठन सृजन अभियान के तहत कांग्रेस कार्यकर्ताओं को मिला जोश, दिशा और संकल्प

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बाबरपुर क्षेत्र में आज जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा संगठन सृजन अभियान के अंतर्गत एक प्रेरणादायक प्रशिक्षण शिविर काआयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण आयोजन में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस प्रभारी काज़ी निज़ामुद्दीन जी, राष्ट्रीय सह सचिव मनोज यादव जी सहित कईवरिष्ठ नेताओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में लोकसभा पर्यवेक्षक रोमेश सब्बरवाल जी, जिला पर्यवेक्षक पी.के. मिश्रा जी, दिल्ली कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष अनिल भारद्वाज जी, पूर्व मंत्री नरेंद्र नाथ जी तथा जिलाध्यक्ष राजकुमार जैन जी सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे और कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन किया। शिविर के दौरान कार्यकर्ताओं को संगठन की विचारधारा, जमीनी कार्य, जनसंपर्क कौशल तथा समसामयिक राजनीतिक रणनीतियों पर विस्तृतमार्गदर्शन दिया गया। वक्ताओं ने कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया कि वे जनता से सीधा संवाद स्थापित कर कांग्रेस की नीतियों एवं मूल्यों को आम जनतक पहुँचाएँ। प्रशिक्षण शिविर में यह संदेश प्रमुखता से दिया गया कि संगठन की शक्ति उसके जमीनी कार्यकर्ताओं में निहित होती है। इसलिए हर कार्यकर्ता कोजिम्मेदारी के साथ अपने क्षेत्र में सक्रिय रहकर जनता की समस्याओं को उठाना चाहिए। इस अवसर पर उपस्थित कार्यकर्ताओं ने संगठन को मजबूत करने, सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने और जनसेवा को प्राथमिकता देने कासंकल्प लिया,यह प्रशिक्षण शिविर न केवल संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि कार्यकर्ताओं के उत्साह और प्रतिबद्धता को नई दिशा देनेवाला सिद्ध हुआ।