आपातकाल की यादों से युवाओं को जोड़ा, लोकतंत्र की रक्षा का दिया संदेश “भोपाल युवा संसद में बोले CM मोहन यादव”

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवा संसद के जनप्रतिनिधियों से संवाद किया. शुक्रवार को भोपाल में आयोजित युवा संसद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद विष्णुदत्त शर्मा, युवा मोर्चा के नेता रोहित चहल और वैभव पंवार ने हिस्सा लिया. इस अवसर परआपातकाल से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रमों की समीक्षा के साथ युवा वर्ग को जागरूक करने पर बल दिया गया. इस दौरान उन्होंने सवाल पूछते हुएकहा कि आपातकाल पर युवा संसद बुलाने की जरूरत क्यों पड़ी? अगर आज आपातकाल होता तो आपके हाथ में अखबार नहीं आता, इलेक्ट्रॉनिकमीडिया में खबर नहीं आती. आपातकाल के दौरान क्यों पड़ी युवा सांसद की जरुरतअभिव्यक्ति की स्वतंत्रता छीन ली जाती. वहीं निशाना साधते हुए कहा कि जो मां ने किया वही बेटे ने किया और आज वही राहुल गांधी भी कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ने मंच पर सवालिया लहजे में पूछा कि आपातकाल पर युवा संसद बुलाने की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने कहा कि यदि आज भी ऐसा समय आता तो […]
भाजपा को मिलने वाला है नया राष्ट्रीय अध्यक्ष, जुलाई की शुरुआत में राज्यों में संगठनात्मक बदलाव तेज़

भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए करीब एक साल से जारी इंतजार 21 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से पहले खत्म हो सकता है. राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए पार्टी की योजना जुलाई के पहले सप्ताह में उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, गुजरात, कर्नाटक सहित करीब एक दर्जन राज्योंमें नए प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव कराने की है. इस कड़ी में, राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ के लक्ष्मण ने शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा, किरेन रिजिजूऔर सांसद रविशंकर प्रसाद को क्रमश: उत्तराखंड, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है. गौरतलब है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष केचुनाव के लिए 37 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में से कम से कम 19 राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों का चुनाव अनिवार्य है. शामिल है राज्य परिषद नेतापार्टी अब तक 14 राज्यों में ही ऐसा कर पाई है दूसरी बड़ी समस्या राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए बनने वाला निर्वाचक मंडल है. इस मंडल कासदस्य राष्ट्रीय और राज्य परिषद में शामिल नेता ही होते हैं इन परिषदों में यूपी, गुजरात, मध्यप्रदेश, कर्नाटक जैसे राज्यों की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी है. ऐसे में प्रदेश संगठन के चुनाव के बाद इन परिषदों का कोटा भरे बिना निर्वाचक मंडल नहीं बनाया जा सकता. लोकसभा चुनाव में लगेझटके के कारण उत्तर प्रदेश केंद्रीय नेतृत्व की बड़ी सिरदर्दी है इस सूबे में बड़े बदलाव के लिए नए सिरे से मंथन शुरू हुआ है सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीयनेतृत्व को चुनाव में छिटके ओबीसी वोट बैंक को वापस लाने के साथ बसपा के कमजोर होने के कारण उसके वोट बैंक का सपा-कांग्रेस के प्रतिआकर्षित होने की काट भी ढूंढनी है. सूबे में नए प्रदेश अध्यक्ष के साथ व्यापक रोडमैप तैयार होगा.नया राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा इस पर अभी अंतिमफैसला नहीं हो पाया है. दलित या दक्षिण को देना चाहते है महत्वहालांकि पार्टी नेतृत्व सियासी कारणों से दलित या दक्षिण को महत्व देना चाहता है. चूंकि विपक्ष भाजपा और मोदी सरकार के संदर्भ में आरक्षण औरसंविधान को खत्म करने की धारणा बनाने की लगातार कोशिश कर रहा है इसके अलावा भविष्य की राजनीति के लिए विस्तार को अहमियत देने केलिए भाजपा की निगाहें दक्षिण भारत के राज्यों पर हैं. ऐसे में यह माना जा रहा है कि नया अध्यक्ष या तो दलित बिरादरी का होगा या फिर दक्षिणभारत से जुड़ा होगा.राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन के बाद पार्टी का जोर संगठन को नया रूप देने पर है. इस क्रम में राष्ट्रीय पदाधिकारियों की टीम में 60 से70 फीसदी चेहरे बदले जाएंगे. पार्टी की योजना इन बदलावों के जरिये युवाओं, महिलाओं और समाज के सभी वर्गों को संगठन में प्रतिनिधित्व देने कीहै. पार्टी सूत्रों का कहना है कि बड़े बदलाव से पार्टी की सर्वाधिक ताकतवर इकाई संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति भी अछूती नहीं रहेगी.
मध्यप्रदेश भाजपा को मिलेगा नया अध्यक्ष, धर्मेंद्र प्रधान बने पर्यवेक्षक संगठन में बदलाव की आहट तेज

भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक समीकरण एक बार फिर बदलने की ओर हैं राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा हाल ही में तीन राज्यों के लिए प्रदेश अध्यक्ष चयनके लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाने के बाद मध्य प्रदेश भाजपा में भी नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. पार्टी ने वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्रीधर्मेन्द्र प्रधान को मध्य प्रदेश का पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है. उनके भोपाल दौरे की संभावना अगले सप्ताह जताई जा रही है हालांकि अभी तककोई औपचारिक कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन में हो रही देरी के चलते कई राज्यों में भी अध्यक्ष पद पर निर्णयअटका हुआ था. अब जब शीर्ष स्तर पर सहमति बन चुकी है तो मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों में भी जल्द ही नए अध्यक्षों की घोषणा होने की उम्मीदकी जा रही है. भाजपा नेतृत्व लगाता है दावब्राह्मण वर्ग से यदि भाजपा नेतृत्व फिर से दांव लगाता है तो प्रमुख नामों में डॉ. नरोत्तम मिश्रा, गोपाल भार्गव, राजेंद्र शुक्ल, आलोक शर्मा, रामेश्वरशर्मा, अर्चना चिटनीस और आशीष दुबे (जबलपुर सांसद) जैसे दावेदार चर्चा में हैं. ठाकुर वर्ग से पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया, विधायक बृजेंद्र सिंह, कांतदेव सिंह और सांसद गणेश सिंह का नाम सामने आ रहा है वैश्य वर्ग से हेमंत खंडेलवाल (बैतूल विधायक) सबसे प्रमुख नाम हैं, वहीं सुधीर गुप्ता(मंदसौर सांसद) भी दौड़ में हैं.एससी वर्ग से भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य, जतारा विधायक हरीशंकर खटीक औरदेवास सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी प्रमुख नाम माने जा रहे हैं. एसटी वर्ग में राज्यसभा सदस्य डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी, पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्तेऔर खरगोन सांसद गजेंद्र पटेल का नाम चर्चा में है. भाजपा नेतृत्व इस बार सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय समीकरण और आगामी चुनावों की रणनीति केतहत नए अध्यक्ष का चयन करना चाहता है संगठन चुनाव की प्रक्रिया जनवरी में ही पूर्ण हो चुकी है लेकिन निर्णय में देरी ने नेताओं की बेचैनी बढ़ा दीहै धर्मेंद्र प्रधान की सक्रियता के साथ अब फैसला जल्द होने की उम्मीद है.
उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष पद की रेस तेज, 1 जुलाई को मिल सकता है नया चेहरा” अध्यक्ष पद पर सस्पेंस बरकरार”

भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने उत्तराखंड में प्रदेश अध्यक्ष पद पर चयन की घोषणा कर दी है एक जुलाई को प्रदेश भाजपा को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलसकता है. चुनाव की प्रक्रिया 29 जून से शुरू होने की संभावना है पार्टी राष्ट्रीय परिषद के लिए आठ सदस्यों का भी चुनाव करेगी. उत्तराखंड में प्रदेशअध्यक्ष का चुनाव कराने के लिए केंद्रीय नेतृत्व ने केंद्रीय राज्यमंत्री हर्ष मल्होत्रा को चुनाव अधिकारी बनाया है. भाजपा के प्रदेश चुनाव अधिकारीखजानदास के मुताबिक, 29 जून को प्रदेश अध्यक्ष व राष्ट्रीय परिषद के सदस्य पद के लिए चुनाव की अधिसूचना जारी हो सकती है. ऐसा हुआ तोउसी दिन चुनाव में प्रतिभाग करने वाले मतदाताओं के नामों की सूची भी प्रदेश पार्टी कार्यालय में चस्पा हो जाएगी. फिर 30 जून को नामांकन कीप्रक्रिया होगी और एक जुलाई को प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव हो सकता है. इसका विधिवत रूप से कार्यक्रम जल्द जारी होगा. जिलाध्यक्षों की चयन प्रक्रिया हुई संपन्नउन्होंने कहा कि अब तक प्रदेश में बूथ, मंडल और जिलाध्यक्षों का चयन प्रक्रिया संपन्न हो गई है.भाजपा का अगला प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा इसेलेकर अभी रहस्य बना हुआ है. हालांकि पार्टी के भीतर प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को दोबारा जिम्मेदारी दिए जाने की भी चर्चाएं भी तैर रही हैं. इसकेपीछे की वजह अब तक हुए चुनाव में पार्टी की कामयाबी पार्टी के सभी बड़े नेताओं में उनकी स्वीकार्यता और मुख्यमंत्री धामी से उनका समन्वय बताईजा रही है.चूंकि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अब तक चौंकाने वाले फैसले ही लेता रहा है इसलिए पार्टी के भीतर जातीय व क्षेत्रीय समीकरणों के हिसाबसे कुछ और नाम भी चर्चाओं में हैं माना जा रहा है कि संगठन की कमान गढ़वाल क्षेत्र के ब्राह्मण चेहरे के हाथों में सौंपी जा सकती है. इस हिसाब सेप्रदेश अध्यक्ष पद के लिए जो नाम संगठन में गूंज रहे हैं उनमें प्रदेश महामंत्री आदित्य कोठारी, दर्जाधारी ज्योति प्रसाद गैरोला, वरिष्ठ विधायक विनोदचमोली, विधायक बृजभूषण गैरोला के नामों की चर्चा है. पार्टी में यदि महिला को कमान सौंपने का प्रयोग हुआ तो महिला चेहरे के तौर पर केदारनाथकी विधायक आशा नौटियालव महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महामंत्री दीप्ति रावत भारद्वाज के नाम प्रमुख हैं.
पीएम मोदी ने किया आचार्य विद्यानंद शताब्दी समारोह का उद्घाटन, जारी किए डाक टिकट और सिक्के

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को आचार्य विद्यानंद जी महाराज के शताब्दी समारोह में शामिल हुए. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी को ‘धर्म चक्रवर्ती’ कीउपाधि से सम्मानित किया गया. पीएम मोदी ने आचार्य विद्यानंद जी महाराज की 100वीं जयंती के अवसर पर उनके शताब्दी समारोह के दौरान डाकटिकट और सिक्के जारी किए. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘यह दिन इसलिए भी खास है क्योंकि 28 जून 1987 को आचार्य विद्यानंद मुनिराजको ‘आचार्य’ की उपाधि मिली थी. यह सिर्फ सम्मान नहीं था बल्कि जैन संस्कृति को विचारों, संयम और करुणा से जोड़ने वाली ‘पवित्र धारा’ भी थी. आज जब हम उनकी 100वीं जयंती मना रहे हैं तो यह हमें उस ऐतिहासिक क्षण की याद दिलाता है.भगवान महावीर अहिंसा भारती ट्रस्ट के सहयोग सेआयोजित यह कार्यक्रम एक साल तक चलने वाले राष्ट्रीय श्रद्धांजलि समारोह की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है. 100 वीं जयंता का किया सम्मानइसका उद्देश्य आचार्य विद्यानंद जी महाराज की 100वीं जयंती का सम्मान करना है. साल भर चलने वाले इस समारोह में देशभर में सांस्कृतिक, साहित्यिक, शैक्षिक और आध्यात्मिक पहल की जाएंगी. समारोह का उद्देश्य आचार्य विद्यानंद जी महाराज के जीवन और परम्परा का जश्न मनाने केसाथ-साथ उनके संदेश का प्रसार करना है. आचार्य विद्यानंद जी महाराज ने जैन दर्शन और नैतिकता विषय पर 50 से अधिक पुस्तकों की रचना की है. उन्होंने विशेष रूप से प्राकृत जैन दर्शन और शास्त्रीय भाषाओं में शिक्षा के लिए काम किया और देश भर में प्राचीन जैन मंदिरों के जीर्णोद्धार औरपुनरुद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जैन धर्म के महान आध्यात्मिक गुरु व समाज सुधारक आचार्य विद्यानंद जी महाराज केशताब्दी समारोह का उद्घाटन किया. विज्ञान भवन में होने वाले इस आयोजन के मौके पर पीएम मोदी ने लोगों को संबोधित भी किया.प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी ने जैन धर्म के महान आध्यात्मिक गुरु व समाज सुधारक आचार्य विद्यानंद जी महाराज के शताब्दी समारोह का उद्घाटन किया. विज्ञान भवन मेंहोने वाले इस आयोजन के मौके पर पीएम मोदी ने लोगों को संबोधित भी किया.
दिल्ली में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा, भक्तिमय वातावरण में गूंजे जयकारे “रेखा गुप्ता ने निभाई छेरा पहाड़ा की रस्म”

Dellhi News: राजधानी में कई स्थानों पर शुक्रवार को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा का आयोजन किया गया पुरी की तरह ही हौज खास, त्यागराज नगर, रोहिणी स्थित जगन्नाथ मंदिरों और द्वारका के इस्कॉन मंदिर सहित अन्य स्थलों पर यात्रा निकाली गई. इसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भागलिया इस दौरान भगवान जगन्नाथ के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया. हौज खास स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता नेपारंपरिक ‘छेरा पहाड़ा’ की रस्म निभाई। उन्होंने रथ के मार्ग पर झाड़ू लगाकर भगवान को नगर भ्रमण के लिए आमंत्रित किया और रथ की रस्सीखींचकर यात्रा का शुभारंभ किया. उनके साथ सांसद बांसुरी स्वराज व विधायक सतीश उपाध्याय भी मौजूद थे. वहीं रोहिणी के सेक्टर-24 स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर में श्री जगन्नाथ रोहिणी सेवा संघ ने 20वीं रथ यात्रा का भव्य आयोजन किया. पूजन और भंडारे का किया गया आयोजनसुबह से ही भजन-कीर्तन, हवन, पूजन और भंडारे का आयोजन किया गया. रथ यात्रा की परंपरागत छेरा पहाड़ा रस्म डिप्टी मेयर जय भगवान यादव नेमंत्रोच्चारण के बीच निभाई. इस यात्रा में विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, सांसद योगेंद्र चंडोलिया और मंत्री रविंद्र इंद्राज भी उपस्थित रहे. द्वारकास्थित इस्कॉन मंदिर की रथ यात्रा को राजधानी की सबसे बड़ी रथ यात्राओं में से एक माना जाता है यात्रा में भक्तों को रथ की रस्सी खींचने का सौभाग्यप्राप्त हुआ इस्कॉन द्वारका ने भगवान को 11,000 किलो आमों का भोग अर्पित किया. जिनमें 108 प्रकार के आम विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इनआमों को बाद में प्रसाद स्वरूप भक्तों में वितरित किया गया. रथ यात्रा के दौरान जगह-जगह भंडारों, चाय-पानी व शीतल पेयजल की व्यवस्थास्थानीय लोगों और व्यापारियों ने की. भगवान को 11,000 किलो आमों का भोग अर्पित किया गया जिनमें 108 प्रकार के आम विशेष आकर्षण रहे. ये आम प्रसाद स्वरूप भक्तों में वितरित किए गए. आयोजन में भजन-कीर्तन, हवन, पूजन, और भंडारे के अलावा चाय-पानी व शीतल पेयजल कीव्यवस्था स्थानीय लोगों और व्यापारियों द्वारा की गई.
सेना और बीएसएफ का संयुक्त मोर्चा, हवाई खतरे और ड्रोन हमलों के खिलाफ बनाएंगे लेयरड डिफेंस सिस्टम

ऑपरेशन सिंदूर के बाद सभी सशस्त्र बल अपनी क्षमताओं और सामरिक रणनीति को बढ़ाने के काम में जुट गए हैं. इस ऑपरेशन के बाद हवाई खतरोंकी नई चुनौतियां भी सामने आई हैं क्योंकि आतंकवाद के खिलाफ इस युद्ध में हवाई क्षेत्र के जरिये ही हथियारों व मिसाइलों का इस्तेमाल करते हुएपाकिस्तान को सबक सिखाया गया. इसी के मद्देनजर अब सेना की पश्चिमी कमान और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) ने मिलकर पश्चिमी थिएटर(सियाचिन ग्लेशियर से गुजरात तक भारत-पाक सीमा) में हवाई खतरों की चुनौतियों से निपटने का फैसला लिया है.सीमा प्रबंधन को किया जाए पुख्ताइस संदर्भ में पिछले दिनों पश्चिमी कमान के सेना कमांडर और बीएसएफ के एडीजी के बीच विस्तृत चर्चा भी हो चुकी है.सेना और बीएसएफ के वरिष्ठनेतृत्व ने ऑपरेशन सिंदूर के परिणामों और सैन्य कार्रवाई की समीक्षा करते हुए बढ़ते हवाई खतरों के मद्देनजर स्तरित हवाई क्षेत्र रक्षा तंत्र को मजबूतकरने के लिए विशेष रूप से छोटे मानव रहित हवाई प्रणालियों से निगरानी और काउंटर-ड्रोन क्षमताओं को बढ़ाने पर जोर दिया. पश्चिमी थिएटर मेंसीमा प्रबंधन को पुख्ता किया जाए, इसके लिए सेना और बीएसएफ अपने ऑपरेशन तालमेल को बढ़ाते हुए संयुक्त रूप से अपने युद्ध कौशल कोनिखारेगी. सीमाओं पर दोनों बलों के जवानों व अफसरों को क्या चुनौतियां पेश आ रही हैं और इनसे कैसे निपटा जाए, इस पर भी काम होगा. दोनों केबीच रियल-टाइम इंफॉर्मेशन साझा करना, समन्वय बनाए रखना और इमरजेंसी के दौरान तुरंत निर्णय लेने की क्षमताओं को और विकसित कियाजाएगा. हर वक्त है निपटने के लिए तैयारऑपरेशन सिंदूर के बाद यह भी स्पष्ट हो गया है कि सेना और बीएसएफ को सीमाओं की आकस्मिकताओं से निपटने के लिए हर वक्त तैयार रहनाहोगा. इसी के चलते दोनों अब समन्वित रक्षात्मक लड़ाई लड़ने के लिए ड्रोन, सी-यूएवी, निगरानी और संचार जैसे तालमेल के नए क्षेत्रों में आगे बढ़ेंगे. इसके लिए दोनों बलों के बीच प्रशिक्षण के दायरे, उपकरण साझाकरण और उपकरणों की प्रोफाइल में सामंजस्य को बढ़ाना होगा. सेना औरबीएसएफ ने फैसला लिया है कि दोनों बल अब सीमाओं पर संयुक्त सुरक्षा बल संस्कृति को विकसित करते हुए निरंतर सहयोग और संयुक्तता कीभावना को बढ़ाएंगे. ताकि दोनों बलों के सहयोग से आधुनिक और उभरते हवाई खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके.
थरूर की मोदी तारीफ पर कांग्रेस में मतभेद, खरगे बोले कुछ लोगों के लिए ‘मोदी पहले’ पार्टी ने जताई असहमति

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने हालही में पीएम मोदी की तारीफ करते हुए एक लेख लिखा था. जो सोमवार को एक अखबार में प्रकाशित हुआ था. इसको लेकर कांग्रेस के अंदर मतभेद की बात सामने आई है खुद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शशि थरूर को लेकर चुटकी ली है. खरगे नेकहा, ‘मुझे अंग्रेजी समझ में नहीं आती। उनकी (थरूर) भाषा पर बहुत अच्छी पकड़ है. इसलिए हमने उन्हें CWC सदस्य नियुक्त किया है हमनेभारतीय सेना को अपना समर्थन दिया. हमने कहा कि राष्ट्र पहले है। लेकिन कुछ लोग मानते हैं कि मोदी पहले हैं. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे नेकहा भाजपा हमारी ‘संविधान बचाओ यात्रा’ से घबरा गई है. 50 साल पहले के आपातकाल की बात कर रहे हैं जो लोग अपने कार्यकाल में कुछ नहींकर सके. जिनके पास बेरोजगारी, महंगाई और नोटबंदी के मुद्दों पर कोई जवाब नहीं है. वे झूठ को छिपाने के लिए आज ये नाटक (आपातकाल के 50 साल पूरे होने को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाना) कर रहे हैं. तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर को भी किया था शामिलदरअसल ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब केंद्र सरकार ने अपने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को विदेश भेजा था तो उसमें तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूरको भी शामिल किया था. इस दौरान भी कांग्रेस के अंदर मतभेद की बात सामने आई थी और अब शशि थरूर ने अपने लेख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कीवैश्विक मंच पर एनर्जी, सक्रियता और संवाद की इच्छा को भारत की प्रमुख संपत्ति (प्राइम एसेट) बताया है. जिसके बाद थरूर एक बार फिर कांग्रेस केआलाकमान की नजरों में खटके हैं. हालांकि शशि थरूर के लेख के बाद कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इस मामले पर कांग्रेस का स्टैंड क्लीयरकिया था और कहा था कि ये उनकी (थरूर) निजी राय हो सकती है लेकिन ये कांग्रेस पार्टी की राय नहीं है. सुप्रिया ने केंद्र की विदेश नीति कीआलोचना करते हुए उसे पूरी तरह फेल बताया था. खरगे की चुटकी के बीच शशि थरूर ने एक्स पर एक पोस्ट भी किया इस पोस्ट में उन्होंने एकतस्वीर शेयर की, जिसमें लिखा है उड़ने के लिए अनुमति ना मांगो. पंख तुम्हारे हैं और आसमान किसी का नहीं।’ थरूर के इस पोस्ट की सियासीगलियारों में काफी चर्चा हो रही है और लोग आशंका जता रहे हैं कि क्या थरूर का कांग्रेस से मोह भंग हो गया है?
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का बयान संविधान की प्रस्तावना नहीं बदली जा सकती, यह उसकी है आत्मा

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आपातकाल को लेकर बड़ा हमला बोला है उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में कोई बदलाव नहीं किया जासकता क्योंकि यह वह बीज है जिस पर यह दस्तावेज विकसित होता है. लेकिन भारत के अलावा किसी अन्य देश के संविधान की प्रस्तावना मेंपरिवर्तन नहीं किया गया.एक पुस्तक विमोचन समारोह में उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना को 1976 के 42वें संविधान (संशोधन) अधिनियम द्वारा बदल दियागया. इसमें समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता जैसे शब्द जोड़े गए हमें इस पर विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि बीआर आंबेडकर ने संविधानपर कड़ी मेहनत की थी और उन्होंने इस पर ध्यान केंद्रित किया होगा. समीक्षा करने का उठाया था मुद्दाइससे पहले आरएसएस ने संविधान की प्रस्तावना में शामिल समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्दों की समीक्षा करने का मुद्दा उठाया था. आरएसएस नेकहा था कि इन शब्दों को आपातकाल के दौरान संविधान में शामिल किया गया था और ये कभी भी आंबेडकर द्वारा तैयार संविधान का हिस्सा नहीं थे. संघ से जुड़ी साप्ताहिक पत्रिका ऑर्गेनाइजर में प्रकाशित लेख में कहा गया कि कांग्रेस की तरफ से आपातकाल के दौरान किए गए 42वें संशोधन सेये शब्द संविधान में जोड़े गए थे जो कि संविधान सभा की मूल भावना या बहसों का हिस्सा नहीं थे यह कदम एक ‘राजनीतिक चाल’ थी न किसंविधान सभा के सोच-समझ कर लिए गए फैसले का परिणाम।राष्ट्रीय स्व्यंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने संविधान कीप्रस्तावना में किए गए बदलावों को निरस्त करने के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी से माफी मांगने की मांग भी की. संविधान को नहीं किया है स्वीकारउन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में समाजवाद और पंथनिरपेक्ष शब्द आपातकाल के दौरान ही जोड़े गए थे. कांग्रेस ने होसबाले की टिप्पणी परकड़ी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि संघ ने कभी संविधान को स्वीकार ही नहीं किया. यह आंबेडकर की समावेशी और न्यायपूर्ण भारत की सोचको खत्म करने की एक साजिश है. पार्टी ने कहा कि यह संविधान की आत्मा पर एक जानबूझकर किया गया हमला है. आरएसएस ने संविधान कीप्रस्तावना में समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्दों की समीक्षा करने का मुद्दा उठाया था. अब उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि संविधान कीप्रस्तावना में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता क्योंकि यह वह बीज है जिस पर यह दस्तावेज विकसित होता है.
गोरखपुर में विरासत गलियारा नहीं, बुलडोजर राजनीति चल रही है बोले अखिलेश यादव “जानें क्या है पूरा मामला”

राजधानी लखनऊ में शनिवार को सपा मुख्यालय में अखिलेश यादव ने प्रेस वार्ता को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने गोरखपुर में सपा कार्यकर्ताओंसे हुई अभद्रता को लेकर भाजपा पर निशाना साधा. कहा कि हमारे कार्यकर्ताओं को भाजपा के लोगों ने बुलडोजर लेकर रोका. पीड़ित दुकानदारों सेमिलने नहीं दिया इसमें पुलिस-प्रशासन भी उन्हीं लोगों का साथ दे रहा था. सपा मुखिया अखिलेश यादव ने आगे कहा कि सीएम ने गोरखपुर के लिएसबसे पहली घोषणा झांसी से की थी. उन्होंने कहा था कि झांसी और गोरखपुर में मेट्रो बनाएंगे सरकार के नौ साल होने जा रहे हैं. ना तो झांसी में मेट्रोमें बनी ना ही गोरखपुर में आज गोरखपुर में गोरखधंधा चल रहा है. मुआवजी आपसी सहमतियदि गोरखपुर वालों ने अपने मुंह खोल दिए तो वहां पर विरासत गलियारा की जगह हिरासत गलियारा बनवाना पड़ेगा.गोरखपुर में जमीन मकान कामुआवजा आपसी सहमति से नहीं, बल्कि बाजार की कीमत के हिसाब से देना चाहिए. सरकार पुलिस को आगे करके डरा धमकाकर व्यापारियों औरस्थानीय लोगों से जबरदस्ती सहमति पत्र जारी करा रही है. सीएम योगी को निशाने पर लेते हुए कहा कि जब उनकी खुद की जमीन का मामला था तोसर्वाधिक संभव मुआवजा लिया. जमीन देने की बात कहकर वाहवाही भी लूटी. कारिडोर के नाम पर लूट तंत्र सक्रिय है यह आसपास के लोंगो कीजमीन औने-पौने दाम में ले लेते हैं. बाद में ऊंचे दाम में बेच देते हैं या फिर वहां पर व्यापार करते हैं भाजपा वाले मलाई काट रहे हैं स्थानीय लोगों केसाथ धोखा हो रहा है. जहां जमीन दिखती है भाजपा उस पर कब्जा करने लगती है यही कारण रहा कि अयोध्या और प्रयागराज में लोकसभा सीट हारी. सेकुलरिज्म का कर रहे विरोधबनारस हारते-हारते बची है अब अगला नंबर मथुरा और गोरखपुर का है. अखिलेश ने आगे कहा कि गोरखपुर के डीएम व एसएसपी पर अभी कार्रवाईनहीं हुई तो सपा सरकार बनने पर इन अधिकारियों पर कार्रवाई होगी. जो लोग आरक्षण के विरोधी हैं वह सोशलिस्ट व सेकुलरिज्म का विरोध कर रहेहैं. भाजपा ने अपनी स्थापना के वक्त तय किया था कि सोशलिज्म व सेकुलरिज्म के रास्ते पर चलेगी. अब यह लोग इसका विरोध कर रहे हैं यह लोगनफरत फैला कर राजनीति करते हैं यह सीधे संविधान के खिलाफ नहीं बोल सकते इसलिए सेकुलरिज्म व सोशलिस्ट का विरोध कर रहे हैं. दरअसलसरकार ने गोरखपुर में विरासत गलियारा बनाने की घोषणी की है. इससे वहां के दुकानदार प्रभावित हो रहे हैं इसको लेकर सपा का एक प्रतिनिधिमंडलउन दुकानदारों से मिलने गया था वहां पर भाजपाइयों ने उनको दुकानदारों से नहीं मिलने दिया.