BSP की बिहार में पूरी ताकत से एंट्री, गठबंधन से इनकार आकाश आनंद फिर सक्रिय

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है मायावती के भतीजेआकाश आनंद के लिए बिहार चुनाव एक बड़ी चुनौती होगी. ऐसा इसलिए है क्योंकि पार्टी में मची भारी उठापटक के बीच आकाश की वापसी हुई. इससे पहले मायावती की उनसे नाराजगी खबरें सामने आ रही थीं विधानसभा चुनाव इस साल के अंत में होने हैं.बहुजन समाज पार्टी बिहार में सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी. बसपा के राज्यसभा सांसद सह नेशनल कोऑर्डिनेटर रामजी गौतम ने बीते दिनकहा’बीएसपी बिहार चुनाव की तैयारी कर रही है. हम सभी सीटों पर अकेले लड़ेंगे. जयंती समारोह का किया आयोजनइससे पहले पटना मे बसपा ने छत्रपति शाहू जी महाराज की जयंती समारोह का आयोजन किया. इस दौरान बसपा सुप्रीमो मायावती के भतीजे औरमुख्य राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद खुद मौजूद रहे. इससे पहले अप्रैल में रामजी गौतम ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा एलानकिया था. उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि पार्टी बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी. वह किसी भी पार्टी से गठबंधन नहींकरेगी. पटना में प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा था कि अगर बहुजन समाज पार्टी की सरकार बिहार में बनती है तो मायावती की ओर से गरीबों औरवंचितों के लिए शुरू की गई योजनाओं को उत्तर प्रदेश की तरह यहां भी लागू किया जाएगा. आगे भी करती रहेगी सम्मान के लिए कामबसपा समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के अधिकार और सम्मान के लिए काम करती रही है और आगे भी करती रहेगी.पार्टी की तैयारी मेंमायावती के भतीजे आकाश आनंद की वापसी अहम मानी जा रही है.पटना में आयोजित छत्रपति शाहू जी महाराज जयंती समारोह में उनकी सक्रियभागीदारी ने नेतृत्व को लेकर फिर संकेत दिए हैं. पार्टी ने गरीब, दलित और वंचित तबके के लिए यूपी जैसी योजनाओं को बिहार में लागू करने की बातकही है.
पश्चिम बंगाल में महिला सुरक्षा पर गरमाई सियासत, भाजपा ने ममता बनर्जी से मांगा इस्तीफा

पश्चिम बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सियासत गर्मा गई है. कोलकाता के एक लॉ कॉलेज में छात्रा से कथित गैंगरेप की घटनाने पूरे राज्य को हिला दिया है. विपक्ष ने इस मुद्दे पर ममता बनर्जी सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है भाजपा नेताओं ने कहा कि राज्य में छात्राएंसुरक्षित नहीं हैं.भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष और केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने शुक्रवार को बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि लॉकॉलेज में छात्रा के साथ गैंगरेप की घटना साबित करती है कि राज्य में छात्राएं सुरक्षित नहीं हैं. उन्होंने दावा किया कि राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरहचरमरा चुकी है जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद पुलिस विभाग देखती हैं. रेप और हत्या की हुई थी घटनामजूमदार ने याद दिलाया कि इससे पहले आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक डॉक्टर के साथ रेप और हत्या की घटना हुई थी. जिसने पूरे देश में गुस्सेकी लहर पैदा कर दी थी अब लॉ कॉलेज में हुई घटना ने साफ कर दिया है कि राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं. भाजपा नेता नेहाल ही में कालीगंज विधानसभा उपचुनाव के नतीजों से पहले टीएमसी की विजय रैली के दौरान बम धमाके में एक लड़की की मौत का भी जिक्रकिया. उन्होंने कहा कि बंगाल में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और सरकार इसे रोकने में नाकाम है. राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदुअधिकारी ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इस्तीफा दे देना चाहिए. जल्द किया जाएगा बड़ा प्रदर्शनउन्होंने ऐलान किया कि इस घटना के खिलाफ जल्द ही बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा. अधिकारी ने आरोप लगाया कि कोलकाता पुलिस के वरिष्ठअधिकारी उस समय दीघा में मौजूद थे जहां ममता बनर्जी रथ यात्रा में शामिल हो रही थीं. वहीं तृणमूल कांग्रेस के नेता जयप्रकाश मजूमदार ने विपक्षसे अपील की कि वे इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय अपराध रोकने के लिए रचनात्मक रवैया अपनाएं. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने केलिए सभी दलों को मिलकर प्रयास करना चाहिए. फिलहाल पुलिस मामले की जांच के कर रही है. कोलकाता के लॉ कॉलेज में छात्रा से गैंगरेप कीघटना ने पूरे बंगाल को झकझोर दिया है. भाजपा नेता सुकांत मजूमदार ने राज्य में छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं विपक्ष के नेता सुवेंदुअधिकारी ने ममता बनर्जी से इस्तीफा मांगा है. आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना के बाद यह दूसरी बड़ी वारदात है.
संवेदनशील मामलों में महिला डॉक्टर अनिवार्य, वीडियोग्राफी भी होगी जरूरी यूपी सरकार का नया फैसला

पोस्टमार्टम के लिए पीड़ित परिवारों को अब अधिक इंतजार नहीं करना होगा. डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने दु:ख की घड़ी में परिजनों की पीड़ा कमकरने के लिए पोस्टमार्टम को अधिकतम चार घंटे में करने के निर्देश दिए हैं. डिप्टी सीएम के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव पार्थ सारथीसेन शर्मा ने पोस्टमार्टम की नई गाइड लाइन जारी कर दी हैं. प्रदेश भर के पोस्टमार्टम हाउस में नई व्यवस्था लागू कर दी गई है अब शव का पोस्टमार्टमअधिकतम चार घंटे में करना होगा. जिन जिलों में अधिक संख्या में पोस्टमार्टम हो रहे हैं. इंतजार करना न पड़ेवहां सीएमओ दो या इससे अधिक डॉक्टरों की टीमें बनाकर इस संवेदनशील कार्य को संपन्न कराएं ताकि परिजनों को शव के लिए अधिक इंतजार नकरना पड़े.डिप्टी सीएम ने बताया कि सूर्यास्त के बाद नियमानुसार पोस्टमार्टम कराया जाए. जल्द से जल्द शव के साथ संबंधित अभिलेख भीपोस्टमार्टम हाउस भेजे जाएं. रात में पोस्टमार्टम की दशा में 1000 वॉट लाइट की कृत्रिम व्यवस्था की जाए. दूसरे जरूरी संसाधन भी पर्याप्त हों ताकि24 घंटे पोस्टमार्टम की कार्रवाई चलती रहे. हत्या, आत्महत्या, यौन अपराध, क्षत-विक्षत शव व संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु संबंधी प्रकरणों में रात मेंपोस्टमार्टम न कराएं जाएं. हालांकि अपरिहार्य कारणों में जिला मजिस्ट्रेट व उनके अधिकृत अधिकारी की अनुमति पर रात में भी पोस्टमार्टम कराया जासकता है. कराई जाए वीडियोग्राफीकानून व्यवस्था से जुड़े प्रकरण, एनकाउंटर, पुलिस अभिरक्षा में मृत्यु, विवाह के प्रथम 10 वर्षों में हुई महिला की मृत्यु आदि में रात में होने वालेपोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराई जाए. शासनादेश के मुताबिक पैनल के तहत होने वाले पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी अवश्य कराई जाए. इसकापैसा पीड़ित परिजनों से नहीं लिया जाए वीडियोग्राफी का भुगतान रोगी कल्याण समिति व अन्य मदों से किया जाए. पोस्टमार्टम की रिपोर्ट ऑनलाइनकी जाए इसमें किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए. डिप्टी सीएम ने कहा कि पोस्टमार्टम हाउस में एक कम्प्यूटर ऑपरेटर व दो डाटा इंट्रीऑपरेटर सीएमओ द्वारा तैनात किए जाएं शव को अस्पताल से पोस्टमार्टम हाउस ले जाने के लिए वाहन का इंतजाम किया जाए सीएमओ प्रत्येकजिले में दो शव वाहन की व्यवस्था करें.महिला अपराध, रेप, विवाह के प्रथम 10 वर्षों के भीतर महिला की मृत्यु की दशा में पोस्टमार्टम पैनल मेंमहिला डॉक्टर अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए. अज्ञात शव की पहचान के लिए डीएन सैम्पलिंग कराई जाए.
दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने किया निजामुद्दीन रैन बसेरा का औचक निरीक्षण, व्यवस्थाओं पर जताई नाराज़गी

दिल्ली सरकार में मंत्री आशीष सूद ने गुरुवार को निजामुद्दीन स्थित रैन बसेरा (रात्रि आश्रय केंद्र) का औचक निरीक्षण किया। यह रैन बसेरा उनयोजनाओं का हिस्सा है जिन्हें दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) के माध्यम से संचालित किया जाता है। इनका उद्देश्य बेघर और आर्थिकरूप से कमजोर नागरिकों को सुरक्षित, सम्मानजनक और मुफ्त रात्रि आश्रय प्रदान करना है। रैन बसेरे में आमतौर पर बिस्तर, कंबल, पीने का पानी, शौचालय और कुछ मामलों में भोजन जैसी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। लेकिन मंत्री के निरीक्षण के दौरान इन व्यवस्थाओं की पोलखुलती नजर आई। अव्यवस्थाओं पर मंत्री आशीष सूद ने जताई सख़्त नाराज़गी- निरीक्षण के दौरान मंत्री आशीष सूद ने पाया कि रैन बसेरे की स्थिति बेहद खराब है।सफाई व्यवस्था न के बराबर थी, और मरीजों से ही सफाई का कार्य करवाया जा रहा था। इतना ही नहीं, सरकार द्वारा हर मरीज से ₹6000 रुपएसफाईकर्मी के नाम पर लिए जाने की बात भी सामने आई, जिससे मंत्री ने कड़ा ऐतराज जताया।मंत्री ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा यह अत्यंत शर्मनाक है कि जिन लोगों को सरकार की सहायता की सबसे अधिक आवश्यकता है, उन्हेंइस प्रकार की बदहाल व्यवस्था में रखा जा रहा है। ऐसे केंद्रों का उद्देश्य बेघरों को सहारा देना है, शोषण करना नहीं। अफगान नागरिक की उपस्थिति पर रखी गई विशेष निगरानी – निरीक्षण के दौरान एक अफगान नागरिक, मोहम्मद सादिक भी रैन बसेरे में पाए गए।बातचीत में उन्होंने बताया कि वे पिछले 40 वर्षों से भारत में रह रहे हैं, और पिछले तीन वर्षों से इस रैन बसेरे में ठहरे हुए हैं। उनका परिवार अब भीअफगानिस्तान में रहता है। उनकी स्थिति को गंभीर मानते हुए मंत्री आशीष सूद ने अधिकारियों को उन पर विशेष निगरानी रखने और उनके दस्तावेजोंकी जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।सरकार से अपेक्षित है त्वरित कार्रवाई – इस पूरे निरीक्षण के बाद मंत्री ने आश्वासन दिया कि रैन बसेरे में पाई गई अव्यवस्थाओं पर जल्द कार्रवाई कीजाएगी। उन्होंने DUSIB को निर्देश दिया कि साफ़-सफ़ाई, भोजन, और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार सुनिश्चित किया जाए और ऐसेकेंद्रों की नियमित निगरानी की जाए। रैन बसेरों का उद्देश्य केवल एक छत देना नहीं है, बल्कि एक गरिमामय जीवन की बुनियादी शुरुआत करना भीहै।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी नहीं, अब नेशनल करप्शन एजेंसी बन चुकी है- शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल- कन्हैया कुमार

देश की सबसे बड़ी परीक्षा एजेंसी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी एक बार फिर विवादों के घेरे में है। विपक्षी दलों, शिक्षा विशेषज्ञों और छात्र संगठनों काआरोप है कि यह संस्था अब “नेशनल करप्शन एजेंसी” बन गई है। हर साल जैसे ही राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा या कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्टजैसी परीक्षाएं होती हैं, किसी न किसी नए घोटाले का खुलासा होता है। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा पर फिर से उठाविवाद हाल ही में केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी प्रथम सूचना रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इस एफआईआर में पैसे लेकरऑप्टिकल मार्क रिकॉग्निशन। शीट बदलने की बात कही गई है। दो लोगों की गिरफ़्तारी हो चुकी है और तीन लोग अब भी फरार हैं। यह पूरा मामलाभ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (एंटी करप्शन एक्ट) के तहत दर्ज किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस गड़बड़ी में कोई न कोई बड़ा हाथ जरूरहै। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि केंद्रीय जांच ब्यूरोयह दावा कर रही है कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी का कोई अधिकारी इसमें शामिल नहीं है। ऐसेमें सवाल उठता है कि जब किसी अधिकारी की भूमिका नहीं है, तो फिर मामला एंटी करप्शन एक्ट के तहत क्यों दर्ज हुआ? स्वास्थ्य सेवा की नींवहिल रही है राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के ज़रिये देशभर के मेडिकल कॉलेजों में दाख़िले होते हैं। यानी इस परीक्षा से ही तय होता है कि देश केभविष्य के डॉक्टर कौन होंगे। ऐसे में अगर इस राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं, तो यह केवल शिक्षा नहीं, बल्कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ को हिला देने वाला मामला है। हर साल विवाद, हर साल चुप्पी पिछले कई वर्षों से परीक्षा हर बार विवादोंमें घिरती है। कभी पेपर लीक, कभी मार्किंग में गड़बड़ी, तो कभी परिणामों की घोषणा में अनियमितता। लेकिन हर बार सरकार की तरफ से सिर्फखानापूर्ति होती है। कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। मोदी सरकार के कार्यकाल में शिक्षा क्षेत्र की बदहाली- वर्तमान सरकार के कार्यकाल में शिक्षा क्षेत्र की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही हैशिक्षा बजट में कटौती की जा रही हैकोई भी परीक्षा सही तरीके से आयोजित नहीं हो रहीविद्यालयों और विश्वविद्यालयों की स्थिति बदतर होती जा रही हैहर परीक्षा में गड़बड़ियों का सिलसिला थम नहीं रहा कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट के ज़रिये प्राइवेट कॉलेजों को फायदा – कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट परीक्षा के डेटा लीक की भी खबरें सामने आई हैं।आरोप है कि पेपर होने के बाद प्राइवेट कॉलेजों को छात्र डेटा मिल जाता है, जिससे वे छात्रों के अभिभावकों को कॉल करके एडमिशन के लिए दबावबनाते हैं। साथ ही यह भी देखा गया है कि जानबूझकर सार्वजनिक विश्वविद्यालयों की प्रवेश प्रक्रिया में देरी की जाती है, ताकि पहले प्राइवेट कॉलेजोंकी सीटें भर जाएं। इससे यह साफ होता है कि यह एक सुनियोजित व्यापारिक मॉडल बन चुका है, जिसमें शिक्षा का बाजारीकरण हो रहा है। छात्रों में बढ़ता तनाव, आत्महत्याएं चिंताजनकआज देश में हर एक घंटे में दो छात्र आत्महत्या कर रहे हैं। इसके पीछे परीक्षा प्रणाली की अव्यवस्था, मानसिक दबाव, और पारदर्शिता की कमी जैसेकई कारण हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार को इस ओर गंभीरता से ध्यान हीं देना चाहिए? कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट ने विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता छीनी – देश के 300 से अधिक विश्वविद्यालय अब कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट के ज़रियेप्रवेश कराते हैं। पहले जिन विश्वविद्यालयों के पास इन-हाउस प्रवेश प्रणाली थी, उन्हें भी मजबूर किया गया कि वे कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्टअपनाएं। कारण यह है कि यूजीसी का अनुदान (ग्रांट) उन्हीं को मिलेगा, जो कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट के माध्यम से दाखिला करेंगे। इससेविश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और गुणवत्ता पर भी आघात हुआ है। जांच क्यों नहीं? दोषियों को बचाया क्यों जा रहा है? अब जब केंद्रीय जांच ब्यूरोकी प्राथमिकी खुद गड़बड़ियों की पुष्टि कर रही है, तो सरकार को चाहिए कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी के अधिकारियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए. हर साल हो रही अनियमितताओं पर स्थायी समाधान निकाला जाएशिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को राजनीति और व्यापार से बाहर रखा जाएपरीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए प्रधानमंत्री केवल ‘परीक्षा पर चर्चा’ करते हैं, लेकिन ज़रूरत है कि वे ‘परीक्षा पर कार्रवाई’ भी करें। देश का भविष्य बना रही परीक्षा प्रणाली आज संदेह, अविश्वास और भ्रष्टाचार की शिकार हो चुकी है। यदि समय रहते इसका समाधान नहीं किया गया, तो यह देश के शिक्षा और स्वास्थ्य तंत्र कोअपूरणीय क्षति पहुंचा सकती है। अब वक्त है कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी जैसी संस्थाओं की जवाबदेही तय की जाए और देश के युवाओं को भरोसेमंदव्यवस्था दी जाए।
स्टार हेल्थ इंश्योरेंस की धोखाधड़ी उजागर इलाज के वक्त नहीं मिला क्लेम, पत्रकार को धमकाने की शर्मनाक हरकत

सिद्धार्थ के पापा की लंबी बीमारी के बाद 20 मई को स्वर्गवास हुआ उसके पापा के इलाज के खर्चे से उसकी आर्थिक स्थिति डगमगा गई थी। वहअसहाय सा महसूस कर रहा था. पहले कभी ऐसा हुआ नही था. कुछ दिनों बाद अचानक 18 जून की शाम को सीने में जलन सी हुई वो ख्यातिप्राप्तचिकित्सक डा. मधुप बक्षी को दिखाने उनके घर पहुंचा इसीजी के बाद उसे जिले के सबसे बड़े और सुविधाजनक बिरला हास्पिटल में एडमिट करादिया गया. अगले दिन एंजियोग्राफी कराने की सलाह मिलने पर सिद्धार्थ को उदयपुर जीबीएच अमेरिकन हास्पिटल ले जाया गया. डा. डेनी मंगलानीऔर कपिल भागर्व की गिनती मेवाड़ के अच्छे चिकित्सकों में की जाती है. डा. मंगलानी ने एंजियोग्राफी के बाद आई रिपोर्ट की जानकारी दी औरबताया कि सिद्धार्थ को दो स्टेंट और एक बलून लगाया जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि यह अभी लगाने जरूरी है अन्यथा कुछ भी हो सकता है. बसयहीं से शुरू हुआ स्टार हेल्थ इंश्योरेंस का खेल सिद्धार्थ पिछले पांच सालों से स्टार हेल्थ इंश्योरेंस की प्रीमियम भर रहा था. पहले कभी क्लेम नहीकिया था क्यों कि वह स्वस्थ ही था उसे लगा कि जब कभी शारीरिक संकट आएगा तो स्टार हेल्थ इंश्योरेंस से मदद मिल जाएगी। लेकिन ऐसा नहीहुआ. सोशल मीडिया पर दी थी स्टार हेल्थ इंश्योरेंस की धोखाधड़ी की जानकारीराजस्थान मीडिया एक्शन फोरम की टीम ने सोमवार रात्रि 10 बजे स्टार हेल्थ इंश्योरेंस की धोखाधड़ी की जानकारी सोशल मीडिया पर दी मंगलवारसुबह लगभग 9 बजकर पचास मिनिट पर सिद्धांशु बीकानेरिया नामक व्यक्ति का मोबाइल काल आया और उन्होंने अपने आप को स्टार हेल्थ इंश्योरेंसका सेल्स मैनेजर बताया और मामले की जानकारी ली. जब मरीज की बहन ने उन्हें पूरी बात बताई तो उन्होंने बताया कि पांच साल लगातार प्रीमियमभरने वाले से तीन माह पहले हुई किसी बीमारी का कागज स्टार हेल्थ इंश्योरेंस नही मांग सकता है. अगर उन्होंने मांगा तो गलत है। बाद में उन्होंनेइलाज के बिल लगाने के लिए कहकर अपनी बात खत्म कर दी. स्टार हेल्थ इंश्योरेंस के सेल्स मेनेजर सिद्धांशु बीकानेरिया से हुई बात की जानकारी भीराजस्थान मीडिया एक्शन फोरम के पदाधिकारियों ने सोशल मीडिया पर दी. जिस पर स्टार हेल्थ इंश्योरेंस के सेल्स मेनेजर सिद्धांशु बीकानेरिया नेउसका नाम हटाने के लिए कहा. राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम के टीम के साथ ही फोरम के संस्थापक अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकारअनिल सक्सेना ने भी सोशल मीडिया पर स्टार हेल्थ इंश्योरेंस की धोखाधड़ी की जानकारी दी थी. गुरूवार को सुबह स्टार हेल्थ इंश्योरेंस मुम्बई के वरिष्ठ सेल्स मेनेजर जीग्नेश गोर ने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस की सोशल साइट पर अनिल सक्सेना के कमेंट को टेग करते हुए बदतमीजी से तू-तड़ाक कर धमकाते हुए कहा कि ‘‘सब जगह ललकारने से क्लेम मिल जाएगा तुझे” इसके जवाब में अनिल सक्सेना ने लिखा ‘‘ आपके कहे से मैंडर गया हूं , मानसिक प्रताड़ना पहले से थी कृपया आप मुझे नही धमकाये. धोखाधड़ी को बताया निंदनीयउनके इस कमेंट को एडमिन ने एप्रुव नही किया लेकिन थोड़ी देर बाद ही जीग्नेश का कमेंट भी दिखना बंद हो गया. (वरिष्ठ पत्रकार अनिल सक्सेना नेस्टार हेल्थ इंश्योरेंस मुम्बई के वरिष्ठ सेल्स मेनेजर जीग्नेश गोर के धमकी भरे कमेंट का स्क्रीनशॅाट ले लिया था,राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम केमहासचिव अशोक लोढा ने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस मुम्बई के वरिष्ठ सेल्स मेनेजर जीग्नेश गोर के द्वारा वरिष्ठ पत्रकार के साथ की गई बदतमीजी और दीगई धमकी की निंदा की है. उन्होंने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस के आला अधिकारियों से गोर को बर्खास्त करने की मांग की है. यूथ मूवमेंट, राजस्थान ने […]
भारत ने यूएन में पाकिस्तान को बच्चों पर अत्याचार आतंकवाद के मुद्दे पर दिया करारा जवाब, नापाक एजेंडा किया बेनकाब

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को करारा जवाब दिया. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पार्वथानेनी हरीश ने कहा कि पाकिस्तानअपने नापाक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न चर्चाओं में भारत को बदनाम कर रहा है. ऐसा करके पाकिस्तान अपने ही देश में बच्चों के खिलाफकिए जा रहे अत्याचारों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है. भारत ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में पाकिस्तान को कराराजवाब दिया. भारत ने कहा कि पाकिस्तान अपने क्षेत्र में बच्चों के अत्याचार के मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा कि बच्चों केखिलाफ अत्याचार और आतंकवाद फैलाने वाले पाकिस्तान का संयुक्त राष्ट्र में उपदेश देना घोर पाखंड है. न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में बच्चों और सशस्त्रसंघर्ष (सीएएसी) पर वार्षिक खुली बहस के दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पार्वथानेनी हरीश ने कहा कि मैं पाकिस्तान के प्रतिनिधि की ओरसे की गई राजनीति से प्रेरित टिप्पणियों पर खारिज करता हूं. गलत तरीके से संदेह कर रहे है व्यक्तपाकिस्तान सीएएसी एजेंडे के गंभीर उल्लंघनकर्ताओं में से एक है पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र की प्रक्रियाओं पर गलत तरीके से संदेह व्यक्त कर रहा है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने नापाक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न चर्चाओं में भारत को बदनाम कर रहा है. ऐसा करके पाकिस्तान अपनेही देश में बच्चों के खिलाफ किए जा रहे अत्याचारों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है. भारत इसे अस्वीकार करता है. इसके अलावा भारत सीमापार से किए जा रहे बड़े पैमाने पर आतंकवाद को भी अस्वीकार कर रहा है. भारत के स्थायी प्रतिनिधि और राजदूत पार्वथानेनी हरीश ने कहा कि हमारीदुनिया संघर्षों और आतंकी हमलों में एक खतरनाक वृद्धि देख रही है और बच्चे उनके सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं यूएनएसजी की रिपोर्ट के अनुसारबच्चों के खिलाफ गंभीर उल्लंघन 25 प्रतिशत बढ़ गए हैं जबकि 2024 में यौन हिंसा 35 प्रतिशत बढ़ गई है यह गंभीर स्थिति तत्काल और निर्णायककार्रवाई की मांग करती है इसलिए आज की चर्चा जरूरी और आवश्यक दोनों है. सामाजिक समर्थन की है आवश्यकताउन्होंने कहा कि बच्चों के समग्र विकास के लिए एक सक्षम वातावरण बनाना बाल संरक्षण के लिए मौलिक है उनकी सुरक्षा, पोषण और शिक्षा कोराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए. संघर्ष और संघर्ष के बाद की स्थितियों में बच्चों को समाज में उनके सफल पुन: एकीकरण केलिए विशेष ध्यान और मनोवैज्ञानिक-सामाजिक समर्थन की आवश्यकता होती है. इन आवश्यक पारिस्थितिकी प्रणालियों के निर्माण के लिए राज्यद्वारा निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पार्वथानेनी हरीश ने कहा कि दुनिया 22 अप्रैल 2025 कोपहलगाम में पाकिस्तान और पाकिस्तान द्वारा प्रशिक्षित आतंकवादियों के भारत में 26 पर्यटकों को मार डालने वाले हमलों को नहीं भूली है. सीएएसीपर महासचिव की रिपोर्ट पाकिस्तान में सशस्त्र संघर्ष में बच्चों के खिलाफ गंभीर उल्लंघनों को उजागर करती है। महासचिव ने स्कूलों, विशेष रूप सेलड़कियों के स्कूलों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के खिलाफ हमलों सहित इस तरह के गंभीर उल्लंघनों में वृद्धि पर चिंता व्यक्त की है.
CM भगवंत मान ने बिक्रम मजीठिया की गिरफ्तारी पर विपक्ष को दिया करारा जवाब, कहा बड़ी मछलियों पर भी होगी कार्रवाई

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि अकाली दल के नेता व पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ कार्रवाई पूरे कागज जुटाकर और पक्केपैरी की गई है. विपक्ष काफी समय से आरोप लगा रहा था कि बड़ी मछलियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है. अब जब वह बड़ी मछलियों केखिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं तो पूरा विपक्ष एकजुट हो गया.उन्होंने कहा कि यह अब मुझे भी नुकसान पहुंचा सकते हैं लेकिन मैं डरने वाला नहीं हूं. आजभी मैंने कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेना है और पहले की तरह ही हिस्सा लेना जारी रखूंगा जिस तरह से विपक्षी नेता इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं. उससे यह स्पष्ट है कि और भी नेता इसमें शामिल हो सकते हैं जिनके खिलाफ जल्द ही कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों और भीबड़े नेता गिरफ्तार होंगे और महत्वपूर्ण बरामदगी की जाएगी. मान ने कहा कि कोई भी नेता जितना भी राजनीतिक रूप से ताकतवर हो लेकिन उसकोछोड़ नहीं जाएगा. लेनदेन के आधार पर की गई कार्यवाईउन्होंने कहा कि एनडीपीएस के पर्चे, पैसे की लेनदेन के आधार पर यह कार्रवाई की गई है 29 मोबाइल पकड़े गए हैं और चार लैपटॉप बरामद किएगए हैं इतने मोबाइल का किसी ने क्या करना है. इन नेताओं को ऐसा लगता था कि ये कौनसा हमारे पास आयेंगे यही कारण हैं अब कार्रवाई के बादविरोध कर रहे.मान ने कहा कि मामले में ईडी की भी एंट्री हो सकती है. साथ ही और भी बड़े मगरमच्छ पकड़े जा सकते हैं पहले भी ईडी ने कार्रवाई कीथी और वह दोबारा भी एजेंसी कार्रवाई कर सकती है. पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम मजीठिया को बुधवार को उनके अमृतसर निवास से मनी लान्डि्रगमामले में गिरफ्तार किया गया था. लेकिन यह कार्रवाई पूरे सबूतों के साथ की गई है. मान ने साफ किया कि आने वाले दिनों में और भी बड़े नेतागिरफ्तार होंगे और महत्वपूर्ण बरामदगी होगी. इस कार्रवाई में 29 मोबाइल फोन और चार लैपटॉप बरामद किए गए हैं उन्होंने यह भी कहा कि मामलेमें ईडी की भी एंट्री हो सकती है.
संघर्ष विराम के बाद ईरान से 272 भारतीय नागरिक सुरक्षित भारत लौटे, ऑपरेशन सिंधु के तहत कुल 3,426 लोग वापस

इस्राइल-ईरान में संघर्ष विराम के बाद भी भारतीय नागरिकों को वापस देश लाने का सिलसिला जारी है. बुधवार की रात 272 भारतीय और तीननेपाली नागरिकों को सुरक्षित राजधानी दिल्ली लाया गया. ऑपरेशन सिंधु के तहत अब तक कुल 3,426 नागरिकों वापस लाया जा चुका है. ईरान मेंस्थित भारतीय दूतावास ने संघर्ष विराम को देखते हुए निकसी डेस्क को बंद करने की घोषणा की है.पश्चिम एशिया से भारतीय नागरिकों का एक औरखेप बुधवार की रात को राजधानी दिल्ली पहुंचा. संघर्ष प्रभावित ईरान के मशहद में फंसे 272 भारतीय और तीन नेपाली नागरिकों को सुरक्षित वापसलाया गया. भारतीय नागरिकों को लाया गया वापसबता दें कि ऑपरेशन सिंधु के तहत अब तक कुल 3,426 भारतीय नागरिकों को वापस लाया जा चुका है. ऑपरेशन सिंधु ईरान और इस्राइल की बीचबढ़ते संघर्ष को देखते हुए भारत सरकार ने शुरू किया था. दोनों देशों के बीच भले ही संघर्ष विराम की घोषणा हो गई है लेकिन स्थिति अब भी सामान्यनहीं हुई है. तनावपूर्ण ईरान से लौटे लोगों ने भारतीय सरकार, खासकर प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि उन्हें किसी कठिनाई कासामना नहीं करना पड़ा ईरानी और भारतीय दोनों सरकारों ने हमारे साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया. ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार को बतायाकि दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम को देखते हुए भारतीय नागिरकों को भारत लाने की प्रक्रिया धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी. सोशल मीडिया पर किया पोस्टदूतावास ने सोशल मीडिया एक्स पर इससे संबंधित पोस्ट किया. उन्होंने कहा कि दूतवास ने संपर्क डेस्क बंद कर दिया है. जो निकासी के लिए नएनामों को पंजीकृत करने के लिए खोला गया था साथ ही भारत सरकार उभरती स्थिति पर निरंतर नजर रख रही है और ईरान में भारतीय नागरिकों कीसुरक्षा के लिए फिर से खतरा होने की स्थिति में अपनी रणनीति का पुनर्मूल्यांकन करेगी. इस्राइल और ईरान ने मंगलावर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्डट्रंप की ओर से प्रस्तावित संघर्ष विराम को स्वीकार कर लिया. इससे पश्चिम एशिया में 12 दिनों से चल रहे युद्ध पर विराम लग गया.
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुजरात इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी 2025 की घोषणा, राज्य को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनानेका लक्ष्य

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात की पॉलिसी ड्रिवन स्टेट के रूप में स्थापित हुई इमेज को व्यापक बनाने के लिए एकऔर पॉलिसी ‘गुजरात इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी 2025 (जीईसीएमएस)’ की घोषणा की है. गुजरात को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्समैन्युफैक्चरिंग का पावर हाउस बनाने की मंशा के साथ मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा घोषित की गई इस पॉलिसी की विशेषता यह है कि केन्द्र सरकार केइलेक्ट्रॉनिक्स तथा इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) द्वारा मंजूरी तथा सहायता प्राप्त इकाइयों को गुजरात में भी केन्द्रीय मानदंड केअनुसार 100 प्रतिशत सहायता प्रोत्साहन मिलेगा. सरकार के दोहरे प्रोत्साहन लाभ हो सकेंगें प्राप्तयानी कि गुजरात में स्थापित होने वाले एमईआईटीवाई स्वीकृत प्रोजेक्ट्स को केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार के दोहरे प्रोत्साहन लाभ प्राप्त हो सकेंगे. यह पॉलिसी केन्द्र सरकार की ईसीएमएस पॉलिसी से सुसंगत है और इसके तहत 100 प्रतिशत टॉपअप का अनुकरण कर आसानी से कम से कमसमय में सहायता प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जाएंगे.इतना ही नहीं, एमईआईटीवाई द्वारा एक बार ईसीएमएस अंतर्गत प्रोजेक्ट मंजूर होने के बाद राज्य मेंस्थापित होने वाले प्रोजेक्ट्स स्वतः समान अनुदान – सहायता के पात्र बनेंगे और केन्द्र सरकार द्वारा सहायता का भुगतान किए जाने के बाद 30 दिन मेंराज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहन सहायता का भुगतान कर दिया जाएगा. गुजरात देश के इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट लैंडस्केप में मैन्युफैक्चरिंग हब. ऑटो हब कीप्रतिष्ठा वाला राज्य बना है. रेजिलिएंस में होगी वृद्धिराज्य में चार सेमीकंडक्टर प्लांट्स भी कार्यरत हैं. ऐसे में अब इस पॉलिसी के परिणामस्वरूप अपस्ट्रीम इंडस्ट्री को भी वेग मिलेगा और इसके चलतेआयात पर निर्भरता घटेगी एवं टेक्नोलॉजिकल रेजिलिएंस में वृद्धि हो सकेगी.इस पॉलिसी द्वारा राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में35 हजार करोड़ रुपए से अधिक के नए निवेश तथा अधिकाधिक हाईस्किल्ड एम्प्लॉयमेंट का लक्ष्य रखा गया है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा घोषितकी गई इस जीईसीएमएस पॉलिसी के फलस्वरूप राज्य में मल्टीलेयर तथा एचआईडी प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, लिथियम आयन सेल, एसएमडी पैसिवकम्पोनेंट्स, डिसप्ले एवं कैमरा मॉड्यूल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स तथा उसके उत्पादन के लिए आवश्यक मशीनरी आदि जरूरी उद्योगों व इकाइयों कोराज्य में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलने लगेगा.