1960 के सिंधु जल समझौते को स्थगित करने का भारत का ऐतिहासिक फैसला, पानी नहीं जाएगा कहीं

सिंधु जल संधि पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा यह फैसला भारत सरकार और प्रधानमंत्री का है। संधि स्थगित होने के बारे में कोईअपडेट नहीं है. जो भी फैसला लिया जाएगा उससे देश को ही फायदा होगा. संधि पर बिलावल भुट्टो के कथित बयान पर पाटिल ने कहा, पानी कहींनहीं जाएगा. वह जो कहते हैं वह उनका अपना सवाल है। हम झूठी धमकियों से नहीं डरते. इससे पहले पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टोजरदारी ने बेफिजूल बयान देते हुए कहा था कि यदि भारत सिंधु जल संधि के तहत इस्लामाबाद को पानी का उचित हिस्सा देने से इनकार करता है. 1060 के समझोते को किया गया था स्थगिततो उनका देश युद्ध की ओर बढ़ेगा दरअसल पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के तुरंत बाद भारत ने 1960 के समझौते को स्थगितकर दिया था. इस हमले में 26 लोग मारे गए थे गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले हफ्ते इस ऐतिहासिक समझौते को कभी बहाल न करने की घोषणा कीथी. सिंधु जल समझौता 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित एक जल-बंटवारा समझौता था. इसमें विश्व बैंक ने मध्यस्थता की थी।इस समझौते का उद्देश्य सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के उपयोग को लेकर दोनों देशों के बीच विवादों को रोकना था. सिंधू व बेसिन को बांटा गया था दो भागों मेंइस संधि के तहत हिमालय के सिंधु नदी बेसिन की छह नदियों को दो भागों में बांटा गया था. पूर्वी नदियों ब्यास, रावी और सतलुज का पानी भारतको मिलता था. जबकि पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का कंट्रोल पाकिस्तान के पास आया था. भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ सिंधुजल संधि को स्थगित करने का जो फैसला किया था. उससे पाकिस्तान की आर्थिक कमर टूट गई है दरअसल, समझौता स्थगित होने का यह अर्थ नहींहै कि पाकिस्तान को तत्काल सिंधु नदी का पानी नहीं मिल रहा है. बल्कि इसके तहत भारत पर से अब यह बाध्यता खत्म हो जाएगी कि वहपाकिस्तान को सिंधु के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करे. भारत भविष्य में सिंधु नदी पर बांध बनाकर पानी रोकने के लिए स्वतंत्र होगा। ऐसा हुआ तोपाकिस्तान के लिए सही मायनों में संकट पैदा होगा.
अंतरराष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस पर मंत्री अविनाश गहलोत का युवाओं से आह्वान, बोले नशामुक्त समाज बनाने में हर नागरिक की जिम्मेदारी

अंतरराष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस के अवसर पर सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने कहा कि समाज को नशामुक्त रखने कीजिम्मेदारी केवल सरकार या संस्थाओं की नहीं बल्कि समाज के हर नागरिक की है. उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे नशामुक्त समाज के निर्माणके लिए जागरूकता फैलाने का संकल्प लें. गहलोत गुरुवार को इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान में आयोजित एक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा नशे की रोकथाम के लिए प्रदेशभर में कई योजनाएं संचालित की जा रहीहैं. वर्ष 2025 के बजट में 10 जिलों में 25-25 बेड वाले नशामुक्ति केंद्रों की स्थापना की घोषणा की गई थी. सुनिश्चित करने के लिए नियमित निराक्षणदरअसल जो अब संचालित हो चुके हैं मंत्री गहलोत ने जानकारी दी कि वर्तमान में प्रदेश में 85 गैर अनुदानित, 10 राज्य सरकार द्वारा अनुदानित और38 केंद्र भारत सरकार द्वारा अनुदानित नशामुक्ति केंद्र सक्रिय हैं. उन्होंने बताया कि इन केंद्रों पर पारदर्शिता और निगरानी सुनिश्चित करने के लिएनियमित निरीक्षण किए जा रहे हैं. लापरवाही बरतने पर लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई भी की जा रही है. इस मौके पर मंत्री अविनाश गहलोत नेउपस्थित लोगों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई और एक युद्ध नशे के विरुद्ध पोस्टर का विमोचन किया. कार्यक्रम में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से नशेके दुष्परिणामों पर भी प्रकाश डाला गया. कार्यक्रम के दौरान कई नेता रहे मौजूदकार्यक्रम में अतिरिक्त निदेशक रीना शर्मा, एनसीबी अधीक्षक अवधेश शर्मा, डॉ. राघव शाह (राजस्थान अस्पताल), हरीश बुढ़ानी सहित कई अधिकारीव स्वयंसेवी संस्थाएं उपस्थित रहीं.सुबह 5 बजे गांधी सर्किल से आरआईसी तक आयोजित मैराथन रन अगेंस्ट ड्रग एब्यूज में हजारों युवाओं नेउत्साहपूर्वक भाग लिया. मंत्री अविनाश गहलोत ने वार्मअप सेशन में भाग लेकर युवाओं को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और नशे से दूर रहने का संदेशदिया. मैराथन में राजस्थान पुलिस की निर्भया स्क्वाड, एनसीसी, स्काउट गाइड कैडेट्स समेत हजारों युवाओं ने हिस्सा लिया और नशे के खिलाफ शपथली.इस मौके पर गहलोत ने कहा कि यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक संकल्प है, एक युद्ध नशे के विरुद्ध, जिसमें हर नागरिक कोभागीदार बनना होगा.अंतरराष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस पर आयोजित सेमिनार में मंत्री अविनाश गहलोत ने कहा कि हर युवा नशामुक्ति का वाहक बने।इस मौके पर मैराथन का भी आयोजन किया गया.
30 साल बाद सपा से निष्कासित हुए ऊंचाहार विधायक डॉ. मनोज कुमार पांडेय ने साधा सपा पर निसाना, बोले ‘सपा विचारधारा से गई हैभटक

30 साल तक समाजवादी पार्टी की अग्रिम पंक्ति का हिस्सा रहे और खांटी नेता की भूमिका अदा करने वाले ऊंचाहार विधायक डॉ. मनोज कुमार पांडेयको सपा से निष्कासित कर दिया गया है. सपा हाईकमान ने दो दिन पहले तीन विधायकों को पार्टी से बाहर किया था. उसमें ऊंचाहार विधायक कानाम भी शामिल था. आरोप लगे हैं कि राज्यसभा के चुनाव में क्रास वोटिंग की गई थी इस पूरे मामले में विधायक डॉ. मनोज कुमार पांडेय ने कहा किउन्होंने जो भी किया अपनी अंतरात्मा की आवाज पर किया. सपा विचारधारा से भटक गई है और उसमें उन्हें हर दिन घुटन होती थी. आवश्यकताआविष्कार की जननी होती है। इसमें कोई दोराय नहीं है कि 30 वर्ष का लंबा सफर सपा के साथ रहा है. राजनीति से नहीं कोई समझौताहमने सपा को ताकत देने का काम किया दर्द भी सहन किए एक विचारधारा लेकर हम आगे बढ़े, इसमें सबका का सम्मान, सबका आदर रहा. उसी परहम आगे बढ़ते चले गए. जहां अन्याय और अत्याचार दिखा वहां खुलकर विरोध किया. कभी समझौतावादी राजनीति नहीं की. हर समाज के व्यक्तिको आगे लाने के लिए काम किया। तमाम बार जेल भी जाना पड़ा. इसमें कोई दोराय नहीं है कि सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने उन्हें स्नेह दियानेताजी का स्नेह बना रहा. उनके साथ काम भी किया लेकिन राजनीति विचारधारा पर होती है जब कोई राजनीतिक दल विचारधारा से अलग हो जाएतो दिक्कत होती है. उन्होंने अपरोक्ष रूप से सपा के पूर्व महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य पर निशाना साधा कहते हुए कहा कि यह कैसे हो सकता है किएक व्यक्ति जो चंद दिनों के लिए सपा में आया और उसने श्रीराम के लिए अशोभनीय टिप्पणी करनी शुरू कर दी यही नहीं माता सीता, दुर्गा मां औरगंगा मां पर भी टिप्पणी की. मनोज पांडेय के आना होगा घरवह व्यक्ति जिसे जनता ने धूलधूसरित किया है. यदि किसी को पीडीए देखना है तो उसे मनोज पांडेय के घर आना होगा. मैंने कभी भी जाति काभेदभाव नहीं किया. उन्होंने कहा कि सपा में धर्म के नाम पर आस्था से खिलवाड़ किया जा रहा था. कोई श्रीराम को गाली देने का काम कर रहा था. हमारी आत्मा को ठेस पहुंचाया जा रहा था। मेरी अंतरात्मा जगी हुई थी, मैंने विरोध किया। हाउस में भी इसी बात को कहा। मैंने सपा के राष्ट्रीय नेतृत्वको भी समझाने का प्रयास किया तो परिणाम क्या हुआ कि उस व्यक्ति को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बना दिया गया और उसके बाद लखनऊ मेंरामचरित मानस की प्रतियां को जलवाने और रौंदने का काम किया गया। उसी व्यक्ति को विधान परिषद का सदस्य बना दिया गया। इसके बाद मुझेलगा कि शायद भावनाओं का ख्याल नहीं किया जा रहा है।
कर्नाटक में राजनीतिक हलचल के संकेत मंत्री राजन्ना बोले कांग्रेस में कई ‘पावर सेंटर’, सितंबर के बाद होंगे बड़े बदलाव

कर्नाटक के सहकारिता मंत्री के. एन. राजन्ना ने बड़ा राजनीतिक संकेत देते हुए कहा है कि राज्य की कांग्रेस सरकार में इस समय कई “पावर सेंटर” कामकर रहे हैं और सितंबर के बाद राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब कैबिनेटविस्तार और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं. राजधानी में मीडिया से बातचीत में राजन्ना ने कहा, “सितंबर बीत जाने दीजिए. फिरराज्य की राजनीति में घटनाक्रम शुरू होंगे जब उनसे पूछा गया कि क्या मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पहले जैसे नहीं रहे तो उन्होंने कहा, “2013 से 2018 केबीच सिर्फ एक ही पावर सेंटर था लेकिन अब एक नहीं कई पावर सेंटर हो गए हैं. संभालना होता है मुश्किलजब ऐसा होता है तो सरकार और पार्टी दोनों को संभालना मुश्किल होता है. सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले राजन्ना ने माना कि आम जनता भीअब मुख्यमंत्री में पहले जैसा तेज नहीं देख रही है. वहीं राज्य के सार्वजनिक निर्माण मंत्री सतीश जरकीहोली ने भी संकेत दिए कि साल के अंत तककुछ राजनीतिक बदलाव संभव हैं लेकिन वे बड़े नहीं होंगे। उन्होंने कहा, “मुझे कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखता लेकिन कुछ छोटे बदलाव हो सकते हैं. जब उनसे कैबिनेट विस्तार को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने जवाब दिया, “कुछ बदलाव हो सकते हैं, लेकिन बहुत बड़े नहीं. कांग्रेस पार्टी केभीतर पिछले कुछ समय से यह चर्चा तेज़ है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार के बीच सत्ता के बंटवारे को लेकर कोईआंतरिक समझौता हुआ था. संभावना जा रही जताईइसी के आधार पर साल के अंत में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना जताई जा रही है. हालांकि पार्टी हाईकमान ने इस विषय पर सख्त रुख अपनाया हुआहै. साथ ही कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर भी संभावित बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं जो फिलहाल शिवकुमार के पास है। हाल ही मेंपार्टी के कुछ विधायकों ने सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए असंतोष जाहिर किया है जिससे कांग्रेस के भीतर मतभेद और ज्यादा स्पष्ट हो रहेहैं.कर्नाटक के सहकारिता मंत्री के. एन. राजन्ना ने संकेत दिया है कि सितंबर के बाद राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम हो सकते हैं. उन्होंने कहाकि वर्तमान में कांग्रेस में कई ‘पावर सेंटर’ सक्रिय हैं जिससे सरकार और संगठन दोनों को संतुलित रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है.
कांग्रेस ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र, वोटर लिस्ट और मतदान की वीडियो फुटेज मांगी ” जानें क्या है पूरा मामला

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा है. कांग्रेस ने इस पत्र में वोटर लिस्ट और मतदान वाले दिन कीवीडियो फुटेज साझा करने की मांग की है. यह पत्र विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ओर से उठाए गए मुद्दों को लेकर भेजा गया है.कांग्रेस ने अपने पत्र मेंसाफ कहा है कि महाराष्ट्र और हरियाणा की वोटर लिस्ट की डिजिटल और मशीन-रीडेबल कॉपी एक हफ्ते के भीतर उपलब्ध कराई जाए. इसकेअलावा मतदान दिवस की वीडियो रिकॉर्डिंग भी साझा की जाए. कांग्रेस ने इसे अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग बताया है और कहा है किचुनाव आयोग के लिए इसे पूरा करना कोई कठिन काम नहीं है. कांग्रेस का कहना है कि यह मांग कोई नई नहीं है बल्कि लंबे समय से पार्टी इस परजोर देती रही है. चिट्ठी में लिखा गया है कि यह चुनाव आयोग के लिए एक आसान प्रक्रिया होनी चाहिए. जिससे न सिर्फ राजनीतिक दलों का विश्वासबढ़ेगा बल्कि जनता में भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर भरोसा कायम रहेगा. आयोग की मांगो पर अमलकांग्रेस ने यह भी कहा है कि जैसे ही आयोग उनकी इन मांगों पर अमल करता है, पार्टी की शीर्ष नेतृत्व टीम चुनाव आयोग से मिलने को तैयार है. बैठकमें कांग्रेस अपनी तरफ से किए गए विश्लेषण और सबूत आयोग के सामने रखेगी ताकि पूरी प्रक्रिया पर खुली चर्चा हो सके. पार्टी ने संकेत दिए हैं किउसके पास ऐसे आंकड़े और विश्लेषण हैं जो चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं को उजागर कर सकते हैं. बता दें कि हाल ही में महाराष्ट्र और हरियाणामें हुए चुनावों को लेकर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे. खासतौर पर महाराष्ट्र में कांग्रेस ने बार-बार वोटर लिस्ट मेंगड़बड़ी वोटिंग में पारदर्शिता की कमी और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगाए हैं. अब पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इन सवालों को लेकर चुनावआयोग से बातचीत का रास्ता खोला है. महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा है. पार्टी ने वोटरलिस्ट की डिजिटल कॉपी और मतदान वाले दिन की वीडियो फुटेज एक हफ्ते में देने की मांग की है. कांग्रेस ने आयोग से मिलने और विश्लेषण रिपोर्टसाझा करने की भी पेशकश की है.
“कपड़े-जूते भी BJP की देन” विवादित बयान पर घिरे विधायक बाबनराव लोणिकर, विपक्ष ने बताया ब्रिटिश मानसिकता

महाराष्ट्र में भाजपा विधायक बाबनराव लोणिकर अपने विवादित बयान को लेकर विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं. जलना जिले के परतूर विधानसभाक्षेत्र में ‘हर घर सोलर’ योजना के कार्यक्रम के दौरान विधायक ने कहा कि जो लोग बीजेपी और सरकार की आलोचना करते हैं उन्हें यह समझना चाहिएकि उनके पास जो कपड़े, जूते, मोबाइल फोन और योजनाओं का पैसा है वह सब भाजपा की वजह से है. कार्यक्रम में बोलते हुए बाबनराव ने दावाकिया कि भाजपा सरकार की वजह से गांवों में पानी की टंकियां, पक्की सड़कें, सामुदायिक भवन और अन्य विकास कार्य हुए हैं. सोशल मीडिया पर आलोचनाउन्होंने कहा कि जो लोग सोशल मीडिया पर हमारी आलोचना करते हैं, उनके घरों में पानी की सुविधा, सड़कें, उनके माता-पिता की पेंशन और किसानसम्मान निधि के पैसे सब हमारी ही देन हैं. भाजपा विधायक ने आगे कहा कि जिन लोगों के पास आज कपड़े, जूते, मोबाइल हैं, वह भी हमारे कारणहैं. आपकी बहन को लड़की बहन योजना का लाभ मिल रहा है आपके पिता को 6,000 रुपये पीएम किसान सम्मान निधि से मिल रहे हैं. फिर भीकुछ लोग सोशल मीडिया पर हमें गालियां देते हैं. भाजपा विधायक के इस बयान का वीडियो सामने आते ही विपक्ष ने इसे लेकर जोरदार हमला बोलाहै. शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के एमएलसी और विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने इसे शर्मनाक करार दिया. नीचा दिखाने वाले बयान अस्वीकार्यउन्होंने विधायक को ‘ब्रिटिश मानसिकता’ का बताया और कहा कि लोकतंत्र में ऐसी भाषा स्वीकार नहीं की जा सकती. अंबादास दानवे ने एक्स परलिखा कि आपकी विधायक की कुर्सी, आपके कपड़े-जूते, आपकी गाड़ी का डीजल, आपके हवाई टिकट, सब जनता के वोट और टैक्स की देन हैं. ऐसे में जनता को नीचा दिखाने वाले बयान अस्वीकार्य हैं. उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को यह बयान याद रखना चाहिए क्योंकि राज्य में स्थानीयनिकाय चुनाव आने वाले हैं. फिलहाल भाजपा की ओर से इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. हालांकि विपक्ष ने इस मुद्दे को तूल देतेहुए कहा कि यह बयान भाजपा की ‘जनता विरोधी सोच’ को उजागर करता है अब देखना होगा कि पार्टी इस पर क्या सफाई देती है.
ट्रंप से डरते हैं मोदी, लेकिन बनना चाहते हैं ‘विश्वगुरु’ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का तीखा हमला

कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी खुद को ‘विश्वगुरु’ कहलवाना चाहते हैं, लेकिन जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 17 बार यह दावा किया कि उन्होंने हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच युद्धरुकवाया, तब भी प्रधानमंत्री मोदी एक बार भी इसका खंडन नहीं कर पाए। खड़गे ने तंज कसते हुए कहा – नरेंद्र मोदी ट्रंप से डरते हैं, लेकिन ‘अबकीबार ट्रंप सरकार’ जैसे नारे लगाकर उनके प्रचारक बन जाते हैं। जिसने कुछ किया नहीं, वो बनना चाहता है हीरो – कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मोदी जिस शख्स के सामने मौन साध लेते हैं, वही शख्स दुनिया केसामने खुद को महान बना लेता है। उन्होंने सवाल उठाया कि–जिसके अंदर इतने अवगुण हैं, वो भी हीरो बनने की होड़ में है। RSS ने कभी नहीं माना संविधान -श्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने संविधान के प्रति भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नीयत पर भीसवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने न देश की आज़ादी के संघर्ष में भाग लिया और न ही संविधान निर्माण में कोई योगदान दिया, आज वहीलोग संविधान की रक्षा की बात कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया RSS ने रामलीला मैदान में संविधान की प्रतियां जलाई थीं। उन्होंने नेहरू, गांधी औरबाबा साहेब अंबेडकर का पुतला फूंका था। उनका कहना था कि इस संविधान में मनुस्मृति के तत्व नहीं हैं, इसलिए वे इसे नहीं मानते. ‘संविधान बचाओ आंदोलन’ से घबराई BJP – कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि जब राहुल गांधी देशभर में संविधान की रक्षा को लेकर यात्रा निकालरहे हैं और लोगों में जागरूकता बढ़ रही है, तब भाजपा ‘आपातकाल’ की बातें दोहराकर लोगों का ध्यान असल मुद्दों से भटका रही है। उन्होंने आरोपलगाया कि ये सरकार नाकाम हो चुकी है। महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट से जूझ रहे देश में आज सिर्फ कुछ उद्योगपतियों को फायदापहुंचाया जा रहा है। यह है ‘Undeclared Emergency’ – मल्लिकार्जुन खड़गे ने मोदी सरकार को एक अघोषितआपातकाल(Undeclared Emergency) बतातेहुए कहा कि जिस देश में आम आदमी की आवाज़ को दबाया जाए, संविधान को कमजोर किया जाए और केवल कुछ अमीरों के लिए ही व्यवस्थाचलाई जाए – वो लोकतंत्र नहीं बल्कि छिपी हुई तानाशाही है। मोदी सरकार अपनी नाकामी छिपा रही है – खड़गे ने कहा कि मोदी सरकार अपनी नाकामी और कमजोरी छुपाने के लिए जनता का ध्यान भटकाने मेंलगी हुई है। उन्होंने कहा जब राहुल गांधी देश को संविधान की ताकत समझा रहे हैं, तब मोदी जी देश को ‘ड्रामा’ दिखा रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश को संविधान बचाने की लड़ाई की ज़रूरत है और कांग्रेस इस जिम्मेदारी को निभा रही है। वहीं, भाजपा और नरेंद्र मोदी सरकार अपनी असफलता छिपाने के लिए केवल दिखावटी मुद्दों को हवा दे रही है।
दिल्ली सरकार का ऐतिहासिक कदम व्यापारियों के लिए बना दिल्ली व्यापारी कल्याण बोर्ड-मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

दिल्ली के व्यापारिक वर्ग के लिए एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी पहल करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने “दिल्ली व्यापारी कल्याण बोर्ड” के गठनकी घोषणा की है। सरकार के मात्र चार महीने के कार्यकाल में यह बड़ा और दूरदर्शी कदम, सरकार की व्यापारियों के प्रति प्रतिबद्धता औरसंवेदनशीलता का प्रमाण है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रेस वार्ता में कहा, यह बोर्ड दिल्ली के व्यापारियों की आवाज़ बनेगा। अब तक ऐसा कोई मंचनहीं था जहाँ व्यापारी वर्ग संगठित होकर अपनी समस्याएं रख सके। हम उन्हें अब एक सशक्त मंच दे रहे हैं। क्या है दिल्ली व्यापारी कल्याण बोर्ड? – यह बोर्ड एक वैधानिक निकाय होगा, जिसे सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत पंजीकृत कियाजाएगा। इसका गठन व्यापारिक हितों की रक्षा, कल्याण योजनाओं का संचालन और समस्याओं के समाधान के लिए किया गया है। मुख्यमंत्री नेबताया कि यह सिर्फ एक राजनीतिक घोषणा नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक और स्थायी ढांचा है, जो दिल्ली के लाखों व्यापारियों के जीवन को बेहतरबनाएगा। फंडिंग और कार्ययोजना- रेखा गुप्ता ने जानकारी दी कि दिल्ली सरकार ने इस बोर्ड के लिए पहले ही ₹10 करोड़ का ट्रेडर्स वेलफेयर फंड बजट मेंनिर्धारित कर दिया है। यह राशि निम्नलिखित कार्यों में उपयोग की जाएगी. व्यापारियों के लिए कल्याणकारी योजनाएं (Welfare Schemes) –मेंटॉरशिप प्रोग्राम्स और कौशल विकास, व्यापारिक सहायता पोर्टल का निर्माण, ग्राउंड-लेवल समस्याओं का समाधान यह फंड सिर्फ कागज़ों में नहींरहेगा, बल्कि ज़मीन पर दिखेगा — इससे योजनाएं चलेंगी, समाधान निकलेगा और व्यापारियों को सीधा लाभ मिलेगा, – रेखा गुप्ता ईज़ ऑफ डूइंगबिज़नेस की दिशा में एक और कदम – मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार “Ease of Doing Business” को लेकर गंभीर है और अबSingle Window System की दिशा में तेज़ी से कार्य हो रहा है। हम दिल्ली में व्यापार करना आसान बनाएंगे — कम फॉर्म, कम चक्कर, ज़्यादा सहूलियत, उन्होंने जोड़ा। राजनीति नहीं, प्रतिबद्धता की मिसाल – मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि यह कोई चुनावी वादा या राजनीतिक नौटंकी नहीं है, बल्कि यह सरकारकी संवेदनशीलता और व्यापारिक समुदाय के योगदान को सम्मान देने का प्रयास है। दिल्ली व्यापारी कल्याण बोर्ड के गठन के साथ ही राजधानी के व्यापारियों को एक सशक्त मंच और संरचना मिल गई है, जो वर्षों से उनकी मांग रहीहै। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के इस फैसले को व्यापारिक जगत ने बेहद सकारात्मक कदम बताया है। यह पहल न केवल व्यापारियों को मजबूती देगी, बल्कि दिल्ली की आर्थिक रीढ़ को और मज़बूत करेगी।
अंतरिक्ष में नई उड़ान ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने रचा इतिहास, माता-पिता की आंखों में गर्व के आंसू

वायुसेना के ग्रुप कैप्टन व भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला के माता-पिता अपने बेटे की उपलब्धि पर भावुक हो गए. वो कानपुर रोड स्थितसीएमएस के एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे शुभांशु 41 वर्ष पहले लगातार आठ दिन पृथ्वी के चक्कर लगाने वाले राकेश शर्मा के बादअंतरिक्ष में रवाना होने वाले दूसरे भारतीय बने. एक्सिओम-4 मिशन ने अंतरिक्ष के लिए उड़ान भर दी है लॉन्चिंग के दौरान शुभांशु के माता-पिता कीआंखों में आंसू थे. उन्होंने कहा कि पूरे देश को उन पर नाज है इस मौके पर एसआईए इंडिया के अध्यक्ष डॉ. सुब्बा राव पावुलुरी ने कहा, ‘हमारे अंतरिक्षयात्री शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में जा रहे हैं यह भारत के लिए एक महान दिन है. एक्सिओम मिशन का हिस्सा रहे भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टनसुभांशु शुक्ला के बारे में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि आज अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखा जाएगा मैं उन्हेंऔर उनके पूरे परिवार को बधाई देता हूं. सभी के लिए है गर्व का क्षणग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की मां आशा शुक्ला ने कहा कि यह हमारे और सभी के लिए गर्व का क्षण है जगह-जगह पोस्टर लगाए जा रहे हैं सभी कोखुशी है कि इस देश का इस त्रिवेणी नगर का एक लड़का इतनी ऊंचाई पर पहुंचने जा रहा है. हम उसे अपनी शुभकामनाएं और आशीर्वाद भेज रहे हैंउसे हमारी बहू का पूरा समर्थन है उसके बिना यह संभव नहीं हो सकता था उसने यहां सबसे बड़ी भूमिका निभाई है. ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के पिताशंभू दयाल शुक्ला ने कहा कि उसका मिशन दोपहर 12 बजे के आसपास लॉन्च होने वाला है। हम उसके मिशन के लॉन्च को देखने के लिए बहुतउत्सुक हैं. हम बहुत खुश हैं हमारा आशीर्वाद उसके साथ है और हम भगवान से भी प्रार्थना करते हैं कि उसका मिशन अच्छे से पूरा हो. वह पूरी तरह सेतैयार है उसके लिए लगाए गए सभी पोस्टर देखकर बहुत अच्छा लग रहा है वह लखनऊ, राज्य और हमारे देश का नाम रोशन कर रहा है हमें उस परगर्व है.
तानाशाही के खिलाफ संघर्ष की दास्तान लॉन्च हुई ‘द इमरजेंसी डायरीज’, पीएम मोदी ने साझा किए अनुभव

Dellhi News: देश के लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला माने जाने वाले आपातकाल के दौर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न केवल अपने जीवन का बड़ासबक बताया. बल्कि इसे लोकतंत्र की ताकत समझने का अहम मौका भी करार दिया. आपातकाल के अनुभवों पर आधारित पुस्तक ‘द इमरजेंसीडायरीज’ बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाथों लॉन्च होने जा रही है.प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा कि यह किताब उनके आपातकालके दिनों की यात्रा को समेटे हुए है. इसे पढ़कर 1975 से 1977 तक के काले दिनों की यादें ताजा हो गईं. उन्होंने देशवासियों से अपील की कि जोलोग उस दौर को याद करते हैं या जिनके परिवार उस समय अत्याचार के शिकार हुए वे सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करें. असलियत समझने का मिला मौकाइससे आज की युवा पीढ़ी को आपातकाल की असलियत समझने का मौका मिलेगा.पीएम मोदी ने कहा कि वह उस समय एक युवा आरएसएसप्रचारक थे और आपातकाल के खिलाफ चले आंदोलन ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया. इस आंदोलन ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने की अहमियतसमझाई. मोदी ने कहा कि इस दौरान उन्होंने विभिन्न राजनीतिक विचारधारा वाले लोगों से मिलकर बहुत कुछ सीखा. यह अनुभव आज उनके नेतृत्व मेंझलकता है. ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित इस किताब की भूमिका पूर्व प्रधानमंत्री और आपातकाल विरोधी आंदोलन के दिग्गज नेताएचडी देवगौड़ा ने लिखी है. पीएम मोदी ने इसके लिए उन्हें धन्यवाद देते हुए कहा कि यह किताब न सिर्फ उनके व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करती हैबल्कि लोकतंत्र की रक्षा के संघर्ष की भी दास्तान है. तानाशाही के खिलाफ झोंकी पूरी ताकतब्लूक्राफ्ट ने बताया कि यह किताब उन लोगों की सच्ची कहानियों पर आधारित है जिन्होंने उस समय युवा नरेंद्र मोदी के साथ काम किया. इसमें उनarchival दस्तावेजों और अनुभवों को शामिल किया गया है जो दिखाते हैं कि कैसे एक युवा नेता ने तानाशाही के खिलाफ अपनी पूरी ताकत झोंकदी. किताब बताती है कि नरेंद्र मोदी के राजनीतिक और वैचारिक गठन की नींव उन्हीं संघर्षों में पड़ी। ब्लूक्राफ्ट ने कहा कि ‘द इमरजेंसी डायरीज’ उनतमाम साहसी लोगों को समर्पित है, जिन्होंने आपातकाल के दौर में तानाशाही के आगे झुकने से इनकार कर दिया. यह किताब लोकतंत्र की रक्षा केलिए दिए गए संघर्ष की प्रेरणा है और नरेंद्र मोदी जैसे नेताओं के शुरुआती दिनों की झलक पेश करती है. जिन्होंने लोकतंत्र की मजबूती के लिए अपनाजीवन समर्पित किया.