पाकिस्तान ने भारत के संभावित हमलों से बचने के लिए उठाए कड़े कदम

कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के सात दिन बाद, पाकिस्तान अपने सुरक्षा उपायों को और सख्त कर रहा है। इसहमले के बाद भारत की ओर से सैन्य प्रतिक्रिया की आशंका जताई जा रही है, जिससे पाकिस्तान में तनाव और भय का माहौल है। ऐसे में, पाकिस्तानीसेना भारत के किसी भी संभावित हमले से बचने के लिए विभिन्न कदम उठा रही है।पाकिस्तान का रडार सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयरजानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान ने भारतीय एयरस्ट्राइक की पहचान करने के लिए अपने रडार सिस्टम को सियालकोट सेक्टर में फॉरवर्ड लोकेशनोंपर तैनात करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा, पाकिस्तान ने फिरोजपुर से सटे क्षेत्रों में भारतीय सेना की गतिविधियों का पता लगाने के लिएइलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम भी तैनात किया है। यह कदम भारतीय सेना की हरकतों पर निगरानी रखने के लिए उठाए गए हैं। हाल ही में पाकिस्तानने अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज 58 किलोमीटर की दूरी पर चोर कंटोनमेंट में TPS-77 रडार तैनात किया था। पाकिस्तान की सीजफायर उल्लंघन की लगातार कोशिशेंपाकिस्तान ने लगातार पांचवें दिन सीजफायर का उल्लंघन किया और एलओसी (लाइन ऑफ कंट्रोल) पर फायरिंग की। पाकिस्तानी सेना ने कुपवाड़ा, बारामूला और अखनूर सेक्टरों में बिना किसी उकसावे के फायरिंग की। हालांकि, भारतीय सेना ने पाकिस्तान के हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया औरस्थिति को नियंत्रण में रखा। पहलगाम आतंकी हमला और भारत की सख्त कार्रवाई22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसारन घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 17 लोग घायल हो गए थे।इस हमले में आतंकियों ने जानबूझकर लोगों को निशाना बनाया था। इसके बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की कैबिनेटकमेटी (CCS) की बैठक हुई, जिसमें भारत ने एक बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई की। सिंधु जल संधि का स्थगनकैबिनेट कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 1960 की सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए। यह पहला अवसर थाजब भारत ने इस संधि को स्थगित किया है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि यह स्थगन तब तक जारी रहेगा, जब तक पाकिस्तानआतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता।
चीन के लियाओनिंग प्रांत में रेस्टोरेंट में आग, 22 की मौत, 3 घायल

चीन के उत्तर-पूर्वी लियाओनिंग प्रांत के लियाओयांग शहर में मंगलवार, 29 अप्रैल 2025 को एक रेस्टोरेंट में भीषण आग लगने से 22 लोगों की मौतहो गई और 3 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर 12:25 बजे हुई, जब रेस्टोरेंट में अचानक आग लग गई। आग की घटना और बचाव कार्यस्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लियाओयांग के बाइटा जिले में स्थित यह रेस्टोरेंट दो या तीन मंजिला था। आग की लपटें खिड़कियों औरदरवाजों से बाहर निकल रही थीं, जिससे स्थिति गंभीर हो गई। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 22 दमकल गाड़ियों और 85 दमकलकर्मियों को मौके पर भेजा। दमकलकर्मियों ने लगभग 18 मिनट में आग पर काबू पा लिया, लेकिन तब तक यह घटना बड़ा रूप ले चुकी थी। मृतकों और घायलों की स्थितिस्थानीय अस्पतालों में भर्ती किए गए घायलों की हालत स्थिर बताई जा रही है, हालांकि उनमें से कुछ की स्थिति अभी भी गंभीर है। मृतकों के परिवारोंको सरकारी मदद की घोषणा की गई है, और उन्हें तत्काल सहायता प्रदान की जा रही है। घटना के तुरंत बाद, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नेस्थानीय अधिकारियों से घायलों का उचित इलाज करने और मृतकों के परिवारों को समर्थन देने का निर्देश दिया।जांच और प्रशासनिक प्रतिक्रियाघटना के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, आग रेस्टोरेंट के रसोईघर से शुरू हुई थी। स्थानीय पुलिसने रेस्टोरेंट के मालिक को हिरासत में लिया है और घटना की जांच जारी है। चीनी अधिकारियों ने घटना की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांचसमिति का गठन किया है। सुरक्षा मानकों पर सवालयह घटना चीन में सार्वजनिक सुरक्षा के उपायों पर एक सवाल खड़ा करती है। पहले भी चीन में कुछ स्थानों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारणइस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त सुरक्षा मानकों का पालन किया जाना चाहिए। सरकारी निर्देश और भविष्य के उपायचीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने और भविष्य मेंऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आदेश दिया है। इसके अलावा, सरकार ने इस बात का आश्वासन दिया है कि इस मामलेमें दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय प्रशासन का आश्वासनलियाओयांग शहर की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद, स्थानीय प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं कोरोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे सुरक्षा मानकों के पालन में सहयोग करें और किसीभी संदिग्ध गतिविधि की सूचना दें।
सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से किया इनकार, राष्ट्रीय सुरक्षा को बताया प्रमुख कारण

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पेगासस जासूसी मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए तकनीकी समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने सेइनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि इस रिपोर्ट में राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की संप्रभुता से जुड़ी संवेदनशील जानकारियाँ हैं, जिन्हें सार्वजनिक मंचपर लाना उचित नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, ऐसी जानकारी का सार्वजनिक खुलासा देश की सुरक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुँचा सकता है औरयह कदम न्यायोचित नहीं होगा। इस रिपोर्ट को लेकर अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इसके कुछ हिस्सों को ही सीमित रूप में साझा किया जासकता है, लेकिन पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा सकती। पेगासस विवाद वर्ष 2021 में सामने आया था जब एक अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता परियोजना ‘पेगासस प्रोजेक्ट’ के तहत यह खुलासा हुआ कि भारतसहित कई देशों में पेगासस स्पायवेयर का उपयोग पत्रकारों, राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अन्य प्रमुख व्यक्तियों की जासूसी केलिए किया गया। यह स्पायवेयर इज़राइली कंपनी एनएसओ ग्रुप द्वारा विकसित किया गया है और यह मोबाइल फोन में गुप्त रूप से घुसकर कॉल, मैसेज, लोकेशन और अन्य निजी जानकारी तक पहुंच बना सकता है। इस खुलासे के बाद भारत में काफी हंगामा हुआ और कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्टमें दायर की गईं, जिनमें सरकार से जवाब और जांच की मांग की गई। इन याचिकाओं के जवाब में अक्टूबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने एक स्वतंत्र तकनीकी समिति का गठन किया, जिसे 29 मोबाइल फोनों की जांच काजिम्मा सौंपा गया। समिति ने 2022 में अपनी रिपोर्ट में बताया कि पांच डिवाइसेज़ में ‘मैलवेयर’ जरूर पाया गया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो सका किवह पेगासस ही था। इसके अलावा, समिति ने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र सरकार ने जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं किया। इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने को लेकर विपक्षी दलों ने लगातार दबाव बनाया है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया कि मोदीसरकार ने राजनीतिक विरोधियों और पत्रकारों की निगरानी कर लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों का उल्लंघन किया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर‘देशद्रोह’ का आरोप लगाया और गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफे की मांग की। वहीं सरकार ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि कोई भीनिगरानी कानून के तहत और राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में की गई होगी। पेगासस विवाद ने केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर भी हलचल मचा दी थी। फ्रांस, मैक्सिको, हंगरी और इज़राइल सहित कई देशों में भी इसस्पायवेयर के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई कि ऐसे सॉफ्टवेयर का प्रयोग नागरिक स्वतंत्रता औरगोपनीयता के अधिकारों पर हमला है। इस मामले में संयुक्त राष्ट्र समेत कई संस्थाओं ने भी पारदर्शी जांच की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से देखा जा सकता है, लेकिन यह भी सच है कि इससे पारदर्शिता और सरकार की जवाबदेही कोलेकर जनता में शंका उत्पन्न होती है। पेगासस प्रकरण ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा किया है कि तकनीक के इस युग में नागरिकों की निजता औरसुरक्षा के बीच संतुलन कैसे साधा जाए। अदालत के इस निर्णय के बाद भी पेगासस से जुड़ा विवाद थमा नहीं है और यह मुद्दा राजनीतिक औरसामाजिक बहस का केंद्र बना हुआ है।
कोलकाता रेप-मर्डर केस: पीड़िता के पिता ने CBI जांच पर उठाए गंभीर सवाल, कहा- अपराधियों को बचा रही है एजेंसी

घटना का विवरण: अस्पताल परिसर में मिली महिला डॉक्टर की लाशकोलकाता के एक प्रमुख अस्पताल में 9 अगस्त 2024 को उस समय हड़कंप मच गया जब वहां एक 31 वर्षीय महिला डॉक्टर की लाश संदिग्धहालात में मिली। वह अस्पताल में ही पोस्टग्रेजुएट मेडिकल छात्रा के रूप में कार्यरत थीं। शुरुआती जांच में यह सामने आया कि महिला के साथबलात्कार किया गया और फिर उसकी हत्या की गई। यह मामला देशभर में सुर्खियों में आ गया और महिला सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हो गए। मुख्य आरोपी की पहचान और सजाघटना के सिलसिले में पुलिस ने संजय रॉय नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जो कोलकाता पुलिस में सिविक वॉलंटियर था। अदालत में सुनवाई केबाद उसे दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई। लेकिन पीड़िता के परिजनों का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का अपराध नहीं था औरइस जघन्य कृत्य में कई अन्य लोग भी शामिल थे। CBI जांच पर उठे सवाल, पिता ने जताई नाराजगीपीड़िता के पिता ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एजेंसी जानबूझकर सच्चाई को छिपा रही है। उनका दावा है किCBI को अपराधियों की पहचान है, लेकिन फिर भी वो उन्हें बचा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी बेटी का मोबाइल फोन घटना के इतने महीनेबाद भी सक्रिय है और किसी के द्वारा उपयोग किया जा रहा है, जिससे जांच पर संदेह और बढ़ जाता है। सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी निशाने परमामले की जांच के दौरान अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और स्थानीय थाने के प्रभारी अभिजीत मंडल पर आरोप लगा कि उन्होंने सबूतों सेछेड़छाड़ की और एफआईआर दर्ज करने में देर की। CBI ने दोनों को गिरफ्तार तो किया, लेकिन समय पर चार्जशीट दाखिल न करने के कारण उन्हेंजमानत मिल गई। इससे पीड़िता के परिवार को और अधिक आघात पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और केंद्रीय बल की तैनातीइस संवेदनशील मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और जांच में लापरवाही को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार, पुलिस प्रशासन और अस्पतालप्रबंधन को आड़े हाथों लिया। न्यायालय ने अस्पताल परिसर में सुरक्षा बढ़ाने के लिए केंद्रीय सुरक्षाबलों की तैनाती का निर्देश भी दिया और CBI सेजांच की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी। जनता का आक्रोश और सड़क पर उतरे डॉक्टरघटना के बाद कोलकाता सहित देशभर में प्रदर्शन शुरू हो गए। डॉक्टरों ने हड़ताल की और “Reclaim the Night” जैसे अभियानों के माध्यम सेमहिला सुरक्षा की मांग की। आम नागरिकों और छात्र संगठनों ने भी पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए आवाज बुलंद की। न्याय की मांग अभी अधूरीपीड़िता के पिता का कहना है कि जब तक सभी दोषियों को कठोर सजा नहीं मिलती, तब तक उनकी बेटी को इंसाफ नहीं मिलेगा। उनका यह भीकहना है कि जांच एजेंसी पर उनका भरोसा टूट चुका है और वे चाहते हैं कि जांच पारदर्शी ढंग से की जाए।
दिल्ली स्कूल फीस एक्ट को कैबिनेट की मंजूरी: मनमानी फीस बढ़ोतरी पर लगेगी लगाम

दिल्ली सरकार ने अभिभावकों की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए स्कूल फीस को नियंत्रित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘दिल्ली स्कूल फीस एक्ट’ को मंजूरी दे दी गई है। अब राजधानी के निजी स्कूल मनमाने ढंगसे फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। इस निर्णय को लेकर अभिभावकों में काफी राहत और संतोष देखने को मिल रहा है। लंबे समय से फीस वृद्धि पर था विवाददिल्ली के कई निजी स्कूलों द्वारा हर साल फीस में अत्यधिक वृद्धि किए जाने को लेकर अभिभावकों में असंतोष बना हुआ था। अभिभावक संगठन इसमुद्दे को लगातार सरकार के समक्ष उठा रहे थे। शिकायतों के अनुसार, स्कूल मनमर्जी से ट्यूशन फीस के साथ-साथ एडमिशन फीस, डेवलपमेंट चार्जऔर अन्य शुल्कों में भी बेवजह बढ़ोतरी कर रहे थे, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा था। मुख्यमंत्री ने दिए थे लाइसेंस रद्द करने के निर्देशफीस वृद्धि की बढ़ती शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कुछ स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उनके लाइसेंस रद्दकरने के निर्देश दिए थे। इसके बाद इस मुद्दे पर व्यापक समीक्षा कर दिल्ली स्कूल फीस एक्ट का मसौदा तैयार किया गया और उसे कैबिनेट की मंजूरीमिल गई। नए एक्ट के तहत क्या होंगे बदलाव?इस कानून के अंतर्गत अब दिल्ली के किसी भी निजी स्कूल को फीस बढ़ाने से पहले सरकार की अनुमति लेनी होगी। स्कूलों को यह स्पष्ट करना होगाकि वे किस आधार पर फीस वृद्धि कर रहे हैं और उसकी क्या आवश्यकता है। इसके अलावा, फीस संरचना से जुड़ी सभी जानकारियाँ सार्वजनिक रूपसे वेबसाइट पर उपलब्ध करानी होंगी। नई गाइडलाइंस भी होंगी लागूमुख्यमंत्री ने बताया कि राजधानी के 1677 निजी स्कूलों के लिए जल्द ही नई गाइडलाइंस भी जारी की जाएंगी। इन दिशा-निर्देशों में फीस वृद्धि कीसीमा, अनुमति लेने की प्रक्रिया और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उपाय शामिल होंगे। सभी स्कूलों को इन निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा, और उल्लंघन की स्थिति में सख्त कार्रवाई की जाएगी।डीएम रिपोर्ट के बाद हुआ अहम फैसलामुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के बीच फीस को लेकर विवाद लगातार सामने आ रहे थे। इसके चलते सरकार नेजिला मजिस्ट्रेटों को निर्देश देकर स्कूलों का निरीक्षण करवाया था। डीएम द्वारा दी गई विस्तृत रिपोर्ट में फीस वृद्धि की अनियमितताएं सामने आईं, जिसके आधार पर सरकार ने यह कठोर लेकिन आवश्यक कदम उठाया है। अभिभावकों को मिली बड़ी राहतदिल्ली सरकार के इस फैसले से हजारों अभिभावकों को राहत मिलेगी जो लंबे समय से स्कूलों की फीस नीति को लेकर परेशान थे। यह कानून शिक्षाके अधिकार को सुरक्षित करने और शिक्षा को किफायती बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
आईपीएल 2025 पहुंचा रोमांचक मोड़ पर, अब खेले गए 46 मैच “प्लेऑफ के लिए है दिलचस्प जंग”

IPL 2025: आईपीएल 2025 अब रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका है 46 मैच खेले जा चुके हैं और प्लेऑफ के लिए जंग दिलचस्प हो चुकी है. आठटीमों के बीच चार स्थानों के लिए लड़ाई है, राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपर किंग्स इस रेस से बाहर हो चुकी है हालांकि इस पूरे सीजन में काफीउतार चढ़ाव देखने को मिले हैं. कुछ टीमों ने अच्छी शुरुआत की लेकिन दूसरे हाफ में उसे बरकरार रखने में कामयाब नहीं हो पाए हैं. वहीं एक टीम हैजिसका पहले हाफ में खराब प्रदर्शन रहा था अब दूसरे हाफ में उन्होंने जबरदस्त वापसी की है. वहीं दो टीमें ऐसी हैं जिन्होंने शुरू से लेकर अभी तकअपने कंसिस्टेंट प्रदर्शन को बरकरार रखा है.आरसीबी की टीम अंक तालिका में शीर्ष पर है उसके 10 मैचों में सात जीत और 14 अंक हैं। वहीं, गुजरात12 अंक लेकर दूसरे स्थान पर है. मुंबई और दिल्ली के भी 12-12 अंक हैं लेकिन नेट रन रेट में गुजरात से पीछे है. एमआई तीसरे और दिल्ली चौथेस्थान पर है पंजाब किंग्स 11 अंक लेकर पांचवें लखनऊ सुपर जाएंट्स 10 अंक लेकर छठे स्थान पर है. तीन बार की चैंपियन कोलकाता नाइट राइडर्ससात अंक लेकर सातवें 2016 की चैंपियन सनराइजर्स हैदराबाद छह अंक लेकर आठवें स्थान पर है. पंजाब ने की थी शानदार शुरुआतराजस्थान और चेन्नई के चार-चार अंक हैं इस सीजन दिल्ली और पंजाब ने शानदार शुरुआत की थी. दिल्ली ने अपने शुरुआती छह में से पांच मैचजीते थे. टीम एक वक्त अंक तालिका में शीर्ष पर थी हालांकि छठे मैच के बाद इस टीम के प्रदर्शन में गिरावट आई और टीम अगले तीन में से सिर्फएक मैच जीत पाई है. वहीं पंजाब ने अपने शुरुआती सात में से पांच मैच जीते. हालांकि अगले दो मैच उनके पक्ष में नहीं रहे और टीम अंक तालिका मेंलुढ़क गई.आरसीबी के खिलाफ हार और एक मैच बारिश की वजह से धुलने से पंजाब को नुकसान हुआ है. अब जब प्लेऑफ की जंग रोमांचक होचली है ऐसे में इन दोनों टीमों को एड़ी चोटी का जोर लगानी होगी. अगर 16 अंक को क्वालिफिकेशन मार्क माना जाए तो दिल्ली को बाकी बचे पांचमें से कम से कम दो मैच जीतने होंगे. जबकि पंजाब को बाकी बचे पांच में से कम से कम तीन मैच जीतने होंगे. राह है काफी कठिनवहीं कोलकाता और सनराइजर्स के लिए अब प्लेऑफ में जगह बनाने की राह काफी कठिन है. हालांकि क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है लेकिन फिरभी जो समीकरण बन रहे हैं. उसमें इन्हें खुद की जीत के साथ-साथ अन्य टीमों के नतीजों पर भी निर्भर रहना होगा. केकेआर को अब पांच में से पांच मेंजीत की जरूरत है. वहीं सनराइजर्स को भी पांच में से पांच मैच जीतने हैं इसके बावजूद केकेआर अधिकतम 17 अंक और सनराइजर्स 16 अंक तकपहुंच सकेगी. इसके बाद इन्हें अन्य टीमों के नतीजों पर निर्भर रहना होगा. लखनऊ सुपर जाएंट्स ने भी सीजन की शुरुआत अच्छी की थी. लेकिन जैसे-जैसे टूर्नामेंट आगे बढ़ा टीम की कमजोरियां सामने आने लगी हैं. टीम के अगर शुरुआती तीन बल्लेबाज नहीं चलते हैं तो पूरी टीम ढह जाती है. अबअगर लखनऊ को प्लेऑफ में पहुंचना है तो उन्हें बाकी बचे चार में से कम से कम तीन मैच जीतने ही होंगे. एक भी हार से उन पर तलवार लटकजाएगी.
पहलगाम आतंकी हमले पर टिप्पणी को लेकर रॅाबर्ट वाड्रा ने दी सफाई, बोले मेरे इरादों को समझा गया गलत

वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के पति जानेमाने कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा ने पहलगाम आतंकी हमले पर अपनी हालिया टिप्पणी पर सफाई दी. उन्होंने सोमवार को कहा कि उनके इरादों को गलत समझा गया जिसे स्पष्ट करना उनकी जिम्मेदारी है. वाड्रा ने यह भी कहा कि वह पहलगाम हमले कीकड़ी निंदा करते हैं और भारत के साथ खड़े हैं.कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के बहनोई रॉबर्ट वाड्रा ने फेसबुक पर एक पोस्ट में लिखा, ‘चूंकि मेरेइरादों का मतलब निकाला गया, इसलिए मैं समझता हूं कि उन्हें स्पष्ट करना मेरी जिम्मेदारी है. मैं ईमानदारी पारदर्शिता और सम्मान के साथ खुद कोस्पष्ट करने के लिए प्रतिबद्ध हूं. मैंने कुछ दिनों तक मौन रहने का फैसला किया है. लेकिन इसे उदासीनता या देशभक्ति की कमी के रूप में नहीं समझाजाना चाहिए. वास्तव में यह मेरे देश के प्रति मेरे गहरे प्रेम, सत्य के प्रति मेरे गहरे सम्मान और समर्पण के प्रति मेरी प्रतिबद्धता के कारण है कि मैंनेबोलने से पहले चिंतन करने का समय लिया. मौन वह चरण है जहां जिम्मेदारी परिपक्व होती है भावनाएं शांत होती हैं और शब्दों को आवेगपूर्ण तरीकेसे चुनने के बजाय सावधानी से चुना जा सकता है.उन्होंने आगे लिखा मैं अपने विचारों के बारे में स्पष्ट होना चाहता हूं. पहलगाम हमले को लेकर करती हूं कड़ी निंदा-प्रियंका गांधीमैं पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करता हूं जिसने निर्दोष लोगों की जान ले ली और उनके परिवारों को तोड़ दिया. मैं भारत के साथखड़ा हूं और हमेशा ऐसा ही करूंगा इस हमले को रोकने के लिए कोई राजनीतिक, धार्मिक या वैचारिक तर्क नहीं है. उन्होंने कहा निर्दोष और निहत्थेलोगों के खिलाफ हिंसा को माफ नहीं किया जा सकता है.उन्होंने आगे कहा कि आतंकवाद किसी भी रूप में हो मानवता की आत्मा पर हमला है औरमनुष्य के बिना किसी भय के जीने के मौलिक अधिकार का हनन करता है. वाड्रा ने हमले में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की और सभी सेमहात्मा गांधी की अहिंसा का पालन करने की शिक्षाओं को याद रखने का आग्रह किया.उन्होंने कहा’कोई भी कारण, कोई भी तर्क निर्दोष लोगों के खूनबहाने को सही नहीं ठहरा सकता। मैं उन सभी के लिए शोक व्यक्त करता हूं जिनके जीवन खो गए जिनका भविष्य छीन लिया गया जिनके दिलअकल्पनीय दुख से भर गए और मैं सभी से महात्मा गांधी की शिक्षाओं को याद रखने का आग्रह करता हूं.उन्होंने कहा कि अहिंसा साहसी विकल्प है. रॉबर्ट वाड्रा ने पहलगाम हमले को दिया था कायरतापूर्ण करारहमारे देशवासियों की पीड़ा हमारी अपनी पीड़ा है. आज इस दुख की घड़ी में मैं एक ऐसी दुनिया बनाने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करता हूं.जहां कोईभी बच्चा कोई भी परिवार कोई भी समुदाय आतंक के साये में न रहे इससे पहले 23 अप्रैल को रॉबर्ट वाड्रा ने पहलगाम हमले को कायरतापूर्ण करारदिया था. उन्होंने कहा था कि इस तरह के हमले किसी भी वैध उद्देश्य को पूरा करने में विफल रहे हैं यह केवल सामाजिक विभाजन को गहरा करते हैं मैंइस घटना की निंदा करता हूं. ऐसी घटनाएं किसी मुद्दे को नहीं उठाती हैं नागरिकों पर हमला करके मुद्दों को उठाना कायरतापूर्ण तरीका है. धर्म औरराजनीति को अलग-अलग रहना चाहिए आतंकवादियों ने लोगों की पहचान की जांच करने के बाद उन्हें मार डाला क्योंकि उन्हें लगता है कि मुसलमानोंको दबाया जा रहा है.
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने नए स्टार्टअप को लेकर दिया जोर, कहा नौकरी की तलाश करने की बजाय उद्यमी बनना पसंद करे रहे है आज के युवा

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्टार्टअप पर जोर दिया उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में भारत की युवा पीढ़ी कीमानसिकता बदली है. अब युवा बहुराष्ट्रीय कंपनियों (एमएनसी) में नौकरी की तलाश करने के बजाय उद्यमी बनना पसंद कर रहे हैं. वॉशिंगटन डीसी मेंभारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और अमेरिका-भारत सामरिक भागीदारी मंच (यूएसआईएसपीएफ) द्वारा आयोजित अमेरिका-भारत आर्थिक मंचमें अपने भाषण में गर्वनर संजय मल्होत्रा ने कहा कि जब मैंने कॉलेज छोड़ा तो एमएनसी में नौकरी करना मेरा पसंदीदा विकल्प था. किसी ने भी अपनाखुद का उद्यम शुरू करने के बारे में नहीं सोचा था हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग और प्रबंधन स्नातक उद्यमिता और स्टार्ट-अप की ओर रुखकर रहे हैं.उन्होंने कहा कि उद्यमिता की इस बढ़ती संस्कृति ने भारत को एक मजबूत स्टार्ट-अप इकोसिस्टम बनाने में मदद की है. सरकारी पहलों का समर्थन है प्राप्तदेश में लगभग 150,000 मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप हैं जिन्हें स्टार्ट-अप इंडिया, डिजिटल इंडिया और अटल इनोवेशन मिशन जैसी सरकारी पहलों कासमर्थन प्राप्त है. आरबीआई गर्वनर ने कहा कि भारत में अब दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी संख्या में यूनिकॉर्न हैं जिनमें से कई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे उच्च तकनीक क्षेत्रों से उभर रहे हैं. भारत ने वैश्विक नवाचार सूचकांक में भी अपनी स्थिति में सुधार किया है यह2015 के 81वें स्थान से चढ़कर 2024 में 39वें स्थान पर आ गया है निम्न-मध्यम आय वाले देशों में भारत अब पहले स्थान पर है.उन्होंने कहा कि यहजानकर खुशी होती है कि भारत तेजी से नौकरी चाहने वालों की बजाय नौकरी देने वालों का देश बनता जा रहा है. सार्वजनिक वितरण प्रणाली कोआधार से जोड़ने जैसी विभिन्न योजनाओं के डिजिटलीकरण से भारी बचत हुई है. राज्य सरकारों को समय पर धन मिलने से केंद्र सरकार को अपनेनकदी प्रवाह को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में भी मदद मिली है. सरकारी खर्च की दक्षता में किया गया काफी सुधारदरअसल उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) जैसी पहलों ने सरकारी खर्च की दक्षता में काफी सुधार किया है जिससे मार्च2023 तक लगभग 40 बिलियन अमेरिकी डॉलर की बचत हुई है.उन्होंने कहा कि भारत में महिलाओं की श्रमबल में भागीदारी अंतरराष्ट्रीय औसत कीतुलना में काफी कम है। इस फासले को कम करने के लिए लड़कियों की शिक्षा कौशल विकास, कार्यस्थल पर सुरक्षा और सामाजिक बाधाएं दूरकरने की दिशा में प्रयास करने होंगे. आरबीआई गवर्नर ने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मझोली इकाइयों (एमएसएमई) का पांचवां हिस्सा महिलाओं केनियंत्रण में होने के बावजूद महिला उद्यमियों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के रुख को लेकर डरा पाकिस्तान, लेकिन अभी भी दे रहा गीदड़धमकी

पहलगाम आतंकी हमले को लेकर भारत के रुख को लेकर पाकिस्तान डरा हुआ है पाकिस्तान लगातार युद्ध की गीदड़भभकी तो दे रहा लेकिन मन हीमन वहां भारत की कार्रवाई को लेकर दहशत है. अब पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ ने अपने छोटे भाई और पाकिस्तान के पीएम शहबाजशरीफ को नसीहत दी है. पूर्व पीएम नवाज ने शहबाज शरीफ से कहा है कि वे कूटनीतिक तरीके से तनाव को कम करने पर जोर दें.रविवार कोपाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपने बड़े भाई और पूर्व पीएम नवाज शरीफ से मिलने के लिए उनके आवास पर पहुंचे. शहबाज ने नवाजशरीफ को भारत की ओर से लगाए गए कड़े प्रतिबंधों की दी जानकारी दी. साथ ही पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) की बैठक में लिएगए फैसलों के बारे में भी बताया. इस दौरान पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज भी मौजूद थीं. शहबाज ने अपने बड़े भाई को किसी भी आक्रमणका जवाब देने की तैयारियों के बारे में जानकारी दी.शहबाज ने कहा कि पहलगाम क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने के लिए आतंकी हमला भारतीयों नेकिया है.युद्ध के खतरों को दिया बढ़ावहीं सिंधु जल संधि को निलंबित करने के भारत के एकतरफा फैसले ने क्षेत्र में युद्ध के खतरे को बढ़ा दिया है. पाकिस्तान शांति के लिए प्रतिबद्ध हैलेकिन देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता. इस पर नवाज शरीफ ने कहा कि सरकार शांति बहाल करने के लिए सभी उपलब्धराजनयिक संसाधनों का इस्तेमाल करे. कूटनीतिक तरीके से तनाव कम करने पर जोर दिया जाए.इससे पहले पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ नेपहलगाम हमले की अंतरराष्ट्रीय जांच में चीन और रूस की भागीदारी की बात की. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि रूस या चीन या यहां तक किपश्चिमी देश इस संकट में बहुत ही सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं. वे एक जांच दल भी गठित कर सकते हैं जिसे जांच का काम सौंपा जाना चाहिएकि भारत झूठ बोल रहा हैं या सच उन्होंने कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय दल को इस बात का पता लगाने दें.पहलगाम हमले को लेकर भारत लगातारपाकिस्तान पर आरोप लगा रहा है.भारत ने पाकिस्तान पर सिंधू समेत लगाए कई प्रतिबंधभारत ने पाकिस्तान पर सिंधु जल संधि पर रोक समेत कई प्रतिबंध लगाए हैं वहीं पाकिस्तान हमले में संलिप्तता से इनकार कर रहा है. पाकिस्तान नेभारत के विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है.बीती 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित लश्कर ए तैयबा केसंगठन टीआरएफ के आतंकियों ने 26 निर्दोष पर्यटकों की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस घटना के बाद भारत सरकार ने सख्त कदम उठाते हुएसिंधु जल समझौता स्थगित कर दिया. साथ ही पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक संबंध भी कम कर लिए हैं. भारत ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त को एकहफ्ते में देश छोड़ने का निर्देश दिया है. आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना भी अलर्ट पर है.
पहलगाम हमले पर खड़गे का हमला, “मोदी गंभीर नहीं, सर्वदलीय बैठक में नहीं आए, बिहार में रैली करने में व्यस्त थे”

जम्मू और कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हाल ही में हुए आतंकवादी हमले पर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधतेहुए कहा कि प्रधानमंत्री हमले के प्रति गंभीर नहीं हैं। खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी हमले के बाद भी सर्वदलीय बैठक में शामिल होने केबजाय बिहार में एक रैली करने में व्यस्त थे। खड़गे ने यह बयान कांग्रेस पार्टी द्वारा आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में दिया, जहां उन्होंने सरकार कीआलोचना की और कहा कि प्रधानमंत्री का रुख राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति लापरवाह था। खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ यह आरोप भी लगाया कि जब देश को उनकी आवश्यकता थी, तब वह अपने चुनावी कार्यक्रमों में व्यस्त थे औरउन्होंने राजनीतिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी, जबकि देश में सुरक्षा की स्थिति गंभीर हो चुकी थी। “जब पहलगाम में हमारे सैनिकों पर हमलाहुआ, तब प्रधानमंत्री मोदी देश की सुरक्षा पर ध्यान देने के बजाय बिहार में चुनावी रैलियों में व्यस्त थे। यह एक गंभीर विषय है और प्रधानमंत्री का इसपर कोई ध्यान नहीं है,” खड़गे ने कहा।सर्वदलीय बैठक का मुद्दाखड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि सर्वदलीय बैठक बुलाने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी इसमें शामिल नहीं हुए, जो एक गंभीर औरसंवेदनशील मुद्दा था। खड़गे के अनुसार, मोदी की उपस्थिति की अनुपस्थिति ने इस मुद्दे की गंभीरता को और बढ़ा दिया। उन्होंने यह भी कहा कि मोदीको एक लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत देश के सभी राजनीतिक दलों को साथ लेकर निर्णय लेने चाहिए थे, लेकिन उनकी राजनीति मेंइस तरह की “लापरवाही” स्पष्ट रूप से झलकती है। कांग्रेस नेता ने यह भी बताया कि इस बैठक में पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होनी चाहिए थी, क्योंकि यह हमला पाकिस्तान के द्वारा प्रायोजितआतंकवाद का हिस्सा था। खड़गे ने यह सवाल उठाया कि क्यों प्रधानमंत्री मोदी ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर पार्टी राजनीति से ऊपर उठकर नहीं सोचते।उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रधानमंत्री ने सही समय पर इस बैठक में भाग लिया होता, तो इससे देश की एकजुटता और ताकत को और बढ़ावामिलता। पीएम मोदी की रैलियांप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिहार दौरे और चुनावी रैलियों पर खड़गे ने सवाल उठाते हुए कहा कि यह समय देश की सुरक्षा के लिए सामूहिक रूप सेएकजुट होने का था, न कि चुनावी कार्यक्रमों में व्यस्त रहने का। खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की प्राथमिकताएं गलत दिशा में हैं और यहदिखाता है कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा से ज्यादा अपनी राजनीतिक यात्रा की चिंता है। खड़गे ने कहा, “अगर प्रधानमंत्री को इस समय अपनी पार्टी और राज्यकी रैलियों से फुर्सत नहीं मिल रही, तो यह चिंता का विषय है।” खड़गे का प्रधानमंत्री से सवालकांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री से यह भी सवाल किया कि जब आतंकवाद की समस्या इतनी गंभीर हो, तो केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री को एक कदम आगेबढ़कर इस मामले को न केवल हल करना चाहिए, बल्कि पूरे देश को विश्वास दिलाना चाहिए। “हम प्रधानमंत्री से यह सवाल पूछते हैं कि अगर वोइतना व्यस्त हैं, तो क्या वो देश की सुरक्षा को प्राथमिकता देंगे या चुनावी रैलियों को?” खड़गे ने सवाल किया। कांग्रेस पार्टी का रुखकांग्रेस पार्टी ने हमेशा आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा पर अपनी चिंता जताई है और पार्टी नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी की नीतियां औरउनका रवैया आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में प्रभावी नहीं रहे हैं। खड़गे ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने कासमर्थन करती है, लेकिन वर्तमान सरकार के रवैये से यह साफ है कि राष्ट्रीय सुरक्षा उनके एजेंडे का हिस्सा नहीं है। इसके अलावा, खड़गे ने यह भी कहा कि इस प्रकार के हमले केवल कश्मीर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे देश के लिए खतरा हैं और सरकार कोइससे निपटने के लिए एक ठोस रणनीति बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री अपनी जिम्मेदारी निभाते और सर्वदलीय बैठक में भाग लेते, तो शायद देश को इस संकट से निपटने के लिए एक मजबूत रणनीति मिल सकती थी। सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ:प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ खड़गे का बयान देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। जहां एक तरफ कुछ राजनीतिक विश्लेषक खड़गे के बयान कोसही ठहरा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मोदी के समर्थक इसे राजनीतिक मौके पर निशाना साधने के तौर पर देख रहे हैं। कई ने यह भी कहा कि खड़गे काबयान केवल सरकार की आलोचना करने और राजनीतिक लाभ लेने का एक प्रयास था। सामाजिक मीडिया पर भी इस बयान को लेकर बहस तेज हो गई है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने खड़गे के बयान की निंदा की, जबकि कुछ नेप्रधानमंत्री की रैलियों की आलोचना की और खड़गे के दावे को सही ठहराया। यह मामला अब राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच भीचर्चा का विषय बन चुका है।