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पहलगाम हमले के बाद सोशल मीडिया पर देशविरोधी पोस्ट, देशभर में बड़ी कार्रवाई

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले के बाद देश भर में सोशल मीडिया पर भड़काऊ और देश विरोधी पोस्ट डालने वालों केखिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है। सुरक्षा एजेंसियों ने सात राज्यों में छापेमारी कर 26 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तार लोगों में एकविधायक, एक पत्रकार, एक वकील और 23 छात्र शामिल हैं। इन सभी पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर हमले का समर्थन किया या फिरदेश विरोधी टिप्पणियां कीं, जिससे राष्ट्रीय एकता और शहीदों के सम्मान को ठेस पहुंची। जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोगों में उत्तर प्रदेश के एक क्षेत्रीय विधायक शामिल हैं, जिनके विवादास्पद बयान ने काफी हंगामा खड़ा करदिया। वहीं, दिल्ली से जुड़े एक प्रतिष्ठित अखबार के पत्रकार और एक उच्च न्यायालय के वकील को भी देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने केआरोप में पकड़ा गया है। 23 छात्रों को विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से कई ने सोशल मीडिया पर आतंकियोंके समर्थन में पोस्ट साझा किए थे। जांच में सामने आया है कि कई छात्र व्हाट्सएप ग्रुप और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए भड़काऊ सामग्री काप्रचार कर रहे थे, और कुछ पोस्ट तो पाकिस्तान समर्थक एजेंडे से प्रेरित नजर आए। गिरफ्तारियां जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और केरल जैसे सात राज्यों से हुई हैं। जम्मू-कश्मीर से सबसे ज्यादादस छात्रों को गिरफ्तार किया गया है। उत्तर प्रदेश में विधायक समेत तीन लोगों को, दिल्ली में एक पत्रकार और दो छात्रों को, जबकि महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल से भी कुछ छात्रों को पकड़ा गया है। सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की गंभीर धाराएँ लगाई गई हैं, जिनमेंदेशद्रोह (धारा 124A), सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास (धारा 153A), आपराधिक षड्यंत्र (धारा 120B) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियमकी धाराएं शामिल हैं। सरकार ने इस पूरे मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि देशविरोधी बयानों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गृह मंत्रालय केएक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर नफरत फैलाने की कोशिश करने वालों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी। सरकार कासाफ कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर देश की एकता और अखंडता से खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। हालांकि, कुछ छात्र संगठनों ने इन गिरफ्तारियों पर सवाल उठाए हैं और दावा किया है कि सभी छात्रों को एक ही तराजू में तौलना ठीक नहीं है। उन्होंनेमांग की है कि जिन छात्रों के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं हैं, उन्हें जल्द रिहा किया जाए। दूसरी ओर, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तार किए गएसभी व्यक्तियों के खिलाफ पर्याप्त डिजिटल सबूत मौजूद हैं और पूरी जांच प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है। सरकार ने इस प्रकरण के मद्देनजर फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर (अब X) और व्हाट्सएप जैसी सोशल मीडिया कंपनियों से संपर्क साधा है। विवादितपोस्टों और अकाउंट्स की जानकारी मांगी गई है ताकि कानूनी कार्रवाई को तेज किया जा सके। अब तक कई अकाउंट्स ब्लॉक कर दिए गए हैं औरअन्य पर नजर रखी जा रही है। सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे देशविरोधी सामग्री तुरंत हटाएं और संबंधित यूजर्स की पूरीजानकारी उपलब्ध कराएं। पहलगाम आतंकी हमले के बाद देश में उमड़े जनाक्रोश के बीच सोशल मीडिया पर देश विरोधी पोस्ट करने वालों के खिलाफ सरकार की सख्तकार्रवाई यह संकेत देती है कि भारत अब इस तरह के कृत्यों को बिल्कुल भी सहन नहीं करेगा। यह मामला एक बार फिर रेखांकित करता है कि सोशलमीडिया की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां और कार्रवाई देखने को मिलसकती हैं।

पहलगाम के गुनहगार को लेकर जम्मू-कश्मीर में बड़ा एक्शन, आतंकियों की मदद करने वाले दो लोगों को किया गया गिरफ्तार

पहलगाम में आतंकी हमले के बाद सुरक्षाबलों ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है आतंकियों के एनकाउंटर के बीच उन्हें पनाह देने वालों पर भीकार्रवाई की जा रही है. एएनआई से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कुलगाम जिले के कैमोह इलाके के थोकरपोरा में सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के दोसहयोगियों को गिरफ्तार किया.पहलगाम के गुनहगारों में शामिल लश्कर-ए-ताइबा के दो आतंकियों के घर जमींदोज हो गए हैं. सुरक्षाबलों ने आतंकीआसिफ शेख के त्राल स्थित घर और बिजबिहाड़ा स्थित आदिल ठोकर के घरों की वीरवार रात को तलाशी ली. इनमें बड़ी मात्रा में रखे गए विस्फोटकफटने से घर ध्वस्त हो गए.पहलगाम के बायसरन में 26 बेगुनाहों की जान लेने वाले हमलावरों में से तीन के सुरक्षा एजेंसियों ने स्केच जारी करने केबाद तस्वीरें भी जारी की हैं. सूत्रों के अनुसार प्रत्यक्षदर्शियों ने सुरक्षाबलों को जो बताता उसके आधार पर स्केच बनाए गए थे. हमले में तीन से चारआतंकवादी शामिल थे इनमें दो पाकिस्तानी और अन्य स्थानीय आतंकियों में आसिफ व आदिल भी शामिल हैं.आसिफ शेख ने गलत रास्ता चुना. परिवार की जिंदगी बर्बादइससे उसने अपनी और अपने परिवार की जिंदगी बर्बाद कर दी. आसिफ का घर त्राल के उसी इलाके में है जहां आतंकी बुरहान वानी रहता था कुछसमय पहले एक मुठभेड़ में मारे गए आतंकी की डायरी में आसिफ की हथियार के साथ तस्वीर मिली थी. आसिफ ने 2017-18 में पाकिस्तान में ट्रेनिंगली कुछ साल तक अंडरग्राउंड रहने के बाद 18 अप्रैल, 2022 से सक्रिय हुआ और तब से लश्कर के फरमान पर वारदात को अंजाम देता आ रहाहै.आतंकी आदिल 2018 में वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान भाग गया था. वहां उसने आतंकी कैंप में ट्रेनिंग ली और पिछले साल ही कश्मीर लौटा थावह भी लश्कर की नापाक मंसूबों को दक्षिण कश्मीर में अंजाम दे रहा था उसे युवाओं को आतंकवाद में भर्ती के लिए भी जिम्मेदारी दी गईथी.पहलगाम हमले में शामिल आतंकी आसिफ की बहन यासमीना ने कहा कि उसका भाई मुजाहिदीन है. उसने परिवार के निर्दोष सदस्यों को दंडितकिया जा रहा है राख हो चुके घर के पास पत्रकारों से बात करते हुए यासमीना ने कहा मेरा एक भाई जेल में है. दूसरा मुजाहिदीन है दो बहनें भी हैं. पुलिस ने लिया एक्शनदरअसल बीते दिन जब मैं ससुराल से यहां आई तो माता-पिता व भाई-बहन घर पर नहीं मिले. पुलिस उन्हें ले गई थी जब मैं यहां थी तो सुरक्षाबलआए और मुझे पड़ोसी के घर में जाने के लिए कहा उसके बाद घर ध्वस्त हो गया. कि मेरे भाई ने घर में विस्फोटक रखा वह जब आया ही नहीं तोरखेगा कहां से हमारी उसके साथ आखिरी बार 2021 में बात हुई थी. तब से कोई संपर्क नहीं हुआ उसने हम बहनों को बेसहारा छोड़ दिया था वहदिव्यांग पिता को भी छोड़कर चला गया.शोपियां के चोटीपोरा में एक सक्रिय शीर्ष लश्कर आतंकवादी कमांडर शाहिद अहमद कुट्टे के घर को सुरक्षाबलों ने जमींदोज कर दिया. शाहिद पिछले तीन से चार वर्षों से सक्रिय है और कई राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल है. शुक्रवार की रात सुरक्षाबलों ने कुलगाम के क्विमोह में आतंकी जाकिर गनी के घर को ध्वस्त कर दिया है जाकिर 2023 में लश्कर में शामिल हुआ था पहलगाम हमले केबाद अब तक सुरक्षाबलों ने कुल पांच आतंकियों के घरों को ध्वस्त कर दिया है.

खेलों को लेकर बोले खेल मंत्री मनसुख मांडविया, कहा उम्मीद है योगासन को ओलंपिक खेल के रुप में देंखेंगे

योग को विश्व के लिये भारत का उपहार बताते हुए खेलमंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि दुनिया में जिस तरह से योग का प्रचार हो रहा है. उम्मीद हैकि जल्दी ही योगासन को ओलंपिक खेल के रूप में देखेंगे दूसरी एशियाई योगासन चैम्पियनशिप के उद्घाटन के मौके पर मांडविया ने कहा, ‘योग विश्वके लिये भारत का बहुत बड़ा उपहार है. हम भाग्यशाली है कि हमें विरासत में योग मिला और योग से ही ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ निकला जो हमारा संस्कारहै. उन्होंने विश्व योगासन के अध्यक्ष स्वामी रामदेव से दुनिया के विभिन्न देशों में योग महासंघ के गठन का अनुरोध करते हुए उन्होंने कहा कि इससेयोगासन को ओलंपिक खेल का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा. उन्होंने कहा दुनिया में आज जिस तरह से योग प्रचारित हो रहा है. मैं स्वामी रामदेवसे अनुरोध करूंगा कि अगर दुनिया भर में अपने अपने देश में योग महासंघ का गठन हो जायेगा तो हम जल्दी ही योगासन को ओलंपिक खेल के रूप मेंदेखेंगे.मांडविया ने कहा ओलंपिक में योगासन में पदक चाहे कोई भी जीते लेकिन श्रेय भारत का रहेगा. भारत सरकार ने दिसंबर 2020 में दी थी मान्यताभारत सरकार ने दिसंबर 2020 में योगासन को प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में मान्यता दी थी. उत्तराखंड में इस साल की शुरूआत में हुए 38वें राष्ट्रीय खेलोंमें इसे पदक खेल के रूप में शामिल किया गया जबकि पहले यह नुमाइशी खेल ही था. एशियाई योगासन चैम्पियनशिप को इस दिशा में मजबूतकदम माना जा रहा है. योगासन भारत द्वारा खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के सहयोग 25 से 27 अप्रैल तक इंदिरा गांधी इंडोरस्टेडियम में दूसरी एशियाई योगासन खेल चैंपियनशिप का आयोजन किया जा रहा है. इस प्रतियोगिता में 17 एशियाई देशों के कुल 170 खिलाड़ीहिस्सा ले रहे हैं. यह चैंपियनशिप चार आयु वर्ग 10 से 18, 18 से 28, 28 से 35 और 35 से 45 वर्ष में आयोजित की जा रही है। चैंपियनशिप कापहला सत्र 2022 में थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित किया गया था. खेलमंत्री मांडविया ने कहा वर्तमान समय में हम जिस विज्ञान, स्वास्थ्य काइस्तेमाल कर रहे हैं. एशिया भर के खिलाड़ी ले रहे है चैम्पियनशिप में भागदरअसल अगर उसकी पृष्ठभूमि में देखें तो हमारे ऋषि मुनियों का ज्ञान है. हम चरक और सुश्रुत के देश से हैं और योग हमारा संस्कार, जीवनशैली औरसंपूर्ण स्वास्थ्य है.उन्होंने कहा हमारे लिए स्वास्थ्य सेवा है उद्योग नहीं मुझे बताया गया कि योग दुनिया में कई मिलियन डॉलर का उद्योग हो गया हैलेकिन हमने कभी स्वास्थ्य को उद्योग के रूप में नहीं देखा. यही हमारा संस्कार है स्वभाव है और जीवनशैली है. इसी को अपनाते हुए हमें विकसितभारत समृद्ध भारत और स्वस्थ भारत बनाने के लिये आगे बढना है. खेल राज्य मंत्री रक्षा खड़से ने कहा कि योग को अब एशियाई स्तर से आगे ले जानेका समय है. उन्होंने कहा योग हमारे देश की परंपरा रही है और यहां एशिया भर से कई देश और खिलाड़ी चैम्पियनशिप में भाग ले रहे हैं. अब इसेएशियाई स्तर तक सीमित नहीं रखकर ओलंपिक में ले जाने की कोशिश करेंगे.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बोले, भारत- पाकिस्तान सीमा पर हमेशा रहा तनाव “जानें क्या है पूरा मामला”

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर भारत ने पाकिस्तान और आतंकवादियों के खिलाफ कुछ सख्त कदम उठाए है. इससेपाकिस्तान की बौखलाहट बढ़ती ही जा रही है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए अपनीप्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच हमेशा से तनाव रहा है और वे इसे किसी न किसी तरह से खुद ही सुलझा लेंगे.बता दें कि ट्रंप नेयह बात उस समय कही जब वे रोम जाने के लिए एयर फोर्स वन विमान में सवार थे. साथ ही पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे इस दौरान ट्रंप ने कहा किमैं भारत और पाकिस्तान दोनों के करीब हूं उन्होंने कहा कि कश्मीर का मामला बहुत पुराना है. 1,000 साल या शायद उससे भी ज्यादा समय से लड़ाईचल रही है.ट्रंप ने पहलगाम हमले को लेकर कहा कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में जो हुआ वो बहुत बुरा था. इसके साथ ही ट्रंप ने भारत-पाकिस्तानसीमा विवाद पर कहा कि भारत पाकिस्तान के बीच सीमा पर 1,500 सालों से तनाव रहा है। यह नया नहीं है. लेकिन मुझे भरोसा है कि भारत औरपाकिस्तान इसे किसी तरह से सुलझा लेंगे मैं दोनों नेताओं को जानता हूं. वे इसे किसी न किसी तरह से खुद ही सुलझा लेंगे.जम्मू-कश्मीर के पहलगामशहर के निकट ‘मिनी स्विटरलैंड’ नाम से मशहूर पर्यटन स्थल पर मंगलवार दोपहर हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई. जिनमें ज्यादातरपर्यटक हैं पुलवामा हमले के बाद घाटी में सबसे घातक हमलादरअसल यह 2019 में पुलवामा में हुए हमले के बाद घाटी में हुआ सबसे घातक हमला है. एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि 26 मृतकों में दोविदेशी और दो स्थानीय निवासी हैं. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस आतंकी हमले को ‘हाल के वर्षों में आम लोगों पर हुए किसी भीहमले से कहीं बड़ा’ हमला बताया. अधिकारियों ने बताया कि यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारत की यात्रा पर हैं. इसी समय जम्मू-कश्मीर में पर्यटन और ट्रैकिंग का मौसम जोर पकड़ रहा है.2019 की फरवरी में जम्मू-कश्मीर के ही पुलवामा में हुए आतंकी हमले केबाद घाटी में सबसे घातक हमला पहलगाम में हुआ है. पहलगाम शहर से लगभग छह किलोमीटर दूर बैसरन चीड़ के पेड़ों के घने जंगलों और पहाड़ों सेघिरा एक विशाल घास का मैदान है तथा देश व दुनिया के पर्यटकों के बीच पसंदीदा स्थान है.पहलगाम हमले के संबंध में अधिकारियों औरप्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हथियारबंद आतंकवादी ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ में घुस आए और भोजनालयों के आसपास घूम रहे, खच्चर की सवारी कर रहे, पिकनिक मना रहे पर्यटकों पर गोलीबारी शुरू कर दी. पाकिस्तान में स्थित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के छद्म संगठन‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) ने हमले की जिम्मेदारी ली है.

पोप के अंतिम संस्कार में पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई राष्ट्राध्यक्ष भी हुए शामिल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को वेटिकन सिटी में पोप फ्रांसिस को श्रद्धांजलि दी. उनके साथ केंद्रीय संसदीय कार्य-अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रीकिरेन रिजिजू भी मौजूद हैं. मुर्मू पोप के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए वेटिकन सिटी पहुंची हैं. साथ ही मत्स्य-पशुपालन व डेयरी राज्य मंत्रीजॉर्ज कुरियन, और गोवा विधान सभा के उपाध्यक्ष जोशुआ डी सूजा भी पहुंचे हैं. भारत ने पोप के निधन पर तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणाकी है. मुर्मू वेटिकन सिटी की दो दिनी यात्रा पर हैं.फ्रांसिस का ईस्टर सोमवार को 88 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. विदेश मंत्रालय से जारी एक बयानके मुताबिक, पोप फ्रांसिस को दुनिया में करुणा और विनम्रता के प्रतीक के रूप में याद किया जाएगा. भारत ने घोषणा की थी कि पोप के सम्मान मेंदेश की उन सभी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और कोई आधिकारिक मनोरंजन नहीं होगा इसी क्रम में भारत में आज भी राजकीय शोकरहेगा.लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पोप फ्रांसिस के निधन पर शोक जताने के लिए नई दिल्ली के एपोस्टोलिक नंसियेचर का दौरा किया. उन्होंने भारत-नेपाल के एपोस्टोलिक नुंसियो आर्कबिशप डॉ. लियोपोल्डो से भी शिष्टाचार भेंट की. पोप के अंतिम संस्कार में पहुंची राष्ट्रपतिशनिवार को पोप फ्रांसिस के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की भीवेटिकन पहुंच गए हैं. वेटिकन ने कहा, 164 प्रतिनिधिमंडलों की पुष्टि की गई है जिनमें 54 राष्ट्राध्यक्ष और 12 शासक शामिल हैं. इनमें फ्रांसीसीराष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर, प्रिंस विलियम, स्पेन के राजा फेलिप और रानी लेटिजिया, हंगरी के राष्ट्रपति विक्टर ओर्बन, र्जेंटीनाके राष्ट्रपति जेवियर माइली व ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा भी शामिल होंगे. अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिली अर्जेंटीना के पोप सेंट पीटर्सबेसिलिका में अंतिम दर्शन भी करेंगे.तीन दिनों तक चलने वाला यह सार्वजनिक दर्शन कार्यक्रम शुक्रवार शाम 7 बजे खत्म हो गया. पोप के अंतिमसंस्कार के दौरान सुरक्षा बंदोबस्त के लिए 2,500 से अधिक पुलिस अधिकारियों और 1,500 सैनिकों को तैनात किया जाएगा. शोकसभा में करीब दो लाख लोग थे मौजूदसेंट पीटर्स स्क्वायर में शोकसभा के लिए लगभग दो लाख लोग, जबकि वेटिकन से रोम में पोप के समाधि स्थल तक 4 किलोमीटर लंबे रास्ते परलगभग तीन लाख लोगों के जुटने का अनुमान है. इतालवी मीडिया के अनुसार प्रमुख सुरक्षा इंतजाम के तहत समुद्र तट पर एक सशस्त्र नौसैनिक पोतभी तैनात किया जाएगा. लड़ाकू विमानों के दस्तों को भी तैयार रखा गया है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा परम पूज्य पोप फ्रांसिस के निधनसे बहुत दुखी हूं. दुख और स्मरण की इस घड़ी में वैश्विक कैथोलिक समुदाय के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना. पोप फ्रांसिस को दुनिया भर के लाखों लोगहमेशा करुणा, विनम्रता और आध्यात्मिक साहस के प्रतीक के रूप में याद रखेंगे. छोटी उम्र से ही उन्होंने प्रभु ईसा मसीह के आदर्शों को साकार करने केलिए खुद को समर्पित कर दिया था. उन्होंने गरीबों और वंचितों की लगन से सेवा की जो लोग पीड़ित थे. उनके लिए उन्होंने आशा की भावना जगाई.

एलन मस्क की कंपनी ने मिनेसोटा के डीपफेक प्रतिबंध कानून को दी चुनौता, दायर किया गया मुकदमा

1996 का कानून सोशल मीडिया को उनके प्लेटफॉर्म पर पोस्ट की गई सामग्री के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने से बचाता था कंपनी ने कहा कि कानूनमें डीपफेक पर प्रतिबंध लगाने का उल्लेख सौम्य लग सकता है वास्तव में यह हानिरहित, चुनाव-संबंधी भाषण को अपराध बना देगा और ऐसे भाषणको सेंसर करने के लिए सोशल-मीडिया प्लेटफार्म को आपराधिक रूप से उत्तरदायी बना देगा. लोकतंत्र की रक्षा करने के बजाय यह कानून इसे नष्ट करदेगा. एक्स ने कहा कि वह मिनेसोटा कानून को चुनौती देने वाला एकमात्र सोशल मीडिया प्लेटफार्म है. हमने अन्य कानूनों को भी चुनौती दी है जिन्हेंयह मुक्त भाषण का उल्लंघन मानता है. जैसे कि 2024 कैलिफ़ोर्निया राजनीतिक डीपफेक कानून जिसे एक न्यायाधीश ने अवरुद्ध कर दिया है.एक्सने कहा कि कानून का कम्युनिटी नोट्स फीचर उपयोगकर्ताओं को उस सामग्री को चुनने की अनुमति देता है जिसे वे समस्याग्रस्त मानते हैं और इसेफेसबुक, यूट्यूब और टिकटॉक द्वारा अपनाया गया है. मुकदमे में कहा गया है कि हमारी प्रमाणिकता नीति और ग्रोक AI टूल अतिरिक्त सुरक्षा प्रदानकरते हैं. डेमोक्रेटिक मिनेसोटा अटॉर्नी जनरल कीथ एलिसन ने कहा कि हम मुकदमे की समीक्षा कर रहे हैं और उचित समय और तरीके से जवाब देंगे.लोकतांत्रिक संस्थानों के लिए वास्तविक खतराडीपफेक स्वतंत्र चुनावों और लोकतांत्रिक संस्थानों के लिए एक वास्तविक और बढ़ता खतरा है.मिनेसोटा विश्वविद्यालय के कानून के प्रोफेसर औरप्रौद्योगिकी कानून के विशेषज्ञ एलन रोजेनश्टाइन ने कहा कि मस्क के बारे में जो कुछ भी कोई सोचता है. उससे मुक्त-भाषण के मुद्दों को अलग करनामहत्वपूर्ण है. मुझे लगभग यकीन है कि इसे रद्द कर दिया जाएगा. झूठे या भ्रामक राजनीतिक भाषण यहां तक कि झूठ के लिए भी पहले संशोधन केतहत कोई अपवाद नहीं है. आपराधिक दंड की संभावना एक्स और फेसबुक जैसी सोशल मीडिया कंपनियों को किसी भी ऐसी चीज को हटाने के लिएप्रोत्साहन देती है जो डीपफेक हो सकती है. आप इस कानून का पालन करने के लिए बहुत अधिक मात्रा में सेंसर करने जा रहे हैं.उन्होंने कहा किडीपफेक अच्छे नहीं हैं लेकिन मुक्त भाषण पर ऐसी सीमाएं लगाने से पहले यह सबूत प्राप्त करना अच्छा होगा कि वे वास्तविक समस्याएं पैदा कर रहेहैं. लोग मूर्ख बनना चाहते हैं और यह हमारे लोकतंत्र के लिए बहुत बुरा है लेकिन मुझे नहीं लगता कि डीपफेक प्रतिबंध से इसे हल किया जा सकताहै. डीपफेक वीडियो, फोटो या ऑडियो प्रसारित करने पर आपराधिक दंडमिनेसोटा के कानून के मुताबिक डीपफेक वीडियो, फोटो या ऑडियो प्रसारित करने पर आपराधिक दंड लगाया जा सकता है. इसमें जेल की सजा काभी प्रावधान है। अगर कोई व्यक्ति जानता है कि यह नकली है या इसकी प्रामाणिकता के प्रति लापरवाही से बरतता है तो पार्टी नामांकन सम्मेलन से90 दिनों के भीतर या आम चुनाव में प्रारंभिक मतदान की शुरुआत के बाद ऐसा किया जा सकता है. कानून में कहा गया है कि अगर इरादा किसीउम्मीदवार को चोट पहुंचाना या चुनाव परिणाम को प्रभावित करना है तो यह कानून काम करेगा. कानून के निर्माता डेमोक्रेटिक स्टेट सेन एरिन मेय क्वैडने कहा कि एलन मस्क ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में सैकड़ों मिलियन डॉलर का निवेश किया और विस्कॉन्सिन सुप्रीम कोर्ट की सीट खरीदने कीकोशिश की. वह इस बात से परेशान हैं कि मिनेसोटा कानून उन्हें डीपफेक फैलाने से रोकता है जिसका उद्देश्य उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचाना औरचुनावों को प्रभावित करना है. मिनेसोटा का कानून स्पष्ट और सटीक है जबकि यह मुकदमा तुच्छ गुमराह करने वाला और अटॉर्नी जनरल कार्यालय केसमय और संसाधनों की बर्बादी है.

मलेशिया के दो राजनेताओं के सोशल मीडिया अकाउंट किए गए प्रतिबंधित,धर्म के आधार पर वोट देने के लिए की अपील

मलेशिया के दो राजनेताओं के सोशल मीडिया अकाउंट भी प्रतिबंधित किए गए हैं इन दोनों नेताओं पर भी आरोप है कि उन्होंने सिंगापुर के मुस्लिममतदाताओं को धर्म के आधार पर वोट देने की अपील की थी और विपक्षी नेताओं का समर्थन किया गया था.सिंगापुर में जल्द ही आम चुनाव होने हैंऐसे में सिंगापुर की सरकार सोशल मीडिया पर नजर रख रही है और जो भी सोशल मीडिया अकाउंट मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहेहैं. उन्हें प्रतिबंधित किया जा रहा है एक सिंगापुर मूल के ऑस्ट्रेलियाई और दो मलेशियाई राजनेताओं के सोशल मीडिया अकाउंट प्रतिबंधित कर भीदिए गए हैं. दरअसल इन सोशल मीडिया अकाउंट्स की पोस्ट में सिंगापुर सरकार की धार्मिक मामलों को हैंडल करने के तरीके की आलोचना की गईथी और लोगों को धर्म के आधार पर वोट देने की अपील की गई थी.सिंगापुर में आगामी 3 मई को चुनाव होने हैं. इस बीच सिंगापुर के चुनाव आयोगने सोशल मीडिया कंपनी मेटा को कई अकाउंट्स को प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया है. इनमें से एक अकाउंट जुल्फीकार बिन मोहम्मद शरीफ का हैजो सिंगापुर मूल का ऑस्ट्रेलियाई नागरिक है. शरीफ रखते है इस्लामिक स्टेट से ताल्लुकदरअसल शरीफ पर आरोप है कि उसका इस्लामिक स्टेट से ताल्लुक है और सिंगापुर में उसे आईएस से संबंधों और आतंकवाद को बढ़ावा देने के चलतेहिरासत में भी लिया गया था. शरीफ ने सिंगापुर के मलय मूल के लोगों से अपील की कि सिंगापुर की संसद मलय मुस्लिम लोगों की अपेक्षाओं कोपूरा करने में नाकाम रही. शरीफ ने लोगों से वोट ने देने की अपील की शरीफ की पोस्ट का असर ये हुआ कि सिंगापुर के कई नागरिक भी उसके प्रभावमें आ गए और उसकी पोस्ट को रिपोस्ट किया.मलेशिया के दो राजनेताओं के सोशल मीडिया अकाउंट भी प्रतिबंधित किए गए हैं. इन दोनों नेताओं परभी आरोप है कि उन्होंने सिंगापुर के मुस्लिम मतदाताओं को धर्म के आधार पर वोट देने की अपील की थी और विपक्षी नेताओं का समर्थन किया गयाथा और सिंगापुर सरकार के कई फैसलों की आलोचना भी की थी. सिंगापुर के गृह विभाग और चुनाव आयोग ने बयान जारी कर यह पूरी जानकारी दीहै. बता दें कि सिंगापुर में कुल 27.58 लाख पंजीकृत मतदाता हैं जो 3 मई को मतदान करेंगे. सिंगापुर में 75 प्रतिशत आबादी चाइनीज मूल केलोगों की 15 प्रतिशत आबादी मलय लोगों की जिनमें अधिकतर मुस्लिम है और सात प्रतिशत आबादी भारतीय मूल के लोगों की है.

पहली बार पाकिस्तान क्रिकेट टीम के साथ हुआ ऐसा, मानसिक स्वास्थ्य के कारण कप्तान ने लिया खेल से ब्रेक

निदा ने विश्व कप क्वालिफायर के लिए फिटनेस टेस्ट के लिए उपस्थिति दर्ज कराई उन्हें इसके बाद अभ्यास शिविर से जुड़ने के लिए कहा गया था. लेकिन उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया। निदा ने नाम कई रिकॉर्ड दर्ज हैं.पाकिस्तान महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान निदा डार ने क्रिकेट से ब्रेकलेने का फैसला किया है. उन्होंने सोशल मीडिया के जरिये इसकी जानकारी दी है. डार ने मानसिक स्वास्थ्य का हवाला देते हुए यह फैसला लिया औरकहा कि उनकी निजता का सम्मान किया जाना चाहिए. निदा डार ने इसकी जानकारी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को भी दे दी है. उन्होंने मानसिक स्वास्थ्यसंबंधी समस्याओं के कारण राष्ट्रीय चयन से नाम वापस ले लिया है.पाकिस्तान क्रिकेट में यह पहली बार है जब किसी खिलाड़ी ने मानसिक स्वास्थ्यका हवाला देकर क्रिकेट से ब्रेक लेने का फैसला लिया हो. 39 वर्षीय निदा ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया पिछले कुछ महीनों मेंमेरे आसपास व्यक्तिगत और पेशेवर रूप से बहुत कुछ हुआ है. इसने मेरे मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाला है मैंने ऐसे में खुद पर ध्यान देने के लिएक्रिकेट से ब्रेक लेने का फैसला किया है. मैं सभी से इस दौरान मेरी निजता का सम्मान करने की अनुरोध करती हूं. पाकिस्तान की दिग्गज ऑलराउंडर्सपाकिस्तान की दिग्गज ऑलराउंडर्स में शुमार निदा इस टीम का चेहरा रही हैं. निदा ने पाकिस्तान के लिए 272 अंतरराष्ट्रीय (वनडे और टी20) मैच खेलेहै. पीसीबी ने उन्हें हाल ही में लाहौर में आयोजित आईसीसी महिला विश्व कप क्वालिफायर के लिए टीम के चयन के लिए खुद को उपलब्ध कराने केलिए कहा था. निदा ने फिटनेस टेस्ट के लिए उपस्थिति दर्ज कराई. उन्हें इसके बाद अभ्यास शिविर से जुड़ने के लिए कहा गया था लेकिन उन्होंने अपनानाम वापस ले लिया.निदा ने कहा कि उनके व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन दोनों में हाल की घटनाओं ने उनके मानसिक स्वास्थ्य को काफी प्रभावितकिया है. वह हाल ही में महिला राष्ट्रीय टी20 कप में भी नहीं खेली थीं. निदा ने पाकिस्तान के लिए अपना पिछला मैच अक्तूबर 2024 में दुबई मेंन्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था. निदा ने अब तक पाकिस्तान के लिए 112 वनडे और 160 टी20 मैच खेले हैं. 112 वनडे में उनके नाम 108 विकेट हैंजबकि उन्होंने इस प्रारूप में 1690 रन बनाए हैं. वहीं, टी20 में उनके नाम 144 विकेट हैं जबकि उन्होंने 2091 रन बनाए हैं. वनडे में उनकी सर्वश्रेष्ठगेंदबाजी 10 रन देकर चार विकेट है, जबकि टी20 में 21 रन देकर पांच विकेट है. वहीं बल्लेबाजी की बात करें तो वनडे में निदा का सर्वश्रेष्ठ स्कोर 87 रन और टी20 में 75 रन है.

कुरुक्षेत्र में रामदास आठवले की हुंकार: अंबेडकर जयंती पर विचारों का संग्राम

25 अप्रैल 2025 को हरियाणा के कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें भारत के संविधान निर्माता औरसमाज सुधारक डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर कई प्रमुख व्यक्तियों ने भाग लिया और डॉ. अंबेडकर के विचारों औरयोगदानों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। यह कार्यक्रम न केवल अंबेडकर के विचारों को पुनर्जीवित करने का एक अवसर था, बल्कि यहसमकालीन सामाजिक और राजनीतिक विमर्श के लिए भी एक महत्वपूर्ण मंच बना। डॉ. भीमराव अंबेडकर का योगदानडॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन और कार्य भारतीय समाज के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने न केवल संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिकानिभाई, बल्कि समाज में व्याप्त जातिवाद और असमानता के खिलाफ भी आवाज उठाई। अंबेडकर ने शिक्षा को समाज के उत्थान का एक महत्वपूर्णसाधन माना और उन्होंने अपने जीवन में इसे प्राथमिकता दी। उनका मानना था कि शिक्षा ही एकमात्र ऐसा माध्यम है, जिसके द्वारा समाज के कमजोरवर्गों को सशक्त बनाया जा सकता है। अंबेडकर ने भारतीय समाज में व्याप्त जातिवाद के खिलाफ संघर्ष किया और उन्होंने दलितों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उनके विचारों ने नकेवल दलितों को जागरूक किया, बल्कि समस्त समाज को एक नई दिशा दी। अंबेडकर का यह संदेश आज भी प्रासंगिक है, और उनके विचारों कोआगे बढ़ाने की आवश्यकता है। रामदास आठवले की उपस्थितिइस विशेष कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A) के नेता रामदास आठवले ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंनेअपने चिरपरिचित तेज़-तर्रार और शायरीपूर्ण अंदाज़ में डॉ. अंबेडकर के जीवन और कार्यों पर प्रकाश डाला। आठवले ने कहा कि डॉ. अंबेडकर केवलदलित समाज के उद्धारक नहीं थे, बल्कि वे पूरे भारत के लिए सामाजिक न्याय के प्रतीक थे। आठवले ने अंबेडकर के विचारों को आज की राजनीति और समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि अंबेडकर का सपना एक ऐसाभारत था, जहां सभी को समान अधिकार और अवसर मिलें। उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में हमें अंबेडकर के विचारों को अपनाने कीआवश्यकता है, ताकि हम एक समतामूलक समाज की दिशा में आगे बढ़ सकें। रवि कुंडली का संबोधनकार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष रवि कुंडली ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने अंबेडकर की विराट विचारधारा की सराहना करते हुए रामदास आठवलेको उनके “विचारों का उत्तराधिकारी” बताया। कुंडली ने कहा, “रामदास जी को मैं डॉ. अंबेडकर का बेटा मानता हूं,” जो पूरे सभागार में गूंज उठा औरलोगों ने इसका जोरदार स्वागत किया। कुंडली ने अपने भाषण में अंबेडकर के विचारों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में हमें अंबेडकर केसिद्धांतों को अपनाने की आवश्यकता है, ताकि हम एक समतामूलक और न्यायपूर्ण समाज की दिशा में आगे बढ़ सकें। उन्होंने यह भी कहा किअंबेडकर का सपना केवल दलितों का नहीं, बल्कि समस्त समाज का सपना है। देश–विदेश के मुद्दों पर रामदास आठवले की मुखरताकार्यक्रम के दौरान, रामदास आठवले ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हाल ही में हुए हमले पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने पाकिस्तान के प्रतिकड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है। उनके इस भाषण नेउपस्थित जनसमूह में नया उत्साह भर दिया और अंबेडकर की मूल भावना—”न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता”—को जीवंत कर दिया। आठवले ने यह भी कहा कि हमें अपने देश की सुरक्षा के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत एक मजबूत राष्ट्र है और हमें अपने देशकी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार रहना चाहिए। उनके इस भाषण ने उपस्थित जनसमूह में एक नई ऊर्जा भर दी और सभी कोएकजुट होने की प्रेरणा दी।

रुस ने पूरे देश पर नहीं किया कब्जा बोले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, यूक्रेन ने दी युद्ध खत्म करने की बड़ी रियासत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार रूप से रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के प्रयास में लगे हुए हैं. इसी बीच उन्होंने अपनेसोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि रूस ने यूक्रेन में चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए काफी बड़ी रियायत दी है. हालांकि यूरोप और यूक्रेन के नेताओंने ट्रंप के इस बयान को गलत ठहराया है. रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका लगातार प्रयास कर रहा है. इसी बीचअमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि रूस ने यूक्रेन में चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए काफी बड़ीरियायत दी है. उन्होंने यह भी कहा कि रूस चाहता तो यूक्रेन पर पूरा कब्जा कर सकता था. लेकिन उसने ऐसा नहीं किया.अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप नेगुरुवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से यूक्रेन पर हमले रोकने का आह्वान किया कारण है कि ट्रंप यूक्रेन की राजधानी कीव पर शांति समझौतेके बीच हुए घातक हमले को लेकर खुश नहीं हैं. उन्होंने कहा कि मुझे कीव पर रूसी हमलों से बिल्कुल भी खुशी नहीं है. ये हमले जरूरी नहीं थे औरबहुत ही गलत समय पर हुए.ट्रंप ने कहा कि व्लादिमीर, रुकें हर हफ्ते 5000 सैनिक मारे जा रहे हैं. चलिए अब शांति समझौता करते हैं. मिसाइल और ड्रोन से करीब एक घंटे तक किया हमलाबता दें कि रूस ने कीव पर मिसाइल और ड्रोन से करीब एक घंटे तक हमला किया. जिसमें कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और 90 घायल हुए. यह पिछले जुलाई के बाद का सबसे बड़ा हमला था.ट्रंप लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि युद्ध अब खत्म होना चाहिए उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपतिवोलोडिमिर ज़ेलेंस्की पर यह आरोप लगाया कि वह क्रीमिया को रूस को सौंपने से इनकार कर शांति समझौते में बाधा डाल रहे हैं. क्रीमिया पर रूस ने2014 में अवैध कब्जा किया था. ट्रंप का मानना है कि रूस अब और युद्ध नहीं चाहता जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को शांति की दिशामें कदम बढ़ाने चाहिए.इसके साथ ही ट्रंप ने यह भी कहा कि पुतिन अगर यूक्रेन के बाकी हिस्सों को कब्जे में लेना बंद कर दें. तो यह बहुत बड़ी रियायतहोगी. हालांकि यूरोप और यूक्रेन के नेताओं ने ट्रंप के इस बयान को गलत ठहराया है. उनका कहना है कि रूस अगर हमला रोकता है तो वह कोईरियायत नहीं बल्कि बुनियादी जरूरत है. गौरतलब है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की पहले भी कह चुके हैं कि वे रूस को कब्जे में लिए गए क्षेत्र नहींसौंपेंगे और यह उनके लिए एक लाल रेखा है.