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जानिए कौन है भारत पर आए शेख तमीम बिन हमद अल- थानी, भारत पहुंचे पीएम मोदी ने किया स्वागत

Qatar Emir sheikh: कतर के अमीर दो दिन के दौरे पर भारत पहुंचे. दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचकर पीएम मोदी समेत विदेश मंत्री एस जयशंकर नेपहुंचकर स्नागत किया. Qatar Emir sheikh Tamin Bin Hamad: कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी 17 फरवरी से दो दिवसीय भारत के दौरे पर है. प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार की शाम को दिल्ली एयरपोर्ट पर कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल- थानी का स्वागत किया. स्वागत के दौरानदोनों नेताओं को बातचीत करते और गर्मजोशी से गले मिले. मौके पर मौजूद एस जयशंकर ने भी उनका स्वागत किया. पीएम मोदी ने सोशल मीडियापर शेख अमीर के साथ फोटो भी शेयर किए है.आखिरकार कौन है शेख तमीम बिन हमद अल थानी.1980 में पूर्व अमीर हमद बिन खलीफा अलथानी के घर में जन्में थे शेख तमीम ने लंदन में अपनी पढ़ाई को पूरा किया. राँयल मिलिट्रि में एडमिशन लेने से पहले उन्होनें हैरो स्कूल में पढ़ाई की1998 में उन्होनें अपनी ग्रेजुएशन की और उसी साल वह कतर वापस आ गए. वापस आने के बाद में वह सेंकेंड लेफ्टनेंट के तौर पर सेना में शामिल होगए.शेख तमीम बिन हमद अल- थानी को साल 2003 में उत्तराधिकारी घोषित कर दिया गया. देश की सिक्योरिटी का संभाला था जिम्माइसके बाद ही उन्हें सशस्त्र सेनाओं का डिप्टी कमांडर- इन चीफ नियुक्त किया गया. उन्होनें बेहद ही जल्द देश की सिक्योरिटी का पूरा जिम्मा संभाला. अपनी लाइफस्टाइल के लिए फेमस शेख तमीम को दुनिया के आंठवें सबसे अमीर सम्राट के तौर पर जगह दी गई. अल थानी के परिवार की कुलसंपत्ति लगभग 335 बिलियन डालर है. उनकी निजी संपत्ति 2.4 बिलियन डालर के करीब है. कतर के अमीर का पूरा परिवार दोहा के एक राँयलपैलेस में रहता है. यह सोने से सजा एक आलीशान महल है. इस महल में 100 से ज्यादा कमरे है और इसमें करीब 500 गाड़ियों को पार्क किया जासकता है. कतर अमीरी नाम की खास प्राइवेटपरिवार के पास कतर अमीरी नाम की एक खास प्राइवेट एयरलाइन भी है. यह केवल शाही परिवार के लोगों को खास सेवाएं देती है. विदेश मंत्रालयके अनुसार शेख तमीम बिन हमद अल थानी भारत की दी दिवसीय यात्रा पर है. दरअसल ये दौरा उनका दूसरा दौरा है. इससे पहले भी अमीर साल2025 में भी भारत की यात्रा पर आए थे. अमीर राष्ट्रपति से भी मुलाकात करेंगें. पीएम मोदी के बीच में द्दिपक्षीय वार्ता भी होगी. इसमें अलग- अलगसेक्टर पर फोकस करने की उम्मीद है.

ज्ञानेश कुमार के CEC बनने पर राहुल गांधी की नाराजगी, जानिए नाखुश होने की बजह

CES Gyanesh Kumar: ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त पर राहुल गांधी ने कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट की नई नियक्ति प्रक्रिया कोचुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला नहीं हो जाता तब तक इस फैसले को स्थगित कर देना चाहिए. CES Gyanesh kumar: ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त बना दिया गया है. ज्ञानेश कुमार अब राजीव कुमार की जगह लेगें. कानूनमंत्रालय ने अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया है. पीएम मोदी, अमित शाह और राहुलगांधी की त्रिकोणीय सदस्यीय कमेटी ने यह फैसला लिया है. हालांकि इस मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन 2:1 के बहुमत से हुआ है. हाल ही में राहुलगांधी ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए अपनी असहमति जताई और उन्होनें कहा कि नए कानून के तहत पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली कमेटी नेपहली बार मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन किया गया है.इससे पहले भी इसी कमेटी ने पहली बार मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन किया था. उसकमेटी में एक ज्ञानेश कुमार थे तो दूसरी तरफ ए एस संधू. ज्ञानेश कुमार के नाम पर आपत्ति क्योंआखिरकार राहुल गांधी का ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने पर आपत्ति जताने के पीछे की बजह क्या है. बैठक के दौरान पीएम मोदी नेज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने पर हां बोला तो वहीं राहुल गांधी ने इस पर न बोला था. दरअसल राहुल गांधी चाहते थे. कि जब सुप्रीमकोर्ट ने नई नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक इस मुख्य चुनाव को स्थगित कर देना चाहिए.नएकानून के तहत अब मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्त पैनल में सीजेआई नहीं होंगें. पहले सीजेआई शामिल होते थे. मगर पहले साल केंद्र सरकार नेकानून का बदलाव किया था. इस बात पर कांग्रेस को आपत्ति थी. कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियों ने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भीखटखटाया था.लेकिन मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. संविधान की भावनाओं के खिलाफ- कांग्रेसराहुल गांधी ने बस इसी को लेकर फैसल का इंतजार करने को कहा था. कांग्रेस के महासचिव और सांसद केसी वेनुगोपाल ने विस्तार से समझाया है. कांग्रेस ने इस फैसले को संविधान की भावना और सु्प्रीम कोर्ट के खिलाफ बताया है. इस पर उनका कहना है कि सरकार को 19 फरवरी का इंतजारनहीं हुआ. आधी रात को जल्दबाजी में सरकार के नए मुख्य चुनाव आयुक्त की अधिसूचना को जारी कर दिया गया. ये सब हमारे संविधान के खिलाफहै. सुप्रीम कोर्ट ने भी कई मामलों में इस बात को दोहराया है. कि चुनाव प्रक्रिया को दौरान पवित्रता के लिए,मुख्य चुनाव आयुक्त को एक निष्पक्षहितधारक होना चाहिए.

नई दिल्ली भगदड़: रेलवे स्टेशन पर किए गए 5 बड़े बदलाव, सुप्रीम कोर्ट में भी जनहित याचिका दाखिल

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ का मामला गरमाया हुआ है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल हुई है। याचिका में मांगकी गई है कि केंद्र और सभी राज्य मिलकर एक एक्सपर्ट कमेटी बनाएं, जो क्राउड मैनेजमेंट और भगदड़ रोकने के लिए गाइडलाइन तैयार करें। सुप्रीमकोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने ये जनहित याचिका दाखिल की है। जनहित याचिका में भारतीय रेलवे को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह रेलवे स्टेशनों और प्लेटफार्मों पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए उपाय करे, जिसमें गलियारों को चौड़ा करना, बड़े ओवरब्रिज और प्लेटफार्मों का निर्माण करना, रैंप और एस्केलेटर के माध्यम से प्लेटफार्मों तक आसान पहुंचसुनिश्चित करना, व्यस्त समय के दौरान आगमन या प्रस्थान प्लेटफार्मों में किसी भी तरह के बदलाव से सख्ती से बचना शामिल है।नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर किए गए 5 बदलाव -प्लेटफार्म टिकट बंद कर दिया गया है।⁠-टिकट चेक करने के बाद ही प्लेटफार्म पर एंट्री मिलेगी।⁠-ट्रेन आने से पहले कतार की व्यवस्था होगी।– ⁠स्टेशन के बाहर वेटिंग एरिया बनाया जाएगा। (छठ पूजा की तरह)⁠-प्लेटफार्म नंबर 16 और 15 पर एस्कलेटर बंद कर दिए गए हैं।

महाराजगंज: निषाद पार्टी के प्रदेश सचिव धर्मात्मा निषाद ने की आत्महत्या, यूपी कांग्रेस ने की न्याय की मांग

जनपद महाराजगंज से निषाद पार्टी के प्रदेश सचिव धर्मात्मा निषाद ने हाल ही में आत्महत्या कर ली। उन्होंने अपने फेसबुक पर एक लंबी पोस्ट लिखनेके बाद अपने घर के अंदर फांसी लगाकर जान दी। इस पोस्ट में उन्होंने निषाद पार्टी के अध्यक्ष और भाजपा सरकार में मंत्री संजय निषाद, उनके दोनोंबेटों और पार्टी के कुछ अन्य पदाधिकारियों पर मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। इस दुखद घटना पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अजय राय ने गहरा दुख प्रकट किया। उन्होंने कहा कि योगी सरकार के कुशासनके इस दौर में अब केवल विपक्ष के लोग ही नहीं, बल्कि पक्ष के लोग भी पीड़ित हो रहे हैं। राय ने धर्मात्मा निषाद के परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएंव्यक्त की और कहा कि कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़ी है। घटना की जानकारी मिलते ही अजय राय के निर्देश पर कांग्रेस पार्टी के विधायक वीरेन्द्र चौधरी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल स्व. धर्मात्मा निषाद केआवास पर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने परिवारजनों से मिलकर संवेदना व्यक्त की और घटना की पूरी जानकारी प्राप्त करने के बाद स्थानीय प्रशासन सेमिलकर निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की भी मांग की। अजय राय ने सरकार से मांग की है कि पीड़ित परिवार को एक करोड़ का मुआवजा दिया जाए और परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरीप्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हर संभव सहायता के लिए प्रतिबद्ध है और न्याय की लड़ाई में पीड़ित परिवार के साथ खड़ी रहेगी। इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और सभी की निगाहें अब इस मामले की निष्पक्ष जांच पर टिकी हुई हैं।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा का बयान: आतिशी मार्लेना को खुद की राजनीतिक स्थिति का ध्यान रखना चाहिए

नई दिल्ली, 17 फरवरी: दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने आज एक प्रेस वार्ता में कार्यवाहक मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना पर निशाना साधा।उन्होंने कहा कि मुख्य मंत्री पद पर रहते हुए आतिशी मार्लेना ने बार-बार अपने पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई, और अब जब वह कार्यवाहक मुख्यमंत्रीहैं, तब भी उनका बयानबाज़ी का तरीका उतना ही निरंतर है। मुख्य मंत्री पद की गरिमा को लेकर उठाए सवालसचदेवा ने कहा कि जब आतिशी मार्लेना को मुख्य मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया, तो उन्होंने कुर्सी के साथ एक खाली कुर्सी रखी, और आमआदमी पार्टी (आप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने उन्हें अस्थाई मुख्य मंत्री के रूप में संबोधित किया। इससे मुख्य मंत्री पद की गरिमा को ठेसपहुंची। उन्होंने यह भी पूछा कि जब केजरीवाल जेल में थे और मुख्यमंत्री पद खाली था, तो आतिशी को इस बात की चिंता क्यों नहीं थी? आतिशी मार्लेना के नेतृत्व पर सवालसचदेवा ने कहा कि आतिशी मार्लेना जानती हैं कि वह एक बार फिर विधायक बन गई हैं, लेकिन उनके पास कोई मजबूत राजनीतिक जमीन नहीं हैऔर न ही वह एक विपक्षी नेता में जो संघर्ष शक्ति होनी चाहिए, वह रखती हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आतिशी मार्लेना ने दिल्ली में बिजलीकटौती और भाजपा विधायकों के खिलाफ निराधार टिप्पणियां की हैं। आंतरिक कलह पर सवाल और विपक्षी नेता की भूमिका पर चुप्पीसचदेवा ने कहा कि इससे पहले कि आतिशी मार्लेना भाजपा पर आंतरिक कलह की बातें करें, उन्हें अपनी पार्टी में चल रहे सत्ता संघर्ष पर जवाब देनाचाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या यह सच नहीं है कि 3-5 बार विधायक चुने गए नेताओं जैसे मतीन अहमद, गोपाल राय, संजीव झा, कुलदीपकुमार, जरनैल सिंह और अन्य किसी भी विधायक ने आतिशी मार्लेना को नेता प्रतिपक्ष के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। सचदेवा का सुझाववीरेन्द्र सचदेवा ने अंत में यह भी कहा कि बेहतर होगा कि आतिशी मार्लेना भाजपा पर टिप्पणी करने से पहले अपनी राजनीतिक स्थिति और जमीन कोसंभालें।

कांग्रेस ने सैम पित्रोदा के विवादास्पद बयान से किया किनारा, जयराम रमेश बोले- यह पार्टी के विचार नहीं हैं

भारतीय ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा द्वारा दिए गए एक और विवादित बयान ने राजनीति में हलचल मचा दी है। भाजपा के हमलों केबाद, कांग्रेस ने स्पष्ट रूप से खुद को पित्रोदा के बयान से अलग कर लिया है। कांग्रेस नेता और महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि पित्रोदा का बयानपार्टी के विचारों के विपरीत है। इस संदर्भ में जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा, “सैम पित्रोदा द्वारा चीन के बारे मेंव्यक्त किए गए विचार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विचार नहीं हैं।” चीन पर मोदी सरकार के दृष्टिकोण को लेकर उठाए सवाल अपने पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा, “चीन हमारे लिए सबसे बड़ी विदेश नीति, सुरक्षा औरआर्थिक चुनौती बना हुआ है। कांग्रेस ने मोदी सरकार के चीन के प्रति दृष्टिकोण पर बार-बार सवाल उठाए हैं, जिसमें 19 जून, 2020 को प्रधानमंत्रीद्वारा चीन को सार्वजनिक रूप से क्लीन चिट देना भी शामिल है।” जयराम रमेश ने यह भी उल्लेख किया कि कांग्रेस ने 28 जनवरी, 2025 को चीन परअपना हालिया बयान दिया था। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह बहुत दुखद है कि संसद को इस पर चर्चा करने और इस चुनौती का सामनाकरने के लिए सामूहिक संकल्प व्यक्त करने का अवसर नहीं दिया जा रहा है। सैम पित्रोदा का बयान सैम पित्रोदा ने चीन को लेकर अपने बयान में कहा था, “चीन से खतरे को अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है, और भारतका दृष्टिकोण हमेशा टकरावपूर्ण रहा है। अब समय आ गया है कि देशों को एक-दूसरे से सहयोग करना चाहिए, न कि टकराव। हमें यह मानसिकताबदलने की आवश्यकता है और यह मानना बंद करना होगा कि चीन हमेशा से ही दुश्मन है।”

मध्य प्रदेश की नई आबकारी नीति में बदलाव, 1 अप्रैल से बीयर बार खुलेंगे, 19 शहरों में बंद होंगी शराब दुकानें

मध्य प्रदेश में एक अप्रैल से नई आबकारी नीति लागू होगी, जिसमें कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इस नीति के तहत पहली बार “लोअल्कोहलिक बेवरेज बार” खोले जाएंगे, जबकि 17 पवित्र शहरों समेत 19 स्थानों पर शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। इन नए बार मेंकेवल बीयर, वाइन और रेडी-टू-ड्रिंक अल्कोहल युक्त पेय पदार्थों की अनुमति होगी, जिनमें अधिकतम 10 प्रतिशत अल्कोहल होगा। सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि इन बारों में स्प्रिट (वोडका, रम, व्हिस्की) का सेवन पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। वर्तमान में मध्य प्रदेश में 460 से470 शराब-सह-बीयर बार संचालित हैं, और नए आउटलेट्स के खुलने के बाद बार की कुल संख्या में काफी वृद्धि होगी। 47 शराब दुकानें बंद होंगीनई नीति के तहत 1 अप्रैल से 17 पवित्र शहरों समेत 19 स्थानों पर शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगेगा, जिसके परिणामस्वरूप कुल 47 मिश्रितशराब दुकानों को बंद कर दिया जाएगा। इन दुकानों में भारतीय निर्मित विदेशी शराब (IMFL) और देशी शराब की बिक्री होती है। जिन पवित्र शहरोंमें शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगेगा, उनमें उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, मंडलेश्वर, ओरछा, मैहर, चित्रकूट, दतिया, अमरकंटक और सलकनपुर शामिलहैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 23 जनवरी को इस नीति को मंजूरी दी थी, जिसके तहत राज्य सरकार को लगभग 450 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसानहोने का अनुमान है। दूसरे शहरों से शराब खरीद सकते हैं लोगजिन क्षेत्रों में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लागू होगा, वहां लोग बाहर से शराब खरीद कर व्यक्तिगत रूप से उसे पी सकते हैं। इस पर कोई जुर्मानानहीं लगेगा, क्योंकि राज्य में शराबबंदी कानून नहीं है। हालांकि, इन क्षेत्रों में शराब के सेवन पर रोक लगाने के लिए राज्य में बिहार निषेध अधिनियम, 2016 जैसा कानून बनाने की आवश्यकता है। फिलहाल, मध्य प्रदेश में केवल आबकारी अधिनियम लागू है, जो सार्वजनिक स्थानों पर शराब कीबिक्री और सेवन पर प्रतिबंध लगाता है, लेकिन व्यक्तिगत रूप से शराब रखने और पीने की अनुमति है। शराब दुकानों के नवीनीकरण शुल्क में 20% बढ़ोतरीनई आबकारी नीति के तहत अगले वित्त वर्ष के लिए शराब की दुकानों के नवीनीकरण शुल्क में 20 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। हालांकि, हेरिटेजशराब और वाइन उत्पादन नीति अपरिवर्तित रहेगी, और हेरिटेज शराब निर्माताओं को वैट से छूट जारी रहेगी। इसके साथ ही, राज्य की अंगूर प्रसंस्करणनीति के तहत किसानों की आय बढ़ाने के लिए फलों के प्रसंस्करण और बागवानी को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके तहत अंगूर और जामुन सहित अन्यस्थानीय फलों और शहद से वाइन उत्पादन की अनुमति दी जाएगी।वाइन उत्पादन इकाइयों को नई अनुमतिनई नीति के तहत वाइन उत्पादन इकाइयों को अपने परिसर में खुदरा दुकानों का संचालन करने की अनुमति दी जाएगी। साथ ही, वाइनरी परिसर मेंपर्यटकों के लिए वाइन चखने (वाइन टैवर्न) की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, विदेशी शराब की बोतल बनाने वाली इकाइयों कोविशेष शराब बनाने, भंडारण, निर्यात, आयात और बिक्री की अनुमति दी जाएगी।

महाराष्ट्र: लाडकी बहिन योजना से हिला बजट, अन्य योजनाएं हो रहीं प्रभावित? राजस्व मंत्री ने बताई हकीकत

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने रविवार को स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री मांझी लाडकी बहिन योजना से राज्य की अन्य कल्याणकारीयोजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रत्येक योजना के लिए अलग-अलग बजटीय प्रावधान किए गए हैं। महाराष्ट्र बीजेपीके अध्यक्ष बावनकुले ने कहा, “हमारी सरकार ने हर योजना के लिए अलग से बजट आवंटित किया है, जिसमें लाडकी बहिन योजना के लिए भी अलगसे बजट है।” उन्होंने कहा, “कृषि फसल बीमा योजना के लिए भी अलग से बजट रखा गया है, और कुछ लोग इस योजना को लेकर भ्रम फैलाने कीकोशिश कर रहे हैं।” ‘लाडकी बहिन योजना’ का उद्देश्य और लाभमुख्यमंत्री मांझी लाडकी बहिन योजना महाराष्ट्र सरकार ने चुनाव से पहले शुरू की थी, और महायुति सरकार के सत्ता में आने के बाद इस योजना कोजारी रखा गया। इस योजना के तहत 21 से 65 वर्ष आयु वर्ग की उन महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये की सहायता राशि दी जाती है, जिनकीवार्षिक पारिवारिक आय 2.5 लाख रुपये से कम है। इस योजना में पात्रता की अन्य शर्तें भी हैं, जैसे कि लाभार्थी के पास चार पहिया वाहन नहीं होनाचाहिए और परिवार का कोई सदस्य सरकारी सेवा में नहीं होना चाहिए।लाडकी बहिन योजना के लाभार्थियों की संख्या में कमीजनवरी 2025 में मुख्यमंत्री मांझी लाडकी बहिन योजना के लाभार्थियों की संख्या घटकर 2.41 करोड़ रह गई, जबकि दिसंबर 2024 में यह संख्या2.46 करोड़ थी। इस बदलाव का कारण यह था कि विभिन्न कारणों से पांच लाख महिलाएं अपात्र पाई गईं। महिला एवं बाल विकास मंत्री अदितितटकरे ने कहा कि जुलाई से दिसंबर 2024 के बीच इन महिलाओं के खातों में कुल 450 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे, हालांकि यह राशि वापसनहीं ली गई है और राज्य सरकार का इस राशि को वापस लेने का कोई इरादा नहीं है। अपात्र पाई गई महिलाएंअधिकारियों ने बताया कि जिन पांच लाख महिलाओं को अपात्र माना गया, उनमें से 1.5 लाख महिलाएं 65 वर्ष से अधिक आयु की थीं। वहीं, 1.6 लाख महिलाएं वे थीं जिनके पास चार पहिया वाहन था या जो ‘नमो शेतकरी योजना’ जैसी अन्य सरकारी योजनाओं की लाभार्थी थीं। इसके अलावा, करीब 2.3 लाख महिलाएं संजय गांधी निराधार योजना के तहत लाभ प्राप्त कर रही थीं, जिससे वे ‘लाडकी बहिन योजना’ के लिए अपात्र हो गईं।

केजरीवाल कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के पक्ष में थे, लेकिन कैसे बिगड़ा मामला? संजय राउत ने किया खुलासा

मुंबई: क्या अरविंद केजरीवाल कांग्रेस के साथ मिलकर हरियाणा और दिल्ली का विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे? लेकिन यह पूरा मामला कैसेबिगड़ गया? इसका खुलासा संजय राउत ने सामना में लिखे अपने लेख में किया है। उन्होंने दिल्ली में आदित्य ठाकरे और अरविंद केजरीवाल के बीचहुई बैठक में जो बातचीत हुई उसकी जानकारी सार्वजनिक की है। इसके मुताबिक केजरीवाल ने हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के साथगठबंधन की पूरी कोशिश की लेकिन कांग्रेस की हठधर्मिता के चलते ऐसा संभव नहीं हो पाया। आदित्य ठाकरे ने से बातचीत में अरविंद केजरीवाल ने जो जानकारी दी है वो कांग्रेस की गठबंधन संबंधित नीतियों को एक्सपोज करती है। आदित्यठाकरे के साथ फिरोजशाह रोड स्थित आवास पर केजरीवाल की मुलाकात हुई थी। दिल्ली और हरियाणा को लेकर स्वयं अरविंद केजरीवाल ने जोजानकारी दी है वो कांग्रेस की गठबंधन संबंधित नीतियों को एक्सपोज करती है। आदित्य ठाकरे के साथ फिरोजशाह रोड स्थित आवास पर केजरीवालकी मुलाकात हुई। इस बातचीत में जब केजरीवाल से यह पूछा गया कि ‘‘अगर कांग्रेस के साथ गठबंधन हुआ होता तो बेहतर होता। केजरीवाल नेगठबंधन होने नहीं दिया, ऐसा आक्षेप है।’’ इस पर केजरीवाल ने कहा, ‘‘नहीं, मैं पूरी तरह से कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के पक्ष में था।” राघव चड्ढा ने की थी कांग्रेस नेतृत्व से बातकेजरीवाल ने वजह बताते हुए कहा. ‘‘जब मैं जेल में था तब हरियाणा में चुनाव हुए थे। राघव चड्ढा हरियाणा का काम देख रहे थे। वे मुझसे जेल मेंमिलने आए थे। मैंने उनसे कहा, हमें कांग्रेस के साथ गठबंधन करना ही होगा। आप सीटों का बंटवारा तय करें।’’ केजरीवाल ने आगे कहा, ‘‘कांग्रेस नेहमसे एक सूची मांगी। हमने 14 निर्वाचन क्षेत्रों की सूची दी। राहुल गांधी ने कहा, हम ‘आप’ को छह सीटें देंगे। मैंने राघव से कहा, कोई बात नहीं, छह सीटें ले लो। हम दो कदम पीछे आ गए। राहुल गांधी ने कहा, के. सी. वेणुगोपाल से मिलें। वह फाइनल करेंगे।” कांग्रेस बीजेपी को नहीं, आप को हराना चाहती थीइसके बाद केजरीवाल ने आगे बताया, “राघव चड्ढा ने के. सी. वेणुगोपाल से मुलाकात की। उन्होंने कहा, छह सीटें संभव नहीं हैं। हम चार सीट देंगे।आप हमारे हरियाणा प्रभारी बावरिया से मिलें। चड्ढा मुझसे जेल में मिलने आए। मैंने कहा, ठीक है। चार सीटें ले लो। चड्ढा बावरिया से मिलने गए तबउन्होंने चार का प्रस्ताव भी ठुकरा दिया। वे बोले, हम आपको दो ही सीटें देंगे। मैंने फिर चड्ढा को संदेश भेजा। ठीक है। दो सीटें ले लो। राहुल गांधीबॉस हैं और उनके वचन देने के बावजूद हमें छह सीटें नहीं मिलीं। चार से दो पर आ गए। उन दो सीटों के लिए राघव चड्ढा ने आखिरकार भूपेंद्र हुड्डा सेमुलाकात की। फिर उन्होंने भाजपा के गढ़ वाले इलाके में हमें दो सीटें ऑफर कीं। यह कांग्रेस की ‘गठबंधन’ धर्म की व्याख्या है। हम क्या करेंगे? ऐसाहुआ हरियाणा में। दिल्ली में भी कुछ अलग नहीं हुआ। वे भाजपा को हराना नहीं चाहते थे। वे मोदी विरोधी केजरीवाल को हराना चाहते थे। ये सबकहते वक्त केजरीवाल की व्यथा उनके चेहरे पर साफ झलक रही थी।

दिल्ली: बीजेपी विधायक दल की बैठक कल, चुना जाएगा नए CM का नाम, 18 फरवरी को शपथग्रहण समारोह

दिल्ली में सरकार गठन से जुड़ी इस वक्त की बड़ी खबर है। 17 फरवरी (सोमवार) को दोपहर 3 बजे से दिल्ली भाजपा प्रदेश कार्यालय में बीजेपीविधायक दल की बैठक होगी, जिसमें दिल्ली का नया सीएम चुन लिया जाएगा। 18 फरवरी को शपथग्रहण समारोह होगा। ये जानकारी सूत्रों केहवाले से सामने आई है। हालांकि शपथग्रहण समारोह बहुत बड़ा और भव्य नहीं होगा। दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली है प्रचंड जीतदिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जीत हासिल हुई है और आम आदमी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। दिल्ली में बीजेपी ने 70 में से48 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि AAP को सिर्फ 22 सीटें मिली हैं। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया जैसे दिग्गज चुनाव हारचुके हैं। ऐसे में साफ है कि दिल्ली में अब बीजेपी का सीएम होगा। 27 साल बाद बीजेपी ने दिल्ली में वापसी की है लेकिन अब तक सीएम पद पर किसीनाम को लेकर मुहर नहीं लगी है। ऐसे में पूरे देश की नजरें इस फैसले पर टिकी हुई हैं कि 17 फरवरी को बीजेपी विधायक दल की बैठक में बीजेपीकिसे अपना सीएम घोषित करती है। हालांकि दिल्ली के कुछ नेताओं के नाम सीएम पद की रेस में बने हुए हैं, जिसमें केजरीवाल को नई दिल्ली सीट से हराने वाले प्रवेश वर्मा का नाम भीशामिल है। हालांकि बीजेपी किसके हाथ में सीएम पद की कमान देगी, ये तो वक्त ही तय करेगा। दरअसल बीजेपी पहले भी अपने फैसलों की वजहसे जनता को चौंकाती रही है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में जब सीएम का ऐलान होना था, तो बीजेपी ने ऐसे चेहरों को सीएम बनाया, जिनका सीएमपद की रेस में कहीं नाम नहीं था। ऐसे में अगर बीजेपी दिल्ली में भी वही ट्रिक अपनाती है तो कोई अचरज की बात नहीं होगी। हालांकि अब सियासीगलियारों में भी इस बात को लेकर उत्सुकता है कि बीजेपी किसे दिल्ली का सीएम बनाएगी।