महाराष्ट्र सरकार में अनबन की खबरों पर एकनाथ शिंदे का बयान – हमारे बीच सब कूल-कूल है

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच मतभेद की खबरें अक्सर सामने आती रही हैं। हालांकि, इन अटकलोंको खारिज करते हुए मंगलवार को एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट किया कि सरकार में किसी तरह का विवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारे बीच कोई कोल्डवार नहीं है, सब कुछ ठंडा-ठंडा, कूल-कूल है। सरकारी बैठकों में दूरी और समानांतर निर्णयों से बढ़ा तनावमहायुति सरकार को बने कुछ ही महीने हुए हैं, लेकिन इसकी स्थिरता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस की कई अहमबैठकों में उपमुख्यमंत्री शिंदे की अनुपस्थिति, समानांतर विभागीय समीक्षा बैठकें, वार रूम तैयार करना और मुख्यमंत्री राहत कोष के समान चिकित्साराहत प्रकोष्ठ स्थापित करना—इन सभी मुद्दों को लेकर दोनों नेताओं के बीच मतभेद की अटकलें तेज हो गई थीं। महायुति में न कोल्ड वार, न हॉट वार – शिंदेइन सभी अटकलों को लेकर एकनाथ शिंदे ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि महायुति की तीनों पार्टियों के बीच कोई कोल्ड वार नहीं है और नही कोई मतभेद। हमारा मुख्य उद्देश्य जनता की सेवा करना है, और हम सब मिलकर काम कर रहे हैं। यह महाविकास आघाड़ी नहीं है, जहां मतभेद औरकोल्ड वार हो। चिकित्सा राहत प्रकोष्ठ पर शिंदे की सफाईमुख्यमंत्री राहत कोष पहले से ही मौजूद होने के बावजूद उपमुख्यमंत्री कार्यालय में अलग से चिकित्सा सहायता प्रकोष्ठ स्थापित करने पर सवाल उठरहे थे। इस पर शिंदे ने सफाई देते हुए कहा कि हम जनता की भलाई के लिए काम कर रहे हैं। महायुति की तीनों पार्टियां मिलकर अधिक से अधिकजनसेवा करना चाहती हैं, इसलिए यह पहल की गई है। शिंदे के करीबी सहयोगी मंगेश चिवटे इस नए प्रकोष्ठ का नेतृत्व करेंगे। फडणवीस ने किया शिंदे के फैसले का समर्थनमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एकनाथ शिंदे द्वारा चिकित्सा राहत प्रकोष्ठ शुरू करने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है।जब मैं उपमुख्यमंत्री था, तब मैंने भी इसी तरह की पहल की थी। इसका उद्देश्य लोगों की मदद करना है। राजनीतिक स्थिरता पर बनी रहेंगी निगाहेंहालांकि शिंदे और फडणवीस दोनों ने मतभेदों की खबरों को खारिज किया है, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में इन घटनाक्रमों पर लगातार चर्चा बनीरहेगी। महायुति सरकार के समन्वय को लेकर भविष्य में क्या बदलाव देखने को मिलेंगे, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
दिल्ली में सात साल की बच्ची से दुष्कर्म, कानून व्यवस्था पर आम आदमी पार्टी का भाजपा पर हमला

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के तिलक नगर में सात साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म की घटना को लेकर भाजपा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह परतीखा प्रहार किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि भाजपा के शासन में दिल्ली की कानूनव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। अपराधियों के मन में कानून का कोई डर नहीं बचा है, जिसके कारण इस तरह की भयावह घटनाएं हो रही हैं। अब चुनाव खत्म, भाजपा को काम करके दिखाना होगामनीष सिसोदिया ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के दौरान भाजपा ने जितनी राजनीति करनी थी, कर ली। लेकिन अब दिल्ली केलोगों को सुरक्षित महसूस कराने के लिए कुछ काम करना होगा। केवल अरविंद केजरीवाल को निशाना बनाने से अब काम नहीं चलेगा। भाजपा कोयह सुनिश्चित करना चाहिए कि अपराधियों और बलात्कारियों में कानून का भय पैदा हो। दिल्ली में अपराध ज्यादा हो गएआम आदमी पार्टी के तिलक नगर विधायक जरनैल सिंह ने दिल्ली में बढ़ते अपराधों पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि दिल्ली में चेन स्नैचिंग, स्कूटी चोरी और वाहन चोरी जैसी घटनाएं आम हो गई हैं, लेकिन पुलिस इन्हें रोकने में विफल रही है। अब तो फिरौती, हत्या और दुष्कर्म जैसी घटनाएंभी रोज़मर्रा का हिस्सा बनती जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस इन अपराधों पर काबू पाने में पूरी तरह नाकामसाबित हुए हैं। दिल्ली के लोग गुस्से में, लेकिन हम उनके साथ खड़े हैंजरनैल सिंह ने आश्वासन दिया कि आम आदमी पार्टी कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने की इस लड़ाई में दिल्लीवासियों के साथ खड़ी है। उन्होंनेन्यायपालिका से अनुरोध किया कि दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा दी जाए। साथ ही, उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। भाजपा कानून व्यवस्था पर ध्यान दे, बहानेबाजी न करेमनीष सिसोदिया ने भाजपा से मांग की कि वह दिल्ली की सुरक्षा को प्राथमिकता दे। उन्होंने कहा कि अब चुनाव खत्म हो चुके हैं, इसलिए भाजपा कोअपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि दिल्ली के सात सांसद और केंद्र सरकार कानून व्यवस्था सुधारने के लिए क्या कदम उठा रहेहैं? अगर अपराधियों पर सख्ती नहीं बरती गई, तो दिल्ली के हालात और खराब हो सकते हैं।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को बड़ी राहत, लोकायुक्त ने भूमि आवंटन मामले में दी क्लीन चिट

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पत्नी और दो अन्य को मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) के साइट आवंटन मामले में बड़ी राहतमिली है। लोकायुक्त ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को क्लीन चिट दे दी है। जांच में निष्कर्ष निकला कि आरोप दीवानी प्रकृति के थे औरआपराधिक कार्यवाही की आवश्यकता नहीं थी। शिकायतकर्ता को नोटिस जारीलोकायुक्त ने पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा को नोटिस जारी कर जांच के निष्कर्षों से अवगत कराया। उन्हें रिपोर्ट को नामितमजिस्ट्रेट के समक्ष चुनौती देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। नोटिस में कहा गया कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं मिले औरयह भी संभावना जताई गई कि विवाद कानूनी प्रावधानों की गलतफहमी के कारण उत्पन्न हुआ हो सकता है। क्या था मामला?शिकायत में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और अन्य पर MUDA के साइट आवंटन में अनियमितता का आरोप लगाया गया था। उनके खिलाफ भारतीय दंडसंहिता, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम और कर्नाटक भूमि हड़पने अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।हालांकि, लोकायुक्त की जांच में कोई आपराधिक गड़बड़ी नहीं पाई गई, जिसके कारण अंतिम रिपोर्ट में उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया। अब भी जारी रहेगी जांचक्लीन चिट मिलने के बावजूद, लोकायुक्त ने स्पष्ट किया कि 2016 से 2024 के बीच MUDA द्वारा किए गए प्रतिपूरक भूमि आवंटन की जांच अभीजारी है। पूरक जांच के बाद रिपोर्ट को सीआरपीसी की धारा 173(8) के तहत अदालत में पेश किया जाएगा। MUDA और भूमि आवंटन विवादमैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) मैसूर शहर के विकास के लिए जिम्मेदार एक स्वायत्त संस्था है। इसका कार्य भूमि अधिग्रहण और आवंटनसे जुड़ा है। विवाद 2004 से जुड़ा है, जब MUDA ने मुआवजे के रूप में भूमि का आवंटन किया था। संपत्ति को लेकर विवाद कैसे शुरू हुआ?1992 में, MUDA ने रिहायशी इलाके के विकास के लिए किसानों से जमीन अधिग्रहित की थी। 1998 में, अधिग्रहण की गई भूमि का एक हिस्सावापस कर दिया गया, जिससे वह फिर से कृषि भूमि बन गई। विवाद 2004 में तब शुरू हुआ जब सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती के भाई बी.एम. मल्लिकार्जुन ने इस जमीन में 3.16 एकड़ खरीदी। उस समय कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार थी और सिद्धारमैया उपमुख्यमंत्री थे। मुख्यमंत्री का बचावमुख्यमंत्री सिद्धारमैया का दावा है कि उनकी पत्नी को जो जमीन मुआवजे के रूप में मिली, वह उनके भाई मल्लिकार्जुन ने 1998 में उपहार में दी थी।हालांकि, RTI कार्यकर्ता कृष्णा का आरोप है कि मल्लिकार्जुन ने 2004 में इस संपत्ति को अवैध रूप से हासिल किया और जाली दस्तावेजों के जरिएइसे पंजीकृत कराया। राजनीतिक विवाद और जांच का नतीजा2014 में, जब सिद्धारमैया मुख्यमंत्री थे, उनकी पत्नी ने इस जमीन के लिए मुआवजे की मांग की थी। उन्होंने तर्क दिया कि जब मुआवजा दिया गयाथा, तब राज्य में बीजेपी की सरकार थी और यह उनका कानूनी अधिकार था। लोकायुक्त ने मामले में कोई आपराधिक गड़बड़ी नहीं पाई और इसीआधार पर क्लीन चिट दे दी गई। हालांकि, MUDA से जुड़े अन्य मामलों की जांच अभी जारी है।
यूपी विधानसभा बजट सत्र: हिंदी की उपभाषाओं पर गरमाई राजनीति, सीएम योगी ने विपक्ष पर साधा निशाना

उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र आज से शुरू हो गया। पहले ही दिन विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। सदन में विभिन्न भाषाओं के उपयोग कोलेकर विधानसभा अध्यक्ष ने सदस्यों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन इस दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता माताप्रसाद पांडेय नेकार्यवाही में अंग्रेज़ी भाषा के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला और उन्हें दोहरेमापदंड अपनाने का आरोप लगाया। योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर प्रहारमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ाते हैं, लेकिन आम लोगों के बच्चों को गांव के स्कूलों में पढ़ाने की बात करते हैं। उन्होंने कहा,“अपने बच्चों को अंग्रेज़ी माध्यम में पढ़ाएंगे और दूसरे से कहेंगे कि उर्दू पढ़ो, मौलवी बनो। यह नहीं चलेगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी हमेशा दोहरी मानसिकता रखती है और अपने निजी हितों के लिए अलग रणनीति अपनाती है, जबकिजनता के सामने कुछ और कहती है। हिंदी की उपभाषाओं को सम्मान देने की बातसीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार विभिन्न भारतीय भाषाओं और उपभाषाओं को उचित सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहाकि ब्रज, भोजपुरी, अवधी, बुंदेलखंडी जैसी भाषाएं हिंदी की उपभाषाएं हैं और इन्हें समान दर्जा मिलना चाहिए। “हमारी सरकार ने इन बोलियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए अलग-अलग अकादमियों का गठन किया है। ये भाषाएं हिंदी की बेटियां हैं और इन्हेंसदन की कार्यवाही का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।” सदन में सभी तबकों की आवाज़ को मिलेगी जगहमुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा सदस्यों का यह सदन केवल साहित्य और व्याकरण के विद्वानों के लिए नहीं बना है। इसमें समाज के हर तबके केप्रतिनिधि मौजूद हैं। इसलिए, अगर कोई हिंदी में अपनी बात प्रभावी ढंग से नहीं रख सकता, तो उसे अपनी क्षेत्रीय भाषा में बोलने की अनुमति होनीचाहिए। सदन में अंतिम पायदान के व्यक्ति की आवाज़ को मुखरता मिले, इसके लिए यदि वह हिंदी में असमर्थ है तो अवधी, बुंदेलखंडी, भोजपुरी जैसीभाषाओं में बोल सकता है। भाषाई विविधता का सम्मान जरूरीयोगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों के प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कईदेशों में बसे भारतीय मूल के लोग इन्हीं भाषाओं का उपयोग करते हैं। आज मॉरीशस, फिजी जैसे देशों में रहने वाले भारतीय अवधी भाषा बोलते हैं। हम चाहते हैं कि इन भाषाओं को भी सदन की कार्यवाही का हिस्साबनाया जाए और उन्हें उचित सम्मान मिले। विपक्ष के विरोध की आलोचनामुख्यमंत्री ने विपक्ष पर हर अच्छे कार्य का विरोध करने का आरोप लगाया और कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा विकास और सांस्कृतिक संरक्षण कीनीतियों का विरोध करती आई है। हमारी सरकार मानती है कि अवधी, भोजपुरी, बुंदेली जैसी भाषाओं को सदन की कार्यवाही में जगह मिलनी चाहिए। लेकिन विपक्ष हर अच्छे काम काविरोध करता है, जो कि निंदनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का उद्देश्य भाषाई विविधता को बढ़ावा देना और देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना है।
राजस्थान बजट 2024: पेयजल, सोलर ऊर्जा, ग्रामीण विकास और सड़कों पर विशेष जोर

राजस्थान की वित्त मंत्री दीया कुमारी ने विधानसभा में राज्य का बजट पेश किया, जिसमें पेयजल, सौर ऊर्जा, बिजली, ग्रामीण विकास और सड़कों कीकनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान दिया गया है। मुख्यमंत्री शहरी जल जीवन मिशन की घोषणावित्त मंत्री ने मुख्यमंत्री शहरी जल जीवन मिशन के तहत दो लाख घरों में पेयजल कनेक्शन उपलब्ध कराने, 1000 ट्यूबवेल और 1500 हैंडपंप लगानेकी घोषणा की। साथ ही, मुफ्त बिजली की सीमा को 100 यूनिट से बढ़ाकर 150 यूनिट कर दिया गया है। ग्रामीण विकास के लिए 425 करोड़ रुपये आवंटितग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट को दूर करने के लिए सरकार ने 425 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है। जन घोषणा पत्र के 58% और बजटघोषणाओं के 73% वादों को पूरा किया जा चुका है। पेयजल आपूर्ति बढ़ाने के लिए 1000 नए ट्यूबवेल और दो लाख घरों में जल कनेक्शन दिएजाएंगे। निःशुल्क सौर ऊर्जा योजनाप्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए 6000 मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन की योजना बनाई गई है। जिन घरों को पहले से मुफ्तबिजली मिल रही है, वहां सोलर पैनल लगाए जाएंगे। जिन घरों में सोलर पैनल लगाने की जगह नहीं है, उनके लिए सामुदायिक सौर ऊर्जा संयंत्रस्थापित किए जाएंगे। 15 शहरों में रिंग रोड का निर्माणसड़कों की स्थिति सुधारने के लिए ROB, स्टेट हाईवे, पुल और मरम्मत कार्यों के लिए 5000 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है।राजस्थान के प्रमुख शहरों में ट्रैफिक की समस्या को कम करने के लिए बालोतरा, जैसलमेर, जालौर, सीकर, बांसवाड़ा सहित 15 शहरों में रिंग रोड कानिर्माण किया जाएगा। इस परियोजना के लिए डीपीआर तैयार करने हेतु 50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में सड़कनिर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये और डेजर्ट क्षेत्र के लिए 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। जयपुर मेट्रो फेज-2 के लिए 12,000 करोड़ का बजटराजधानी जयपुर में मेट्रो फेज-2 के लिए 12,000 करोड़ रुपये का बजट घोषित किया गया है। इसके अलावा, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए500-500 नई बसें चलाई जाएंगी। कृषि और स्वामित्व योजना को बढ़ावाकिसानों के विकास को ध्यान में रखते हुए “खुशहाल किसान-समृद्ध राजस्थान” योजना के तहत 50,000 कृषि कनेक्शन और 5 लाख नए कृषिकनेक्शन देने की घोषणा की गई है। स्वामित्व योजना के अंतर्गत 2 लाख नए जमीन के पट्टे वितरित किए जाएंगे। महिलाओं के लिए विशेष योजनाएंराज्य के नवगठित नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए 175 करोड़ रुपये की लागत से 500 पिंक टॉयलेट्स बनाए जाएंगे। थार सीमा क्षेत्र विकास योजनामुख्यमंत्री थार सीमा क्षेत्र योजना की घोषणा करते हुए इसके लिए 150 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। पर्यटन और ट्राइबल टूरिज्म सर्किट का विकासआदिवासी क्षेत्रों में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए “ट्राइबल टूरिज्म सर्किट” विकसित किया जाएगा। साथ ही, पूरे प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देनेके लिए 975 करोड़ रुपये की योजना बनाई गई है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए धार्मिक यात्रा योजनाराजस्थान सरकार वरिष्ठ नागरिकों के लिए धार्मिक यात्रा योजना शुरू करेगी। इस योजना के तहत 50,000 यात्रियों को ट्रेन और 6,000 यात्रियों कोहवाई मार्ग से धार्मिक स्थलों की यात्रा कराई जाएगी। युवाओं के लिए रोजगार और खेल सुविधाएंसरकार ने युवाओं के लिए 1,25,000 सरकारी नौकरियों की घोषणा की है। तकनीकी शिक्षण संस्थानों में खेल कोटा लागू किया जाएगा, और खेलप्रशिक्षकों को द्रोणाचार्य योजना के तहत मुफ्त आवासीय भूमि दी जाएगी। युवाओं में आत्महत्या के बढ़ते मामलों को ध्यान में रखते हुए “युवा साथीकेंद्र” स्थापित किए जाएंगे। इस बजट के माध्यम से राजस्थान सरकार ने बुनियादी सुविधाओं, ग्रामीण विकास, ऊर्जा, परिवहन और रोजगार को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश के समग्रविकास की योजना प्रस्तुत की है।
भुवनेश्वर के केआईआईटी हॉस्टल में नेपाली छात्रा की संदिग्ध आत्महत्या, परिजनों ने न्याय की उठाई मांग

ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (केआईआईटी) के हॉस्टल में एक नेपाली छात्रा की आत्महत्या का मामलालगातार गरमाता जा रहा है। इस घटना के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के हस्तक्षेप के चलते नेपाल दूतावास, ओडिशा सरकार औरपुलिस प्रशासन सक्रिय हो गए हैं। पुलिस ने इस मामले में तीन डायरेक्टर्स और दो सिक्योरिटी गार्ड्स को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ केस दर्ज कियाहै। हाई लेवल जांच कमेटी गठितओडिशा सरकार ने इस घटना की विस्तृत जांच के लिए एक उच्च स्तरीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में गृह विभाग केअतिरिक्त मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव और उच्च शिक्षा विभाग के सचिव को सदस्य बनाया गया है। यह कमेटीछात्रा की मौत की जांच के साथ-साथ प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ हुए दुर्व्यवहार की भी समीक्षा करेगी। आरोपियों के खिलाफ केस दर्जमृतक छात्रा प्रकृति लामसाल के चचेरे भाई सिद्धांत सिग्दल की शिकायत पर भुवनेश्वर के इन्फोसिटी पुलिस स्टेशन में एक आरोपी आदविक श्रीवास्तवके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा, केआईआईटी के दो सिक्योरिटी गार्ड—रमाकांत नायक (45) और जोगेंद्र बेहरा के खिलाफ बीएनएस की धारा 126 (2)/296/115(2)/3(5) के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस इनसभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है। छात्र विरोध और माफी की पेशकशहॉस्टल के एक अधिकारी ने विरोध प्रदर्शन के दौरान नेपाल को लेकर की गई अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्यकिसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था, और यदि उनके शब्दों से किसी को ठेस पहुंची है, तो वे इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं। वहीं, प्रदर्शनकारी छात्रों ने एक स्वतंत्र संगठन की मांग की है, जो छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सके। मृतक छात्रा के परिजनों की न्याय की मांगघटना की जानकारी मिलने पर नेपाल से भुवनेश्वर पहुंचे मृतक छात्रा के परिजनों ने न्याय की मांग की है। उन्होंने बताया कि घटना से कुछ समय पहलेउनकी बेटी से बात हुई थी और वह सामान्य थी। उसने परिवार को बताया था कि वह कॉलेज फेस्ट में जा रही है और बाद में उनसे बात करेगी, लेकिनइसके कुछ समय बाद ही उनकी बेटी की मौत की खबर आ गई। मृतक छात्रा के पिता सुनील लामसाल ने कहा कि उन्होंने अपनी बेटी को उच्च शिक्षा के लिए भारत भेजा था, लेकिन संस्थान में छात्रों के साथ गलतव्यवहार किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ छात्रों को हॉस्टल से निकाल दिया गया, जो अनुचित है। उन्होंने सरकार और पुलिस प्रशासन परभरोसा जताते हुए इस घटना में न्याय की उम्मीद जताई है। केआईआईटी का दावा: प्रेम संबंध के कारण आत्महत्यासंस्थान की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया यह संदेह है कि छात्रा का किसी अन्य छात्र के साथ प्रेम संबंध था और संभवतः किसीकारण से उसने आत्महत्या कर ली। हालांकि, मृतका के चचेरे भाई ने दावा किया है कि उसे एक छात्र द्वारा ब्लैकमेल किया जा रहा था। इस घटना के बाद सरकार, पुलिस प्रशासन और नेपाल सरकार इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही हैं। अब देखना होगा कि इस मामले में आगेक्या कार्रवाई होती है।
केरल में रैगिंग का मामला: सरकारी कॉलेज के छात्र की बेरहमी से पिटाई, पुलिस ने दर्ज किया केस

देश में रैगिंग के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हाल ही में केरल के तिरुवनंतपुरम के एक सरकारी कॉलेज में रैगिंग की एक गंभीर घटना सामने आईहै। पीड़ित छात्र ने आरोप लगाया कि सीनियर छात्रों ने उसके साथ न केवल मारपीट की, बल्कि मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया। इस घटना केबाद राज्य में आक्रोश फैल गया है। सीनियर्स पर रैगिंग और मारपीट का आरोपपीड़ित छात्र, जो प्रथम वर्ष का बायोटेक्नोलॉजी छात्र है, ने बताया कि 11 फरवरी को कैंपस में सीनियर छात्रों के एक समूह ने उसे बेरहमी से पीटा।छात्र ने घटना के दिन ही पुलिस और कॉलेज प्रशासन को इसकी सूचना दी थी। बेल्ट और लाठियों से हमलाछात्र के अनुसार, जब वह अपने दोस्त अभिषेक के साथ कैंपस से गुजर रहा था, तभी सीनियर छात्रों के एक समूह ने उसे रोक लिया और बुरी तरहपीटना शुरू कर दिया। इस दौरान उसका दोस्त किसी तरह वहां से भागकर प्राचार्य को सूचना देने पहुंचा। पीड़ित ने बताया कि उसे बेल्ट और लाठियोंसे पीटा गया, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गया। जबरन शिकायत दर्ज कराने का दबावपीड़ित ने आगे बताया कि घटना के बाद उसे यूनिट रूम में बंद कर दिया गया। उसकी शर्ट उतरवा दी गई और उसे घुटनों के बल बैठने पर मजबूर कियागया। जब उसने पानी मांगा, तो उसे थूका हुआ पानी पीने के लिए दिया गया। इसके अलावा, आरोपियों ने उसे धमकी दी कि यदि उसने इस घटनाकी जानकारी किसी को दी तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। साथ ही, उससे उसके दोस्त के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराने का दबाव भी डालागया। पुलिस ने मामला दर्ज कियाइस घटना की शिकायत कझाकुट्टम थाने में दर्ज की गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करलिया है। कॉलेज प्राचार्य ने भी अपनी रिपोर्ट में छात्र की शिकायत को सही ठहराया है। पुलिस ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद जल्द ही रिपोर्टअदालत में प्रस्तुत की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
समाजवादी पार्टी उर्दू शब्दों ने दिया, योगी आदित्यनाथ को महफिल में चार चाँद लगाने का मौका

UP News: उत्तर प्रदेश का सत्र शुरु होते ही समाजवादी पार्टी ऐसा फिजां बना देती है. कि इन बातों पर सरकार को घेर लेगी पर ये कुछ न कुछ ऐसीगलतियां कर देती है. कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हमला करने का मौका मिल जाता है. अगर बात करें पिछले सदन में संभल हिंसा पर जिसतरह से समाजवादी पार्टी विवादों में घिर गई थी. ठीक वैसा ही कुछ आज बजट सत्र में भी हो गया. मंगलवार की सुबह विधानसभा के बजट सत्र केपहले दिन सरकार को घेरने के लिए इनके पास बहुत कुछ था. कुंभ में हो रही परेशानियां, भगदड़ के बाद हुई मौतें, पर समाजवादी पार्टी के मुखियाऔर राज्य के पूर्व सीएम अखिलेश यादव सोशल मीडिया के प्रत्येक मंच पर मुद्गा बनाते है. पर जब बात आती है विधानसभा में बोलने की तो उनकीपार्टी ने उर्दू का मुद्दा उठा दिया. उर्दू को किया जाए शामिल- माता प्रसादसमाजवादी पार्टी के नेता और विधानसभा में प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे ने विधानसभा के फ्लोर लैंगवेज में उर्दू में जो भाषण दिया. उससे समाजवादीपार्टी फिर से चार कदम पीछे चली गई. सुबह की कार्यवाही के बाद सदन की कार्यवाही दोपहर के वक्त शुरु की गई. इसी दौरान नेता प्रतिपक्ष माताप्रसाद ने कहा कि फ्लोर लैग्वेज में अंग्रेजी की जगह की उर्दू को शामिल किया जाए. उर्दू हमारी दूसरी भाषा है. इस पर सीएम योगी ने जबाव देते हुएकहा कि विपक्ष आज से नहीं बल्कि पहले से ही अच्छे कामों पर विरोध करते हुए आया है. ये इनके लिए कोई नयी बात नहीं है. ये लोग तो भोजपुरीऔर अवधी भाषा का विरोध करने वाले लोग है. और उर्दू भाषा की वकालत करने को तैयार है. योगी आदित्यनाथ ने किया पलटवारयोगी आदित्यनाथ ने पलटवार करते हुए कहा कि इस सदन में विशुद्ध साहित्यिक और व्याकरण के विद्धानों का नहीं है. इस सदन में अलग- अलगसमाज के सदस्य है. अंतिम पायदान के व्यक्ति को सदन में मुखरता मिले इस के लिए व्यवस्था की गई है. अगर सदन के अंदर मौजूद कोई हिंदी बोलनेमें असमर्थ है तो वह जिस भाषा में समर्थ हो वह व्यक्ति उस भाषा को बोल सकता है. और अपने विचारों को रख सकता है. इस को लेकर विरोध क्योंकिया जा रहा है.
दिल्ली के मुख्यमंत्री होगें 20 फरवरी की शाम रामलीला मैदान में, समारोह को लेकर की गई खास तैयारियां

Delhi New CM: दिल्ली के नए सीएम की शपथ ग्रहण समारोह को लेकर सारी तैयारियां हो चुकी है. लेकिन बीजेपी पार्टी की तरफ से अभी तकदिल्ली के नए सीएम को चेहरा सामने नहीं आया है. Delhi New CM: दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने भारी जीत हासिल कर ली है. पर अभी तक बीजेपी पार्टी की तरफ से दिल्ली के अगलेसीएम का चेहरा सामने नहीं आया है. 19 फरवरी की शाम को बैठक होगी जिसमें यमुना की सफाई और सौंदर्यीकरण, रुकी हुई बुनियादी ढांचागतपरियोजनाओं में तेजी, वन क्षेत्र और वायु गुणवत्ता में सुधार महिलाओं के लिए, 2500 रुपए मासिक भत्ता और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं कोमंजूरी होने की संभावना है. हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 70 में से 48 सीटों पर भारी बहुमत मिला है. रामलीलामैदान में गुरुवार शाम को मुख्यमंत्री और मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बाद मंत्री परिषद की पहली बैठक होगी. अगले सीएम को होगा 20 फरवरी को शपथ ग्रहणसरकार राष्ट्रीय राजधानी योजना बोर्ड को दोबारा सक्रिय करने पर भी विचार कर रही है इसके सदस्यों में राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्लीके मुख्यमंत्री एवं उपराज्यपाल शामिल है. 8 फरवरी को बीजेपी मुख्यालय में प्रधानमंत्री ने संबोधन के दौरान कहा है कि अब एनसीआर के सभी राज्योंमें उनकी पार्टी की सरकारें है केंद्र के साथ मिलकर ये राज्य सरकारें अब दिल्ली- एनसीआर के बुनियादी ढांचे का विकास करेंगी और आवाजाही कोआसान बनाने में मदद करेंगी. बीजेपी पार्टी का कहना है कि दिल्ली के अगले सीएम और मंत्री 20 फरवरी की शाम को 4:30 बजे रामलीला मैदान मेंआयोजित होने वाले शानदार समारोह में शपथ लेंगें. शपथ ग्रहण से पहले बैठकशपथ ग्रहण से पहले बीजेपी की बैठक होगी. इस बैठक में भाग लेने के लिए सभी राज्यों के मुख्यंमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों को भी आमंत्रित कियागया है. ये शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेंगें. दिल्ली के अगले सीएम के नाम का खुलासा बीजेपी विधायक दल की बैठक में होने की संभावना है. शपथ ग्रहण को लेकर दिल्ली के रामलीला मैदान में सारी तैयारियां हो चुकी है. अब दिल्ली की जनता को इंतजार है वो है दिल्ली के नए सीएम का.
अमेरिका से ही नहीं, अब और भी देशों से वापस भेजे जाएगें अप्रवासी अवैध, क्या है ट्रंप का अगला एक्शन प्लान

Costa Rica Deporation Drive: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक वयान जारी करते हुए कहा है कि भारत के 200 अप्रवासी एकफ्लाइट से कोस्टा रिका पहुंचेगें.Costa Rica Deporation Drive: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया एक्शन प्लान लिया है जिस पर पनामा और ग्वालेमाला के रास्तेपर चलते हुए अब कोस्टारिका ने सोमवार यानी 17 फरवरी को इस पर सहमति दे दी है. इसको लेकर कोस्टा रिका ने घोषणा की है. कि वह संयुक्तराज्य अमेरिका से डिपोर्ट किए जा रहे है अवैध अप्रवासियों जो अमेरिका से डिपोर्ट किए जा रहे है.वो अवैध अप्रवासी विभिन्न देशों के रहने वालेहै.जिनको वह स्वीकार करने के लिए तैयार है. सेंट्रल अमेरिकन देश के राष्ट्रपति कार्यालय ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि 19 फरवरी कोसेंट्रल एशिया और भारत के 200 अप्रवासी एक फ्लाइट से कोस्टा रिका पहुंचेंगें. इसके बाद उन सभी प्रवासियों को उनके मूल देश भेज दिया जाएगा. कोस्टा रिका के दिया बयानकोस्टा रिका के राष्ट्रपति कार्यालय में अपने बयान में कहा है कि कोस्टा रिका की सरकार संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार संयुक्त राज्य अमेरिका केसाथ 200 अवैध अप्रवासियों को उनके देश वापस भेजने में सहयोग करने के लिए पूरी तरह से सहमत है. जितने भी अवैध अप्रवासी है. ये सेंट्रलएशिया और भारत के रहने वाले है.20 जनवरी को राजधानी वाँशिंगटन डीसी में अमेरिका के राष्ट्रपति के तौर पर डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण के बादअमेरिका से अप्रवासियों के वापसी में सहयोग करने वाला कोस्टा रिका तीसरा देश है. समझौते के बाद सहमतिइससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्कों रुबियो की हाल ही में लैटिन अमेरिकी यात्रा के दौरान पनामा और ग्वाटेमाला ने इसी प्रकार के समझौते परअपनी सहमति जताई थी. लैटिन अमेरिका ही संयुक्त राज्य अमेरिका के करीब 11 मिलियन बिना कागजात वाले अप्रवासियों के रहने का मूल ठिकानाहै जो एक बेहतर जीवन की तलाश में कई खतरनाक इलाकों की यात्राएं करते है.