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आसाराम को पैरोल पर रिहा करने के फैसले के बाद पीड़िता के घर की सुरक्षा बढ़ाई गई

सुप्रीम कोर्ट द्वारा यौन शोषण के मामले में सजा प्राप्त आसाराम को स्वास्थ्य समस्याओं के कारण पैरोल पर रिहा करने के आदेश के बाद शाहजहांपुरजिले में पीड़िता के परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ उत्पन्न हो गई हैं। पुलिस अधिकारियों ने जानकारी दी कि पीड़िता के घर के आसपास सुरक्षाबढ़ा दी गई है, जबकि पीड़िता के पिता ने कोर्ट के आदेश पर हैरानी जताई है और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। पीड़िता के परिवार की सुरक्षा को लेकर उठी चिंतापिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को 31 मार्च 2025 तक पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया। इस फैसले के बाद, शाहजहांपुर के अधिकारियोंने पीड़िता के घर की सुरक्षा बढ़ा दी है। अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) संजय कुमार सागर ने बुधवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वे खुदपीड़िता के घर पहुंचे और उसके परिवार से बातचीत की। उन्होंने बताया कि पीड़िता के घर पर पहले से पुलिस का गार्ड तैनात है, इसके अलावा पीड़िता के पिता को एक सशस्त्र सुरक्षाकर्मी भी दिया गया है।इसके बाद उन्होंने आश्वासन दिया कि अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए जा रहे हैं और सुरक्षा के लिए थाना और क्षेत्राधिकारी को भी निर्देश दिए गएहैं।सुरक्षा बढ़ाने के उपायों में यह भी शामिल है कि पीड़िता के घर के आसपास के सीसीटीवी कैमरों की मरम्मत करवाई जाएगी। इसके साथ ही पीड़िताके पिता को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे घर से बाहर जाने से पहले पुलिस को सूचित करें। पुलिस प्रशासन लगातार पीड़िता के परिवार की सुरक्षा कीनिगरानी रखेगा और किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत कार्रवाई करेगा। पीड़िता के पिता की चिंतापीड़िता के पिता ने आसाराम को पैरोल मिलने की खबर पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि उन्हें यह निर्णय बिल्कुल अप्रत्याशित लगा औरयह उनकी आँखों की नींद उड़ा गया। उन्हें अब अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता हो रही है, क्योंकि आसाराम के समर्थक लगातार उनकेखिलाफ षड्यंत्र रचने में लगे हुए हैं। पीड़िता के पिता ने इस बारे में बात करते हुए कहा, ‘‘आसाराम के जेल में रहते हुए कई गवाहों की हत्या की गई है, और अब दो अन्य गवाह भी लापताहैं। ऐसे में मेरे परिवार की सुरक्षा की चिंता बढ़ गई है।’’ उनका यह भी कहना था कि आसाराम ने जेल से अपने समर्थकों के जरिए उन पर कई झूठेमुकदमे भी दर्ज कराए हैं। गवाहों के लापता होने की चिंतापीड़िता के पिता ने अपने बयान में यह दावा किया कि जब आसाराम जेल में था, तो चार गवाहों को मार दिया गया था। ये गवाह थे: अमृत प्रजापति(राजकोट), अखिल गुप्ता (रसोईया), राहुल सचान (लखनऊ) और कृपाल सिंह (शाहजहांपुर)। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि दो गवाह, भोलानंद और सुरेशानंद, अब भी लापता हैं, जिनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल रही है। यह गवाह आसाराम के खिलाफ मामले में अहम साक्षी थे। पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि आसाराम ने जेल से अपने समर्थकों के माध्यम से चार झूठे मुकदमे उनके खिलाफ दर्ज कराए हैं। इन झूठेमुकदमों का उद्देश्य उन्हें परेशान करना और उनके खिलाफ दबाव बनाना था। इन आरोपों ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है और सुरक्षा कोलेकर नई चिंताएँ उत्पन्न की हैं।आसाराम के खिलाफ न्याय की मांगपीड़िता के पिता ने यह भी सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार संसद में नाबालिगों के साथ अत्याचार के मामलों में फांसी की सजा की मांग करती है, तो इस मामले में आसाराम के खिलाफ न्याय क्यों नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यद्यपि आसाराम को यौन शोषण के मामले में उम्रभर कीसजा दी गई थी, फिर भी कोर्ट द्वारा उसे पैरोल पर रिहा करना एक प्रकार की ‘मेहरबानी’ है, जो न्याय की भावना के खिलाफ है।उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र सरकार ने संसद में कानून बनाया कि नाबालिगों पर अत्याचार करने वालों को फांसी दी जाए, लेकिन आसाराम के मामले मेंन्यायालय ने बार-बार उसकी सजा में ढील दी है। यह एक बहुत बड़ा सवाल है कि क्यों इतने गंभीर अपराध के बाद भी उसे पैरोल पर रिहा कियागया।’’आसाराम का अपराध और सजाआसाराम बापू, जो पहले एक प्रभावशाली धार्मिक गुरु के रूप में जाने जाते थे, पर 2013 में शाहजहांपुर की एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म काआरोप लगा था। यह घटना जोधपुर स्थित आसाराम के आश्रम में हुई थी, और पीड़िता के पिता ने दिल्ली में मामला दर्ज कराया था। इस मामले मेंअदालत ने आसाराम को उम्रभर की सजा सुनाई थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उसे स्वास्थ्य कारणों के आधार पर पैरोल पर रिहा कर दिया है।सुप्रीम कोर्ट का निर्णयसुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आसाराम के स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए लिया गया। कोर्ट ने 31 मार्च 2025 तक उसे पैरोल पर रिहा करने का आदेशदिया है, जिसके बाद उसकी स्थिति और स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। कोर्ट ने आसाराम के खिलाफ चल रहे मुकदमों के संदर्भ में यह भीकहा कि अगर उसके स्वास्थ्य में कोई बदलाव आता है, तो पैरोल की अवधि को फिर से समीक्षा किया जाएगा। इस फैसले के बाद, पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा को लेकर उठ रही चिंताओं को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा त्वरित कदम उठाए गए हैं, और पीड़िता के परिवार को सुरक्षा प्रदान करने के लिए पूरी कोशिश की जा रही है।

प्रियंका गांधी ने रमेश बिधूड़ी को सिखाया सबक, गालों पर की गई टिप्पणी पर तंज

दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के उम्मीदवार रमेश बिधूड़ी के द्वारा प्रियंका गांधी के बारे में की गई विवादित टिप्पणी पर कांग्रेसमहासचिव प्रियंका गांधी ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। प्रियंका ने इसे हास्यास्पद और अप्रासंगिक बताते हुए तंज कसा और कहा कि अगर बिधूड़ी गालोंकी बात कर रहे हैं तो उन्हें अपने गालों की भी चर्चा करनी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने दिल्ली में सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। गालों की चर्चा ने चढ़ाया विवाद का तापमानभा.ज.पा. उम्मीदवार रमेश बिधूड़ी ने हाल ही में कहा था कि वे अपने निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के ‘गालों’ जैसी सड़कें बनवाएंगे। यहबयान दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में तुरंत चर्चा का विषय बन गया। बिधूड़ी का यह बयान इतना विवादास्पद साबित हुआ कि इससे ना सिर्फदिल्ली बल्कि पूरे देश में सियासी माहौल गर्म हो गया। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद बिधूड़ी ने अपनी टिप्पणी पर खेद व्यक्त किया, लेकिन तब तकयह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका था और राजनीतिक हलकों में इसकी तीखी प्रतिक्रिया हो चुकी थी। प्रियंका गांधी ने दिया करारा जवाबप्रियंका गांधी ने इस बयान पर मीडिया से बातचीत करते हुए इसे ‘‘हास्यास्पद’’ करार दिया और कहा कि इस तरह के अप्रासंगिक मुद्दों के बजायदिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान असल मुद्दों पर चर्चा की जानी चाहिए। प्रियंका ने बिधूड़ी के बयान पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘उन्होंने (बिधूड़ी) अपने गाल के बारे में कुछ नहीं कहा। यह एक हास्यास्पद टिप्पणी है और इससे ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता।’’ प्रियंका ने आगे कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में बहुत जरूरी मुद्दों पर बहस होनी चाहिए, ना कि ऐसे बेतुके बयान दिए जाने चाहिए जो सिर्फचुनावी माहौल को गर्म करने के लिए होते हैं। जब उनसे यह पूछा गया कि बिधूड़ी ने अपने बयान पर खेद जताया है, तो प्रियंका ने इसे नकारते हुएकहा कि ऐसे बयान बेमतलब होते हैं और इनका कोई अर्थ नहीं होता। चुनाव आयोग की सख्त टिप्पणीरमेश बिधूड़ी की विवादास्पद टिप्पणी पर चुनाव आयोग ने भी कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ने मंगलवार को कहा था किमहिलाओं के बारे में इस प्रकार की ‘‘गंदी टिप्पणियां’’ स्वीकार नहीं की जा सकतीं। उन्होंने कहा, ‘‘अगर कोई इस तरह की बातें करता है, तो यहशर्मनाक है और इसे भर्त्सना की जानी चाहिए।’’ इसके साथ ही चुनाव आयोग ने चेतावनी दी कि यदि किसी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान महिलाओं के खिलाफ टिप्पणी की और वह हद पारकरता है, तो मामला दर्ज कराया जाएगा। चुनाव आयोग ने महिलाओं के बारे में अपशब्दों के प्रयोग पर सख्त कार्रवाई की बात कही और इसे चुनावीप्रक्रिया के साथ नहीं जोड़ा। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा, ‘‘अगर कोई हद पार करेगा, तो हम उसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस तरह की टिप्पणियां महिलाओं और बच्चों के खिलाफकरना पूरी तरह से अस्वीकार्य है।’’ आयोग ने यह भी कहा कि माताओं और बहनों के बारे में ऐसी टिप्पणियों को कभी भी सही नहीं ठहराया जा सकताहै। विवादित बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियारमेश बिधूड़ी के बयान को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई। कांग्रेस ने इसे बेहद अपमानजनक और घटिया स्तर काबयान करार दिया, जबकि आम आदमी पार्टी ने भी भाजपा की इस तरह की घटिया राजनीति की निंदा की। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यह बयान केवल महिला विरोधी नहीं, बल्कि समूचे राजनीतिक परिपाटी के लिए शर्मनाक है। आम आदमी पार्टी ने भी इसबयान को सत्ताधारी पार्टी के अहंकार और उनके निराशाजनक राजनीतिक दृष्टिकोण का प्रतीक बताया। रमेश बिधूड़ी ने मांगी माफीविवाद बढ़ने के बाद रमेश बिधूड़ी ने सार्वजनिक रूप से अपने बयान पर खेद जताया। उन्होंने कहा कि उनके शब्दों का कोई गलत मतलब नहीं निकालाजाना चाहिए था और अगर किसी को उनके बयान से ठेस पहुंची हो तो वह माफी मांगते हैं। हालांकि, माफी के बावजूद यह बयान राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर गया। सवाल यह उठ रहे हैं कि क्या ऐसे बयानों से चुनावी मुद्दों सेध्यान भटकाना और महिलाओं के प्रति असम्मानजनक भाषा का प्रयोग राजनीतिक रुख को सही ठहराता है? महिला सुरक्षा और सम्मान का मुद्दाप्रियंका गांधी द्वारा इस मुद्दे पर बयान देने के बाद यह सवाल भी उठता है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान महिला सुरक्षा, सम्मान और शिक्षाजैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा क्यों नहीं हो रही है। प्रियंका ने यह स्पष्ट किया कि दिल्ली के मतदाताओं को इस समय सच्चे और वास्तविक मुद्दों परध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है, न कि इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयानों पर। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘हमारा ध्यान दिल्ली की जनता के लिए सशक्त निर्णय लेने और उनकी समस्याओं को हल करने पर होना चाहिए, न कि ऐसेबेतुके बयान देने वाले नेताओं पर।’’

8-9 जनवरी को PM मोदी करेंगे  आंध्र प्रदेश और ओडिशा का दौरा, ₹2 लाख करोड़ की परियोजनाओं की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 और 9 जनवरी को आंध्र प्रदेश और ओडिशा का दौरा करेंगे, जहां वे विभिन्न बड़े प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।इस दौरे में प्रधानमंत्री मोदी दोनों राज्यों को ₹2 लाख करोड़ से ज्यादा की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। PM मोदी का आंध्र प्रदेश दौरा: ₹2 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट्स का शुभारंभ8 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी विशाखापत्तनम में 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। इनमें शामिल होगी एनटीपीसीग्रीन एनर्जी की ग्रीन हाइड्रोजन हब परियोजना, जिसका शिलान्यास प्रधानमंत्री मोदी पुदीमदका में करेंगे। यह परियोजना भारत के राष्ट्रीय हरितहाइड्रोजन मिशन का हिस्सा होगी और इसमें ₹1,85,000 करोड़ का निवेश होगा। इसके अलावा, प्रधानमंत्री आंध्र प्रदेश में ₹19,500 करोड़ से ज्यादा की लागत वाली रेलवे और सड़क परियोजनाओं का भी उद्घाटन और शिलान्यासकरेंगे। इनमें विशाखापत्तनम में दक्षिण तट रेलवे मुख्यालय की आधारशिला रखी जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी आंध्र प्रदेश के अनकापल्ली जिले के नक्कापल्ली में बल्क ड्रग पार्क की नींव भी रखेंगे। इसके साथ ही, तिरुपति जिले में कृष्णापटनमऔद्योगिक क्षेत्र (केआरआईएस सिटी) का भी शिलान्यास करेंगे, जो लगभग ₹10,500 करोड़ का निवेश आकर्षित करेगा और इससे 1 लाख से ज्यादानौकरियों के सृजन का अनुमान है। PM मोदी का ओडिशा दौरा: प्रवासी भारतीय दिवस और खास ट्रेन सेवा9 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी ओडिशा के भुवनेश्वर में 18वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इस सम्मेलन में 50 से ज्यादा देशों सेप्रवासी भारतीय हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन भारतीय प्रवासियों से जुड़ने और उन्हें देशवासियों से संवाद करने का अहम मंच है। इसके साथ ही, पीएम मोदी प्रवासी भारतीय एक्सप्रेस को भी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह ट्रेन दिल्ली से शुरू होकर भारत के प्रमुख धार्मिक औरपर्यटन स्थलों की यात्रा करेगी, जो प्रवासी भारतीयों के लिए एक विशेष यात्रा अनुभव होगा।

भारत में एचएमपीवी मामले:  हरियाणा, झारखंड में अब तक  ‘कोई प्रभाव नहीं’, राज्यों में एडवाइजरी जारी

नागपुर में सात और 14 वर्ष की आयु के दो और बच्चों में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) के लिए सकारात्मक परीक्षण किया गया, जिससेश्वसन संबंधी बीमारी के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 10 हो गई। अब तक दर्ज किए गए कुल मामलों में से दो बेंगलुरु में, एक गुजरात में, दो चेन्नईमें, तीन कोलकाता में और 1 अब दो नागपुर में दर्ज किए गए हैं। डॉ. रणदीप गुलेरिया का बयानएम्स के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा, “एचएमपीवी कोई नया वायरस नहीं है, यह पुराना वायरस है। यह काफी समय से है। वायरसआमतौर पर हल्की बीमारी का कारण बनता है, लेकिन उम्र के साथ-साथ शिशुओं और छोटे बच्चों और बुजुर्गों या सह-रुग्णता वाले लोगों में यहनिमोनिया का कारण बन सकता है, जिससे सांस लेने में समस्या हो सकती है और अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है।” “वायरस आमतौर पर खुदको सीमित करता है, और आपको केवल लक्षणात्मक उपचार की आवश्यकता होती है। बुखार के लिए दवा लें, हाइड्रेटेड रहें और अच्छा पोषण लें,” उन्होंने कहा, साथ ही लोगों से संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचने के लिए कहा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का बयानकेंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा, “स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि #HMPV कोई नया वायरस नहीं है। चिंता की कोई बात नहीं है। हमस्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं।” उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने HMPV वायरस को लेकर चिंताओं को संबोधित किया। पाठक नेलोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार पूरी सतर्कता के साथ आगे बढ़ रही है। एचएमपीवी और टीकाकरणस्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही एचएमपीवी के लिए कोई टीका नहीं है, लेकिन नियमित फ्लू शॉट या कोविड वैक्सीन की तीन खुराकें इसकेप्रति प्रतिरक्षा बनाती हैं। झारखंड में एचएमपीवी की स्थितिझारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने मंगलवार को कहा कि राज्य मानव मेटान्यूमोवायरस संक्रमण से अप्रभावित है और देश के अन्य हिस्सों मेंऐसे मामलों का पता चलने पर घबराने की जरूरत नहीं है। अंसारी ने कहा कि वह स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। एचएमपीवी के मामलों पर निगरानी बढ़ाई गईभारत में पांच मामले पाए जाने के बाद केंद्र ने राज्यों को आईएलआई और एसएआरआई सहित श्वसन संबंधी बीमारियों के लिए निगरानी बढ़ाने औरमानव मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) के संचरण की रोकथाम के बारे में जागरूकता फैलाने की सलाह दी है। स्वास्थ्य मंत्री का अलर्टअंसारी ने एक परामर्श में कहा, “मैंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि गंभीर तीव्र श्वसन बीमारी के मामलों की जांच वायरसअनुसंधान और निदान प्रयोगशाला में की जाए।” राज्यों में एचएमपीवी के मामले और तैयारियांदेश में एचएमपीवी के मामलों को लेकर बढ़ती चिंता के बीच, राज्यों ने इस चुनौती से निपटने के लिए निगरानी और रोकथाम पर ध्यान केंद्रित करतेहुए अपने स्वास्थ्य उपायों को तेज़ कर दिया है। नागपुर में, HMPV के दो संदिग्ध रोगियों की पहचान की गई है। डॉ. पिनाकी आर देबनाथ का बयानराम मनोहर लोहिया अस्पताल के बाल चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. पिनाकी आर देबनाथ ने एएनआई को बताया कि एचएमपीवी पहले सेमौजूद था और ठंड जैसे कुछ कारणों से अब यह फैल गया है। “ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस कोई नया वायरस नहीं है, यह एक पुराना वायरस है। यह पहलेभी मौजूद था। ठंड जैसे कुछ कारणों से यह अभी फैल गया है। यह ठंड में होता है। यह एक श्वसन आरएनए वायरस है; यह श्वसन प्रणाली को संक्रमितकरता है… जब रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है या उम्र के चरम पर होता है तो वायरल संक्रमण अधिक फैलता है।” एचएमपीवी के लक्षणडॉ. आर देबनाथ ने कहा, “इसके लक्षणों में श्वसन संक्रमण शामिल है – जैसे नाक बंद होना, नाक बहना, आंखें लाल होना और गले में खराश होना।यदि यह गंभीर है, तो श्वसन संकट होने पर निमोनिया जैसे लक्षण होंगे। अन्यथा, सर्दी और खांसी जैसे सामान्य लक्षण होंगे… इसका प्रभाव 2-7 दिनोंतक रहता है और यह उस अवधि के भीतर अपने आप ठीक हो जाता है।” एहतियाती उपाय“इसके लिए कोई एंटी-वायरल दवा नहीं है। इसलिए, हम इसे कैसे रोक सकते हैं – अगर आप भीड़भाड़ वाले इलाके में जा रहे हैं तो मास्क पहनें, अगरकोई पहले से संक्रमित है तो उससे दूरी बनाए रखें और उससे हाथ न मिलाएं, अपने हाथ धोएं और खांसते/छींकते समय शिष्टाचार का पालन करें।इससे इसे रोकने में मदद मिलेगी।” हरियाणा में एचएमपीवी पर सतर्कताहरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने मंगलवार को कहा कि राज्य के सिविल सर्जनों को मानव मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) सहित श्वसनसंबंधी बीमारियों के संबंध में अपने-अपने क्षेत्रों में सतर्क रहने का परामर्श जारी किया गया है। एक बयान में उन्होंने कहा कि राज्य में एचएमपीवीसंक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है। मिजोरम ने समिति का गठन कियामिजोरम सरकार ने ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) के प्रसार की निगरानी और स्थिति का आकलन करने के लिए एक समिति का गठन किया है, मंगलवार को एक आधिकारिक बयान में कहा गया। इसमें कहा गया कि सोमवार को स्वास्थ्य मंत्री लालरिनपुई की अध्यक्षता में हुई बैठक के बादसमिति का गठन किया गया। पटना प्रशासन का निर्देशपटना जिला प्रशासन ने मंगलवार को लोगों से केंद्र और बिहार सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया और कहा कि”घबराने की कोई जरूरत नहीं है।” डीएम ने स्पष्ट रूप से कहा है कि लोगों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। जिला प्रशासन द्वारा मानकों के अनुसारसभी तैयारियां की गई हैं। महाकुंभ मेले में एचएमपीवी का खतराउत्तर प्रदेश के प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ मेले 2025 में अब सिर्फ़ एक हफ़्ते का समय बचा है, लेकिन भारत में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस(HMPV) के मामले सामने आने से लोगों में डर का माहौल है। महाकुंभ उत्सव में लगभग 450 मिलियन श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। पुणे में स्वास्थ्य विभाग की बैठकपुणे के जिला कलेक्टर जितेंद्र डूडी ने कहा, “हमें स्वास्थ्य विभाग से एक बुनियादी एसओपी प्राप्त हुआ है। कल सुबह, मैं सभी स्वास्थ्य विभाग केअधिकारियों और अन्य राजस्व अधिकारियों के साथ एक विस्तृत बैठक करने जा रहा हूँ। हम एसओपी को पूरी प्रशासनिक मशीनरी को सौंपने जा रहेहैं। हमारा ध्यान इस बात पर है कि लोगों को वायरस के बारे में जानकारी होनी चाहिए और हमें जो आवश्यक एसओपी दिए गए हैं, उन्हें जल्द से जल्दलागू किया जाना चाहिए।”

HMPV वायरस लाएगा कोरोना  जैसी तबाही ? भारत समेत 5 देशों में  फैल चुका,क्या बज चुकी खतरे की घंटी

सर्दियों के मौसम में श्वसन संबंधी संक्रमणों का खतरा बढ़ जाता है, और इस बार एक नया वायरस, एचएमपीवी (ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस), चिंताजनकबना हुआ है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, यह वायरस खासकर बुजुर्गों और पांच साल से कम उम्र के बच्चों को अधिक प्रभावितकरता है। एचएमपीवी, जो 2001 में पहली बार पहचाना गया था, अब कई देशों में तेजी से फैल रहा है और भारत में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं। एचएमपीवी वायरस: संक्रमण और लक्षण एचएमपीवी एक श्वसन वायरस है, जो हवा के माध्यम से और श्वसन द्वारा फैलता है। इसके लक्षण कोरोनावायरस (COVID-19) से काफी मिलते-जुलते हैं। इस वायरस के संक्रमण से खांसी, बुखार, सांस लेने में कठिनाई और नाक बहने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। एचएमपीवी का प्रभाव सभीआयु वर्ग के लोगों पर पड़ सकता है, लेकिन यह विशेष रूप से कमजोर इम्यूनिटी वाले और छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरनाक साबितहो सकता है। भारत में स्थिति: एचएमपीवी के बढ़ते मामले भारत में अब तक इस वायरस के कुल छह मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से दो कर्नाटका, एक-एक गुजरात और कोलकाता से और दो चेन्नई से हैं।ये मामले आईसीएमआर की नियमित निगरानी के दौरान पाए गए। भारत में यह वायरस अब तेजी से फैल रहा है, और स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे लेकरचेतावनी जारी की है। चीन और अन्य देशों में भी बढ़ते मामले चीन में एचएमपीवी वायरस के मामलों में तेजी आई है और वहां अस्पतालों में मरीजों की भीड़ देखी जा रही है। यह वायरस मलेशिया और हांगकांग मेंभी फैल चुका है, जबकि जापान में इन्फ्लूएंजा और एचएमपीवी दोनों वायरस की सक्रियता पर निगरानी रखी जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मलेशिया में 2024 के पहले कुछ महीनों में इसके 327 मामले दर्ज किए गए हैं। भारत के लिए खतरा और स्वास्थ्य मंत्रालय की दिशा-निर्देश भारत में स्वास्थ्य मंत्रालय ने एचएमपीवी के मामलों पर नजर बनाए रखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। मंत्रालय ने यह स्पष्ट कियाहै कि एचएमपीवी कोई नया वायरस नहीं है, और यह कई सालों से विश्वभर में प्रचलित है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस वायरस से बचावके लिए मास्क पहनना, हाथ धोना, और खांसी-छींकते वक्त मुंह और नाक ढकना चाहिए। सावधानियां: कैसे रहें सुरक्षित? एचएमपीवी से बचाव के लिए कुछ साधारण कदम उठाए जा सकते हैं: -हाथ धोने की आदत डालें, विशेषकर बाहर से आने के बाद।-मास्क पहनें और सार्वजनिक स्थानों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।-खांसी और छींक के दौरान मुंह और नाक को ढकें।-स्वास्थ्य जांच के लिए डॉक्टर से सलाह लें, खासकर अगर लक्षण बढ़ रहे हों। स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी बताया है कि स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है और जरूरत के मुताबिक जल्द ही और जानकारी प्रदान की जाएगी।

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