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दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025:  नई दिल्ली सीट पर अरविंद केजरीवाल को चुनौती देने वाले दो बड़े नाम

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए तारीखें घोषित हो चुकी हैं, और सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों पर काम करना शुरूकर चुके हैं। इन चुनावों में कुल 70 विधानसभा सीटों पर मतदान 05 फरवरी 2025 को होगा, और वोटों की गिनती 08 फरवरी को की जाएगी। इन70 सीटों में से एक महत्वपूर्ण सीट है **नई दिल्ली**, जहां पर मौजूदा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का मुकाबला कांग्रेस के संदीप दीक्षित औरबीजेपी के प्रवेश वर्मा से होगा। ### नई दिल्ली का सियासी समीकरण नई दिल्ली विधानसभा सीट वह है, जहां से अरविंद केजरीवाल ने 2013 में राजनीति में कदम रखा था। उस समय उन्होंने कांग्रेस की दिग्गज नेताशीला दीक्षित को 25 हजार से अधिक मतों के अंतर से हराया था। अब 2025 के चुनावों में अरविंद केजरीवाल का मुकाबला कांग्रेस के संदीपदीक्षित से होगा, जो शीला दीक्षित के बेटे हैं और अपनी मां की हार का बदला लेने की कोशिश करेंगे। वहीं, भारतीय जनता पार्टी की ओर से पूर्वसांसद प्रवेश वर्मा इस सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं, जिनके पिता साहिब सिंह वर्मा भी 90 के दशक में दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे थे। इस प्रकार, नई दिल्लीसीट पर एक पूर्व मुख्यमंत्री (केजरीवाल) का मुकाबला दो पूर्व मुख्यमंत्री के बेटों (संदीप दीक्षित और प्रवेश वर्मा) से होगा, जो मुकाबले को और भीदिलचस्प बना देगा। ### पिछला चुनावी इतिहास अरविंद केजरीवाल ने नई दिल्ली विधानसभा सीट पर तीन बार चुनाव लड़ा है और तीनों बार वह बड़े अंतर से विजयी रहे हैं। – **2013 में** उन्होंने कांग्रेस की शीला दीक्षित को 25,864 मतों के अंतर से हराया।– **2015 में** उन्होंने बीजेपी की नूपुर शर्मा को 31,583 मतों के अंतर से मात दी।– **2020 में** उन्होंने बीजेपी के सुनील यादव को 21,697 मतों के अंतर से हराया। अब 2025 में उनका सामना कांग्रेस के संदीप दीक्षित और बीजेपी के प्रवेश वर्मा से होगा। यह मुकाबला बेहद दिलचस्प होगा, क्योंकि दोनों विपक्षीदलों के उम्मीदवार केजरीवाल को कड़ी चुनौती देने की कोशिश करेंगे। इस प्रकार, 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में नई दिल्ली सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा, जिसमें राजनीतिक दलों के लिए हरकदम महत्वपूर्ण रहेगा।

कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की अटकलें, डीके शिवकुमार ने ‘मतभेद’ पर दिया स्पष्टीकरण

कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन को लेकर चल रही अटकलों के बीच, कांग्रेस पार्टी के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने पार्टी के अंदरकिसी भी प्रकार के मतभेद होने की खबरों का खंडन किया है। उन्होंने बुधवार को स्पष्ट किया कि पार्टी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के बीच कोईविवाद नहीं है और इस मामले पर जो भी बयान दिए जा रहे हैं, उनका कोई महत्व नहीं है। ‘पार्टी में कोई मतभेद नहीं हैं’ शिवकुमार ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पार्टी के भीतर कोई मतभेद नहीं हैं और इस बारे में चल रही चर्चाओं को नजरअंदाज किया जानाचाहिए। उन्होंने यह भी कहा, “आपके बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है। किसने कहा कि मतभेद हैं? कोई मतभेद नहींहै।” सत्ता परिवर्तन की चर्चाओं का कारण शिवकुमार का यह बयान मुख्यमंत्री सिद्धरमैया द्वारा हाल ही में दलित और अनुसूचित जनजाति के कुछ मंत्रियों के साथ आयोजित डिनर बैठक के बादआया है। इस बैठक के बाद कर्नाटक में सत्ता साझेदारी या बारी-बारी से मुख्यमंत्री नियुक्त करने की अटकलें तेज हो गईं हैं। कुछ लोगों का मानना हैकि मार्च के बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन हो सकता है, जिससे पार्टी के भीतर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। बयान पर सफाईसत्ता परिवर्तन की चर्चाओं के बीच, शिवकुमार ने यह भी कहा कि किसी भी बयान का महत्व नहीं है, सिवाय उन बयानों के जो पार्टी के आलाकमानऔर मुख्यमंत्री द्वारा दिए जाएं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि केवल वे बयान महत्वपूर्ण हैं जो पार्टी की शीर्ष नेतृत्व की ओर से आएं, और बाकी की बातेंमहत्वहीन हैं। इस बयान से यह साफ हो गया कि डीके शिवकुमार ने सत्ता परिवर्तन की अटकलों को खारिज करते हुए पार्टी के भीतर एकजुटता की बात की है, औरउन्होंने पार्टी के नेतृत्व के प्रति अपनी पूर्ण निष्ठा व्यक्त की है।

UGC ने विश्वविद्यालयों में कुलपति और शिक्षक पदों पर भर्ती के नियमों में किया बड़ा बदलाव

देशभर के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में कुलपति और शिक्षक पदों पर भर्ती के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नएनियमों का प्रस्ताव किया है। ये बदलाव विश्वविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण नेतृत्व और शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से किए गए हैं। कुलपति पद के लिए नया अनुभव मानदंडअब तक कुलपति पद पर नियुक्ति के लिए दस साल का शिक्षण अनुभव अनिवार्य था, लेकिन नए नियमों के तहत यह शर्त लचीला बना दी गई है।अब शिक्षण कार्य के साथ-साथ शोध, शैक्षणिक संस्थान, उद्योग, और लोक प्रशासन जैसे क्षेत्रों में भी दस साल का अनुभव रखने वाले व्यक्तिकुलपति के लिए योग्य माने जाएंगे। यूजीसी का कहना है कि इससे विश्वविद्यालयों को दूरदर्शी और नेतृत्व क्षमता वाले कुलपति मिल सकेंगे। कुलपति के चयन में बदलावयूजीसी ने कुलपति के चयन से जुड़ी सर्च कमेटी में भी बदलाव की सिफारिश की है। अब सर्च कमेटी में यूजीसी के प्रतिनिधि का शामिल होनाअनिवार्य होगा, ताकि चयन प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष हो। इसके अलावा, यूजीसी ने यह भी प्रस्तावित किया है कि कुलपति को एक संस्थान मेंअधिकतम दो कार्यकाल (पांच-पांच साल का) ही मिलेंगे। इस पद पर नियुक्त व्यक्ति की आयु 70 साल तक सीमित होगी। कुलपति की तैनाती नहीं होने पर शून्य घोषितयूजीसी ने यह भी प्रस्तावित किया है कि यदि किसी संस्थान में नए नियमों के तहत कुलपति की तैनाती नहीं हो पाती है, तो उस संस्थान को शून्यघोषित कर दिया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि प्रत्येक विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थान में सक्षम और योग्य कुलपति का चयन होसके। असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए नए मानदंडयूजीसी ने असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए भी नए मानदंडों का प्रस्ताव किया है। अब बिना पीएचडी और नेट (राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा) के केवल मास्टरडिग्री धारक, जैसे एमई, एमटेक, को भी असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त किया जा सकता है। मसौदा जारी, राय देने की अंतिम तिथियूजीसी ने इन नए नियमों का मसौदा छह जनवरी को जारी किया और देशभर के विश्वविद्यालयों तथा उच्च शिक्षण संस्थानों से पांच फरवरी तक इसपर राय देने का समय दिया है। इन प्रस्तावित बदलावों के जरिए शिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता और नेतृत्व को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

योगी सरकार ने संभल 1978 के दंगों  की जांच के आदेश दिए, दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा*

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 1978 में संभल में हुए सांप्रदायिक दंगों की जांच करवाने का बड़ा फैसला लिया है। इस संबंध में एक आदेश जारी करदिया गया है, और अब गृह विभाग के उप सचिव और मानवाधिकार आयोग के एसपी ने संभल प्रशासन को पत्र भेजकर एक हफ्ते में रिपोर्ट की मांगकी है। शासन के निर्देशों पर, संभल के ASP उत्तरी को इस जांच का जिम्मा सौंपा गया है। जांच अधिकारी को एक हफ्ते के भीतर अपनी रिपोर्टशासन को भेजनी होगी। *46 साल बाद हुई जांच की घोषणा* यूपी सरकार ने 46 साल बाद 1978 के दंगों की जांच का आदेश दिया है। इस निर्णय से संबंधित एक पत्र संभल के डीएम और एसपी को भेजा गयाहै, जिसमें एक हफ्ते के अंदर आख्या देने की मांग की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा था कि 1978 में हुए दंगों में कथितरूप से 184 लोग मारे गए थे, और कई लोगों के घर उजड़ गए थे, हालांकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार मृतकों की संख्या 24 थी। *1978 के दंगे और हिंदू समुदाय पर हमला* 14 दिसंबर को कार्तिकेय महादेव मंदिर का ताला 46 साल बाद खोला गया था, जिससे 1978 के दंगा पीड़ितों की दास्तान सामने आई। बताया गयाकि 1978 में संभल के नखासा इलाके के मुरारी के फड़ में कुछ हिंदू अपने बचाव के लिए छिपे थे, जिनमें से 25 लोगों को जलाकर मार डाला गयाथा। *मुख्यमंत्री का बयान* मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में इस घटना का जिक्र करते हुए कहा था कि संभल में दंगों की शुरुआत 1947 से हुई थी। 1947 में एकमौत, 1948 में 6 मौतें, 1958 और 1962 में भी दंगे हुए। 1976 के दंगों में 5 लोग मारे गए, जबकि 1978 में तो सामूहिक रूप से 184 हिंदुओं कोजलाकर मार डाला गया था। मुख्यमंत्री ने विपक्ष को चुनौती दी कि वह इस सच्चाई को स्वीकार करें। इसके बाद 1980, 1982, 1990, 1992 और 1996 में भी दंगे हुए, जिसमें कई लोगों की जानें गईं। *लगातार बढ़ते दंगे और हिंदू समुदाय की पीड़ा* इस तरह से देखा जाए तो संभल में 1947 से लेकर अब तक 209 हिंदुओं की मौत हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद किसी ने इन घटनाओं परसंवेदना तक व्यक्त नहीं की है। योगी सरकार द्वारा इस मामले की जांच के आदेश से उम्मीद की जा रही है कि दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी और दंगाप्रभावित लोगों को न्याय मिलेगा।

आरजेडी ने क्यों चाही अपनी पार्टी के चार विधायकों की सदस्यता रद्द? स्पीकर को भेजा पत्र

बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ तब आया जब राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने अपने ही पार्टी के चार विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांगकी। यह मांग पार्टी ने बिहार विधानसभा के स्पीकर नंद किशोर यादव से की है। आरजेडी का आरोप है कि इन विधायकों ने दल बदलने का नियमतोड़ा है और इसलिए उनकी सदस्यता रद्द की जानी चाहिए। इस मामले में पार्टी ने स्पीकर को एक पत्र भेजा है, जिसमें मोकामा विधायक नीलम देवी, सूर्यगढ़ा विधायक प्रहलाद यादव, शिवहर विधायक चेतन आनंद और मोहनिया विधायक संगीता कुमारी की सदस्यता रद्द करने की मांग की गई है। आरजेडी के चार विधायकों पर आरोपआरजेडी के अनुसार, यह चार विधायक पिछले साल बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) से गठबंधन करनेके बाद पार्टी छोड़ चुके हैं। जब नीतीश कुमार ने आरजेडी और कांग्रेस से गठबंधन तोड़कर एनडीए से हाथ मिलाया, तो इन विधायकों ने नीतीश कुमारका समर्थन किया और विधानसभा में सत्ता पक्ष के साथ बैठने लगे। यही नहीं, इन विधायकों ने अपनी स्वेच्छा से दल बदलने का फैसला लिया, जोकि दल बदल कानून का उल्लंघन है। आरजेडी के मुख्य सचेतक अख्तरुल इस्लाम शाहीन ने इस मामले में एक ज्ञापन जारी किया है और स्पीकर से इन विधायकों की सदस्यता रद्द करने कीमांग की है। पत्र में क्या कहा गया?आरजेडी ने 8 जनवरी को स्पीकर को एक पत्र भेजा, जिसमें कहा गया कि सूर्यगढ़ा विधायक प्रहलाद यादव, मोकामा विधायक नीलम देवी, शिवहरविधायक चेतन आनंद और मोहनिया विधायक संगीता कुमारी ने अपने पदों से स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है और आरजेडी का साथ छोड़ दिया है। इसकेअलावा, संगीता कुमारी ने भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता के रूप में मनोनयन स्वीकार कर लिया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि उन्होंने पूरी तरह सेपार्टी से नाता तोड़ लिया है। आरजेडी ने स्पीकर से अनुरोध किया कि इन विधायकों की सदस्यता दल बदल कानून के तहत रद्द कर दी जाए। महागठबंधन नेताओं का प्रतिनिधि मंडल स्पीकर से मिलाइस मुद्दे पर महागठबंधन के नेताओं ने भी विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात की। आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने इस मामले को गंभीरता से उठाया औरकहा कि यह संविधान का खुला उल्लंघन है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन विधायकों पर अगले सत्र से पहले कार्रवाई नहीं की जाती है, तो वेविधानसभा में हंगामा करेंगे और सदन की कार्यवाही को चलने नहीं देंगे। यह स्पष्ट है कि महागठबंधन के नेता इस मुद्दे को लेकर काफी गंभीर हैं औरकार्रवाई की मांग कर रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव का संदर्भइस विवाद का एक बड़ा राजनीतिक संदर्भ भी है। बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और सभी पार्टियां चुनावी रणनीतियों पर काम कररही हैं। अगर इन चार विधायकों की सदस्यता रद्द हो जाती है, तो इसे उपचुनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों कामानना है कि अगर सदस्यता रद्द होती है तो उपचुनाव की संभावना कम है, क्योंकि फिलहाल यह मामला एक कानूनी पहलू से जुड़ा हुआ है। दल बदल कानून और इसकी संवेदनशीलतायह मामला दल बदल कानून के तहत बहुत ही संवेदनशील है, क्योंकि इस कानून का उद्देश्य विधानसभा में राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना है औरविधायक को अपनी पार्टी से स्वीकृति प्राप्त किए बिना दल बदलने की अनुमति नहीं देता। अगर कोई विधायक दल बदलता है तो उसे अपने पद सेइस्तीफा देना होता है और उसकी सदस्यता रद्द की जा सकती है। इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था की अखंडता को बनाए रखने के लिए एक जरूरी कदममाना जाता है। स्पीकर की भूमिकास्पीकर नंद किशोर यादव के पास अब यह निर्णय लेने की जिम्मेदारी है कि क्या इन विधायकों की सदस्यता रद्द की जाए या नहीं। स्पीकर का निर्णययह तय करेगा कि दल बदल कानून का उल्लंघन हुआ है या नहीं। अगर स्पीकर इन विधायकों की सदस्यता रद्द करते हैं, तो यह बिहार के राजनीतिकपरिदृश्य में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।

दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने  AAP के साथ गठबंधन को बताया ‘बहुत बड़ी गलती, आगामी चुनावों पर बड़ा बयान

दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने शनिवार को एक बड़ा बयान दिया, जिसमें उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) के साथकिए गए गठबंधन को ‘बहुत बड़ी गलती’ करार दिया। यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी भविष्य में इस गलती को नहीं दोहराएगी। उनकेमुताबिक, AAP की सरकार की नीतियों और कार्यशैली के कारण दिल्ली में कांग्रेस के प्रति जनता का विश्वास अब बढ़ा है।AAP के साथ गठबंधन पर सवालदेवेंद्र यादव ने कांग्रेस के पिछले गठबंधन के फैसले पर खेद जताते हुए कहा, “लोकसभा चुनाव में AAP के साथ जो समझौता किया गया था, वहएक बड़ी गलती थी। हमने यह समझौता तब किया था जब यह माना गया था कि दिल्ली में AAP का असर बढ़ सकता है, लेकिन अब यह साफ होगया है कि यह कदम सही नहीं था।”उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस अब एक नई दिशा में काम कर रही है और भविष्य में ऐसे किसी भी गठबंधन से बचने का निर्णय लिया है। यादव कामानना है कि AAP की सत्ता के बाद दिल्ली में एंटी इनकंबेंसी की भावना बढ़ी है, जिससे दिल्ली की जनता में कांग्रेस के प्रति विश्वास और उम्मीदेंमजबूत हुई हैं।कांग्रेस ने शुरू की ‘जीवन रक्षा योजना’अपने बयान के दौरान देवेंद्र यादव और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने दिल्लीवासियों के लिए कांग्रेस की नई पहल, ‘जीवन रक्षा योजना’ का ऐलानकिया। इस योजना के तहत, कांग्रेस ने दिल्ली के नागरिकों को 25 लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा देने का वादा किया है। यह योजनादिल्लीवासियों के स्वास्थ्य को लेकर कांग्रेस की प्रतिबद्धता को दर्शाती है और इसे लेकर पार्टी ने अभियान भी शुरू कर दिया है।अशोक गहलोत ने किया ‘जीवन रक्षा योजना’ का समर्थनदिल्ली में कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर चर्चा करते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस योजना का समर्थन किया और इसे “गेम चेंजर” बताया। उन्होंने कहा, “हमने राजस्थान में यह योजना लागू की थी और अब दिल्ली में भी इसे लागू किया जाएगा। यह योजना दिल्ली में कांग्रेस केपक्ष में मतदान को प्रभावित कर सकती है।”गहलोत ने कहा कि यह योजना दिल्ली में कांग्रेस की बढ़ती लोकप्रियता और पार्टी के लिए सरकार बनाने की संभावनाओं को और मजबूत करेगी।उन्होंने देश में बढ़ती नफरत और ध्रुवीकरण के माहौल को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “कांग्रेस हमेशा सभी धर्मों और जातियों को साथ लेकरचलने की दिशा में काम करती है, जबकि कुछ दल सिर्फ नफरत फैलाने में लगे हुए हैं।” ध्रुवीकरण की राजनीति पर कांग्रेस की कटाक्षगहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की चुनावी रणनीति पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि ध्रुवीकरण की राजनीति करके आप चुनाव तोजीत सकते हैं, लेकिन देश को नहीं चला सकते। उनका मानना है कि कांग्रेस की नीति विविधता में एकता की है, जो भारत जैसे बहुलतावादी समाजके लिए जरूरी है।कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान की तैयारीकांग्रेस का चुनाव प्रचार अभियान इन दिनों जोर शोर से चल रहा है, और इस दौरान पार्टी के नारे “होगी हर जरूरत पूरी, कांग्रेस है जरूरी” को प्रमुखतासे प्रदर्शित किया गया है। पार्टी का यह अभियान दिल्लीवासियों को यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि कांग्रेस उनके हर मुद्दे पर काम करेगी, चाहे वह स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार या अन्य सामाजिक सेवाओं से जुड़ा हो।गहलोत ने कहा कि यह स्वास्थ्य बीमा योजना कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है और यह दिल्ली की जनता के लिए एक बड़ी राहत साबित होसकती है। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली की सभी 70 विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनावों में कांग्रेस की जीत की संभावना बढ़ रही है।कांग्रेस की चुनावी तैयारी और उम्मीदेंकांग्रेस ने इस चुनाव में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए कई नीतिगत बदलाव किए हैं, जिनमें गरीब और आम आदमी को लाभ पहुंचाने वालीयोजनाओं को प्राथमिकता दी गई है। पार्टी अब पूरी तरह से AAP और भाजपा के खिलाफ अपने चुनावी अभियान को चला रही है। कांग्रेस कीरणनीति इस बार आम जनता के मुद्दों पर केंद्रित है, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय की बातें प्रमुख हैं।दिल्ली में कांग्रेस की वापसी की संभावनाअशोक गहलोत ने कहा कि दिल्ली में कांग्रेस की सरकार बनने की संभावनाएं अब बढ़ रही हैं। उनका मानना है कि दिल्ली की जनता अब बदलावचाहती है और कांग्रेस की योजनाएं लोगों के बीच अच्छा प्रभाव डाल रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस का यह अभियान दिल्ली की जनता केलिए एक तरह से नई उम्मीद लेकर आया है।चुनावी प्रचार में कांग्रेस का जोरकांग्रेस ने दिल्ली चुनाव को लेकर अपने प्रचार अभियान में पूरी ताकत झोंकी है। पार्टी के सभी प्रमुख नेता अब दिल्ली में लगातार जनसभाएं और रोडशो कर रहे हैं। उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों में स्वास्थ्य, शिक्षा, बेरोजगारी और गरीबी निवारण प्रमुख हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए मतदान 5 फरवरी को होने हैं और चुनाव परिणाम 8 फरवरी को घोषित किए जाएंगे। इन चुनावों को लेकरदिल्ली में एक सख्त चुनावी माहौल बना हुआ है। पार्टीयों के बीच तीखी बयानबाजी हो रही है, और प्रचार तेज हो चुका है। कांग्रेस, भाजपा औरAAP के बीच कांटे की टक्कर होने की उम्मीद जताई जा रही है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले सीएम आतिशी ने चुनाव आयोग कोदूसरा पत्र लिखा, तत्काल मुलाकात का अनुरोध

दिल्ली विधानसभा चुनाव में अब महज 27 दिन बाकी हैं, और आम आदमी पार्टी की ओर से चुनाव आयोग को एक और पत्र भेजा गया है। दिल्ली कीमुख्यमंत्री और पार्टी की सीनियर नेता आतिशी ने 7 जनवरी को मुख्य चुनाव आयुक्त को दूसरा पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने तत्काल मुलाकात कासमय मांगा है। उनका कहना है कि इस चुनाव को लेकर देश और मीडिया की नजरें दिल्ली पर हैं, और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोगसे मुलाकात जरूरी है।सीएम आतिशी ने फिर से मुख्य चुनाव आयुक्त से समय मांगामुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को 7 जनवरी को भेजे गए पत्र में सीएम आतिशी ने जोर देते हुए कहा कि चुनाव आयोग से मिलने के लिए समयदेने में कोई ऐतराज नहीं होना चाहिए, क्योंकि दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर सिर्फ 27 दिन बाकी हैं। उन्होंने पत्र में लिखा, “दिल्ली विधानसभाचुनाव के लिए समय कम बचा है और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए हमारी मुलाकात अत्यंत आवश्यक है।”आतिशी ने चुनाव आयोग से मुलाकात की मांग करते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर विचार-विमर्श और उचित दिशा-निर्देशों की आवश्यकताहै। उन्होंने कहा कि इस समय दिल्ली में एकमात्र चुनाव हो रहे हैं, इसलिए इस चुनाव पर पूरे देश और मीडिया की नजर है और यह चुनाव की प्रक्रियाको लेकर स्पष्टता और निष्पक्षता बनाए रखना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।5 जनवरी को भेजा गया था पहला पत्रसीएम आतिशी ने 5 जनवरी को भी मुख्य चुनाव आयुक्त को एक पत्र भेजा था, जिसमें उन्होंने दिल्ली की नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं केनाम काटे जाने और जोड़े जाने की प्रक्रिया पर चिंता जताई थी। आतिशी ने पत्र में आरोप लगाया था कि इस प्रक्रिया से चुनाव परिणामों पर असर पड़सकता है और यह चुनाव की निष्पक्षता को चुनौती देने वाला कदम हो सकता है।उन्होंने चुनाव आयोग से अनुरोध किया था कि इस मुद्दे को प्राथमिकता पर लिया जाए और आयोग को इससे संबंधित जानकारी दी जाए। उनकाकहना था कि यह मुद्दा दिल्ली के चुनावी क्षेत्र के दायरे से बाहर है और इसे केंद्रीय स्तर पर ही सुलझाया जाना चाहिए। पत्र में उठाए गए सवालसीएम आतिशी ने अपने दूसरे पत्र में विस्तार से बताया कि उनके पहले पत्र के जवाब में दिल्ली चुनाव कार्यालय से सिर्फ यह सूचना प्राप्त हुई थी किवह इस मुद्दे की जांच कर रहे हैं। उन्होंने लिखा, “इस मामले में व्यक्तिगत रूप से बातचीत करने के लिए मैंने पहले ही समय मांगा था, क्योंकि यह एकजटिल मामला है और इसे स्थानीय चुनाव अधिकारियों से अधिक केंद्रीय स्तर पर सुलझाने की आवश्यकता है।”उन्होंने आयोग को याद दिलाया कि अब चुनाव में कम समय बचा है, और ऐसे में इस मुद्दे को सर्वोच्च प्राथमिकता पर हल किया जाना चाहिए।आतिशी ने यह भी कहा कि इस समय देश के मीडिया का पूरा ध्यान दिल्ली चुनावों पर है और इसलिए चुनाव आयोग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के प्रति आतिशी का विश्वासअपने पत्र में सीएम आतिशी ने चुनाव आयोग पर विश्वास जताया और कहा कि दिल्ली में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनावों के लिए आयोग का महत्वपूर्णयोगदान होगा। उन्होंने लिखा, “हम भारतीय चुनाव आयोग पर विश्वास करते हैं और उम्मीद करते हैं कि आयोग आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव कोस्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराएगा।” आतिशी ने पत्र में यह भी कहा कि दिल्ली चुनावों के दौरान सुरक्षा, मतदान प्रक्रिया और अन्य संबंधित पहलुओं पर पूरी पारदर्शिता बनाए रखना बहुतजरूरी है। उन्होंने आयोग से निवेदन किया कि वे इस संबंध में जल्द से जल्द मुलाकात का समय दें ताकि चुनाव की प्रक्रिया में कोई भी समस्या न होऔर सुनिश्चित किया जा सके कि चुनाव पूरी तरह से निष्पक्ष रूप से हो।दिल्ली चुनाव की संवेदनशीलतादिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर आतिशी का यह पत्र और उनका चुनाव आयोग से मिलकर चर्चा करने का अनुरोध दिल्ली के चुनावी माहौल कोऔर भी संवेदनशील बनाता है। दिल्ली चुनाव में विवादास्पद मुद्दों, मतदाताओं की सूची में बदलाव और अन्य प्रशासनिक पहलुओं को लेकर कई बारसवाल उठ चुके हैं। यही कारण है कि आम आदमी पार्टी इस बार दिल्ली चुनाव आयोग से पूरी तरह से स्पष्टता चाहती है ताकि किसी भी प्रकार केसंदेह को दूर किया जा सके और चुनाव में निष्पक्षता बनी रहे।चुनाव आयोग की जवाबदेहीमुख्य चुनाव आयुक्त को लिखे गए पत्र में आतिशी ने यह भी साफ किया है कि इस मामले में किसी प्रकार की लापरवाही या देरी से चुनाव कीनिष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं। ऐसे में आयोग को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इस मुद्दे पर शीघ्र ध्यान देने की जरूरत है। सीएम आतिशी ने पत्र मेंलिखा कि दिल्ली चुनाव अब महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं और चुनाव आयोग की भूमिका बहुत अहम हो गई है।क्या कहता है चुनाव आयोग?चुनाव आयोग ने अभी तक सीएम आतिशी के पत्र पर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि आयोग मामले की गंभीरताको समझते हुए आवश्यक कदम उठाएगा। दिल्ली चुनाव को लेकर आयोग द्वारा पहले ही कई सुरक्षा उपायों और चुनावी प्रक्रियाओं की समीक्षा कीजा चुकी है। हालांकि, अब जब चुनाव में सिर्फ कुछ दिन रह गए हैं, तो यह जरूरी हो जाता है कि सभी विवादों और चिंताओं को तुरंत हल किया जाएताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचा जा सके।

आसाराम को पैरोल पर रिहा करने के फैसले के बाद पीड़िता के घर की सुरक्षा बढ़ाई गई

सुप्रीम कोर्ट द्वारा यौन शोषण के मामले में सजा प्राप्त आसाराम को स्वास्थ्य समस्याओं के कारण पैरोल पर रिहा करने के आदेश के बाद शाहजहांपुरजिले में पीड़िता के परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ उत्पन्न हो गई हैं। पुलिस अधिकारियों ने जानकारी दी कि पीड़िता के घर के आसपास सुरक्षाबढ़ा दी गई है, जबकि पीड़िता के पिता ने कोर्ट के आदेश पर हैरानी जताई है और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। पीड़िता के परिवार की सुरक्षा को लेकर उठी चिंतापिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को 31 मार्च 2025 तक पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया। इस फैसले के बाद, शाहजहांपुर के अधिकारियोंने पीड़िता के घर की सुरक्षा बढ़ा दी है। अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) संजय कुमार सागर ने बुधवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वे खुदपीड़िता के घर पहुंचे और उसके परिवार से बातचीत की। उन्होंने बताया कि पीड़िता के घर पर पहले से पुलिस का गार्ड तैनात है, इसके अलावा पीड़िता के पिता को एक सशस्त्र सुरक्षाकर्मी भी दिया गया है।इसके बाद उन्होंने आश्वासन दिया कि अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए जा रहे हैं और सुरक्षा के लिए थाना और क्षेत्राधिकारी को भी निर्देश दिए गएहैं।सुरक्षा बढ़ाने के उपायों में यह भी शामिल है कि पीड़िता के घर के आसपास के सीसीटीवी कैमरों की मरम्मत करवाई जाएगी। इसके साथ ही पीड़िताके पिता को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे घर से बाहर जाने से पहले पुलिस को सूचित करें। पुलिस प्रशासन लगातार पीड़िता के परिवार की सुरक्षा कीनिगरानी रखेगा और किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत कार्रवाई करेगा। पीड़िता के पिता की चिंतापीड़िता के पिता ने आसाराम को पैरोल मिलने की खबर पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि उन्हें यह निर्णय बिल्कुल अप्रत्याशित लगा औरयह उनकी आँखों की नींद उड़ा गया। उन्हें अब अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता हो रही है, क्योंकि आसाराम के समर्थक लगातार उनकेखिलाफ षड्यंत्र रचने में लगे हुए हैं। पीड़िता के पिता ने इस बारे में बात करते हुए कहा, ‘‘आसाराम के जेल में रहते हुए कई गवाहों की हत्या की गई है, और अब दो अन्य गवाह भी लापताहैं। ऐसे में मेरे परिवार की सुरक्षा की चिंता बढ़ गई है।’’ उनका यह भी कहना था कि आसाराम ने जेल से अपने समर्थकों के जरिए उन पर कई झूठेमुकदमे भी दर्ज कराए हैं। गवाहों के लापता होने की चिंतापीड़िता के पिता ने अपने बयान में यह दावा किया कि जब आसाराम जेल में था, तो चार गवाहों को मार दिया गया था। ये गवाह थे: अमृत प्रजापति(राजकोट), अखिल गुप्ता (रसोईया), राहुल सचान (लखनऊ) और कृपाल सिंह (शाहजहांपुर)। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि दो गवाह, भोलानंद और सुरेशानंद, अब भी लापता हैं, जिनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल रही है। यह गवाह आसाराम के खिलाफ मामले में अहम साक्षी थे। पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि आसाराम ने जेल से अपने समर्थकों के माध्यम से चार झूठे मुकदमे उनके खिलाफ दर्ज कराए हैं। इन झूठेमुकदमों का उद्देश्य उन्हें परेशान करना और उनके खिलाफ दबाव बनाना था। इन आरोपों ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है और सुरक्षा कोलेकर नई चिंताएँ उत्पन्न की हैं।आसाराम के खिलाफ न्याय की मांगपीड़िता के पिता ने यह भी सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार संसद में नाबालिगों के साथ अत्याचार के मामलों में फांसी की सजा की मांग करती है, तो इस मामले में आसाराम के खिलाफ न्याय क्यों नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यद्यपि आसाराम को यौन शोषण के मामले में उम्रभर कीसजा दी गई थी, फिर भी कोर्ट द्वारा उसे पैरोल पर रिहा करना एक प्रकार की ‘मेहरबानी’ है, जो न्याय की भावना के खिलाफ है।उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र सरकार ने संसद में कानून बनाया कि नाबालिगों पर अत्याचार करने वालों को फांसी दी जाए, लेकिन आसाराम के मामले मेंन्यायालय ने बार-बार उसकी सजा में ढील दी है। यह एक बहुत बड़ा सवाल है कि क्यों इतने गंभीर अपराध के बाद भी उसे पैरोल पर रिहा कियागया।’’आसाराम का अपराध और सजाआसाराम बापू, जो पहले एक प्रभावशाली धार्मिक गुरु के रूप में जाने जाते थे, पर 2013 में शाहजहांपुर की एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म काआरोप लगा था। यह घटना जोधपुर स्थित आसाराम के आश्रम में हुई थी, और पीड़िता के पिता ने दिल्ली में मामला दर्ज कराया था। इस मामले मेंअदालत ने आसाराम को उम्रभर की सजा सुनाई थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उसे स्वास्थ्य कारणों के आधार पर पैरोल पर रिहा कर दिया है।सुप्रीम कोर्ट का निर्णयसुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आसाराम के स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए लिया गया। कोर्ट ने 31 मार्च 2025 तक उसे पैरोल पर रिहा करने का आदेशदिया है, जिसके बाद उसकी स्थिति और स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। कोर्ट ने आसाराम के खिलाफ चल रहे मुकदमों के संदर्भ में यह भीकहा कि अगर उसके स्वास्थ्य में कोई बदलाव आता है, तो पैरोल की अवधि को फिर से समीक्षा किया जाएगा। इस फैसले के बाद, पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा को लेकर उठ रही चिंताओं को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा त्वरित कदम उठाए गए हैं, और पीड़िता के परिवार को सुरक्षा प्रदान करने के लिए पूरी कोशिश की जा रही है।

प्रियंका गांधी ने रमेश बिधूड़ी को सिखाया सबक, गालों पर की गई टिप्पणी पर तंज

दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के उम्मीदवार रमेश बिधूड़ी के द्वारा प्रियंका गांधी के बारे में की गई विवादित टिप्पणी पर कांग्रेसमहासचिव प्रियंका गांधी ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। प्रियंका ने इसे हास्यास्पद और अप्रासंगिक बताते हुए तंज कसा और कहा कि अगर बिधूड़ी गालोंकी बात कर रहे हैं तो उन्हें अपने गालों की भी चर्चा करनी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने दिल्ली में सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। गालों की चर्चा ने चढ़ाया विवाद का तापमानभा.ज.पा. उम्मीदवार रमेश बिधूड़ी ने हाल ही में कहा था कि वे अपने निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के ‘गालों’ जैसी सड़कें बनवाएंगे। यहबयान दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में तुरंत चर्चा का विषय बन गया। बिधूड़ी का यह बयान इतना विवादास्पद साबित हुआ कि इससे ना सिर्फदिल्ली बल्कि पूरे देश में सियासी माहौल गर्म हो गया। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद बिधूड़ी ने अपनी टिप्पणी पर खेद व्यक्त किया, लेकिन तब तकयह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका था और राजनीतिक हलकों में इसकी तीखी प्रतिक्रिया हो चुकी थी। प्रियंका गांधी ने दिया करारा जवाबप्रियंका गांधी ने इस बयान पर मीडिया से बातचीत करते हुए इसे ‘‘हास्यास्पद’’ करार दिया और कहा कि इस तरह के अप्रासंगिक मुद्दों के बजायदिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान असल मुद्दों पर चर्चा की जानी चाहिए। प्रियंका ने बिधूड़ी के बयान पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘उन्होंने (बिधूड़ी) अपने गाल के बारे में कुछ नहीं कहा। यह एक हास्यास्पद टिप्पणी है और इससे ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता।’’ प्रियंका ने आगे कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में बहुत जरूरी मुद्दों पर बहस होनी चाहिए, ना कि ऐसे बेतुके बयान दिए जाने चाहिए जो सिर्फचुनावी माहौल को गर्म करने के लिए होते हैं। जब उनसे यह पूछा गया कि बिधूड़ी ने अपने बयान पर खेद जताया है, तो प्रियंका ने इसे नकारते हुएकहा कि ऐसे बयान बेमतलब होते हैं और इनका कोई अर्थ नहीं होता। चुनाव आयोग की सख्त टिप्पणीरमेश बिधूड़ी की विवादास्पद टिप्पणी पर चुनाव आयोग ने भी कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ने मंगलवार को कहा था किमहिलाओं के बारे में इस प्रकार की ‘‘गंदी टिप्पणियां’’ स्वीकार नहीं की जा सकतीं। उन्होंने कहा, ‘‘अगर कोई इस तरह की बातें करता है, तो यहशर्मनाक है और इसे भर्त्सना की जानी चाहिए।’’ इसके साथ ही चुनाव आयोग ने चेतावनी दी कि यदि किसी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान महिलाओं के खिलाफ टिप्पणी की और वह हद पारकरता है, तो मामला दर्ज कराया जाएगा। चुनाव आयोग ने महिलाओं के बारे में अपशब्दों के प्रयोग पर सख्त कार्रवाई की बात कही और इसे चुनावीप्रक्रिया के साथ नहीं जोड़ा। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा, ‘‘अगर कोई हद पार करेगा, तो हम उसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस तरह की टिप्पणियां महिलाओं और बच्चों के खिलाफकरना पूरी तरह से अस्वीकार्य है।’’ आयोग ने यह भी कहा कि माताओं और बहनों के बारे में ऐसी टिप्पणियों को कभी भी सही नहीं ठहराया जा सकताहै। विवादित बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियारमेश बिधूड़ी के बयान को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई। कांग्रेस ने इसे बेहद अपमानजनक और घटिया स्तर काबयान करार दिया, जबकि आम आदमी पार्टी ने भी भाजपा की इस तरह की घटिया राजनीति की निंदा की। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यह बयान केवल महिला विरोधी नहीं, बल्कि समूचे राजनीतिक परिपाटी के लिए शर्मनाक है। आम आदमी पार्टी ने भी इसबयान को सत्ताधारी पार्टी के अहंकार और उनके निराशाजनक राजनीतिक दृष्टिकोण का प्रतीक बताया। रमेश बिधूड़ी ने मांगी माफीविवाद बढ़ने के बाद रमेश बिधूड़ी ने सार्वजनिक रूप से अपने बयान पर खेद जताया। उन्होंने कहा कि उनके शब्दों का कोई गलत मतलब नहीं निकालाजाना चाहिए था और अगर किसी को उनके बयान से ठेस पहुंची हो तो वह माफी मांगते हैं। हालांकि, माफी के बावजूद यह बयान राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर गया। सवाल यह उठ रहे हैं कि क्या ऐसे बयानों से चुनावी मुद्दों सेध्यान भटकाना और महिलाओं के प्रति असम्मानजनक भाषा का प्रयोग राजनीतिक रुख को सही ठहराता है? महिला सुरक्षा और सम्मान का मुद्दाप्रियंका गांधी द्वारा इस मुद्दे पर बयान देने के बाद यह सवाल भी उठता है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान महिला सुरक्षा, सम्मान और शिक्षाजैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा क्यों नहीं हो रही है। प्रियंका ने यह स्पष्ट किया कि दिल्ली के मतदाताओं को इस समय सच्चे और वास्तविक मुद्दों परध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है, न कि इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयानों पर। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘हमारा ध्यान दिल्ली की जनता के लिए सशक्त निर्णय लेने और उनकी समस्याओं को हल करने पर होना चाहिए, न कि ऐसेबेतुके बयान देने वाले नेताओं पर।’’

8-9 जनवरी को PM मोदी करेंगे  आंध्र प्रदेश और ओडिशा का दौरा, ₹2 लाख करोड़ की परियोजनाओं की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 और 9 जनवरी को आंध्र प्रदेश और ओडिशा का दौरा करेंगे, जहां वे विभिन्न बड़े प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।इस दौरे में प्रधानमंत्री मोदी दोनों राज्यों को ₹2 लाख करोड़ से ज्यादा की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। PM मोदी का आंध्र प्रदेश दौरा: ₹2 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट्स का शुभारंभ8 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी विशाखापत्तनम में 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। इनमें शामिल होगी एनटीपीसीग्रीन एनर्जी की ग्रीन हाइड्रोजन हब परियोजना, जिसका शिलान्यास प्रधानमंत्री मोदी पुदीमदका में करेंगे। यह परियोजना भारत के राष्ट्रीय हरितहाइड्रोजन मिशन का हिस्सा होगी और इसमें ₹1,85,000 करोड़ का निवेश होगा। इसके अलावा, प्रधानमंत्री आंध्र प्रदेश में ₹19,500 करोड़ से ज्यादा की लागत वाली रेलवे और सड़क परियोजनाओं का भी उद्घाटन और शिलान्यासकरेंगे। इनमें विशाखापत्तनम में दक्षिण तट रेलवे मुख्यालय की आधारशिला रखी जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी आंध्र प्रदेश के अनकापल्ली जिले के नक्कापल्ली में बल्क ड्रग पार्क की नींव भी रखेंगे। इसके साथ ही, तिरुपति जिले में कृष्णापटनमऔद्योगिक क्षेत्र (केआरआईएस सिटी) का भी शिलान्यास करेंगे, जो लगभग ₹10,500 करोड़ का निवेश आकर्षित करेगा और इससे 1 लाख से ज्यादानौकरियों के सृजन का अनुमान है। PM मोदी का ओडिशा दौरा: प्रवासी भारतीय दिवस और खास ट्रेन सेवा9 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी ओडिशा के भुवनेश्वर में 18वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इस सम्मेलन में 50 से ज्यादा देशों सेप्रवासी भारतीय हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन भारतीय प्रवासियों से जुड़ने और उन्हें देशवासियों से संवाद करने का अहम मंच है। इसके साथ ही, पीएम मोदी प्रवासी भारतीय एक्सप्रेस को भी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह ट्रेन दिल्ली से शुरू होकर भारत के प्रमुख धार्मिक औरपर्यटन स्थलों की यात्रा करेगी, जो प्रवासी भारतीयों के लिए एक विशेष यात्रा अनुभव होगा।