मनीष सिसोदिया ने आज नामांकन नहीं भरा, अरविंद केजरीवाल ने निकाली पदयात्रा

दिल्ली विधानसभा चुनावों के मद्देनजर आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने आज अपना नामांकनदाखिल नहीं किया है, जबकि इससे पहले ऐसी खबरें आई थीं कि वह आज नामांकन पत्र भर सकते हैं। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी के संयोजकऔर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया और इस मौके पर एक पदयात्रा भीनिकाली, जिसमें पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका साथ दिया। केजरीवाल ने इस यात्रा के दौरान दिल्लीवासियों से अपनी पार्टी को वोट देने की अपील कीऔर इसे ‘काम के आधार पर’ वोट देने का संदेश दिया। मनीष सिसोदिया का नामांकन ना दाखिल करनाविधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने नई दिल्ली सीट से मनीष सिसोदिया को अपना प्रत्याशी बनाया है। मनीष सिसोदिया ने पहले पटपड़गंजविधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक बनने का रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन इस बार वह नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। सिसोदिया की2020 विधानसभा चुनाव में जीत का अंतर काफी कम था और उसके बाद उन्हें शराब घोटाले के मामले में जेल भी जाना पड़ा था। हालांकि, इसचुनाव में वह नामांकन दाखिल नहीं कर पाए। इससे पहले ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि मनीष सिसोदिया भी आज अपने नामांकन पत्र दाखिलकरेंगे, लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया कि वह आज ऐसा नहीं करेंगे। केजरीवाल की पदयात्रा और नामांकन दाखिलअरविंद केजरीवाल ने अपना नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले सुबह अपनी पत्नी सुनीता के साथ पूजा-अर्चना की। उन्होंने हनुमान मंदिर औरवाल्मीकि मंदिर में पूजा की और फिर पार्टी कार्यालय से दिल्ली के नई दिल्ली जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय तक पदयात्रा शुरू की। इस पदयात्रा में आमआदमी पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता भी शामिल हुए, जो हाथ में पार्टी का झंडा लिए हुए थे। इस यात्रा के दौरान केजरीवाल ने दिल्लीवासियों से अपीलकी कि वे अपने वोट का इस्तेमाल काम के आधार पर करें, न कि किसी अन्य आधार पर। उन्होंने खासतौर पर बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा किवह बिना किसी दृष्टिकोण के चुनाव लड़ रहे हैं और पार्टी के पास कोई स्पष्ट दिशा नहीं है। बीजेपी पर हमला करते हुए केजरीवाल का बयानकेजरीवाल ने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा, “बीजेपी के पास कोई मुख्यमंत्री पद का चेहरा नहीं है और न ही कोई मुद्दा है। वे जनता को यह बतानेमें सक्षम नहीं हैं कि अगले पांच साल में वे क्या काम करेंगे। दिल्लीवासी समझ रहे हैं कि बीजेपी क्या कर रही है।” केजरीवाल ने यह भी कहा किबीजेपी के पास कोई स्पष्ट विजन नहीं है और इसलिए आम आदमी पार्टी ही दिल्ली की सच्ची विकल्प है। “जाको राखे साइयां, मार सके न कोय” – केजरीवाल का विश्वासहाल ही में खालिस्तानी समर्थक एक संगठन से अपनी जान को खतरा होने की खबरों के बाद, केजरीवाल ने कहा कि उन्हें इस बारे में चिंता करने कीकोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर भगवान पर पूरा भरोसा जताया। केजरीवाल ने हनुमान मंदिर में पूजा के बाद कहा, “जाकोराखे साइयां मार सके न कोय” (जिसे भगवान बचाए उसे कोई नहीं मार सकता)। उनके अनुसार, भगवान हमेशा उनके साथ हैं और जब तक जीवन कीसंजीवनी शक्ति जीवित रहती है, तब तक कोई खतरा नहीं हो सकता। सुनीता केजरीवाल का बयानकेजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल ने भी मीडिया से बात करते हुए कहा कि दिल्ली के लोग समझते हैं कि कौन बेहतर शासन प्रदान कर सकताहै। उन्होंने कहा, “लोग जानते हैं कि कौन अच्छा नेतृत्व प्रदान कर सकता है, और वे ही निर्णय लेंगे।” उनका विश्वास है कि दिल्ली के लोग उनकी पार्टीको समर्थन देंगे, क्योंकि आम आदमी पार्टी ही उनकी उम्मीदों पर खरी उतरी है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुकाबलाअरविंद केजरीवाल का मुकाबला इस बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता परवेश वर्मा और कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित से है। इस बार दिल्ली की70 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव के लिए मतदान 5 फरवरी को होगा और मतगणना 8 फरवरी को की जाएगी। दिल्ली की राजनीति में यह चुनावबेहद अहम है, क्योंकि पिछले चुनावों में आम आदमी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया था और वह सत्ता में आई थी। इस बार भी केजरीवाल और उनकीपार्टी का लक्ष्य सत्ता में वापस लौटना है। आम आदमी पार्टी का भविष्यअरविंद केजरीवाल का मानना है कि उनकी पार्टी दिल्ली में एक बार फिर बहुमत हासिल करेगी और उनकी सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली मेंआम आदमी पार्टी की सरकार बनाने के लिए जनता का विश्वास और समर्थन जरूरी है। केजरीवाल का कहना है कि उनका और उनकी पार्टी का उद्देश्यदिल्ली के विकास के लिए काम करना है, और वे इस चुनाव में दिल्लीवासियों से काम के आधार पर वोट देने की अपील कर रहे हैं। चुनाव प्रचार में नए मुद्देआम आदमी पार्टी ने इस चुनाव में शिक्षा, स्वास्थ्य, और पानी-बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर अपने वादे दोहराए हैं। साथ ही, वह दिल्लीकी जनता को यह विश्वास दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी सरकार पिछले पांच वर्षों में किए गए कार्यों के आधार पर फिर से चुनी जाएगी।वहीं बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवार अपने-अपने मुद्दों को लेकर दिल्लीवासियों के बीच प्रचार कर रहे हैं, लेकिन केजरीवाल का कहना है कि वहचुनावी प्रचार के बजाय असल मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं, जो जनता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
अखिलेश यादव ने AAP को क्यों दिया समर्थन? INDIA गठबंधन की बैठक में क्या हुई थी बात?

दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है, जहां 5 फरवरी को मतदान होगा और परिणाम 8 फरवरी को घोषित किए जाएंगे। इसबीच दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय जनता पार्टी (BJP), और कांग्रेस के बीच सियासी जंग तेज हो गई है। कुछ दिन पहलेसमाजवादी पार्टी (SP) के मुखिया अखिलेश यादव और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आमआदमी पार्टी (AAP) को अपना समर्थन देने की बात की थी। अब अखिलेश यादव ने इस फैसले के पीछे का कारण भी बताया है। अखिलेश यादव का बयानमकर संक्रांति के अवसर पर हरिद्वार पहुंचे अखिलेश यादव ने दिल्ली विधानसभा चुनाव पर अपनी बात रखते हुए कहा, “INDIA गठबंधन अखंड है।जब INDIA गठबंधन का गठन हुआ था, तब यह तय किया गया था कि जो पार्टी स्थानीय स्तर पर मजबूत होगी, उसे गठबंधन का समर्थन मिलेगा।दिल्ली में AAP मजबूत है, इसलिए समाजवादी पार्टी ने उन्हें अपना समर्थन दिया है। हमारा उद्देश्य भाजपा को हराना है, और जब उद्देश्य एक है तोझूठ-सच का कोई सवाल नहीं है।” AAP और कांग्रेस के बीच जंगदिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच खुलकर सियासी घमासान देखा जा रहा है। आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, जो नईदिल्ली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, ने कांग्रेस के उम्मीदवार संदीप दीक्षित को भाजपा का एजेंट करार दिया था। इस पर कांग्रेस और AAP के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है। अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में कहा था कि राहुल गांधी अपनी पार्टी को बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं, जबकि आप नेता संजय सिंह ने इस बयान का जवाब देते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल और AAP को राहुल गांधी से कोई सर्टिफिकेट नहींचाहिए। सियासी पारा गरमअखिलेश यादव और ममता बनर्जी द्वारा कांग्रेस के बजाय आम आदमी पार्टी को समर्थन देने के बाद दिल्ली का सियासी पारा और भी गर्म हो गया है।इस स्थिति में जहां बीजेपी, कांग्रेस और AAP के बीच घमासान है, वहीं INDIA गठबंधन का एकजुट रहना और भाजपा को हराने का उद्देश्य सभीपार्टियों के लिए अहम बन गया है।
‘कांग्रेस का घिनौना सच अब उनके ही नेता ने कर दिया उजागर’, राहुल के किस बयान पर भड़के नड्डा?

भाजपा के अध्यक्ष जे पी नड्डा ने बुधवार को कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की इस टिप्पणी से कांग्रेस का ‘घिनौना सच’ सामने आ गया है, जिसमेंउन्होंने दावा किया है कि ‘हम अब भाजपा, आरएसएस और ‘इंडियन स्टेट’ (भारतीय राज व्यवस्था) से लड़ रहे हैं’। राहुल ने इससे पहले, राष्ट्रीयराजधानी के कोटला रोड पर 9ए स्थित कांग्रेस के नए मुख्यालय के उद्घाटन के बाद पार्टी नेताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘यह मत सोचिए किहम निष्पक्ष लड़ाई लड़ रहे हैं। इसमें कोई निष्पक्षता नहीं है। यदि आप मानते हैं कि हम भाजपा नामक एक राजनीतिक संगठन से लड़ रहे हैं या हमआरएसएस नामक एक राजनीतिक संगठन से लड़ रहे हैं तो आप नहीं समझ पाए हैं कि क्या हो रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा और आरएसएस ने हमारे देश के प्रत्येक संस्थान पर कब्जा कर लिया है। अब हम सिर्फ भाजपा नामक राजनीतिक संगठन औरआरएसएस से नहीं, बल्कि ‘इंडियन स्टेट’ से भी लड़ रहे हैं।’’ राहुल के ‘डीप स्टेट’ के साथ गहरे संबंध- नड्डाराहुल गांधी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नड्डा ने सोशल मीडिया मंच X पर आरोप लगाया कि यह कोई रहस्य नहीं है कि राहुल गांधीऔर उनके ‘परिवेशी तंत्र’ के शहरी नक्सलियों और ‘डीप स्टेट’ के साथ ‘गहरे संबंध’ हैं जो भारत को ‘बदनाम, अपमानित और खारिज’ करना चाहते हैं।‘डीप स्टेट’ ऐसे समूह को कहा जाता है जो गोपनीय तरीके से अपने विशेष हितों को पूरा करने, खासकर लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकारों कोअस्थिर करने के लिए काम करते हैं। नड्डा ने क्यों दी राहुल को बधाई?नड्डा ने दावा किया कि राहुल गांधी ने जो कुछ भी किया या कहा है वह भारत को तोड़ने और हमारे समाज को विभाजित करने की दिशा में है। उन्होंनेपलटवार करते हुए कहा, ‘‘अब और कुछ छिपा नहीं है, कांग्रेस का घिनौना सच अब उनके अपने ही नेता द्वारा उजागर कर दिया गया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं राहुल गांधी को बधाई देता हूं कि उन्होंने साफ तौर पर वह कह दिया, जो देश जानता है- कि वह भारत के खिलाफ लड़ रहे हैं।’’ भाजपा अध्यक्ष नेआरोप लगाया कि कांग्रेस का उन सभी ताकतों को प्रोत्साहित करने का इतिहास रहा है जो कमजोर भारत चाहते हैं। नड्डा ने कहा, ‘‘सत्ता के लालच कामतलब देश की अखंडता से समझौता करना और लोगों के भरोसे को धोखा देना है।’’ उन्होंने कहा कि भारत के लोग बुद्धिमान हैं और उन्होंने फैसलाकिया है कि वे राहुल गांधी और उनकी विचारधारा को हमेशा खारिज करेंगे
केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी का राहुल गांधी पर पलटवार, कहा- एक भारतीय कैसे कह सकता है कि उसकी लड़ाई भारत से है?

लोकसभा में विपक्षी नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बयानों पर बीजेपी ने एक बार फिर तीखा जवाब दिया है। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी नेराहुल गांधी के बयान पर पलटवार करते हुए पूछा, “एक भारतीय कैसे कह सकता है कि उसकी लड़ाई भारत से है?” यह टिप्पणी राहुल गांधी के उसबयान के संदर्भ में की गई, जिसमें उन्होंने हाल ही में चुनावी पारदर्शिता और भारत की चुनाव प्रणाली पर सवाल उठाए थे। राहुल गांधी का बयान: बीजेपी और आरएसएस ने कब्जा किया हर संस्था परकांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी के नए मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ के उद्घाटन के मौके पर दावा किया कि भारत की चुनावी प्रक्रिया में गंभीरसमस्याएं हैं। उन्होंने कहा, “यह मत सोचिए कि हम निष्पक्ष लड़ाई लड़ रहे हैं, इसमें कोई निष्पक्षता नहीं है। अगर आप मानते हैं कि हम बीजेपी याआरएसएस से लड़ रहे हैं, तो आप सही नहीं समझ रहे हैं। बीजेपी और आरएसएस ने हमारे देश की हर संस्था पर कब्जा कर लिया है। अब हम सिर्फबीजेपी, आरएसएस और भारतीय राज्य से ही नहीं, बल्कि इस पूरी व्यवस्था से लड़ रहे हैं।” केंद्रीय मंत्री ने किया पलटवारकेंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने राहुल गांधी के इस बयान पर कड़ा जवाब देते हुए कहा, “यह बयान बेहद चिंताजनक है। एक भारतीय कैसे यह कह सकताहै कि उसकी लड़ाई भारत से है? यह भारत के लोकतंत्र और संस्थाओं का अपमान है।” पुरी ने राहुल गांधी को यह याद दिलाया कि भारत एकलोकतांत्रिक देश है, जहां हर नागरिक को अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन किसी को भी इस लोकतंत्र के खिलाफ खड़ा नहीं होना चाहिए। राहुल गांधी का यह बयान उनकी आलोचना का कारण बना है, और अब बीजेपी इसे कांग्रेस पर दबाव बनाने का एक मौका मान रही है।
सुप्रीम कोर्ट से मायावती को बड़ी राहत, 15 साल बाद हाई प्रोफाइल केस हुआ बंद

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने 15 जनवरी को उस जनहित याचिका का निपटाराकर दिया, जिसमें मायावती के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च करके अपनी और अपनी पार्टी के चुनावी सिंबल”हाथी” की मूर्तियां बनाने के खिलाफ मामला उठाया गया था। इस याचिका पर कोर्ट ने अब सुनवाई बंद करने का फैसला लिया है। याचिका में क्या था दावा?यह मामला 15 साल पुराना है, जब 2009 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। वकील रविकांत ने दावा किया था कि सरकारी धन कादुरुपयोग कर बहुजन समाज पार्टी की सिंबल “हाथी” की मूर्तियां पार्कों में बनवाई गई थीं। इसके साथ ही यह भी मांग की गई थी कि जनता के पैसेका यह दुरुपयोग बसपा से वसूला जाए और चुनाव आयोग को आदेश दिया जाए कि बसपा का चुनाव चिन्ह जब्त कर लिया जाए। हालांकि सुप्रीमकोर्ट ने याचिकाकर्ता की मांग को खारिज कर दिया। मायावती को मिली राहत, जन्मदिन पर खास तोहफायह फैसला मायावती के लिए खास है, क्योंकि यह उनके 69वें जन्मदिन के दिन आया। इस फैसले ने उन्हें दोहरी खुशी दी, और बसपा कार्यकर्ता भीइस राहत को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं। मूर्तियों को लेकर क्या था विवाद?मायावती ने 2009 में करदाताओं के पैसे से लखनऊ और नोएडा के पार्कों में अपनी, कांशी राम और हाथियों की मूर्तियां बनवाने का निर्णय लियाथा। ये मूर्तियां 2007 से 2012 के बीच मायावती के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान बनाई गई थीं। याचिका में आरोप लगाया गया था कि इनमूर्तियों की लागत 52.20 करोड़ रुपये थी, जो सरकारी धन की बर्बादी है और चुनाव आयोग द्वारा जारी निर्देशों के खिलाफ है। मायावती का पक्षमायावती ने हमेशा दावा किया कि इन मूर्तियों को “महज वास्तुशिल्प डिजाइन” के रूप में स्थापित किया गया था और ये उनकी पार्टी के प्रतीक नहींथीं। उन्होंने यह भी कहा कि स्मारकों के निर्माण के लिए उचित बजट आवंटित किया गया था और इनका उद्देश्य था कि लोग उनसे प्रेरणा लें और यहलोगों की इच्छाओं का प्रतिनिधित्व करता है।
पीएम मोदी ने तीन युद्धपोतों को राष्ट्र को समर्पित किया, कहा- भारत की सुरक्षा को मिलेगा नया बल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई के नेवी डॉकयार्ड में भारतीय नौसेना के तीन नए युद्धपोतों, INS सूरत, INS नीलगिरी और INS वाघशीर को देश कोसमर्पित किया। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि इन नए युद्धपोतों से भारत की सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी और यह भारत की नौसेना कोसशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। नौसेना की ताकत बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदमपीएम मोदी ने इस अवसर पर कहा, “हमारी नौसेना ने सैकड़ों लोगों की जान बचाई है और आज हम एक अहम कदम उठा रहे हैं जिससे हमारी नौसेनाऔर मजबूत होगी।” उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय नौसेना ने आत्मनिर्भरता के मार्ग को अपनाया है, जिससे हम अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूती देरहे हैं। उन्होंने भारत की नीति पर भी बात की, कहकर कि भारत हमेशा विकास के दृष्टिकोण से काम करता है, न कि विस्तारवाद के। पीएम ने कहा, “भारतआज एक भरोसेमंद और जिम्मेदार साथी के रूप में पहचाना जा रहा है, विशेष रूप से ग्लोबल साउथ में।” मेड इन इंडिया युद्धपोतपीएम मोदी ने गर्व के साथ कहा कि यह युद्धपोत पूरी तरह से मेड इन इंडिया हैं, जो भारत की बढ़ती ताकत और आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं। उन्होंनेकहा, “भारत पर दुनिया का भरोसा बढ़ रहा है और आज हमारा देश एक प्रमुख समुद्री शक्ति के रूप में उभर रहा है।” समुद्री विरासत और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदमपीएम ने इस दिन को भारत की समुद्री विरासत और नौसेना के गौरवशाली इतिहास के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए भी महत्वपूर्णबताया। उन्होंने कहा, “आज हम छत्रपति शिवाजी महाराज की पवित्र भूमि पर 21वीं सदी की नौसेना को सशक्त करने के दिशा में एक अहम कदमउठा रहे हैं।”यह पहली बार है जब भारतीय नौसेना में एक विध्वंसक, एक फ्रिगेट और एक पनडुब्बी एक साथ कार्यरत हो रहे हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रेरणापीएम मोदी ने छत्रपति शिवाजी महाराज का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय नौसेना को नया दृष्टिकोण और सामर्थ्य दिया था।तीनों युद्धपोतों का भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होना, भारत के रक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो देश को रक्षा विनिर्माण औरसमुद्री सुरक्षा में वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर करेगा।
“चार बच्चे पैदा करो, एक लाख रुपये ले जाओ”: परशुराम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष का विवादित ऐलान

मध्य प्रदेश सरकार के परशुराम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पंडित विष्णु राजोरिया ने एक विवादास्पद बयान दिया है, जिसमें उन्होंने ब्राह्मण समुदाय केएक सम्मेलन के दौरान घोषणा की कि जो ब्राह्मण जोड़े चार बच्चे पैदा करेंगे, उन्हें बोर्ड की ओर से एक लाख रुपये का पुरस्कार मिलेगा। हालांकि, इस घोषणा के बाद विवाद खड़ा हो गया, और राजोरिया को अपनी सफाई पेश करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार वह अपनी निजी हैसियत सेदेंगे, न कि राज्य सरकार की तरफ से। राजोरिया इंदौर में सनाढ्य ब्राह्मण समुदाय के विवाहयोग्य युवक-युवतियों के परिचय सम्मेलन में शामिल हुए थे, जहां उन्होंने यह बयान दिया। सोशलमीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में वह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि युवाओं में परिवार बढ़ाने की बजाय केवल एक बच्चा पैदा करने की प्रवृत्तिबढ़ रही है, जो उनकी नजर में ठीक नहीं है। उन्होंने अपील की कि कम से कम चार बच्चे होने चाहिए। राजोरिया ने यह भी स्पष्ट किया कि यह घोषणा व्यक्तिगत स्तर पर की गई थी और इसे किसी सरकारी योजना के तहत लागू नहीं किया जाएगा।उन्होंने कहा कि वह इस पुरस्कार राशि का प्रबंध अपने व्यक्तिगत प्रयासों या सामाजिक सहयोग से करेंगे।
कांग्रेस आलाकमान का विधायक दल को संदेश, सार्वजनिक बयानबाजी से बचें और नेतृत्व के फैसले का पालन करें

कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी के अंदर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, लेकिन इस बीच पार्टी आलाकमान ने विधायकों को सार्वजनिकबयानबाजी से बचने की सलाह दी है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और पार्टी नेतृत्व ने सोमवार को कांग्रेस विधायकों से अपील की कि वे किसी भीसार्वजनिक बयान में नेतृत्व परिवर्तन या अन्य मुद्दों पर राय न व्यक्त करें और जो भी निर्णय पार्टी आलाकमान ले, उसका पालन करें। यह निर्देश कांग्रेसविधायक दल (CLP) की बैठक में दिया गया, जिसमें कांग्रेस के महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला और जयराम रमेश भी शामिल थे। कांग्रेस के भीतर सत्ता परिवर्तन को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है, खासकर तब जब कुछ विधायकों और मंत्रियों ने सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे परअपनी राय दी। कुछ विधायकों ने नेतृत्व परिवर्तन की संभावना जताई, जबकि कुछ ने इसका विरोध करते हुए इसे नकारा। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और मंत्री सतीश जरकीहोली के आवास पर हाल ही में हुए रात्रिभोज के बाद से सत्ता परिवर्तन की चर्चा और तेज हो गई है। इसमुलाकात में दलित और अनुसूचित जनजाति समुदाय के कुछ मंत्रियों से बातचीत की गई थी, जिसके बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि मार्च मेंराज्य बजट के बाद सत्ता परिवर्तन हो सकता है। इसके अलावा, 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद यह खबर भी आई थी कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके तहत दोनों बारी-बारी से मुख्यमंत्री बनाए जाने थे। इस तरह की चर्चा कर्नाटक की राजनीति में नई दिशा और संभावित बदलावों को लेकरउत्सुकता को बढ़ा रही है।
संजय राउत ने मोहन भागवत के बयान पर दी प्रतिक्रिया, कहा- संविधान बनाने का अधिकार उन्हें नहीं

शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था किभारत की असली स्वतंत्रता की प्रतिष्ठा राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दिन हुई। राउत ने इस पर स्पष्ट किया कि भागवत सम्माननीय व्यक्ति हैं, लेकिनवह संविधान के निर्माता नहीं हैं और न ही वह देश के कानूनों में बदलाव कर सकते हैं। राउत ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण में सभी ने अपना बलिदान दिया और यह देश के लिए गौरव की बात है, लेकिन यह दावा करना कि देश तभीस्वतंत्र हुआ जब रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई, सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि रामलला इस देश में सदियों से हैं और उनके लिए आंदोलनों कासिलसिला लगातार चलता रहेगा। राउत ने स्पष्ट किया कि रामलला के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, तभी देश को सही मायने में स्वतंत्रतामिलेगी। वहीं, विपक्षी गठबंधन ‘I.N.D.I.A.’ के बीच मतभेदों पर राउत ने कहा कि इंडिया अलायंस अगर खत्म होता है तो विपक्ष भी कमजोर हो जाएगा।उन्होंने यह भी कहा कि यह गठबंधन लोकसभा चुनाव के लिए ही बनाया गया था, लेकिन इसका अस्तित्व देश की लोकतांत्रिक मजबूती के लिएजरूरी है।