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बिहार चुनाव फंडिंग के आरोप पर सिद्धारमैया का पलटवार भाजपा खुद करती है, “दूसरों पर लगाती है इल्ज़ाम”

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सोमवार को भाजपा के उस आरोप को पूरी तरह खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि राज्य की कांग्रेससरकार बिहार विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी को आर्थिक मदद दे रही है। उन्होंने कहा कि हमने किसी भी राज्य के चुनाव के लिए पांच पैसे भी नहींदिए, बिहार के लिए भी नहीं। सिद्धारमैया ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि असल में भाजपा खुद ऐसा करती रही है, अब वही आरोप दूसरोंपर लगा रही है। मुख्यमंत्री का यह बयान भाजपा सांसद बीवाई रघवेंद्र और जगदीश शेट्टर के आरोपों के जवाब में आया। इन दोनों नेताओं ने दावाकिया था कि सिद्धारमैया सरकार बिहार चुनाव में कांग्रेस पार्टी के फंडरेजिंग में शामिल है, जिससे राज्य में भ्रष्टाचार बढ़ा है। इस पर सिद्धारमैया ने कहाकि यह आरोप पूरी तरह निराधार हैं और भाजपा का यह पुराना तरीका है कि वह पहले खुद गलती करती है और फिर दूसरों पर उंगली उठाती है।उन्होंने कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक ध्यान भटकाने की कोशिश है। अनुमति लेने की अनिवार्यता की गईसिद्धारमैया ने अपनी सरकार के उस आदेश का भी बचाव किया जिसमें निजी संगठनों को किसी भी सरकारी संपत्ति या परिसर का उपयोग करने सेपहले अनुमति लेने की अनिवार्यता की गई है। विपक्ष का कहना है कि यह आदेश खास तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों को सीमितकरने के लिए लाया गया है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैसला नया नहीं है, बल्कि 2013 में भाजपा सरकार के समय लिया गया निर्णय हीहमने जारी रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदेश में किसी संगठन का नाम नहीं लिया गया है और यह सभी निजी संगठनों पर समान रूप से लागूहोगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने आदेश में कहीं भी आरएसएस का नाम नहीं लिखा है। यह सभी संगठनों के लिए समान है। सरकार के आदेश केअनुसार, किसी भी निजी संस्था, संघ या समूह को सरकारी संपत्ति या परिसर में कार्यक्रम करने से पहले प्रशासनिक अनुमति लेनी होगी। वहीं, चित्तापुरमें आरएसएस की प्रस्तावित रूट मार्च को प्रशासन ने अनुमति नहीं दी, यह कहते हुए कि उसी दिन भीम आर्मी ने भी उसी मार्ग पर मार्च की सूचना दी है, जिससे शांति भंग होने की आशंका थी। अनुमति आवेदन दाखिल करने का निर्देशआरएसएस ने इस मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने रविवार को सुनवाई करते हुए आरएसएस को दो नवंबर कोचित्तापुर में रूट मार्च के लिए नई अनुमति आवेदन दाखिल करने का निर्देश दिया। इस बीच सिद्धारमैया ने कहा कि सरकार की ओर से जारी आदेश कामतलब यह नहीं है कि अनुमति हर हाल में दी जाएगी। यह स्थानीय कानून-व्यवस्था की स्थिति पर निर्भर करेगा। उन्होंने आगे दोहराया कि भाजपा कीतरह उनकी सरकार किसी भी राजनीतिक या धार्मिक संगठन के प्रति पक्षपात नहीं करेगी। सिद्धारमैया ने सोमवार को यह घोषणा भी की कि राज्यसरकार झूठी और भ्रामक सूचनाओं पर रोक लगाने के लिए एक नया कानून लाने की तैयारी में है। उन्होंने कहा कि जो लोग अफवाहें फैलाकरसाम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विजयन का भाजपा-आरएसएस पर तीखा वार केरल की पहचान खतरे में, PM SHRI पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने सोमवार को कहा कि अगर राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कोप्रमुखता मिलती है, तो राज्य अपनी विशिष्ट पहचान खो देगा। कन्नूर में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एक नए कार्यालय भवन का उद्घाटनकरते हुए विजयन ने लोगों को संघ परिवार की विचारधारा के बढ़ते प्रभाव के प्रति सतर्क रहने की अपील की। विजयन का यह रूख चौंकाने वालाइसलिए भी है क्योंकि बीते सप्ताह ही राज्य सरकार ने PM SHRI योजना में शामिल होने का फैसला लिया है। विजयन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमितशाह के हालिया बयान का हवाला दिया, जिसमें शाह ने कोच्चि में दावा किया था कि भाजपा आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में 25 प्रतिशत वोटऔर उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में बहुमत हासिल करेगी। विजयन ने कहा, “अगर आरएसएस की विचारधारा यहां मजबूत होती है, तोकेरल वैसा नहीं रहेगा जैसा आज है। आज हमारे पास खाने-पीने, पहनने और पूजा करने की आजादी है। लेकिन जिन राज्यों में आरएसएस का प्रभावहै, वहां लोगों पर उनके पहनावे या भोजन को लेकर हमले होते हैं और यहां तक कि हत्या भी की जाती है।” स्पष्ट रुख अपनाना होगामुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि संघ परिवार सबरीमाला सहित धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप कर केरल की संस्कृति और सांप्रदायिक सौहार्द कोबिगाड़ने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा, “भगवान अयप्पा के साथ वावर का भी सबरीमला परंपरा में स्थान है, लेकिन संघ परिवार यह बर्दाश्तनहीं कर सकता कि एक मुस्लिम की ऐसी भूमिका हो। इसलिए वे वावर की पहचान को गलत ढंग से पेश करने की कोशिश करते हैं।” कहानियों के अनुसार, वावर भगवान अयप्पा के मुस्लिम साथी थे और श्रद्धालु एरुमेली स्थित वावर की मस्जिद होते हुए सबरीमाला पहुंचते हैं। विजयनने चेतावनी दी कि अगर ऐसी ताकतें प्रभाव में आईं तो सबरीमाला की समावेशी परंपरा नष्ट हो जाएगी। उन्होंने कहा कि केरल के पुनर्जागरण आंदोलनोंने जाति-आधारित समाज को एक प्रगतिशील समाज में बदला था, लेकिन अब उन उपलब्धियों को पलटने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, “भाजपा को दिया गया हर वोट केरल की असली पहचान को नुकसान पहुंचाएगा। लोगों को इसे समझना होगा और स्पष्ट रुख अपनाना होगा।” कमजोर कर विकास को रोक दिया थाविजयन ने पूर्ववर्ती यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सरकार (2011–16) पर भी हमला करते हुए कहा कि उसने राज्य की वित्तीय स्थिति कोकमजोर कर विकास को रोक दिया था, जबकि 2016 से सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार ने सभी क्षेत्रों में प्रगति को पुनर्जीवितकिया है।केरल के इस नाटकीय राजनीतिक घटनाक्रम पर कांग्रेस ने भी प्रतिक्रिया दी। एक तरफ जहां सीएम ने आरएसएस की विचारधारा मजबूत होने कोलेकर सतर्क रहने वाला बयान दिया तो दूसरी तरफ केरल सरकार ने PM SHRI योजना में शामिल होने का फैसला भी लिया है। अब कांग्रेस ने इसेसीपीएम और भाजपा के बीच ‘गुप्त गठजोड़’ बताया। केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) प्रमुख सनी जोसेफ ने कहा कि वामपंथी दल का छिपासंबंध अब खुलकर सामने आ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी ने कैबिनेट में चर्चा किए बिना ही राज्य के इस योजना मेंशामिल होने की घोषणा कर दी। हालांकि, सत्ताधारी खेमे से एलडीएफ संयोजक टी. पी. रामकृष्णन ने सरकार के फैसले का बचाव किया। उन्होंनेकहा कि राज्य को केंद्र से अधिकतम फंड मिले ये सुनिश्चित करना सरकार का काम है। जोसेफ ने सीपीआई से पूछा कि क्या वह अपने विरोधी रुख परकायम रहेगी? कांग्रेस नेता ने कहा, अगर सीपीआई विरोध करती है तो कांग्रेस भी उसका समर्थन करेगी। उन्होंने सीपीएम पर बीजेपी से राजनीतिकलाभ लेने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से स्पष्टीकरण मांगते हुए जोसेफ ने पूछा कि क्या यह मुद्दा कैबिनेट में चर्चा के लिए लायाजाएगा।

कर्नाटक को बाढ़ राहत में भेदभाव? प्रियांक खरगे ने केंद्र पर लगाया पक्षपात का आरोप

कर्नाटक के ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री प्रियांक खरगे ने केंद्र सरकार पर बाढ़ राहत को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा किभाजपा शासित राज्यों को लगातार अधिक फंड दिए जा रहे हैं, जबकि गैर-भाजपा या एनडीए से बाहर के राज्यों के साथ हमेशा अन्याय होता है।सोमवार को मीडिया से बातचीत में प्रियांक खरगे ने कहा कि केंद्र सरकार की राहत नीति पूरी तरह पक्षपातपूर्ण है। उन्होंने कहा कि केंद्र से जारी फंडराज्य की वास्तविक क्षति के मुकाबले बेहद कम हैं। खरगे ने आगे कहा कि यह केंद्र सरकार की आदत बन गई है कि गैर-भाजपा राज्यों को पर्याप्तराहत नहीं देती। कर्नाटक देश के सबसे ज्यादा जीएसटी और आयकर देने वाले राज्यों में से एक है। हम आईटी एक्सपोर्ट में भी नंबर वन हैं और देश केजीडीपी में 8.9 फीसदी योगदान देते हैं, इसके बावजूद हमें अनदेखा किया जाता है।अग्रिम राशि स्वीकृतगृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कर्नाटक और महाराष्ट्र के लिए 2025-26 के राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष की दूसरी किस्त के रूप में कुल1,950.80 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि स्वीकृत की। इसमें से 384.40 करोड़ रुपये कर्नाटक को और 1,566.40 करोड़ रुपये महाराष्ट्र को आवंटितकिए गए हैं। यह राशि मानसून के दौरान भारी वर्षा और बाढ़ से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए दी जा रही है। हालांकि, खरगे नेकहा कि यह राशि राज्य में हुए व्यापक नुकसान के सामने नगण्य है। प्रियांक खरगे ने कहा कि जब भी टैक्स के वितरण या फंड डिवोल्यूशन की बातआती है, कर्नाटक के साथ केंद्र हमेशा अन्याय करता है। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि विपक्षी राज्यों कोउनकी हक की रकम नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि कर्नाटक ने इस बार भारी नुकसान झेला है जानमाल की क्षति, फसलों की तबाही और इंफ्रास्ट्रक्चरको भारी नुकसान हुआ है। बावजूद इसके हमें पर्याप्त फंड नहीं मिला।मानसून के दौरान भारी बारिश और बाढ़ से जन-धन की बड़ी क्षतिकर्नाटक के कई हिस्सों में इस साल मानसून के दौरान भारी बारिश और बाढ़ से जन-धन की बड़ी क्षति हुई। कई लोगों की मौतें हुईं, घर ढह गए, सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचा, और फसलों का विनाश हुआ। राज्य सरकार ने केंद्र से राहत फंड की मांग की थी, लेकिन जारी की गई राशि परअब सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्य सरकार ने कहा है कि वह केंद्र से और राहत की मांग दोहराएगी ताकि प्रभावित इलाकों में पुनर्निर्माण कार्य तेजी से पूराकिया जा सके।

गोवा में विपक्षी एकता पर आम आदमी पार्टी का बयान गठबंधन मंजूर, मगर इरादे हों पारदर्शी और जनहित में

गोवा आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अमित पालेकर ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी राज्य में भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों के गठबंधन काविरोध नहीं करती, लेकिन इसमें शामिल सभी दलों का “इरादा साफ और पारदर्शी” होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी सत्ता परिवर्तन केलिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ ईमानदारी से लड़ने के लिए किसी भी गठबंधन का हिस्सा बनने को तैयार है। पालेकर का यह बयान उस समयआया जब गोवा फॉरवर्ड पार्टी और रेवोल्यूशनरी गोवन्स पार्टी ने रविवार को आगामी 2027 विधानसभा चुनावों के लिए संभावित गठबंधन के संकेतदिए। दक्षिण गोवा के फातोर्दा में दिवाली की पूर्व संध्या पर आयोजित नरकासुर दहन कार्यक्रम में कांग्रेस नेता यूरी अलेमाओ, अल्टोन डी’कोस्टा, गोवा फॉरवर्ड पार्टी के प्रमुख विजय सरदेसाई और आरजीपी प्रमुख मनोज परब ने एक साथ मंच साझा किया। इस दौरान विपक्षी एकता की जरूरतपर जोर दिया गया। पहल का कोई जवाब नहीं दियाकार्यक्रम में कांग्रेस नेता यूरी अलेमाओ ने कहा कि जैसे विपक्षी दल विधानसभा में एकजुट हैं, वैसे ही उन्हें सदन के बाहर भी भाजपा के खिलाफ एकसाथ आना चाहिए। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से आप की आलोचना करते हुए कहा कि जो विपक्षी एकता के महत्व को नहीं समझते, वे वोटों का बंटवाराकर रहे हैं। दरअसल, इससे पहले आप ने साफ कहा था कि वह कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करेगी। इस पर आप गोवा प्रमुख अमित पालेकर नेजवाब देते हुए कहा कि उनकी पार्टी कभी गठबंधन के खिलाफ नहीं रही, लेकिन कांग्रेस ने पहल का कोई जवाब नहीं दिया। कांग्रेस की ओर से कोई जवाब नहीं आयापत्रकारों से बातचीत में पालेकर ने बताया कि दो अक्तूबर से दो हफ्ते पहले ही हमने गठबंधन का प्रस्ताव दिया था, बशर्ते सभी दल मिलकर एकसाथबैठें। लेकिन कांग्रेस की ओर से कोई जवाब नहीं आया। यहां तक कि रविवार के कार्यक्रम में भी हमें आमंत्रित नहीं किया गया। उन्होंने कहा किविपक्षी दलों का एक साथ आना गोवा के लिए अच्छी बात है और आप इससे खुश है, लेकिन गठबंधन का असली मकसद भाजपा और उसकेभ्रष्टाचार को हराना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंच पर एकता दिखाना और जमीन पर एकजुट होकर काम करना दो अलग बातें हैं। आप के गोवाप्रभारी आतिशी मार्लेना पहले ही कांग्रेस के साथ गठबंधन से इनकार कर चुकी हैं। उनका कहना था कि कांग्रेस भाजपा के लिए एमएलए बैंक बनचुकी है, क्योंकि उसके कई विधायक सत्ता पक्ष में शामिल हो चुके हैं। हालांकि पालेकर ने यह भी जोड़ा कि अगर विपक्षी दलों का उद्देश्य साफ है औरवे सिर्फ सत्ता के लिए नहीं बल्कि जनहित के लिए एकजुट होना चाहते हैं, तो आम आदमी पार्टी किसी सकारात्मक प्रयास का हिस्सा बनने से पीछे नहींहटेगी।

पुलिस स्मृति दिवस पर सीएम योगी का सम्मान, ‘सेवा और समर्पण समाज के लिए आदर्श उदाहरण’

राजधानी लखनऊ में मंगलवार को उत्तर प्रदेश पुलिस स्मृति दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर रिजर्व पुलिस लाइन्स में कार्यक्रम का आयोजनकिया गया। इसमें सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी हिस्सा लिया।कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों मेंभी राज्य पुलिस बल के सदस्यों ने अपने कर्तव्य को सर्वोपरि मानते हुए अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सामाजिक सद्भाव स्थापितकरने में सराहनीय भूमिका निभाई है। 8 करोड़ रुपये आवंटित किएएक बार फिर प्रयागराज महाकुंभ-2025 का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि महाकुंभ के भव्य आयोजन में उत्तर प्रदेश पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों, अन्य सुरक्षा बलों और प्रशासन ने अभूतपूर्व समर्पण और अनुशासन का परिचय देते हुए सुरक्षा एवं व्यवस्था के उत्कृष्ट मानक स्थापित किए हैं। इसदौरान राज्य सरकार ने प्रदेश के जिलों और इकाइयों में तैनात पुलिस कर्मियों की सुविधा के लिए 3.5 करोड़ रुपये और उनके कल्याण के लिए 8 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। समर्पण समाज के लिए एक आदर्श उदाहरणइससे पहले सीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘उत्तर प्रदेश पुलिस की सेवा और समर्पण समाज के लिए एक आदर्शउदाहरण है। पुलिस स्मृति दिवस पर कर्तव्य पथ पर अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले सभी अमर शहीद पुलिसकर्मियों को विनम्र श्रद्धांजलि!’वहींउपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक्स पर पोस्ट करते हुए जनता की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलिअर्पित की। उन्होंने लिखा कि पुलिसकर्मियों का साहस, कर्तव्य के प्रति समर्पण और बलिदान हम सभी के लिए प्रेरणा है। यूपी पुलिस स्मृति दिवसपर आयोजित कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पुलिस की सेवा और समर्पण समाज के लिए एकआदर्श उदाहरण है।

दीपावली पर नहीं बढ़ा प्रदूषण, AAP की साजिश बेनकाब , दिल्ली सरकार के प्रयासों से हवा में दिखा सुधार बोले मनजिंदर सिंह सिरसा

इस साल दिल्ली में 200 से अधिक साफ़ हवा वाले दिन देखे गए जो की पिछले एक दशक में सबसे एक प्रदर्शनों में से एक है और साल ख़त्म होनेतक सबसे अच्छा होने का भी रिकॉर्ड बना सकता है। दीपावली पर प्रदूषण का स्तर पहले से कम रहा — AQI 2020 में 462, 2024 में 360 और 2025 में मात्र 351। दिल्ली के मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी के नेतृत्व में दिल्ली सरकार के सात महीनों में 27 लाख मीट्रिक टन कूड़ा हटाया गया, 500 वर्गमीटर सेअधिक निर्माण स्थलों की सख्त मॉनिटरिंग, साथ ही इलेक्ट्रिक/CNG बसों की फ्लीट में कई गुना बढ़ोतरी की गई। 8% नए वाहनों के रजिस्ट्रेशनऔर 21% कंस्ट्रक्शन कार्य और 10/15 साल पुराने वाहनों के चलने के बावजूद भी पूरे साल प्रदूषण नियंत्रित रहा है 27 साल की बीमारियों को हमने सात महीनों में ठीक करना शुरू किया है — अब दिल्ली की हवा में सुधार दिखने लगा है।” — पर्यावरण मंत्री श्रीसिरसामाननीय मंत्री ने विपक्ष पर “धर्म की गंदी राजनीति” करने का आरोप लगाया — “दीपावली भारत की आत्मा का त्योहार है, इसे राजनीति से जोड़नापाप है।” नई दिल्ली, 21 अक्तूबर 2025दिल्ली के पर्यावरण मंत्री श्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने आज एक प्रेस वार्ता में कहा कि “आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार जानबूझकर दिल्ली कीहवा को प्रदूषित करने की साजिश रच रही है।” मंत्री ने कहा कि पिछले चार दिनों में पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ अचानक बढ़ गई हैं और यह कोई संयोग नहीं है। “पंजाब के किसानो कोपराली जलाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह दिल्ली की हवा को गंदा करने की सुनियोजित राजनीति है ताकि कहा जा सके कि दिल्ली सरकारअसफल है।” श्री सिरसा ने विपक्ष के धार्मिक बयानों की तीखी निंदा करते हुए कहा, “अरविंद केजरीवाल जी और उनकी टीम दीपावली जैसे पावन पर्व को राजनीतिसे जोड़ रहे हैं। दीपावली किसी राजनीतिक पार्टी का त्यौहार नहीं है — यह भारत की आत्मा का त्योहार है। जो लोग इसे पाप बता रहे हैं, वे धर्म औरसमाज दोनों के साथ अन्याय कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी धर्म के नाम पर समाज को बाँटने की कोशिश कर रही है। “पहले पटाखों पर बैन लगाकर एक वर्ग को खुश कियागया, अब दीपावली मनाने वालों को ‘पापी’ कहा जा रहा है — यह वही लोग हैं जो विधानसभा में भगवान श्रीराम के विरोध में आवाज उठाते थे।” प्रदूषण पर तथ्य आधारित जवाबमंत्री ने बताया कि दीपावली के बाद भी दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर रहा। • 2020 में दीपावली के बाद AQI: 462• 2024 में (AAP शासनकाल में): 360• 2025 में (वर्तमान सरकार के तहत): 351 “यह साबित करता है कि पटाखे प्रदूषण का प्रमुख कारण नहीं हैं। हमने कानून का पालन करते हुए दीपावली मनाई और हवा की गुणवत्ता नियंत्रण मेंरखी,” श्री सिरसा ने कहा। उन्होंने बताया कि दिल्ली में प्रदूषण घटाने के लिए सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं —अब तक 27 लाख मीट्रिक टन कूड़ा हटाया जा चुका है, लक्ष्य 28 लाख मीट्रिक टन का है।सभी 500 वर्गमीटर से बड़ी इमारतों की निर्माण गतिविधियों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है।इलेक्ट्रिक और CNG बसें चल रही हैं, जिससे प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आई है।6,000 से अधिक उद्योगों को “Consent to Operate” और “Consent to Establish” प्रमाणपत्र दिए गए हैं; इन उद्योगों का उत्सर्जन अब“Zero Pollution” श्रेणी में लाया गया है।वाहन प्रदूषण नियंत्रण (PUC) की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल किया गया है।