Skip to main content

NEWS अब तक

मुख्य कोच गौतम गंभीर का पिच बचाव, भारत की हार पर बोले, ‘यही विकेट हमनें मांगी थी

भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में मिली हार के बाद ईडन गार्डेंस की पिच का बचाव किया है।गंभीर का कहना है कि टीम ने ऐसे ही विकेट की मांग की थी। भारत को कोलकाता टेस्ट मैच में 30 रनों से हार का सामना करना पड़ा जिससे वह दोमैचों की सीरीज में 0-1 से पीछे हो गई है। ईडन गार्डेंस की पिच को लेकर काफी सवाल उठ रहे थे, लेकिन गंभीर ने आलोचनाओं को खारिज किया।भारतीय टीम ने पहली पारी में 30 रनों की बढ़त ली थी, लेकिन दक्षिण अफ्रीका ने गेंदबाजों के दम पर वापसी की और भारत को हराकर दो मैचों कीसीरीज में 1-0 की बढ़त ले ली। दक्षिण अफ्रीका की दूसरी पारी 153 रन पर ऑलआउट हुई थी और उसने 123 रनों की बढ़त लेकर भारत के सामने124 रनों का लक्ष्य रखा था। भारत की बल्लेबाजी दूसरी पारी में बेहद खराब रही और टीम दूसरे ही सत्र में 93 रन पर ऑलआउट हो गई। तेम्बा बावुमा और वाशिंगटन सुंदर की पारियों का जिक्र कियागंभीर ने मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, यह पिच बिल्कुल वैसी ही थी जैसी हमने मांगी थी और हमें वही मिला। यहां के क्यूरेटर (सुजन मुखर्जी) बहुत सहयोगी रहे। मुझे लगता है कि यह एक ऐसी विकेट है जो आपकी मानसिक दृढ़ता का आकलन कर सकती है, क्योंकि अच्छे डिफेंस के साथखेलने वालों ने रन बनाए हैं। गंभीर ने अपनी बात को सही साबित करने के लिए तेम्बा बावुमा और वाशिंगटन सुंदर की पारियों का जिक्र किया।बावुमा दूसरी पारी में 55 रन बनाकर नाबाद रहे थे, जबकि वाशिंगटन सुंदर ने 31 रन बनाए थे। गंभीर ने कहा, यह बिल्कुल वैसी ही पिच थी जिसकाहमें इंतजार था। इसमें कोई भी कमी नहीं थी और न ही ऐसा था कि ये खेलने लायक नहीं है। अक्षर, बावुमा और वाशिंगटन ने रन बनाए। अगर आपकहते हैं कि यह टर्निंग विकेट है तो ज्यादातर विकेट तेज गेंदबाजों को लेने चाहिए थे। हम पहले दिन से ही स्पिनरों के लिए मददगार पिच की मांगकरते हैं जिससे टॉस अहम न हो जाए। अगर हम टेस्ट जीत जाते, तो पिच के बारे में इतना सवाल या चर्चा नहीं होती। हमारे पास ऐसे खिलाड़ी हैं जोकिसी भी परिस्थिति में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।भारतीय कप्तान शुभमन गिल की फिटनेस पर अपडेट देते हुए कोच ने कहा, वह निगरानी में हैं और फिजियो उन्हें लेकर आज फैसला ले सकते हैं।गंभीर ने अपनी बात को सही साबित करने के लिए तेम्बा बावुमा और वाशिंगटन सुंदर की पारियों का जिक्र किया। बावुमा दूसरी पारी में 55 रनबनाकर नाबाद रहे थे, जबकि वाशिंगटन सुंदर ने 31 रन बनाए थे।

चित्तापुर रूट मार्च पर मंत्री प्रियांक खरगे का वार, अब तो आरएसएस भी ले रहा कानूनी अनुमति “जानें और क्या कुछ कहा”

कलबुर्गी में कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने रविवार को आरएसएस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि संगठन ‘100 साल में पहली बार’ नियमों का पालनकरते हुए रूट मार्च कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस बार चित्तापुर में होने वाले मार्च के लिए आरएसएस ने कानूनी और संवैधानिक अनुमति ली है, जोपहले नहीं देखा गया था। चित्तापुर विधानसभा क्षेत्र, जहां से प्रियांक खरगे विधायक हैं, में आरएसएस ने रूट मार्च निकालने की योजना बनाई थी।शुरुआत में जिला प्रशासन ने अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद संगठन अदालत पहुंचा और वहीं से इजाजत मिली। प्रियांक खरगे ने कहा कि वे मार्च केखिलाफ नहीं हैं, बस नियमों के पालन पर जोर है।सीसीटीवी कैमरे लगाए गएउन्होंने कहा, ‘मैंने कभी रूट मार्च का विरोध नहीं किया। मैंने बस इतना कहा कि अनुमति लेनी चाहिए। उनके यहां नियमों का पालन करने की आदतकम है, लेकिन अब कर रहे हैं, अच्छी बात है।’ उन्होंने यह भी बताया कि प्रशासन ने कड़े नियम और शर्तें लगाई हैं। उन्होंने कहा, ‘अगर शर्तें नहीं मानीगईं, तो कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी। इसमें समस्या ही क्या है?।’ उनका दावा है कि यह ‘पहली बार है जब आरएसएस कानून और संविधान केअनुसार चल रहा है।’ आरएसएस के मार्च शुरू होने से पहले बजाज कल्याण मंटप के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस ने पूरे क्षेत्र को घेरलिया है। इस कड़ी में बम निरोधक दस्ता और स्निफर डॉग्स ने जगह-जगह जांच की है। इसमें पेड़ों से लेकर इमारतों की छतों तक पर नजर रखी जारही है। भारी पुलिस बल तैनात है और पूरे रास्ते पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और ड्रोन से निगरानी की जा रही है। आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गईराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का रूट मार्च शाम 3.30 बजे बाजाज कल्याण मंटप से शुरू होगा, लगभग 1.2 किमी चलेगा और फिर उसी इलाके में समाप्तहोगा। यह पूरा घटनाक्रम राजनीतिक बयानबाजी, प्रशासनिक सख्ती और सुरक्षा तैयारियों के बीच इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। कांग्रेस नेताऔर कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर करारा हमला बोला है और कहा कि आरएसएस 100 साल में पहली बारनियमों का पालन कर रहा है। बता दें कि आरएसएस के मार्च शुरू होने से पहले बजाज कल्याण मंटप के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

रोहिणी के आरोपों पर तेज प्रताप का गुस्सा, ‘बहन का अपमान हुआ तो सुदर्शन चक्र चलेगा “जिसने बहन को दुख दिया, बचेगा नहीं”

रोहिणी आचार्या के घर और पार्टी छोड़ने के बयान के बाद अब तेज प्रताप यादव का बयान सामने आया है, जिसमें वह गुस्से में नजर आ रहे हैं। उन्होंनेकहा कि हमारी बहन का जो अपमान करेगा उस पर कृष्ण का सुदर्शन चक्र चलेगा। तेज प्रताप यादव ने आगे कहा कि रोहिणी दीदी जो बात कह रहीहै, वह अपनी जगह बिल्कुल सही कह रही हैं। एक मां होने के नाते, एक महिला होने के नाते, एक बहन होने के नाते उन्होंने जो सराहनीय काम उन्होंनेकिया है, वह शायद ही कोई बेटी या कोई बहन या कोई मां कर सकती है। यह हमारे लिए और सभी महिलाओं के लिए ये पूरे तरीके से ये पूजनीय हैंऔर सदैव इनकी चर्चा कि जाएगी। यह एक इतिहास रहेगा और इतिहास के पन्नों में मेरी बहन का नाम सुनहरे पन्नों में रहेगा। अपमानित किया जातारोहिणी आचार्या ने सबसे पहले कल एयरपोर्ट पर अपने अपमान की बात कही थी। उन्होंने अपनी बातों में कहा कि मैंने अपना मायका और राजद पार्टीसे अलग हो गई हूं। पूछने पर उन्होंने दो नाम लिया और कहा कि यह बात अब आपलोग खुद को चाणक्य कहने वाले संजय यादव और रफीज सेपूछिये, तेजस्वी यादव से पूछिये। अब तो स्थिति यह हो गई है कि इनका नाम लेने पर चप्पल से मारा जाता है, अपमानित किया जाता है और घर सेनिकाला जाता है। पिता को बचाने के लिए वो कर दिया जिसे आज गंदा बता दिया गयारोहिणी आचार्या ने फिर आज सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है, जिसके बाद आज हर जगह इसकी चर्चा हो रही है। उन्होंने लिखा कि, “कल मुझेगालियों के साथ बोला गया कि मैं गंदी हूँ और मैंने अपने पिता को अपनी गंदी किडनी लगवा दी , करोड़ों रूपए लिए , टिकट लिया तब लगवाई गंदीकिडनी .. सभी बेटी – बहन , जो शादीशुदा हैं उनको मैं बोलूंगी कि जब आपके मायके में कोई बेटा – भाई हो , तो भूल कर भी अपने भगवान रूपीपिता को नहीं बचाएं , अपने भाई , उस घर के बेटे को ही बोले कि वो अपनी या अपने किसी हरियाणवी दोस्त की किडनी लगवा दे ” .. सभी बहन – बेटियां अपना घर – परिवार देखें, अपने माता – पिता की परवाह किए बिना अपने बच्चे , अपना काम, अपना ससुराल देखें , सिर्फ अपने बारे में सोचें .. मुझसे तो ये बड़ा गुनाह हो गया कि मैंने अपना परिवार, अपने तीनो बच्चों को नहीं देखा , किडनी देते वक्त न अपने पति, न अपने ससुराल से अनुमतिली .. अपने भगवान, अपने पिता को बचाने के लिए वो कर दिया जिसे आज गंदा बता दिया गया .. आप सब मेरे जैसी गलती , कभी , ना करे किसीघर रोहिणी जैसी बेटी ना हो।”

वर्कशॉप की पूरी कमाई बाढ़ पीड़ितों को दान, CM भगवंत मान ने अमृतसर की बच्चियों की दिल से सराहना की

एक ऐसी उम्र जिसमें जहां बच्चे खिलौनों और मिठाइयों के सपने देखते है, अमृतसर की दो छोटी बच्चियों ने अलग सपने देखने का फैसला किया।सिर्फ 7 साल की मोक्ष सोई और 6 साल की श्रीनिका शर्मा ने जन्मदिन के तोहफे या नई गुड़िया नहीं मांगीं। इसके बजाय, उनके छोटे-छोटे हाथों नेक्रोशिया की सुइयों से अथक मेहनत की, धागे ही नहीं बल्कि उम्मीद बुनी। उनकी प्रदर्शनी का नाम था “क्रोशिए ऑफ काइंडनेस” (दयालुता कीबुनाई)। यह कला दिखाने के लिए नहीं थी, बल्कि इंसानियत दिखाने के लिए थी। उनके द्वारा बनाई गई हर रंगीन चीज में उनके मासूम दिलों कीगर्माहट थी। और जब प्रदर्शनी खत्म हुई, तो इन दोनों फरिश्तों ने कुछ ऐसा किया जो बड़ों को भी एहसास करवा गया के समाज को ऐसी संवेदना कीबहुत जरूरत है। उन्होंने पंजाब की बाढ़ पीड़ितों के लिए अपनी कमाई का एक-एक पैसा दान कर दिया। सब समझ लिया जो मायने रखतामुख्यमंत्री भगवंत मान ने इन अद्भुत बच्चियों से मुलाकात की और उनकी आंखों में वो खुशी दिखी की जो वो अपने लोगों को समझाना चाहते है लोगउसे समझ रहे है। उन्होंने इनके निस्वार्थ कदम की सराहना करते हुए कहा कि ये पंजाब की असली भावना की दूत है। उन्होंने कहा, “जब इतने छोटेबच्चे दूसरों का दर्द समझते है और कुछ करते है, तो वे हमें सिखाते है कि इंसान होने का मतलब क्या है।” उन्होंने कहा और दोनों बच्चियों कोआशीर्वाद दिया। यह दिल छू लेने वाला काम मिशन चढ़दीकला का हिस्सा है। पंजाब का फिर से उठने का संकल्प, भयंकर बाढ़ के बाद जिसने हजारोंलोगों को बेघर और दुखी कर दिया। जब बड़े लोग बहस और देरी में लगे थे, मोक्ष और श्रीनिका ने बस काम किया। उन्होंने दुख देखा और प्यार सेजवाब दिया। जिस उम्र में ज्यादातर बच्चे नुकसान को समझ भी नहीं पाते, इन दोनों ने वह सब समझ लिया जो मायने रखता है।

बिहार चुनाव में एनडीए की प्रचण्ड जीत, पीएम मोदी की विकास नीतियों पर जनता का अटूट विश्वास बोले भूपेंद्र सिंह चौधरी

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन की प्रचण्ड जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने इसऐतिहासिक परिणाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और उनकी उत्कृष्ट विकास नीतियों की साफ-सुथरी सफलता बताया है। भूपेंद्र सिंह चौधरी नेकहा कि बिहार की जनता ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि प्रधानमंत्री मोदी के अंत्योदय, गरीब कल्याण योजनाएँ और विकसित भारत केसंकल्प ने देश के हर वर्ग के मन में विश्वास जगाया है। उनका कहना था कि यह जीत बिहार की देवतुल्य जनता द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्वपर व्यक्त किए गए अटूट भरोसे का प्रमाण है। पार्टी के कर्मठ पदाधिकारियों और ऊर्जावान कार्यकर्ताओं का हृदय से आभारप्रदेश अध्यक्ष ने आगे कहा कि यह परिणाम साबित करता है कि एनडीए सरकार की जनसेवा, गरीब केंद्रित नीतियाँ, और विकास के प्रति समर्पण नेजनता के दिलों में गहरी छाप छोड़ी है। उन्होंने इस विशाल जनादेश को “जनकल्याण की प्रभावशाली नीतियों की विजय” बताया। भूपेंद्र सिंह चौधरीने इस ऐतिहासिक जीत के लिए बिहार की देवतुल्य जनता-जनार्दन, पार्टी के कर्मठ पदाधिकारियों और ऊर्जावान कार्यकर्ताओं का हृदय से आभार औरअभिनंदन व्यक्त किया।

एनडीए की जीत पर लोकदल का बयान सुनील सिंह बोले, अब असली परीक्षा जनता के वादों पर खरा उतरने की

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन की बड़ी जीत के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। इसी क्रम में लोकदल केराष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने एनडीए को बधाई तो दी, लेकिन साथ ही आने वाले समय में सरकार के सामने खड़ी चुनौतियों और जनता की अपेक्षाओंको भी साफ-साफ रेखांकित किया। सुनील सिंह ने कहा कि चुनाव परिणाम लोकतंत्र की शक्ति और जनता के निर्णय का सम्मान है, लेकिन यह जीतकेवल जश्न का विषय नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही तय करने का महत्वपूर्ण अवसर भी है। उन्होंने कहा जनता ने एनडीए को जनादेश जरूर दियाहै, पर अब उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।” इन मुद्दों पर काम करतीउन्होंने कहा कि अब जनता इन्हीं वादों के आधार पर सरकार के कामकाज का मूल्यांकन करेगी और भविष्य में उसके प्रति अपना समर्थन या असंतोषदर्ज कराएगी। सुनील सिंह ने यह भी कहा कि भले ही चुनावी मैदान में सुशासन, कानून-व्यवस्था और विकास जैसे मुद्दे प्रधान रहे, लेकिन वास्तविकचुनौती है—इन सभी वादों को ज़मीनी स्तर पर उतारकर दिखाना। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाषणों और नारों से आगे बढ़कर अब कामों की असलीपरीक्षा होगी। जनता केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि बदलाव चाहती है। आने वाले वर्षों में यह देखा जाएगा कि सरकार कितनी गंभीरता से इन मुद्दों परकाम करती है।