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नागपुर हिंसा पर एक्शन मोड में फडणवीस,दंगाइयों से होगी नुकसान की भरपाई, यूपी मॉडल पर सख्त कार्रवाई का ऐलान

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीसने शनिवार को स्पष्ट किया कि नागपुर हिंसा के दौरान हुए नुकसान की भरपाई दंगाइयों से ही कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि दंगाइयों से वसूली न होनेकी स्थिति में उनकी संपत्तियों को जब्त कर नीलाम किया जाएगा। दंगाइयों की पहचान और कार्रवाईमुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि नागपुर हिंसा में शामिल 104 दंगाइयों की पहचान कर ली गई है। इनमें से 92 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 12 नाबालिग भी शामिल हैं। सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल फोन रिकॉर्डिंग के आधार पर दंगाइयों की पहचान की गई है। मुख्यमंत्री ने बतायाकि हिंसा पर काबू पाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का भी इस्तेमाल किया और स्थिति को 4 से 5 घंटे में नियंत्रण में ले लिया। पुलिस पर हमले के खिलाफ सख्त कार्रवाईगृह मंत्रालय का कार्यभार भी संभाल रहे मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि पुलिस कर्मियों पर हमला करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंनेस्पष्ट किया कि राज्य सरकार तब तक चैन से नहीं बैठेगी जब तक पुलिस पर हमला करने वालों को सजा नहीं मिल जाती। उन्होंने इस घटना कोखुफिया तंत्र की विफलता मानने से इनकार किया लेकिन कहा कि खुफिया जानकारी को और सटीक बनाया जा सकता था। विदेशी हाथ की जांच जारीमुख्यमंत्री ने कहा कि अभी तक हिंसा में किसी विदेशी या बांग्लादेशी लिंक का सबूत नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचनाजल्दबाजी होगी और जांच अभी जारी है। सोशल मीडिया पर भी सख्त नजरमुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जा रही है। अब तक68 आपत्तिजनक पोस्ट हटाई जा चुकी हैं। पुलिस ऐसे लोगों पर नजर रख रही है जो दंगाइयों की मदद या दंगा भड़काने वाली सामग्री पोस्ट कर रहे हैं।यूपी मॉडल पर कार्रवाई का संकेतमुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि नागपुर हिंसा मामले में उत्तर प्रदेश मॉडल को अपनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर बुलडोजर का भीइस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा, मालेगांव में एमडीपी के कार्यालयों और उनकी फंडिंग की गहन जांच होगी। प्रभावित लोगों को मुआवजाफडणवीस ने कहा कि दंगों में जिन लोगों की संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है या वाहन नष्ट हुए हैं, उन्हें अगले तीन से चार दिनों में मुआवजा दियाजाएगा। नागपुर में लगे कर्फ्यू में अब ढील दी जा रही है, क्योंकि स्थिति में सुधार हो गया है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाममुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निर्धारित यात्रा पर नागपुर हिंसा का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। पुलिस पूरी तरह सतर्क है और स्थिति परनजर बनाए हुए है। फडणवीस ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।

दक्षिण भारतीय राज्यों का परिसीमन पर विरोध,चेन्नई में बड़ी बैठक, बीजेपी पर राजनीतिक लाभ का आरोप

दक्षिण भारतीय राज्यों के नेताओं ने परिसीमन के मुद्दे पर अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। चेन्नई में आज (22 मार्च) इस मुद्दे पर एकबड़ी बैठक हुई, जिसमें पांच राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री शामिल हुए। इसके अलावा तीन अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भागलिया। इस दौरान नेताओं ने परिसीमन से होने वाले नकारात्मक प्रभावों को लेकर अपने विचार रखे। एमके स्टालिन के नेतृत्व में हुई बैठकतमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की अगुवाई में आयोजित इस बैठक में केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, पंजाबके मुख्यमंत्री भगवंत मान और कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने हिस्सा लिया। इसके अलावा ओडिशा की बीजू जनता दल और आंध्र प्रदेशकी विपक्षी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। नेताओं के बयान: परिसीमन के विरोध में आवाजें तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिनमुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा कि परिसीमन उन राज्यों के लिए हानिकारक साबित होगा, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन कोसख्ती से लागू किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे परिसीमन के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि निष्पक्ष परिसीमन के पक्षधर हैं। उनका कहना है कि यदिजनसंख्या के आधार पर परिसीमन हुआ तो दक्षिणी राज्यों का संसद में प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा, जिससे केंद्रीय फंड प्राप्त करने में कठिनाई होगी।इससे किसानों और राज्य की संस्कृति पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। केरल सीएम पी विजयनकेरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बिना किसी विचार-विमर्श के परिसीमन को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कियदि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होता है तो उत्तरी राज्यों में सीटों में अप्रत्याशित वृद्धि होगी, जबकि दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व घटजाएगा। उन्होंने इसे भाजपा के राजनीतिक हितों से प्रेरित कदम बताया। तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डीरेवंत रेड्डी ने कहा कि परिसीमन के माध्यम से भाजपा दक्षिणी राज्यों पर पेनल्टी लगाना चाहती है। उन्होंने इसे एक राष्ट्रीय चुनौती बताते हुए कहा किदक्षिण भारत को जनसंख्या आधारित परिसीमन स्वीकार नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह अच्छा काम करने की सजा देने जैसा है और इसे रोकनेके लिए मिलकर लड़ाई लड़नी होगी। कर्नाटक डिप्टी सीएम डीके शिवकुमारडीके शिवकुमार ने कहा कि दक्षिण भारतीय राज्यों ने परिवार नियोजन नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया, जिससे जनसंख्या नियंत्रण में रही। उन्होंनेआरोप लगाया कि परिसीमन के जरिए प्रगतिशील राज्यों को दंडित करने की कोशिश की जा रही है। पंजाब सीएम भगवंत मानभगवंत मान ने भाजपा पर आरोप लगाया कि जहां-जहां पार्टी जीतती है, वहां सीटें बढ़ाना चाहती है और जहां हार का सामना करती है, वहां सीटें कमकरना चाहती है। उन्होंने ऐसे किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध करने की बात कही। ओडिशा से बीजद प्रमुख नवीन पटनायकनवीन पटनायक ने कहा कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन उन राज्यों के साथ अन्याय होगा, जिन्होंने परिवार नियोजन को सफलतापूर्वक लागूकिया है। उन्होंने केंद्र सरकार से सभी दलों से विचार-विमर्श कर ही कोई निर्णय लेने का अनुरोध किया। परिसीमन का मुद्दा: क्यों बढ़ा विवाद?देश में पिछले 5 दशकों से परिसीमन नहीं हुआ है, लेकिन 2026 के बाद इसके होने की संभावना है। परिसीमन के तहत लोकसभा सीटों का वितरणजनसंख्या के आधार पर किया जाएगा। उत्तर भारतीय राज्यों में जनसंख्या वृद्धि अधिक रही है, जबकि दक्षिण भारतीय राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण मेंसफलता पाई है। ऐसे में उत्तर भारत के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में सीटों में वृद्धि होगी, जबकि दक्षिण भारत केतमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और तेलंगाना का प्रतिनिधित्व संसद में घट जाएगा। दक्षिण बनाम उत्तर का राजनीतिक संग्रामदक्षिण भारतीय राज्यों के नेताओं का मानना है कि यह निर्णय उनके राज्यों के साथ अन्यायपूर्ण होगा, क्योंकि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतरप्रदर्शन किया है। वहीं, भाजपा पर आरोप है कि वह राजनीतिक लाभ के लिए परिसीमन का उपयोग कर रही है। ऐसे में दक्षिण और उत्तर भारतीयराज्यों के बीच राजनीतिक टकराव की स्थिति बनती दिख रही है।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का दिल्ली दौरा, केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात और हिमाचल के मुद्दे

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हाल ही में दिल्ली का दौरा शुरू किया है। इस यात्रा के दौरान वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर सकतेहैं। यह दौरा विशेष रूप से पंजाब में हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की बसों पर हुए हमलों और उनसे जुड़े विवाद के मद्देनजर हो रहा है।इन घटनाओं के बाद मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री से बातचीत करने का निर्णय लिया है। केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकातइससे पहले, 20 मार्च 2025 को मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की थी। इस बैठक में राज्य के वित्तीय मुद्दों परचर्चा की गई थी। मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश की आर्थिक नीतियों को मजबूत करने, वित्तीय सहायता बढ़ाने और विकास परियोजनाओं की गति कोतेज करने पर जोर दिया था। वित्तीय सहायता पर जोरमुख्यमंत्री सुक्खू का मानना है कि बंदिशों के चलते राज्य की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो रही है और कई विकास परियोजनाएं रुक गई हैं। अमित शाहसे मुलाकात के दौरान वह राज्य के लिए वित्तीय सहायता का मुद्दा भी उठा सकते हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार का कहना है कि राज्य को केंद्र से आर्थिकसहयोग की आवश्यकता है ताकि रुकी हुई परियोजनाओं को पुनः शुरू किया जा सके। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री भी होंगे शामिलउप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री भी आज शाम दिल्ली के लिए रवाना होंगे। वे केंद्रीय मंत्रियों से मिलकर राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगेऔर आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री का आश्वासनमुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि बैठक के दौरान उन्होंने पोस्ट डिजास्टर नीड असेसमेंट (PDNA) के तहत केंद्रीय टीम द्वारा बनाए गए अनुमानों पर चर्चाकी। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि एक वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक प्रदेश को निर्धारित सहायता राशि प्राप्त नहीं हुई है।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आश्वासन दिया कि जल्द ही एक बैठक आयोजित कर समाधान निकाला जाएगा। विकास कार्यों में तेजी लाने का प्रयासमुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने अपने संसाधनों का उपयोग कर राहत और पुनर्वास कार्य किए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री ने प्रदेश को हर संभवसहायता प्रदान करने का वादा किया है। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) ओंकार चंद शर्मा भी उपस्थित थे। उम्मीदें और चुनौतियाँहिमाचल प्रदेश सरकार को केंद्र से मदद की उम्मीद है ताकि राज्य की आर्थिक स्थिति को बेहतर किया जा सके और रुकी हुई विकास परियोजनाओंको गति दी जा सके। दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री दोनों ही राज्य हित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्र सरकार से चर्चा करेंगे।

अवैध मदरसों के खिलाफ उत्तराखण्ड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने लिया बड़ा फैसला, 16 मदरसों को किया गया सील

उत्तराखंड में अवैध मदरसों के खिलाफ पुष्कर सिंह धामी सरकार का एक्शन लगातार जारी है गुरुवार को ऊधम सिंह नगर में 16 और हरिद्वार में दोअवैध मदरसों को सील कर दिया गया. अब तक राज्य में 110 मदरसों को सील किया जा चुका है. पिछले एक माह से उत्तराखंड में प्रशासन द्वाराअवैध मदरसों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है. ये मदरसे बिना सरकार की अनुमति के संचालित किए जा रहे थे इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंहधामी ने कड़ा रुख अपनाया हुआ है. जिसका व्यापक असर भी देखने को मिल रहा है।पूरे राज्य में अवैध मदरसों के खिलाफ व्यापक स्तर पर अभियानचलाया जा रहा है। प्रशासन ने इस बात की भी जांच शुरू कर दी है. कि इतने बड़े पैमाने पर संचालित हो रहे इन अवैध मदरसों के पीछे किसका हाथहै और यहां पर छात्रों को किस प्रकार की तालीम दी जा रही थी. गुरुवार को रुद्रपुर में चार, किच्छा में आठ, बाजपुर में तीन, जसपुर में एक औरहरिद्वार में दो मदरसों को सील किया गया. इससे पहले देहरादून, पौड़ी में भी बड़े स्तर पर अवैध मदरसों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 92 मदरसों कोसील किया जा चुका है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है किराज्य के मूल स्वरूप के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं कियाजाएगा. जो भी धर्म की आड़ में अवैध गतिविधियों में संलिप्त होगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा किराज्य में कृषकों की आय बढ़ाने के लिए परंपरागत खेती को आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ाया जाए. बेहतर करने के लिए किया जाए प्रोत्साहितजिन क्षेत्रों में किसान बेहतर कार्य कर रहे हैं उन्हें और बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए विभागों द्वारा किसानों के लिए किए जा रहे कार्यों कापरिणाम धरातल पर नजर आना चाहिए. गुरुवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में कृषि उद्यान और सहकारिता विभाग की गेम चेंजरयोजनाओं की समीक्षा की उन्होंने कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष के लिए विभागों द्वारा जिन योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है. उनकी भौतिक स्थिति, वित्तीय प्रगति, आउटकम और आउटपुर के आधार पर कार्य किया जाए, ताकि बजट का सही प्रकार से उपयोग हो सके. उधम सिंह नगर जिले के अपरजिलाधिकारी पंकज उपाध्याय ने बताया कि विशेष रूप से गठित प्रशासनिक टीम ने 16 मदरसों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए वहां तालाबंदी करदी.अभी तक उत्तराखंड में कुल 110 अवैध मदरसों को सील किया जा चुका है.यह मदरसे बिना सरकार की अनुमति के संचालित किया जा रहे थे. जिस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अपनाया हुआ है. सीएम धामी ने इन मदरसों पर कार्रवाई के लिए प्रशासन को फ्री हैंड दिया हुआ हैजिसका व्यापक असर भी देखने को मिल रहा है. पूरे प्रदेश में अवैध मदरसों के खिलाफ व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है.प्रशासन ने इसबात की भी जांच शुरू कर दी है कि इतने बड़े पैमाने पर संचालित हो रहे इन अवैध मदरसों के पीछे किसका हाथ है और यहां पर छात्रों को किस प्रकारकी तालीम दी जा रही थी. मदरसों को किया गया सीलगुरुवार को रुद्रपुर में 4, किच्छा में 8, बाजपुर तीन, जसपुर एक और हरिद्वार में दो मदरसों को सील किया गया जबकि इससे पहले देहरादून, पौड़ी मेंभी बड़े स्तर पर अवैध मदरसों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 92 मदरसों को सील किया जा चुका है.प्रशासन ने इस बात की भी जांच शुरू कर दी हैकि इतने बड़े पैमाने पर संचालित हो रहे इन अवैध मदरसों के पीछे किसका हाथ है और यहां पर छात्रों को किस प्रकार की तालीम दी जा रही थी. गुरुवार को रुद्रपुर में 4, किच्छा में 8, बाजपुर तीन, जसपुर एक और हरिद्वार में दो मदरसों को सील किया गया जबकि इससे पहले देहरादून, पौड़ी मेंभी बड़े स्तर पर अवैध मदरसों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 92 मदरसों को सील किया जा चुका है.बृहस्पतिवार को श्यामपुर क्षेत्र के गैंडीखाता मेंपहुंची प्रशासन की टीम ने दो मदरसों को सील कर दिया. गैंडीखाता की गुर्जर बस्ती में ये मदरसे बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे थे. आपको बता दें किमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे मदरसों को चिन्हित करने के निर्देश दिए थे. हरिद्वार के डीएम कर्मेंद्र सिंह ने बतायाकि 60 से ज्यादा बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे मदरसे चिन्हित किए गए हैं. एसडीएम का कहना है कि अवैध मदरसों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारीरहेगी.

अवैध ई-रिक्सा चलाने वालों को लेकर सरकार का बड़ा ऐलान,नए नियमों को किया गया लागू “जानें क्या रहेंगी पूरी प्रक्रिया”

शहरों और गांवों में परिवहन की सुविधा के साथ मुसीबत भी बने ई-रिक्शा की संख्या 50 लाख से अधिक हो सकती है लेकिन सरकारी आंकड़ों मेंपिछले पांच साल में 16 लाख ई रिक्शा का पंजीकरण हुआ है. इनमें दिल्ली में डेढ़ लाख पंजीकृत ई रिक्शा हैं।एक अनुमान है कि सड़कों पर जो ईरिक्शा चल रहे हैं उनमें 40 प्रतिशत ई रिक्शा का संचालन अवैध तरीके से किया जा रहा है. दिल्ली के परिवहन विभाग के एक अधिकारी के अनुसारमोटे तौर पर संभवत: 40,000 ई रिक्शा अवैध रूप से चल रहे हैं.2020 में केवल 70,000 ई रिक्शा का रजिस्ट्रेशन हुआ था जबकि अगले दो सालोंमें इनकी संख्या चार लाख पहुंच गई. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से गत दिवस लोकसभा में दिए गए जवाब में कहा गया है कि जनवरी2020 से दिसंबर 2024 तक 16,18,941 ई रिक्शा का पंजीकरण हुआ है. सरकार से पूछा गया था कि क्या देश में ई रिक्शा की अनुचित तरीके सेबिना रोकटोक मैन्युफैक्चरिंग हो रही है. मंत्रालय ने जानकारी दी कि पूरे देश में 740 ई रिक्शा निर्माण इकाइयां पंजीकृत हैं. केंद्रीय मोटर वाहन नियमोंके मुताबिक ई रिक्शा के प्रोटोटाइप को मंजूर कराना आवश्यक है. मंत्रालय ने कहा है कि ई रिक्शा संचालन में इन्फोर्समेंट की जिम्मेदारी राज्य सरकारोंकी है केंद्रीय स्तर पर मंत्रालय ने बैटरी संचालित रिक्शा के प्रस्तावित मानकों और सुरक्षा आकलन के लिए रेटिंग सिस्टम तैयार करने के उद्देश्य से एकतकनीकी समित का गठन किया है. ये लोग नहीं चला पाएंगे रिक्सायह रेटिंग सिस्टम कारों के लिए बनाए गए न्यू कार एसेसमेंट प्रोग्राम (एनसीएपी) के अनुरूप होगा।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जनपदीयसड़क सुरक्षा समितियां जिलाधिकारी की अध्यक्षता में 05 जनवरी 2025 तक हर हाल में बैठक सम्पन्न कर लें 06 से 10 जनवरी 2025 तक सभीस्कूलों-कॉलेजों में सड़क सुरक्षा नियमों से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं. महाकुम्भ में बेहतर यातायात व्यवस्था के लिए PRD वहोमगार्डों की संख्या बढ़ाई जाए सड़क सुरक्षा माह सिर्फ लखनऊ तक सीमित न रहे बल्कि इसे प्रदेश के सभी 75 जनपदों में सुचारु रूप से सम्पन्नकराया जाए. नाबालिग, ई-रिक्शा व अन्य वाहनों का संचालन न कर पाएं, इस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. ई-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन कीकार्रवाई सुचारु रूप से की जाए सीएम योगी ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए बाइकों में से मोडिफाई साइलेंसर व हॉर्न को प्रतिबन्धितकिया जाए. अवैध रूप से बसों का संचालन दुर्घटना का कारण बनता है. गैर-अनुबन्धित बसों का पंजीकरण कर उन्हें निर्धारित रूट प्रदान किया जाए. इससे कनेक्टिविटी बेहतर होगी साथ ही आमजन को भी सुविधा मिलेगी. सीएम योगी ने कहा कि स्कूलों-कॉलेजों में रोड सेफ्टी क्लब की तर्ज परप्रत्येक जनपद में रोड सेफ्टी पार्क बनाए जाएं। रोड सेफ्टी अवेयरनेस कार्यक्रमों से स्कूली बच्चों को जोड़ते हुए यातायात नियम से जुड़े विषयों परनाटक, संगीत, कविता, निबन्ध, संगोष्ठी, भाषण, सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताएं कराई जाएं। परिवहन निगम की बसों के ड्राइवरों की नियमित स्वास्थ्यजांच अनिवार्य रूप से कराई जाए. बसों की फिटनेस का भी ध्यान रखा जाए.

राघोपुर है लालू यादव के परिवार का गढ़, पिछले नौ से सात चुनाव उनके कुनबे के ही रहा नाम

बिहार के लिए ये चुनावी साल है अक्तूबर-नवंबर में राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं. इस चुनावी साल में अमर उजाला बिहार और बिहार कीराजनीति उससे जुड़ी घटनाओं और चेहरों के बारे में अलग-अलग सीरीज शुरू कर रहा है. इसी से जुड़ी ‘सीट का समीकरण’ सीरीज में आज हम आपकोराघोपुर विधानसभा सीट के बारे में बताएंगे. राघोपुर सीट का चुनावी इतिहास कैसा रहा है यहां जीतकर कौन-कौन से चेहरे विधानसभा पहुंचे.बिहार के38 जिलों में से एक वैशाली जिला भी है। इसका मुख्यालय हाजीपुर है. यह जिला जिला 3 अनुमंडलो और 16 ब्लाकों में विभाजित है. जिले में कुलआठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इनमें हाजीपुर, लालगंज, वैशाली, महुआ, राजापाकर, महनार, पातेपुर और राघोपुर विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं. आजादी के बाद जब देश के पहले चुनाव हुए तो लोकसभा के साथ सभी राज्यों की विधानसभा के लिए भी वोट डाले गए. 1951-52 में हुए इनचुनावों में भी बिहार की राघोपुर विधानसभा सीट का अस्तित्व था. 1951 में पहली बार बिहार विधानसभा के चुनाव हुए. तब 276 सीटों वालीविधानसभा में 24 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित थीं इस चुनाव में कुल 1594 उम्मीदवार मैदान में उतरे अमौर विधानसभा सीट पर केवलएक उम्मीदवार उतरा. 18 उम्मीदवारों ने आजमाई थी किस्मतयहां से कांग्रेस के मोहम्मद ताहिर निर्विरोध निर्वाचित हुए वहीं नवादा सह हसुआ सीट पर सबसे ज्यादा 18 उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाई हमारी आजकी सीट राघोपुर सीट की बात करें तो यहां से 1951 के चुनाव में कुल 4 उम्मीदवार मैदान में थे इस चुनाव में कांग्रेस के हरिबंश नारायण सिंह को जीतमिली उन्होंने सोशलिस्ट पार्टी के कृष्ण देव नारायण रॉय को 2,693 वोट से शिकस्त दी थी.1957 के विधानसभा चुनाव में भी एक बार फिर कांग्रेसके हरिबंश नारायण ने निर्दलीय उम्मीदवार हरदेव प्रसाद सिन्हा को हराकर जीत दर्ज की. इस बार उनकी जीत का अंतर बढ़कर 8,259 वोट का हो गयाथा। 1951 की तरह 1957 में भी राघोपुर सीट से चार उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाई थी. 1962 में फिर से बिहार में चुनाव हुए इस बार कांग्रेस कोइस सीट पर हार का सामना करना पड़ा. सोशलिस्ट पार्टी के देवेन्द्र सिन्हा ने यहां से जीत दर्ज की उन्होंने कांग्रेस के हरिबंश नारायण को हराकर उन्हेंहैट्रिक लगाने से रोक दिया. 1962 के चुनाव में राघोपुर नाम से बिहार में दो सीटें थीं। दूसरी सीट से कांग्रेस के राजेंद्र मिश्रा जीते थे.1967 केविधानसभा चुनाव में राघोपुर सीट पर एक बार फिर से हरिबंश नारायण सिंह ने जीत दर्ज की उन्हें ये जीत जनसंघ के उम्मीदवार के तौर पर मिली थीउन्होंने कांग्रेस के आर बी रॉय को हराया था वहीं राघोपुर नाम की दूसरी सीट से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के ए. गोइत जीते थे.1967 का चुनाव बिहारकी राजनीति में बड़े बदलाव लेकर आया था 318 सदस्यों वाली विधानसभा में 128 सीट जीतकर कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी लेकिन बहुमत से दूररह गई. चार दिन बाद बने खुद मुख्यमंत्रीसरकार विपक्षी गठबंधन की बनी महज 13 सीट जीतने वाली जन क्रांति दल के महामाया प्रसाद सिन्हा राज्य के मुख्यमंत्री बने वहीं 68 सीट जीतनेवाली एसएसपी के कर्पूरी ठाकुर उप-मुख्यमंत्री बनाए गए.ये सरकार एक साल भी नहीं चल सकी महज 329 दिन बाद राज्य में एक नई सरकार कागठन हुआ एसएसपी के सतीश प्रसाद सिंह राज्य के मुख्यमंत्री बने यह सरकार महज तीन दिन चली सतीश प्रसाद सरकार के खिलाफ बीपी मंडल नेनेतृत्व में उनके ही विधायकों ने विद्रोह कर दिया. चार दिन बाद मंडल खुद मुख्यमंत्री बन गए मंडल सरकार भी महज 50 दिन ही रह सकी लगातारजारी उठापटक के बीच कांग्रेस के भोला पासवान शास्त्री भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे पर वे भी 99 दिन ही पद पर रह सके. लगातार बदलतीसरकारों के इस दौर में जून 1968 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया. इसके बाद नए सिरे से चुनाव हुए 1969 में नए सिरे से चुनाव हुए. चुनाव नतीजों की बात करने से पहले वापस राघोपुर सीट पर लौटते हैं.1969 में हुए चुनाव में यहां से कांग्रेस के रामवृक्ष राय ने जीत दर्ज की उन्होंनेसंयुक्त सोशलिस्ट पार्टी बाबूलाल शास्त्री को हराया था. वहीं इसी नाम की दूसरी सीट से कांग्रेस के वैद्यनाथ मेहता जीते. राज्य में एक बार फिर किसीभी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला एक बार फिर सरकार पांच साल नहीं चल सकी और 1972 में नए सिरे से चुनाव हुए. इस चुनाव में राघोपुर सीट सेसंयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के बाबू लाल शास्त्री ने जीत दर्ज की बाबू लाल शास्त्री ने भारतीय जन संघ के हरिबंश नारायण सिंह को शिकस्त दी. बाबूलाल शास्त्री को 1969 के चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था वहीं राघोपुर नाम की दूसरी सीट से कांग्रेस के अमरेनिसा मिश्रा जीते.

बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार के वायरल वीडियो पर हंगामा, राबड़ी देवी और तेजस्वी ने मांगा इस्तीफा

बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों—विधान परिषद और विधानसभा में शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के वायरल वीडियो को लेकर जमकरहंगामा हुआ। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्षी विधायक परिसर में विरोध प्रदर्शन करते नजर आए। वहीं, बिहार विधान परिषद केपोर्टिको में भी विपक्ष के एमएलसी ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के नेतृत्व में बवाल किया।राबड़ी देवी का आरोप: “नीतीश कुमार का दिमाग खराब है”विधान परिषद के पोर्टिको में आरजेडी एमएलसी के साथ प्रदर्शन करते हुए राबड़ी देवी ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दिमाग खराब है, तो उन्हें गद्दी छोड़कर अपने बेटे को मुख्यमंत्री बना देना चाहिए। उन्होंने नीतीश कुमार से सदन में आकर माफी मांगने की मांग की। इस दौरान विपक्ष ने”कठपुतली मुख्यमंत्री इस्तीफा दो” के नारे लगाए। राष्ट्रगान अपमान पर हंगामाविधान परिषद की कार्यवाही से पहले ही विपक्षी एमएलसी ने प्रदर्शन करते हुए कहा कि “राष्ट्रगान का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान”। विपक्ष नेनीतीश कुमार पर राष्ट्रगान का अपमान करने का आरोप लगाया और उनके इस्तीफे की मांग की। तेजस्वी यादव का तीखा हमलाविधानसभा में भी विपक्ष ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा कि “हम बिहारीहोने के नाते शर्मिंदा हैं, नीतीश कुमार ने हमारा सिर झुकाया है।” उन्होंने मुख्यमंत्री से 140 करोड़ जनता से माफी मांगने की मांग की और कहा किराष्ट्रगान के अपमान पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। “यदि माफी नहीं मांगेंगे तो गलत संदेश जाएगा”तेजस्वी यादव ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री माफी नहीं मांगते हैं तो यह संदेश जाएगा कि बिहार में कोई भी आकर राष्ट्रगान का अपमान कर सकता है।उन्होंने मुख्यमंत्री से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की और कहा कि नीतीश कुमार को मोबाइल और तकनीक की समझ नहीं है। कार्यवाही स्थगितलगातार हंगामे के चलते विधानसभा और विधान परिषद दोनों की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इस बीच, विधान परिषदमें वित्त रहित शिक्षकों को वेतनमान देने की मांग भी उठाई गई। सरकार का पक्षसंसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष को शांत करने का प्रयास किया, लेकिन भारी हंगामे के कारण कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

मेरठ सौरभ हत्याकांड: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे, दिल पर चाकू के गहरे वार और धड़ से अलग सिर

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हुए चर्चित सौरभ हत्याकांड में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई है, जिसने कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। पोस्टमार्टमके बाद शव को बुधवार शाम पांच बजे इंदिरानगर, ब्रह्मपुरी लाया गया। शव को देखकर स्थानीय लोग हैरान रह गए क्योंकि उसका आकार असामान्यथा। शव की लंबाई कम और चौड़ाई ज्यादा दिख रही थी, क्योंकि पैर धड़ की तरफ मुड़े हुए थे। गर्दन और हाथ भी धड़ से अलग थे। डॉक्टर और फार्मासिस्ट भी रह गए दंगपोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर और चीफ फार्मासिस्ट ने बताया कि सौरभ का दिल बुरी तरह क्षतिग्रस्त था। दिल पर चाकू के तीन गहरे वार थे, जो दिलके अंदर तक पहुंचे थे। डॉक्टरों के मुताबिक, सौरभ के शव की हालत इतनी दर्दनाक थी कि पोस्टमार्टम करने वाला पूरा स्टाफ दंग रह गया। दशकों सेपोस्टमार्टम कर रहे चिकित्सक भी इस निर्मम हत्या को देखकर हैरान थे।गर्दन और हाथ धड़ से अलगपोस्टमार्टम टीम ने बताया कि सौरभ का शव अपने आप में अनोखा था। गर्दन धड़ से पूरी तरह अलग थी और दोनों कलाइयों से हाथ कटे हुए थे। शवको ड्रम में डालकर सीमेंट और पानी से भर दिया गया था, जिससे वह पूरी तरह जम गया था। ड्रम को कटर से काटकर और सीमेंट को तोड़कर शव कोबाहर निकाला गया। इस प्रक्रिया में करीब एक घंटा लग गया। हृदय को पार करते हुए चाकू के गहरे घावपोस्टमार्टम के दौरान पता चला कि हत्यारे ने अत्यधिक क्रूरता के साथ दिल पर वार किए थे। दिल के भीतर तक चाकू धंसा हुआ था, जो यह संकेतदेता है कि वार अत्यधिक बलपूर्वक किए गए थे। शव की हालत देखकर डॉक्टर भी भावुक हो गए और बोले, “बहुत सुंदर लड़का था… आखिर क्योंमार डाला?” नींद का इंजेक्शन गूगल से खोजकर खरीदापुलिस का मानना है कि मुख्य आरोपी मुस्कान ने गूगल पर सर्च कर नींद का इंजेक्शन डॉक्टर के पर्चे पर खुद लिख लिया और फिर बाजार से दवाखरीद ली। पुलिस ने खैरनगर के मेडिकल स्टोर से जुड़े बयान भी दर्ज कर लिए हैं और संबंधित सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। मुर्गा काटने वाले चाकू बाजार से खरीदेजांच में पता चला कि मुस्कान ने शारदा रोड से मुर्गा काटने वाले दो चाकू खरीदे थे। पुलिस ने वहां के दुकानदारों से भी बयान दर्ज किए हैं। इसकेअलावा, घंटाघर से खरीदे गए ड्रम के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस जुटा रही ठोस सबूतएसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिस डॉक्टर से मुस्कान ने डिप्रेशन का बहाना बनाकरदवा लिखवाई थी, उस डॉक्टर ने नींद की गोली लिखने से इनकार किया है। ऐसे में माना जा रहा है कि मुस्कान ने गूगल सर्च के आधार पर पर्चे परखुद ही दवा का नाम लिखा होगा। मेडिकल स्टोर और ड्रम बेचने वालों से पूछताछ जारीपुलिस मेडिकल स्टोर और ड्रम बेचने वाले दुकानदारों से पूछताछ कर रही है। एसपी सिटी ने कहा कि जल्द ही साक्ष्य जुटाकर केस को ट्रायल पर लायाजाएगा। आरोपी मुस्कान के खिलाफ ठोस सबूत एकत्र किए जा रहे हैं ताकि अदालत में मजबूती से पेश किए जा सकें।

बेंगलुरु में आरएसएस अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा बैठक, मोहन भागवत समेत कई प्रमुख नेता मौजूद

बेंगलुरु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा बैठक का आयोजन हुआ, जिसमें संघ प्रमुख मोहन भागवत समेत कईवरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। यह आरएसएस की पांचवीं बैठक थी, जिसमें विभिन्न हिंदू संगठनों और इस्कॉन जैसे प्रमुख धार्मिक समूहों के प्रतिनिधियों नेभी भाग लिया। बैठक में देश को मजबूत बनाने और विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। महान विभूतियों को दी श्रद्धांजलिबैठक की शुरुआत में हाल ही में दिवंगत हुए कई महान हस्तियों को श्रद्धांजलि दी गई। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, प्रसिद्ध तबलावादकज़ाकिर हुसैन, सुप्रसिद्ध गायक श्याम बेनेगल, अर्थशास्त्री बिबेक देवरॉय, केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रधान और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एस. एम. कृष्णाशामिल थे। मणिपुर में शांति प्रयासों का जिक्रआरएसएस के सरकार्यवाह सीआर मुकंदा ने मणिपुर में किए गए शांति प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मणिपुर में स्थिति गंभीर थी औरसरकार के साथ-साथ आरएसएस ने भी शांति स्थापित करने के लिए प्रयास किए। मुकंदा ने कहा कि मणिपुर के घावों को भरने में अभी समय लगेगा, लेकिन संघ लगातार सकारात्मक बदलाव के लिए प्रयासरत है। परिसीमन पर विचारसीआर मुकंदा ने परिसीमन (डिलिमिटेशन) के मुद्दे पर भी अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट कर दिया है कि सीटों केविस्तार का अनुपात वर्तमान स्थिति के आधार पर ही होगा। मुकंदा ने कहा कि इस विषय को लेकर जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह सेराजनीति से प्रेरित लगते हैं। उन्होंने आगाह किया कि आपसी विवाद देशहित में नहीं है। स्थानीय भाषा को सर्वोपरि मानने की बातभाषा विवाद पर सीआर मुकंदा ने कहा कि आरएसएस मातृभाषा को सर्वोपरि मानता है। उन्होंने कहा कि तीन-भाषा नीति को लेकर संघ ने कभी कोईप्रस्ताव पारित नहीं किया है। उनके अनुसार, मातृभाषा के साथ-साथ रोजगार और कामकाज के लिए अन्य भाषाओं का ज्ञान भी आवश्यक है। उन्होंनेनागरिक पहचान और पंजीकरण को लेकर भी जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। स्थानीय भाषा में रुपये का प्रतीकसीआर मुकंदा ने सुझाव दिया कि रुपये के प्रतीक को स्थानीय भाषा में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सामाजिक नेताओं कोचर्चा करनी चाहिए, न कि राजनीतिक दलों को। बैठक का समापन भारतीय संस्कृति और सामाजिक एकता को सुदृढ़ बनाने के संकल्प के साथ हुआ। आरएसएस ने देश को मजबूत बनाने औरसामाजिक एकता को बनाए रखने के अपने प्रयासों को दोहराया।

लोकतंत्र विजय दिवस पर वीरेंद्र सचदेवा ने किया आपातकाल सेनानियों का सम्मान, युवाओं को लोकतंत्र की रक्षा का दिया संदेश

नई दिल्ली: दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने मंगलवार को एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित “लोकतंत्र विजय दिवस” कार्यक्रम मेंआपातकाल के दौरान जेल जाने वाले लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि देशभर से आए आपातकाल बंदियों कासम्मान करना दिल्ली के लिए गर्व का विषय है। कार्यक्रम का आयोजन लोकतंत्र सेनानी संघ द्वारा किया गया था, जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे, संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश सोनी, सत्यनारायण जटिया, ओ. पी. बब्बर, सुभाष आर्या, राजीव बब्बर और राजन ढिगरा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि लोकतंत्रको समझने के लिए उन सेनानियों को जानना आवश्यक है जिन्होंने आपातकाल का विरोध करते हुए अत्याचार और उत्पीड़न का सामना किया। उन्होंनेबताया कि 21 मार्च 1977 को आपातकाल समाप्त हुआ था और इस दिन को लोकतंत्र विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। आपातकाल की क्रूरता को याद कियासचदेवा ने कहा कि 25 जून 1975 को कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र का गला घोंटने का प्रयास किया था। इसके परिणामस्वरूप 19 महीने तक देश नेतानाशाही का सामना किया। आपातकाल के दौरान कई सेनानियों ने यातनाएं सहीं, जेल में समय बिताया और कुछ ने अपने प्राणों की आहुति दी।उन्होंने कहा कि आज का भारतीय लोकतंत्र उन सेनानियों के बलिदान पर खड़ा है। युवाओं को लोकतंत्र का महत्व समझने की अपीलदिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को यह समझना चाहिए कि कांग्रेस शासनकाल में लोकतंत्र को बार-बार कुचला गया।आपातकाल का दौर कांग्रेस सरकार की क्रूरता और तानाशाही का जीता-जागता प्रमाण है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने भारतीय लोकतंत्र को विश्व मंच पर सशक्त रूप से प्रस्तुत किया है। सचदेवाने कहा कि आपातकाल के सेनानियों का सम्मान करके दिल्ली सरकार अपना ही सम्मान बढ़ा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली की सरकारआपातकाल सेनानियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तत्पर है। कार्यक्रम के समापन पर वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों से प्रेरणा लेकर 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के साथआगे बढ़ने की आवश्यकता है।