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महाराष्ट्र: लाडकी बहिन योजना से हिला बजट, अन्य योजनाएं हो रहीं प्रभावित? राजस्व मंत्री ने बताई हकीकत

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने रविवार को स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री मांझी लाडकी बहिन योजना से राज्य की अन्य कल्याणकारीयोजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रत्येक योजना के लिए अलग-अलग बजटीय प्रावधान किए गए हैं। महाराष्ट्र बीजेपीके अध्यक्ष बावनकुले ने कहा, “हमारी सरकार ने हर योजना के लिए अलग से बजट आवंटित किया है, जिसमें लाडकी बहिन योजना के लिए भी अलगसे बजट है।” उन्होंने कहा, “कृषि फसल बीमा योजना के लिए भी अलग से बजट रखा गया है, और कुछ लोग इस योजना को लेकर भ्रम फैलाने कीकोशिश कर रहे हैं।” ‘लाडकी बहिन योजना’ का उद्देश्य और लाभमुख्यमंत्री मांझी लाडकी बहिन योजना महाराष्ट्र सरकार ने चुनाव से पहले शुरू की थी, और महायुति सरकार के सत्ता में आने के बाद इस योजना कोजारी रखा गया। इस योजना के तहत 21 से 65 वर्ष आयु वर्ग की उन महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये की सहायता राशि दी जाती है, जिनकीवार्षिक पारिवारिक आय 2.5 लाख रुपये से कम है। इस योजना में पात्रता की अन्य शर्तें भी हैं, जैसे कि लाभार्थी के पास चार पहिया वाहन नहीं होनाचाहिए और परिवार का कोई सदस्य सरकारी सेवा में नहीं होना चाहिए।लाडकी बहिन योजना के लाभार्थियों की संख्या में कमीजनवरी 2025 में मुख्यमंत्री मांझी लाडकी बहिन योजना के लाभार्थियों की संख्या घटकर 2.41 करोड़ रह गई, जबकि दिसंबर 2024 में यह संख्या2.46 करोड़ थी। इस बदलाव का कारण यह था कि विभिन्न कारणों से पांच लाख महिलाएं अपात्र पाई गईं। महिला एवं बाल विकास मंत्री अदितितटकरे ने कहा कि जुलाई से दिसंबर 2024 के बीच इन महिलाओं के खातों में कुल 450 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे, हालांकि यह राशि वापसनहीं ली गई है और राज्य सरकार का इस राशि को वापस लेने का कोई इरादा नहीं है। अपात्र पाई गई महिलाएंअधिकारियों ने बताया कि जिन पांच लाख महिलाओं को अपात्र माना गया, उनमें से 1.5 लाख महिलाएं 65 वर्ष से अधिक आयु की थीं। वहीं, 1.6 लाख महिलाएं वे थीं जिनके पास चार पहिया वाहन था या जो ‘नमो शेतकरी योजना’ जैसी अन्य सरकारी योजनाओं की लाभार्थी थीं। इसके अलावा, करीब 2.3 लाख महिलाएं संजय गांधी निराधार योजना के तहत लाभ प्राप्त कर रही थीं, जिससे वे ‘लाडकी बहिन योजना’ के लिए अपात्र हो गईं।

केजरीवाल कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के पक्ष में थे, लेकिन कैसे बिगड़ा मामला? संजय राउत ने किया खुलासा

मुंबई: क्या अरविंद केजरीवाल कांग्रेस के साथ मिलकर हरियाणा और दिल्ली का विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे? लेकिन यह पूरा मामला कैसेबिगड़ गया? इसका खुलासा संजय राउत ने सामना में लिखे अपने लेख में किया है। उन्होंने दिल्ली में आदित्य ठाकरे और अरविंद केजरीवाल के बीचहुई बैठक में जो बातचीत हुई उसकी जानकारी सार्वजनिक की है। इसके मुताबिक केजरीवाल ने हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के साथगठबंधन की पूरी कोशिश की लेकिन कांग्रेस की हठधर्मिता के चलते ऐसा संभव नहीं हो पाया। आदित्य ठाकरे ने से बातचीत में अरविंद केजरीवाल ने जो जानकारी दी है वो कांग्रेस की गठबंधन संबंधित नीतियों को एक्सपोज करती है। आदित्यठाकरे के साथ फिरोजशाह रोड स्थित आवास पर केजरीवाल की मुलाकात हुई थी। दिल्ली और हरियाणा को लेकर स्वयं अरविंद केजरीवाल ने जोजानकारी दी है वो कांग्रेस की गठबंधन संबंधित नीतियों को एक्सपोज करती है। आदित्य ठाकरे के साथ फिरोजशाह रोड स्थित आवास पर केजरीवालकी मुलाकात हुई। इस बातचीत में जब केजरीवाल से यह पूछा गया कि ‘‘अगर कांग्रेस के साथ गठबंधन हुआ होता तो बेहतर होता। केजरीवाल नेगठबंधन होने नहीं दिया, ऐसा आक्षेप है।’’ इस पर केजरीवाल ने कहा, ‘‘नहीं, मैं पूरी तरह से कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के पक्ष में था।” राघव चड्ढा ने की थी कांग्रेस नेतृत्व से बातकेजरीवाल ने वजह बताते हुए कहा. ‘‘जब मैं जेल में था तब हरियाणा में चुनाव हुए थे। राघव चड्ढा हरियाणा का काम देख रहे थे। वे मुझसे जेल मेंमिलने आए थे। मैंने उनसे कहा, हमें कांग्रेस के साथ गठबंधन करना ही होगा। आप सीटों का बंटवारा तय करें।’’ केजरीवाल ने आगे कहा, ‘‘कांग्रेस नेहमसे एक सूची मांगी। हमने 14 निर्वाचन क्षेत्रों की सूची दी। राहुल गांधी ने कहा, हम ‘आप’ को छह सीटें देंगे। मैंने राघव से कहा, कोई बात नहीं, छह सीटें ले लो। हम दो कदम पीछे आ गए। राहुल गांधी ने कहा, के. सी. वेणुगोपाल से मिलें। वह फाइनल करेंगे।” कांग्रेस बीजेपी को नहीं, आप को हराना चाहती थीइसके बाद केजरीवाल ने आगे बताया, “राघव चड्ढा ने के. सी. वेणुगोपाल से मुलाकात की। उन्होंने कहा, छह सीटें संभव नहीं हैं। हम चार सीट देंगे।आप हमारे हरियाणा प्रभारी बावरिया से मिलें। चड्ढा मुझसे जेल में मिलने आए। मैंने कहा, ठीक है। चार सीटें ले लो। चड्ढा बावरिया से मिलने गए तबउन्होंने चार का प्रस्ताव भी ठुकरा दिया। वे बोले, हम आपको दो ही सीटें देंगे। मैंने फिर चड्ढा को संदेश भेजा। ठीक है। दो सीटें ले लो। राहुल गांधीबॉस हैं और उनके वचन देने के बावजूद हमें छह सीटें नहीं मिलीं। चार से दो पर आ गए। उन दो सीटों के लिए राघव चड्ढा ने आखिरकार भूपेंद्र हुड्डा सेमुलाकात की। फिर उन्होंने भाजपा के गढ़ वाले इलाके में हमें दो सीटें ऑफर कीं। यह कांग्रेस की ‘गठबंधन’ धर्म की व्याख्या है। हम क्या करेंगे? ऐसाहुआ हरियाणा में। दिल्ली में भी कुछ अलग नहीं हुआ। वे भाजपा को हराना नहीं चाहते थे। वे मोदी विरोधी केजरीवाल को हराना चाहते थे। ये सबकहते वक्त केजरीवाल की व्यथा उनके चेहरे पर साफ झलक रही थी।

दिल्ली: बीजेपी विधायक दल की बैठक कल, चुना जाएगा नए CM का नाम, 18 फरवरी को शपथग्रहण समारोह

दिल्ली में सरकार गठन से जुड़ी इस वक्त की बड़ी खबर है। 17 फरवरी (सोमवार) को दोपहर 3 बजे से दिल्ली भाजपा प्रदेश कार्यालय में बीजेपीविधायक दल की बैठक होगी, जिसमें दिल्ली का नया सीएम चुन लिया जाएगा। 18 फरवरी को शपथग्रहण समारोह होगा। ये जानकारी सूत्रों केहवाले से सामने आई है। हालांकि शपथग्रहण समारोह बहुत बड़ा और भव्य नहीं होगा। दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली है प्रचंड जीतदिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जीत हासिल हुई है और आम आदमी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। दिल्ली में बीजेपी ने 70 में से48 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि AAP को सिर्फ 22 सीटें मिली हैं। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया जैसे दिग्गज चुनाव हारचुके हैं। ऐसे में साफ है कि दिल्ली में अब बीजेपी का सीएम होगा। 27 साल बाद बीजेपी ने दिल्ली में वापसी की है लेकिन अब तक सीएम पद पर किसीनाम को लेकर मुहर नहीं लगी है। ऐसे में पूरे देश की नजरें इस फैसले पर टिकी हुई हैं कि 17 फरवरी को बीजेपी विधायक दल की बैठक में बीजेपीकिसे अपना सीएम घोषित करती है। हालांकि दिल्ली के कुछ नेताओं के नाम सीएम पद की रेस में बने हुए हैं, जिसमें केजरीवाल को नई दिल्ली सीट से हराने वाले प्रवेश वर्मा का नाम भीशामिल है। हालांकि बीजेपी किसके हाथ में सीएम पद की कमान देगी, ये तो वक्त ही तय करेगा। दरअसल बीजेपी पहले भी अपने फैसलों की वजहसे जनता को चौंकाती रही है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में जब सीएम का ऐलान होना था, तो बीजेपी ने ऐसे चेहरों को सीएम बनाया, जिनका सीएमपद की रेस में कहीं नाम नहीं था। ऐसे में अगर बीजेपी दिल्ली में भी वही ट्रिक अपनाती है तो कोई अचरज की बात नहीं होगी। हालांकि अब सियासीगलियारों में भी इस बात को लेकर उत्सुकता है कि बीजेपी किसे दिल्ली का सीएम बनाएगी।

कुंभ का क्या मतलब है? फालतू है कुंभ..रेल मंत्री को जिम्मेदारी लेनी चाहिए’, हादसे पर बिफरे लालू प्रसाद, दिया विवादित बयान

नई दिल्ली: देश के पूर्व रेल मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद ने कुंभ को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने नई दिल्ली रेलवेस्टेशन पर मची भगदड़ की घटना को लेकर जहां दुख जताया वहीं कुंभ को फालतू बता दिया। उन्होंने कहा कुंभ का क्या मतलब है? फालतू है कुंभ। लालू प्रसाद यादव ने भगदड़ की घटना को बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि मैं पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। उन्होंने इस हादसेके लिए पूरी तरह से रेलवे को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि यह रेलवे का कुप्रबंधन है जिसके कारण इतने सारे लोगों की जान चली गई। रेल मंत्रीको जिम्मेदारी लेनी चाहिए। वहीं कुंभ को लेकर उन्होंने कहा-‘कुंभ का क्या मतलब है? फालतू है कुंभ।’ बता दें कि दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार देर रात मची भगदड़ में 14 महिलाओं समेत कुल 18 लोगों की मौत हो गई और 12 से ज्यादा लोगघायल हो गए। मृतकों में प्लेटफार्म संख्या 14 और 15 पर प्रयागराज जाने वाली ट्रेन पर सवार होने के लिए यात्रियों की भीड़ उमड़ पड़ी जिसके बादवहां भगदड़ मच गई। पुलिस उपायुक्त (रेलवे) ने आधिकारिक बयान में बताया कि जब प्रयागराज एक्सप्रेस ट्रेन प्लेटफार्म संख्या 14 पर खड़ी थी तब वहां पहले से हीलोगों की भारी भीड़ थी। अधिकारी ने बताया कि स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस और भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस देरी से चल रही थीं और इन ट्रेन के यात्रीभी प्लेटफार्म नंबर 12, 13 और 14 पर मौजूद थे। उन्होंने कहा, ‘‘रेलवे द्वारा हर घंटे 1,500 सामान्य टिकट बेचे जा रहे थे जिसके कारण स्टेशन परभीड़ बढ़ गई और स्थिति बेकाबू हो गई। प्लेटफार्म संख्या 14 पर और प्लेटफार्म संख्या 16 के निकट ‘एस्केलेटर’ (स्वचालित सीढ़ियों) के पास भगदड़मच गई।’’ यह घटना रात करीब नौ बजकर 55 मिनट पर हुई जिसके तत्काल बाद प्राधिकारियों ने कार्रवाई की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस घटना पर शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन परमची भगदड़ से व्यथित हूं। मेरी संवेदनाएं उन सभी के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजन को खोया है। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करताहूं।’’

नई दिल्ली सरकार के गठन की तैयारी: 19 या 20 फरवरी को शपथ ग्रहण, सीएम पद पर विचार जारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अमेरिकी दौरे को समाप्त कर वतन वापसी कर ली है और अब दिल्ली में नई सरकार गठन के लिए उनके साथ विचार-विमर्श किया जाएगा। इस दौरान संभावित सीएम उम्मीदवारों पर चर्चा की जाएगी, और अंतिम निर्णय जल्द ही लिया जाएगा। खबरों के मुताबिक, दिल्ली में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 19 या 20 फरवरी को आयोजित हो सकता है। इसके बाद भाजपा विधायक दल की बैठक जल्द हीहोगी, जिसमें पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। जल्द होगी विधायक दल की बैठकनई सरकार गठन से पहले भाजपा विधायक दल की बैठक आयोजित की जाएगी। शपथ ग्रहण समारोह के बाद, 20 फरवरी तक नई सरकार का गठनपूरा कर लिया जाएगा। राजौरी गार्डन से जीते भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि दिल्ली के नए मुख्यमंत्री का चुनाव जल्द ही कियाजाएगा। सीएम पद पर कोई होड़ नहीं: अभय वर्मालक्ष्मी नगर सीट से दूसरी बार विधायक बने अभय वर्मा ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पद के लिए कोई होड़ नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी मेंविधायकों की बैठक में मुख्यमंत्री और विधायक दल के नेता का चुनाव किया जाता है।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पूर्वांचल सेविधायक वर्मा को भी मुख्यमंत्री पद के लिए एक संभावित उम्मीदवार के तौर पर चर्चा में रखा जा रहा है। मुख्यमंत्री पद के लिए चर्चा में ये नामदिल्ली के मुख्यमंत्री पद के लिए जिन चेहरों पर प्रमुखता से विचार हो रहा है, उनमें प्रवेश वर्मा और विजेंद्र गुप्ता शामिल हैं। इसके अलावा, चर्चा हैकि दिल्ली में पहली बार चुनाव जीतने वाले कुछ चेहरों पर भी विचार हो सकता है। इस सूची में शालीमार बाग से विधायक रेखा गुप्ता, ग्रेटर कैलाशसे विधायक शिखा राय, मुस्तफाबाद से विधायक मोहन सिंह बिष्ट, मालवीय नगर से विधायक सतीश उपाध्याय, जनकपुरी से विधायक आशीष सूद, और उत्तम नगर से जीते पवन शर्मा के नाम भी शामिल हैं। सीएम चुनाव 48 विधायकों के बीच होगा: बिष्टछठी बार विधायक बने मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि दिल्ली के नए मुख्यमंत्री का चुनाव भाजपा के 48 विधायकों के बीच ही किया जाएगा। उन्होंनेमुस्तफाबाद के अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र का नाम बदलकर शिव विहार या शिव पुरी करने का अपना प्रस्ताव भी दोहराया। बिष्ट ने कहा कि इस क्षेत्र मेंलगभग 42 प्रतिशत अल्पसंख्यक समुदाय के लोग हैं, जबकि 58 प्रतिशत लोग हिंदू हैं, इसलिए जनता की भावना का सम्मान किया जाना चाहिए।

आशीष शेलार का बड़ा दावा, कई नेता बीजेपी और शिंदे के संपर्क में, उद्धव ठाकरे को हाथ मलते रह जाएंगे

मुंबई: महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) में बड़ी फूट पड़ने की संभावना जताई जा रही है। महाराष्ट्र सरकार में सूचना प्रौद्योगिकी औरसंस्कृति मंत्री आशीष शेलार ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे की पार्टी के कई नेता उनके संपर्क में हैं। उन्होंने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेनाद्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन टाइगर को सही ठहराया और कहा कि इसमें गलत क्या है? आशीष शेलार ने कहा, “उद्धव ठाकरे के कई नेता एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं।” उन्होंने आदित्य ठाकरे को लेकर भी बयान दिया और कहा, “आदित्यठाकरे अब मुंबई के नेता नहीं बन सकते, मुंबई अब उनके हाथ से निकल चुकी है।” उद्धव ठाकरे के लोग रोज पार्टी छोड़ रहे हैंआशीष शेलार ने एकनाथ शिंदे की सेना के ऑपरेशन टाइगर के बारे में कहा कि इसमें कोई गलत बात नहीं है। शिंदे अपने दल को मजबूत करनाचाहते हैं, इसका स्वागत किया जाना चाहिए। वहीं, उद्धव ठाकरे को अपनी पार्टी में सामंजस्य बनाए रखने की सलाह दी और कहा कि कांग्रेस पार्टी केअंदर भी आपसी सामंजस्य नहीं है, जबकि उद्धव ठाकरे के कई लोग रोज पार्टी छोड़ कर जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शरद पवार एकनाथ शिंदेका स्वागत कर रहे हैं, तो फिर उद्धव ठाकरे को क्यों परेशानी हो रही है। मुंबई अब उनके हाथ से जा रही हैआशीष शेलार ने आगे कहा कि आदित्य ठाकरे अगर मुंबई के नेता बन भी जाते हैं, तो मुंबई अब उनके हाथ से जा रही है। यह सवाल उठने लगा है किक्या मुंबई अब बच पाएगी? एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे को चेतावनी दी है कि उन्हें हल्के में न लिया जाए, और शेलार का मानना है कि यह संदेशमातोश्री (उद्धव ठाकरे का निवास) की तरफ था। रणबीर इलाहाबादिया पर हो रही कार्रवाईआशीष शेलार से जब यूट्यूबर रणबीर इलाहाबादिया के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार इस मामले में सख्त कदम उठा रही है।शेलार ने बताया कि रणबीर इलाहाबादिया और उनके साथ जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और जांचजारी है। इसके अलावा, शेलार ने मराठी थिएटर में हो रहे कार्यक्रमों पर भी सख्त रुख अपनाया, खासकर ‘कांदे पोहे’ जैसे कार्यक्रमों के खिलाफ, जोबिना सेंसर की अनुमति के चलाए जा रहे थे। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के खिलाफ भी कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं, क्योंकि इनमें अश्लीलता के तत्व पाए जा रहे हैं और थिएटर में टिकटबेचकर ये कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने काशी विश्वनाथ मंदिर में की पूजा, लिया भगवान का आशीर्वाद

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान शिव की पूजा अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्तकिया। इस दौरान उनके साथ अन्य नेताओं की भी उपस्थिति रही। इससे पहले, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी ने लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशवप्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के साथ मिलकर 114 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इस अवसर पर तीनों नेताओं ने उपस्थित लोगोंको संबोधित भी किया। सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा, “हमें हर 6 साल में कुंभ और हर 12 साल में महाकुंभ का आयोजन करने का अवसर मिलता है, और इन आयोजनों से राज्य के पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलता है। महाकुंभ की वजह से यूपी की अर्थव्यवस्था को करीब 3 लाख करोड़ रुपये काफायदा हुआ है।” कुंभ आयोजन पर खर्च और उससे लाभसीएम योगी ने कुंभ के आयोजन पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि जो लोग 5000-6000 करोड़ रुपये खर्च होने पर सवाल उठाते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि यह राशि केवल कुंभ आयोजन पर नहीं, बल्कि प्रयागराज शहर के जीर्णोद्धार पर भी खर्च की गई है। उन्होंने बताया किकुंभ आयोजन पर कुल 1500 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, लेकिन इसके परिणामस्वरूप यूपी की अर्थव्यवस्था को 3 लाख करोड़ रुपये का लाभ हुआ है, जो कि बेहद उपयुक्त और सही खर्च है। महाकुंभ का अर्थव्यवस्था पर असरउन्होंने आगे कहा, “जब 50-55 करोड़ लोग महाकुंभ में शामिल होते हैं, तो इससे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को कितना फायदा होगा, इसकाअनुमान लगाना मुश्किल नहीं है। महाकुंभ के कारण हमारी राज्य की अर्थव्यवस्था में 3 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है।” सीएम ने यह भी बताया कि प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन हो रहा है और हर साल ‘माघ मेला’ और कुंभ के दौरान उत्तर प्रदेश को पट्टे पर जमीनमिलती है। उन्होंने बताया कि डबल इंजन सरकार के सत्ता में आने के बाद सभी श्रद्धालु उन जगहों पर जा पाए हैं, जहां वे पहले नहीं जा पाते थे। प्रयागराज की जीडीपी वृद्धि में योगदानकेंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस अवसर पर कहा कि महाकुंभ के दौरान प्रयागराज ने अकेले 3 लाख करोड़ रुपये की जीडीपी वृद्धि में मदद की। उन्होंनेयह भी कहा कि पर्यटन एक ऐसा क्षेत्र है, जहां 49 प्रतिशत पूंजी निवेश रोजगार उत्पन्न करने में खर्च होता है, और इस क्षेत्र से टैक्सी चालकों, रिक्शाचालकों और अन्य व्यवसायों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। लखनऊ के विकास में योगदानरक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखते हुए कहा, “लखनऊ में जो भी विकास आप देख रहे हैं, वहपूरी तरह से हमारे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के योगदान के कारण संभव हुआ है।”

कांग्रेस संगठन में बड़ा फेरबदल, कई राज्यों के प्रभारी बदले गए, भूपेश बघेल को मिली नई जिम्मेदारी

कांग्रेस पार्टी ने हाल ही में लगातार हो रहे चुनावी नतीजों से उत्पन्न निराशा के बाद अपने संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी ने शुक्रवार को यहबदलाव करते हुए कई अहम नेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राज्यसभा सांसद सैयद नासिर हुसैनको पार्टी का महासचिव बनाया गया है। भूपेश बघेल को पंजाब का महासचिव नियुक्त किया गया है, वहीं सैयद नासिर हुसैन को जम्मू-कश्मीर औरलद्दाख का महासचिव बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, 9 अन्य नेताओं को विभिन्न राज्यों का प्रभारी नियुक्त किया गया है। आइए जानते हैं कि कांग्रेस ने किन नेताओं को क्या जिम्मेदारीसौंपी है। कांग्रेस ने जारी किया नोटिसकांग्रेस पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल द्वारा जारी किए गए एक नोटिस के मुताबिक, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इननियुक्तियों का ऐलान किया है। इसके तहत भूपेश बघेल और सैयद नासिर हुसैन को महासचिव के पद पर नियुक्त किया गया है, जबकि रजनीपाटिल, बीके हरिप्रसाद, मीनाक्षी नटराजन समेत 9 अन्य नेताओं को विभिन्न प्रदेशों का प्रभारी नियुक्त किया गया है। नियुक्त हुए नेताओं और उनके नए प्रभार:-रजनी पाटिल – हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़-बी.के. हरिप्रसाद – हरियाणा-हरीश चौधरी – मध्यप्रदेश-गिरीश चोड़नकर – तमिलनाडु और पुडुचेरी-अजय कुमार लल्लू – ओडिशा-के. राजू – झारखंड-मीनाक्षी नटराजन – तेलंगाना-सप्तगिरि संकर उलाका – मणिपुर, त्रिपुरा, सिक्किम और नागालैंड-कृष्ण अल्लावरु – बिहार–जिन्हें दायित्व से मुक्त किया गया:कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने न केवल नई नियुक्तियां कीं, बल्कि कुछ नेताओं को उनके पुराने दायित्व से मुक्त भी किया। नोटिस के अनुसार, राजीव शुक्ला, मोहन प्रकाश, देवेंद्र यादव, अजय कुमार, दीपक बाबरिया और भारत सिंह सोलंकी को प्रदेश प्रभारी के पद से हटा दिया गया। ये नेतानिम्नलिखित प्रदेशों के प्रभारी थे: -राजीव शुक्ला – हिमाचल प्रदेश-मोहन प्रकाश – बिहार-देवेंद्र यादव – पंजाब-अजय कुमार – ओडिशा-दीपक बाबरिया – हरियाणा-भारत सिंह सोलंकी – जम्मू-कश्मीर

वरिष्ठ पत्रकार अनिल पांडेय को ग्लोबल एक्सीलेंस अवार्ड-2025 से सम्मानित किया गया

वरिष्ठ पत्रकार अनिल पांडेय को पत्रकारिता में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए, मारवाह स्टूडियोज के संस्थापक संदीप मारवाह के द्वारा ग्लोबलएक्सीलेंस अवार्ड-2025 से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें 13वें ग्लोबल फेस्टिवल ऑफ जर्नलिज्म के कार्यक्रम में प्रदान किया गया, जोइंटरनेशनल जर्नलिज्म सेंटर (JC) और इंटरनेशनल चेंबर ऑफ मीडिया एंड एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (ICMEI) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। समकालीन पत्रकारिता में अनिल पांडेय का अद्वितीय योगदानअनिल पांडेय समकालीन पत्रकारिता के उन चंद पत्रकारों में से हैं जिनका प्रिंट, टेलीविजन, रिपोर्टिंग, संपादन और पत्रकारिता शिक्षा के क्षेत्र में व्यापकअनुभव है। पांडेय ने हिंदी पत्रकारिता को नई दिशा देने वाले अखबार ‘जनसत्ता’ से अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने माखनलालचतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद पांडेय ‘स्टार न्यूज’ और ‘द संडेइंडियन’ जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में कार्यकारी संपादक के रूप में काम कर चुके हैं। बाल अधिकारों के लिए काम करते हुए पत्रकारिता में योगदानइसके अलावा, अनिल पांडेय ने ‘कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन’ के संपादक के रूप में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वे वर्तमान में ‘इंडिया फॉरचिल्ड्रेन’ नामक संस्था के डायरेक्टर के रूप में बाल अधिकारों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं।13वें ग्लोबल फेस्टिवल ऑफ जर्नलिज्ममें पांडेय के पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान को सम्मानित किया गया और उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया गया।

पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की बढ़ी मुश्किलें, शीशमहल के रिनोवेशन की होगी जांच CVC ने दिया आदेश

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के 6 फ्लैग स्टाफ रोड स्थित बंगले के रिनोवेशन मामले में अब जांच शुरू हो गई है। सेंट्रल विजिलेंसकमीशन (CVC) ने 13 फरवरी को जांच के आदेश जारी किए हैं, जो कि केंद्रीय सार्वजनिक कार्य विभाग (CPWD) की रिपोर्ट के आधार पर दिएगए। रिपोर्ट में बताया गया कि 40,000 वर्ग गज (8 एकड़) में बने इस बंगले के निर्माण में कई नियमों का उल्लंघन हुआ है। भाजपा ने 45 करोड़ के खर्च का आरोप लगायादिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने केजरीवाल पर आरोप लगाया था कि बंगले के रिनोवेशन में 45 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए।भाजपा ने इस बंगले को ‘शीशमहल’ का नाम दिया था। इसके साथ ही भाजपा ने यह भी कहा कि यह बंगला सरकारी संपत्तियों को गलत तरीके सेमिलाकर बनाया गया था और इसे रद्द किया जाना चाहिए। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने उप-राज्यपाल वीके सक्सेना से इस मामले कीशिकायत की थी। बीजेपी ने जारी किया था वीडियो, कहा– ‘7 स्टार रिसॉर्ट‘ बना डाला9 दिसंबर 2024 को भाजपा ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें दिल्ली के मुख्यमंत्री आवास के आलीशान इंटीरियर्स को दिखाया गया था। भाजपाने इस पर तंज कसते हुए कहा कि “केजरीवाल कहते थे कि सरकारी घर नहीं लूंगा, लेकिन उन्होंने 7 स्टार रिसॉर्ट बना डाला।” कांग्रेस के आरोपों का असर, CBI ने शुरू की जांचमई 2023 में ‘शीशमहल’ मामला सामने आया, जब दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सीबीआई को चिट्ठी लिखकर इस मामले की जांच काआदेश दिया। सीबीआई ने सितंबर 2023 में रिपोर्ट दर्ज की, जिसमें आरोप लगाया गया कि केजरीवाल ने कोविड काल के दौरान मुख्यमंत्री आवासके रिनोवेशन में लगभग 45 करोड़ रुपये खर्च किए। इस रकम का भुगतान सरकारी खजाने से किया गया। इंटीरियर्स और डेकोरेशन पर खर्च किए गए 11.30 करोड़ रुपयेसीबीआई द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा गया कि इस रिनोवेशन पर कुल 44.78 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिनमें से 11.30 करोड़ रुपये केवल इंटीरियर्सऔर डेकोरेशन पर खर्च किए गए। यह पैसा सितंबर 2020 से जून 2022 के बीच 6 किस्तों में जारी किया गया था। अब बंगले में आतिशी रह रही हैं, केजरीवाल ने छोड़ा सरकारी आवासफिलहाल, 6 फ्लैग स्टाफ रोड स्थित इस बंगले में दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी रह रही हैं। केजरीवाल ने 4 अक्टूबर 2024 को मुख्यमंत्री पद सेइस्तीफा देने के बाद यह बंगला छोड़ दिया था और अब वे 5, फिरोजशाह रोड स्थित AAP के राज्यसभा सांसद अशोक कुमार मित्तल के सरकारीआवास में रह रहे हैं। केजरीवाल का रहन–सहन: पहले गाजियाबाद, फिर तिलक लेन और बाद में फ्लैग स्टाफ रोडदिल्ली के मुख्यमंत्री बनने से पहले, केजरीवाल गाजियाबाद के कौशांबी इलाके में रहते थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद, उन्होंने मध्य दिल्ली के तिलकलेन स्थित एक घर में निवास किया। फिर 2015 में आम आदमी पार्टी को बहुमत मिलने पर वे 6, फ्लैग स्टाफ रोड स्थित इस बंगले में रहने चले गए।