उत्तर प्रदेश भाजपा को मिला नया नेतृत्व का संकेत, पंकज चौधरी का प्रदेश अध्यक्ष बनना लगभग तय

उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जल्द ही नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने वाला है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और महाराजगंज से सात बार केसांसद पंकज चौधरी ने शनिवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। इस दौरान मुख्यमंत्रीयोगी आदित्यनाथ उनके प्रस्तावक बने, जबकि दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। केंद्रीय वित्तराज्य मंत्री पंकज चौधरी को लेकर सियासी गलियारे में हलचल तेज हो गई है। पार्टी इनको प्रदेश में बड़ी जिम्मेदारी दे रही है। पार्टी को पिछडे़ समाजमें इनकी मजबूत पकड़ होने का फायदा मिल सकता है। परंपरागत मत सहेजने के साथ पीडीए कमजोर करने का दांव पार्टी ने खेला है। अब तक गुणगणित के मुताबिक भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनना लगभग तय है। 20 नवंबर 1964 में जन्मे पंकज चौधरीगोरखपुर के घंटाघर हरबंश गली स्थित घर में 20 नवंबर 1964 में जन्मे पंकज चौधरी ने एमपी इंटर कॉलेज और गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातकतक की शिक्षा ग्रहण किया। औद्योगिक घराने में जन्मे पंकज चौधरी ने राजनीति में कदम रखा और नगर निगम गोरखपुर में पार्षद बने और डिप्टी मेयरबने। राजनीति के इस सफर में महराजगंज के जिला पंचायत में वह अजेय खिलाड़ी के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल रहे हैं। बताते चले किमहाराजगंज जिला पंचायत के अस्तित्व में आते ही पंकज चौधरी के बड़े भाई उद्योगपति स्वर्गीय प्रदीप चौधरी प्रथम जिला पंचायत अध्यक्ष बने उसकेबाद दो बार लगातार पंकज चौधरी की माता उज्ज्वल चौधरी जिला पंचायत की अध्यक्ष बनी। पंकज चौधरी ने हाथ रखाइसके बाद जिस व्यक्ति के सिर पर पंकज चौधरी ने हाथ रखा वह जिला पंचायत का अध्यक्ष बना। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनावो में पंकज चौधरीके समक्ष तमाम बाधाएं आईं, विपक्ष में रहते हुए पंकज चौधरी ने जिला पंचायत पर अपना कब्जा बरकरार रखा। पंकज चौधरी ने अपने राजनीतिकजीवन की शुरुआत 1989 में गोरखपुर नगर निगम में पार्षद का चुनाव लड़ने के साथ की थी। वो पार्षद के चुनाव में जीते थे। 1989 में ही गोरखपुर सेकटकर महाराजगंज अलग जिला बना, जिसके बाद से पंकज चौधरी ने महराजगंज को अपनी राजनीति का केंद्र बनाया।
असम की राजनीति में बड़ा बदलाव,कांग्रेस के साथ बढ़ती नई ताकत – जितेंद्र सिंह अलवर और गौरव गोगोई

सरिता साहनी12 दिसंबर 2025 ,नई दिल्ली असम में कांग्रेस को मिली बड़ी राजनीतिक बढ़तअसम में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल लगातार तेज़ी से बदल रहा है। इस बदलाव का सबसे बड़ा संकेत है कि राज्य के चारप्रभावशाली और वरिष्ठ नेता बुबुल दास, अशोक कुमार, गौतम धनोवर और लोंगकी तोकबी अब कांग्रेस पार्टी के साथ जुड़ गए हैं। यह कदम न सिर्फकांग्रेस की ताकत बढ़ाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि राज्य में लोगों का भरोसा किस दिशा में जा रहा है। इस कार्यक्रम में कांग्रेस संगठनमहासचिव के.सी. वेणुगोपाल, असम प्रभारी जितेंद्र सिंह अलवर और प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई मौजूद थे, जिनकी उपस्थिति ने इस सदस्यताकार्यक्रम को और अधिक महत्त्वपूर्ण बना दिया। वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने से कांग्रेस में नई ऊर्जाकांग्रेस में शामिल होने वाले ये नेता अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हैं। बुबुल दास तीन बार विधायक और पूर्व मंत्री रहे हैं, जोउन्हें असम की राजनीति का बड़ा चेहरा बनाते हैं। अशोक कुमार असम गण परिषद के पुराने और अनुभवी नेता हैं। गौतम धनोवर चाय बागान इलाकोंमें काफी प्रभाव रखते हैं, जबकि लोंगकी तोकबी आदिवासी क्षेत्रों की मजबूत आवाज़ माने जाते हैं। इन नेताओं के आने से कांग्रेस को सामाजिक, राजनीतिक और क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत आधार मिला है, जो चुनावी दौर में बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा। असम में कांग्रेस के पक्ष में तेज़ हवा चल रही है-जितेंद्र सिंह अलवरपत्रकारों से बातचीत के दौरान असम प्रभारी जितेंद्र सिंह अलवर ने स्पष्ट कहा कि राज्य में जनता अब भाजपा सरकार से परेशान हो चुकी है। उन्होंनेबताया कि हर जिले में हजारों की संख्या में लोग कांग्रेस से जुड़ रहे हैं। अलवर ने असम की मौजूदा भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहाकि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और उनकी टीम राज्य में माफियाराज चला रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जमीनों पर अवैध कब्जे बढ़ते जा रहे हैं।खासकर छठी अनुसूची वाले क्षेत्रों में जमीनें हड़पना एक बड़ी समस्या बन चुकी है, जिससे असम की संस्कृति, परंपरा और पहचान को नुकसान हो रहाहै। अलवर के अनुसार, यही वजह है कि कई बड़े नेता भाजपा छोड़कर कांग्रेस की ओर आ रहे हैं। गौरव गोगोई ने दिखाया असम में कांग्रेस का बढ़ता जनाधारअसम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने नेताओं का स्वागत करते हुए कहा कि असम में कांग्रेस का जनाधार लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि 10 सितंबर से लेकर अब तक हर महीने की 10 तारीख को दूसरी पार्टियों के दिग्गज नेता कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 10 नवंबरको 11,000 लोग कांग्रेस से जुड़े, जो इस बात का प्रमाण है कि असम के लोग बदलाव चाहते हैं। गोगोई ने इसे कांग्रेस के लिए एक नई ऊर्जा औरनई उम्मीद बताया। बेरोजगारी और आर्थिक संकट को लेकर कांग्रेस का आरोपगौरव गोगोई ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि असम में बेरोजगारी आज सबसे गंभीर समस्या बन चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्यकी अर्थव्यवस्था केवल मुख्यमंत्री के करीबियों पर निर्भर हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि चाय उद्योग जैसी असम की पहचान बनी परंपराएंलगातार कमजोर हो रही हैं। उनका कहना था कि भाजपा के नेता ही चाय बागानों के मालिक बनते जा रहे हैं, जबकि मेहनतकश मजदूर बदहाली में जीरहे हैं। गोगोई के मुताबिक, कांग्रेस इस स्थिति को बदलने के लिए उद्योगों को बढ़ावा देगी, युवाओं को रोजगार देगी और नफरत की राजनीति कोसमाप्त करेगी। आदिवासी जमीनों पर कब्ज़े का बढ़ता खतरागोगोई ने एक और गंभीर मुद्दे को उठाते हुए कहा कि असम में आदिवासियों की 13,000 एकड़ जमीन बड़े उद्योगपतियों को दी गई है। इससे स्थानीयआदिवासी परिवारों के सामने घर-बार खोने का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ जमीन का सवाल नहीं, बल्कि असम की आदिवासीपहचान और सांस्कृतिक विरासत का मुद्दा है। कांग्रेस ने इसे असम के इतिहास में सबसे बड़ा अन्याय बताते हुए इस लड़ाई को आगे ले जाने का संकल्पजताया। कार्यक्रम में कई बड़े नेताओं की मौजूदगीइस अवसर पर सांसद प्रद्युत बोरदोलोई, सांसद रकीबुल हुसैन, राष्ट्रीय सचिव पृथ्वीराज साठे, मनोज चौहान और यूपीपीएल दल के नेता बीरखंग बोरोसमेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गणेश कुटुम के पुत्र शंकर ज्योति कुटुम, गुवाहाटी हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता शाह नवाजऔर कुलदीप राजबोंगशी की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को और ज्यादा महत्व दिया। असम में बदलाव की हवा तेज़इन चार बड़े नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने से यह साफ संकेत मिलता है कि असम में राजनीतिक माहौल बदल रहा है। लोग भाजपा सरकार कीनीतियों से निराश हैं और कांग्रेस को नया विकल्प मान रहे हैं।कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह असम में रोजगार, उद्योग, शांति और सम्मान की राजनीति को प्राथमिकता देगी। आने वाले चुनावों में यह माहौलकिस दिशा में जाएगा, यह देखने वाली बात होगी, लेकिन इतना निश्चित है कि बदलाव की हवा अब पहले से कहीं तेज चल रही है।
दिल्ली में शिक्षा सुधार की नई शुरुआत शिक्षा मंत्री आशीष सूद की ऐतिहासिक घोषणा

सरिता साहनी12 दिसंबर 2025 ,नई दिल्ली दिल्ली सरकार के माननीय शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने आज एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने बताया कि दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारणएवं विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम–2025 और इसके नियम अब पूरी तरह लागू हो चुके हैं। यह कानून दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ाबदलाव लाने वाला है। इसे लागू होते ही फीस से जुड़ी कई पुरानी समस्याओं का हल शुरू हो गया है। लंबे समय से रुका हुआ सुधार अब पूरा हुआसूद ने कहा कि यह मुद्दा पिछले 27 वर्षों से लगातार उठता रहा, लेकिन किसी सरकार ने इसे गंभीरता से हल नहीं किया। निजी स्कूलों द्वारा लगातारमनमानी फीस बढ़ोतरी अभिभावकों की बड़ी चिंता रही, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार ने बहुत कम समयमें एक मजबूत और स्पष्ट कानून बनाकर यह ऐतिहासिक सुधार पूरा किया है। यह कानून अब दिल्ली के शिक्षा क्षेत्र में सुशासन, पारदर्शिता और दक्षप्रशासन का नया मानक स्थापित करेगा। शिक्षा मंत्री का संदेश शिक्षा अधिकार है, व्यवसाय नहींसूद ने स्पष्ट कहा कि बच्चों की शिक्षा किसी भी रूप में व्यापार नहीं बननी चाहिए। शिक्षा सरकार की जिम्मेदारी है और हर बच्चे का मौलिकअधिकार। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार हर छात्र को ईमानदारी, पारदर्शिता और समानता के आधार पर उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्धकराने के लिए पूरी तरह समर्पित है। नया कानून इस दिशा में एक बड़ा कदम है जो यह सुनिश्चित करेगा कि फीस तय करने की पूरी प्रक्रिया खुली औरनिष्पक्ष रहे। अभिभावकों के सहयोग से कानून और भी मजबूत होगासूद ने अभिभावकों से विशेष अपील की कि वे इस कानून का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि अभिभावकों की जागरूकता और भागीदारी से ही इस सुधारको मजबूती मिलेगी। सरकार ने आवश्यक ढांचा तैयार कर दिया है, लेकिन पारदर्शिता तभी स्थापित होगी जब अभिभावक भी शिक्षा विभाग के साथमिलकर काम करेंगे और किसी भी अनियमितता की सूचना समय पर देंगे। यह कानून अभिभावकों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है, इसलिए उनका सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।कानून से फीस प्रक्रिया अब पूरी तरह पारदर्शी होगीशिक्षा मंत्री ने बताया कि नए अधिनियम और नियमों का उद्देश्य फीस से जुड़ी हर प्रक्रिया को साफ-सुथरा और पारदर्शी बनाना है। अब स्कूलों कोअपनी फीस बढ़ोतरी या नए शुल्क प्रस्तावों को पूरी प्रक्रिया के साथ प्रस्तुत करना पड़ेगा। स्कूलों को यह भी बताना होगा कि फीस क्यों बढ़ानी है, कितना खर्च होता है, फंड कहाँ उपयोग होता है और किस आवश्यकता के कारण बदलाव जरूरी है। इससे अभिभावकों को सही जानकारी मिलेगी औरस्कूलों को मनमानी करने का अवसर नहीं मिलेगा। फीस बढ़ोतरी से पहले पूरी कानूनी प्रक्रिया अनिवार्यइस अधिनियम के तहत कोई भी निजी स्कूल अचानक फीस नहीं बढ़ा सकेगा। अगर स्कूल फीस बढ़ाना चाहता है तो उसे लंबी प्रक्रिया से गुजरनाहोगा, विभाग को दस्तावेज देने होंगे और सरकार से पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि हर फीस संशोधनसोच–समझकर, नियमों के अनुसार और पूरी पारदर्शिता के साथ हो। अभिभावकों के हितों की सुरक्षा के लिए मजबूत व्यवस्थानए कानून में कई ऐसे प्रावधान जोड़े गए हैं जो अभिभावकों को सुरक्षित और विश्वसनीय व्यवस्था प्रदान करते हैं। अब अभिभावकों को फीस से जुड़ीसभी गतिविधियों की जानकारी मिलेगी। अगर किसी अभिभावक को किसी स्कूल की फीस में गड़बड़ी लगे तो वे सीधे शिक्षा विभाग से शिकायत करसकते हैं और विभाग को कार्रवाई करना ही होगा। इस व्यवस्था से अभिभावकों का आत्मविश्वास और बढ़ेगा और स्कूलों को भी हर कदम सोचकरउठाना होगा। शिक्षा व्यवस्था को जवाबदेह और अभिभावक–हितैषी बनाने का संकल्पसूद ने कहा कि दिल्ली सरकार शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के अपने वादे पर कायम है। वर्षों से अभिभावक निजीस्कूलों की फीस को लेकर परेशान थे और उन्हें किसी ठोस समाधान की उम्मीद नहीं मिल रही थी। अब इस अधिनियम के लागू होने से फीस नियंत्रणसंभव होगा और स्कूलों को अपनी प्रक्रियाएँ खुले तरीके से रखनी होंगी। सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी अनियमितता या मनमानी परतत्काल सख्त कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में विश्वास और पारदर्शिता का नया अध्याययह अधिनियम सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि दिल्ली के लाखों अभिभावकों और बच्चों के अधिकारों की रक्षा का मजबूत साधन है। इससे शिक्षाव्यवस्था में लंबी अवधि तक पारदर्शिता और विश्वास कायम रहेगा। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि दिल्ली के सभी निजी स्कूल नियमों का कड़ाई सेपालन करें ताकि शिक्षा क्षेत्र में न्याय और समानता बनी रहे। परिवर्तन का यह कदम आने वाले वर्षों में शिक्षा को नई दिशा देगाअंत में शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि यह अधिनियम दिल्ली की शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देने वाला सुधार है। यह कानून अभिभावकों औरछात्रों के हितों की सुरक्षा करेगा और स्कूलों को जिम्मेदारी से काम करने के लिए मजबूर करेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग पूरी तत्परता के साथइस कानून को जमीन पर लागू करेगा ताकि हर परिवार को इसका लाभ मिले और दिल्ली में शिक्षा का स्तर और भी मजबूत व पारदर्शी बने।
14 दिसम्बर की महारैली को लेकर तैयारियों में जोर – देवेन्द्र यादव का बयान

सरिता साहनी12 दिसंबर 2025 ,नई दिल्लीदिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने आज प्रदेश कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें लोकसभा, जिला और विधानसभास्तर के ऑब्जर्वर शामिल हुए। इस बैठक का उद्देश्य 14 दिसम्बर को रामलीला मैदान में होने वाली वोट चोर गद्दी छोड़ महारैली की तैयारियों कोअंतिम रूप देना था। बैठक के दौरान देवेन्द्र यादव ने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता तो हर बूथ से रैली में शामिल होंगे ही, इसके अलावा दिल्ली कीजागरूक आम जनता भी ब्लॉक और जिला कांग्रेस कमेटियों से संपर्क कर भारी संख्या में रैली में पहुँचने की इच्छा जता रही है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और दिल्ली की जनता में दिख रहा अभूतपूर्व उत्साहदेवेन्द्र यादव ने कहा कि इस बार रैली को लेकर केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं में ही नहीं, बल्कि दिल्ली की आम जनता में भी असाधारण उत्साह दिखाईदे रहा है। लोग स्वयं ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों और जिला कांग्रेस कमेटियों से संपर्क कर रहे हैं और यह विश्वास दिला रहे हैं कि वे रैली का हिस्सा बनेंगे।उन्होंने बताया कि हर बूथ से कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं और यह रैली एक जन आंदोलन का रूपलेती जा रही है। रैली राजनीतिक नहीं, संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का बड़े स्तर का अभियानदेवेन्द्र यादव ने जोर देते हुए कहा कि 14 दिसम्बर की रामलीला मैदान की महारैली किसी राजनीतिक सत्ता या पार्टी की प्रतिस्पर्धा का कार्यक्रम नहींहै। यह रैली देश के नागरिकों के मतदान के संवैधानिक अधिकार की रक्षा के लिए होगी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार चुनाव आयोग के साथमिलकर वोट चोरी कर लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर कर रही है। कांग्रेस पार्टी इस अन्याय के खिलाफ लड़ रही है और राहुल गांधी ने इस पूरे मामलेको देश के सामने लाकर बड़ी जिम्मेदारी निभाई है। उनके अनुसार, लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब हर नागरिक निडर होकर अपने मताधिकार काउपयोग कर सके, और यही उद्देश्य लेकर यह रैली आयोजित की जा रही है। रामलीला मैदान की महारैली को ऐतिहासिक बनाने की पूरी तैयारीबैठक में बताया गया कि रैली को लेकर कांग्रेस ने लगभग एक महीना पहले से ही तैयारी शुरू कर दी थी। इसके लिए एक कंट्रोल रूम बनाया गया थाजहाँ से हर वार्ड की टीमों को लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। कंट्रोल रूम से कार्यकर्ता हर क्षेत्र में 70-70 नामों की सूची पर कॉलिंग कर रहे हैं, लोगों से बातचीत कर रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि रैली मेंअधिक से अधिक कार्यकर्ता और समर्थक पहुंचे। देवेन्द्र यादव ने कहा कि इस बार दिल्ली कांग्रेस की उपस्थिति रामलीला मैदान में इतिहास रचेगी, क्योंकि हर क्षेत्र से भारी संख्या में कार्यकर्ता शामिल होने जा रहे हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी से रैली का महत्व और बढ़ेगाइस महारैली में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी इसे और भी महत्वपूर्ण बना देगी। रैली को संबोधित करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुनखड़गे, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, और कई वरिष्ठ नेता रामलीला मैदान में मंच साझा करेंगे। उनकीमौजूदगी से न सिर्फ कार्यकर्ताओं में जोश बढ़ेगा, बल्कि जनता को भी पूरी ताकत से संदेश जाएगा कि वोट चोरी के खिलाफ यह लड़ाई पूरे देश कीलड़ाई है। भाजपा के खिलाफ मजबूत शंखनाद के रूप में देखी जा रही है यह रैलीदेवेन्द्र यादव ने कहा कि रामलीला मैदान की यह महारैली भाजपा सरकार के खिलाफ एक सीधा शंखनाद साबित होगी। उन्होंने कहा कि भाजपा पूरेदेश में चुनाव आयोग की सांठगांठ से वोट चोरी कर सत्ता पर काबिज होने की कोशिश कर रही है और इससे संविधान की आत्मा को चोट पहुँच रही है।यह रैली भाजपा सरकार को यह संदेश देगी कि जनता अपने मताधिकार के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी। दिल्ली कांग्रेस के लिए जनता का भरोसा बड़ी ताकतरैली को लेकर जनता की भागीदारी ने कांग्रेस को नया उत्साह दिया है। देवेन्द्र यादव ने कहा कि दिल्ली के लोग कांग्रेस की इस लड़ाई को अपना मानरहे हैं और बड़ी संख्या में 14 दिसम्बर की रैली में शामिल होने वाले हैं। उनके अनुसार, यह रैली न केवल राजनीतिक भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़उठाएगी बल्कि लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बनेगी।
सुधा मूर्ति का संदेश तकनीक नहीं, समाज बदलने वाले नवाचारों को भी मिले सम्मान “नवाचार के लिए बने विशेष अवार्ड श्रेणी”

राज्यसभा की मनोनीत सदस्य सुधा मूर्ति ने गुरुवार को कहा कि हम तकनीकी उपलब्धियों की तो खूब सराहना करते हैं, लेकिन वहीं समाज की रोजमर्राकी समस्याओं का हल निकालने वाले असली नवाचार करने वालों को पहचान नहीं मिल पाती। उन्होंने जोर देकर कहा कि सामाजिक नवाचार करनेवाले लोग, जो आम लोगों की जिंदगी आसान बनाने के लिए नए तरीके और समाधान खोजते हैं, उन्हें भी उतनी ही अहमियत और सम्मान मिलनाचाहिए। उनका काम सीधे समाज की भलाई से जुड़ा होता है। शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए मूर्ति ने कहा कि इडली ग्राइंडर जैसे नवाचारोंने जीवन को बदल दिया है, विशेष रूप से महिलाओं के जीवन को, फिर भी उनके आविष्कारकों को काफी हद तक भुला दिया गया है। आगे उन्होंनेकहा, “जब आप कोई तकनीकी नवाचार करते हैं, तो आपकी उपलब्धियों के लिए आपका सम्मान किया जाता है, आपको पुरस्कार मिलता है, लोगताली बजाते हैं, लेकिन जब अन्य उपलब्धियों की बात आती है, तो लोग परवाह नहीं करते।” राज्यसभा सदस्य सुधा मूर्ति ने राज्यसभा में कहावैश्विक उदाहरणों की करते हुए मूर्ति ने क्यूआर कोड के जापानी आविष्कारक का हवाला दिया, जिन्होंने अपने नवाचार का पेटेंट नहीं कराने का विकल्पचुना, जिससे यह दुनिया भर में स्वतंत्र रूप से उपलब्ध हो गया। उनका कहना था कि इसे मुफ्त में उपलब्ध कराया जाना चाहिए। लेकिन उन्होंने ऐसाइसलिए किया क्योंकि ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ (बहुत से लोगों के कल्याण और सुख के लिए)।” मनोनीत सदस्य ने कहा कि अगर सरकार नेविभिन्न श्रेणियों में कई पुरस्कार स्थापित किए हैं। कॉर्पोरेट मामलों के विभाग द्वारा सीएसआर मान्यता से लेकर वाणिज्य और उद्योग विभाग द्वाराप्रौद्योगिकी पुरस्कार तक। लेकिन सामाजिक नवाचार के लिए कोई समर्पित पुरस्कार श्रेणी नहीं है। “मैं भारत सरकार से अनुरोध करती हूं कि वह एकनई पुरस्कार श्रेणी सामाजिक नवाचार श्रेणी शुरू करे, ताकि सामाजिक नवाचार को मान्यता और सम्मान मिल सके और हम सभी समाज को इसकालाभ मिल सके।”राज्यसभा सदस्य सुधा मूर्ति ने राज्यसभा में कहा है कि जो लोग आम लोगों की जिंदगी आसान बनाने के लिए काम कर रहे हैं उन्हें सम्मान मिलनाचाहिए। उन्होंने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया।
भारत से दूर, पाकिस्तान-चीन की ओर! बांग्लादेश में नया भू-राजनीतिक झुकाव, यूनुस शासन में दिल्ली से दूरी, इस्लामाबाद से नजदीकी

बांग्लादेश में पिछले साल सत्ता परिवर्तन के बाद से ही स्थितियां गंभीर बनी हुई हैं। खासकर मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में बांग्लादेश लगातारकट्टरपंथ की तरफ बढ़ा है। आलम यह है कि उसकी विदेश नीति भी भारत से दूर होकर पाकिस्तान पर केंद्रित होती दिख रही है। इसका एक उदाहरणबुधवार को मिला, जब बांग्लादेश के मौजूदा विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने कहा कि यह कूटनीतिक तौर पर संभव है किबांग्लादेश, पाकिस्तान के उस क्षेत्रीय गठबंधन में शामिल हो जाए, जिसमें भारत शामिल नहीं है। बांग्लादेश की न्यूज एजेंसी संवाद संस्था (बीएसएस) की रिपोर्ट के मुताबिक, तौहीद ने कहा कि इस तरह के कूटनीतिक समूह में नेपाल और भूटान का शामिल होना शायद संभव न हो। उन्होंने कहा, “यहहमारे लिए (बांग्लादेश के लिए) कूटनीतिक तौर पर संभव है, लेकिन नेपाल और भूटान का पाकिस्तान के साथ किसी समूह में शामिल होना, वह भीजिसमें भारत न हो, के साथ जुड़ना मुमकिन नहीं है।” ढाचांगत मामलों से जुड़ी चर्चाएं और समझौते हुएतौहीद ने कहा कि इशाक डार ने कुछ कहा है और किसी मौके पर इसमें प्रगति भी हो सकती है। हालांकि, उन्होंने मामले पर आगे टिप्पणी से इनकारकर दिया और कहा कि उन्हें ऐसे गठबंधन के बारे में मीडिया से ही जानकारी मिली है। पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार नेहाल ही में दावा किया था कि बांग्लादेश-चीन और पाकिस्तान का त्रिपक्षीय गठबंधन बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है और इसे बाकी क्षेत्रीय और क्षेत्रके बाहर की ताकतों को शामिल कर के बढ़ाया जा सकता है। बता दें कि अगस्त 2024 में शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने और मोहम्मद यूनुस कीअंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही इस देश का रुख पाकिस्तान की तरफ नरम हुआ है। बांग्लादेश ने उसी देश के साथ अपने रिश्तों कोगहरा करना शुरू कर दिया है, जिसकी सत्ता ने कभी पूर्वी पाकिस्तान में बांग्ला भाषियों पर जुल्म ढाए थे। यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश और पाकिस्तानके बीच रक्षा, व्यापार, कूटनीतिक और ढाचांगत मामलों से जुड़ी चर्चाएं और समझौते हुए हैं। यूनुस सरकार को अपने साथ लाने में सफलता मिलीगौरतलब है कि दक्षिण एशिया में भारत के बिना अलग-अलग देशों के गठबंधन की चर्चाओं को चीन ने ही जोर-शोर से बढ़ाया। इस एवज में चीन नेइस साल जून में एक त्रिपक्षीय बैठक भी रखी थी, जिसमें चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के सचिव स्तर के अधिकारियों की मुलाकात हुई थी। इसबैठक को चीन के कुनमिंग में रखा गया था। इसी दौरान ऐसी खबरें आई थीं कि पाकिस्तान और चीन साथ में एक नया क्षेत्रीय गठबंधन बनाने कीतैयारी कर रहे हैं, जो कि सार्क (साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोऑपेशन) का विकल्प बन सकता है। चूंकि सार्क में भारत सबसे प्रमुखताकत वाला देश है, इसलिए पाकिस्तान की आवाज इस संगठन में कमजोर पड़ जाती है। सार्क बीते कुछ वर्षों में पूरी तरह से निष्क्रिय है। 2016 मेंपाकिस्तानी आतंकी संगठनों की तरफ से अंजाम दिए गए उड़ी हमले के बाद से ही इस संगठन की प्रमुख बैठकें नहीं हुई हैं। इसी मौके का फायदाउठाकर पाकिस्तान ने चीन की मदद से दक्षिण एशिया में भारत के बिना एक गठबंधन बनाने की कोशिशें शुरू कर दीं। चूंकि बांग्लादेश में भी भारत कासमर्थन करने वाली शेख हसीना को सत्ता से हटा दिया गया, ऐसे में पाकिस्तान को यूनुस सरकार को अपने साथ लाने में सफलता मिली।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बड़ा एक्शन! पौड़ी के DFO तुरंत हटाए गए, मानव–वन्यजीव संघर्ष पर सख्त आदेश

वन्यजीव प्रभावित क्षेत्रों में स्कूली बच्चों को एस्कार्ट की सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज वन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरानअधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने पौड़ी में मानव -वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के दृष्टिगत पौड़ी के डीएफओ कोतत्काल प्रभाव से वहां से हटाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में वन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान मानव वन्यजीवसंघर्ष को खत्म करने के लिए वन विभाग के साथ ही शासन-प्रशासन के स्तर पर भी प्रभावी प्रयास किए जाने की बात कही। कहा कि यह सुनिश्चितकिया जाए कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटना की सूचना मिलने के 30 मिनट के अंदर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच जाए। इसके लिए संबंधितडीएफओ और रेंजर की जिम्मेदारी तय की जाए। प्रभावितों को आर्थिक सहायता तत्काल उपलब्ध कराई जाए। यथाशीघ्र उपलब्ध कराया जाएमुख्यमंत्री ने पौड़ी में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के दृष्टिगत पौड़ी के डीएफओ को तत्काल प्रभाव से वहां से हटाने के निर्देश दिए हैं।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में जंगली जानवरों का अधिक भय है, ऐसे क्षेत्रों में स्कूली बच्चों को स्कूल तक छोड़ने और घर तक लाने के लिए वन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा एस्कॉर्ट की व्यवस्था की जाए। सीएम धामी ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष में किसी परिवार से कमाने वाले व्यक्ति की मृत्यु होने पर उनके परिवार को आर्थिक परेशानियों का सामना न करना, ऐसी स्थिति से निपटने के लिएवन विभाग प्रभावित परिवार की आजीविका को सहायता देने के लिए दो सप्ताह के अंदर नीति बनाकर दें। कहा कि जनपदों में मानव-वन्यजीव संघर्षको कम करने के लिए जिन भी उपकरणों की आवश्यकता है, उन्हें यथाशीघ्र उपलब्ध कराया जाए। वन्य जीवों की मौजूदगी को लेकर जागरुक किया जाएसीएम ने कहा कि हमारी पहली जिम्मेदारी वन्यजीवों से लोगों के जीवन को बचाना है, इसके लिए नई तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष ध्यान दियाजाए। जंगली जानवर आबादी क्षेत्रों में न आये, इसके लिए स्थाई समाधान पर विशेष ध्यान दिया जाए। वन्यजीवों की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों मेंकैमरों के माध्यम से निरंतर नजर बनाये रखें। वन कर्मी लगातार निगरानी रखें, साथ ही ग्रामीणों के साथ अपना संवाद मजबूत रखें। मुख्यमंत्री ने कहाकि बस्तियों के आस पास जंगली झाडियों को अभियान चलाकर साफ किया जाए, साथ ही बच्चों और महिलाओं को विशेष तौर पर आस पास वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर जागरुक किया जाए।
कुपवाड़ा – पुंछ में अब शिक्षक करेंगे आवारा कुत्तों की निगरानी, स्कूलों में नई जिम्मेदारी लागू कड़ा मॉनिटरिंग सिस्टम

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा और पुंछ जिलों में शिक्षक कक्षा से इतर अब कुत्तों की निगरानी करेंगे। दोनों जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों (सीईओ) नेसरकारी और निजी दोनों स्कूलों के शिक्षकों को अलग तरह की ये एक नई जिम्मेदारी सौंपी है। शिक्षक अब स्कूलों के भीतर और बाहर आवारा कुत्तों वइनसे संबंधित घटनाओं की निगरानी और प्रबंधन के लिए नोडल अधिकारी के रूप में काम करेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग ने ये कदम स्कूलों में विद्यार्थियोंऔर स्टाॅफ की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अप्रत्याशित रूप से उठाया है। इसमें कहा गया है कि प्रत्येक स्कूल में एक नोडल अधिकारी नामितकरना अनिवार्य है। कुपवाड़ा के सीईओ ने जिले के सभी स्कूलों के प्रिंसिपलों, जोनल एजुकेशन अफसर (जेडईओ) और हेडमास्टरों को आधिकारिकनिर्देश जारी किया है। स्थानीय निकायों के साथ समन्वय करेगाइसमें कहा गया है कि स्कूलों के अंदर और बाहर प्रमुख स्थानों पर ”कुत्तों से सावधान रहें” संदेश वाले साइनबोर्ड लगाए जाएं। ये अनिवार्य हैं ताकिआवारा कुत्तों के बारे में जागरूकता फैलाई जा सके। नोडल अधिकारी को अनुपालन रिपोर्ट भी जमा करनी होगी। इसी तरह के निर्देश सीईओ पुंछ नेजारी किए हैं। यहां मुख्य जोर समन्वय पर है और सभी सरकारी और निजी स्कूलों के ड्राइंग एंड डिसबर्सिंग ऑफिसर (डीडीओ) और संस्थानों के प्रमुखों(एचओआई) को आवारा कुत्तों पर निगरानी और समन्वय के लिए नोडल अधिकारी बनाने का निर्देश दिया गया है। सीईओ की ओर से जारीआधिकारिक निर्देश में लिखा है कि नोडल अधिकारी आवारा कुत्तों को देखे जाने और उनसे जुड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए जिम्मेदार होगा। इसकेअलावा नोडल अधिकारी जरूरी कार्रवाई के लिए संबंधित नगर पालिका, पशुपालन, स्थानीय निकायों के साथ समन्वय करेगा। एक सख्त प्रयास माना जा रहासुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पुंछ जिले में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए जिला उपायुक्त ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बैठक ली थी।इसमें आवारा कुत्तों पर नियंत्रण और पशु जन्म नियंत्रण पर गंभीर चर्चा की गई थी। इस बैठक के बाद अब सीईओ ने सभी स्कूलों को निर्देश जारी किएहैं। सीईओ के जारी निर्देशों में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इनके पालन में किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा औरसंबंधित अधिकारियों व शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। यह कदम स्कूलों में सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक सख्त प्रयास मानाजा रहा है
लोकदल प्रमुख सुनील सिंह का सपा बीजेपी पर आरोप “नीतियाँ नहीं, सिर्फ नारे बदलते हैं… महिलाओं को फिर बनाया जा रहा वोट बैंक”जानें क्या कुछ कहा”

उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों की सरगर्मी के बीच राजनीतिक दल अपने-अपने वादों और घोषणाओं के साथ मैदान में हैं। इसी क्रम में समाजवादीपार्टी द्वारा ग़रीब महिलाओं को 40 हजार रुपये देने के वादे ने सियासी हलचल तेज कर दी है। सपा के इस घोषणा पत्र-शैली वादे पर अब लोकदलके राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने एक कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सुनील सिंह ने कहा कि यूपी की राजनीति फिर से उसी पुरानी स्क्रिप्ट पर लौट आईहै, जहाँ चुनाव आते ही बड़ी-बड़ी घोषणाएँ और सपने परोसे जाते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद इन वादों का कोई अता-पता नहीं रहता। वास्तविक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए नीतिलोकदल प्रमुख ने बेहद तीखे शब्दों में कहा कि बीजेपी और सपा में मूल अंतर केवल प्रतीकों और नारों का है, नीयत का नहीं। उनके अनुसार बीजेपी नेमहंगाई, बेरोज़गारी और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जनता को निराश किया। दूसरी ओर, सपा अपने पुराने शासन के विफल रिकॉर्ड कोभुलाकर नए वादों की चमक से जनता को फिर से भ्रमित करने की कोशिश कर रही है। सुनील सिंह ने कहा कि दोनों ही पार्टियों का ट्रैक रिकॉर्ड यहदिखाता है कि वादे बड़े होते हैं, लेकिन काम शून्य। जनता को चुनाव से पहले सपने दिए जाते हैं, और बाद में वही सपने टूटे हुए मिलते हैं। समाजवादीपार्टी की 40,000 रुपये वाली योजना पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनील सिंह ने कहा कि महिलाओं को वोट बैंक समझने की राजनीति सबसे खतरनाकराजनीति है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों दलों को महिलाओं की याद केवल चुनाव के समय आती है। पाँच साल तक महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई और आर्थिक आत्मनिर्भरता पर कोई ठोस काम नहीं होता। और जैसे ही चुनाव नज़दीक आते हैं, पार्टियाँ वादों की झड़ी लगा देती हैं।सुनील सिंह ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं के लिए वास्तविक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए नीति, संवेदना और निरंतर प्रयास कीज़रूरत है न कि चुनावी लुभावने दावों की।
गरीबों के साथ छलावा – अटल कैंटीन योजना पर देवेन्द्र यादव का बड़ा आरोप

सरिता साहनी10 दिसंबर 2025 ,नई दिल्लीदिल्ली की झुग्गी बस्तियों में बढ़ी राजनीतिक बहसदिल्ली में झुग्गीवालों के लिए शुरू की जा रही अटल कैंटीन योजना ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षदेवेन्द्र यादव ने इस योजना पर गम्भीर सवाल उठाते हुए कहा है कि भाजपा सरकार गरीबों को राहत देने का दिखावा कर रही है, जबकि असलियत मेंझुग्गीवालों के लिए कुछ भी ठोस कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने इसे गरीबों को भ्रम में रखने की कोशिश बताया। झुग्गीवालों के घर तोड़े, अब भोजन का वादा देवेन्द्र यादव का आरोपअपने बयान में देवेन्द्र यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने कई जगहों पर झुग्गियों पर बुलडोज़र चलवाकर हजारों परिवार बेघर कर दिए। जिन लोगोंको घर से उजाड़ा गया, उन्हीं को अब 5 रुपये की थाली देने का वादा किया जा रहा है। उनके अनुसार भाजपा पहले लोगों को तकलीफ देती है, फिरछोटी योजनाओं के नाम पर खुद को गरीबों की हितैषी बताने लगती है। उन्होंने कहा कि यह नीति झुग्गीवालों की समस्याओं का समाधान नहीं, बल्किउनकी मजबूरियों का फायदा उठाने की कोशिश है। 30 लाख लोगों के लिए सिर्फ 100 अटल कैंटीन कितनी कारगर योजना?दिल्ली की झुग्गी बस्तियों में करीब 30 लाख से ज़्यादा लोग रहते हैं, जहाँ 675 जेजे क्लस्टर मौजूद हैं। लेकिन सरकार ने सिर्फ 100 अटल कैंटीनशुरू करने की घोषणा की है। हर कैंटीन पर सुबह 500 और शाम को 500 थालियां देने की बात कही गई है। यह संख्या सिर्फ 50,000 लोगों तकही पहुँच सकती है, जबकि वास्तविक जरूरत कई गुना अधिक है। देवेन्द्र यादव के अनुसार यह व्यवस्था ऐसी है, जिसमें एक बड़े समुदाय कोनज़रअंदाज़ कर सिर्फ सीमित लोगों को ही खाना मिल पाएगा। उन्होंने इसे “पिक एंड चूज़” की व्यवस्था बताया, जहाँ सरकार चुनिंदा लोगों को हीसुविधा देगी। महंगाई और बेरोजगारी के बीच सस्ती थाली की वास्तविकताउन्होंने कहा कि आज दिल्ली में बेरोजगारी और महंगाई लगातार बढ़ रही है, जिससे झुग्गी बस्तियों में अपराध भी फैल रहा है। ऐसे माहौल में सस्तेखाने के लिए लगने वाली भीड़ और कतारें हालात को और बिगाड़ सकती हैं। सरकार ने इस पक्ष पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया कि भारी भीड़ की स्थितिमें संघर्ष और अव्यवस्था पैदा हो सकती है। गरीब परिवारों के पास रोज़मर्रा की परेशानियाँ पहले से ही बहुत हैं, ऐसे में खाना पाने के लिए लंबी लाइनेंउनकी समस्या और बढ़ा सकती हैं। महिलाओं और गरीबों से किए गए वादों से बचने का आरोपदेवेन्द्र यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने महिलाओं को 2500 रुपये मासिक देने, गैस सिलेंडर 500 रुपये में उपलब्ध कराने और त्योहारों पर सिलेंडरदेने जैसे वादे किए थे। लेकिन इन वादों से बचने के लिए अब गरीबों के सामने 5 रुपये की अटल थाली की घोषणा रख दी गई है। उनके अनुसारसरकार वास्तविक समस्याओं को हल करने की बजाय जनता को छोटे-छोटे भ्रमों में उलझा रही है ताकि बड़े मुद्दे पीछे छिप जाएं। शिलान्यास तो हुआ, पर काम शुरू नहीं तैयारी पर सवालभाजपा की ओर से कहा गया है कि 25 दिसंबर को दिल्ली में 100 अटल कैंटीन शुरू कर दी जाएंगी। लेकिन देवेन्द्र यादव ने बताया कि नवंबर केआखिरी सप्ताह में कई कैंटीनों का सिर्फ शिलान्यास हुआ है और अभी तक योजना का टेंडर भी पूरा नहीं हुआ। इसके बावजूद इतने कम समय में 100 कैंटीन तैयार करना असंभव लग रहा है। उन्होंने इसे सिर्फ कागज़ी घोषणा बताया, जिसका मकसद लोगों को प्रभावित करना है, न कि वास्तविक कामकरना। बायोमेट्रिक टोकन सिस्टम गरीबों पर नई बाधा?योजना के अनुसार, एक व्यक्ति एक बार से ज्यादा खाना न ले सके, इसके लिए सरकार बायोमेट्रिक टोकन प्रणाली लागू करेगी। देवेन्द्र यादव काकहना है कि रोज़ दिहाड़ी पर काम करने वाले गरीब मजदूरों के लिए यह नई मुसीबत होगी। वे पहले ही अपनी आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे हैं, अब खाने के लिए डिजिटल टोकन की प्रक्रिया उनके लिए और परेशानियाँ खड़ी करेगी। दिल्ली के कलस्टरों की वास्तविक स्थिति और सरकार की अनदेखीदिल्ली में 675 अधिकृत जेजे क्लस्टर, 173 अनधिकृत क्लस्टर और लगभग 80 ऐसे क्षेत्र हैं जिनका कोई रिकॉर्ड सरकार के पास नहीं है। इन सभीजगहों पर रहने वाले लाखों लोग अब भी जीवन की बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। देवेन्द्र यादव ने कहा कि भाजपा की जिम्मेदारी है कि इन क्षेत्रों मेंरहने वाले लोगों के घर, रोजगार, सुरक्षा और शिक्षा की व्यवस्था करे, लेकिन इसके बजाय सरकार सिर्फ घोषणाओं और झूठे दावों में लगी है। कई बड़ी घोषणाएँ, लेकिन काम एक भी नहीं विपक्ष का निशानाउन्होंने कहा कि पिछले 10 महीनों में भाजपा सरकार ने सड़क, पेयजल, एसटीपी, कूड़े के पहाड़, प्रदूषण नियंत्रण, यमुना सफाई और बस सेवाओं कोबढ़ाने जैसे कई बड़े दावे किए हैं। लेकिन इनमें से किसी पर भी काम शुरू नहीं हुआ। ऐसे में अटल कैंटीन योजना पर भरोसा करना मुश्किल है, क्योंकिइसका भी हश्र बाकी घोषणाओं जैसा हो सकता है। अटल कैंटीन योजना गरीबों के जीवन में कितना बदलाव लाएगी?देवेन्द्र यादव का स्पष्ट कहना है कि यह योजना गरीबों के जीवन में वास्तविक सुधार नहीं ला पाएगी। इस योजना के जरिए लाखों झुग्गीवालों कीसमस्याओं को नजरअंदाज करके सिर्फ एक छोटी सुविधा का वादा किया जा रहा है, जो जरूरत के मुकाबले बहुत कम है। उन्होंने कहा कि दिल्ली कीगरीब बस्तियों को सिर्फ सस्ती थाली नहीं, बल्कि घर, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा की जरूरत है। जब तक सरकार इन मूलभूत मुद्दों पर कामनहीं करेगी, तब तक अटल कैंटीन जैसी घोषणाएँ सिर्फ दिखावा ही रहेंगी।