हस्तसाल वार्ड 108 में सफाई व्यवस्था की बड़ी समीक्षा – आशीष सूद का दौरा

सरिता साहनी10 दिसंबर 2025 ,नई दिल्लीस्वच्छ दिल्ली के लिए मंत्री का जमीनी निरीक्षणदिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने वार्ड संख्या 108, हस्तसाल और उसके आसपास के इलाकों में सफाई, कूड़ा प्रबंधन और जल निकासीकी व्यवस्था का विस्तृत निरीक्षण किया। उनका उद्देश्य था कि हर वार्ड में लोगों को स्वच्छता से जुड़ी सेवाएं समय पर और बेहतर तरीके से मिलें। स्थानीय लोगों ने बताई समस्याएँ, मंत्री ने लिया संज्ञाननिरीक्षण के दौरान स्थानीय निवासियों और अभिभावकों ने मंत्री को कई गंभीर समस्याओं से अवगत कराया। विकासपुरी स्थित डीएवी स्कूल के सामनेकूड़े का बड़ा ढेर लगा होने से बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। इसके अलावा रोड नंबर 237 पर कई जगह सीवर के ढक्कन खुले हुए मिले, जिससे दुर्घटना होने का खतरा बना हुआ था। सड़क पर जगह-जगह कूड़ा जमा रहने से लोगों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है। सरकार का संकल्प समयबद्ध और प्रभावी सफाई सेवाएँआशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि हर वार्ड में साफ-सफाई की व्यवस्था मजबूत हो। कूड़ा उठाने से लेकर नालोंकी सफाई तक सभी काम नियमित और प्रभावी तरीके से हों। इसी उद्देश्य से वह खुद विभिन्न इलाकों में जाकर स्थिति का आकलन कर रहे हैं औरअधिकारियों को आवश्यक निर्देश दे रहे हैं। सफाई प्रणाली, कूड़ा प्रबंधन और नालों की स्थिति की विस्तृत समीक्षानिरीक्षण में मंत्री ने कूड़ा संग्रहण की प्रक्रिया, कूड़े के परिवहन और उसके निस्तारण से जुड़ी व्यवस्थाओं को करीब से देखा। साथ ही नालों की सफाईऔर जल निकासी की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हर कार्य समय पर पूराकिया जाए। दिल्ली सरकार और एमसीडी के बीच बेहतर समन्वय की जरूरतसूद ने साफ कहा कि दिल्ली सरकार और एमसीडी के बीच लंबे समय से चली आ रही खींचातानी को खत्म होना चाहिए। दोनों संस्थाओं के बीचमजबूत समन्वय होगा तभी दिल्ली की सफाई व्यवस्था में सुधार आएगा। उन्होंने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप का दौर खत्म करके मिलकर काम करने कासमय आ गया है ताकि दिल्ली को स्वच्छ और विकसित बनाया जा सके। नागरिकों की भागीदारी को बताया स्वच्छता की कुंजीमंत्री ने कहा कि स्वच्छता सिर्फ सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि नागरिकों के सहयोग से ही यह अभियान सफल हो सकता है। दिल्लीसरकार और एमसीडी मिलकर काम करें, साथ ही लोग भी साफ-सफाई को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, तभी सकारात्मक बदलाव आएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मंत्रियों का लगातार फील्ड निरीक्षणउन्होंने यह भी बताया कि माननीय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और अन्य मंत्री भी स्वयं फील्ड में जाकर सफाई और प्रदूषण नियंत्रण के कार्यों का निरीक्षणकर रहे हैं। लक्ष्य है कि हर वार्ड को स्वच्छ, स्वस्थ और सुरक्षित बनाया जाए। लापरवाही पर सख्त कार्रवाई का निर्देशमंत्री आशीष सूद ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सफाई और कूड़ा प्रबंधन से जुड़ी किसी भी एजेंसी द्वारा की गई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंनेकहा कि दिल्ली सरकार लोगों की शिकायतों का त्वरित समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है और हर शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई की जाएगी। स्वच्छ, सुरक्षित और विकसित दिल्ली की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदमशहरी विकास मंत्री का यह निरीक्षण अभियान इस दिशा में एक बड़ा कदम है कि दिल्ली के हर वार्ड को बेहतर सुविधाएँ और साफ-सुथरा वातावरणमिले। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में दिल्ली की सफाई व्यवस्था और भी मजबूत और पारदर्शी हो।
भाजपा शासित MCD में कूड़े के नाम पर खुली लूट – सौरभ भारद्वाज का आरोप

सरिता साहनी10 दिसंबर 2025 ,नई दिल्लीभाजपा के अपने पार्षद ने खोली भ्रष्टाचार की परतेंदिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में भ्रष्टाचार के बड़े आरोप तब सामने आए जब भाजपा के वरिष्ठ पार्षद राजपाल ने ही स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में अपनीही सरकार पर गंभीर सवाल उठा दिए। इस मुद्दे को आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने प्रेस वार्ता कर खुलकर रखा औरभाजपा पर तीखा हमला बोला। भाजपा पार्षद के खुलासे ने खड़ा किया बड़ा सवालसौरभ भारद्वाज ने बताया कि भाजपा पार्षद राजपाल ने खुलासा किया है कि एमसीडी में कूड़े के नाम पर बड़ी धोखाधड़ी हो रही है। निजी कंपनियांट्रकों में बिल्डिंग का मलबा लैंडफिल साइट पर ले जाकर कूड़े के तौर पर तौलवा देती हैं और भारी-भरकम पेमेंट ले लेती हैं। इससे यह साफ है किअसली कूड़ा तो कई जगह उठ ही नहीं रहा, लेकिन बिल्डिंग माफिया और ठेकेदार करोड़ों कमा रहे हैं। कूड़ा सड़कों पर, लेकिन कंपनियों को लगातार भुगतानसौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली के कई इलाकों में कूड़ा सड़ रहा है, घरों से कूड़ा उठ नहीं रहा, फिर भी ठेकेदारों को 2250 से 2750 रुपये प्रति टनभुगतान जारी है। भाजपा पार्षद के मुताबिक, ठेकेदार कूड़ा उठाने की बजाय निर्माण कार्य का मलबा तौलवाते हैं, जो ज्यादा भारी होता है, और उसीआधार पर मोटा पैसा बनाया जा रहा है। एमसीडी में लगाए गए बाहर के अधिकारी, कोई जवाबदेही नहींएक बड़ा खुलासा यह भी हुआ कि एमसीडी के 12 जोन में एक भी डिप्टी कमिश्नर अपने ही कैडर का नहीं है। कोई सांख्यिकी सेवा से आया है, कोईरेलवे सेवा से, और प्रतिनियुक्ति के नाम पर इन्हें डीसी बनाकर बैठा दिया गया है। सौरभ भारद्वाज का कहना है कि यही अधिकारी एमसीडी में खुलीलूट का हिस्सा हैं और पांच साल में इतना कमा लेते हैं कि उनकी कई पीढ़ियों को काम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डीसी बादल कुमार पर बिल्डिंग माफिया से साठगांठ का आरोपभाजपा पार्षद पंकज लूथरा ने शाहदरा जोन के डीसी बादल कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि वह बिल्डिंग माफिया से पैसा लेते हैं। इसके बावजूदएमसीडी कमिश्नर ने उन्हें उनके मूल विभाग में नहीं भेजा। बल्कि उल्टा कमिश्नर ने पार्षद पर ही आरोप लगा दिया। यह स्थिति बताती है कि व्यवस्थामें ऊपर से नीचे तक गहरी गड़बड़ है। गृह मंत्रालय पर उठे सवालसौरभ भारद्वाज ने सवाल किया कि आखिर केंद्रीय गृह मंत्रालय लगातार दूसरे विभागों से अधिकारियों को एमसीडी में क्यों भेज रहा है? जब भ्रष्टाचारके आरोप लग रहे हैं, सदन प्रस्ताव पारित कर चुका है, तब भी इन्हें वापस क्यों नहीं भेजा जा रहा? यह साफ संकेत है कि एमसीडी में बाहर से आएअधिकारी बिना किसी निगरानी के लूट मचा रहे हैं। लैंडफिल साइट पर मलबे को कूड़ा बताकर करोड़ों की पेमेंटसौरभ भारद्वाज ने बताया कि भाजपा पार्षदों के मुताबिक, लैंडफिल साइट पर कूड़े की जगह निर्माण का मलबा फेंका जा रहा है। उसे कूड़ा दिखाकरठेकेदार करोड़ों रुपये का बिल पास करवा रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का यह दावा कि हर 15 दिन मंत्री कूड़े के पहाड़ का निरीक्षण करते हैं, भाजपाके ही पार्षदों के खुलासों से सवालों के घेरे में आ गया है। एफआईआर क्यों नहीं? कमिश्नर की चुप्पी संदिग्धस्टैंडिंग कमेटी में पार्षदों ने बार-बार मांग की कि एफआईआर दर्ज की जाए, क्योंकि जांच शुरू होते ही आधा कूड़ा दरअसल निर्माण मलबा निकलेगा।लेकिन कमिश्नर ने आज तक एफआईआर नहीं कराई। इससे साफ है कि ऊपर बैठे अधिकारी और भाजपा नेताओं की मिलीभगत के बिना ऐसा संभवनहीं। क्या एमसीडी में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई होगी?सौरभ भारद्वाज का आरोप है कि भाजपा शासित एमसीडी में कूड़े के नाम पर बड़े स्तर पर लूट चल रही है। पार्षदों के खुलासों के बावजूद कोई कार्रवाईन होना कई सवाल खड़े करता है। अब यह गृह मंत्रालय और भाजपा नेतृत्व पर निर्भर है कि वे भ्रष्टाचार के इस मामले पर कार्रवाई करते हैं या इसेअनदेखा कर देते हैं।
सतारा महिला डॉक्टर आत्महत्या केस, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बनाई SIT, फॉरेंसिक रिपोर्ट में सुसाइड नोट की पुष्टि “दो पुलिस अधिकारी गिरफ्तार”

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सतारा में महिला डॉक्टर की कथित आत्महत्या के मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल(एसआईटी) गठित की गई है। फॉरेंसिक रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि डॉक्टर के हाथ पर लिखा हुआ नोट वास्तव में उसी ने लिखा था। विधानसभा मेंप्रश्नकाल के दौरान फडणवीस ने कहा, नासिक की डॉक्टर की कथित आत्महत्या के मामले की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई है। फॉरेंसिकरिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि डॉक्टर के हाथ पर लिखा गया सुसाइड नोट उन्हीं का लिखा हुआ है। उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया गयामुख्यमंत्री ने बताया कि जांच में अब तक यह सामने आया है कि पुलिस अधिकारी मदाणे ने डॉक्टर को धोखा दिया और उसका यौन शोषण किया, जबकि एक अन्य आरोपी ने भी उसे छल और मानसिक उत्पीड़न का शिकार बनाया। उन्होंने कहा, मौजूदा फॉरेंसिक जांच में मृत्यु का कारण फांसीलगाना पाया गया है। जांच जारी है और जल्द ही आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। एक सेवानिवृत्त जज के माध्यम से स्वतंत्र जांच भी शुरू की गई हैऔर पुलिस स्तर की जांच की निगरानी के लिए एक महिला आईपीएस अधिकारी नियुक्त की गई है। फडणवीस ने इस मुद्दे का कथित तौर परराजनीतिकरण करने वालों की भी निंदा की और कहा, कुछ लोगों ने इस मामले को राजनीति से जोड़ने की दुर्भाग्यपूर्ण कोशिश की। इस मामले में सभीकी जांच की जाएगी। इस मामले में सतारा पुलिस ने पुलिस उप निरीक्षक गोपाल बदने और प्रशांत बांगर को गिरफ्तार किया था। दोनों के खिलाफदुष्कर्म और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस उप निरीक्षक बदाणे को इसके बाद निलंबित कर दिया गया। डॉक्टर की बांह पर लिखे नोटउन्होंने यह भी कहा कि शक्ति कानून संविधान द्वारा राज्य को दी गई शक्तियों का उल्लंघन करता है, इसलिए इसे वापस भेजा गया। जिस कानून केआधार पर यह कानून बनाया गया था, उसे भी मंजूरी नहीं मिली। शक्ति कानून में किए गए कुछ नए प्रावधान अब नए तीन कानूनों में शामिल किएगए हैं। जो चीजें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप नहीं हैं, उन्हें हटा दिया जाएगा और बाकी शामिल की जाएंगी। गौरतलब है कि 23 अक्तूबर कोसतारा में एक महिला डॉक्टर ने कथित यौन शोषण और मानसिक उत्पीड़न के कारण आत्महत्या कर ली थी। डॉक्टर की बांह पर लिखे नोट में एकपुलिस अधिकारी और दो अन्य का नाम था। उन पर उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप था।
लोकसभा में चुनाव सुधार पर गरमाई बहस मनीष तिवारी बोले, EVM पर भरोसा डगमगाया, चुनाव आयोग सरकार के इशारों पर काम कर रहा

लोकसभा में चुनाव सुधार पर चर्चा की शुरुआत कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने की। मनीष तिवारी ने कहा कि देश में निष्पक्ष चुनाव कराए जाने समयकी मांग हैं। उन्होंने संविधान के तहत चुनाव आयोग को मिले अधिकारों का जिक्र करके हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार केकार्यकाल में सबसे बड़े चुनावी सुधार हुए। मनीष तिवारी ने कहा, चुनाव आयोग को पूरे राज्यों में एसआईआर नहीं कराए जा सकते। उन्होंने कहा कि1988 में कांग्रेस सरकार ने इतिहास का सबसे बड़ा सुधार कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि आज चुनाव आयोग केंद्र के निर्देश पर काम कर रहा है।ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हुए तिवारी ने कहा कि इन मशीनों का सोर्स कोड किसी और कंपनी के पास होना चिंताजनक है।कांग्रेस सांसद ने कहा, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में जब स्वाधीनता संग्राम लड़ा गया, तो उसके दो बुनियादी लक्ष्य थे। सबसे पहला लक्ष्य थाकि भारत को आजाद करवाया जाए और दूसरा भारत को एक लोकतांत्रिक देश के रूप में परिवर्तित करके लोगों की जो आशाएं हैं, उनके अनुरूप उन्हेंसरकार बनाने का मौका दिया जाए। उन्होंने कहा, जो संविधान के निर्माता थे, उन्होंने राष्ट्रनिर्माण में उस उर्जा को समर्पित किया, तो संविधान कीप्रस्तावना में उन्होंने दो अहम बातें कहीं। सबसे पहले जो संविधान निर्माताओं ने भारत के संविधान की प्रस्तावना में यह सुनिश्चित किया कि भारत एकसंप्रभु और लोकतांत्रिक गणराज्य के तौर पर गठित किया जाएगा और जब संविधान का 42वां संशोधन हुआ तो उस प्रस्तावना में दो और शब्द जोड़ेगए- समाजवाद और पंथनिरपेक्षता। उस स्वरूप में आज 2025 में गणतंत्र है। संविधान निर्माताओं ने चुनाव आयोग का गठन कियाभारत के लोकतंत्र में दो सबसे बड़े भागीदार हैं। एक 98 करोड़ आवाम (जनता) जो मतदान करती है और दूसरा भारत के राजनीतिक दल, जो विशेषतौर पर उस चुनाव में हिस्सा लेते हैं। संविधान के निर्माताओं ने यह सुनिश्चित किया कि 1946 से लेकर 1949 तक कि धर्म, जाति, मजहब, फिरकासबसे ऊपर उठकर हर भारत को नागरिक को जो 21 साल की उम्र से ज्यादा है, उसे मतदान का हक दिया जाए। यह उस समय हुआ, जब बहुत सारेऐसे देश थे, जहां पर मतदान का हक एक बहुत ही संकीर्ण तौर दिया जाता था। तिवारी ने आगे कहा, आज मुझे कहने में कोई संकोच नहीं है किपिछले 78 साल में अगर सबसे बड़ा कोई चुनाव सुधार हुआ वह भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी ने किया। उन्होंने आगे कहा, उस समय मेंएनएसयूआई का राष्ट्रीय अध्यक्ष था, उन्होंने हमारी मांग पर करोड़ों- करोड़ों भारत के नौजवानों को मत का अधिकार दिया। जब मतदान की सीमा 21 से घटाकर 18 वर्ष की गई। इससे बड़ा चुनाव सुधार पिछले 78 वर्ष में इस मुल्क और कोई नहीं हुआ। जब संविधान की रचना हो रही थी, यह सारालोकतंत्र का ताना-बना है, इसको चलाने के लिए तटस्थ संस्था भी चाहिए थी और संविधान निर्माताओं ने चुनाव आयोग का गठन किया। उस समयचर्चा चली कि क्या चुनाव आयोग एक स्थायी संस्था होनी चाहिए या अस्थायी संस्था होनी चाहिए। सही जगह जा रहा है कि नहींउन्होंने आगे कहा, देश में एक देश-एक चुनाव पर बहस चल रही है। लेकिन अगर आप संविधान सभा की जो कार्यवाही हैं, उनको संज्ञान में लें तोसंविधान निर्माताओं ने यह देख लिया था कि भारत में दस-बारह साल बाद अलग-अलग समय पर अलग अलग राज्यों में चुनाव होंगे, तो इससे बड़ाप्रश्न खड़ा होता है कि ये एक देश चुनाव का कोई औचित्य बचता है कि नहीं। इसके ऊपर चर्चा करने की जरूरत है, क्योंकि संविधान के जो निर्माताथे, उन्होंने इसे अपने संज्ञान में लेकर उस समय कहा था कि अलग-अलग समय पर चुनाव होते रहेंगे।उन्होंने कहा, यह जो इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) है। लोकतंत्र एक भरोसे पर चलता है और वह भरोसा क्या है कि 98 करोड़ लोग जाकरलाइन में खड़े होते हैं, पांच पांच सात-सात घंटे तक धूप में खड़े होते हैं। आप राजस्थान से आते हैं। आप जानते हैं कि कैसी चिलचिलाती गर्मी रहती हैमई जून में। उसको (मतदाता) यह भरोसा होना चाहिए कि वह जो वोट डाल रहा है, वह सही जगह जा रहा है कि नहीं। आज इस देश में बहुत लोगोंको यह चिंता है।
सीएम धामी का बड़ा कदम, मेडिकल कॉलेजों में “142 असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त” स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक विस्तार की घोषणा

मुख्यमंत्री धामी ने चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से चयनित राजकीय मेडिकल कॉलेजों में 142 असिस्टेंट प्रोफेसर्स को नियुक्ति पत्र वितरितकिए। उन्होंने नव नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर्स को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ये अवसर चिकित्सा के क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्णकदम सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री ने सभी से आग्रह करते हुए कहा कि सभी अपने छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करने के साथ उनकेभीतर संवेदनशीलता, सहानुभूति और सेवा की भावना भी विकसित करें। जिससे वे कुशल और दक्ष चिकित्सक बनने के साथ समाज के प्रति अपनेकर्तव्यों और मानवता के प्रति अपने उत्तरदायित्व को भी पूरी ईमानदारी से निभाएं। सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्यसरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण पर निरंतर कार्य कर रही है। राज्य के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सकीयसुविधाएँ सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। आयुष्मान योजना के अंतर्गत अब तक करीब 61 लाख आयुष्मान कार्ड वितरित किए गए हैं।जिसके माध्यम से प्रदेश के लगभग 17 लाख से अधिक मरीजों का 3300 करोड़ रुपये से अधिक का कैशलेस उपचार किया गया है। टेलीमेडिसिन सेवाओं के माध्यम से दूरदराजमुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार प्रत्येक जिले में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित कर रही है। जिससे सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लोगों को उनके जिले में हीआधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इनमें से पाँच मेडिकल कॉलेज पहले से ही संचालित किए जा चुके हैं, जबकि दो और मेडिकलकॉलेजों का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। देहरादून, हल्द्वानी और श्रीनगर मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी विभाग भी स्थापित किए गए हैं।मुख्यमंत्री ने कहा हल्द्वानी में राज्य के प्रथम आधुनिक कैंसर संस्थान का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। साथ ही हेली एंबुलेंस, आपातकालीनपरिस्थितियों में सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लोगों के लिए जीवन रक्षक साबित हो रही है। राज्य में मरीजों को पैथोलॉजिकल जांचों की भी निःशुल्क सुविधाप्रदान की जा रही है। टेलीमेडिसिन सेवाओं के माध्यम से दूरदराज के गाँवों में विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा परामर्श सुविधा भी प्रदान किया जा रहा है। लगभग 27 हजार युवा सरकारी नौकरी पाने में सफल हुएमुख्यमंत्री ने कहा कि सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में स्टाफ की कमी को दूर किया जा रहा है। 142 असिस्टेंट प्रोफेसरों को नियुक्तिपत्र प्रदान कर रहे हैं, साथ ही 356 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी गतिमान है। 1248 नर्सिंग अधिकारियों और 170 टैक्नीशियनों कोभी नियुक्तियां प्रदान की गई है और करीब 600 नर्सिंग अधिकारियों की चयन प्रक्रिया भी गतिमान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पहले भर्तियों मेंभारी पक्षपात, धांधली और भ्रष्टाचार हुआ करता था। हमने, राज्य में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया। आज सभी चयन प्रक्रियाएँमेरिट के आधार पर सुनिश्चित की जा रही हैं, जिससे योग्य उम्मीदवारों को उनके कौशल और परिश्रम का पूरा लाभ मिल रहा है। अब तक प्रदेश केलगभग 27 हजार युवा सरकारी नौकरी पाने में सफल हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा जहां भी पद रिक्त हैं, उन्हें जल्द से जल्द आयोग के माध्यम से भराजायेगा।
पंजाब में किसानों का गुस्सा फूटा संगरूर में ‘स्मार्ट मीटर उखाड़ो’ अभियान शुरू, बुधवार को पावरकॉम दफ्तर में मीटर लौटाए जाएंगे

पंजाब के किसानों ने बिजली विभाग की ‘स्मार्ट मीटर’ लगाने की मुहिम के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। मुख्यमंत्री भगवंतमान के गृह जिले संगरूर में किसान मजदूर मोर्चा के आह्वान पर भारतीय किसान यूनियन (एकता आजाद) ने मंगलवार को स्मार्ट मीटर उखाड़ो अभियानशुरू कर दिया। यूनियन ने सीधे चुनौती देते लोगों को भरोसा दे डाला कि किसी तरह की कारवाई को यूनियन संभालेगी। आक्रोशित किसानों ने घरों सेस्मार्ट मीटर उतारे और उन्हें बोरों (थैलों) में भरकर इकट्ठा किया। किसानों ने विभाग को खुली चुनौती देते हुए एलान किया है कि बुधवार को ये सभीमीटर पावरकॉम के संबंधित कार्यालयों में जमा करवाए जाएंगे और विभाग से तुरंत साधारण मीटर लगाने की मांग की जाएगी। किसान संगठनों ने स्पष्ट कर दियाविरोध प्रदर्शन की यह लहर मुख्यमंत्री के गृह जिले संगरूर के कई गांवों में फैल गई है। छाजली इलाके में ही उपभोक्ताओं की सहमति से करीब एकसौ स्मार्ट मीटर उतारे गए। किसान नेताओं की अगुवाई में यह मुहिम तोलावाल, चीमा, शाहपुर, बिगड़वाल, बडरूखां आदि गांवों में चली। किसाननेताओं जसवीर सिंह, संतराम, दर्शन सिंह, बलविंदर सिंह और हरबंस सिंह ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हम लगातार स्मार्ट मीटर नलगाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन विभाग ने एक न सुनी। इन प्रीपेड मीटरों में निजी कंपनियों की चिप लगी है, यह पावरकॉम का निजीकरण करने कीखुली कोशिश है। किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि आर्थिक तंगी के कारण कई बार उपभोक्ता समय पर बिल नहीं भर पाते। प्रीपेड मीटरिंगसिस्टम लागू होने से पैसा खत्म होते ही बिजली तुरंत कट जाएगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति (बीमारी, रात का समय) में आम आदमी कीमुश्किलें कई गुना बढ़ जाएंगी। किसान संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक विभाग साधारण मीटर नहीं लगाता, उनका यह विरोध अभियान जारीरहेगा। बुधवार को पावरकॉम दफ्तरों में ‘मीटर जमा’ करवाए जाएंगे।
यूक्रेन के ज़ेलेंस्की का कड़ा रुख: ‘रूस को एक इंच भी जमीन नहीं देंगे’, यूरोप में समर्थन जुटाने का दौर जारी

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने साफ कहा है कि वह रूस को अपनी जमीन का एक इंच भी नहीं सौंपेंगे। उन्होंने यह बयान ऐसे समय में दियाहै जब वह यूरोप का लगातार दौरा कर समर्थन जुटा रहे हैं और दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप लगातार दबाव बना रहे हैं कि यूक्रेन रूस सेसमझौता करे। जेलेंस्की मंगलवार को रोम पहुंचे, जहां उन्होंने पोप लियो 14 से मुलाकात की और प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से बात करने वाले हैं।इससे पहले सोमवार को वह लंदन गए, जहां ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीयर स्टार्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज सेमिले। उनका मकसद साफ है यूरोप का मजबूत समर्थन कायम रखना क्योंकि अमेरिका रूस-यूक्रेन युद्ध पर एक कठिन समझौते का दबाव बढ़ा रहा है। क्योंकि कुछ एंटी-यूक्रेनी बिंदु हटा दिए गएअमेरिका और यूक्रेन के अधिकारियों के बीच तीन दिन की बातचीत खत्म हुई, लेकिन कई मुद्दों पर मतभेद बरकरार हैं। मुख्य विवाद यह है किअमेरिकी योजना में डोनबास क्षेत्र का एक हिस्सा रूस को देने का सुझाव है। रूस इस क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर चुका है, लेकिन यूक्रेन और उसकेयूरोपीय साथी किसी भी तरह की जमीन सौंपने के खिलाफ हैं। ट्रंप ने रविवार को कहा कि ज़ेलेंस्की ने अभी तक प्रस्ताव “ध्यान से पढ़ा नहीं”, जबकिट्रंप लंबे समय से कह रहे हैं कि यह युद्ध अमेरिकी टैक्स के पैसे की बर्बादी है। जेलेंस्की ने सोमवार रात पत्रकारों से कहा कि “हम कुछ भी देना नहींचाहते। रूस लगातार दबाव डाल रहा है कि हम जमीन छोड़ दें, लेकिन कानूनन और नैतिक रूप से हमारे पास ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है।उन्होंने कहा कि अमेरिकी शांति योजना में पहले 28 बिंदु थे, लेकिन अब यह 20 रह गए हैं क्योंकि कुछ एंटी-यूक्रेनी बिंदु हटा दिए गए हैं। इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं और नौ लोग घायल हुएब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने ज़ेलेंस्की का खुलकर साथ दिया है। स्टार्मर ने कहा कि यह शांति प्रयासों का “निर्णायक समय” है और किसी भी समझौते में“न्यायपूर्ण और टिकाऊ संघर्षविराम” जरूरी है। जर्मन चांसलर मर्ज ने अमेरिकी दस्तावेजों पर संदेह जताते हुए कहा कि कई बिंदुओं पर चर्चा जरूरी है।यूरोपीय देश जोर दे रहे हैं कि किसी भी समझौते के साथ मजबूत सुरक्षा गारंटी हों ताकि रूस भविष्य में हमला न कर सके। दोनों देशों के बीच बीतीरात ड्रोन हमलों का बड़ा आदान-प्रदान हुआ। यूक्रेन ने कहा कि रूस ने 110 ड्रोन दागे, जिनमें से 84 को मार गिराया गया, जबकि 24 अपने लक्ष्य तकपहुंचे। हमलों की वजह से कई क्षेत्रों में इमरजेंसी ब्लैकआउट लगाया गया। वहीं रूस ने दावा किया कि उसने 121 यूक्रेनी ड्रोन नष्ट किए। रूस केचुवाशिया क्षेत्र में हमले में इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं और नौ लोग घायल हुए।
वंदे मातरम के 150 साल, संसद में पीएम मोदी ने सौगत रॉय से पूछा ‘दादा, तबीयत कैसी?’

संसद में आज वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के मौके पर भारत के राष्ट्रीय गीत और इससे जुड़े इतिहास पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेलोकसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए बलिदानी सपूतों को याद किया। उन्होंने वंदे मातरम के इतिहास और आजादी के आंदोलन में इसके योगदानको रेखांकित करते हुए कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में गुलामी की बेड़ियों में जकड़े देश को झकझोरने के लिए बंकिमचंद्र चटोपाध्याय ने वंदेमातरम जैसे गीत की रचना की। अपनी वाक्पटुता और भाषणों के लिए चर्चा में रहने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों की तरफ मुखातिबहोकर एक सांसद से उनकी सेहत के बारे में सवाल किया। पीएम मोदी ने जब वरिष्ठ तृणमूल सांसद सौगत राय से पूछा कि आपकी तबीयत कैसी है? तो सदन में ठहाके गूंजे। वंदे मातरम का इतिहास बताने के दौरान पीएम मोदी ने कई बार बांग्ला भाषा में कथनों का उल्लेख किया। इस दौरान विपक्षीसांसदों की तरफ से की गई टिप्पणी पर प्रधानमंत्री ने आभार प्रकट किया। इसी बीच उन्होंने तृणमूल सांसद सौगत रॉय से एक बार फिर कहा, ‘आपकोतो दादा कह सकता हूं न? या उसमें भी एतराज हो जाएगा…’ या उसमें भी एतराज हो जाएगालोकसभा में प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी के बाद चर्चा शुरू हो गई कि उन्होंने ऐसा किसके लिए कहा। हालांकि, पीएम के पूर्व के भाषणों और वरिष्ठनेताओं के साथ व्यक्तिगत संबंधों को देखते हुए माना जा रहा है कि उन्होंने सौगत रॉय से ही ये बातें कही हैं। बता दें कि पीएम मोदी लोकसभा मेंइससे पहले के भाषणों में अधीर रंजन चौधरी जैसे बंगाल से निर्वाचित सांसदों और नेताओं से भी ऐसे संवाद करते रहे हैं। संसद में वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के अवसर पर हो रही चर्चा के दौरान आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई ऐसी बातें कहीं जो चर्चा का विषय बन गईं। उन्होंने तृणमूलकांग्रेस सांसद सौगत राय से मुखातिब होते हुए कहा, दादा, तबीयत कैसी है आपकी। थोड़ी देर के बाद उन्होंने अपने वक्तव्य के दौरान फिर से पूछा, आपको तो दादा कह सकता हूं न? या उसमें भी एतराज हो जाएगा।’
इंडिगो की उड़ानों में भारी रद्दीकरण, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार “यात्रियों को सलाह जारी”

इंडिगो की उड़ानें लगातार सातवें दिन भी बड़ी संख्या में रद्द हो रही है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका लगाकर दखल देने का आग्रह किया गयाथा। हालांकि, शीर्ष कोर्ट ने इस याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने इस मामले का संज्ञान लिया है औरकार्रवाई कर रही है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, हम जानते हैं कि लाखों लोग फंसे हुए हैं। हो सकता है कि उनमें से कुछ लोगों का जरूरी काम हो औरवे नहीं कर पा रहे हो। लेकिन भारत सरकार ने इस मुद्दे का संज्ञान लिया है। समय पर कदम उठाया गया है। अभी हमें कोई तात्कालिकता नहीं आतीहै। अहमदाबाद हवाई अड्डे पर सुबह आठ बजे तक इंडिगो की 18 उड़ानों को रद्द कर दिया गया। इनमें से नौ उड़ानों का आगमन और नौ का प्रस्थानशामिल था। हालांकि, हवाई अड्डा प्रशासन ने कहा कि टर्मिनल और रनवे का संचालन सामान्य रूप से चल रहा है और यात्रियों की सुविधा का ध्यानरखा जा रहा है। इस दौरान 21 इंडिगो की उड़ानें चलीं, जिनमें सात का आगमन और 14 का प्रस्थान शामिल था। 39 प्रस्थान की उड़ाने शामिल थींबंगलूरू के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (केआईएएल) पर इंडिगो की कुल 127 उड़ानें रद्द की गईं। इससे 65 आगमन और 62 प्रस्थान की उड़ानेंप्रभावित हुईं। हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (आरजीआईए) पर भी गंभीर असर पड़ा। हवाई अड्डा प्राधिकरण के मुताबिक, यहांअभी तक इंडिगो की 77 उड़ानें रद्द हुई हैं, जिनमें 38 आगमन और 39 प्रस्थान की उड़ाने शामिल थीं। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे(आईजीआई) पर इंडिगो की सबसे अधिक उड़ानें रद्द की गई हैं। कुल 134 उड़ानें रद्द की गईं। इनमें 75 प्रस्थान और 59 आगमन की उड़ानें शामिलथीं। इस बीच, चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और गुजरात के सरदार वल्लभभाई पटेलअंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, असम के लोकप्रिय गोपीनाथ बोरडोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यात्री टर्मिनल में फंसे हुए हैं और अपनी उड़ानों के अपडेटका इंतजार कर रहे हैं। तत्काल सुनवाई से इनकार कर दियाजयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी इंडिगो की कई उड़ानें रद्द हुईं, जिनमें हैदराबाद, चेन्नई और दिल्ली के लिए उड़ानें शामिल थीं। हालांकि, हवाईअड्डा प्राधिकरण ने पुष्टि की कि स्थिति सामान्य है और उड़ाने रद्द होने के बावजूद यात्रियों को कोई बड़ी समस्या नहीं हुई। आज सुबह देशभर के प्रमुखहवाई अड्डों पर इंडिगो की उड़ानों में लगातार देरी और उड़ान रद्द होने के बीच आईजीआई ने यात्रियों के लिए एक नई एडवाइजरी जारी की। इसमेंयात्रियों से कहा गया कि वे हवाई अड्डे तक जाने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति जरूर जांच लें।सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार ने इस मामले का संज्ञान लिया है और कार्रवाईकर रही है।
हैदराबाद की सड़क का नाम ट्रंप पर? भाजपा ने तंज कसा, कहा ‘पहले भाग्यनगर वापस करो’”

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद की एक सड़क का नाम अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा है। तेलंगानाके सीएम का यह फैसला तेलंगाना राइजिंग ग्लोबल समिट के दौरान अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां पाने की कोशिश लग रहा है। हालांकि इसे लेकर सीएम रेवंतरेड्डी विरोधियों के निशाने पर आ गए हैं। तेलंगाना भाजपा ने सीएम के इस प्रस्ताव पर तंज कसा है और उनकी आलोचना की है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी नेप्रस्ताव दिया है कि हैदराबाद में अमेरिका महावाणिज्य दूतावास जाने वाली सड़क का नाम ‘डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू’ रखा जाए। अगर ऐसा होता है तो येदुनिया में पहली बार होगा, जब किसी देश में इस तरह से अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति का सम्मान हुआ हो। गौरतलब है कि हैदराबाद में ये परंपरा रहीहै कि शहर के विकास में योगदान देने वाले राजनेताओं और वैश्विक कंपनियों के नाम पर भी सड़कों के नाम रखे गए हैं, जैसे गूगल स्ट्रीट, जो हैदराबादमें गूगल की मजबूत मौजूदगी को दर्शाती है। इसी तरह वहां ‘माइक्रोसॉफ्ट रोड’ और ‘विप्रो जंक्शन’ हैं। एलान पर भाजपा भड़क गईतेलंगाना से भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार ने तेलंगाना सीएम के इस प्रस्ताव पर तंज कसा है और हैदराबाद का नाम बदलकरभाग्यनगर करने की मांग की। बंदी संजय कुमार ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा, ‘हैदराबाद का नाम बदलकर वापस भाग्यनगर करदो। अगर कांग्रेस सरकार नाम बदलने के लिए इतनी ही बेताब है, तो उन्हें कुछ ऐसा करना चाहिए जिसका सच में इतिहास और मतलब हो। हमकितने बुरे हालात में जी रहे हैं – एक तरफ केटी रामाराव, केसीआर की AI मूर्तियां बनाने में व्यस्त है, जबकि वे अभी जिंदा हैं। दूसरी तरफ रेवंत रेड्डी ट्रेंडकरने वालों के नाम पर जगहों का नाम बदल रहे हैं। इस बीच, भाजपा की अकेली पार्टी है, जो सच में सरकार से सवाल कर रही है और धरना के जरिएअसली लोगों के मुद्दे उठा रही है।’ तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद की एक सड़क का नाम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर रखने काप्रस्ताव दिया है। हालांकि इस एलान पर भाजपा भड़क गई है और सीएम पर तंज कसते हुए कहा कि वे पहले हैदराबाद का नाम बदलकर भाग्यनगरकर दें।