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डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रति कृतज्ञता और संकल्प का दिन — विजेंद्र गुप्ता

सरिता साहनी6,दिसंबर 2025, नई दिल्ली श्रद्धांजलि का गरिमामय अवसरडॉ. भीमराव अंबेडकर की 70वीं महापरिनिर्वाण दिवस पर दिल्ली विधान सभा परिसर में एक भावपूर्ण और गरिमामय श्रद्धांजलि सभा का आयोजनकिया गया। इस अवसर पर दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने संविधान निर्माता को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को यादकिया। इसके साथ ही विधायक संजय गोयल और विधान सभा सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। डॉ. अंबेडकर का संदेश लोकतांत्रिक संस्थाओं की आत्माश्रद्धांजलि समारोह में अपने विचार साझा करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि डॉ. अंबेडकर की विरासत हमें यह सिखाती है कि लोकतंत्र तभी मजबूतरहता है जब न्याय, समानता और मानव गरिमा हर संस्था और निर्णय का आधार बने। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर सिर्फ संविधान के निर्माता ही नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक आत्मा के संरक्षक भी थे। संविधान निर्माण में डॉ. अंबेडकर की निर्णायक भूमिका विजेंद्र गुप्ता के शब्दों मेंगुप्ता ने याद किया कि भारतीय संविधान की प्रारूप समिति का नेतृत्व करते हुए डॉ. अंबेडकर ने ऐसा ढांचा तैयार किया, जिसने न्याय, समान अवसरऔर व्यक्तिगत स्वतंत्रता को राष्ट्र के केंद्र में स्थापित किया। उन्होंने कहा कि उनकी संवैधानिक दृष्टि आज भी लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए उज्ज्वलमार्गदर्शक है, जो समाज के हर वर्ग को सुरक्षा और अधिकार प्रदान करती है। डॉ. अंबेडकर का जीवन प्रेरणा, संघर्ष और नेतृत्व का प्रतीकअपने संबोधन में विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सामाजिक भेदभाव से संघर्ष करते हुए डॉ. अंबेडकर का उठ खड़ा होना और आगे चलकर भारत के संविधानका निर्माण करना अदम्य साहस और अद्वितीय प्रतिभा का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि Dr. Ambedkar की यात्रा हमें यह विश्वास दिलाती है किज्ञान, दृढ़ता और समान अधिकारों के प्रति समर्पण समाज को बदल सकता है। महापरिनिर्वाण दिवस श्रद्धांजलि ही नहीं, एक संकल्पगुप्ता ने कहा कि यह दिवस केवल स्मरण का नहीं, बल्कि उस संवैधानिक नैतिकता को समझने और अपनाने का भी अवसर है, जिसका सपना डॉ. अंबेडकर ने देखा था। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि हम लोकतंत्र को मजबूत बनाना चाहते हैं तो हमें निष्पक्षता, संवाद और समान भागीदारी जैसेसिद्धांतों को जीवन और प्रशासन में लागू करना होगा। दिल्ली विधान सभा की प्रतिबद्धता संवैधानिक मूल्यों को आगे ले जाने का प्रयासअंत में विजेंद्र गुप्ता ने आश्वासन दिया कि दिल्ली विधान सभा नागरिक शिक्षा, संवैधानिक जागरूकता और डॉ. अंबेडकर के समावेशी भारत के सपनेको साकार करने वाले प्रयासों को निरंतर आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब हम एक ऐसे समाज कानिर्माण करें, जहाँ न्याय और समानता सबके लिए सुनिश्चित हो।

रणवीर सिंह की धमाकेदार वापसी जिसने बड़े पर्दे पर नई जान भर दी – धुरंधर

सरिता साहनी6,दिसंबर 2025, नई दिल्ली फिल्म धुरंधर एक ऐसी कहानी है जो भारतीय जासूसी तंत्र, पाकिस्तान के गैंगस्टर नेटवर्क, राजनीति और आतंकवाद की दुनिया को एक साथ जोड़करदर्शकों के सामने पेश करती है। निर्देशक आदित्य धर ने इस फिल्म को बहुत बड़े पैमाने पर बनाया है, और इसकी हर परत दर्शकों को भीतर तकझकझोर देती है। इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है रणवीर सिंह, जो लंबे समय बाद एक बेहद अलग और तीव्र किरदार में दिखाई देते हैं। फिल्म कीअवधि 3 घंटे 32 मिनट होने के बावजूद यह लगातार रोमांच बनाए रखती है। कहानीफिल्म की शुरुआत 30 दिसंबर 1999 से होती है, जब भारत तीन बेहद खतरनाक आतंकियों मसूद अज़हर, उमर शेख और मुश्ताक अहमद ज़रगर—को रिहा करने पर मजबूर होता है। इस निर्णय का विरोध इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अजय सान्याल करते हैं, जिन्हें आर. माधवन ने निभाया है।उनका विरोध दमदार है लेकिन नौकरशाही और मजबूरियों के सामने वह हार जाते हैं। इसी क्षण ‘प्रोजेक्ट धुरंधर’ की नींव रखी जाती है, जो कहानी कोएक बेहद रोचक और रोमांचक दिशा देता है। इसके बाद प्रवेश होता है जसकीरत सिंह उर्फ़ हमज़ा अली मज़ारी का, जिसे रणवीर सिंह ने इतनी तीव्रतासे निभाया है कि यह किरदार फिल्म की आत्मा बन जाता है। हमज़ा को पाकिस्तान के कराची शहर के सबसे खतरनाक इलाके ल्यारी में भेजा जाता है, जहाँ गैंगस्टर-राजनीति-आईएसआई का पूरा गठजोड़ भारत के खिलाफ साजिशें रचता है। फिल्म का यह हिस्सा बेहद वास्तविक और कठोर है, जहाँअपराध, सत्ता और आतंक एक-दूसरे में घुलते-मिलते दिखाई देते हैं। रणवीर सिंह का अभिनयरणवीर सिंह ने फिल्म में एक ऐसा किरदार निभाया है, जो भीतर से टूटा हुआ, बाहर से बेहद खतरनाक और हालातों से लड़ने के लिए मजबूर है। वहकभी जंगली दिखाई देते हैं, कभी चालाक, कभी ठंडे दिमाग से खेल खेलने वाले एजेंट और कभी एक ऐसा इंसान जिसमें दर्द और भावनाएँ अभी भीबची हैं। रणवीर की ऊर्जा, उनकी आँखों का गुस्सा, उनकी बॉडी लैंग्वेज और संवाद बोलने का अंदाज़—सब मिलकर इस किरदार को असाधारणबनाते हैं। लंबे समय बाद रणवीर अपने करियर का एक यादगार रोल लेकर आए हैं। आर. माधवन का महत्वपूर्ण किरदारअजय सान्याल के किरदार में आर. माधवन बेहद शांत, समझदार और दृढ़ नज़र आते हैं। वह कहानी के नैतिक पक्ष को दर्शाते हैं और शुरुआत कीघटनाओं में उनका योगदान फिल्म की दिशा तय करता है। उनकी आंतरिक लड़ाई, उनका अपने सिद्धांतों के प्रति झुकाव और उनकी मजबूरियों कोमाधवन ने बहुत संजीदगी से प्रस्तुत किया है। हर बार जब वह स्क्रीन पर आते हैं, फिल्म और भी गंभीर और प्रभावशाली हो जाती है। अक्षय खन्ना की मजबूत उपस्थितिअक्षय खन्ना ने ल्यारी के एक गैंगस्टर की भूमिका निभाई है और अपने अंदाज़ से वह हर दृश्य में दर्शकों को आकर्षित करते हैं। उनका चेहरा, उनकीआवाज़ और उनका अभिनय इस किरदार को बेहद गहरा बनाते हैं। वह न हिंसक होते हुए भी डर पैदा करते हैं और वह कराची के अंडरवर्ल्ड कीजटिलता को बड़ी खूबसूरती से पेश करते हैं। संजय दत्त का दमदार अंदाज़संजय दत्त इस फिल्म में एक सख़्त पाकिस्तानी सुपरकॉप से प्रेरित किरदार निभाते हैं। उनका व्यक्तित्व ही इस भूमिका को गंभीर और ताकतवर बनादेता है। उनकी आँखों में जो दृढ़ता है और संवादों में जो कड़कपन है, वह फिल्म के माहौल को और भी तनावपूर्ण बना देता है। संजय दत्त की स्क्रीनउपस्थिति इतनी मजबूत है कि उनके दृश्यों को नजरअंदाज करना संभव नहीं। अर्जुन रामपाल की तीखी छापअर्जुन रामपाल आईएसआई के मेजर इकबाल के रूप में सीमित समय के बावजूद गहरी छाप छोड़ते हैं। उनका किरदार ठंडे दिमाग से काम करनेवाला, खतरनाक और निर्दयी है। उनके द्वारा निभाए गए टॉर्चर सीन फिल्म के सबसे भारी और दिल दहला देने वाले हिस्सों में से हैं। वह कहानी में एकऐसा तनाव पैदा करते हैं जो दर्शकों को लंबे समय तक याद रहता है। सारा अर्जुन और अन्य कलाकारों का योगदानसारा अर्जुन ने यलीना के किरदार में एक नई ऊर्जा, विद्रोह और मासूमियत का मिश्रण दिखाया है। उनका किरदार छोटा है लेकिन अत्यंत प्रभावित करनेवाला। इसके अलावा राकेश बेदी और गौरव गेरा ने भी अपने किरदारों को दिलचस्प ढंग से निभाया है, जो फिल्म में थोड़ी राहत और अलग रंग भरतेहैं। हिंसा, सत्ता और मनोविज्ञान का टकरावफिल्म में हिंसा सिर्फ एक्शन नहीं है, बल्कि एक मानसिक दबाव है। कई दृश्य खासकर मेजर इकबाल वाले टॉर्चर वाले हिस्से दर्शकों को भीतर तकझकझोर देते हैं। फिल्म बार-बार यह दिखाती है कि सत्ता के खेल में इंसानियत कितनी आसानी से खत्म हो जाती है। रणवीर का किरदार भी इसीसंघर्ष से गुजरता है—एक तरफ वो एक हथियार है, दूसरी तरफ एक इंसान। संगीत और तकनीकी पक्षफिल्म का संगीत इसकी आत्मा जैसा है। शाश्वत सचदेव का बैकग्राउंड स्कोर हर दृश्य को और ज्यादा तीव्र और जीवंत बनाता है। पुराने मशहूर गीतों—हवा हवा, चुपके चुपके और आफ़रीन आफ़रीन का उपयोग कहानी के भावनात्मक पहलुओं को और गहरा कर देता है। सिनेमेटोग्राफी कराची औरल्यारी को इतने वास्तविक रूप में दिखाती है कि दर्शक खुद को उस माहौल का हिस्सा महसूस करने लगते हैं। कमज़ोरियांफिल्म का दूसरा भाग थोड़ा अलग और भारी महसूस होता है, जैसे कहानी अचानक दूसरी दिशा में मुड़ जाती है। साथ ही, इसके कई बड़े दृश्य पहले हीभाग दो के ट्रेलर में दिखाई दे चुके थे, जिससे दर्शकों का रोमांच थोड़ा कम होता है। फिल्म का दूसरा भाग 19 मार्च 2026 को रिलीज़ होगा। धुरंधरएक ऐसी फिल्म है जिसे बड़े पर्दे पर देखने का मज़ा ही अलग है। यह फिल्म सिर्फ एक्शन नहीं, बल्कि राजनीति, जासूसी, दर्द, मनोविज्ञान और मानवसंघर्ष की कहानी है। रणवीर सिंह अपनी पूरी ताकत और जुनून के साथ इस फिल्म में उभरते हैं और बाकी कलाकार कहानी को और मजबूत बनाते हैं।फिल्म अंत में एक सवाल छोड़ जाती है क्या भाग 2 इस कहानी को और ऊँचाई तक ले जाएगी? जो भी लोग रोमांच, गहरी कहानी और दमदारअभिनय पसंद करते हैं, उनके लिए धुरंधर जरूर देखने लायक फिल्म है।

असम सरकार का कड़ा कदम, कट्टरपंथी कंटेंट की बिक्री, प्रकाशन, शेयरिंग पूरी तरह वर्जित “जानें क्या है पूरा मामला”

असम सरकार ने प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से जुड़े कट्टरपंथी और जिहादी साहित्य पर बड़ा कदम उठाते हुए पूरे राज्य में उस पर पूर्ण प्रतिबंध लगादिया है। बुधवार को जारी अधिसूचना में सरकार ने साफ कर दिया कि ऐसे किसी भी साहित्य का प्रकाशन, बिक्री, वितरण, संग्रहण और डिजिटलप्रसार अब असम में पूरी तरह वर्जित रहेगा। सरकार का कहना है कि इस तरह की सामग्री राज्य की आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन चुकी थी। सरकार द्वारा जिन संगठनों के साहित्य पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनमें जमात-उल-मुजाहिदीनबांग्लादेश (जेएमबी), अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी), अंसार-अल-इस्लाम/प्रो-एक्यूआईएस और अन्य प्रतिबंधित आतंकी नेटवर्क शामिल हैं।ताजा पुलिस और विशेष शाखा की रिपोर्टों में यह पाया गया कि इन संगठनों से प्रेरित सामग्री ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से युवाओंतक पहुंच रही थी। कई डिजिटल चैनलों, वेबसाइटों और एन्क्रिप्टेड ग्रुपों में कट्टरपंथी संदेश साझा किए जा रहे थे। अब निगरानी के दायरे मेंअधिकारियों के अनुसार, जिन डिजिटल और प्रिंट सामग्री की जांच की गई, उनमें हिंसक जिहाद को बढ़ावा देने वाली भाषा, उग्र विचारधारा को वैधठहराने वाले कथन और युवाओं को आतंकी नेटवर्क की ओर आकर्षित करने वाली सामग्री पाई गई। सुरक्षा एजेंसियों ने चेतावनी दी कि यह साहित्य नसिर्फ युवाओं को गुमराह कर रहा है, बल्कि अलग-अलग समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव बढ़ाने का माध्यम भी बन रहा था। सरकार ने इसेराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताया। अधिसूचना में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि प्रतिबंधित साहित्य का डिजिटल रूप में प्रसार करनेवालों पर भी कड़ी कार्रवाई होगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन पोर्टल, मैसेजिंग ऐप, वेबसाइटें और एन्क्रिप्टेड ग्रुप अब निगरानी के दायरे मेंहैं। बीएनएसएस की धारा 98 और 99 ऐसी सामग्री को तत्काल जब्त करने का अधिकार देती हैं। इसके अलावा आईटी एक्ट की धारा 67 औरभारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 299 के तहत भी यह सामग्री आपत्तिजनक मानी गई है। कट्टरपंथी विचारों को फैलने से रोकने के लिए अत्यंत आवश्यकअसम पुलिस, सीआईडी, साइबर क्राइम यूनिट और जिला पुलिस प्रमुखों को आदेश दिया गया है कि वे इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू करें। सरकारने साफ किया है कि किसी भी उल्लंघन पर तुरंत कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। जिला स्तर पर विशेष टीमें गठित की जा रही हैं जो दुकानों, पुस्तकविक्रेताओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निगरानी रखेंगी। राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम समाज में कट्टरपंथी विचारों को फैलने से रोकने केलिए अत्यंत आवश्यक है। सरकार ने कहा कि जिहादी सामग्री राज्य के सौहार्दपूर्ण वातावरण को नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए इस पर रोकलगाना अनिवार्य था। प्रशासन का मानना है कि इस कड़ी कार्रवाई से युवाओं को गुमराह करने की कोशिशों पर लगाम लगेगी और राज्य में शांतिव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभियान लंबे समय तक जारी रहेगा और किसी भी प्रकार की कट्टरपंथी गतिविधिको बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पुतिन की भारत यात्रा शशि थरूर का संदेश, उथल-पुथल भरी दुनिया में द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत रखना जरूरी

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय भारत यात्रा पर दिल्ली पहुंचे हैं। उनका पालम एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद जाकर उनकास्वागत किया। राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि की उथल-पुथल भरी दुनिया में, जहां बहुत सारे रिश्तेअनिश्चितता के घेरे में हैं, ऐसे में हमारे मौजूदा रिश्तों को मजबूत करना जरूरी हो जाता है। राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा पर बोलते कांग्रेस नेता शशिथरूर ने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण है। यह एक महत्वपूर्ण संबंध है और लंबे समय से रहा है। आज की इस उथल-पुथल भरी दुनिया में, जहां इतनेसारे संबंध अनिश्चित हो गए हैं। हमारे पास जो संबंध हैं उन्हें मजबूत करना महत्वपूर्ण हो जाता है। किसी को यह गलतफहमी नहीं होनी चाहिए किइसका असर दूसरे देशों के साथ हमारे रिश्तों पर पड़ेगा, क्योंकि भारत में विभिन्न सरकारोंके साथ स्वतंत्र संबंध रखने की क्षमता है। हम एक ऐसा राष्ट्र हैंजिसने हमेशा संप्रभु स्वायत्तता में विश्वास किया है। पुतिन को बताएंगे कि भारत इसे कैसे देखताथरूर ने आगे कहा कि अपनी मित्रता, अपनी साझेदारियों और अपने राष्ट्रीय हितों को तय करने की हमारी स्वायत्तता हमारे डीएनए में समाहित है। हालके वर्षों में, विशेष रूप से दो क्षेत्रों में, रूसी मित्रता का महत्व सिद्ध हुआ है। हाल के वर्षों में हमें रूस से काफी तेल और गैस मिली है, और रूस से रक्षाआयात का महत्व ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एक बार फिर प्रदर्शित हुआ, जब एस-400 ने हमें दिल्ली सहित हमारे शहरों को निशाना बनाने वाली कईपाकिस्तानी मिसाइलों से बचाया। कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि अगर इस बैठक के दौरान समझौते होते हैं, तो यह एक महत्वपूर्ण रिश्ते को मजबूतकरने का एक हिस्सा होगा। मेरे विचार में यह संबंध अमेरिका या चीन के साथ हमारे रिश्तों की कीमत पर नहीं आते हैं।पूर्व राजनयिक केपी फैबियन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उम्मीद है कि वे द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के प्रयासों को जारी रखते हुए, मौजूदा रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत की स्थिति को स्पष्ट रूप से व्यक्त करेंगे। फैबियन ने कहा, यह पहली यात्रा है, और स्वाभाविक रूप से, प्रधानमंत्रीमोदी ने यह रुख अपनाया है कि यह युद्ध का युग नहीं है। वह राष्ट्रपति पुतिन को बताएंगे कि भारत इसे कैसे देखता है, क्योंकि भारत चाहता है कि यहयुद्ध जल्द से जल्द समाप्त हो। संबंधों को मजबूत रखना अहम हो जाताफैबियन ने कहा कि भारत के रुख के बावजूद, मास्को के दीर्घकालिक लक्ष्यों में बदलाव की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि इससेराष्ट्रपति पुतिन के स्पष्ट रणनीतिक उद्देश्य में कोई बदलाव आएगा, जिसका उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप से पुरजोर समर्थन प्राप्त है। इसके अलावा, उन्होंने कहाकि दोनों देश अपनी साझेदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा, दोनों देशों (रूस और भारत) को अपने द्विपक्षीय संबंधों को गहरा, मजबूत औरव्यापक बनाने से काफी फायदा होगा और प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन यही करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। रक्षा पर जोर दिया जाएगा। राष्ट्रपतिपुतिन के भारत दौरे के महत्व को रेखांकित करते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा है कि, उथल-पुथल भरी दुनिया में पुराने संबंधों को मजबूतरखना अहम हो जाता है। थरूर ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 की महत्वता पर खुलकर अपनी राय रखी।

दिल्ली-एनसीआर में जहरीली हवा का असर, पक्षियों की चहचहाहट हुई कम, प्रजनन क्षमता घटने लगी

दिल्ली-एनसीआर इन दिनों जहरीली हवा की गिरफ्त में है और इसका दुष्प्रभाव सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं रहा है। हवा में बढ़ते धूलकण, जहरीलीगैसें और घने स्मॉग ने पूरे पर्यावरण को बीमार-सा बना दिया है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि जहां इंसानी जीवन मुश्किल होता जा रहा है, वहींबेजुबान पशु-पक्षी भी प्रदूषण की मार को चुपचाप सह रहे हैं।कुदरत नहीं इंसानों की वजह से निरंतर बिगड़ती वायु गुणवत्ता ने पक्षियों के श्वसन तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिसकी वजह से वह ऊंचीउड़ान भी नहीं भर पा रहे हैं। बेजुबानों के लिए हालत इस कदर खराब हो गए हैं कि कई पक्षियों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। यही वजह है किसुबह सुनाई देने वाली पक्षियों की चहचहाहट भी कम सुनाई दे रही है। प्रदूषण के बढ़ते खतरे को कम करने के लिए समय रहते प्रभावी कदम नहींउठाए गए, तो दिल्ली–एनसीआर की जैव विविधता और मानव स्वास्थ्य दोनों ही गंभीर संकट में पड़ सकते हैं। विशेषज्ञों ने चेताया है कि वायु प्रदूषणसिर्फ पक्षियों को ही नहीं बल्कि कीड़े-मकौड़ों को भी नुकसान पहुंचा रहा है, जो स्वयं पक्षियों का भोजन होते हैं। हवा के सहारे उड़ते थेइस तरह पूरा पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है। अरावली और नीला हौज जैव विविधता पार्क के साइंटिस्ट इंचार्ज डॉ. शाह हुसैन कहते हैं किपक्षियों के फेफड़े इंसानों से ज्यादा नाजुक होते हैं, इसलिए प्रदूषण का असर उन पर अधिक गंभीर होता है। दिल्ली के चिकित्सालयों और रेस्क्यू सेंटर्समें घायल पक्षियों की संख्या बढ़ती जा रही है। इनमें कबूतर, तोते, चील, कोयल, कौए आदि शामिल हैं, जिनमें सबसे अधिक मामले कबूतरों के हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रदूषण पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले समय में पक्षियों की संख्या में बड़ी गिरावट देखी जा सकतीहै। कभी जहां नीली खुली हवा में हम पंख फैलाकर उड़ा करते थे,वहीं अब हर सांस भारी हो गई है।हमारे छोटे-छोटे फेफड़े इस धुएं में घुटते हैं। पेड़जिन पर हम बैठते थे, वही बीमार पड़ गए हैं। कभी सूरज की दिशा देखकर उड़ने वाले हम,अब धुएं की मोटी चादर में रास्ता टटोलते रहते हैं। हमचहकते थे, अब हम खामोश हैं। हम हवा के सहारे उड़ते थे, अब वही हवा हमें गिरा देने पर तुली लगती है। उनकी प्रजनन क्षमता घटने लगती हैवजीराबाद स्थित वाइल्डलाइफ रेस्क्यू सेंटर के अध्यक्ष मोहम्मद सऊद ने बताया कि प्रदूषण का सीधा असर पक्षियों की सेहत पर दिख रहा है। उन्होंनेकहा कि आसमान ही पक्षियों का घर होता है, लेकिन इंसानों की लापरवाही के कारण अब ये घर भी प्रदूषण से भर गया है। हाल ही, में एक घायलकोयल को उनके पास लाया गया, जिसे सांस लेने में भारी परेशानी हो रही थी। अरावली जैव विविधता पार्क की वन्यजीव पारिस्थितिकीविद डॉ. आयशा सुल्ताना ने कहा कि शहरी इलाकों के साथ-साथ जंगलों में रहने वाले पक्षी भी प्रदूषण से प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण बढ़ने से उनका भोजनढूंढना कठिन हो गया है। वह बताती हैं कि जब पक्षियों को पर्याप्त भोजन नहीं मिलता, तो उनकी प्रजनन क्षमता घटने लगती है।

आप सांसद राघव चड्ढा का राज्यसभा में 10 मिनट डिलीवरी सेवाओं पर विरोध, गिग वर्करों की सुरक्षा की चिंता

आम आदमी पार्टी (आप) सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा में ‘शून्यकाल’ के दौरान तेजी से बढ़ रही 10 मिनट डिलीवरी सेवाओं पर कड़ा विरोध जतायाऔर कहा कि इस प्रथा को तुरंत बंद किया जाना चाहिए क्योंकि इससे गिग वर्करों की जान पर बन आती है। उन्होंने कहा कि ये डिलीवरी बॉय कोईमशीन नहीं, बल्कि किसी के पिता, पति, भाई या बेटे हैं। राघव चड्ढा ने कहा- ‘हम 10 मिनट में खाना आने की उम्मीद तो रखते हैं, लेकिन क्या हम उनलोगों की सुरक्षा के बारे में सोचते हैं जो यह डिलीवरी करते हैं?’ राघव चड्ढा ने कहा कि जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट, जेप्टो, ओला-उबर जैसी कंपनियों मेंकाम करने वाले डिलीवरी और सवारी सेवा कर्मी देश की अर्थव्यवस्था को चलाने वाले अदृश्य पहिए हैं। वे रोज मोबाइल एप के लिए बटन दबाते ही’ऑर्डर आ गया है’, ‘सवारी आ गई है’ जैसे नोटिफिकेशन देकर लोगों की सुविधा सुनिश्चित करते हैं। लेकिन लोग इन सेवाओं के पीछे काम करने वालेव्यक्ति की हालत और संघर्ष को नहीं देखते। क-स्टार रेटिंग जैसी स्थितियां बन जातीउन्होंने कहा कि 10-मिनट डिलीवरी का दबाव इतना ज्यादा है कि डिलीवरी कर्मियों को ओवरस्पीड, लाल सिग्नल पार, और ट्रैफिक नियम तोड़ने परमजबूर होना पड़ता है। राघव चड्ढा के अनुसार यदि वे कुछ मिनट लेट हो जाएं तो रेटिंग गिर जाती है, इंसेंटिव कट जाता है, एप लॉग आउट कर दियाजाता है। आईडी ब्लॉक होने का डर रहता है राघव चड्ढा ने आगे कहा- सिर्फ पांच से सात मिनट की देरी पर गाली-गलौज, धमकी, एक-स्टार रेटिंगजैसी स्थितियां बन जाती हैं, जिससे पूरे महीने की कमाई प्रभावित होती है। सुरक्षित कामकाजी माहौल और सम्मानजनक वेतन की व्यवस्थाआप सांसद ने कहा कि गिग वर्कर 12-14 घंटे की ड्यूटी करते हैं, बारिश, सर्दी, गर्मी, हर मौसम में काम करते हैं। इस दौरान उनके पास सुरक्षात्मककपड़े नहीं होते हैं। उनके लिए कोई बोनस या जोखिम भत्ता नहीं भी नहीं होता है। राघव चड्ढा ने कहा कि फैक्ट्री कर्मियों की तुलना में, गिग वर्करों केपास, स्थायी नौकरी, सुरक्षित कार्य वातावरण, स्वास्थ्य या दुर्घटना बीमा, किसी भी तरह की सुरक्षा मौजूद नहीं है। राघव चड्ढा ने केंद्र सरकार और सदनसे मांग की कि- 10 मिनट डिलीवरी सेवा को बंद किया जाए, गिग वर्करों के अधिकार सुरक्षित किए जाएं। उनके लिए स्वास्थ्य लाभ, बीमा, सुरक्षितकामकाजी माहौल और सम्मानजनक वेतन की व्यवस्था की जाए।

PM मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा 

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन का दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के रिश्ते कई ऐतिहासिक पड़ावों पर पहुँच रहे हैं.. पिछले 10 सालों मेंदुनिया ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और इन सबके बीच, भारत-रूस के रिश्ते समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं- PM मोदी भारत और रूस लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं,चाहे पहलगाम में हुआ आतंकवादी हमला हो याक्रोकस सिटी हॉल पर हुआ कायरतापूर्ण हमला, इन सभी घटनाओं की जड़ एक ही है- PM मुझे पूरा भरोसा है कि यह प्लेटफॉर्म हमारे बिज़नेस संबंधों को नई मजबूती देगा। यह एक्सपोर्ट, को-प्रोडक्शन और को-इनोवेशन के लिए भी नएदरवाज़े खोलेगा, हाल ही में रूस में दो नए भारतीय कॉन्सुलेट खोले गए हैं। इससे दोनों देशों के नागरिकों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी और हमारीआपसी नज़दीकी और मज़बूत होगी – PM मैं रूसी डेलीगेशन के गर्मजोशी और मेहमाननवाज़ी भरे स्वागत के लिए भारत की राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और हमारे सभी भारतीय साथियों को दिल सेधन्यवाद देता हूँ- पुतिन हम सबसे बड़ा भारतीय न्यूक्लियर पावर प्लांट , कुडनकुलम बनाने के लिए एक फ्लैगशिप प्रोजेक्ट भी चला रहे हैं,6 में से दो रिएक्टर यूनिट पहले हीएनर्जी नेटवर्क से जुड़ चुकी हैं, और चार अभी बन रही हैं- पुतिन रूसी कंपनियां प्रधानमंत्री मोदी फ्लैगशिप प्रोजेक्ट मेक इन इंडिया के तहत इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स का प्रोडक्शन शुरू करेंगी- पुतिन !!

रुपया गिरावट पर चौधरी सुनील सिंह का हमला, सरकार प्रचार में व्यस्त, अर्थव्यवस्था संकट में

लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने भारतीय रुपये की गिरती स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि एक तरफ़ सरकार विश्वपटल पर भारत को “विश्व गुरु” बताने में लगी है, जबकि दूसरी तरफ़ अर्थव्यवस्था लगातार गिरावट की ओर बढ़ रही है। चौधरी सुनील सिंह ने कहा किरुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच चुका है और वर्तमान स्थिति ऐसी है जैसे भारतीय रुपया “डॉलर के सामने भीख माँगता” दिखाई देता है। उनकेअनुसार, सरकार का ध्यान केवल प्रचार, इवेंट और शो-ऑफ़ पर केंद्रित है, जबकि आर्थिक चुनौतियों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। महंगाई बढ़ती हैउन्होंने कहा जब रुपया कमजोर होता है तो महंगाई बढ़ती है, आयात महंगा होता है और उसका सीधा असर आम जनता, किसान, व्यवसायी औरनौजवान पर पड़ता है। लेकिन सरकार इस पर मौन है। हर मुद्दे पर फ़ोटोशूट और भाषण होते हैं, मगर आर्थिक बदहाली पर कोई जवाब नहीं। लोकदलअध्यक्ष के इन बयानों ने मौजूदा आर्थिक स्थिति पर सरकार की नीतियों को लेकर नए सिरे से बहस छेड़ दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकारसमय रहते कदम नहीं उठाती, तो आने वाले दिनों में ये स्थिति आम लोगों के लिए और भी मुश्किलें बढ़ा सकती है।

पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल को भावपूर्ण विदाई बांसुरी स्वराज को पितृ शोक, दिल्ली में उमड़ा श्रद्धांजलियों का सैलाब

सरिता साहनी04 दिसंबर 2025, नई दिल्लीस्वराज कौशल के निधन से गम का माहौलदेश के प्रसिद्ध वरिष्ठ अधिवक्ता और मिजोरम के पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल के अचानक निधन की खबर ने पूरे देश को दुखी कर दिया। दोपहर मेंउनके घर पर हृदय आघात आने से उनकी हालत बिगड़ गई। परिवार ने उन्हें तुरंत एम्स अस्पताल पहुँचाया, लेकिन डॉक्टरों ने सभी प्रयासों के बाद उन्हेंमृत घोषित कर दिया। उनके निधन से न सिर्फ उनका परिवार, बल्कि पूरा देश शोक में डूब गया है। सुषमा स्वराज के जीवनसाथी और बांसुरी स्वराज के पितास्वराज कौशल, भारत की पूर्व विदेश मंत्री स्वर्गीय सुषमा स्वराज के पति थे। परिवार के लिए यह क्षति बहुत गहरी है, खासकर उनकी बेटी सांसदबांसुरी स्वराज के लिए, जिनके सिर से पिता का साया उठ गया। अंतिम संस्कार से लेकर पूरी प्रक्रिया के दौरान बांसुरी स्वराज भावुक नजर आईं।उन्होंने अपने पिता के संस्कार सनातन परंपरा के अनुसार सूर्यास्त से पहले पूरा किया। अस्पताल से घर और फिर अंतिम यात्रा की शुरुआतएम्स अस्पताल से डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद स्वराज कौशल का पार्थिव शरीर उनकी बेटी के आवास 10 तालकटोरा रोड लाया गया।वहां परिवार, रिश्तेदार, करीबी लोग और उनके सम्मान में पहुंचे नेता लगातार उन्हें श्रद्धांजलि देने आते रहे। इसके बाद सभी धार्मिक और पारंपरिक रस्मेंपूरी की गईं और पार्थिव शरीर को अंतिम यात्रा के लिए लोधी रोड श्मशान घाट ले जाया गया। बड़े नेताओं की मौजूदगी और श्रद्धांजलिबांसुरी स्वराज के आवास पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, गजेन्द्र सिंह शेखावत, किरण रिजिजू, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत पांडा, केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी, सांसद कमलजीतसहरावत, सुप्रिया शुले, निशिकांत दूबे, विपल देव, संगीता देवी, मालविका देवी, स्वाति मालीवाल समेत कई नेताओं ने पहुंचकर उनके पार्थिव शरीरपर पुष्पांजलि अर्पित की। लोधी रोड श्मशान घाट पर जनसागरअंतिम संस्कार के समय लोधी रोड श्मशान घाट पर हजारों लोग मौजूद थे।केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्लीविधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, आरएसएस के वरिष्ठ सदस्य इंद्रेश कुमार, अनिल गुप्ता, भारत अरोड़ा, दयानंद, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्रसचदेवा, सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी, मनोज तिवारी, डॉ. संबित पात्रा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय, आदेश गुप्ता, मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह, महापौर सरदार राजा इकबाल सिंह, एनडीएमसी उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल, दिनेश प्रताप सिंह और कई विधायकों, निगम पार्षदों, वरिष्ठकानूनविदों, प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने भी अंतिम दर्शन करके श्रद्धांजलि दी। वीरेन्द्र सचदेवा का भावुक वक्तव्यदिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित करते हुए कहा कि श्री स्वराज कौशल का निधन सिर्फ बांसुरी स्वराज केलिए निजी क्षति नहीं है, बल्कि देश ने एक बेहद कुशल अधिवक्ता और सच्चे स्टेट्समैन को खो दिया है। उन्होंने कहा कि कानून और संविधान के प्रतिस्वराज कौशल की समझ अद्भुत थी, जिसे हमेशा याद किया जाएगा। दिल्ली पुलिस की अंतिम सलामीअंतिम संस्कार से पहले दिल्ली पुलिस की एक टुकड़ी ने स्वराज कौशल को सम्मानपूर्वक अंतिम सलामी दी। यह सलामी उनके लंबे सार्वजनिक जीवनऔर देश सेवा के प्रति उनके योगदान की पहचान थी। इस सम्मान को देखकर मौजूद लोगों की आँखें नम हो गईं। बांसुरी स्वराज द्वारा अंतिम संस्कार की विधि पूरीसनातन परंपरा के अनुसार सूर्यास्त से पहले बांसुरी स्वराज ने अपने पिता की चिता को अग्नि दी। इस भावुक क्षण में पूरे श्मशान घाट में शांति औरगंभीरता का वातावरण छाया रहा। हर व्यक्ति के चेहरे पर सम्मान, दुख और संवेदना साफ दिखाई दे रही थी। देश ने खोया एक ज्ञानी, सरल और सम्मानित व्यक्तित्वस्वराज कौशल न सिर्फ एक अनुभवी वकील थे, बल्कि जनसेवा में गहरी आस्था रखने वाले सादगीपूर्ण व्यक्तित्व के धनी थे। वह मिजोरम केराज्यपाल रह चुके थे और अपनी सादगी, विद्वता और सौम्य व्यवहार के लिए देशभर में सम्मानित थे। उनके निधन ने एक युग का अंत जैसा दर्द पैदाकिया है। शोक और संवेदनाओं की लहरउनके निधन के बाद राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी जगत से लगातार श्रद्धांजलियों का सिलसिला जारी है। हर कोई उन्हें एक कुशल सलाहकार, समर्पित जनसेवक और सरल स्वभाव वाले इंसान के रूप में याद कर रहा है। सोशल मीडिया पर भी उनकी स्मृतियों को साझा किया जा रहा है औरलोग अपनी संवेदनाएं प्रकट कर रहे हैं।स्वराज कौशल की विरासत सदैव याद रहेगीस्वराज कौशल की स्मृतियाँ केवल उनके परिवार या राजनीतिक दायरे तक सीमित नहीं हैं। उनका जीवन, कार्य और उनके द्वारा निभाए गए दायित्वआने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे। उनका जाना एक गहरी रिक्तता छोड़ गया है, लेकिन उनका सम्मान, उनकी सरलता और देश के प्रतिउनकी निष्ठा हमेशा याद रखी जाएगी।  पुतिन के भारत दौरे से पहले राहुल गांधी का बड़ा आरोप, सरकार विदेशी नेता

दिल्ली को स्वच्छ बनाने की बड़ी पहल शहरी विकास मंत्री आशीष सूद का वार्ड 99 में निरीक्षण

सरिता साहनी04 दिसंबर 2025, नई दिल्लीहरि नगर विधानसभा में सफाई व्यवस्था की जमीनी हकीकत का जायज़ादिल्ली सरकार के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने हरि नगर विधानसभा के वार्ड संख्या 99 में कई महत्वपूर्ण स्थानों का दौरा कर कूड़ा प्रबंधन औरस्वच्छता व्यवस्था की स्थिति का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने FCTS प्वाइंट, सब्ज़ी मंडी के पास, नांगल राया, मंगल पांडे मार्ग, माया एन्क्लेव केसामने, पीली कोठी और JJ क्लस्टर जैसे गार्बेज वल्नरेबल पॉइंट्स की वास्तविक स्थिति देखी। निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि कुछ ढलावपॉइंट्स की हालत चिंताजनक है और वहाँ कॉम्पैक्ट ट्रांसफर स्टेशन जैसे प्रबंधों की आवश्यकता है। FCTS प्वाइंट पर जर्जर सब स्टेशन को लेकर त्वरित कार्रवाई के निर्देशसब्ज़ी मंडी के पास स्थित FCTS प्वाइंट पर निरीक्षण के समय मंत्री ने देखा कि कूड़ा घर के बिल्कुल पास BSES का सब स्टेशन बेहद खराबस्थिति में है। यह स्थिति किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती थी। इस पर उन्होंने BSES और MCD अधिकारियों को तुरंत सब स्टेशनकी मरम्मत कराने और कूड़ा घर के आसपास गड्ढों को भरने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि कूड़ा घर के बाहर कचरा फैलने से रोकने के लिएउसके चारों ओर दीवार बनाई जाए। रात में कूड़ा फेंकने की समस्या को खत्म करने की तैयारीमंगल पांडे मार्ग और माया एन्क्लेव के सामने स्थानीय लोगों ने शिकायत की कि बंद किए जा चुके कूड़ा घर में फिर भी लोग रात के समय कचरा डालदेते हैं। इस जानकारी पर मंत्री ने MCD अधिकारियों को आदेश दिया कि रात में यहाँ सिविल डिफेंस कर्मियों की तैनाती की जाए, ताकि कोई भीव्यक्ति अंधेरे में कचरा न फेंक सके। पीली कोठी और JJ क्लस्टर में सफाई की कमजोर स्थिति से नाराज़गीपीली कोठी के पास JJ क्लस्टर में निरीक्षण के दौरान निवासियों ने बताया कि यहाँ नियमित रूप से सफाई नहीं होती। कूड़ा इकट्ठा हो जाता है औरउसके सही प्रबंधन की व्यवस्था भी नहीं है। MCD अधिकारियों ने बताया कि इस इलाके में नौ टिप्पर कचरा उठाने में लगे हैं। इसके बावजूद सफाईठीक से नहीं हो रही थी, जिस पर मंत्री महोदय ने नाराज़गी जताते हुए सभी टिप्परों के नंबर, ड्राइवर के नाम और रूट प्लान तत्काल उपलब्ध कराने कोकहा। उन्होंने साफ कहा कि सफाई कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कीजाएगी। दिल्ली सरकार का मिशन स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल राजधानीनिरीक्षण के बाद आशीष सूद ने बताया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, सभी मंत्री और विधायक लगातार दिल्ली के ऐसे इलाकों का दौरा कर रहे हैं जहाँस्वच्छता और कूड़ा प्रबंधन को मज़बूत करने की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि हर गार्बेज वल्नरेबल पॉइंटपर ऐसी सुविधाएँ विकसित हों जहाँ कचरा सही तरीके से डाला, इकट्ठा और अलग किया जा सके, ताकि शहर अधिक स्वच्छ और पर्यावरण केअनुकूल बन सके। नगर निगम और राज्य सरकार में सहयोग की नई संस्कृतिसूद ने कहा कि दिल्ली सरकार अब टकराव नहीं बल्कि समन्वय और समाधान की नीति पर काम कर रही है। पिछली सरकारों में नगर निगम और राज्यसरकार के बीच खींचतान रहती थी, लेकिन अब दोनों मिलकर दिल्ली की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। शहरी विकास विभाग जरूरत पड़ने परMCD को आर्थिक और तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगा, ताकि सफाई व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सके। 10 दिनों बाद दोबारा निरीक्षण का ऐलानमंत्री ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा कि अगले 10 दिनों में इन सभी स्थलों पर साफ-सफाई और कूड़ा प्रबंधन की स्थिति में स्पष्ट सुधारदिखना चाहिए।उन्होंने घोषणा की कि वे 10 दिन बाद इन स्थानों का पुनः निरीक्षण करेंगे। स्थानीय निवासियों को आश्वस्त करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकारयुद्धस्तर पर काम कर रही है और शहर को स्वच्छ, आधुनिक और रहने योग्य बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।