दिल्ली में कैंसर का बढ़ता खतरा सरकार की लापरवाही ने बिगाड़ा स्वास्थ्य ढांचा – देवेंद्र यादव

सरिता साहनी04 दिसंबर 2025, नई दिल्ली कैंसर के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई दिल्ली की चिंताआईसीएमआर–नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम की ताज़ा रिपोर्ट ने दिल्ली में कैंसर की भयावह स्थिति को उजागर कर दिया है। कांग्रेस नेता देवेंद्र यादवके अनुसार दिल्ली में हर वर्ष कैंसर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो यह दिखाती है कि राजधानी की स्वास्थ्य व्यवस्था बड़े संकट की ओर बढ़रही है। साल 2024 में 28,387 मरीज सामने आए, जबकि 2023 में 27,561 और 2022 में 26,735 मामलों का खुलासा हुआ। यह बढ़तेआंकड़े चिंता पैदा करते हैं और दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करते हैं। दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं की कमजोरियाँ खुलकर सामनेदेवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का सामना करने के लिए अस्पतालों में संसाधन बेहद सीमित हैं। आधुनिक मशीनें, विशेषज्ञ डॉक्टर और कैंसर केंद्रों की पर्याप्त संख्या न होने के कारण मरीजों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा किदिल्ली में न तो पर्याप्त कैंसर स्क्रीनिंग की सुविधाएँ हैं और न ही ऐसे अस्पताल जो बड़ी संख्या में मरीजों का समय पर इलाज कर सकें। इन कमियों केकारण मरीजों को या तो निजी अस्पतालों की ओर जाना पड़ता है या इलाज में देरी होने के कारण स्थिति और गंभीर हो जाती है। दिल्ली की जहरीली हवा कैंसर के खतरे को और बढ़ा रही हैदिल्ली की खराब वायु गुणवत्ता कई वर्षों से गंभीर समस्या बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि हवा में मौजूद धूल, रसायन, धुआँ और प्रदूषक तत्वफेफड़ों व अन्य प्रकार के कैंसर के बड़े कारण बन रहे हैं। देवेंद्र यादव ने कहा कि राजधानी की हवा में मौजूद खतरनाक ज़हरीले तत्व लोगों के स्वास्थ्य को अत्यधिक नुकसान पहुँचा रहे हैं। उन्होंने यह भीबताया कि प्रदूषण, तनाव, मिलावटी खान-पान और अस्वास्थ्यकर जीवनशैली मिलकर कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी कर रहे हैं। कैंसर इलाज में सरकार की नाकामी स्पष्टदेवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार कैंसर मरीजों के लिए दवाइयों, परीक्षणों और इलाज की सुविधाओं को बढ़ाने में बिल्कुल नाकामरही है।उन्होंने बताया कि दिल्ली में नकली दवाइयों का धंधा खुलेआम चल रहा है, जिससे मरीज बीमारी से लड़ने के बजाय गलत दवाइयों के कारण अपनीजान गंवा रहे हैं। यह सरकार की गंभीर लापरवाही और स्वास्थ्य विभाग की कमजोर कार्यप्रणाली को दर्शाता है। दूसरी ओर, गरीब मरीज महंगे निजीअस्पतालों का खर्च वहन नहीं कर सकते, और सरकारी अस्पतालों की हालत लगातार खराब होती जा रही है। दिल्ली में कैंसर की बढ़ती संभावनाएँ चौंकाने वालीआईसीएमआर की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में हर 6 पुरुषों में से 1 और हर 7 महिलाओं में से 1 व्यक्ति को अपने जीवनकाल में कैंसर होने कीसंभावना है। पुरुषों में कैंसर के निदान की औसत आयु 58 वर्ष और महिलाओं में 55 वर्ष बताई गई है। इस औसत के अनुसार दिल्ली देश के उनराज्यों में शामिल हो गया है जहां कैंसर का खतरा सर्वाधिक है, और इसका सीधा कारण दिल्ली का खतरनाक वातावरण माना जा रहा है। आवश्यक उपाय जागरूकता, स्क्रीनिंग और बेहतर सुविधाएँदेवेंद्र यादव ने कहा कि कैंसर के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए दिल्ली सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। सरकार को पूरे शहर में कैंसरजागरूकता अभियान चलाना चाहिए, अस्पतालों में स्क्रीनिंग सुविधाएँ बढ़ानी चाहिए और आधुनिक कैंसर उपचार केंद्र स्थापित करने चाहिए। इसकेसाथ ही जरूरतमंद मरीजों के लिए मुफ्त दवाइयों और उपचार की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता को बचाने के लिए येकदम अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन गए हैं। जनता की सुरक्षा में विफल रही सरकारदिल्ली में बढ़ते कैंसर मामलों की भयावह स्थिति साफ बताती है कि प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती और दवाइयों की निगरानी मेंसरकार बुरी तरह विफल रही है। देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली में बढ़ती बीमारी और बिगड़ते स्वास्थ्य ढांचे के लिए मौजूदा सरकार पूरी तरह जिम्मेदारहै। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए तो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी राजधानी के लिए और भी बड़ा संकट बनसकती है।
2009 से अब तक अमेरिका ने 18,822 भारतीयों को निर्वासित किया, 2025 में अकेले 3,258 भारतीयों को भेजा वापस राज्यसभा में विदेशमंत्री एस जयशंकर की जानकारी

केंद्र सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा को बताया कि 2009 से अब तक अमेरिका ने 18,822 भारतीय नागरिकों को निर्वासित किया है। वहीं जनवरी2025 से अब तक 3,258 भारतीय नागरिकों को वापस भेजा गया है। यह जानकारी विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में एक पूरक प्रश्न केजवाब में दी है। राज्यसभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि राज्य सरकारों और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने भी मानव तस्करीके मामलों की जांच की है। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, मानव तस्करी के सबसे अधिक मामले पंजाब से देखने को मिले हैं।विदेश मंत्री ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को बताया, 2009 से अब तक कुल 18,822 भारतीय नागरिकों को भारत डिपोर्ट कियागया है। दो अक्टूबर को दो अन्य लोगों को गिरफ्तार कियाउन्होंने कहा कि 2023 में 617 भारतीयों को अमेरिका से निर्वासित किया गया था और 2024 में 1,368 लोगों को वापस भेजा गया था। लेकिन2025 में इस आंकड़े में बड़ा उछाल देखने को मिला। जनवरी 2025 से अभी तक कुल 3,258 भारतीय नागरिकों को अमेरिका ने वापस भेजा है।इनमें से 2032 लोगों (लगभग 62.3 प्रतिशत) को सामान्य उड़ानों के जरिए वापस भारत भेजा, जबकि बाकी 1,226 (37.6 प्रतिशत) अमेरिकीआव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) या सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा(सीबीपी) द्वारा संचालित चार्टर उड़ानों से लौटे हैं। लिखित सवालों काजवाब देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि एनआईए ने कुछ साल पहले एक मानव तस्करी विरोधी प्रकोष्ठ बनाया था। जिसे मानव तस्करी के मामलों कीजांच का प्राधिकार प्राप्त है। राज्यों ने भी इस प्रकार के मामलों में जांच शुरू की है। एनआईए ने मानव तस्करी के 27 मामलों में प्राथमिकी दर्ज करजांच की है, जिनमें 169 गिरफ्तारियां हुई हैं और 132 व्यक्तियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किए गए हैं। एनआईए ने हरियाणा और पंजाब में सातअगस्त को दो प्रमुख तस्करों को और हिमाचल प्रदेश में दो अक्टूबर को दो अन्य लोगों को गिरफ्तार किया। लेकिन हिरासत में उनके साथ दुर्व्यवहार हुआविदेश मंत्री ने कहा कि राज्यों में पंजाब में मानव तस्करी के सर्वाधिक मामले हैं। पंजाब सरकार ने एसआईटी और एसआईटी गठित की है। पंजाबसरकार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, 58 अवैध ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ 25 प्राथमिकी दर्ज हुई हैं और 16 आरोपियों को गिरफ्तार कियागया है। वहीं हरियाणा राज्य में 2,325 मामले और 44 प्राथमिकी दर्ज हुई हैं। इन मामलों में 27 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गुजरात राज्य नेभी एक महत्वपूर्ण तस्कर को गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय, अमेरिकी आईसीई/सीबीपी की निर्वासन प्रक्रिया के दौरान भारतीयनागरिकों के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने हेतु अमेरिकी पक्ष के साथ निरंतर बातचीत कर रहा है।उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने विशेषकर महिलाओं और बच्चों के लिए हथकड़ी-बेड़ियों के उपयोग को लेकर अपनी कड़ी आपत्ति अमेरिकी अधिकारियोंके समक्ष दर्ज कराई है। जयशंकर ने कहा पांच फरवरी की निर्वासन उड़ान के बाद से महिलाओं और बच्चों को बेड़ियां पहनाने की कोई घटना मंत्रालयके संज्ञान में नहीं आई है। हरजीत कौर के मामले पर उन्होंने कहा, हमारे आव्रजन अधिकारियों ने पुष्टि की है कि उन्हें हथकड़ी नहीं लगाई गई थी, लेकिन हिरासत में उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ।
सोनिया गांधी और विपक्षी सांसदों ने संसद में किया वायु प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन, सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग

विपक्षी नेताओं ने गुरुवार को संसद भवन परिसर में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इसविरोध प्रदर्शन में सोनिया गांधी भी शामिल हुईं। सोनिया गांधी ने शहर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार से तुरंत एक्शन लेने की मांग की।हाथ में प्लेकार्ड लिए, कई विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने संसद भवन परिसर के मकर द्वार के बाहर नारे लगाए और प्रधानमंत्री से बयान देना बंद करनेऔर एक्शन लेने को कहा। वायु प्रदूषण की समस्या की गंभीरत को दिखाने के लिए कुछ सांसदों ने विरोध स्वरूप मास्क भी लगाए हुए थे। विरोधप्रदर्शन के बाद मीडिया से बात करते हुए सोनिया गांधी ने कहा, ‘यह सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वह कुछ करे क्योंकि बच्चे मर रहे हैं। मेरे जैसे बूढ़ेलोगों को भी मुश्किल हो रही है।’ प्रर्दशन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी शामिल हुए। कांग्रेस महासिचव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा किवायु प्रदूषण का मुद्दा राजनीतिक नहीं है और वे इस मुद्दे पर चर्चा और ठोस एक्शन की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘वायु प्रदूषण कोई राजनीतिकमुद्दा नहीं है। सरकार को ठोस एक्शन लेना चाहिए, हम सब इसमें साथ हैं। लोग परेशान हैं।’ गौरतलब है कि राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानीक्षेत्र इन दिनों खराब वायु गुणवत्ता की समस्या से जूझ रहे हैं। सरकार से ठोस कदम उठाने की मांगप्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, ‘बाहर के हालात तो देखिए। जैसा सोनिया जी ने कहा, बच्चे सांस नहीं ले पा रहे हैं। उन्हें अस्थमा है, और उनके जैसे वरिष्ठनागरिकों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। हालात साल दर साल खराब होते जा रहे हैं। हर साल सिर्फ बयान दिए जाते हैं, कोई ठोस एक्शन नहींलिया जाता। हम सबने कहा है कि सरकार को एक्शन लेना होगा और हम सब उनके साथ खड़े हैं। यह कोई पॉलिटिकल मुद्दा नहीं है कि हम एक-दूसरेपर उंगली उठाएं।’ कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, ‘मैंने आज काम रोको प्रस्ताव दिया है। दिल्ली में AQI 400 है, लोगों का बुरा हाल है। बच्चोंको सांस लेने में दिक्कत हो रही है। यह स्वास्थ्य की दृष्टि से एक बड़ा संकट है। इसपर सदन में चर्चा होनी चाहिए।’ विपक्षी सांसदों ने आज वायुप्रदूषण की समस्या को लेकर संसद भवन परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान सांसदों ने कहा कि वायु प्रदूषण राजनीतिक मुद्दा नहीं है औरइसके चलते बच्चों और बूढ़ों को भारी परेशानी हो रही है। उन्होंने सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की।
पुतिन के भारत दौरे से पहले राहुल गांधी का बड़ा आरोप, सरकार विदेशी नेताओं को विपक्ष से मिलने नहीं देती

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को आरोप लगाया कि सरकार अपनी ‘असुरक्षा’ के कारण विदेश से आने वाले गणमान्य व्यक्तियों को कहती है किवे विपक्ष के नेता (एलओपी) से न मिलें। राहुल गांधी का यह बयान तब सामने आया है, जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कुछ ही घंटे बाद दो दिनके भारत दौरे पर आने वाले हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, अब तक परंपरा रही है कि विदेश से आने वाले नेता विपक्ष के नेता सेभी मिलते थे। यह (पूर्व प्रधानमंत्री) अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के समय में भी होता था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेशमंत्रालय इस परंपरा का पालन नहीं कर रहे हैं। राहुल गांधी ने संसद परिसर में पत्रकारों से कहा, आम तौर पर परंपरा है कि विदेश से आने वाले नेताविपक्ष के नेता से भी मिलते हैं। यह वाजपेयी जी के समय होता था, मनमोहन सिंह जी के समय भी। लेकिन इन दिनों सरकार विदेशियों से कहती हैकि वे मुझसे न मिलें। विदेश जाते समय भी यही होता है। हमें संदेश मिलता है कि सरकार ने कहा है कि ‘आपसे न मिलें’। भारत-रूस व्यापार को बाहरी दबावों से सुरक्षित रखनाउन्होंने कहा कि विपक्ष का नेता भी भारत का प्रतिनिधित्व करता है और इन बैठकों से विदेशी नेताओं को एक अलग नजरिया मिलता है। लेकिनसरकार नहीं चाहती कि विदेशी नेता विपक्ष से मिलें। उन्होंने कहा, यह परंपरा है, लेकिन मोदी जी और विदेश मंत्रालय इस परंपरा का पालन नहींकरते। जब पूछा गया कि सरकार ऐसा क्यों करती है, तो उन्होंने कहा, यह उनकी असुरक्षा के कारण है। पुतिन आज शाम भारत पहुंचेंगे और शुक्रवारको प्रधानमंत्री मोदी के साथ शिखर बैठक करेंगे। इस बैठक में रक्षा संबंधों को मजबूत करना, भारत-रूस व्यापार को बाहरी दबावों से सुरक्षित रखनाऔर छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों पर सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। दुनिया में लोकतंत्र की छवि धूमिल हुईराहुल गांधी के इस आरोप पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा, यह बहुत अजीब है। एक प्रोटोकॉल होता है और सभी आने वाले गणमान्य व्यक्तिनेता प्रतिपक्ष से मिलते हैं। सरकार इस प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर रही है और उनकी सभी नीतियां इसी पर आधारित हैं। वे नहीं चाहते हैं कि कोईअपनी आवाज उठाए। वे किसी और की राय नहीं सुनना चाहते हैं। उन्हें लोकतंत्र के प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए। भगवान जाने उन्हें किस बातका डर है। लोकतंत्र में सभी को अपनी राय रखने का अधिकार होना चाहिए, चर्चा होनी चाहिए और उचित कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार असुरक्षित हैऔर यह फैसला उसी का प्रतिबिंब है। इसे प्रोटोकॉल को तोड़कर और पलटकर उन्हें क्या मिलेगा? यह उनकी असुरक्षा है। दुनिया में लोकतंत्र की छविधूमिल हुई है।
काशी में 19 साल के युवा ने हजारों मंत्रों का कंठस्थ पाठ कर सबको चौंकाया, प्रधानमंत्री मोदी और योगी आदित्यनाथ भी हुए देवव्रत की उपलब्धि के मुरीद

बिना किसी किताब को देखे, बिना रुके, लगातार 50 दिनों तक हजारों कठिन संस्कृत मंत्रों का शुद्ध उच्चारण करना आज के दौरान में किसी के लिएअसंभव सा लगता है, पर इसे 19 वर्ष के एक युवक ने इसे सच कर दिखाया। महाराष्ट्र के एक 19 वर्षीय युवा देवव्रत महेश रेखे ने वह कर दिखाया हैजो पिछले 200 वर्षों में किसी ने नहीं किया। उनकी इस कठिन ‘साधना’ ने न केवल काशी के विद्वानों को चौंका दिया, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीऔर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी उनका मुरीद बना दिया। देवव्रत महेश रेखे मूल रूप से महाराष्ट्र के अहिल्या नगर के रहने वाले हैं। महज 19 वर्ष की आयु में उन्होंने वेदों के प्रति वह समर्पण दिखाया है जो बड़े-बड़े विद्वानों के लिए भी दुर्लभ है। देवव्रत वर्तमान में वाराणसी (काशी) के रामघाटस्थित वल्लभराम शालिग्राम सांगवेद विद्यालय के छात्र हैं। देवव्रत एक वैदिक परिवार से आते हैं। उनके पिता वेदब्रह्मश्री महेश चंद्रकांत रेखे स्वयं एकप्रतिष्ठित वैदिक विद्वान हैं और उन्होंने ही देवव्रत को इस कठिन मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित किया है। पांडुरंग पुराणिक ने बताया किदेवव्रत ने जिस उपलब्धि को हासिल किया है, उसे वैदिक शब्दावली में ‘दंडकर्म पारायण’ कहा जाता है। यह वेदों के पाठ की सबसे जटिल विधियों मेंसे एक है। यह पाठ शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिन शाखा से संबंधित है। इसमें करीब 2,000 मंत्र शामिल हैं। इसके पाठ के नियम भी कठिन हैं।देवव्रत को बिना किसी ग्रंथ को देखे (कंठस्थ), पूरी शुद्धता और लय के साथ इन मंत्रों का उच्चारण करना था, और उन्होंने इसे कर दिखाया। यहअनुष्ठान लगातार 50 दिनों तक चला। उन्होंने 2 अक्तूबर से 30 नवंबर तक बिना किसी बाधा के इस उपलब्धि हो हासिल किया। 30 नवंबर कोदंडक्रम पारायण की पूर्णाहुति के बाद उन्हें शृंगेरी शंकराचार्य ने सम्मान स्वरूप सोने का कंगन और 1,01,116 रुपये दिया गया। दंडक्रम पारायणकर्ताअभिनंदन समिति के पदाधिकारियों चल्ला अन्नपूर्णा प्रसाद, चल्ला सुब्बाराव, अनिल किंजवडेकर, चंद्रशेखर द्रविड़ घनपाठी, प्रो. माधव जर्नादन रटाटेव पांडुरंग पुराणिक ने बताया कि नित्य साढ़े तीन से चार घंटे पाठ कर देवव्रत ने इसे पूरा किया। ये सफलता हमारी आने वाली पीढ़ियों की प्रेरणा बनने वादेवव्रत की उपलब्धि का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका इतिहास है। ऐसा माना जाता है कि ‘दंडकर्म पारायण’ का यह कठिन स्वरूप पिछले 200 वर्षोंमें किसी ने पूर्ण नहीं किया था। इससे पहले, लगभग दो सदी पूर्व नासिक के वेदमूर्ति नारायण शास्त्री देव ने यह उपलब्धि हासिल की थी। आज केडिजिटल दौर में, जब याददाश्त पर तकनीक हावी है, एक 19 साल के युवा द्वारा हजारों मंत्रों को कंठस्थ करना और उन्हें त्रुटिहीन सुनाना एक चमत्कारजैसा है। देवव्रत की इस सिद्धि ने देश के शीर्ष नेतृत्व का ध्यान अपनी ओर खींचा।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर देवव्रत की प्रशंसा करते हुए लिखा, “19 वर्ष के देवव्रत महेश रेखे जी ने जो उपलब्धिहासिल की है, वो जानकर मन प्रफुल्लित हो गया है। उनकी ये सफलता हमारी आने वाली पीढ़ियों की प्रेरणा बनने वाली है… काशी से सांसद होने केनाते मैं विशेष रूप से आनंदित हूं।”
रूस-अमेरिका की 5 घंटे की बैठक में ट्रंप की यूक्रेन योजना पर विवाद जारी, यूक्रेन संघर्ष पर अमेरिका और रूस के बीच चर्चाएं बेनतीजा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका की ओर से विशेष प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ के बीच बुधवार को हुई बैठक में ट्रंप की ‘यूक्रेन योजना’ पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं हो सका। रूसी राष्ट्रपति के सहायक यूरी उशाकोव ने बताया कि बातचीत लगभग पांच घंटे चली, जिसमेंअमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर भी शामिल थे। रूसी मीडिया समूह- रशिया टुडे (आरटी) के मुताबिक, उशाकोव ने कहा किअमेरिकी प्रस्तावों में कुछ बिंदु रूस को स्वीकार करने लायक लगे, हालांकि कई पक्ष ऐसे थे जो क्रेमलिन के हितों के तहत नहीं थे। उन्होंने कहा, “अबतक कोई समझौता नहीं हुआ है। कुछ अमेरिकी प्रस्ताव रूस को स्वीकार्य हैं, लेकिन कुछ नहीं। हमने मुद्दों के सार पर बात की, न कि विशेष शब्दों यासमाधान पर। दोनों पक्ष सहयोग की बड़ी संभावनाएं देखते हैं।” उशाकोव ने यह भी पुष्टि की कि बैठक में क्षेत्रीय मुद्दे पर भी चर्चा हुई। यह पूछे जानेपर कि क्या इन बातचीत से शांति करीब आई है, उन्होंने कहा, “निश्चित रूप से दूर नहीं हुई है।” दूसरी तरफ क्रेमलिन के अफसर किरिल दिमित्रिएव नेबैठक को उत्पादक बताया। ट्रंप द्वारा सुझाए गए शांति प्रयासों में अड़चन पैदा कर रहेरिपोर्ट के मुताबिक, वॉशिंगटन ने 28 बिंदुओं वाला एक संशोधित शांति प्रस्ताव साझा किया है, जिसे कीव और यूरोपीय देशों की आपत्तियों के बादबदला गया था, क्योंकि शुरुआती मसौदे को मॉस्को की शर्तों के प्रति काफी नरम माना गया था। गौरतलब है कि चर्चा से कुछ घंटे पहले ही पुतिन नेएक निवेश मंच से अपने संबोधन के दौरान कहा था कि अगर यूरोपीय देश टकराव का रास्ता चुनते हैं, तो रूस सैन्य मुकाबले के लिए तैयार है। पुतिनने कहा हम यूरोप से युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अगर वे शुरू करेंगे, तो हम तैयार हैं। यूरोपीय नेता बातचीत को प्राथमिकता नहीं दे रहे। उन्होंने आरोपलगाया कि यूरोपीय देश अमेरिका और ट्रंप द्वारा सुझाए गए शांति प्रयासों में अड़चन पैदा कर रहे हैं। हालांकि कुछ पर आपत्ति भी जताई गईइधर, इसी समय यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदमिर जेलेंस्की आयरलैंड पहुंचे, जहां उन्होंने यूरोपीय नेताओं से समर्थन को मजबूत करने की कोशिश की।जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका और रूस की बातचीत के बाद मिलने वाले संकेत आगे की रणनीति तय करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन हर दिनजानें गंवा रहा है, इसलिए अब ठोस नतीजों की जरूरत है, केवल बातों से काम नहीं चलेगा। उधर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कीव कीराष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद प्रमुख रुस्तेम उमेरोव के साथ बैठक की। रुबियो ने चर्चा को उपयोगी लेकिन जटिल बताया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्डट्रंप ने कुछ समय पहले ही यूक्रेन में जारी संघर्ष को रोकने के लिए 28 बिंदुओं की एक योजना रखी थी। इसे लेकर यूक्रेन-यूरोप के अलावा रूस को भीमनाने की कोशिशें की जा रही हैं। प्रस्ताव के कई बिंदुओं पर दोनों पक्षों में सहमति है, हालांकि कुछ पर आपत्ति भी जताई गई है।
लोकदल अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने सरकार और FSSAI की लापरवाही पर जताई चिंता, मिलावटी कफ सिरप और खाद्य उत्पादों कोबताया राष्ट्रीय स्वास्थ्य खतरा

लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह जी ने सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों की लापरवाही को बेरहमी से कफसिरप के नशे कारोबार कोउजागर कर दिया है। दूषित कफ सिरप से लेकर घटिया और नकली दवाइयों तक, और मिलावटी खाद्य पदार्थों तक, पूरा बाजार ज़हर बेचने का अड्डाबन चुका है और सरकार इसे देख रही है, लेकिन कुछ कर नहीं रही। आज भी बच्चों की जान लेने वाले दूषित कफ सिरप खुलेआम बिक रहे हैं। बाजारनकली और कम गुणवत्ता वाली दवाइयों से भरा पड़ा है। मिलावटी खाद, जिसमें ज़हर और केमिकल मिलाए जाते हैं, सीधे कैंसर जैसे जानलेवा रोगोंका कारण बन रही है।यह पूरा मिलावट तंत्र हर परिवार के स्वास्थ्य पर सीधा हमला है। लोकदल अध्यक्ष ने FSSAI की भूमिका पर भी बड़ा सवालखड़ा किया है। देशभर में ज़हरीले उत्पाद बिक रहेकहा जाँच एजेंसियाँ सो रही हैं या किसी दबाव में हैं? जब देशभर में ज़हर बिक रहा है, तो FSSAI की कार्रवाई सिर्फ कागज़ों पर क्यों दिखती है? लोकदल अध्यक्ष ने कहा है कि अगर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में इसका विनाशकारी असर दिखेगा। लोकदल अध्यक्ष ने FSSAI की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जाँच एजेंसियाँ या तो सो रही हैं या किसी दबाव में हैं। उनका कहना था कि जब देशभर में ज़हरीलेउत्पाद बिक रहे हैं, तो FSSAI की कार्रवाई केवल कागज़ों तक सीमित क्यों है। चौधरी सुनील सिंह ने चेतावनी दी कि अगर तुरंत ठोस कार्रवाई नहींहुई, तो इस मिलावट तंत्र का विनाशकारी असर आने वाले समय में दिखाई देगा और यह हर परिवार की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन जाएगा।
राजनाथ सिंह के नेहरू-बाबरी बयान पर विपक्ष का हमला, “सबूत दो या माफी मांगो” विपक्ष बोला “इतिहास मत तोड़िए”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान को लेकर आज कई विपक्षी पार्टी के नेताओं ने कड़ी आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश के पहलेप्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू बाबरी मस्जिद को सरकारी पैसों से बनवाना चाहते थे। विपक्ष का आरोप है कि ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। राजनाथ सिंह ने मंगलवार को गुजरात के वडोदरा के पास ‘एकता मार्च’ के दौरान कहा था, ‘पंडित जवाहरलाल नेहरूबाबरी मस्जिद को सरकारी पैसे से बनवाना चाहते थे, लेकिन अगर किसी ने इसका विरोध किया तो वो सरदार वल्लभभाई पटेल थे।’ इस बयान परविपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, ‘ये सब असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए है। रोज नए मुद्देखड़े किए जाते हैं ताकि जनता की असली समस्याओं पर बात ही न हो।’ वहीं मनीष तिवारी ने कहा, ‘रक्षा मंत्री को इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने केबजाय देश की रणनीतिक चुनौतियों पर ध्यान देना चाहिए।’ इस तरह के बयान शोभा नहीं देतेइमरान मसूद ने कहा, ‘अगर ऐसा कोई तथ्य है तो उसे दस्तावेज के साथ रखें। सिर्फ बोल देने से कोई मान नहीं लेगा।’ उन्होंने कहा कि ‘एकऐतिहासिक दस्तावेज तो ऐसा भी है जिसमें सरदार पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई की थी, और सब कुछ नेहरू के नेतृत्व में हुआथा।’ तारिक अनवर ने कहा. ‘भाजपा की सरकार का काम ही पुरानी बातें और विवाद उठाना रह गया है। नेहरू अब नहीं हैं, इसलिए उन पर आरोपलगाना आसान है।’ वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि ‘रक्षा मंत्री इतने वरिष्ठ नेता हैं, उन्हें देश की सेना और सैनिकों से जुड़े मुद्दोंपर ध्यान देना चाहिए।’ टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा, ‘या तो राजनाथ सिंह सबूत पेश करें या माफी मांगकर इस्तीफा दें। इस तरह के बयानशोभा नहीं देते।’ शरद पवार गुट की सांसद फौजिया खान ने इस पर कहा कि, ‘मस्जिद के लिए पैसा ईमानदारी से जुटना चाहिए, सरकारी पैसे सेमस्जिद बनाने की बात ही गलत है।’ देश के तमाम विपक्षी सांसदों की तरफ से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान की कड़ी आलोचना की गई है।दरअसल, राजनाथ सिंह ने कहा था कि पूर्व पीएम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू बाबरी मस्जिद को सरकारी पैसों से बनवाना चाहते थे। इस परविपक्ष ने उनसे सबूत मांगा है।
संचार साथी ऐप पर केंद्र का बड़ा U-Turn, प्री-इंस्टॉल अनिवार्यता खत्म ऐप पर केंद्र–विपक्ष आमने-सामने

संचार साथी एप कर केंद्र सरकार का बड़ा बयान सामने आया है। सरकार ने फोन में इस एप के प्री-इंस्टॉलेशन को जरूरी नहीं बताया है। दूरसंचारमंत्रालय ने एक्स (X) पर एक पोस्ट जारी कर इस एप की प्री-इंस्टॉलेशन की अनिवार्यता को हटाने की जानकारी दी है। मंत्रालय ने एक्स पोस्ट मेंकहा, “सभी नागरिकों को साइबर सुरक्षा का लाभ देने के उद्देश्य से सरकार ने सभी स्मार्टफोन्स में संचार साथी एप को प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य कियाथा। यह एप पूरी तरह सुरक्षित है और इसका मकसद सिर्फ नागरिकों को साइबर दुनिया के अपराधियों से बचाना है… संचार साथी की बढ़तीलोकप्रियता को देखते हुए, सरकार ने मोबाइल निर्माताओं के लिए अनिवार्य प्री-इंस्टॉलेशन को हटाने का फैसला लिया है।” बता दें कि केंद्र सरकारके इस कदम को एपल के फैसले से भी जोड़कर देखा जा रहा है। 28 नवंबर को सरकार से आदेश मिलने के बाद स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी एपल(Apple) ने इसका पालन करने से इंकार कर दिया था। कंपनी ने कहा था कि यह कदम iPhone यूजर्स के निजी डेटा को खतरे में डाल सकता है।एपल ने रॉयटर्स के हवाले से कहा था कि कंपनी अपनी चिंताएं सरकार के सामने रखेगी। निजता और आजादी पर खुला हमलामंत्रायल के मुताबिक यह एप “जन भागीदारी” को बढ़ावा देता है, क्योंकि नागरिक किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की रिपोर्ट कर सकते हैं औरखुद को सुरक्षित रख सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस एप का कोई अन्य उद्देश्य नहीं है और यदि उपयोगकर्ता चाहें तो वे इसे कभी भीअनइंस्टॉल कर सकते हैं। बता दें कि स्मार्टफोन में एप के प्री-इंस्टॉलेशन को 90 दिनों के भीतर अनिवार्य बनाने के आदेश के बाद विपक्ष ने संसद मेंकड़ा विरोध दर्ज कराया था। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने दूरसंचार विभाग के निर्देश पर कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज कराते हुए इसे तानाशाही बताया।विपक्ष के कई नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार फ्रॉड को रोकने के नाम पर नागरिकों की जासूसी करना चाहती है। वहीं, आम आदमी पार्टी केराष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार का फोन में संचार सारथी एप इंस्टॉल करने का आदेश लोगों की निजता औरआजादी पर खुला हमला है। दर्शाता है कि लोग अपनी सुरक्षा के लिएहालांकि, विपक्ष के सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि ‘संचार साथी’ एपके जरिए जासूसी बिल्कुल भी संभव नहीं है। यह एप लोगों की सुरक्षा और मदद के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इस एप से लोगों कीगतिविधियों पर नजर रखने की सरकार की कोई मंशा नहीं है।सरकार द्वारा एक्स पर जारी बयान के मुताबिक, अब तक 1.4 करोड़ लोग यह एप डाउनलोड कर चुके हैं और रोजाना लगभग 2000 ऑनलाइन फ्रॉडमामलों की जानकारी भेज रहे हैं। बयान में कहा गया, “एप डाउनलोड करने वाले उपयोगकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। एप को अनिवार्य बनानेका उद्देश्य अधिक से अधिक जागरूकता फैलाना था, ताकि कम तकनीक-जानकार लोग भी इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकें। केवल पिछले एकदिन में ही 6 लाख लोगों ने एप डाउनलोड करने के लिए रजिस्ट्रेशन किया है, जो कि सामान्य से 10 गुना अधिक है। यह दर्शाता है कि लोग अपनीसुरक्षा के लिए इस ऐप पर भरोसा कर रहे हैं।”
भारत के साथ रिश्ते अटूट अमेरिकी दबाव बेअसर, रूस बोला तेल सप्लाई किसी भी कीमत पर नहीं रुकेगी

पश्चिम देशों के कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और अमेरिका की ओर से टैरिफ वॉर चलाने के बीच रूस ने भारत के साथ अपने संबंधों पर बयान दिया है। रूस नेसाफ किया है कि नई दिल्ली के साथ उसका रिश्ता किसी ‘तीसरे पक्ष’ के दबाव में खत्म नहीं होने वाला। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने एकअहम बयान में न केवल तेल व्यापार को सुरक्षित रखने का संकल्प लिया है, बल्कि भारत के लिए सिरदर्द बन चुके ‘व्यापार घाटे’ को सुलझाने कारोडमैप भी पेश किया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और यूरोपीय देश रूस की अर्थव्यवस्था को अलग-थलग करने के लिए हर संभवप्रयास कर रहे हैं। भुगतान तंत्र के जरिए यह प्रवाह जारी रहेगाक्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मॉस्को यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है कि अमेरिकी प्रतिबंधोंकी परछाई भारत के साथ होने वाले तेल व्यापार पर न पड़े। पेस्कोव ने कहा, “हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि व्यापार की मात्रा में, विशेषकर तेल के क्षेत्र में, कोई कमी न आए।” रूसी अधिकारी का यह बयाान भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछलेदो वर्षों में रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। पश्चिमी देशों ने ‘प्राइस कैप’ और टैंकरों पर प्रतिबंध लगाकर इस सप्लाईचेन को तोड़ने की कोशिश की है, लेकिन रूस का यह आश्वासन बताता है कि ‘शैडो फ्लीट’ और वैकल्पिक भुगतान तंत्र के जरिए यह प्रवाह जारीरहेगा। बाजार के दरवाजे और चौड़े कर सकतापेस्कोव ने कूटनीतिक रूप से अमेरिका का नाम लिए बिना साफ संदेश दिया कि दोनों देशों को अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए एक ‘सुरक्षाकवच’ तैयार करना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा, “भारत और रूस को अपने द्विपक्षीय व्यापार को बाहरी दबाव और तीसरे देशों के हस्तक्षेप से सुरक्षितरखना होगा।” विश्लेषकों का मानना है कि यह इशारा सीधे तौर पर स्विफ्ट (SWIFT) बैंकिंग सिस्टम से अलग, एक स्वतंत्र भुगतान प्रणाली (जैसेरुपये-रूबल व्यापार या डिजिटल करेंसी) को और मजबूत करने की ओर है। भारत-रूस संबंधों में वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती ‘एकतरफा व्यापार’ है।भारत रूस से तेल और हथियार तो खूब खरीद रहा है, लेकिन रूस को भारतीय निर्यात कम है, जिससे एक बड़ा व्यापार घाटा पैदा हो गया है और रूसके पास भारतीय रुपये का जमावड़ा लग गया है। पेस्कोव ने कहा, “रूस भारत की चिंताओं और व्यापार घाटे की समस्या से पूरी तरह अवगत है। हमभारत से आयात बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।” यह नई दिल्ली के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। इसका सीधा अर्थ है कि आने वालेदिनों में रूस भारतीय मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि उत्पादों और ऑटो कंपोनेंट्स के लिए अपने बाजार के दरवाजे और चौड़े कर सकता है।