भारत बनेगा ग्लोबल ग्रोथ इंजन, स्थिर नीति, कम मुद्रास्फीति और डिजिटल सुधारों पर बोले केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को आश्वासन दिया कि भारत आने वाले वर्षों में एक स्थिर नीतिगत माहौल, निरंतर नियामक सरलीकरण, मज़बूतआर्थिक विकास और बहुत ही मध्यम मुद्रास्फीति प्रदान करता रहेगा। उन्होंने कहा कि ये स्थितियां निवेशकों के लिए आदर्श हैं। सिंगापुर में ब्लूमबर्ग न्यूइकोनॉमी फोरम में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए वैष्णव ने एक स्थिर, जिम्मेदार और नवाचार-संचालित डिजिटल और आर्थिक भविष्य केलिए भारत के दृष्टिकोण के बारे में बताया। देश के मजबूत आर्थिक बुनियादी ढांचे पर प्रकाश डालते हुए, वैष्णव ने कहा, “उच्च विकास और मध्यममुद्रास्फीति के साथ, भारत आने वाले वर्षों में एक स्थिर नीति व्यवस्था, निरंतर सरलीकरण, अच्छी वृद्धि और बहुत ही मध्यम मुद्रास्फीति प्रदान करतारहेगा – एक ऐसी स्थिति जिसका हर निवेशक इंतज़ार कर रहा है।” इसके अलावा, उन्होंने वैश्विक निवेशकों को अगले साल नई दिल्ली में होने वाले न्यूइकोनॉमी फ़ोरम में शामिल होने का निमंत्रण दिया, और वैश्विक आर्थिक परिवर्तन में एक प्रमुख चालक बनने के लिए भारत की तत्परता को रेखांकितकिया। 2025 में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति तेजी से गिरकर 0.25 प्रतिशत हो गई2025 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी 47.89 लाख करोड़ रुपये थी। यह पिछले वर्ष की इसी तिमाही के 44.42 लाख करोड़रुपये से 7.8 प्रतिशत सालाना की वृद्धि है। यह वृद्धि सेवाओं, विनिर्माण और निर्माण क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन से प्रेरित थी। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष(आईएमएफ) ने हाल ही में भारत के विकास अनुमान को संशोधित किया, इसे इस वर्ष के लिए 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया।दूसरी ओर, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2025 में भारत की खुदरा मुद्रास्फीतितेजी से गिरकर 0.25 प्रतिशत हो गई, जो वर्तमान सीपीआई श्रृंखला की साल-दर-साल सबसे कम मुद्रास्फीति है। तेज़ी से बदलती तकनीकों के साथ विकसित होने के लिए डिजाइन किया गयाउभरती डिजिटल वास्तविकताओं से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करते हुए, मंत्री ने सोशल मीडिया के अनियंत्रित प्रभाव, जिसमें डीपफेक, सिंथेटिकसामग्री और तेजी से बढ़ाई गई अफवाहें शामिल हैं, के कारण नागरिकों और संस्थानों के बीच विश्वास के क्षरण पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने ज़ोरदेकर कहा कि प्लेटफ़ॉर्म को अपने द्वारा होस्ट और प्रसारित की जाने वाली सामग्री की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए, और यह सुनिश्चित करना चाहिए किइससे व्यक्तियों, समुदायों या व्यापक सामाजिक ताने-बाने को कोई नुकसान न पहुंचे।उन्होंने डिजिटल शासन के प्रति भारत के ‘तकनीकी-कानूनी’ दृष्टिकोण की व्याख्या करते हुए कहा कि हाल ही में अधिसूचित डेटा संरक्षण अधिनियमसिद्धांत-आधारित है, जिसे नवाचार को बाधित किए बिना तेज़ी से बदलती तकनीकों के साथ विकसित होने के लिए डिजाइन किया गया है।
अनिल अंबानी ग्रुप पर ईडी की सबसे बड़ी कार्रवाई, 1,400 करोड़ की नई अटैचमेंट, कुल जब्ती 9,000 करोड़ के पार

ईडी ने अनिल अंबानी और उनकी रिलायंस ग्रुप की कंपनियों से जुड़े परिसंपत्तियों पर एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 1,400 करोड़ रुपये कीनई अस्थायी अटैचमेंट की है। सूत्रों के मुताबिक, ताजा कदम के बाद इस मामले में जब्त संपत्तियों का कुल मूल्य बढ़कर लगभग 9,000 करोड़ रुपयेहो गया है। एजेंसी ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निरोध कानून (पीएमएलए) के तहत की है। अटैच की गई संपत्तियां नवी मुंबई, चेन्नई, पुणे औरभुवनेश्वर में स्थित बताई जा रही हैं। इससे पहले एजेंसी ने इसी जांच के हिस्से के रूप में 7,500 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की थीं। यह जांचरिलायंस ग्रुप की विभिन्न इकाइयों में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी है, जिनका नेतृत्व अनिल अंबानी करते हैं। म्यूचुअल फंडों में निवेश करने के लिए किया गयाइस महीने की शुरुआत में, एजेंसी के विशेष कार्य बल ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड औररिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामलों की चल रही जांच के सिलसिले में पीएमएलए के तहत नवी मुंबई में धीरूभाई अंबानीनॉलेज सिटी (डीएकेसी) में 4,462.81 करोड़ रुपये मूल्य की 132 एकड़ से अधिक जमीन कुर्क की थी। धन शोधन की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 406 और 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (2) सहपठित 13 (1) (डी) के तहत दर्ज एफआईआर से उत्पन्न हुई है, जिसमें आरकॉम, अनिल अंबानी और अन्य का नाम शामिल है।ईडी के अनुसार, आरकॉम और उसकी समूह कंपनियों ने 2010 से 2012 के बीच घरेलू और विदेशी दोनों तरह के ऋण लिए, जिनकी कुल बकायाराशि 40,185 करोड़ रुपये थी। पांच बैंकों ने तब से समूह के खातों को धोखाधड़ी वाला घोषित कर दिया है। जांच से पता चला है कि एक संस्थाद्वारा लिए गए ऋणों का इस्तेमाल समूह की अन्य कंपनियों के ऋणों को चुकाने, संबंधित पक्षों को हस्तांतरित करने, या ऋण शर्तों का उल्लंघन करतेहुए म्यूचुअल फंडों में निवेश करने के लिए किया गया।कुल मूल्य बढ़कर लगभग 9,000 करोड़ रुपये हो गयाएजेंसी ने आरोप लगाया कि 13,600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ऋणों को सदाबहार बनाने के लिए डायवर्ट की गई, 12,600 करोड़ रुपयेसंबंधित पक्षों को दिए गए, और लगभग 1,800 करोड़ रुपये सावधि जमा और म्यूचुअल फंडों में निवेश किए गए, जिन्हें बाद में समाप्त कर समूह कीसंस्थाओं को हस्तांतरित कर दिया गया। ईडी ने बिल डिस्काउंटिंग तंत्र के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग और विदेशी धन प्रेषण के माध्यम से विदेशों में धनकी कथित हेराफेरी का भी पता लगाया। एजेंसी ने वित्तीय अपराध के मामलों को आगे बढ़ाने और यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धतादोहराई कि अपराध से प्राप्त धन की वसूली की जाए व उसे सही दावेदारों को वापस किया जाए। ईडी ने पीएमएलए के तहत अनिल अंबानी समूह सेजुड़ी नवी मुंबई, चेन्नई, पुणे और भुवनेश्वर स्थित संपत्तियों को अटैच किया है। सूत्रों के मुताबिक, ताजा कदम के बाद इस मामले में जब्त संपत्तियों काकुल मूल्य बढ़कर लगभग 9,000 करोड़ रुपये हो गया है।
बंगाल में SIR पर सियासी तूफ़ान ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को लिखा कड़ा पत्र, बीएलओ की मौत को बताया ‘असहनीय दबाव’ का नतीजा

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले जारी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान पर सियासी बवाल मचाहुआ है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा कि वर्तमान एसआईआर न केवल बिना योजनाका, अराजक, बल्कि खतरनाक भी है। उन्होंने कहा कि यह चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनावआयोग को लिखे पत्र में कहा कि एसआईआर के ‘कुप्रबंधन’ की मानवीय कीमत अब असहनीय है। ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआरको रोकने की मांग पर जोर देते हुए हाल ही में एक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) की आत्महत्या के मामले को उठाया। संबंध में स्पष्टता की कमीममता बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया में कथित कुप्रबंधन को लेकर चुनाव आयोग को लिखे पत्र में कहा कि मुझे तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई की उम्मीदहै। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बुनियादी तैयारियों, पर्याप्त योजना और स्पष्ट संचार के अभाव ने बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को पंगु बनादिया है। पश्चिम बंगाल की सीएम ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल के सीईओ धमकी दे रहे हैं और एसआईआर में लगे बीएलओ को अनुचितकारण बताओ नोटिस जारी कर रहे हैं। अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि प्रशिक्षण में गंभीर कमी और प्रक्रिया के लिए आवश्यक अनिवार्य दस्तावेजों केसंबंध में स्पष्टता की कमी के कारण यह प्रक्रिया संरचनात्मक रूप से अस्थिर है। एसआईआर प्रक्रिया की वजह से वह काफी मानसिक तनाव मेंममता बनर्जी ने जलपाईगुड़ी में 48 वर्षीय बीएलओ शांति मुनि इक्का की आत्महत्या को असहनीय दबाव का नतीजा बताया। उन्होंने दावा किया किएसआईआर की वजह से राज्य में अब तक 28 लोगों की मौत हो चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शांति मुनि अपने घर के सामने दो पेड़ों केबीच एक बांस पर फांसी के फंदे से झूलती मिली थीं। शांति के पति ने दावा किया है कि एसआईआर प्रक्रिया की वजह से वह काफी मानसिक तनावमें था। उन्होंने कहा कि एसआईआर के फॉर्म बंगाली भाषा में थे, जिसे वह पढ़ नहीं सकती थी।
राष्ट्रपति–राज्यपाल की शक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, विधेयकों पर मंजूरी की समयसीमा तय नहीं कर सकती न्यायपालिका

सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को राष्ट्रपति के उस संदर्भ पर अपना फैसला सुनाया है, जिसमें पूछा गया था कि क्या कोई सांविधानिक अदालत, राज्यविधानसभाओं से पारित विधेयकों को मंजूरी देने के लिए राज्यपालों और राष्ट्रपति के लिए समय-सीमा तय कर सकती है। इस मामले में मुख्यन्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर की संविधान पीठ ने 10 दिनों तक दलीलें सुनीं और 11 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति और राज्यपाल को राज्यविधानसभा से पारित विधेयकों पर अनुमोदन देने के लिए न्यायपालिका कोई समयसीमा तय नहीं कर सकती। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई कीअगुवाई वाली संविधान पीठ ने राष्ट्रपति की तरफ से अनुच्छेद 143 के तहत भेजे गए 14 संवैधानिक प्रश्नों पर अपनी राय देते हुए कहा कि यह विषयसंवैधानिक पदाधिकारियों के विवेक और संघीय ढांचे की मर्यादा से जुड़ा है। अदालत ने माना कि विधायी प्रक्रिया में राष्ट्रपति और राज्यपाल कीभूमिका ‘संवैधानिक कर्तव्य’ है, पर न्यायिक हस्तक्षेप के जरिए इसकी समय सीमा तय नहीं की जा सकती। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी रेखांकितकिया कि अत्यधिक देरी लोकतांत्रिक शासन की आत्मा को क्षति पहुंचाती है, इसलिए इन पदों से अपेक्षा है कि वे उचित समय के भीतर निर्णय लें। ऐसी कोई समय सीमा तय नहींराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मई में संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट से राय मांगी थी। उन्होंने पूछा था कि क्या न्यायालय यह तय करसकता है कि राष्ट्रपति या राज्यपाल को बिलों पर कब तक निर्णय लेना चाहिए। राष्ट्रपति ने अपने पांच पन्नों के संदर्भ पत्र में 14 सवाल रखे हैं, जिनका जवाब सुप्रीम कोर्ट से मांगा गया है। यह सवाल मुख्य रूप से अनुच्छेद 200 और 201 से जुड़े हैं, जिनमें राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियोंका जिक्र है। 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु विधानसभा से पास हुए बिलों पर फैसला देते हुए पहली बार यह कहा था कि राष्ट्रपति कोराज्यपाल की तरफ से भेजे गए किसी भी बिल पर तीन महीने के भीतर निर्णय लेना होगा। यह फैसला अपने आप में ऐतिहासिक माना गया क्योंकिइससे पहले ऐसी कोई समय सीमा तय नहीं थी।
प्रधानमंत्री मोदी की जी20 शिखर सम्मेलन यात्रा, वैश्विक आर्थिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर भारत की सक्रिय भूमिका

दक्षिण अफ्रीका में होने जा रहे जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन से पहले भारत सरकार ने इस दौरे को वैश्विक आर्थिक और सामरिक मुद्दों पर गहराई सेचर्चा का महत्वपूर्ण अवसर बताया है। विदेश मंत्रालय के सचिव (ईआर) सुधाकर दलेला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 से 23 नवंबर तकजोहांसबर्ग की यात्रा करेंगे, जहां वे जी20 नेताओं की बैठक में भाग लेंगे। सुधाकर दलेला ने बताया कि यह जी20 सम्मेलन पहली बार अफ्रीकी धरतीपर आयोजित हो रहा है। राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के निमंत्रण पर होने वाला यह कार्यक्रम भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2023 मेंसफल अध्यक्षता के बाद भारत अपनी प्राथमिकताओं की निरंतरता इस मंच पर रख सकेगा। यह प्रधानमंत्री मोदी का दक्षिण अफ्रीका का चौथाआधिकारिक दौरा होगा। इससे पहले वे 2016 में द्विपक्षीय दौरे पर और 2018 व 2023 में ब्रिक्स सम्मेलनों के लिए गए थे। पर्यावरणीय असुरक्षाओं को कम करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगीदलेला ने कहा कि जी20 अब अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर विचार-विमर्श का प्रमुख मंच बन चुका है। यह समूह दुनियाकी 85 प्रतिशत जीडीपी और लगभग तीन-चौथाई आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने बताया कि इस मंच पर ऐसे विषयों पर विशेष फोकसकिया जाएगा जिनका सीधा असर वैश्विक स्थिरता पर पड़ता है। इसमें सतत विकास लक्ष्यों पर प्रगति, वैश्विक प्रशासनिक संस्थाओं में सुधार, पर्यावरणऔर जलवायु चुनौतियों का समाधान तथा डिजिटल खाई को पाटने जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं।सचिव दलेला ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका ने अपने जी20 एजेंडा के लिए चार प्रमुख प्राथमिकताएं तय की हैं। इनमें आपदा प्रबंधन क्षमता कोमजबूत करना, कम आय वाले देशों के कर्ज संकट को दूर करना, न्यायसंगत ऊर्जा परिवर्तन के लिए वित्त जुटाना और समावेशी वृद्धि के लिए महत्वपूर्णखनिजों का उपयोग बढ़ाना शामिल है। उन्होंने कहा कि यह प्राथमिकताएं वैश्विक आर्थिक और पर्यावरणीय असुरक्षाओं को कम करने में निर्णायकभूमिका निभाएंगी। मजबूत करने का अवसर माना जा रहादलेला के मुताबिक भारत इस सम्मेलन में अपनी अध्यक्षता के दौरान उठाए गए मुद्दों को आगे बढ़ाएगा। भारत विशेष रूप से विकासशील देशों कीआवाज को मजबूत करने, डिजिटल सार्वजनिक ढांचा मॉडल को साझा करने, जलवायु न्याय की अवधारणा को मजबूती देने और वैश्विक संस्थाओं मेंसमावेशी सुधार की मांग को प्रमुखता से उठाएगा। भारत का मानना है कि टिकाऊ विकास और आर्थिक संतुलन तभी संभव है, जब वैश्विक मंचों परसमान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो। दलेला ने कहा कि प्रधानमंत्री की यह यात्रा भारत-दक्षिण अफ्रीका संबंधों को भी मजबूत करेगी। दोनों देश ब्रिक्स, जी20 और ग्लोबल साउथ जैसे मंचों पर समान सोच साझा करते हैं। सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय मुलाकातों, बहुपक्षीय चर्चाओं और वैश्विकघोषणाओं के जरिए भारत अपनी कूटनीतिक सक्रियता को और बढ़ाएगा। यह दौरा अंतरराष्ट्रीय सहयोग, स्थिरता और समावेशी विकास के भारत केदृष्टिकोण को मजबूत करने का अवसर माना जा रहा है।
लखनऊ में शुरू हो रहा 19वां राष्ट्रीय जंबूरी, 40 हजार प्रतिभागियों के स्वागत की तैयारियां पूरी

राजधानी लखनऊ में 23 से 29 नवंबर के बीच 19वें राष्ट्रीय जंबूरी का आयोजन किया जा रहा है। डिफेंस एक्सपो में चलने वाले स्काउट गाइड के इससात दिवसीय आयोजन में देश भर से 40 हजार से ज्यादा मेहमान लखनऊ आने वाले हैं। बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी टीमके साथ तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने खुद निरीक्षण कर तैयारियों को परखा। आयोजन में 30 हजार स्काउट गाइड कैडेट तो करीब 10 से 15 हजार अन्य लोग होंगे। मेहमानों के स्वागत व ठहरने के लिए वृंदावन योजना स्थित डिफेंस एक्सपो ग्राउंड में बड़े स्तर पर टेंट सिटी बनाई जा रहीहै। देश के विभिन्न राज्यों से 30 हजार से ज्यादा प्रतिभागी, 2000 विदेशी प्रतिभागी, पांच हजार अधिकारी व अन्य स्टाफ भी शामिल हो रहे हैं। योगी आदित्यनाथ ने खुद आयोजनस्थल का निरीक्षण कियाकुल संख्या 40 हजार पार होने की उम्मीद है। इनके लिए 4500 से ज्यादा टेंट, 1600 शौचालय, 1600 स्नानागर, 35 हजार लोगों की क्षमता काएरिना स्टेडियम, 100 बिस्तर का अस्पताल, 15 डिस्पेंसरी बनाई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, टेंट सिटी व अन्य निर्माण के लिए 45 करोड़ रुपयेखर्च किए जा रहे हैं। इसके अलावा आसपास के होटल व बाजारों में भी रौनक छाने लगी है। डिफेंस एक्सपो मैदान में नागरिक सुविधाओं के अलावाभव्य जंबूरी मेला भी लगेगा। इसके लिए 100 दुकानों का जंबूरी बाजार बन रहा है। इस बाजार के संचालक पवन गुप्ता ने बताया कि 100 में 85 स्टॉलनुमा दुकानों की बुकिंग हो गई है। शेष 15 की बुकिंग एक-दो दिन में हो जाएगी। फूड कोर्ट में 7000 लोगों के बैठने की व्यवस्था रहेगी। स्टॉलसे ही 500 परिवारों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। राजधानी लखनऊ में 23 नवंबर से चलने वाले सात दिवसीय राष्ट्रीय जंबूरी में करीब 40 हजार लोग शामिल होंगे। बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद आयोजनस्थल का निरीक्षण किया।
Sachdeva Leads Strong Push as BJP Ramps Up MCD By-Poll Canvassing

The Delhi BJP’s Municipal Corporation election campaign is now intensifying steadily. Door-to-door campaigning is underway in all wards, accompanied by street-corner meetings, women’s conferences and drawing-room interactions.Delhi BJP President Mr. Virendra Sachdeva today addressed election meetings in support of Southpuri candidate Mrs. Rohani Raj and Sangam Vihar-A candidate Mr. Shubhrajeet Gautam, in which NDMC member […]
DPCC Chief Devender Yadav Accuses BJP of Misusing Official Machinery to Block Congress Candidate’s MCD Campaign

Delhi Pradesh Congress Committee (DPCC) president Shri Devender Yadav said that the BJP, out of fear of defeat, was misusing the Election Commission and the police to act against the Congress candidate in an undemocratic and unconstitutional manner in the by-election to the Municipal Corporation of Delhi (MCD). He said that to deny permission to […]
272 दिग्गजों का खुला पत्र, राहुल गांधी पर बेबुनियाद आरोपों का आरोप “जानें क्या है पूरा मामला”

देश के 272 प्रतिष्ठित नागरिक, जिसमें 16 पूर्व जज, 123 रिटायर्ड नौकरशाह (14 पूर्व राजदूत समेत) और 133 सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी शामिलहैं, ने एक खुला पत्र जारी करके विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। इनहस्तियों ने कहा कि भारत का लोकतंत्र किसी हथियार से नहीं, बल्कि जहरीली बयानबाजी से हमला झेल रहा है। इस पत्र में आरोप लगाया गया हैकि सैन्य बलों, न्यायपालिका और संसद पर सवाल उठाने के बाद अब चुनाव आयोग को निशाना बनाया जा रहा है। वरिष्ठ नागरिकों ने लिखा किविपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बार-बार चुनाव आयोग पर वोट चोरी में शामिल होने का आरोप लगाया, ‘परमाणु बम’ जैसी भाषा इस्तेमाल की औरयहां तक कहा कि आयोग देशद्रोह कर रहा है, लेकिन इन दावों के समर्थन में कोई औपचारिक शिकायत या शपथ पत्र नहीं दिया। संवैधानिक पदों पर आसीन लोगों के ऐसे व्यवहारपत्र के अनुसार, बिना सबूत के लगाए जाने वाले आरोप एक ‘क्रोध’ का रूप हैं, ऐसा गुस्सा जो बार-बार चुनावी हार और जनता से दूरी के कारण पैदाहुआ है। पत्र में आगे कहा गया है कि कुछ राजनीतिक दल विश्लेषण की जगह नाटकीयता को चुन रहे हैं और सार्वजनिक सेवा की जगह राजनीतिकतमाशा कर रहे हैं। देश की इन हस्तियों ने लिखा कि जब किसी विपक्ष शासित राज्य में चुनाव आयोग के परिणाम विपक्ष के अनुकूल होते हैं, तबउसकी आलोचना गायब हो जाती है। लेकिन जब परिणाम उनके खिलाफ आते हैं, तब आयोग को हर कहानी का खलनायक बना दिया जाता है। उन्हेंयह चुनिंगा नाराजगी ‘राजनीतिक अवसरवाद’ का उदाहरण लगी। वहीं इस मामले में पूर्व न्यायमूर्ति एसएन ढींगरा ने कहा, ‘पिछले कुछ समय से, विपक्ष के नेता (लोकसभा सांसद राहुल गांधी) नियमित रूप से भारत के चुनाव आयोग पर बेबुनियाद हमले कर रहे हैं। वह एसआईआर के खिलाफविरोध कर रहे हैं। केवल एक नासमझ व्यक्ति ही एसआईआर के खिलाफ विरोध कर सकता है। केवल आतंकवादी ही ऐसी भाषा का इस्तेमाल करतेहैं जिसमें वे ‘बम’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। हमें संवैधानिक पदों पर आसीन लोगों के ऐसे व्यवहार को न तो माफ करना चाहिए और न हीबर्दाश्त करना चाहिए।’ विचार और सेवा के आधार पर आगेइस खुले पत्र में टीएन शेषन और एन गोपालस्वामी जैसे पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उन्होंने लोकप्रियता या सुर्खियोंके बजाय निष्पक्षता और कड़ाई से नियमों का पालन कराया। वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि भारत की संस्थाओं को राजनीतिक हमलों का निशानानहीं बनाया जाना चाहिए, यही परंपरा देश को मजबूत बनाती है।वरिष्ठ नागरिकों ने चुनाव आयोग से कहा कि वह पारदर्शिता बनाए रखे, सभी आंकड़े सार्वजनिक करे और आवश्यक होने पर कानूनी तरीकों से अपनाबचाव करे। इसके साथ ही राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे ‘बिना सबूत वाले आरोपों’ की जगह नीतिगत विकल्प और देश के लिए ठोस दृष्टिपेश करें। वहीं इस पत्र के आखिरी में देश की वरिष्ठ हस्तियों ने भारतीय सेना, न्यायपालिका, कार्यपालिका और विशेष रूप से चुनाव आयोग पर अपनाअटूट विश्वास जतााया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का लोकतंत्र मजबूत है और अब समय आ गया है कि राजनीति नाटकीयता नहीं, बल्कि सत्य, विचार और सेवा के आधार पर आगे बढ़े।
जदयू विधायकों ने फिर चुना नीतीश कुमार को नेता, बिहार में नई सरकार की तैयारियाँ तेज

जनता दल यूनाईटेड के नवनिर्वाचित विधायकों ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को फिर से अपना नेता चुन लिया है। बुधवार सुबह 11 बजेमुख्यमंत्री आवास में जदयू के विधायक दल की बैठक हुई। साढ़े 11 बजे जदयू के विधायकों ने सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को विधायक दल का नेताचुन लिया है। जदयू के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने कहा कि बिहार की जनता उत्साहित है, उन्होंने नीतीश कुमार अपना नेता चुना है।मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी की पहली और अंतिम पसंद नीतीश कुमार ही हैं। नई सरकार में मंत्री बनाए जाने के सवाल पर रजक ने कहा कि इसकाफैसला नीतीश कुमार करेंगे। विधायक दल की बैठक से पहले जदयू विधायक मनोरमा देवी ने कहा कि यह बिहार के लिए बहुत अच्छा दिन है। हमारेअभिभावक नीतीश कुमार जी हैं और वह सभी के कल्याण के लिए काम करेंगे। दिल्ली में हुई बैठक में यह बात तय नहीं हो पाईइधर, भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की बैठक पार्टी कार्यालय में हो रही है। भाजपा के विधायकों ने सम्राट चौधरी के विधायक दल का नेता चुनलिया है। यानी वह डिप्टी सीएम बनेंगे। वहीं विजय सिन्हा को उप नेता चुना गया है। इस प्रस्ताव का समर्थन करने वालों में प्रेम कुमार, राम कृपालयादव, कृष्ण कुमार ऋषि, संगीता कुमारी, अरुण शंकर प्रसाद, मिथिलेश तिवारी, नितिन नवीन, वीरेन्द्र कुमार, रमा निषाद, मनोज शर्मा और कृष्णकुमार मंटू शामिल थे। बताया जा रहा है कि विजय सिन्हा दूसरे डिप्टी सीएम बनेंगे। भाजपा दोनों डिप्टी सीएम का पद अपने पास रखने जा रही है।लेकिन, 19 सीट लाने वाली चिराग पासवान की पार्टी एक डिप्टी सीएम समेत तीन मंत्री का पद चाहती है। इस मुद्दे पर भी बातचीत चल रही है।दिल्ली में हुई बैठक में यह बात तय नहीं हो पाई। बैठक में शामिल होंगेइधर, भाजपा विधायक दल का उपनेता चुने जाने के बाद विजय सिन्हा ने कहा कि मैं अपने शीर्ष नेतृत्व और सभी विधायकों के प्रति आभार व्यक्तकरता हूं। बिहार में विकास की रफ्तार तेज करने के लिए मिले जनादेश के साथ अब हम अपने सिस्टम को कार्रवाई में लाएंगे, ताकि सुशासन केमाध्यम से समृद्धि हासिल करने के संकल्प को पूरा किया जा सके और विकसित बिहार बनाने की प्रतिबद्धता को पूर्ण रूप से साकार किया जा सके।दोपहर 3.30 बजे विधानसभा के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की बैठक होगी। इसमें भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाईटेड, लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा, लोक जनशक्ति पार्टी के सभी नव निर्वाचित विधायक और नीतीश कुमार, चिराग पासवान, संतोष सुमन, उपेंद्र कुशवाहा, सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा मौजूद रहेंगे। इधर, कुछ ही देर में गृह मंत्री अमित शाह भी पटना पहुंचेंगे। वह भारतीयजनता पार्टी की बैठक में शामिल होंगे।