क्या SIR से ममता बनर्जी घबरा गई हैं?—गुरु प्रकाश पासवान का बड़ा बयान

पश्चिम बंगाल में विशेष पहचान पुनरीक्षण (SIR) को लेकर लगातार विवाद खड़ा किया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता गुरु प्रकाशपासवान ने इसे ममता बनर्जी की राजनीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि एक स्पष्ट, शांतिपूर्ण और संवैधानिक प्रक्रिया पर बेवजह संदेह पैदा किया जारहा है। सर्वोच्च न्यायालय पहले ही कर चुका है SIR को संवैधानिक घोषितगुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि SIR कोई नई या संदेहास्पद प्रक्रिया नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय कई बार इसे पूरी तरह संवैधानिक, आवश्यक औरऐतिहासिक प्रक्रिया बता चुका है। इसके बावजूद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार शंका और विरोध का माहौल बना रही हैं। उनकेअनुसार, यह सीधे-सीधे संविधान की भावना के खिलाफ है और जनता को भ्रमित करने का प्रयास है। अन्य राज्यों में शांति, लेकिन बंगाल में तनाव क्यों?गुरु प्रकाश पासवान ने बताया कि बिहार में SIR पूरी तरह शांतिपूर्वक चल रही है। लोगों में कोई तनाव नहीं है, कोई विरोध नहीं है, और सभी प्रक्रियाको सकारात्मक रूप से स्वीकार कर रहे हैं। अन्य राज्यों में भी यह प्रक्रिया सहज और सरल रूप से चल रही है। तो फिर केवल पश्चिम बंगाल में ही इतनाशोर-शराबा क्यों? उनका स्पष्ट आरोप है कि यह भ्रम फैलाने और राजनीतिक लाभ लेने की रणनीति है। बीएलओ और अधिकारियों को धमकी—एक गंभीर आरोपगुरु प्रकाश पासवान ने तृणमूल कांग्रेस पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों को खुले तौर पर डराया और धमकाया जा रहा है।बीएलओ को आदेशों का पालन न करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, और उन्हें भयभीत किया जा रहा है ताकि SIR बाधित हो सके। उन्होंने कहाकि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि जब एक कर्मचारी सिर्फ अपने काम के लिए परेशान किया जाए, तो यह लोकतांत्रिक ढांचे पर सीधा प्रहारहै। खेला होगा की हिंसा का स्मरण और नया खतरागुरु प्रकाश पासवान ने याद दिलाया कि खेेला होगा के नाम पर पहले भी पश्चिम बंगाल में भयंकर हिंसा हुई थी, जिसका असर आम लोगों ने झेलाथा। उनका प्रश्न है क्या ममता बनर्जी SIR प्रक्रिया को रोकने के लिए फिर से वही माहौल तैयार करना चाहती हैं? क्या फिर से भय और तनाव कीराजनीति शुरू करने का प्रयास हो रहा है? घुसपैठियों की भागदौड़ और तुष्टिकरण की राजनीति पर निशानागुरु प्रकाश पासवान ने दावा किया कि SIR की घोषणा होते ही बंगाल में घुसपैठियों में भगदड़ मच गई। उनके अनुसार, यह स्पष्ट संकेत है कि ममताबनर्जी ने वर्षों से घुसपैठियों को अपना वोटबैंक बनाकर तुष्टिकरण की राजनीति चलाई है। उन्होंने कहा कि इस बार यह राजनीति सफल नहीं होनेवाली है और सत्य सामने आने लगा है। संविधान सर्वोपरि ममता बनर्जी नहींगुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि कोई भी नेता संविधान से ऊपर नहीं हो सकता। यदि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी SIR जैसी संवैधानिक प्रक्रिया को रोकनेकी कोशिश कर रही हैं, तो यह लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए अत्यंत हानिकारक है। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों की तरह बंगाल को भी इस प्रक्रियाको ईमानदारी से स्वीकार करना चाहिए। बंगाल में विरोध, पीछे की वजह क्या है?गुरु प्रकाश पासवान के अनुसार, SIR को लेकर जो घबराहट और विरोध बंगाल में दिख रहा है, वह तुष्टिकरण और वोटबैंक की राजनीति का परिणामहै। जब पूरा देश शांतिपूर्वक प्रक्रिया का पालन कर रहा है, तो केवल बंगाल में ही अविश्वास और अवरोध क्यों? उनके अनुसार, यह राजनीतिकरणनीति है, जिसका उद्देश्य जनता को भ्रमित करना और सत्य को दबाना है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे संविधान पर विश्वास रखें और किसी भीतरह की अफवाहों या दुष्प्रचार में न आएँ।
दिल्ली सरकार ने रोड कटिंग पर धूल नियंत्रण के लिए कड़े कदम तेज़ किए-मनजिंदर सिंह सिरसा

दिल्ली में सर्दियों के आगमन के साथ ही प्रदूषण का स्तर बढ़ने का खतरा हमेशा बना रहता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ताके नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने इस वर्ष के विंटर एक्शन प्लान पर अत्यधिक ज़ोर दिया है। इसी अभियान के तहत पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसाने रोड कटिंग, निर्माण कार्यों और ध्वस्तीकरण गतिविधियों से होने वाली धूल को प्रदूषण का एक प्रमुख कारण बताते हुए उसके नियंत्रण के लिए कड़ेऔर प्रभावी कदमों की घोषणा की है। धूल को स्रोत पर रोकने की ज़रूरत पर सरकार का फोकसपर्यावरण मंत्री ने स्पष्ट कहा कि दिल्ली में PM2.5 का सबसे बड़ा स्रोत धूल है, जो सड़क निर्माण, खुदाई और निर्माण कार्यों के दौरान बड़ी मात्रा मेंहवा में फैलती है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यदि दिल्ली की हवा को वास्तव में साफ़ करना है, तो धूल को वहीं रोकना होगा जहाँ वह पैदाहोती है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ़ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा का अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा है, क्योंकि हवा में मौजूद महीन कणसीधे फेफड़ों और हृदय पर प्रभाव डालते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि DPCC के धूल नियंत्रण से जुड़े सभी नियमों का पालन अनिवार्य रूप से कियाजाएगा और किसी भी तरह की ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार अब इस दिशा में ज़मीन पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए पूरीतरह तैयार है।निरीक्षणों में तेजी और पूरी दिल्ली में 2000 टीमों की तैनातीसिरसा ने सूचित किया कि इस वर्ष मॉनिटरिंग को पहले की तुलना में कई गुना अधिक मज़बूत किया गया है। दिल्ली सरकार की लगभग दो हज़ार टीमेंलगातार निर्माण स्थलों, रोड कटिंग पॉइंट्स और डंपिंग क्षेत्रों पर नजर रख रही हैं। ये टीमें दिन-रात निरीक्षण करती हैं और कहीं भी धूल नियंत्रण केनियमों में कमी पाई जाने पर तुरंत कार्रवाई करती हैं। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसी भी एजेंसी, विभाग या ठेकेदार को यह सोचने की आवश्यकता नहींकि नियमों का उल्लंघन करने के बाद उन्हें समय मिल जाएगा। इस बार प्रत्येक उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी और यह कार्रवाईइतनी सख़्त होगी कि दोबारा किसी को नियम तोड़ने का मन न बने। DPCC के कड़े नियमों को लागू करने पर सरकार की दृढ़तादिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने रोड कटिंग और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रित करने के लिए कई महत्वपूर्ण मानक तय किए हैं। इनमानकों का उद्देश्य निर्माण स्थल के हर चरण में धूल को फैलने से रोकना है। सड़कों पर चल रही खुदाई में धूल को रोकने के लिए ऊँचे विंड बैरियरलगाए जा रहे हैं, ताकि उड़ती हुई मिट्टी सीधे सड़क पर या आसपास के क्षेत्रों में न फैले। निर्माण सामग्री को लगातार ढका और गीला रखा जा रहा हैताकि वह हवा में न उड़ सके। उस सामग्री को ढोने वाले सभी वाहनों को पूरी तरह ढककर चलाना आवश्यक है और उनके लिए PUC प्रमाणनअनिवार्य कर दिया गया है। धूल नियंत्रित करने के लिए नियमित पानी के छिड़काव और साफ़-सफाई को भी प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है। इसकेअलावा निर्माण क्षेत्रों में काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए उन्हें मास्क और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना भी अब अनिवार्य है।दिल्ली सरकार ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि धूल नियंत्रण अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं है बल्कि जनस्वास्थ्य की रक्षा का महत्वपूर्णअभियान है। उल्लंघनों पर सख़्त कार्रवाई और जुर्माने की कठोर व्यवस्थादिल्ली सरकार ने यह भी बताया कि धूल नियंत्रण के नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी मुआवज़ा लगाया जा रहा है, जिसकी राशि पाँच लाखरुपये तक पहुँच सकती है। सरकार ने पिछले कुछ सप्ताहों में कई निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया और नियमों का पालन न करने वाले 50 सेअधिक बड़े प्रोजेक्ट्स को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। मंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य नियमों का पालन करवाना है, न किचालान करना। लेकिन यदि कोई संस्था या ठेकेदार जनहित और पर्यावरण सुरक्षा की उपेक्षा करेगा, तो उस पर कठोरतम कार्रवाई ज़रूर होगी। यहकदम दिल्ली की हवा को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। दिल्ली की सड़कों की बड़े पैमाने पर मैकेनिकल सफाईप्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली सरकार रोजाना करीब तीन हज़ार किलोमीटर सड़कों की मैकेनिकल रोड स्वीपर से सफाई करा रही है। इसप्रक्रिया में न केवल धूल हटाई जाती है बल्कि सड़क की सतह पर जमा महीन पार्टिकल्स को भी साफ़ किया जाता है, जो हवा में उड़कर PM2.5 कोबढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही दिल्ली की सीमाओं पर उन सभी ट्रकों को रोका जा रहा है जो बिना वैध कागज़ात या बिना PUC प्रमाणन के प्रवेशकरने की कोशिश करते हैं। प्रदूषणकारी वाहनों की जांच के लिए ट्रैफिक पुलिस और पर्यावरण विभाग संयुक्त अभियान चला रहे हैं। कम्युनिटी किचन के माध्यम से बायोमास जलाने की घटनाओं पर रोकसिरसा ने बताया कि निर्माण स्थलों पर मजदूरों द्वारा बायोमास या कचरा जलाने की समस्या को समाप्त करने के लिए सरकार ने एक अभिनव कदमउठाया है। इस समय दिल्ली में 305 कम्युनिटी किचन सक्रिय हैं, जहाँ रोजाना 5000 से अधिक मजदूरों और वाहन चालकों को भोजन उपलब्धकराया जाता है। यह पहल न केवल प्रदूषण रोकने में सहायक है बल्कि मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा और स्वच्छता को भी सुनिश्चित करती है। नागरिकों के सहयोग की अपीलपर्यावरण मंत्री ने अंत में कहा कि दिल्ली सरकार अपने स्तर पर प्रदूषण को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, लेकिन इस अभियान में नागरिकोंकी भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दिल्लीवासी खुले में कूड़ा जलाने या आग लगाने से बचें और यदि कहीं ऐसा होता हुआ दिखे, तोतुरंत संबंधित विभाग को सूचित करें। उन्होंने कहा कि दिल्ली का वातावरण तभी स्वच्छ होगा जब सरकार, विभाग और नागरिक—तीनों मिलकरसामूहिक प्रयास करेंगे।
डॉ. विक्रांत भूरिया ने उठाई SIR प्रक्रिया और आदिवासी संकट पर गहरी चिंता

देशभर में आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों पर गंभीर सवाल उठाते हुए ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस के चेयरमैन डॉ. विक्रांत भूरिया ने कहा कि सरकारकी जल्दबाज़ी और योजनाओं की खामियों का सबसे बड़ा शिकार आदिवासी बन रहे हैं। उन्होंने SIR प्रक्रिया को आदिवासियों को सिस्टम से बाहरकरने की सोची-समझी रणनीति बताया। SIR की जल्दबाज़ी से आदिवासियों को सबसे अधिक नुकसानडॉ. भूरिया ने कहा कि इस बार SIR यानी स्पेशल समरी रिविज़न की पूरी प्रक्रिया इतनी तेज़ी और जल्दबाज़ी में की गई कि आदिवासी समाज कोसबसे ज्यादा चोट पहुंची है। SIR को ऐसे समय में लागू किया गया जब आदिवासी समुदाय का बड़ा हिस्सा घरों पर मौजूद ही नहीं था और रोज़गारकी तलाश में राज्यों के बाहर या दूर-दराज़ इलाकों में पलायन पर था। उनके अनुसार, सरकार को मालूम था कि आदिवासी समुदाय की उपस्थितिगांवों में कम है, फिर भी प्रक्रिया को उसी अवधि में लागू किया गया ताकि अधिक से अधिक आदिवासियों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा सकें।उन्होंने कहा कि SIR का समय और गति दोनों दर्शाते हैं कि यह केवल चुनावी प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि एक राजनीतिक गणित था जिसमें आदिवासीसमाज को धीरे-धीरे वोटिंग अधिकार से बाहर किया जा रहा है। पलायन से खाली गांवों को बनाया गया बहानाडॉ. भूरिया ने बताया कि जिन इलाकों में SIR की प्रक्रिया चलाई गई, वहाँ स्थिति बेहद चिंताजनक है। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में 70% से भी ज्यादागांव खाली पड़े हैं। रोजगार, मेहनत-मजदूरी और जीवनयापन के लिए आदिवासी बड़ी संख्या में अपने मूल गांव छोड़ देते हैं। ऐसे में SIR की प्रक्रियामें न तो वे अपनी उपस्थिति दर्ज करा पाए और न ही अपने नाम सूची में बने रहने की पुष्टि कर सके। कई घरों में केवल बुजुर्ग महिलाएं या छोटे बच्चेमौजूद थे, जिन्हें न प्रक्रिया की जानकारी थी, न यह समझ कि क्या करना है। भूरिया ने कहा कि इस हालात का फायदा उठाकर अनेक जगहों परआदिवासियों के नाम सीधे काट दिए गए, आपत्तियाँ दर्ज नहीं की गईं और उन्हें वोटर लिस्ट से बाहर कर दिया गया। आदिवासियों को वोटिंग प्रक्रिया से बाहर करने की सिस्टमैटिक कोशिशडॉ. भूरिया ने आरोप लगाया कि यह संयोग नहीं, बल्कि एक सिस्टमैटिक रणनीति है। SIR की प्रक्रिया को ऐसे समय में लागू किया गया जबआदिवासी समुदाय घर पर नहीं था। इससे स्पष्ट हो जाता है कि एक राजनीतिक उद्देश्य के तहत उन्हें चुनावी प्रक्रिया से बाहर किया जा रहा है। उन्होंनेकहा कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश है, जिससे आदिवासियों की राजनीतिक भागीदारी कमजोर हो और उनकालोकतांत्रिक अधिकार खत्म हो जाए। उनके शब्दों में यह साधारण गलती नहीं, बल्कि आदिवासियों को व्यवस्थित तरीके से वोट देने का अधिकार सेदूर करने की साजिश है। BLO पर बढ़ा दबाव, कई जगह तनाव की स्थितिSIR प्रक्रिया में BLO की भूमिका और हालात पर भी उन्होंने चिंता जताई। उन्होंने बताया कि कई BLO बिना सही प्रशिक्षण के इस प्रक्रिया में लगादिए गए, उन पर अत्यधिक काम का दबाव डाला जा रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में उन्हें बड़े विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। कुछ क्षेत्रों मेंअत्यधिक तनाव और दबाव के कारण BLO के आत्महत्या जैसे दर्दनाक मामले भी सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रशासनिक कुप्रबंधन काभयावह परिणाम है, जिसे सरकार छिपाने की कोशिश कर रही है। आदिवासियों के अधिकार और अस्तित्व पर गंभीर हमलाडॉ. विक्रांत भूरिया के अनुसार, SIR प्रक्रिया ने यह साबित कर दिया है कि आदिवासी समुदाय को लगातार हाशिये पर धकेला जा रहा है। उनकीजनगणना, उनकी उपस्थिति, उनके वोट, उनकी पहचान—हर स्तर पर उनकी अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल वोटर लिस्ट कामामला नहीं है, बल्कि लोकतंत्र में आदिवासी समाज की भागीदारी और उनके संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने सरकार से SIR प्रक्रिया को दोबारा और न्यायपूर्ण तरीके से करने की मांग की और कहा कि आदिवासियों को इस तरह सिस्टम से बाहर करने की कोई भी कोशिशलोकतंत्र के लिए खतरा है।
कर्नाटक में सीएम पद को लेकर कांग्रेस में सियासी हलचल तेज, मल्लिकार्जुन खरगे की संभावित भागीदारी पर चर्चाएँ

कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर एक बार फिर सियासी अटकलें तेज हो गई हैं। इसकी शुरुआत तब हुई जब उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार केकथित असंतोष की चर्चाओं के बीच कुछ कांग्रेस विधायकों ने बीते गुरुवार रात दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रिय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकातकी, जिसके बाद सियासी तापमान और बढ़ गया है। दूसरी तरफ इस मामले में अब कर्नाटक भाजपा ने भी चुटकी लेनी शुरू कर दी है। हबल्ली मेंभाजपा नेता महेश तेंगनकाई ने इस मामले में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस का अंदरूनी मामला है, लेकिन मीडिया में जो दिख रहा हैउससे लगता है कि पार्टी में बड़ी समस्या खड़ी होने वाली है। उन्होंने दावा किया कि नवंबर अंत तक कांग्रेस में भारी बवाल हो सकता है। कर्नाटक मेंफिर सीएम पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सीएम सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच असंतोष की अटकलों के बीच भाजपा केएक दावे ने राजनीतिक गर्माहट और बढ़ा दी है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मल्लिकार्जुन खरगे भी अब सीएम पद की दौड़ में आगे आ गए हैं? कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चल रही हलचलइतना ही नहीं इन अटकलों को लेकर धारवाड़ में भाजपा के उपनेता विपक्ष अरविंद बेलाड ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कर्नाटक कांग्रेस मेंमुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान जारी है। बेलाड ने कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार को रोकने के लिए सतीश जरकिहोली और जीपरमेश्वर को आगे बढ़ाना चाहते थे। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अब खुद मल्लिकार्जुन खड़गे भी दौड़ में आ गए हैं, क्योंकि वे वर्षों से कांग्रेसकी सेवा कर रहे हैं और राज्य की कमान चाहते हैं। इसके साथ ही बेलाड ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस केंद्र में सत्ता में नहीं आ रही, इसलिए खरगेराज्य में जिम्मेदारी चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात बताते हैं कि सिद्धारमैया अपना पद खो सकते हैं। कुल मिलाकर, कर्नाटक कांग्रेसमें नेतृत्व को लेकर चल रही हलचल ने राज्यभर की राजनीति में नई गर्मी ला दी है।
सीजेआई बीआर गवई का सुप्रीम कोर्ट से विदाई समारोह, 40 वर्षों के न्यायिक सफर का भावुक समापन

भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआई) बीआर गवई ने शुक्रवार को कहा कि वह लगभग चार दशक लंबे अपने कानूनी और न्यायिक सफर के अंत में पूरेसंतोष और तृप्ति के साथ ‘न्याय के छात्र’ के तौर पर इस संस्था को छोड़ रहे हैं। गौरतलब है कि सीजेआई गवई का सुप्रीम कोर्ट में आज आखिरी दिनथा। वे इस दौरान विदाई समारोह के लिए गठित बेंच के साथ कार्यवाही पर बैठते हुए भावुक नजर आए। इस बेंच में उनके साथ जस्टिस सूर्यकांत औरजस्टिस विनोद चंद्रन मौजूद थे। सीजेआई गवई ने कहा, “आप सभी को सुनने के बाद, खासकर अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और कपिल सिब्बलकी कविताएं और आप सभी की गर्मजोशी से भरी भावनाएं सुनकर मेरी आवाज थम-सी गई है।” उन्होंने कहा, “जब मैं इस अदालत कक्ष से आखिरीबार बाहर जाऊंगा… मैं इस अनुभूति के साथ जाऊंगा कि मैंने इस देश के लिए जो कुछ कर सकता था, वह किया। धन्यवाद, बहुत-बहुत धन्यवाद। राष्ट्र की सेवा का अवसर समझना चाहिएकार्यवाही के दौरान साथी जजों ने सीजेआई गवई के योगदान को याद किया। बता दें कि गवई जस्टिस केजी बालकृष्णन के बाद दूसरे दलित औरपहले बौद्ध सीजेआई हैं। गवई ने कहा, “मैं हमेशा मानता हूं कि हमारा संविधान समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व के सिद्धांतों पर आधारित है, औरमैंने अपनी जिम्मेदारियां इन्हीं चार दीवारों के भीतर रहकर निभाईं।” इस साल 14 मई को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस पद की शपथ लेने वाले गवई23 नवंबर 2025 को पद छोड़ देंगे और शुक्रवार उनका अंतिम कार्यदिवस था। अपने सफर को याद करते हुए उन्होंने कहा, “1985 में जब मैंने पेशे मेंप्रवेश किया, तब मैं कानून की पढ़ाई के लिए विद्यालय में आया था। आज जब मैं पद छोड़ रहा हूं, तो ‘न्याय का विद्यार्थी’ बनकर जा रहा हूं।” उन्होंनेवकील, हाईकोर्ट के जज, सुप्रीम कोर्ट के जज और आखिरकार चीफ जस्टिस के पद तक की अपनी 40 वर्ष से ज्यादा की यात्रा को संतोषजनकबताया। उन्होंने कहा कि किसी भी लोक पद को शक्ति का केंद्र न मानकर समाज और राष्ट्र की सेवा का अवसर समझना चाहिए। सादगी की तारीफ करते हुए कहा कि वे कभी नहीं बदलेडॉ. बीआर आंबेडकर के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा और अपने पिता, जो बाबासाहेब के करीबी सहयोगी थे, का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनकीन्यायिक विचारधारा सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के प्रति आंबेडकर की प्रतिबद्धता से आकार लेती रही। उन्होंने कहा, मैंने हमेशा मौलिकअधिकारों और राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया। पर्यावरण मामलों के प्रति अपने झुकाव का जिक्र करते हुएउन्होंने कहा कि वे लंबे समय से पर्यावरण, पारिस्थितिकी और वन्यजीव मुद्दों से जुड़े रहे हैं और उन्होंने हमेशा नागरिकों के अधिकारों तथा पर्यावरणसंरक्षण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की। सुप्रीम कोर्ट के प्रशासन पर उन्होंने कहा, “सीजेआई के रूप में लिए सभी निर्णय सामूहिक रूप से लिएगए। हम एक संस्था की तरह कार्य करें, यही मेरी धारणा रही। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “वे मेरे लिए केवल सहकर्मी नहीं, भाई और विश्वासपात्र हैं।बेहद ईमानदार व्यक्ति।” उन्होंने बताया कि गवई मामलों को धीरज और गरिमा के साथ संभालते थे और युवा वकीलों को प्रोत्साहित करते थे। दूसरीतरफ भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने ‘भूषण’ शब्द के मराठी अर्थ आभूषण का जिक्र करते हुए कहा कि न्यायमूर्ति गवई ने न्यायपालिकाको ‘सुशोभित’ किया है। दरअसल, बीआर गवई का पूरा नाम भूषण रामकृष्ण गवई है। उनके साथ सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गवई की सादगीकी तारीफ करते हुए कहा कि वे कभी नहीं बदले।
कांग्रेस का आरोप भाजपा की नीतियों से आदिवासी संकट गहराया, 2022 सिविल जज परीक्षा में आदिवासी चयन शून्य

कांग्रेस ने शुक्रवार को भाजपा पर रिजर्वेशन खत्म करने और “आदिवासी संकट” पैदा करने के लिए एक सिस्टमैटिक प्लान पर काम करने का आरोपलगाया। कांग्रेस ने इस बात की उच्च स्तरीय जांच की मांग की कि कोटा होने के बावजूद मध्य प्रदेश सिविल जज परीक्षा 2022 में किसी भीआदिवासी का सिलेक्शन क्यों नहीं हुआ? पार्टी ने यह भी मांग की कि 2022 सिविल जज परीक्षा को रद्द किया जाए। आदिवासी कांग्रेस के चेयरमैनविक्रांत भूरिया ने भाजपा पर उनकी जमीन छीनकर और न्याय से वंचित रखकर देश में आदिवासी संकट पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंनेआदिवासियों के लिए एक माइग्रेंट पॉलिसी बनाने की मांग की। कांग्रेस ने कहा कि भाजपा सरकार पूरे देश में ग्रेट इंडियन ट्राइबल क्राइसिस कोबढ़ावा दे रही है। भाजपा के राज में आदिवासी समुदाय तबाह हो रहे हैं। आदिवासी लोगों को न्याय नहीं मिल रहा है और वे अपनी पहचान बचाने केलिए भी संघर्ष कर रहे हैं। आदिवासी समुदायों की जमीनें जब्त की जा रही हैं। भूरिया ने कहा, हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि मध्य प्रदेश में2022 सिविल जज एग्जाम के नतीजों में रिजर्वेशन के बावजूद आदिवासी कैंडिडेट का सिलेक्शन जीरो है।भाजपा सरकार पूरे देश में ग्रेट इंडियन ट्राइबल क्राइसिस को बढ़ावा दे रहीकांग्रेस नेता ने कहा कि मध्य प्रदेश में करीब 2 करोड़ आदिवासी हैं, लेकिन सिविल जज परीक्षा 2022 के नतीजे दिखाते हैं कि भाजापा और उसकेसिस्टम को इस पोस्ट के लायक एक भी आदिवासी नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इस परीक्षा में आदिवासियों के लिए 121 सीटें रिजर्व थीं, लेकिन एकभी चुना नहीं गया।उन्होंने कहा, 2021 से अब तक एक भी आदिवासी चुना नहीं गया है। नियमों के मुताबिक, जो सीटें कई वर्षों तक खाली रहती हैं, उन्हें ओपन कैटेगरी में ले लिया जाता है। दूसरे शब्दों में यह आरक्षण खत्म करने का एक सिस्टमैटिक तरीका है। हमारी मांग है कि 2022 सिविल जजपरीक्षा रद्द की जाए और उच्च स्तरीय जांच की जाए। भूरिया ने मांग की कि आदिवासियों के लिए एक माइग्रेंट पॉलिसी बनाई जानी चाहिए। वोटरलिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को जल्दबाजी में लागू करने से आदिवासियों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अधिकतरराज्यों में आदिवासी पलायन कर रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि 70 फीसदी से ज़्यादा गांव खाली पड़े हैं और यह सरकार आदिवासियों को रोजगार नहीं देपाई है। आदिवासी कांग्रेस के चेयरमैन विक्रांत भूरिया ने भाजपा पर उनकी जमीन छीनकर और न्याय से वंचित रखकर देश में आदिवासी संकट पैदाकरने का आरोप लगाया। उन्होंने आदिवासियों के लिए एक माइग्रेंट पॉलिसी बनाने की मांग की। कांग्रेस ने कहा कि भाजपा सरकार पूरे देश में ग्रेटइंडियन ट्राइबल क्राइसिस को बढ़ावा दे रही है।
अखिलेश यादव का भाजपा पर हमला, दालमंडी डिमोलिशन और व्यापारियों पर दबाव लोकतंत्र के खिलाफ

अखिलेश यादव ने लखनऊ में भाजपा पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में लोग खुलकर कारोबार नहीं कर पा रहे हैं। इनकी नीति है किलोगों को इतना डरा दो कि वो अपनी बात न कह सकें। क्या ये कोई सरकार करती है। अरे, सबको अपनी बात कहने का हक है। सरकार की नजर अबदालमंडी पर है। एक दुकान बनाने में जमाने लग जाते हैं ये लोग पल भर में इसे तोड़ना चाहते हैं। भाजपा की बहुत संकीर्ण सोच हैं। ये साजिश कर रहीहै। ये चौड़ीकरण के नाम पर लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं। इनती सोच बहुत नकरात्मक है। किसी की जीविका छीनने का इनको अधिकारी कैसे मिलगया। ये लोग अधिकारियों के जरिए दबाव बनाते हैं। अखिलेश यादव ने कहा, दौली के सांसद और दाल मंडी के व्यापारी आए हैं। सरकार के फैसलेकी वजह से व्यापारियों पर संकट आया है। ये पॉलिटिकल डिमोलिशन है। क्योंकि वो वहां से चुनाव नहीं जीत पा रहे हैं। बीजेपी ने वाराणसी कोक्योटो बनाने का दावा किया था। लोगों को परेशान कैसे किया जाए। इस पर काम हो रहा है। पॉलिटिकल प्रोजेक्ट के लिए डिवाइड एंड रूल कीनीति अपना रही है। सिरप वाले सब पकड़े जाएंगेसरकार को ऐसे शहरों का दौरा करना चाहिए। दाल मंडी वाले दुकानदारों को दरें नहीं। दुकान तो दे देंगे, ग्राहक कहां से देंगे। बीजेपी की सोच संकीर्णहै, वो चौड़ीकरण कैसे कर रहे हैं। ये नकारात्मक सोच वाले हैं। बीजेपी अधिकारियों के माध्यम से डरना, धमकाना चाहते हैं। मॉल बेच दिया। ये बेचनेवाले लोग हैं। वरुणा का रिवरफ्रंट रोक दिया। आज मेट्रो जितनी चल रही हैं, वो सपा की देन है। वाराणसी की मेट्रो का डीपीआर हमने तैयार कियाथा। वाराणसी के मेट्रो को बीजेपी ने रोका है। अकबरनगर लखनऊ में डिमोलिशन कर दिया। अपनी जगह के लिए मनचाहा मुआवजा लिया। कईसाल आगे या कई हजार साल पीछे की बात करते है। वो समय आएगा, जब अधिकारियों से वसूला जाएगा। जनता को दुख देंगे, तो चुनाव हारेंगे।नाले पर रिवरफ्रंट बना रहे हैं। दालमंडी में नहीं जीतती है, इसलिए डिमोलिशन किया जा रहा है। सरकार जाने वाली है। मेरठ के व्यापारियों को बीजेपीने रिटर्न गिफ्ट दिया है। सपा इनको हराने के लिए पूरी तरह तैयार है। 2024 में चुनाव आयोग भी उनके साथ था। अयोध्या की जनता ने बीजेपी कोहराया। अब तक की सबसे करप्ट सरकार है। सिरप वाले सब पकड़े जाएंगे। लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का हकइससे पहले अखिलेश यादव ने कहा था कि भाजपा सरकार में प्रदेश की कानून-व्यवस्था बर्बाद हो गई है। अपराधी खुलेआम हत्याएं कर रहे हैं। लूटऔर अपहरण की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। भाजपा राज में न व्यापारी सुरक्षित है और न बेटियां। सरकार के पास भाषणों की तुकबंदी औरखोखले दावों के अलावा कुछ नहीं है। मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री तक कानून-व्यवस्था को लेकर झूठे दावे करते हैं, हालांकि जमीनी सच्चाई भाजपासरकार की पोल खोल रही है। एटा के सकीट थाना क्षेत्र में बीए प्रथम वर्ष की छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई। प्रयागराज में जार्जटाउनथाने के पास फतेहपुर में तैनात सूचना विभाग के उपनिदेशक का शव मिला। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पूरी व्यवस्था ध्वस्त कर प्रदेश को अराजकताके रास्ते पर धकेल दिया है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार कारोबारियों को इतना डरा रही है कि वे अपनी बात खुलकर नहींकह पा रहे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का हक है, और सरकार का काम डर फैलाना नहीं होना चाहिए।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल का पंचायती राज चुनावों में देरी पर बड़ा बयान, अस्थिरता फैलने की चेतावनी “जानें क्या है पूरा मामला”

पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में देरी पर राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल का बड़ा बयान सामने आया है। शुक्रवार को शिमला स्थित एजी ऑफिस मेंऑडिट वीक का शुभारंभ करने पहुंचे राज्यपाल ने मीडिया से बात करते हुए यह कहा राज्य चुनाव आयुक्त अनिल खाची ने आज बंद लिफाफे में मुझेरिपोर्ट सौंपी है। पंचायत चुनाव समय पर न होना चिंता का विषय। मंत्री कह रहे हैं कि समय पर चुनाव होने चाहिए, अधिकारी और सात जिलों केडीसी कह रहे हैं कि अभी चुनाव करवाना संभव नहीं। राज्यपाल ने कहा कि मंत्री बड़ा है या अधिकारी। राज्यपाल ने कहा कि अगर समय से विधानसभाचुनाव ना हो तो अस्थिरता फैल जाती है। हिमाचल में पंचायती राज चुनाव निर्वाचन आयोग और सरकार को मिलकर करने हैं। दोनों को इस बारे मेंगंभीरता से विचार करते हुए कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्री कह रहे हैं चुनाव समय से होंगे, लेकिन सात जिलों के डीसी ने चुनावकरवाने के लिए स्थिति ठीक नहीं होने का हवाला दिया है। यह दोनों बयान विरोधाभासी हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शुक्रवार सुबह हीराज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने उनसे मुलाकात की है। उन्होंने एक बंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट भी दी है। भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग की ओरअभी उन्होंने रिपोर्ट को देखा नहीं है। राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था का बिगड़ना चिंताजनक है। देवभूमि हिमाचल में इस प्रकार कीघटनाएं नहीं होनी चाहिए। सरकार प्राथमिकता के आधार पर स्थिति को संभाले। हिमाचल को देवभूमि कहा जाता है, सरकार को देवभूमि की पवित्रताको बनाए रखना चाहिए। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि वित्तीय व्यवस्था को पारदर्शी और जनहितकारी बनाने में लेखा विभाग की महत्वपूर्णभूमिका है। यह विभाग अपनी तथ्य आधारित रिपोर्ट और विभागों को वित्तीय सुझावों के जरिये लोक कल्याणकारी सुशासन की आधारशिला का कामकरता है। राज्यपाल शुक्रवार को पांचवें लेखा सप्ताह के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन भारतीयलेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग की ओर से किया गया। ऑडिट वीक 2025 का आयोजन विभाग की राष्ट्रीय लेखा एवं लेखा परीक्षा अकादमी, प्रधानमहालेखाकार (ऑडिट) और प्रधान महालेखाकार (लेखांकन एवं अनुश्रवण) द्वारा किया जा रहा है।दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ कियाराज्यपाल ने कहा कि लेखा विभाग लोकतंत्र का एक अनिवार्य स्तंभ है जो जवाबदेही, सुशासन, सार्वजनिक संस्थानों का विधि हित और जनहित मेंइस्तेमाल सुनिश्चित करता है। हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय और विकासशील राज्य की वित्तीय व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारू बनाए रखने में इसविभाग का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारे राज्य में भौगोलिक, संरचनात्मक, पर्यावरण जोखिम और आपदाओं से जुड़ी चुनौतियां अधिकजटिल है। ऐसे में ऑडिट की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती ताकि योजनाओं और परियोजनाओं का प्रभाव जमीनी स्तर पर सही रूप में नागरिकोंतक पहुंच सके। राष्ट्रीय लेखा परीक्षा एवं लेखा अकादमी (एनएएए) शिमला के महानिदेशक एस आलोक ने उद्घाटन संबोधन में बताया कि विभागद्वारा लेखा परीक्षा को आसान और कागज रहित बनाने के लिए हाइब्रिड और रिमोट ऑडिट जैसे अहम कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि ऑडिटका मतलब केवल आपत्तियां करना नहीं है बल्कि सरकारी निधि के पारदर्शी और जिम्मेदारी पूर्ण व्यय के साथ नागरिक केंद्रित एवं लक्ष्य आधारितव्यय का जरिया भी है। इससे पहले राज्यपाल ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में प्रधान महालेखाकार पुरुषोत्तम तिवारी, वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।
सोनिया विहार ऑनशोर प्रोजेक्ट दिल्ली के रिवर टूरिज़्म को नई पहचान देगा – कपिल मिश्रा बोले

परियोजना की समीक्षा के लिए उच्च–स्तरीय बैठक आयोजितदिल्ली सरकार के कला, संस्कृति, भाषा एवं पर्यटन मंत्री श्री कपिल मिश्रा की अध्यक्षता में ‘सोनिया विहार ऑनशोर सुविधा परियोजना’ की विस्तृतसमीक्षा दिल्ली सचिवालय में की गई। इस बैठक में IWAI, डीडीए, दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली पर्यटन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठकका उद्देश्य यमुना तट पर विकसित की जा रही ऑनशोर सुविधाओं और रिवर टूरिज़्म परियोजनाओं की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन करना था। रिवर टूरिज़्म कॉरिडोर और क्रूज/फेरी सर्विस की प्रगति पर गहन चर्चाबैठक में प्रमुख रूप से Onshore Facility, River Tourism Corridor तथा प्रस्तावित क्रूज और फेरी सर्विस पर हुई प्रगति की समीक्षा की गई।अधिकारियों ने आवश्यक अनुमतियों, साइट सर्वे, पर्यावरणीय मानकों और निर्माण-पूर्व गतिविधियों पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। मंत्री ने सभीविभागों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि हर गतिविधि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के पर्यावरणीय निर्देशों के अनुरूप हो। सभी विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोरबैठक में यह निर्णय लिया गया कि IWAI, दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली पर्यटन (DTTDC) के बीच इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन को और मजबूतकिया जाएगा, ताकि परियोजना तेजी से धरातल पर उतर सके। मंत्री कपिल मिश्रा ने स्पष्ट कहा कि यह एक बहु-विभागीय प्रोजेक्ट है, इसलिए सभीइकाइयों के बीच तालमेल अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिया कि काम में किसी भी प्रकार की देरी न हो और सभी कार्य समय-सीमा के भीतरउच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएँ। यमुना तट पर विकसित होंगी आधुनिक पर्यटन सुविधाएँबैठक के दौरान प्रस्तुत योजना के अनुसार, सोनिया विहार में आधुनिक ऑनशोर सुविधाओं का एक विस्तृत परिसर विकसित किया जाएगा। इसमेंटिकट काउंटर, वेटिंग हॉल, रूफटॉप रेस्तरां, सुविनियर शॉप्स, फूड ज़ोन, बच्चों के लिए प्ले जोन, एम्फीथिएटर, यमुना आरती स्थल और यमुना के मध्यस्थित म्यूज़िकल वॉटर फाउंटेन जैसे आकर्षण शामिल होंगे। यह प्रोजेक्ट न केवल दिल्ली की पर्यटन क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि यमुना को सांस्कृतिकऔर मनोरंजक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाएगा। दिल्ली के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण परियोजनापर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने परियोजना के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यमुना को दिल्ली की नई पहचान बनाना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है।उन्होंने कहा कि ‘सोनिया विहार ऑनशोर प्रोजेक्ट’ राजधानी के रिवर टूरिज़्म को नई दिशा और नई पहचान देगा। उन्होंने आगे कहा कि सभी विभागों कोमिलकर, तेज़ी से और पूरी गुणवत्ता के साथ काम करना होगा ताकि यह परियोजना निर्धारित समय में पूरी हो सके। इसे दिल्ली के भविष्य का एकमहत्वपूर्ण प्रोजेक्ट बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार इसे पूरी गति से आगे बढ़ाएगी।
हाईकोर्ट का फैसला डेढ़ लाख परिवारों के घरों में रोशनी लेकर आया – दुर्गेश पाठक

प्रस्ताव का असर हाईकोर्ट ने आप सरकार के फैसले को माना आधारदिल्ली हाईकोर्ट ने एमसीडी की बुक्ड प्रॉपर्टी को बिजली कनेक्शन देने का महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि यहवही प्रस्ताव है जिसे 2024 में आप सरकार ने एमसीडी सदन में पास किया था। हाईकोर्ट ने उसी प्रस्ताव को संज्ञान में लेते हुए उन परिवारों को बड़ीराहत दी है, जो वर्षों से बिजली के लिए संघर्ष कर रहे थे। दुर्गेश पाठक ने कहा कि यह फैसला उन लोगों की जीत है जिनका जीने का बुनियादीअधिकार लंबे समय से अधूरा था। आप सरकार की पहल 2021 में पानी, 2024 में बिजली का अधिकारअरविंद केजरीवाल सरकार ने 2021 में बुक्ड प्रॉपर्टी को पानी देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। इस कदम के बाद लोगों ने कहा कि पानी तभीसार्थक है जब घरों में बिजली भी हो। इसी मांग को समझते हुए आप सरकार ने 2024 में बिजली कनेक्शन देने का प्रस्ताव एमसीडी में पारितकराया। यही प्रस्ताव आगे चलकर हाईकोर्ट के फैसले की नींव बना और आज लाखों लोगों को राहत दे रहा है। भाजपा के शासनकाल में सीलिंग और अवैध वसूली का आरोपदुर्गेश पाठक ने बताया कि 2007 से 2022 तक एमसीडी में भाजपा की सरकार रही। इस अवधि में हजारों लोग अपनी मेहनत की कमाई से बनेछोटे–छोटे घरों में रहते थे, लेकिन भाजपा शासन ने लगभग डेढ़ लाख घरों को सील कर दिया। इन परिवारों से अवैध रूप से पैसे वसूले जाते थे औरबिजली–पानी का कनेक्शन देने की अनुमति भी नहीं दी जाती थी। आप नेताओं का आरोप है कि बुक्ड प्रॉपर्टी भाजपा के भ्रष्टाचार का बड़ा अड्डा बनचुकी थी। पानी के अधिकार ने बदली तस्वीर अब बिजली भी बना मौलिक आवश्यकता2021–22 में दिल्ली सरकार की अधिसूचना ने यह सुनिश्चित किया कि हर नागरिक को पानी का अधिकार मिले। इस अधिसूचना के बाद झुग्गियों सेलेकर अनधिकृत कॉलोनियों और बुक्ड प्रॉपर्टी तक सभी को पानी देना शुरू हुआ। लेकिन बिजली के बिना यह सुविधा अधूरी थी। जब बिल्डिंगविभाग ने एनओसी देने से इनकार किया, तब लोगों ने कोर्ट का रुख किया और आप सरकार ने एमसीडी में दोबारा संघर्ष शुरू किया। एमसीडी में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव बना राहत का रास्ता2023 में एमसीडी में आप सरकार बनने के बाद मामला आगे बढ़ा। 26 फरवरी 2024 को आप द्वारा लाया गया प्रस्ताव सदन में सर्वसम्मति से पारितहुआ, जिसमें बीएसईएस राजधानी, बीएसईएस यमुना और टाटा पावर को बुक्ड प्रॉपर्टी को बिजली कनेक्शन देने का निर्देश दिया गया। यह वहीप्रस्ताव है जिसे अब हाईकोर्ट ने वैध माना है और 1.50 लाख घरों को बिजली देने का रास्ता खोल दिया है। भाजपा पर क्रेडिट चोरी का आरोप और सीलिंग हटाने की मांगविधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला आप सरकार की दूरदर्शिता का नतीजा है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह दूसरोंके काम का क्रेडिट लेने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा को सच में जनता की चिंता है तो वह उन घरों की सीलिंग हटाकर रजिस्ट्रीकराए, तभी उसे जनता का भरोसा मिलेगा। हाईकोर्ट ने बिजली कनेक्शन की अनुमति दे दी है, अब भाजपा को आगे कदम बढ़ाना चाहिए। जनता के हित में आम आदमी पार्टी की निरंतर लड़ाईजनकपुरी वार्ड के पार्षद प्रवीण कुमार ने बताया कि गरीब और मध्यमवर्गीय लोग अपनी जिंदगी की कमाई से छोटे–छोटे मकान बनाते हैं, लेकिनभाजपा शासन में उन्हें सीलिंग और भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ा। बिजली कनेक्शन के लिए लोग वर्षों भटके। इन्हीं समस्याओं को समझते हुए आपने एमसीडी में प्रस्ताव रखा और आज हाईकोर्ट की जीत से हजारों परिवारों को राहत मिली है। आप नेताओं ने कहा कि यह संघर्ष जनता के अधिकारऔर सम्मान के लिए था और आगे भी रहेगा।