प्रधानमंत्री मोदी ने किया राजस्थान के बीकानेर जिले का दौरा, बोले राजस्थान की वीर भूमि हमें सिखाती है देश और देशवासियों से बढ़कर कुछ नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राजस्थान के बीकानेर जिले के दौरे पर रहे. पाकिस्तान पर भारतीय सेना द्वारा किए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह उनकापहला राजस्थान दौरा रहा. इस दौरान उन्होंने 26 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात दी. साथ ही देश के 103 रेलवे स्टेशनों का उद्घाटनकिया. इन सभी रेलवे स्टेशनों को ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत पुनर्विकसित किया गया था. अपने दौरे के दौरान पीएम मोदी ने सभा को भीसंबोधित किया, इस दौरान उन्होंने आतंकवादी देश पाकिस्तान पर भी तगड़ा प्रहार किया. पीएम मोदी ने कहा- मेरी नसों में अब गरम लहू नहीं, सिंदूरबह रहा है. हर आतंकी हमले की पाकिस्तान को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. पाकिस्तान को भारत के पानी का हक नहीं मिलेगा, यह हमारा संकल्प है. कोई भी ताकत इस संकल्प को रोक नहीं सकती. पीएम मोदी ने कहा- एक ओर हम सिंचाई परियोजनाओं को पूरा कर रहे हैं, वहीं नदियों को जोड़नेका कार्य भी कर रहे हैं. इससे यहां की धरती और किसानों को लाभ मिलेगा. राजस्थान की भूमि सिखाती है देशवासियों से बढ़कर कुछ नहीं- मोदीराजस्थान की वीर भूमि हमें सिखाती है कि देश और देशवासियों से बढ़कर कुछ नहीं है. 22 तारीख को आतंकवादियों ने धर्म पूछकर मांग का सिंदूरउजाड़ दिया था गोलियां पहलगाम में चली थीं, लेकिन वे गोलियां 140 करोड़ देशवासियों के सीने को छलनी कर गई थीं. इसके बाद देश ने संकल्पलिया कि आतंकवादियों को मिट्टी में मिला देंगे. आज हमारी सेना के शौर्य से हम उस प्रण पर खरे उतरे हैं हमारी सरकार ने तीनों सेनाओं को खुली छूटदी थी. तीनों सेनाओं ने मिलकर ऐसा चक्रव्यूह रचा कि पाकिस्तान को घुटनों पर आना पड़ा. पीएम मोदी ने पाकिस्तान पर प्रहार करते हुए कहा- हमने22 मिनट में आतंकियों के नौ सबसे बड़े ठिकाने नष्ट कर दिए. जब सिंदूर बारूद बन जाता है, तो उसका नतीजा क्या होता है, यह पाकिस्तान को बतादिया गया है. साथियों, यह संयोग ही है कि पांच साल पहले जब बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई थी, तब मेरी पहली जनसभा राजस्थान में हुई थी. यहवीर भूमि का प्रभाव ही है कि ऐसा संयोग फिर बना है ऑपरेशन सिंदूर के बाद अब मेरी पहली जनसभा बीकानेर में हो रही है.
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस, हीटवेव को लेकर दिशा- निर्देश जारी करने की गई मांग

सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. याचिका में केंद्र सरकार से हीटवेव को लेकर राष्ट्रीय स्तर परदिशा-निर्देश जारी करने और उन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराने की मांग की गई है. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई और जस्टिसऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने केंद्रीय गृह मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा नियंत्रण विभाग औरअन्य को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब मांगा है. पर्यावरण कार्यकर्ता विक्रांत तोंगड़ ने यह याचिका दायर की, जिस पर सर्वोच्च अदालत नेसुनवाई की. याचिका में कहा गया है कि पिछले साल हीटवेव और हीट स्ट्रेस के चलते 700 से अधिक मौतें हुईं. याचिका में हीटवेव पूर्वानुमान, हीटअलर्ट और चौबीसों घंटे निवारण हेल्पलाइन आदि के लिए सुविधाएं प्रदान करने के निर्देश देने की भी मांग की. इस साल रहेगी ज्यादा हीटवेवयाचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि इस बार पूर्वानुमान है कि इस साल हीटवेव ज्यादा रहेगी. पहले उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में ही हीटवेव चलतींथी, लेकिन अब पूर्वी तट, उत्तर पूर्व प्रायद्वीप और दक्षिण मध्य क्षेत्रों तक भी हीटवेव का असर दिखाई देता है. याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रीयदिशानिर्देश और हीटवेव रोकथाम प्रबंधन 2019 के बावजूद कई राज्यों ने अभी तक एक्शन प्लान लागू नहीं किया है. साथ ही याचिका में आपदाप्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 35 के तहत केंद्र की वैधानिक जिम्मेदारियों का हवाला दिया गया, जिसके तहत सरकार को आपदा प्रबंधन केलिए उचित उपाय करने की आवश्यकता होती है. याचिका में एक अध्ययन का हवाला देते हुए चेतावनी दी गई है कि जलवायु परिवर्तन के चलते गर्मीसे होने वाली मौतों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की आशंका है.
वाशिंगटन में इस्राइली दूतावास के दो कर्मचारियों की गोली मारकर कर दी गई हत्या, ट्रंप बोले नफरत व कट्टरपंथियों के लिए नहीं है कोई जगह

वाशिंगटन में इस्राइली दूतावास के दो कर्मचारियों की गोली मार कर हत्या कर दी गई. इस हत्याकांड को एफबीआई के फील्ड ऑफिस से कुछ कदमकी दूरी पर स्थित कैपिटल यहूदी संग्रहालय के पास अंजाम दिया गया. होमलैंड सुरक्षा सचिव ने इस बारे में जानकारी दी है. होमलैंड सिक्योरिटीसेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने बताया कि वॉशिंगटन में इस्राइली दूतावास के दो कर्मचारियों की बुधवार शाम को यहूदी संग्रहालय के पास गोली मारकरहत्या कर दी गई. फिलहाल संदिग्ध को हिरासत में ले लिया गया है. वहीं, इस्राइली विदेश मंत्री ने वाशिंगटन डीसी में मारे गए इस्राइली कर्मियों कीपहचान यारोन लिस्चिंस्की और सारा मिलग्रिम के रूप में की है. मेट्रोपॉलिटन पुलिस प्रमुख पामेला स्मिथ ने प्रेस कांफ्रेस में बताया कि बुधवार शामको जब दो इस्राइली कर्मी एक पुरुष और एक महिला, कैपिटल यहूदी संग्रहालय में एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे. सुरक्षाकर्मियों ने लिया हिरासत मेंतभी संदिग्ध हमलावर वहां पहुंचा और उन पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं. स्मिथ ने बताया कि संदिग्ध की पहचान शिकागो निवासी 30 वर्षीयएलियास रोड्रिगेज के रूप में हुई है. उसे गोलीबारी से पहले संग्रहालय के बाहर घूमते हुए देखा गया था. गोलीबारी के बाद वह संग्रहालय में चला गयाऔर कार्यक्रम सुरक्षाकर्मियों ने उसे हिरासत में ले लिया. इस दौरान संदिग्ध ने गोली मारने के बाद फ्री फलस्तीन के नारे भी लगाए. वहीं, अमेरिका मेंइस्राइल के राजदूत येचिएल लीटर ने कहा कि मारा गया जोड़ा सगाई करने वाला था. उसका अगले सप्ताह येरुशलम में शादी की योजना थी वहीं, अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी ने हत्या के बारे में बताया कि जब गोलीबारी हुई उस वक्त वह पूर्व न्यायाधीश जीनिन पिरो के साथ घटनास्थल पर ही थीं. वे वाशिंगटन में अमेरिकी अटॉर्नी के रूप में कार्य करती हैं और जिनका कार्यालय इस मामले पर मुकदमा चलाएगा. ट्रम्प ने दी हत्याओं पर प्रतिक्रियावहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप ने भी इन हत्याओं पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने पीड़ितों के परिजनों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि येहत्याएं साफ तौर पर यहूदी-विरोधी भावना पर आधारित हैं. नफरत और कट्टरपंथ के लिए अमेरिका में कोई जगह नहीं है. बहुत दुख की बात है कि ऐसीचीजें हो सकती हैं. इस बीच, एफ.बी.आई. निदेशक काश पटेल ने बताया कि मुझे और मेरी टीम को आज रात कैपिटल यहूदी संग्रहालय के बाहरऔर हमारे वाशिंगटन फील्ड ऑफिस के पास डाउनटाउन डी.सी. में हुई गोलीबारी के बारे में जानकारी दी गई है. हम इसे लेकर एम.पी.डी. के साथमिलकर काम कर रहे हैं और अधिक जानकारी जुटा रहे हैं. उन्होंने पीड़ितों के प्रति संवेदनाएं जताते हुए कहा कि हम इस बारे में जरूरी अपडेट देते रहेंगे.
मनरेगा पर कांग्रेस का तीखा वार, कहा – मोदी सरकार की नीतियों ने तोड़ी गरीबों की रीढ़

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक बार फिर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा किजब 2015 में पीएम मोदी ने संसद में मनरेगा का मज़ाक उड़ाया था, तभी उनकी संवेदनहीनता और दूरदर्शिता की कमी दिख गई थी। लेकिन महामारीके वक्त इसी मनरेगा ने करोड़ों लोगों की ज़िंदगी बचाई। रमेश ने बताया कि 2019-20 में जहां 6.16 करोड़ परिवारों ने इस योजना के तहत काम मांगा, वहीं कोविड के दौरान 2020-21 में यह आंकड़ा8.55 करोड़ पहुंच गया। उन्होंने कहा, “लॉकडाउन में जब सरकार के पास कोई योजना नहीं थी, तब मनरेगा ही था जिसने देश के सबसे ज़रूरतमंदलोगों को सहारा दिया।” रिपोर्ट के ज़रिए खोली सरकार की पोलLibTech India की ताज़ा रिपोर्ट का हवाला देते हुए रमेश ने बताया कि आज हालात बेहद खराब हैं। सिर्फ 7% परिवारों को ही साल में 100 दिनका काम मिल रहा है। ऊपर से प्रति परिवार औसत कार्यदिवस भी घट गया है। सरकार ने मनरेगा के लिए ₹86,000 करोड़ का बजट तय किया है, जोज़मीन पर ज़रूरत के मुकाबले बहुत कम है। जबकि स्वतंत्र विशेषज्ञों और PAEG जैसे संगठनों ने 2022-23 के लिए ₹2.64 लाख करोड़ कीसिफारिश की थी। उन्होंने कहा, “विश्व बैंक भी कह चुका है कि योजना के लिए GDP का कम से कम 1.7% देना चाहिए, जबकि सरकार महज 0.26% दे रही है।” जनता की सुनवाई नहीं, समस्याएं जस की तसरमेश ने बताया कि कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान झारखंड के गढ़वा में 14 फरवरी 2024 को मनरेगा से जुड़े मज़दूरों ने अपनीपरेशानियां खुलकर रखी थीं। लेकिन 15 महीने बाद भी कुछ नहीं बदला। “ये सरकार की तरफ से बनाई गई एक बड़ी मानवीय और आर्थिक त्रासदीहै,” उन्होंने कहा। कांग्रेस की 6 बड़ी मांगेंयोजना को फिर से मांग आधारित बनाया जाए और काम मांगने वालों को पर्याप्त दिन मिले। मनरेगा मज़दूरी बढ़ाकर ₹400 प्रतिदिन की जाए।मज़दूरी दर तय करने के लिए स्वतंत्र समिति बनाई जाए। आधार आधारित भुगतान प्रणाली को अनिवार्य न बनाया जाए।,मज़दूरी समय पर मिले औरदेरी पर मुआवज़ा भी दिया जाए।, सालाना कार्यदिवस की सीमा 100 से बढ़ाकर 150 दिन की जाए। जयराम रमेश का कहना है कि कांग्रेस का ये रुख सिर्फ आलोचना नहीं, बल्कि ज़मीनी समस्याओं के समाधान की दिशा में गंभीर पहल है।
मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई का बयान, छुट्टियों में वकीलों की काम करने की अनिच्छा से बढ़ रहा बैकलॉग

मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने बुधवार को नाराजगी जताई कि अदालतों में लंबित मामलों के लिए न्यायपालिका को दोषी ठहराया जाता है, जबकिवकील खुद गर्मियों की छुट्टियों में काम करने को तैयार नहीं होते। यह टिप्पणी उस समय आई जब एक वकील ने याचिका को गर्मी की छुट्टियों केबाद सूचीबद्ध करने की अपील की। उन्होंने कहा, “शीर्ष पांच न्यायाधीश छुट्टियों में भी काम कर रहे हैं, लेकिन वकील सहयोग नहीं करते। फिर भीबैकलॉग के लिए हमें जिम्मेदार ठहराया जाता है।” गर्मी की छुट्टियों के लिए सुप्रीम कोर्ट की अधिसूचना जारीहाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक अधिसूचना जारी कर बताया कि अब गर्मी की छुट्टियों को ‘आंशिक कोर्ट कार्य दिवस’ के रूप में देखा जाएगा। यहअवधि 26 मई से 13 जुलाई तक चलेगी। इस दौरान दो से लेकर पांच वैकेशन बेंच काम करेंगी, जिसमें शीर्ष पांच जजों की भागीदारी भी सुनिश्चितकी गई है। पहले की परंपरा में बदलावपूर्व परंपरा के अनुसार, गर्मियों में केवल दो वैकेशन बेंच ही बैठती थीं और वरिष्ठ न्यायाधीशों को कोर्ट में उपस्थित रहने की आवश्यकता नहीं होती थी।अब, शीर्ष जज भी इस दौरान न्यायिक कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेंगे, जिससे लंबित मामलों को तेजी से निपटाने की दिशा में प्रयास किया जासके। जजों की जिम्मेदारी और कोर्ट का समयअधिसूचना के अनुसार, 26 मई से 1 जून तक पांच बेंचों की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिसजेके महेश्वरी और जस्टिस बीवी नागरत्ना करेंगे। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुली रहेगी, जबकि हर रविवार, सार्वजनिक अवकाश और 12 जुलाई को इसे बंद रखा जाएगा।
गुजरात समाचार पर कार्रवाई: जिग्नेश मेवाणी और लालजी देसाई ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

20 मई 2025 को कांग्रेस नेता जिग्नेश मेवाणी और सेवा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी देसाई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी सरकार और गुजरात सरकारपर गंभीर आरोप लगाए। जिग्नेश मेवाणी ने कहा कि गुजरात में ओबीसी, मुस्लिम, आदिवासी और दलितों के घर तोड़े जा रहे हैं, जबकि कर्नाटक कांग्रेस 1.11 लाख परिवारोंको घर देने जा रही है। उन्होंने “गुजरात समाचार” के संपादक बाहुबली शाह की गिरफ्तारी को बदले की कार्रवाई बताया। मेवाणी बोले, पहलगाम हमले के दोषियों को पकड़ने की बजाय सरकार सवाल उठाने वालों को टारगेट कर रही है। उन्होंने कहा कि “गुजरात समाचार” ने हमेशा सत्ता से सवाल किए हैं, इसलिए सरकार उनसे बदला ले रही है। लालजी देसाई ने कहा कि आतंकवाद खत्म करने की बात करने वाली सरकार अब पत्रकारिता खत्म कर रही है। उन्होंने गुजरात मॉडल को “मोदानी मॉडल” बताया – यानी मोदी, अडानी और अंबानी का गठजोड़। प्रेस की आज़ादी पर हो रहे हमलों की उन्होंने निंदा की और संसद में खुली बहस की मांग की।
आम आदमी पार्टी ने लॉन्च किया नया छात्र संगठन ‘ASAP’, वैकल्पिक राजनीति को मिलेगा नया मंच

नई दिल्ली, 20 मई 2025आम आदमी पार्टी (AAP) ने मंगलवार को अपने नए छात्र संगठन एसोसिएशन ऑफ स्टूडेंट्स फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिक्स (ASAP) की औपचारिकशुरुआत की। इस संगठन के ज़रिए पार्टी देशभर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में वैकल्पिक राजनीति को बढ़ावा देने का प्रयास करेगी। दिल्ली के संविधान क्लब में आयोजित लॉन्च कार्यक्रम में AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ASAP एक “आंदोलन है, जोकैंपस से शुरू होकर देश की राजनीति में बदलाव लाने का माध्यम बनेगा।” उन्होंने कहा कि ASAP का मकसद ऐसी राजनीति को बढ़ावा देना है, जोभ्रष्टाचार और जातिवाद से मुक्त हो, और युवाओं को शिक्षा, विकास और पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर एकजुट करे। ASAP की योजना अगले कुछ महीनों में देश के 50,000 कॉलेजों से करीब 5 लाख छात्र स्वयंसेवकों को जोड़ने की है। यह संगठन दिल्लीविश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनावों में भी हिस्सा लेगा और आगे चलकर अन्य राज्यों के विश्वविद्यालयों में भी विस्तार करेगा। इससे पहले AAP की छात्र शाखा के रूप में छात्र युवा संघर्ष समिति (CYSS) सक्रिय थी, लेकिन बीते कुछ वर्षों में उसका प्रभाव सीमित रहा।ASAP को CYSS के एक परिष्कृत और व्यापक संस्करण के रूप में देखा जा रहा है। ASAP के प्रमुख एजेंडे में छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए नीति निर्माण, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, रोजगार के अवसर और युवाओं कीसामाजिक-राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देना शामिल है।
महापौर का बड़ा ऐलान: अब नहीं लगेगा AAP सरकार का यूजर्स सरचार्ज

नई दिल्ली, 20 मई:दिल्ली नगर निगम द्वारा 2025-26 के बजट में लगाए गए “यूजर्स सरचार्ज” को लेकर हुए विरोध के बीच दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा केआग्रह पर महापौर सरदार राजा इकबाल सिंह ने इस सरचार्ज की वसूली को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है। साथ ही, बकाया संपत्ति करदाताओं को राहत देते हुए एक सेटलमेंट योजना की भी घोषणा की गई है। दिल्ली भाजपा द्वारा आयोजित बैठक में विभिन्न आरडब्लूए और नागरिक संगठनों ने यूजर्स सरचार्ज के खिलाफ आपत्ति जताई। वीरेन्द्र सचदेवा ने कहाकि आम आदमी पार्टी ने बिना चर्चा के यह सरचार्ज लागू किया, जो नियम प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन है। उन्होंने मांग की कि इस परनागरिकों और व्यापारिक संगठनों से चर्चा के बाद ही कोई निर्णय लिया जाए। महापौर ने बैठक में बताया कि अब कोई अतिरिक्त यूजर्स चार्ज नहीं लिया जाएगा और जल्द ही एक प्राइवेट मेंबर प्रस्ताव नगर निगम में लायाजाएगा। इसके अलावा हाउस टैक्स एमनेस्टी स्कीम के तहत पिछले 5 सालों के कर जमा कर एनओसी दी जाएगी, बिना किसी ब्याज और जुर्माने के। महापौर ने यह भी कहा कि आरडब्लूए द्वारा दिए गए सुझावों पर क्षेत्रीय स्तर पर नगर निगम की बैठकें आयोजित की जाएंगी।
भारत में वक्फ अधिनियम के खिलाफ विराध प्रदर्शन के दौरान भड़की मुर्शिदाबाद हिंसा, बीजेपी ने साधा पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना

भाजपा में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की मुर्शिदाबाद हिंसा से निपटने के तरीके को लेकर ममता बनर्जी केनेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार पर तीखा हमला किया. पार्टी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने बुधवार को उन्होंने कहा कि तथ्य-खोजी एसआईटी की रिपोर्टसे हिंदुओं के प्रति सरकार की क्रूरता का पता चला है. हिंसा के दौरान पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने उन पर टीएमसीनेताओं की कार्रवाई की अनदेखी करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुर्शिदाबाद हिंसा पर एसआईटी की रिपोर्ट नेस्पष्ट रूप से संकेत दिया है कि हिंदुओं को निशाना बनाकर हिंसा की गई थी और इसमें टीएमसी नेता शामिल थे और पुलिस का रवैया हिंसा को रोकनेके बजाय टीएमसी नेताओं की कार्रवाई की अनदेखी करने वाला प्रतीत होता है. ममता का कट्टरपंथियों के लिए असीम लगावउन्होंने कहा ‘मुर्शिदाबाद से पहलगाम तक हिंदुओं को निशाना बनाकर उनके खिलाफ हिंसा का सिलसिला साफ तौर पर दिखाई दे रहा है. मुर्शिदाबादहिंसा में जिस तरह से तथ्य सामने आ रहे हैं, उससे ममता बनर्जी सरकार की हिंदुओं के प्रति क्रूरता और कट्टरपंथियों के प्रति असीम लगाव का पताचलता है. यह तब हुआ जब कलकत्ता उच्च न्यायालय की तरफ से गठित तथ्य-खोजी समिति ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा पर अपनीरिपोर्ट पेश की, जिसमें बताया गया कि हिंसा के दौरान बेतबोना गांव में 113 घर बुरी तरह प्रभावित हुए. इसमें कहा गया कि अधिकांश लोगों नेमालदा में शरण ली थी. लेकिन बेतबोना गांव में पुलिस प्रशासन ने सभी को वापस लौटने पर मजबूर कर दिया. रिपोर्ट में कहा गया, ‘हमले स्थानीयपार्षद की तरफ से निर्देशित किए गए थे और कहा कि स्थानीय पुलिस पूरी तरह से “निष्क्रिय और अनुपस्थित” थी. रिपोर्ट में आगे कहा गया कि लोगअपनी सुरक्षा के लिए स्थायी बीएसएफ कैंप और केंद्रीय सशस्त्र बल चाहते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है, ‘पश्चिम बंगाल पुलिस ने कोई जवाब नहीं दिया।बेतबोना के ग्रामीण ने शुक्रवार को शाम चार बजे और शनिवार को शाम चार बजे फोन किया, लेकिन पुलिस ने फोन नहीं उठाया . रिपोर्ट में आगे कहागया है, ‘एक आदमी गांव में वापस आया और उसने देखा कि किन घरों पर हमला नहीं हुआ है और फिर बदमाशों ने आकर उन घरों में आग लगा दी. बदमाशों ने काटे पानी कनेक्शनबदमाशों ने पानी का कनेक्शन काट दिया ताकि आग को पानी से न बुझाया जा सके इसमें कहा गया है, ‘बदमाशों ने घर के सभी कपड़ों को मिट्टी केतेल से जला दिया और घर की महिला के पास तन ढकने के लिए कपड़े नहीं थे. रिपोर्ट में हरगोविंद दास और उनके बेटे चंदन दास की हत्या का जिक्रकरते हुए कहा गया है, ‘उन्होंने घर का मुख्य दरवाजा तोड़ दिया और उसके बेटे और उसके पति को ले गए और उनकी पीठ पर कुल्हाड़ी से वार किया. एक आदमी तब तक वहां इंतजार कर रहा था जब तक वे मर नहीं गए.
अशोका विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर को हिला सैन्य अफसरों कर्नल कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह पर विवादित टिप्पणी के मामले में अंतरिम जमानत, जानें क्या है पूरा मामला

हरियाणा के अशोका विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर और राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख अली खान महमूदाबाद को महिला सैन्य अफसरोंकर्नल कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह पर विवादित टिप्पणी करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी है. सुप्रीम कोर्ट नेमहमूदाबाद को सीजेएम, सोनीपत की संतुष्टि के लिए जमानत बांड भरने को भी कहा है. साथ ही अली खान महमूदाबाद को निर्देश दिया है कि वे हदोनों पोस्ट से संबंधित कोई भी ऑनलाइन लेख नहीं लिखेंगे या कोई भी ऑनलाइन भाषण नहीं देंगे जो जांच का विषय है. सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेशइसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें भारतीय धरती पर आतंकवादी हमलों या हमारे राष्ट्र द्वारा दी गई जवाबी प्रतिक्रिया के बारे में कोई भी टिप्पणी करनेसे रोक दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने तीन आईपीएस अधिकारियोंवाली एक एसआईटी के गठन का भी आदेश दिया है. इस समिति में एक महिला अधिकारी भी शामिल होगी जो राज्य से बाहर की होगी. सुप्रीम कोर्टने निर्देश दिया है कि 24 घंटे के भीतर एसआईटी का गठन किया जाए, एसोसिएट प्रोफेसर जांच में शामिल होंगे और जांच में पूरा सहयोग करेंगे. बतादें कि इससे पहले, महिला सैन्य अफसरों पर अमर्यादित टिप्पणी करने के मामले में अशोका विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रो. अली खान महमूदाबादको 27 मई तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया था. एमआईसी आजाद सिंह की कोर्ट में किया गया पेशरिमांड अवधि पूरी होने के बाद पुलिस ने प्रो. अली को जेएमआईसी आजाद सिंह की कोर्ट में पेश किया lE। पुलिस ने प्रोफेसर का सात दिन कीरिमांड और मांगी, लेकिन कोर्ट ने मांग खारिज कर दी. अदालत ने पुलिस को 60 दिनों में केस का चालान पेश करने की हिदायत दी थी इस दौरानपुलिस ने दलील दी थी कि प्रो. अली से बरामद लैपटॉप व मोबाइल डाटा को रिकवर करने के बाद उसकी जांच करनी है पासपोर्ट व खातों से लेनदेनकी जांच भी करनी है दलीलें सुनने के बाद भी कोर्ट ने पुलिस रिमांड की मांग खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा, अगर पुलिस को लगता है कि रिमांड कीजरूरत है तो वह नए सिरे से प्रार्थना पत्र दायर करे. हरियाणा राज्य महिला आयोग ने की अध्यक्ष रेणु भाटिया ने हाल ही में एसोसिएट प्रोफेसर कोनोटिस भेजकर उनकी टिप्पणियों पर सवाल उठाया था. हालांकि महमूदाबाद ने कहा था कि उनकी टिप्पणियों को गलत समझा गया है. उन्होंनेअभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अपने मौलिक अधिकार का इस्तेमाल किया है. राज्य के डीजीपी को 16 मई को लिखे पत्र में एचएससीडब्ल्यू ने प्रथमदृष्टया साक्ष्य और मिसाल के आधार पर महमूदाबाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए शिकायत भी की थी.