अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत अन्य देशों पर टैरिफ लगाने का किया बड़ा ऐलान,26% जवाबी शुल्क के प्रभाव की समीक्षा कररही सरकार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत अन्य देशों पर जवाबी टैरिफ लगाने का एलान कर दिया है ट्रंप ने भारत से आयात होने वाली वस्तुओं पर26 फीसदी शुल्क लगाने की घोषणा की है कंबोडिया से आयातित वस्तुओं पर 49 फीसदी और चीन से आयात होने वाले सामान पर 34 फीसदीशुल्क लगाने का एलान किया गया है. भारत सरकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाबी टैरिफों के एलान पर करीब से नजर बनाए हुए हैं औरउसके प्रभाव की समीक्षा कर रही है. वाणिज्य मंत्रालय भारत पर लगाए गए 26 फीसदी अमेरिकी पारस्परिक टैरिफ या आयात शुल्क के प्रभाव काविश्लेषण कर रहा है एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि अमेरिका में सभी आयातों पर सार्वभौमिक 10 फीसदी टैरिफ 5 अप्रैल सेऔर शेष 16 प्रतिशत टैरिफ 10 अप्रैल से लागू होंगे. उनका मानना है कि यह हमारे लिए झटका नहीं है. इसका प्रभाव बहुत ज्यादा नहीं होने वाला है. इसका मिलाजुला असर ही देखने को मिल सकता है. मंत्रालय टैरिफ के प्रभाव का कर रहा विश्लेषणअधिकारियों ने कहा मंत्रालय टैरिफ के प्रभाव का विश्लेषण कर रहा है उन्होंने यह भी कहा कि एक प्रावधान है कि यदि कोई देश अमेरिका कीचिंताओं का समाधान करता है या उसे दूर करने का प्रयास करता है तो ट्रंप प्रशासन उस देश के खिलाफ शुल्क कम करने पर विचार कर सकता हैभारत पहले से ही अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है. दोनों देश इस साल की शरद ऋतु (सितंबर-अक्टूबर) तकसमझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं. अधिकारी ने कहा यह मिलाजुल प्रभाव लेकर आएगा. इसका एकतरफा परिणामदेखने को नहीं मिलेगा भारत के लिए कोई झटका नहीं है.इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिकी उत्पादों पर भारत की ओर से लगाए गए उच्चशुल्कों को सूचीबद्ध किया. उन्होंने सभी देशों पर पारस्परिक शुल्कों की घोषणा की. इसके तहत भारत पर 26 फीसदी पारस्परिक शुल्क लगाने काएलान किया गया जवाबी टैरिफ की घोषणा करते हुए ट्रंप ने कहा कि हमारे देश को अन्य देशों की तरफ से लूटा गया है. अमेरिकी करदाताओं को 50 से अधिक वर्षों से ठगा जा रहा है लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा. ट्रंप ने कहा भारत बहुत-बहुत सख्त. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी-अभी गए हैं वह मेरेबहुत अच्छे दोस्त हैं लेकिन मैंने कहा कि आप मेरे दोस्त हैं पर आप हमारे साथ सही व्यवहार नहीं कर रहे हैं वे हमसे 52 प्रतिशत शुल्क लेते हैं.
12 घंटे चर्चा के बाद लगी लोकसभा में मुहर, आज पेश होगा राज्यसभा में वक्फ बिल

लोकसभा ने बुधवार रात करीब एक बजे वक्फ संशोधन विधेयक बहुमत से पारित कर दिया. विधेयक के पक्ष में 288,जबकि विरोध में 232 मतपड़े। सदन ने विपक्ष के सभी संशोधनों को भी ध्वनिमत से खारिज कर दिया. विपक्षी सांसद एनके प्रेमचंद्रन के संशोधन प्रस्ताव पर रात सवा बजेमतदान हुआ. जो 231 के मुकाबले 288 से खारिज हो गया. इसमें बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्य न रखने का प्रस्ताव था विधेयक पर लोकसभा में 12 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई. अब विधेयक आज यानी बृहस्पतिवार को राज्यसभा में पेश किया जाएगा. किरन रिजिजू ने बुधवार दोपहर विधेयकपेश करते हुए चर्चा की शुरुआत की उन्होंने कहा विधेयक का मकसद किसी धर्म में हस्तक्षेप नहीं बल्कि वक्फ की संपत्तियों का प्रबंधन है. पुराने कानूनकी सबसे विवादित धारा 40 का जिक्र करते हुए रिजिजू ने कहा इस कठोर प्रावधान के तहत वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित करसकता था. न्यायाधिकरण ही इसे रद्द या संशोधित कर सकता था. हाईकोर्ट में नहीं की जा सकती अपीलहाईकोर्ट में अपील नहीं की जा सकती थी इसे हटा दिया गया है. मुस्लिम समुदाय की कोई जमीन नहीं छीनी जाएगी। विपक्षी गुमराह कर रहे हैं.इससेपहले गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए विपक्ष पर तुष्टीकरण की राजनीति के तहत वक्फ बोर्ड को सरकारी संपत्ति की लूटका लाइसेंस देने का आरोप लगाया उन्होंने कहा आजाद भारत में मुगलकालीन व्यवस्था और कानून को जगह नहीं देंगे. दशकों से जातिवाद तुष्टीकरणव परिवारवाद पर पीएम नरेंद्र मोदी की विकास की राजनीति के कारण जनता हमें तीन बार और जनादेश देगी.शाह ने साल 2013 में यूपीए-2 सरकारमें किए संशोधन की याद दिलाते हुए कहा इस कारण व्यापक अराजकता फैली संशोधन को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने अन्यायी करार देतेहुए कड़े कानून की मांग की थी. 1954 से बना है वक्फ कानून-किरन रिजिजूसरकार लालू यादव की इच्छा पूरी कर रही है. चर्चा का जवाब देते हुए अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू ने बिल को असांविधानिक बताने केविपक्ष के दावे पर कहा जब 1954 से वक्फ कानून बना है.तो उसमें सुधार असांविधानिक कैसे हो सकता है उन्होंने कहा दुनिया में देश काअल्पसंख्यक समुदाय सर्वाधिक सुरक्षित है.विपक्ष की ओर से विधेयक पर बहस की शुरुआत कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने की उन्होंने कहा वक्फसंपत्तियों पर नियंत्रण करने का प्रयास किया जा रहा है. आज एक अल्पसंख्यक समूह पर नजर है कल दूसरे को निशाना बनाएंगे. हम जरूरी सुधारों कासमर्थन करते हैं. पर इस विधेयक से मुकदमेबाजी और समस्याएं बढ़ेंगी सुधार के नाम पर वक्फ काउंसिल में चुनाव से सदस्य बनाने की जगह मनोनयनकी बात है. सरकार के पास अधिकार है कि वक्फ के नाम पर गलत हो रहा हो तो निर्देश दें.
मुख्यमंत्री योदी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री पद को लेकर दिया बयान,मैं योगी हूं हमेशा के लिए राजनीति में नहीं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री पद पर अपनी दावेदारी को लेकर बयान दिया है उन्होंने भविष्य में अपनी राजनीतिक योजनाओं पर भी चर्चाकी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजनीति में धर्म का मिलन गलत नहीं है ये हमारी गलती है कि हम धर्म को कुछ स्थानों के लिए सीमितकर देते हैं.मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मैं दिल से एक योगी हूं औरराजनीति मेरा पूर्णकालिक व्यवसाय नहीं है. मैं मुख्यमंत्री पद पर उत्तर प्रदेश की जनता की सेवा करने के लिए हूं और मैं हमेशा के लिए राजनीति मेंनहीं आया हूं मेरी पार्टी भाजपा ने मुझे जो जिम्मेदारी दी है उसे मैं निभा रहा हूं. मैं कब तक राजनीति में रहूंगा इसकी समय सीमा है. मैं हमेशा के लिएराजनीति में नहीं हूं. बता दें कि इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी को लेकर चर्चाएं काफी तेज हैं और योगी को उनके समर्थकों के द्वाराप्रधानमंत्री पद के दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है. ये चर्चाएं प्रधानमंत्री मोदी के 30 मार्च को संघ मुख्यालय जाने के बाद और तेज हो गई हैं. सोशल मीडिया पर हो रही चर्चाओं में सीएम योगी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को प्रधानमंत्री पद केदावेदार के तौर पर देखा जा रहा है.इस पर शिवसेना के नेता संजय राउत ने भी बयान दिया है उन्होंने कहा कि देश का अगला प्रधानमंत्री महाराष्ट्र सेहोगा जिस पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मोदी जी ही देश का नेतृत्व करेंगे. केन्द्रीय नेतृत्व के साथ नहीं है कोई मतभेदहमारी संस्कृति में जब तक पिता जीवित होता है उत्तराधिकारी की बात नहीं की जाती है.केंद्रीय नेतृत्व से मतभेद होने से जुड़े सवाल को खारिज करतेहुए योगी ने कहा कि केन्द्रीय नेतृत्व के साथ मेरा कोई मतभेद नहीं है. मतभेद होता तो मैं यहां नहीं बैठा होतामैं खुद को विशेष भी नहीं मानता हूं योगीने हैरानी जताते हुए कहा कि पता नहीं मतभेद होने की बात कहां से आ जाती है पार्टी के कारण ही मैं यहां बैठा हूं.मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहाकि राजनीति में धर्म का मिलन गलत नहीं है ये हमारी गलती है कि हम धर्म को कुछ स्थानों के लिए सीमित कर देते हैं और राजनीति को कुछ लोगों केलिए छोड़ देते हैं इससे समस्याएं उत्पन्न होती हैं. राजनीति का उद्देश्य स्वार्थों की पूर्ति करना नहीं है बल्कि समाज की भलाई करना है. इसी तरह धर्मका उद्देश्य भी परमार्थ होता है जब धर्म का प्रयोग स्वार्थ की पूर्ति के लिए होता है तो मुश्किल आती है लेकिन परमार्थ का उद्देश्य होने पर धर्म प्रगति केमार्ग खोलता है.संसदीय बोर्ड में सभी वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में उम्मीदवारों के नाम पर सार्वजनिक तौर पर चर्चा होती है. आपस में गहन विचार-विमर्श के बाद ही प्रत्याशी के नाम तय होते हैं इसमें किसी के चलने या न चलने की बात ही नहीं है. संसदीय बोर्ड के सदस्य सभी नामों के बारे गहनतासे छीनबीन के बाद ही सूची फाइनल करते हैं.
बंगाल में 25000 शिक्षकों की भर्ती रद्द करने का फैसला, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को रखा बरकरार

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 2016 में एसएससी द्वारा राज्य द्वारा संचालित और राज्य द्वारा सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए 25,000 से अधिक शिक्षकों औरगैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती को रद्द कर दिया था. इस मामले को राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट लेकर गई. सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले कोबरकरार रखा.सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में 25 हजार शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती को रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले को बरकराररखा है. शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय कलकत्ता के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया है सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्तस्कूलों में 25,753 शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य करार देते हुए चयन प्रक्रिया को दूषित और दागी करार दिया.कलकत्ताहाईकोर्ट ने 2016 में एसएससी द्वारा राज्य द्वारा संचालित और राज्य द्वारा सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए 25,000 से अधिक शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती को रद्द कर दिया था. सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हमें हाईकोर्ट केफैसले में हस्तक्षेप करने का कोई वैध आधार या कारण नहीं मिला.मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जिन कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द कर दी गई हैं उन्हेंअपना वेतन और अन्य भत्ते लौटाने की जरूरत नहीं है. तीन साल के भीतर पूरा करने का आदेशशीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को नए सिरे से चयन प्रक्रिया शुरू करने और इसे तीन महीने के भीतर पूरा करने का भी आदेश दिया. हालांकि मानवीयआधार पर विकलांग कर्मचारियों को छूट प्रदान की गई तथा कहा गया कि वे नौकरी में बने रहेंगे.पीठ ने सीबीआई जांच के उच्च न्यायालय के निर्देशको चुनौती देने वाली पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर सुनवाई 4 अप्रैल के लिए तय की शीर्ष अदालत ने 10 फरवरी को इस मामले में दायरयाचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.इस मुकदमे को पश्चिम बंगाल एसएससी भर्ती मामले के रूप में भी जाना जाता है यह राज्य केस्कूल सेवा आयोग द्वारा 25,000 शिक्षण/गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती से संबंधित है जिसे कलकत्ता उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया था. राज्य नेउच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. कई पीड़ित उम्मीदवारों ने भी अपनी नियुक्तियों को रद्द करने को चुनौती देते हुएयाचिका दायर की थी.
लॅान्च किया गया केसरी 2 का ट्रेलर, प्रेस कॅान्प्रेंस वार्ता के दौरान कई अभिनेता रहे मौजूद “केसरी 3 का भी किया ऐलान”

आज 3 अप्रैल को दिल्ली में अक्षय कुमार की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘केसरी 2’ का ट्रेलर लॉन्च हुआ. इस ट्रेलर रिलीज इवेंट और प्रेस कॉन्फ्रेंस अक्षयकुमार के अलावा आर माधवन, अनन्या पांडे और फिल्म के डायरेक्टर करण सिंह त्यागी व प्रोड्यूसर करण जौहर भी मौजूद थे. इस दौरान फिल्म के बारेमें बात करते हुए अक्षय ने ‘केसरी 3’ का भी एलान कर दिया.अक्षय कुमार ने घोषणा की है कि वह ‘केसरी: चैप्टर 3’ बनाएंगे और यह भी बताया कियह किस पर आधारित होगी. केसरी चैप्टर 2 के ट्रेलर रिलीज इवेंट के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए अभिनेता ने कहा कि फ्रेंचाइजी की अगलीफिल्म हरि सिंह नलवा के जीवन पर आधारित होगी. जो सिख साम्राज्य की सेना, सिख खालसा फौज के पहले कमांडर-इन-चीफ थे.हरि सिंह नलवाएक सिख कमांडर थे जो महाराजा रणजीत सिंह की सेना में एक सम्मानित नेता थे. उन्होंने कश्मीर हजारा और पेशावर के गवर्नर के रूप में कार्य कियाऔर अफगानों के खिलाफ अपनी जीत के लिए लोकप्रियता प्राप्त की. वास्तव में हरि सिंह नलवा ने खैबर दर्रे के माध्यम से पंजाब में अफगानों केआक्रमण को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. जो ऐतिहासिक रूप से विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा भारत में प्रवेश करने के लिए इस्तेमालकिया जाने वाला प्रमुख मार्ग है. चैप्टर 2′ का ट्रेलर साझा करते हुए निर्माताओं ने लिखा था कैप्शनदरअसल चैप्टर 2′ का ट्रेलर साझा करते हुए निर्माताओं ने कैप्शन में लिखा, ‘एक आदमी, उसका साहस, उसके शब्द – जिसने पूरे साम्राज्य को हिलादिया. अब तक बोले गए सबसे चौंकाने वाले झूठ को उजागर करें. हमारे इतिहास के सबसे काले अध्याय को उजागर करें. जलियांवाला बाग त्रासदीके पीछे की सच्चाई को उजागर करें.इस फिल्म में दरअसल अक्षय कुमार के साथ आर. माधवन और अनन्या पांडे भी हैं.’केसरी चैप्टर 2’ 18 अप्रैल2025 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी.अक्षय कुमार ने 2022 में एक इंटरव्यू में हरि सिंह नलवा का किरदार निभाने का संकेत दिया था. अभिनेता सेपूछा गया था कि वह किस किरदार को पर्दे पर निभाना चाहेंगे. तो उन्होंने हरि सिंह नलवा का नाम लिया था और उन्हें महान योद्धा बताया था. ऐसालग रहा है कि उनका सपना पूरा हो रहा है.
वक्फ संशोधन बिल पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का विरोध, सरकार पर वक्फ संपत्तियों पर कब्जे का आरोप

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने वक्फ संशोधन बिल का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि पहले वक्फ की जमीनों पर कब्जा गैर-जमानती अपराध था, लेकिन अब इसे जमानती धाराओं में बदल दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वक्फ की जमीन पर कब्जे को बढ़ावा देने की कोशिश कररही है और मुसलमानों की संपत्तियों पर नजर गड़ाए हुए है। बिल ड्राफ्ट करने वालों पर सवालइमरान मसूद ने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने यह बिल तैयार किया है, उन्हें वक्फ के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वक्फ कीसंपत्तियों के मामलों को हल करने के लिए बनाई गई कमेटी में 11 सदस्य गैर-मुस्लिम होंगे। इस पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि क्या किसी अन्यधर्म के ट्रस्ट में गैर-मुस्लिमों को शामिल किया जाता है? काशी विश्वनाथ ट्रस्ट का दिया उदाहरणउन्होंने काशी विश्वनाथ ट्रस्ट का उदाहरण देते हुए बताया कि ऐसे ट्रस्टों में केवल हिंदू सदस्य होते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि अगर वक्फ से जुड़ेमामलों को हल करने वाली समिति में बहुमत गैर-मुस्लिमों का होगा, तो मुस्लिम समुदाय को न्याय कैसे मिलेगा? यूपी में वक्फ की संपत्तियों पर सरकारी कब्जासांसद मसूद ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में 78% वक्फ की जमीनों को सरकारी संपत्ति घोषित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य में11,400 हेक्टेयर जमीन सरकार के कब्जे में चली गई है। इसी तरह कर्नाटक में भी कई वक्फ संपत्तियों पर सरकारी कब्जा हो चुका है। संविधान और सामाजिक समानता का हवालाइमरान मसूद ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने देश में सामाजिक समानता की बात की थी। उन्होंने कहाकि जब तक सामाजिक लोकतंत्र नहीं होगा, तब तक राजनीतिक लोकतंत्र भी कमजोर रहेगा। वक्फ प्रबंधन पर नियंत्रण का मुद्दाउन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों से जुड़े मामलों में अन्य धर्मों के लोगों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि इसे केवल मुसलमान ही समझसकते हैं। वक्फ बोर्ड का प्रबंधन सरकार के हाथ में होता है, जिससे वक्फ की संपत्तियों पर कब्जा होने का खतरा बढ़ जाता है। विवादित वक्फ संपत्तियों का मुद्दाउन्होंने कहा कि विवादित वक्फ संपत्तियों के मामलों में उचित कार्रवाई नहीं हो रही है और सरकार उन्हें अपने कब्जे में ले रही है। उन्होंने सच्चर कमेटीकी रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि दिल्ली, राजस्थान, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उड़ीसा सहित कई राज्यों में वक्फ की संपत्तियों परसरकारी कब्जा हो चुका है।
केरल में आशा कार्यकर्ताओं का विरोध: वेतन, अधिकार और सुरक्षा की मांग

केरल की स्वास्थ्य सेवाओं में आशा (Accredited Social Health Activist) कार्यकर्ताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ये महिलाएं ग्रामीणऔर शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने में अहम योगदान देती हैं। वे गर्भवती महिलाओं की देखभाल, नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य कीनिगरानी, टीकाकरण कार्यक्रमों को संचालित करने और महामारी के दौरान जागरूकता फैलाने जैसे कार्यों में सक्रिय रहती हैं। लेकिन सरकार कीअनदेखी और अपर्याप्त वेतन के कारण ये कर्मठ स्वास्थ्यकर्मी आज अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंकागांधी वाड्रा ने उनके आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो महिलाएं हर घर और जरूरतमंद तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रहीहैं, वे खुद अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रही हैं। आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार उनकी जरूरतों को नजरअंदाज कर रही है। वेतन वृद्धि, स्थायी कर्मचारी का दर्जा, स्वास्थ्य बीमा औरसुरक्षित कार्यस्थल जैसी उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं। वर्तमान में उन्हें बेहद कम मानदेय मिलता है, जो जीवनयापन के लिए पर्याप्त नहीं है। वेचाहती हैं कि उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए ताकि वे सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ उठा सकें। इसके अलावा, स्वास्थ्य सेवाओं मेंकाम करने के बावजूद उन्हें खुद अपनी चिकित्सा सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है। साथ ही, कई बार दूरदराज के क्षेत्रों में काम करने के दौरानउन्हें असुरक्षा और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है। हालांकि केरल सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की कई घोषणाएं की हैं, लेकिन आशा कार्यकर्ताओं की मांगों को अब तक पूरी तरह स्वीकार नहींकिया गया है। वे आरोप लगाती हैं कि सरकार केवल आश्वासन देती आ रही है, जबकि उनकी परिस्थितियों में कोई वास्तविक सुधार नहीं हुआ है।कोविड-19 महामारी के दौरान जब पूरा देश स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा था, तब आशा कार्यकर्ताओं ने सबसे आगे रहकर अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने घर-घर जाकर लोगों की जांच की, संक्रमित मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की और टीकाकरण कार्यक्रमों को सफल बनाने में योगदान दिया। इसकेबावजूद, उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय बनी हुई है, और वे खुद को उपेक्षित महसूस कर रही हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा ने आशा कार्यकर्ताओं के संघर्ष को लेकर सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि ये महिलाएं निःस्वार्थ भाव से जनता की सेवाकर रही हैं, लेकिन सरकार उन्हें वह सम्मान और अधिकार नहीं दे रही, जिसकी वे हकदार हैं। उन्होंने कहा, “हम अपनी आशा बहनों के साथ खड़े हैं औरउनके बलिदानों, साहस और समर्पण को पूरा सम्मान देते हैं।” यह समस्या केवल केरल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में आशा कार्यकर्ताओं कोकम वेतन, अस्थायी रोजगार और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। कई राज्यों में इन कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस बदलाव देखने को नहीं मिला है। केंद्र और राज्य सरकारों को इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है ताकि येस्वास्थ्य कर्मी अपनी जिम्मेदारियों को बिना किसी चिंता के निभा सकें। सरकार को चाहिए कि वह आशा कार्यकर्ताओं के वेतन में वृद्धि करे, उन्हें न्यूनतम वेतन का लाभ दे, सरकारी कर्मचारी का दर्जा प्रदान करे और उनकेलिए स्वास्थ्य बीमा एवं अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करे। इसके अलावा, उनके कार्यस्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी सरकार की जिम्मेदारी है।आशा कार्यकर्ताओं का यह आंदोलन सरकार के लिए एक चेतावनी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो यह विरोध और बड़ेस्तर पर हो सकता है। केरल, जो अपनी उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जाना जाता है, वहां इस तरह की लापरवाही चिंता का विषय है। आशा कार्यकर्ता केवल स्वास्थ्यसेवाओं की रीढ़ नहीं हैं, बल्कि वे समाज के हर तबके तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का अभिन्न हिस्सा भी हैं। वे दिन-रात मेहनत करके जनता की सेवाकर रही हैं, इसलिए उन्हें उनका उचित हक मिलना ही चाहिए।
भारत-चीन संबंधों की 75वीं वर्षगांठ पर कांग्रेस का मोदी सरकार पर हमला

नई दिल्ली, 2 अप्रैल 2025: भारत और चीन के बीच राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर विदेश सचिव विक्रम मिसरी और चीन केराजदूत शुई फ़ीहॉन्ग ने संयुक्त रूप से केक काटकर इस ऐतिहासिक अवसर का जश्न मनाया। इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी ने भी अपने चीनी समकक्षों के साथ शुभकामनाओं का आदान-प्रदान किया। हालांकि, कांग्रेस ने इस आयोजन पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकारकी नीतियों पर कड़ा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने “डिसएंगेजमेंट” के नाम पर लद्दाखमें 2,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र चीन को सौंप दिया है, जो भारत के लिए क्षेत्रीय नुकसान का सबसे बड़ा उदाहरण है। कांग्रेस ने 2020 के गलवान संघर्ष की भी याद दिलाई, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नेउस समय यह कहते हुए चीन को क्लीन चिट दे दी थी कि “ना कोई हमारी सीमा में घुस आया है, न ही कोई घुसा हुआ है।” उन्होंने दावा किया किमोदी सरकार आज भी चीन के साथ सामान्य संबंध बनाने में जुटी हुई है, जबकि भारतीय संप्रभुता खतरे में है। कांग्रेस ने 21 अक्टूबर 2024 को हुए’डिसएंगेजमेंट’ समझौते पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस समझौते के तहत भारत ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों से पीछे हटकर अपनीक्षेत्रीय अखंडता को कमजोर कर लिया है। कांग्रेस का आरोप है कि इस समझौते के कारण भारतीय सैनिकों की गश्त पर गंभीर असर पड़ा है। डेपसांग मैदानी क्षेत्र में भारतीय सैनिकों को अबगश्त बिंदु 10, 11, 11A, 12 और 13 तक पहुंचने के लिए चीन की अनुमति की आवश्यकता होती है। इसी तरह, गलवान घाटी में बनाए गए “बफरज़ोन” के कारण भारतीय सैनिकों को अपनी दावा रेखा से 2.4 किलोमीटर पीछे हटना पड़ा है, जबकि चीनी सैनिक भारत के करीब तैनात हैं। हॉट स्प्रिंगक्षेत्र में भी बफर ज़ोन भारतीय दावे की सीमा के भीतर 1-3 किलोमीटर तक आ गया है, जिससे भारतीय सेना की स्थिति कमजोर हुई है। पैंगोंग त्सोझील के क्षेत्र में भी भारत को बड़ा नुकसान हुआ है, जहां पहले भारतीय सैनिक फिंगर 8 तक गश्त कर सकते थे, लेकिन अब उन्हें फिंगर 3 तक हीसीमित कर दिया गया है। इसके अलावा, कांग्रेस ने चीन पर बढ़ती आर्थिक निर्भरता को लेकर भी मोदी सरकार को घेरा है। जयराम रमेश ने कहा कि चीन से आयात 100 अरबडॉलर से अधिक हो चुका है और भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार भारतीय बाजार में चीनीकंपनियों को अवसर दे रही है, जबकि भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) चीनी आयात से प्रभावित हो रहे हैं। विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस राष्ट्रीय मुद्दे पर देश को स्पष्ट जवाब देने की मांग की है। कांग्रेस ने सवाल किया कि जब भारतीय क्षेत्रीय अखंडताखतरे में है, तब सरकार चीन के साथ संबंधों को सामान्य करने और आर्थिक निर्भरता बढ़ाने पर क्यों जोर दे रही है। पार्टी ने मोदी सरकार से इससमझौते की शर्तों को सार्वजनिक करने और यह स्पष्ट करने की मांग की कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता से समझौता क्यों किया गया है।
लुधियाना में ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान के तहत एनसीसी कैडेट्स ने नशा मुक्त पंजाब की शपथ ली

लुधियाना, 2 अप्रैल 2025 – पंजाब सरकार के ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान के अंतर्गत लुधियाना में बुधवार को एक शपथ समारोह आयोजितकिया गया, जिसमें एनसीसी और एनएसएस के हजारों कैडेट्स ने नशा मुक्त पंजाब बनाने की प्रतिज्ञा ली। इस अवसर पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीयसंयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान उपस्थित थे। युवाओं से अरविंद केजरीवाल की अपीलअरविंद केजरीवाल ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि पंजाब के छात्रों और युवाओं ने नशे के खिलाफ शपथ ली है कि इसे जड़ से उखाड़फेंकेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि युवा हमारा भविष्य हैं और पंजाब की शान हैं। यदि वे नशे में फंस गए, तो पंजाब बर्बाद हो जाएगा। अब औरबर्दाश्त नहीं किया जाएगा; हर गली, हर गांव, हर शहर से नशे का नामोनिशान मिटाना है। नशा तस्करों पर सख्त कार्रवाईकेजरीवाल ने बताया कि पिछले एक महीने में पंजाब सरकार ने नशे के खिलाफ जो कदम उठाए हैं, वे पिछले 75 वर्षों में अभूतपूर्व हैं। नशा तस्करोंद्वारा नशे की कमाई से बनाए गए महलों पर बुलडोजर चलाए जा रहे हैं, और उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने जनता से अपीलकी कि यदि कहीं नशा बेचने की जानकारी मिले तो तुरंत 9779100200 पर सूचना दें; सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। भगवंत मान का जन आंदोलन पर जोरमुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अब एक जन आंदोलन बन रहा है। कई गांवों की पंचायतें अपने गांवों को नशा मुक्त बनाने कासंकल्प ले रही हैं। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई लंबी है, लेकिन हम इसे खत्म करके रहेंगे। पंजाब पुलिस भी इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रही है। खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावाकेजरीवाल ने घोषणा की कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए हर गांव और वार्ड में खेल के मैदान बनाए जाएंगे, ताकि बच्चे खेलकूद में रुचि लेंऔर नशे से दूर रहें। इसके अलावा, पूरे पंजाब में सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, जिससे युवाओं को अपनी ऊर्जासही दिशा में लगाने का अवसर मिले। नशा मुक्त पंजाब की दिशा में सामूहिक प्रयासइस अभियान में पंजाब के सभी नागरिकों का सहयोग आवश्यक है। सरकार, पुलिस, पंचायतें और आम जनता मिलकर ही नशे के खिलाफ इस लड़ाईको जीत सकते हैं। युवाओं को अपने-अपने गांवों की जिम्मेदारी लेनी होगी, ताकि नशा बेचने वालों की हिम्मत न हो सके। यदि हम सब मिलकरप्रयास करें, तो एक रंगला पंजाब बनाने का सपना साकार हो सकता है।
लोन रिजेक्शन के बाद बैंक डकैती, छह महीने की प्लानिंग और ‘मनी हाइस्ट’ का असर

कर्नाटक के दावणगेरे जिले में एक बैंक डकैती का मामला सामने आया, जिसमें आरोपी विजय कुमार ने सिर्फ इसलिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की एक शाखा को निशाना बनाया क्योंकि बैंक ने उसका लोन आवेदन अस्वीकार कर दिया था। इस वारदात की खास बात यह रही कि आरोपी नेडकैती की पूरी योजना को अंजाम देने से पहले लोकप्रिय वेब सीरीज ‘मनी हाइस्ट’ को 15 बार देखा था। छह महीने तक चली प्लानिंगडकैती को अंजाम देने से पहले विजय कुमार और उसके पांच साथियों ने छह महीने तक बैंक की रेकी की। वे दिन और रात दोनों समय बैंक कीगतिविधियों पर नजर रखते थे। विशेष रूप से सार्वजनिक अवकाश के दिनों में बैंक की सुरक्षा का जायजा लिया गया। इस दौरान उन्होंने अपराध केलिए जरूरी सामग्रियों जैसे दस्ताने, गैस-कटर और मिर्च पाउडर की खरीदारी भी की। वारदात को अंजाम देने का तरीकावारदात के दिन, अपराधियों ने बैंक में प्रवेश किया और 17.7 किलो सोना लूट लिया। यह सोना उन ग्राहकों का था, जिन्होंने लोन के बदले में अपनासोना गिरवी रखा था। इस दौरान, आरोपियों ने तकनीकी निगरानी से बचने के लिए अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल बंद कर दिया और पुलिसखोजी कुत्तों को भ्रमित करने के लिए बैंक के आसपास मिर्च पाउडर छिड़क दिया। डकैती के पीछे की असली वजहपुलिस जांच में सामने आया कि विजय कुमार ने PME योजना के तहत अपनी बेकरी के लिए 15 लाख रुपये का लोन मांगा था, लेकिन उसकासिबिल स्कोर कम होने के कारण बैंक ने लोन अस्वीकार कर दिया। इसके बाद उसने अपने भाई के नाम से भी लोन आवेदन किया, लेकिन वहां भी उसेअसफलता मिली। इससे नाराज होकर उसने अपने पांच साथियों के साथ मिलकर बैंक लूटने की योजना बनाई। आरोपियों की गिरफ्तारी और बरामदगीइस घटना के पांच महीने बाद पुलिस ने सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें तीन आरोपी—विजय कुमार, अजय कुमार और परमानंदतमिलनाडु के मदुरै के रहने वाले हैं, जबकि अन्य तीन—अभिषेक, चंद्रू और मंजुनाथ कर्नाटक के न्यामती से हैं। पुलिस ने इनके पास से लूटा गया पूरा17.7 किलो सोना बरामद कर लिया है।