अवैध मदरसों के खिलाफ उत्तराखण्ड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने लिया बड़ा फैसला, 16 मदरसों को किया गया सील

उत्तराखंड में अवैध मदरसों के खिलाफ पुष्कर सिंह धामी सरकार का एक्शन लगातार जारी है गुरुवार को ऊधम सिंह नगर में 16 और हरिद्वार में दोअवैध मदरसों को सील कर दिया गया. अब तक राज्य में 110 मदरसों को सील किया जा चुका है. पिछले एक माह से उत्तराखंड में प्रशासन द्वाराअवैध मदरसों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है. ये मदरसे बिना सरकार की अनुमति के संचालित किए जा रहे थे इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंहधामी ने कड़ा रुख अपनाया हुआ है. जिसका व्यापक असर भी देखने को मिल रहा है।पूरे राज्य में अवैध मदरसों के खिलाफ व्यापक स्तर पर अभियानचलाया जा रहा है। प्रशासन ने इस बात की भी जांच शुरू कर दी है. कि इतने बड़े पैमाने पर संचालित हो रहे इन अवैध मदरसों के पीछे किसका हाथहै और यहां पर छात्रों को किस प्रकार की तालीम दी जा रही थी. गुरुवार को रुद्रपुर में चार, किच्छा में आठ, बाजपुर में तीन, जसपुर में एक औरहरिद्वार में दो मदरसों को सील किया गया. इससे पहले देहरादून, पौड़ी में भी बड़े स्तर पर अवैध मदरसों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 92 मदरसों कोसील किया जा चुका है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है किराज्य के मूल स्वरूप के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं कियाजाएगा. जो भी धर्म की आड़ में अवैध गतिविधियों में संलिप्त होगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा किराज्य में कृषकों की आय बढ़ाने के लिए परंपरागत खेती को आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ाया जाए. बेहतर करने के लिए किया जाए प्रोत्साहितजिन क्षेत्रों में किसान बेहतर कार्य कर रहे हैं उन्हें और बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए विभागों द्वारा किसानों के लिए किए जा रहे कार्यों कापरिणाम धरातल पर नजर आना चाहिए. गुरुवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में कृषि उद्यान और सहकारिता विभाग की गेम चेंजरयोजनाओं की समीक्षा की उन्होंने कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष के लिए विभागों द्वारा जिन योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है. उनकी भौतिक स्थिति, वित्तीय प्रगति, आउटकम और आउटपुर के आधार पर कार्य किया जाए, ताकि बजट का सही प्रकार से उपयोग हो सके. उधम सिंह नगर जिले के अपरजिलाधिकारी पंकज उपाध्याय ने बताया कि विशेष रूप से गठित प्रशासनिक टीम ने 16 मदरसों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए वहां तालाबंदी करदी.अभी तक उत्तराखंड में कुल 110 अवैध मदरसों को सील किया जा चुका है.यह मदरसे बिना सरकार की अनुमति के संचालित किया जा रहे थे. जिस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अपनाया हुआ है. सीएम धामी ने इन मदरसों पर कार्रवाई के लिए प्रशासन को फ्री हैंड दिया हुआ हैजिसका व्यापक असर भी देखने को मिल रहा है. पूरे प्रदेश में अवैध मदरसों के खिलाफ व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है.प्रशासन ने इसबात की भी जांच शुरू कर दी है कि इतने बड़े पैमाने पर संचालित हो रहे इन अवैध मदरसों के पीछे किसका हाथ है और यहां पर छात्रों को किस प्रकारकी तालीम दी जा रही थी. मदरसों को किया गया सीलगुरुवार को रुद्रपुर में 4, किच्छा में 8, बाजपुर तीन, जसपुर एक और हरिद्वार में दो मदरसों को सील किया गया जबकि इससे पहले देहरादून, पौड़ी मेंभी बड़े स्तर पर अवैध मदरसों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 92 मदरसों को सील किया जा चुका है.प्रशासन ने इस बात की भी जांच शुरू कर दी हैकि इतने बड़े पैमाने पर संचालित हो रहे इन अवैध मदरसों के पीछे किसका हाथ है और यहां पर छात्रों को किस प्रकार की तालीम दी जा रही थी. गुरुवार को रुद्रपुर में 4, किच्छा में 8, बाजपुर तीन, जसपुर एक और हरिद्वार में दो मदरसों को सील किया गया जबकि इससे पहले देहरादून, पौड़ी मेंभी बड़े स्तर पर अवैध मदरसों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 92 मदरसों को सील किया जा चुका है.बृहस्पतिवार को श्यामपुर क्षेत्र के गैंडीखाता मेंपहुंची प्रशासन की टीम ने दो मदरसों को सील कर दिया. गैंडीखाता की गुर्जर बस्ती में ये मदरसे बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे थे. आपको बता दें किमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे मदरसों को चिन्हित करने के निर्देश दिए थे. हरिद्वार के डीएम कर्मेंद्र सिंह ने बतायाकि 60 से ज्यादा बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे मदरसे चिन्हित किए गए हैं. एसडीएम का कहना है कि अवैध मदरसों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारीरहेगी.
अवैध ई-रिक्सा चलाने वालों को लेकर सरकार का बड़ा ऐलान,नए नियमों को किया गया लागू “जानें क्या रहेंगी पूरी प्रक्रिया”

शहरों और गांवों में परिवहन की सुविधा के साथ मुसीबत भी बने ई-रिक्शा की संख्या 50 लाख से अधिक हो सकती है लेकिन सरकारी आंकड़ों मेंपिछले पांच साल में 16 लाख ई रिक्शा का पंजीकरण हुआ है. इनमें दिल्ली में डेढ़ लाख पंजीकृत ई रिक्शा हैं।एक अनुमान है कि सड़कों पर जो ईरिक्शा चल रहे हैं उनमें 40 प्रतिशत ई रिक्शा का संचालन अवैध तरीके से किया जा रहा है. दिल्ली के परिवहन विभाग के एक अधिकारी के अनुसारमोटे तौर पर संभवत: 40,000 ई रिक्शा अवैध रूप से चल रहे हैं.2020 में केवल 70,000 ई रिक्शा का रजिस्ट्रेशन हुआ था जबकि अगले दो सालोंमें इनकी संख्या चार लाख पहुंच गई. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से गत दिवस लोकसभा में दिए गए जवाब में कहा गया है कि जनवरी2020 से दिसंबर 2024 तक 16,18,941 ई रिक्शा का पंजीकरण हुआ है. सरकार से पूछा गया था कि क्या देश में ई रिक्शा की अनुचित तरीके सेबिना रोकटोक मैन्युफैक्चरिंग हो रही है. मंत्रालय ने जानकारी दी कि पूरे देश में 740 ई रिक्शा निर्माण इकाइयां पंजीकृत हैं. केंद्रीय मोटर वाहन नियमोंके मुताबिक ई रिक्शा के प्रोटोटाइप को मंजूर कराना आवश्यक है. मंत्रालय ने कहा है कि ई रिक्शा संचालन में इन्फोर्समेंट की जिम्मेदारी राज्य सरकारोंकी है केंद्रीय स्तर पर मंत्रालय ने बैटरी संचालित रिक्शा के प्रस्तावित मानकों और सुरक्षा आकलन के लिए रेटिंग सिस्टम तैयार करने के उद्देश्य से एकतकनीकी समित का गठन किया है. ये लोग नहीं चला पाएंगे रिक्सायह रेटिंग सिस्टम कारों के लिए बनाए गए न्यू कार एसेसमेंट प्रोग्राम (एनसीएपी) के अनुरूप होगा।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जनपदीयसड़क सुरक्षा समितियां जिलाधिकारी की अध्यक्षता में 05 जनवरी 2025 तक हर हाल में बैठक सम्पन्न कर लें 06 से 10 जनवरी 2025 तक सभीस्कूलों-कॉलेजों में सड़क सुरक्षा नियमों से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं. महाकुम्भ में बेहतर यातायात व्यवस्था के लिए PRD वहोमगार्डों की संख्या बढ़ाई जाए सड़क सुरक्षा माह सिर्फ लखनऊ तक सीमित न रहे बल्कि इसे प्रदेश के सभी 75 जनपदों में सुचारु रूप से सम्पन्नकराया जाए. नाबालिग, ई-रिक्शा व अन्य वाहनों का संचालन न कर पाएं, इस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. ई-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन कीकार्रवाई सुचारु रूप से की जाए सीएम योगी ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए बाइकों में से मोडिफाई साइलेंसर व हॉर्न को प्रतिबन्धितकिया जाए. अवैध रूप से बसों का संचालन दुर्घटना का कारण बनता है. गैर-अनुबन्धित बसों का पंजीकरण कर उन्हें निर्धारित रूट प्रदान किया जाए. इससे कनेक्टिविटी बेहतर होगी साथ ही आमजन को भी सुविधा मिलेगी. सीएम योगी ने कहा कि स्कूलों-कॉलेजों में रोड सेफ्टी क्लब की तर्ज परप्रत्येक जनपद में रोड सेफ्टी पार्क बनाए जाएं। रोड सेफ्टी अवेयरनेस कार्यक्रमों से स्कूली बच्चों को जोड़ते हुए यातायात नियम से जुड़े विषयों परनाटक, संगीत, कविता, निबन्ध, संगोष्ठी, भाषण, सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताएं कराई जाएं। परिवहन निगम की बसों के ड्राइवरों की नियमित स्वास्थ्यजांच अनिवार्य रूप से कराई जाए. बसों की फिटनेस का भी ध्यान रखा जाए.
राघोपुर है लालू यादव के परिवार का गढ़, पिछले नौ से सात चुनाव उनके कुनबे के ही रहा नाम

बिहार के लिए ये चुनावी साल है अक्तूबर-नवंबर में राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं. इस चुनावी साल में अमर उजाला बिहार और बिहार कीराजनीति उससे जुड़ी घटनाओं और चेहरों के बारे में अलग-अलग सीरीज शुरू कर रहा है. इसी से जुड़ी ‘सीट का समीकरण’ सीरीज में आज हम आपकोराघोपुर विधानसभा सीट के बारे में बताएंगे. राघोपुर सीट का चुनावी इतिहास कैसा रहा है यहां जीतकर कौन-कौन से चेहरे विधानसभा पहुंचे.बिहार के38 जिलों में से एक वैशाली जिला भी है। इसका मुख्यालय हाजीपुर है. यह जिला जिला 3 अनुमंडलो और 16 ब्लाकों में विभाजित है. जिले में कुलआठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इनमें हाजीपुर, लालगंज, वैशाली, महुआ, राजापाकर, महनार, पातेपुर और राघोपुर विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं. आजादी के बाद जब देश के पहले चुनाव हुए तो लोकसभा के साथ सभी राज्यों की विधानसभा के लिए भी वोट डाले गए. 1951-52 में हुए इनचुनावों में भी बिहार की राघोपुर विधानसभा सीट का अस्तित्व था. 1951 में पहली बार बिहार विधानसभा के चुनाव हुए. तब 276 सीटों वालीविधानसभा में 24 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित थीं इस चुनाव में कुल 1594 उम्मीदवार मैदान में उतरे अमौर विधानसभा सीट पर केवलएक उम्मीदवार उतरा. 18 उम्मीदवारों ने आजमाई थी किस्मतयहां से कांग्रेस के मोहम्मद ताहिर निर्विरोध निर्वाचित हुए वहीं नवादा सह हसुआ सीट पर सबसे ज्यादा 18 उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाई हमारी आजकी सीट राघोपुर सीट की बात करें तो यहां से 1951 के चुनाव में कुल 4 उम्मीदवार मैदान में थे इस चुनाव में कांग्रेस के हरिबंश नारायण सिंह को जीतमिली उन्होंने सोशलिस्ट पार्टी के कृष्ण देव नारायण रॉय को 2,693 वोट से शिकस्त दी थी.1957 के विधानसभा चुनाव में भी एक बार फिर कांग्रेसके हरिबंश नारायण ने निर्दलीय उम्मीदवार हरदेव प्रसाद सिन्हा को हराकर जीत दर्ज की. इस बार उनकी जीत का अंतर बढ़कर 8,259 वोट का हो गयाथा। 1951 की तरह 1957 में भी राघोपुर सीट से चार उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाई थी. 1962 में फिर से बिहार में चुनाव हुए इस बार कांग्रेस कोइस सीट पर हार का सामना करना पड़ा. सोशलिस्ट पार्टी के देवेन्द्र सिन्हा ने यहां से जीत दर्ज की उन्होंने कांग्रेस के हरिबंश नारायण को हराकर उन्हेंहैट्रिक लगाने से रोक दिया. 1962 के चुनाव में राघोपुर नाम से बिहार में दो सीटें थीं। दूसरी सीट से कांग्रेस के राजेंद्र मिश्रा जीते थे.1967 केविधानसभा चुनाव में राघोपुर सीट पर एक बार फिर से हरिबंश नारायण सिंह ने जीत दर्ज की उन्हें ये जीत जनसंघ के उम्मीदवार के तौर पर मिली थीउन्होंने कांग्रेस के आर बी रॉय को हराया था वहीं राघोपुर नाम की दूसरी सीट से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के ए. गोइत जीते थे.1967 का चुनाव बिहारकी राजनीति में बड़े बदलाव लेकर आया था 318 सदस्यों वाली विधानसभा में 128 सीट जीतकर कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी लेकिन बहुमत से दूररह गई. चार दिन बाद बने खुद मुख्यमंत्रीसरकार विपक्षी गठबंधन की बनी महज 13 सीट जीतने वाली जन क्रांति दल के महामाया प्रसाद सिन्हा राज्य के मुख्यमंत्री बने वहीं 68 सीट जीतनेवाली एसएसपी के कर्पूरी ठाकुर उप-मुख्यमंत्री बनाए गए.ये सरकार एक साल भी नहीं चल सकी महज 329 दिन बाद राज्य में एक नई सरकार कागठन हुआ एसएसपी के सतीश प्रसाद सिंह राज्य के मुख्यमंत्री बने यह सरकार महज तीन दिन चली सतीश प्रसाद सरकार के खिलाफ बीपी मंडल नेनेतृत्व में उनके ही विधायकों ने विद्रोह कर दिया. चार दिन बाद मंडल खुद मुख्यमंत्री बन गए मंडल सरकार भी महज 50 दिन ही रह सकी लगातारजारी उठापटक के बीच कांग्रेस के भोला पासवान शास्त्री भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे पर वे भी 99 दिन ही पद पर रह सके. लगातार बदलतीसरकारों के इस दौर में जून 1968 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया. इसके बाद नए सिरे से चुनाव हुए 1969 में नए सिरे से चुनाव हुए. चुनाव नतीजों की बात करने से पहले वापस राघोपुर सीट पर लौटते हैं.1969 में हुए चुनाव में यहां से कांग्रेस के रामवृक्ष राय ने जीत दर्ज की उन्होंनेसंयुक्त सोशलिस्ट पार्टी बाबूलाल शास्त्री को हराया था. वहीं इसी नाम की दूसरी सीट से कांग्रेस के वैद्यनाथ मेहता जीते. राज्य में एक बार फिर किसीभी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला एक बार फिर सरकार पांच साल नहीं चल सकी और 1972 में नए सिरे से चुनाव हुए. इस चुनाव में राघोपुर सीट सेसंयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के बाबू लाल शास्त्री ने जीत दर्ज की बाबू लाल शास्त्री ने भारतीय जन संघ के हरिबंश नारायण सिंह को शिकस्त दी. बाबूलाल शास्त्री को 1969 के चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था वहीं राघोपुर नाम की दूसरी सीट से कांग्रेस के अमरेनिसा मिश्रा जीते.
बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार के वायरल वीडियो पर हंगामा, राबड़ी देवी और तेजस्वी ने मांगा इस्तीफा

बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों—विधान परिषद और विधानसभा में शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के वायरल वीडियो को लेकर जमकरहंगामा हुआ। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्षी विधायक परिसर में विरोध प्रदर्शन करते नजर आए। वहीं, बिहार विधान परिषद केपोर्टिको में भी विपक्ष के एमएलसी ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के नेतृत्व में बवाल किया।राबड़ी देवी का आरोप: “नीतीश कुमार का दिमाग खराब है”विधान परिषद के पोर्टिको में आरजेडी एमएलसी के साथ प्रदर्शन करते हुए राबड़ी देवी ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दिमाग खराब है, तो उन्हें गद्दी छोड़कर अपने बेटे को मुख्यमंत्री बना देना चाहिए। उन्होंने नीतीश कुमार से सदन में आकर माफी मांगने की मांग की। इस दौरान विपक्ष ने”कठपुतली मुख्यमंत्री इस्तीफा दो” के नारे लगाए। राष्ट्रगान अपमान पर हंगामाविधान परिषद की कार्यवाही से पहले ही विपक्षी एमएलसी ने प्रदर्शन करते हुए कहा कि “राष्ट्रगान का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान”। विपक्ष नेनीतीश कुमार पर राष्ट्रगान का अपमान करने का आरोप लगाया और उनके इस्तीफे की मांग की। तेजस्वी यादव का तीखा हमलाविधानसभा में भी विपक्ष ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा कि “हम बिहारीहोने के नाते शर्मिंदा हैं, नीतीश कुमार ने हमारा सिर झुकाया है।” उन्होंने मुख्यमंत्री से 140 करोड़ जनता से माफी मांगने की मांग की और कहा किराष्ट्रगान के अपमान पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। “यदि माफी नहीं मांगेंगे तो गलत संदेश जाएगा”तेजस्वी यादव ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री माफी नहीं मांगते हैं तो यह संदेश जाएगा कि बिहार में कोई भी आकर राष्ट्रगान का अपमान कर सकता है।उन्होंने मुख्यमंत्री से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की और कहा कि नीतीश कुमार को मोबाइल और तकनीक की समझ नहीं है। कार्यवाही स्थगितलगातार हंगामे के चलते विधानसभा और विधान परिषद दोनों की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इस बीच, विधान परिषदमें वित्त रहित शिक्षकों को वेतनमान देने की मांग भी उठाई गई। सरकार का पक्षसंसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष को शांत करने का प्रयास किया, लेकिन भारी हंगामे के कारण कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
मेरठ सौरभ हत्याकांड: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे, दिल पर चाकू के गहरे वार और धड़ से अलग सिर

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हुए चर्चित सौरभ हत्याकांड में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई है, जिसने कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। पोस्टमार्टमके बाद शव को बुधवार शाम पांच बजे इंदिरानगर, ब्रह्मपुरी लाया गया। शव को देखकर स्थानीय लोग हैरान रह गए क्योंकि उसका आकार असामान्यथा। शव की लंबाई कम और चौड़ाई ज्यादा दिख रही थी, क्योंकि पैर धड़ की तरफ मुड़े हुए थे। गर्दन और हाथ भी धड़ से अलग थे। डॉक्टर और फार्मासिस्ट भी रह गए दंगपोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर और चीफ फार्मासिस्ट ने बताया कि सौरभ का दिल बुरी तरह क्षतिग्रस्त था। दिल पर चाकू के तीन गहरे वार थे, जो दिलके अंदर तक पहुंचे थे। डॉक्टरों के मुताबिक, सौरभ के शव की हालत इतनी दर्दनाक थी कि पोस्टमार्टम करने वाला पूरा स्टाफ दंग रह गया। दशकों सेपोस्टमार्टम कर रहे चिकित्सक भी इस निर्मम हत्या को देखकर हैरान थे।गर्दन और हाथ धड़ से अलगपोस्टमार्टम टीम ने बताया कि सौरभ का शव अपने आप में अनोखा था। गर्दन धड़ से पूरी तरह अलग थी और दोनों कलाइयों से हाथ कटे हुए थे। शवको ड्रम में डालकर सीमेंट और पानी से भर दिया गया था, जिससे वह पूरी तरह जम गया था। ड्रम को कटर से काटकर और सीमेंट को तोड़कर शव कोबाहर निकाला गया। इस प्रक्रिया में करीब एक घंटा लग गया। हृदय को पार करते हुए चाकू के गहरे घावपोस्टमार्टम के दौरान पता चला कि हत्यारे ने अत्यधिक क्रूरता के साथ दिल पर वार किए थे। दिल के भीतर तक चाकू धंसा हुआ था, जो यह संकेतदेता है कि वार अत्यधिक बलपूर्वक किए गए थे। शव की हालत देखकर डॉक्टर भी भावुक हो गए और बोले, “बहुत सुंदर लड़का था… आखिर क्योंमार डाला?” नींद का इंजेक्शन गूगल से खोजकर खरीदापुलिस का मानना है कि मुख्य आरोपी मुस्कान ने गूगल पर सर्च कर नींद का इंजेक्शन डॉक्टर के पर्चे पर खुद लिख लिया और फिर बाजार से दवाखरीद ली। पुलिस ने खैरनगर के मेडिकल स्टोर से जुड़े बयान भी दर्ज कर लिए हैं और संबंधित सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। मुर्गा काटने वाले चाकू बाजार से खरीदेजांच में पता चला कि मुस्कान ने शारदा रोड से मुर्गा काटने वाले दो चाकू खरीदे थे। पुलिस ने वहां के दुकानदारों से भी बयान दर्ज किए हैं। इसकेअलावा, घंटाघर से खरीदे गए ड्रम के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस जुटा रही ठोस सबूतएसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिस डॉक्टर से मुस्कान ने डिप्रेशन का बहाना बनाकरदवा लिखवाई थी, उस डॉक्टर ने नींद की गोली लिखने से इनकार किया है। ऐसे में माना जा रहा है कि मुस्कान ने गूगल सर्च के आधार पर पर्चे परखुद ही दवा का नाम लिखा होगा। मेडिकल स्टोर और ड्रम बेचने वालों से पूछताछ जारीपुलिस मेडिकल स्टोर और ड्रम बेचने वाले दुकानदारों से पूछताछ कर रही है। एसपी सिटी ने कहा कि जल्द ही साक्ष्य जुटाकर केस को ट्रायल पर लायाजाएगा। आरोपी मुस्कान के खिलाफ ठोस सबूत एकत्र किए जा रहे हैं ताकि अदालत में मजबूती से पेश किए जा सकें।
बेंगलुरु में आरएसएस अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा बैठक, मोहन भागवत समेत कई प्रमुख नेता मौजूद

बेंगलुरु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा बैठक का आयोजन हुआ, जिसमें संघ प्रमुख मोहन भागवत समेत कईवरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। यह आरएसएस की पांचवीं बैठक थी, जिसमें विभिन्न हिंदू संगठनों और इस्कॉन जैसे प्रमुख धार्मिक समूहों के प्रतिनिधियों नेभी भाग लिया। बैठक में देश को मजबूत बनाने और विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। महान विभूतियों को दी श्रद्धांजलिबैठक की शुरुआत में हाल ही में दिवंगत हुए कई महान हस्तियों को श्रद्धांजलि दी गई। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, प्रसिद्ध तबलावादकज़ाकिर हुसैन, सुप्रसिद्ध गायक श्याम बेनेगल, अर्थशास्त्री बिबेक देवरॉय, केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रधान और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एस. एम. कृष्णाशामिल थे। मणिपुर में शांति प्रयासों का जिक्रआरएसएस के सरकार्यवाह सीआर मुकंदा ने मणिपुर में किए गए शांति प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मणिपुर में स्थिति गंभीर थी औरसरकार के साथ-साथ आरएसएस ने भी शांति स्थापित करने के लिए प्रयास किए। मुकंदा ने कहा कि मणिपुर के घावों को भरने में अभी समय लगेगा, लेकिन संघ लगातार सकारात्मक बदलाव के लिए प्रयासरत है। परिसीमन पर विचारसीआर मुकंदा ने परिसीमन (डिलिमिटेशन) के मुद्दे पर भी अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट कर दिया है कि सीटों केविस्तार का अनुपात वर्तमान स्थिति के आधार पर ही होगा। मुकंदा ने कहा कि इस विषय को लेकर जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह सेराजनीति से प्रेरित लगते हैं। उन्होंने आगाह किया कि आपसी विवाद देशहित में नहीं है। स्थानीय भाषा को सर्वोपरि मानने की बातभाषा विवाद पर सीआर मुकंदा ने कहा कि आरएसएस मातृभाषा को सर्वोपरि मानता है। उन्होंने कहा कि तीन-भाषा नीति को लेकर संघ ने कभी कोईप्रस्ताव पारित नहीं किया है। उनके अनुसार, मातृभाषा के साथ-साथ रोजगार और कामकाज के लिए अन्य भाषाओं का ज्ञान भी आवश्यक है। उन्होंनेनागरिक पहचान और पंजीकरण को लेकर भी जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। स्थानीय भाषा में रुपये का प्रतीकसीआर मुकंदा ने सुझाव दिया कि रुपये के प्रतीक को स्थानीय भाषा में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सामाजिक नेताओं कोचर्चा करनी चाहिए, न कि राजनीतिक दलों को। बैठक का समापन भारतीय संस्कृति और सामाजिक एकता को सुदृढ़ बनाने के संकल्प के साथ हुआ। आरएसएस ने देश को मजबूत बनाने औरसामाजिक एकता को बनाए रखने के अपने प्रयासों को दोहराया।
लोकतंत्र विजय दिवस पर वीरेंद्र सचदेवा ने किया आपातकाल सेनानियों का सम्मान, युवाओं को लोकतंत्र की रक्षा का दिया संदेश

नई दिल्ली: दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने मंगलवार को एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित “लोकतंत्र विजय दिवस” कार्यक्रम मेंआपातकाल के दौरान जेल जाने वाले लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि देशभर से आए आपातकाल बंदियों कासम्मान करना दिल्ली के लिए गर्व का विषय है। कार्यक्रम का आयोजन लोकतंत्र सेनानी संघ द्वारा किया गया था, जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे, संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश सोनी, सत्यनारायण जटिया, ओ. पी. बब्बर, सुभाष आर्या, राजीव बब्बर और राजन ढिगरा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि लोकतंत्रको समझने के लिए उन सेनानियों को जानना आवश्यक है जिन्होंने आपातकाल का विरोध करते हुए अत्याचार और उत्पीड़न का सामना किया। उन्होंनेबताया कि 21 मार्च 1977 को आपातकाल समाप्त हुआ था और इस दिन को लोकतंत्र विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। आपातकाल की क्रूरता को याद कियासचदेवा ने कहा कि 25 जून 1975 को कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र का गला घोंटने का प्रयास किया था। इसके परिणामस्वरूप 19 महीने तक देश नेतानाशाही का सामना किया। आपातकाल के दौरान कई सेनानियों ने यातनाएं सहीं, जेल में समय बिताया और कुछ ने अपने प्राणों की आहुति दी।उन्होंने कहा कि आज का भारतीय लोकतंत्र उन सेनानियों के बलिदान पर खड़ा है। युवाओं को लोकतंत्र का महत्व समझने की अपीलदिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को यह समझना चाहिए कि कांग्रेस शासनकाल में लोकतंत्र को बार-बार कुचला गया।आपातकाल का दौर कांग्रेस सरकार की क्रूरता और तानाशाही का जीता-जागता प्रमाण है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने भारतीय लोकतंत्र को विश्व मंच पर सशक्त रूप से प्रस्तुत किया है। सचदेवाने कहा कि आपातकाल के सेनानियों का सम्मान करके दिल्ली सरकार अपना ही सम्मान बढ़ा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली की सरकारआपातकाल सेनानियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तत्पर है। कार्यक्रम के समापन पर वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों से प्रेरणा लेकर 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के साथआगे बढ़ने की आवश्यकता है।
दिल्ली हाईकोर्ट के जज के घर से नकदी बरामद, न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर गरमाई बहस

दिल्ली हाईकोर्ट के एक मौजूदा जज के घर से करोड़ों रुपये की नकदी मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। आग लगने की घटना के बाद मौके पर पहुंचेदमकल कर्मियों ने जब नोटों का भंडार देखा तो सभी चौंक गए। इस घटना ने न केवल न्यायपालिका बल्कि राजनीति में भी हलचल मचा दी है। मुख्य न्यायाधीश ने लिया संज्ञान, जज का तबादलाइस मामले में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा का स्थानांतरण इलाहाबादहाईकोर्ट कर दिया है। नकदी बरामदगी के बाद जज को उनके मूल हाईकोर्ट में भेज दिया गया। राज्यसभा में उठा मुद्दा: सभापति धनखड़ का बयानयह मुद्दा शुक्रवार को राज्यसभा में भी गूंजा, जहां कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने न्यायिक जवाबदेही का सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिकामें पारदर्शिता और जवाबदेही की तत्काल आवश्यकता है। इस पर राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि वे इस पर एक संरचित चर्चाआयोजित करने के लिए तंत्र की तलाश करेंगे। सभापति ने यह भी कहा कि अगर यही घटना किसी राजनेता, नौकरशाह या उद्योगपति से जुड़ी होती, तो संबंधित व्यक्ति तुरंत हिट लिस्ट में आ जाता।उन्होंने सदन के नेता और विपक्ष के नेता से बात करके इस मुद्दे पर विचार-विमर्श का आश्वासन दिया। भ्रष्टाचार पर पूर्व जज का कड़ा बयानपूर्व न्यायाधीश एसएन ढींगरा ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं है, यह काफी समयसे चला आ रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज करानी चाहिए थी। ढींगरा ने कहा, “यह तो ऐसा ही है जैसे किसी थानेदार को भ्रष्टाचार के आरोप में लाइन हाजिर कर दिया जाए और फिर कुछ समय बाद दूसरी जगहभेज दिया जाए। हम भ्रष्टाचार को स्वीकार कर चुके हैं, लेकिन इस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।” पुराने मामलों का हवाला: लंबित भ्रष्टाचार के केसएसएन ढींगरा ने न्यायपालिका में पुराने भ्रष्टाचार के मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जस्टिस निर्मल यादव का मामला 2008 से चल रहाहै, जबकि शमित मुखर्जी के केस को 25 साल हो गए हैं। न्यायपालिका में ऐसे लंबित मामलों को शीघ्र निपटाने की जरूरत है। जस्टिस यशवंत वर्मा का करियर सफरजस्टिस यशवंत वर्मा ने 8 अगस्त 1992 से इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। अक्टूबर 2014 में उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट में एडिशनल जजनियुक्त किया गया और फरवरी 2016 में स्थायी जज बने। 11 अक्टूबर 2021 को उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में जज के रूप में पदभार ग्रहण किया था। भ्रष्टाचार पर सख्त रुख जरूरीइस घटना ने न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही के सवालों को एक बार फिर से उजागर कर दिया है। न्यायिक प्रणाली में सुधार और भ्रष्टाचारपर सख्त रुख अपनाने की मांग जोर पकड़ रही है। अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
राज्यसभा में अमित शाह का जोरदार भाषण, आतंकवाद और नक्सलवाद पर करारा प्रहार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में गृह मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा के दौरान अपने विचार रखे। इस मौके पर उन्होंने आतंकवाद औरनक्सलवाद पर सरकार की सख्त नीति का उल्लेख करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ”जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई है। तीन मुख्य चुनौतियां: आतंकवाद, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर उग्रवादअमित शाह ने कहा कि जब 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार सत्ता में आई, तो उसे कई विरासत में मिली चुनौतियों का सामना करना पड़ा। देश की सुरक्षाऔर विकास के लिए तीन बड़ी बाधाएं थीं – आतंकवाद, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर में उग्रवाद। उन्होंने बताया कि इन समस्याओं के कारण देश के92,000 नागरिकों ने अपनी जान गंवाई। आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीतिअमित शाह ने जोर देकर कहा कि मोदी सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति को अपनाया है। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर मेंआतंकवादी घटनाओं में 70 प्रतिशत की कमी आई है। उरी और पुलवामा हमलों के बाद 10 दिनों के भीतर सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक करकेपाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया गया। नक्सलवाद का खात्मा: 2026 तक का लक्ष्यगृह मंत्री ने नक्सलवाद पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार ने नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने विश्वासव्यक्त किया कि 21 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। आंतरिक सुरक्षा में सुधारगृह मंत्री ने कहा कि गृह मंत्रालय ने सीमावर्ती और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कई सुधार किए हैं। उन्होंने पुलिस और केंद्रीय बलों केजवानों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनकी कड़ी मेहनत और बलिदान से देश सुरक्षित है। धारा 370 का उन्मूलन और कश्मीर में विकासअनुच्छेद 370 को हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर में निवेश और विकास के नए द्वार खुले हैं। अमित शाह ने बताया कि आकर्षक औद्योगिक नीति के तहत12,000 करोड़ रुपये का निवेश हुआ और 1.1 लाख करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। राष्ट्रीय सुरक्षा में ऐतिहासिक बदलाव अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गृह मंत्रालय में कई ऐतिहासिक बदलाव किए गए हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देशकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में विश्वस्तरीय मानकों को अपनाया गया है। आपराधिक गतिविधियों पर सख्तीअमित शाह ने कहा कि अब अपराध राज्य की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैल चुके हैं। इसलिए गृहमंत्रालय में व्यापक सुधारों की आवश्यकता है, ताकि साइबर अपराध, नारकोटिक्स और संगठित अपराध जैसे मुद्दों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। गृह मंत्री अमित शाह ने अपने भाषण के दौरान स्पष्ट किया कि मोदी सरकार ने न सिर्फ सुरक्षा के मोर्चे पर बल्कि विकास के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कदमउठाए हैं। उनका कहना था कि देश में अब एक ही संविधान, एक ही ध्वज और एक ही प्रधानमंत्री का सपना साकार हो चुका है।
लंदन दौरे पर ममता बनर्जी का विपक्ष पर हमला,छवि खराब करने के आरोप, नागपुर हिंसा की निंदा और भाजपा का विरोध प्रदर्शन

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने लंदन दौरे को लेकर विपक्षी दलों, खासकर भारतीय जनता पार्टी और वामपंथी दलों पर उनकी छविखराब करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जब कोई नेता विदेश दौरे पर जाता है, तो उस पर हमला करना देश की छवि को नुकसान पहुंचानेके समान है। ममता बनर्जी ने कहा, “राजनीतिक भिन्नताएं हो सकती हैं, लेकिन किसी भी नेता को विदेश यात्रा के दौरान निशाना नहीं बनाना चाहिए, क्योंकि उस समय वह नेता देश का प्रतिनिधित्व कर रहा होता है।” ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में ममता बनर्जी का व्याख्यानमुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि उनका लंदन दौरा राजनीति से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह एक सम्मानजनक अवसर है। वह लंदन के ऑक्सफोर्डविश्वविद्यालय में व्याख्यान देने जा रही हैं। इसके अलावा, 25 मार्च को वे कुछ उद्योगपतियों से भी मुलाकात करेंगी ताकि पश्चिम बंगाल में निवेश कोप्रोत्साहित किया जा सके। ममता बनर्जी ने बताया कि यात्रा के दौरान प्रशासनिक कार्यों को संभालने के लिए एक पांच सदस्यीय कार्यदल और मंत्रियों का समूह (जीओएम) बनाया गया है। किसी भी आपात स्थिति में मुख्यमंत्री सचिवालय के प्रमुख मनोज पंत और खुद ममता बनर्जी फोन पर उपलब्ध रहेंगी। पार्टी के कार्योंकी जिम्मेदारी सुब्रत बक्शी और अभिषेक बनर्जी को सौंपी गई है। ममता बनर्जी 21 मार्च को लंदन के लिए रवाना होंगी और 27 मार्च को व्याख्यानदेंगी। वे 28-29 मार्च के बीच कोलकाता लौटेंगी। नागपुर हिंसा की निंदामुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महाराष्ट्र के नागपुर में हुई हिंसा की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि भारत विविधता में एकता का प्रतीक है और इस तरह कीघटनाएं देश की छवि को ठेस पहुंचाती हैं। ममता ने कहा, “हम इस हिंसा की निंदा करते हैं। भारत विविधता में एकता के लिए जाना जाता है।” उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहतीं, क्योंकि उनके इंडिया गठबंधन के सहयोगी उद्धव ठाकरे इस पर बयान देंगे। भाजपा विधायकों का विरोध प्रदर्शनइधर, पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा विधायकों ने काले झंडे लहराते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी केखिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने स्पीकर पर निष्पक्ष न होने और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप लगाया। भाजपा विधायकों ने सदन के वेल में आकर दस्तावेज फाड़े और 35 मिनट तक विरोध प्रदर्शन किया। बाद में वे विधानसभा से वॉकआउट कर गए औरपरिसर के बाहर स्पीकर का पुतला जलाया। भाजपा ने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष विपक्षी विधायकों को सदन में अपनी बात रखने कामौका नहीं दे रहे हैं।