2026 तक नक्सलवाद मुक्त भारत का संकल्प, अमित शाह का मास्टरप्लान और कड़ी कार्रवाई

2019 में केंद्रीय गृह मंत्री का पदभार संभालने के बाद अमित शाह ने नक्सलवाद को देश की सबसे बड़ी चुनौती के रूप में पाया। उन्होंने इस चुनौतीको स्वीकार करते हुए 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे का संकल्प लिया। शाह का कहना है कि यह केवल आत्मविश्वास से नहीं बल्कि ठोसकार्ययोजना और कड़े कदमों के आधार पर संभव हो पाया है। नक्सलवाद खत्म करने की रणनीतिअमित शाह के अनुसार, नक्सलवाद का उदय विकास की कमी और असंतोष से हुआ। 1990 तक संसाधनों की कमी के कारण देश के कई हिस्सेविकास से वंचित रहे, जिससे नक्सल विचारधारा को पनपने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने नक्सलियों के खिलाफ सख्त कार्रवाईकरते हुए सुरक्षाबलों के प्रशिक्षण और आधुनिक हथियारों का उपयोग बढ़ाया।कड़ी कार्रवाई और आत्मसमर्पण की नीतिसरकार की रणनीति का पहला पहलू नक्सलियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना था। पिछले दस वर्षों में 7,500 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कियाहै। इनमें से कई अब राज्य पुलिस बलों में शामिल होकर सुरक्षा का हिस्सा बन गए हैं। शाह ने बताया कि नक्सली नेतृत्व को खत्म करने के लिए सरकार ने उनके पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति के सदस्यों को निशाना बनाया। पिछलेपांच सालों में 15 बड़े नक्सली नेताओं को मार गिराया गया है। नक्सलियों की भर्ती पर नकेलनक्सली संगठनों की भर्ती पर रोक लगाने के लिए सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में पहुंच को सीमित किया। साथ ही, अवैध वसूली और आर्थिकमदद पर रोक लगाने के लिए ऑनलाइन भुगतान प्रणाली लागू की गई। विकास कार्यों का विस्तारशाह का कहना है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया गया। पिछले दस साल में 11,503 किलोमीटर सड़केंबनाई गईं और अतिरिक्त 17,589 किलोमीटर सड़कों के लिए 20,815 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। इसके अलावा, मोबाइल कनेक्टिविटी बढ़ाने केलिए 2,343 टावर भी लगाए गए। युवाओं को कौशल विकास से जोड़ने की पहलगरीबी और बेरोजगारी को दूर करने के लिए युवाओं को कौशल विकास के जरिए सशक्त बनाने का प्रयास किया गया। नक्सल प्रभावित जिलों मेंऔद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) और कौशल विकास केंद्रों की स्थापना की गई। केंद्र और राज्यों के बीच समन्वयनक्सलवाद से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया गया। मंत्री, राज्य और जिला स्तर पर समन्वय के माध्यम सेरणनीतियों को क्रियान्वित किया गया। विपक्ष शासित राज्यों से भी समर्थन मिला, हालांकि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस शासन के दौरान कुछ चुनौतियाँ सामनेआईं। नक्सल मुक्त भारत का लक्ष्यअमित शाह ने स्पष्ट किया कि किसी क्षेत्र को नक्सल मुक्त तभी घोषित किया जाएगा जब वहां पूरे साल कोई नक्सली घटना न हो। उनका मानना हैकि नक्सलवाद का खात्मा केवल आत्मविश्वास से नहीं बल्कि ठोस रणनीति और ठोस कार्यवाही से ही संभव है।
खनौरी और शंभू बॉर्डर पर किसान आंदोलन समाप्त, पुलिस ने हटाए अवरोधक, हाईवे पर यातायात बहाल

पंजाब के खनौरी और शंभू बॉर्डर पर करीब 13 महीने से जारी किसान आंदोलन को पंजाब सरकार ने खत्म कर दिया है। बुधवार देर रात शुरू हुईपुलिस कार्रवाई गुरुवार तक जारी रही। पुलिस ने बॉर्डर पर बने ढांचे और शेड को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद शंभू बॉर्डर की एक लेन को खोल दियागया है, जिससे हाईवे पर गाड़ियों की आवाजाही शुरू हो गई है।टोल प्लाजा फिलहाल बंदहालांकि हाईवे पर यातायात बहाल कर दिया गया है, लेकिन टोल प्लाजा अभी भी बंद है। जानकारी के अनुसार, इस मार्ग के बंद होने से लगभग 250 करोड़ रुपए के टोल राजस्व का नुकसान हुआ है। सड़कें साफ और ट्रैफिक सामान्य करने का प्रयासपटियाला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) नानक सिंह ने बताया कि सड़कें पूरी तरह साफ कर दी गई हैं और वाहनों की आवाजाही धीरे-धीरेसामान्य हो रही है। उन्होंने कहा कि अगले 3-4 घंटों में ट्रैफिक पूरी तरह सामान्य हो जाएगा। खनौरी बॉर्डर से ट्रॉली हटाने का काम जारीपटियाला रेंज के डीआईजी मनदीप सिंह सिद्धू ने बताया कि खनौरी बॉर्डर का एक बड़ा क्षेत्र खाली करा लिया गया है। ट्रैक्टर-ट्रॉली जैसी वस्तुओं कोबॉर्डर से 3 किलोमीटर दूर शिफ्ट किया जा रहा है। यदि कोई अपनी ट्रॉली वापस लेना चाहता है, तो उसे पहचान प्रमाण दिखाकर ट्रॉली प्राप्त करनेकी अनुमति दी जाएगी। हरियाणा सीमा से भी बैरिकेड्स हटाने का काम जारीअंबाला रेंज के आईजी सिबाश कबीराज ने बताया कि हरियाणा की ओर से भी बैरिकेड्स को गुरुवार शाम तक हटा दिया जाएगा, जिससे यातायातपूरी तरह से बहाल हो सके। किसान संगठनों का विरोध और सरकार पर आरोपआम आदमी पार्टी सरकार पर किसान संगठनों का हमला किसानों के आंदोलन को हटाने को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा और किसान मजदूर मोर्चा ने पंजाब सरकार की आलोचना की है। उन्होंने सरकार परतानाशाही का आरोप लगाया और कहा कि किसानों को बिना किसी पूर्व सूचना के हटाया गया। विरोध प्रदर्शन जारी पुलिस कार्रवाई के विरोध में मुक्तसर जिले के गिद्दड़बाहा और मोगा जिले में किसानों ने प्रदर्शन किया। वहीं, अखिल भारतीय किसान सभा औरभारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसानों ने करनाल में हरियाणा के मुख्यमंत्री के आवास तक विरोध मार्च भी निकाला। मंत्री हरपाल चीमा की प्रतिक्रियापंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सरकार ने यह कार्रवाई इसलिए की क्योंकि शंभू और खनौरी बॉर्डर को खोलना जरूरी था। उन्होंनेकिसानों से अपील की कि वे अपनी मांगों को लेकर दिल्ली या अन्य स्थानों पर धरना दें, क्योंकि उनकी मांगें केंद्र सरकार के खिलाफ हैं।
दिशा सालियान मौत मामला, पिता ने की नए सिरे से जांच की मांग, आदित्य ठाकरे पर गंभीर आरोप

8 जून 2020 की रात, मुंबई के मलाड इलाके में स्थित एक ऊंची इमारत की 14वीं मंजिल पर पार्टी चल रही थी। इस चकाचौंध भरी पार्टी के बीचअचानक रात एक बजे सन्नाटा पसर गया। लोग नीचे दौड़े और देखा कि दिशा सालियान जमीन पर पड़ी थीं। उसी रात उनकी मौत हो गई। दिशासालियान, जो दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं, उनकी मौत एक गहरा रहस्य बनी हुई है। कोई इसे आत्महत्या मानता है तोकोई हत्या। दिशा के पिता ने की नए सिरे से जांच की मांगहाल ही में दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने अपनी बेटी की मौत की नए सिरे से जांचकराने की मांग की है। याचिका में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे सहित कई लोगों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। दिशा केपिता ने कोर्ट से सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा कि उनकी बेटी के साथ दुष्कर्म और हत्या की गई थी। याचिका में क्या हैं आरोप?याचिका में आदित्य ठाकरे, पूर्व मेयर किशोरी पेडणेकर और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज करनेकी मांग की गई है। इनमें धारा 376(डी), 302, 201, 218, 409, 166, 107, 109, 120(बी) और 34 शामिल हैं। विधानसभा में गूंजा दिशा सालियान मामलामहाराष्ट्र विधानसभा में भी इस मामले को लेकर हंगामा हुआ। भाजपा विधायक अमित साटम ने सवाल उठाते हुए पूछा कि अब तक जांच में क्याप्रगति हुई है। गृह राज्यमंत्री योगेश कदम ने जवाब देते हुए कहा कि मामले की जांच अभी भी जारी है और दोषी चाहे जो भी हो, कानून के अनुसारकार्रवाई होगी। आदित्य ठाकरे ने दी सफाईआदित्य ठाकरे ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पिछले पांच सालों से उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहाकि अगर मामला कोर्ट में है तो वहीं पर जवाब दिया जाएगा। क्या था दिशा सालियान का मामला?दिशा सालियान एक सेलिब्रिटी मैनेजर थीं और उन्होंने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के साथ भी काम किया था। उनकी मौत 8 जून 2020 को मुंबईके मलाड स्थित एक ऊंची इमारत से गिरने के कारण हुई थी। यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने आत्महत्या की या उन्हें गिराया गया। शुरू में पुलिसने इसे आत्महत्या मानकर आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट (ADR) दर्ज की थी, लेकिन बाद में इस घटना ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में कई सवालखड़े कर दिए। राजनीतिक हलकों में उठे सवालइस मामले को लेकर शिवसेना ने भी सवाल उठाए हैं कि आखिर चार साल बाद अचानक इस मामले को फिर से क्यों उछाला गया। शिवसेना प्रवक्ताने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है।
छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान, 30 नक्सली ढेर, जवान की शहादत

छत्तीसगढ़ के बीजापुर और कांकेर जिलों में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में 30 नक्सली मारे गए हैं। इस ऑपरेशन में एक जवान ने भीअपनी शहादत दी है।नक्सलियों की बड़ी संख्या में उपस्थितिपुलिस को सूचना मिली थी कि गंगालूर इलाके में बड़ी संख्या में नक्सली मौजूद हैं। इस आधार पर दंतेवाड़ा और बीजापुर बॉर्डर पर संयुक्त पुलिसबल ने अभियान चलाया। सुबह 7 बजे से ही माओवादी विरोधी अभियान शुरू हुआ, जो दिनभर जारी रहा।कांकेर और बीजापुर में मुठभेड़बीजापुर-दंतेवाड़ा सीमा के वन क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में 26 नक्सली मारे गए, जबकि कांकेर जिले में हुए एनकाउंटर में 4 नक्सली ढेर हुए। इस मुठभेड़ केदौरान सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के पास से बड़ी संख्या में अत्याधुनिक हथियार भी बरामद किए। मुख्यमंत्री ने सुरक्षा बलों की सराहना कीछत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुरक्षा बलों के साहसिक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री का संकल्प है कि 31 मार्च2026 तक नक्सलवाद को समाप्त किया जाएगा। उन्होंने सुरक्षा बलों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार के चलते नक्सलवाद केखिलाफ मजबूत कार्रवाई हो रही है। सुरक्षा बलों का जीरो टॉलरेंस अभियानछत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। बीजापुर और दंतेवाड़ा के सरहदी इलाकों में जारी अभियान के दौरानभारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया। अधिकारियों के अनुसार, इस साल अब तक 71 से अधिक नक्सली मारे जा चुके हैं और290 से अधिक हथियार जब्त किए गए हैं।नक्सलियों के खिलाफ जारी रहेगा अभियानबीजापुर और कांकेर में मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है। मारे गए नक्सलियों की पहचान की जा रही है और यहआशंका है कि उनमें कुछ बड़े नक्सली नेता भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस का कहना है कि अभियान जारी रहेगा और नक्सलवाद के खिलाफ कड़ीकार्रवाई होती रहेगी।
उत्तर प्रदेश में CBCID का नाम बदलकर CID, सरकार का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश सरकार ने अपराध अनुसंधान प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने”क्रिमिनल ब्रांच क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CBCID)” का नाम बदलकर “क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID)” कर दिया है। यह फैसलागृह विभाग के विशेष सचिव राकेश कुमार मालपानी द्वारा हस्ताक्षरित आदेश के बाद 16 मार्च 2025 से प्रभावी हो गया है। विभाग का मुख्य कार्यCID विभाग का प्रमुख कार्य अपराधों की गहनता से जांच करना, फॉरेंसिक विश्लेषण के माध्यम से अपराधियों की पहचान करना और संगठितअपराधों की जांच-पड़ताल करना है। नाम बदलने से विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और स्पष्टता बढ़ेगी, जिससे आम जनता और पुलिसकर्मियोंको विभाग की भूमिका को समझने में आसानी होगी। नाम परिवर्तन का कारणराज्य सरकार का मानना है कि “CBCID” नाम जटिल और कठिन होने के कारण आम जनता में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही थी। इसके विपरीत”CID” नाम अधिक सरल और व्यापक रूप से जाना-पहचाना है। इस बदलाव से विभाग की पहचान को और अधिक मजबूती मिलेगी और जांचप्रक्रिया में प्रभावशीलता बढ़ेगी। प्रशासनिक और कानूनी कार्यवाही पर प्रभावनाम बदलने के बावजूद विभाग की प्रशासनिक और कानूनी कार्यवाहियां पहले की तरह ही जारी रहेंगी। केवल नाम में बदलाव किया गया है, जिससेविभाग की भूमिका को लेकर स्पष्टता बढ़ेगी और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। विशेषज्ञों की रायविभाग के नाम में बदलाव को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल विभाग की पहचान मजबूत होगी बल्कि आम लोगों में भ्रम की स्थितिभी समाप्त होगी। “CID” नाम लोगों के लिए अधिक स्वीकार्य और सहज है, जिससे विभाग की प्रभावशीलता में भी वृद्धि होने की संभावना है। अपराध नियंत्रण पर प्रभावसरकार का यह निर्णय अपराध जांच प्रणाली को सशक्त और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। अब देखना यह है कि इस बदलाव कावास्तविक प्रभाव अपराध नियंत्रण और जांच प्रक्रियाओं पर कितना पड़ता है।
महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र को लेकर विवाद, शिवसेना UBT ने बीजेपी पर साधा निशाना

महाराष्ट्र में इन दिनों मुगल बादशाह औरंगजेब की कब्र को लेकर गहमागहमी बनी हुई है। इसी बीच शिवसेना यूबीटी के मुखपत्र ‘सामना’ में बीजेपी परजोरदार हमला बोला गया है। सामना में लिखा गया है कि देवेंद्र फडणवीस को छत्रपति शिवाजी महाराज से ज्यादा औरंगजेब महत्वपूर्ण लगता है।शिवसेना ने आरोप लगाया कि फडणवीस सिर्फ भाषण देते हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं करते। नागपुर दंगों पर उठाए सवालसामना में नागपुर में हुए दंगों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। लेख में कहा गया है कि औरंगजेब की कब्र को लेकर नागपुर में हिंसा भड़क उठी, जिसमें पुलिस पर हमले और आगजनी की घटनाएं हुईं। सवाल किया गया कि अगर ये दंगाई बाहरी थे, तो पुलिस और खुफिया एजेंसियां क्या कररही थीं? बीड और परभणी में बढ़ते अपराधशिवसेना यूबीटी ने आगे कहा कि बीड में फिरौती और हत्याओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। परभणी में भी सांप्रदायिक तनाव देखागया। कोकण में होली के दौरान नवहिंदुत्ववादी तत्वों ने दंगे भड़काने की कोशिश की। छत्रपति शिवाजी से ज्यादा औरंगजेब को महत्वशिवसेना ने आरोप लगाया कि फडणवीस और बीजेपी को छत्रपति शिवाजी महाराज से ज्यादा औरंगजेब महत्वपूर्ण लगता है। लेख में कहा गया किछत्रपति शिवाजी महाराज का राज धर्म पर आधारित था और सबको साथ लेकर चलने का विचार था, जो बीजेपी की विचारधारा से मेल नहीं खाता। नवहिंदुत्ववादियों ने बिगाड़ा माहौलसामना में लिखा गया है कि ‘छावा’ फिल्म के प्रदर्शन के बाद से ही कुछ नवहिंदुत्ववादी तत्व औरंगजेब की कब्र के खिलाफ आक्रामक हो गए हैं। इनलोगों ने महाराष्ट्र का माहौल खराब करने का काम किया। बाबरी मस्जिद से तुलना करना नौटंकीसामना में कहा गया कि औरंगजेब की कब्र को बाबरी मस्जिद से तुलना करना और उसे हटाने के लिए कारसेवा की घोषणा करना महज एक नौटंकीहै। केंद्र सरकार को कब्र की सुरक्षा हटाकर इस विवाद को खत्म करना चाहिए। बीजेपी ने दिया नया शिवाजी शिवसेना ने तंज कसा कि ओडिशा से बीजेपी सांसद प्रदीप पुरोहित ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शिवाजी का अवतार बताकर एक नया शिवाजी पेशकर दिया है। इससे यह प्रतीत होता है कि बीजेपी मूल छत्रपति शिवाजी को खत्म कर एक नया प्रतीक खड़ा करना चाहती है। शिवाजी महाराज के नाम पर राजनीतिसामना में लिखा गया कि बीजेपी की रणनीति छत्रपति शिवाजी और संभाजी महाराज के महत्व को कम करके औरंगजेब की कब्र को मुद्दा बनाकरधार्मिक ध्रुवीकरण करना है। शिवसेना ने आरोप लगाया कि बीजेपी असल में शिवाजी महाराज के सिद्धांतों को नहीं अपनाना चाहती। शिवाजी महाराज का अपमानलेख में कहा गया कि छत्रपति शिवाजी महाराज का सम्मान तब ही हो सकता है जब उनके विचारों को अपनाया जाए, न कि सिर्फ उनके नाम काराजनीतिक लाभ उठाया जाए।
अंतरिक्ष से सुनीता विलियम्स और उनके साथियों की हुई वापसी,जानें कितना लगा समय क्या रही प्रक्रिया

नासा की भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में नौ महीने बिताने के बाद बुधवार को पृथ्वी पर वापस आगई. सुनीता विलियम्स के अलावा उनके सहयोगी बुच विल्मोर, निक हेग और अलेक्जेंडर गोरबुनोव भी उनके साथ स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन यान से वापसलौटे हैं. क्रू ड्रैगन कैप्सूल भारतीय समयानुसार बुधवार तड़के 3:27 बजे फ्लोरिडा के तल्हासी के तट के पास समुद्र में सुरक्षित उतरा इसी के साथउनकी वापसी का इंतजार खत्म हो गया.59 वर्षीय सुनीता विलियम्स और 62 वर्षीय बुच विल्मोर जून 2024 से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर थे. उनके बोइंग स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान में तकनीकी खराबी आ गई थी जिससे लगभग एक हफ्ते का उनका छोटा परीक्षण मिशन नौ महीने तक खिंचगया. अब चिकित्सा मूल्यांकन से लेकर 45 दिनों के गहन पुनर्वास कार्यक्रम तक क्रू-9 से लौटे अंतरिक्ष यात्रियों के लिए है.जैसे ही विलियम्स औरउनके साथी अंतरिक्ष वापस लौटे रिकवरी टीमों ने उन्हें स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन कैप्सूल से बाहर निकालने में मदद की. उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिएउन्हें प्रारंभिक चिकित्सा जांच के लिए स्ट्रेचर पर ले जाया गया. यह लंबी अवधि के मिशन से लौटने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए एक नियमितप्रक्रिया है क्योंकि उनके शरीर में सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में महत्वपूर्ण शारीरिक परिवर्तन होते हैं. गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण मांसपेशियां हो जाती है कमजोरपृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के बिना महीनों के बाद उनकी मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और हड्डियां का घनत्व कम हो जाता है जिससे वापसीपर सरल गतिविधियां भी चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं. उन्हें चक्कर आना अस्थिरता और थकान का भी अनुभव होता है क्योंकि उनका शरीर को अचानकपृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के अनुकूल होना होता है.उन्हें ‘बेबी फीट’ का अनुभव होता है क्योंकि अंतरिक्ष में घर्षण की कमी के कारण अंतरिक्ष यात्रियों केतलवों पर कॉलस नरम होने लगते हैं और छिलने लगते हैं. यह उनके पैरों को वापसी पर एक नवजात शिशु की तरह अति संवेदनशील बनाता है.उन्हेंहृदय प्रणाली में भी बड़े बदलावों का सामना करना पड़ता है क्योंकि गुरुत्वाकर्षण के बिना शरीर में तरल पदार्थ सिर की ओर ऊपर की ओर शिफ्ट होजाते हैं. इस तरल पुनर्वितरण के परिणामस्वरूप चेहरे पर सूजन, नाक के बंद होना, सिर के अंदर दबाव बढ़ना जैसी समस्याएं होती हैं. उसी समयनिचले शरीर में तरल पदार्थ की कमी का अनुभव होता है जिससे अंतरिक्ष यात्रियों के पैर पतले और कमजोर दिखाई देते हैं. इसे ‘पफी-हेड बर्ड-लेग्ससिंड्रोम’ कहा जाता है. कई दिन बिताएंगे पुनर्वास कार्यक्रम मेंदरअसल अपनी प्रारंभिक चिकित्सा जांच के बाद विलियम्स और उनके साथी अंतरिक्ष यात्री ह्यूस्टन में नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर में कई दिन पुनर्वासकार्यक्रम में बिताएंगे, जो उन्हें पृथ्वी पर जीवन के लिए फिर से अनुकूल होने में मदद करने के लिए डि़जाइन किए गए हैं.एस्ट्रोनॉट स्ट्रेंथ, कंडीशनिंग एंडरिहैबिलिटेशन (ASCR) टीम के विशेषज्ञ उनकी रिकवरी की देखरेख करेंगे. और उनकी रीकंडीशनिंग में मदद करेंगे. पुनर्वास लैंडिंग के तुरंत बाद शुरूहो जाता है और 45 दिनों तक जारी रहता है जिसमें सप्ताह के सातों दिन प्रतिदिन दो घंटे का सत्र होता है.रिकवरी प्रक्रिया को तीन चरणों में विभाजितकिया गया है. पहला चरण लैंडिंग के दिन शुरू होता है यह चलने, लचीलेपन और बुनियादी मांसपेशियों को मजबूत करने पर केंद्रित होता है. दूसराचरण संतुलन अभ्यास और हृदय संबंधी कंडीशनिंग पेश करता है जिससे अंतरिक्ष यात्रियों को समन्वय हासिल करने में मदद मिलती है. तीसरा चरणसबसे लंबा होता है जो फंक्शन डेवलपमेंट के लिए समर्पित है यह सुनिश्चित करता है कि वे बिना किसी परेशानी के दैनिक गतिविधियां कर सकें.
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की बैठक, चार मार्च को फिर से की जाएगी मीटिंग” केंद्र ने किया अधिकारी

किसानों की केंद्र के साथ बैठक खत्म तीसरी बार हुई है.दरअसल यह बैठक भी बेनतीजा रही इस बैठक में भी किसानों की मांगों को लेकर कोईसहमती नहीं बन पाई है. अब चार मई को केंद्र और किसानों के साथ फिर बैठक होगी. केंद्र ने एक सेक्रेटरी लेवल के अधिकारी की नियुक्ति की है जोफसलों की एमएसपी को लेकर देश भर के किसानों के साथ लेकर सुझाव लेगा.केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों के साथअच्छे माहौल में बैठक हो गई. अब 4 मई को अगली बैठक करेंगे उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के अनुसार किसानों की तरफ से सबमिट की गई रिपोर्टपर सभी हितधारकों की राय लेनी जरूरी है क्योंकि अगर एमएसपी को लेकर जो भी फैसला लिया जाएगा वो देश भर में लागू होगा.यह बैठक चंडीगढ़सेक्टर-26 के महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट में हुई पहले यह बैठक शाम 5 बजे होनी थी लेकिन अब इसके समय में बदलाव कर दिया गया है. बैठक मेंदोनों किसान संगठनों के 28 सदस्य भाग पहुंचे थे किसान नेता सरवण सिंह पंधेर ने कहा है कि किसान बैठक में मजबूती से अपना पक्ष रखेंगे औरउम्मीद है कि केंद्र सरकार उनके मुद्दों का समाधान करेगी.वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने पंजाब और हरियाणा के बॉर्डर पर फोर्स बढ़ाने पर कहा कि सरकारकी किसी भी तरह कार्रवाई की फिलहाल कोई प्लानिंग नहीं है. 23 फसलों पर एमएसपी तथ्य गए रखेंकिसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि तीन घंटे तक सौहार्दपूर्ण बातचीत हुई.23 फसलों पर एमएसपी कानून के तथ्य रखे गए. विशेषज्ञों काआभार जताया. पहली बार इतनी देर तक एमएसपी पर चर्चा हुई.25-30 हजार करोड़ के बजट से कानून बन सकता है केंद्रीय मंत्रियों ने डेटा परविशेषज्ञों से चर्चा की बात कही.किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि 374 दिन से मोर्चा चल रहा है. केंद्र की नीतियों पर चर्चा हुई. किसानों कादर्द मंत्रियों के सामने रखा गया. एमएसपी कानून संभव है इसके तथ्य पेश किए गए एक हफ्ते में डेटा भेजा जाएगा.मंत्रियों ने कानून की संभावना सेइनकार नहीं किया.शहर में किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच छठे दौर की बैठक करीब ढाई घंटे तक चली.किसानों ने एमएसपी पर डेटा पेशकिया और इसकी कानूनी गारंटी की मांग पर अड़े रहे. अगली बैठक 9 मार्च को होगीअगली बैठक 19 मार्च को होगी 25 फरवरी को दिल्ली कूच का फैसला किसान 23 फरवरी को करेंगे.बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंहचौहान, उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रहलाद जोशी और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल समेत कई नेता मौजूद रहे.कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहाकि किसान संगठनों के साथ सौहार्दपूर्ण माहौल में चर्चा हुई. पीएम मोदी सरकार किसान कल्याण को प्राथमिकता देती है.किसानों की बातें सुनी गईंऔर चर्चा आगे बढ़ेगी. हर्पाल चीमा ने बताया कि एमएसपी पर विस्तृत चर्चा हुई. किसानों ने डेटा पेश किया, जिस पर अगली बैठक में बात होगीउम्मीद है कि 19 मार्च को समाधान निकलेगा.किसानों ने फसलों की खरीद और एमएसपी पर डेटा रखा केंद्रीय मंत्रियों ने डेटा के स्रोत पूछे बैठक मेंकेवल एमएसपी पर चर्चा हुई और किसानों ने कानूनी गारंटी की मांग दोहराई.
आरएसएस के प्रमुख प्रचारक सुनील आंबेकर ने नागपुर हिंसा को लेकर की चर्चा, कहा औरंगजेब के नाम पर विवाद आज के दौर में प्रासंगिकनहीं

Nagpur Violence: नागपुर में हाल ही में भड़की हिंसा को लेकर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ(आरएसएस) की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है. अखिलभारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आम्बेकर का कहना है कि किसी भी तरह की हिंसा समाज के लिए ठीक नहीं हैं.शंभाजी नगर से औरंगजेब की कब्र कोहटाने की वीएचपी और अन्य संगठनों की मांगों के बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस ) के प्रवक्ता सुनील आंबेकर ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंनेबुधवार को कहा कि मुगल बादशाह आज के समय में “प्रासंगिक नहीं” हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी तरह की हिंसा को हतोत्साहित कियाजाना चाहिए.आंबेकर ने कहा” औरंगजेब आज प्रासंगिक नहीं हैं किसी भी तरह की हिंसा को प्रोत्साहित नहीं जाना चाहिए” आरएसएस का यह रुखऐसे समय में आया है. जब औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग और इससे जुड़ी विभिन्न अफवाहों को लेकर नागपुर में भड़की हिंसा के बाद तनावचरम पर है.अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर का कहना है कि किसी भी तरह की हिंसा समाज के लिए ठीक नहीं हैं. आंबेकर ने यह बातबंगलूरू में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक शुरू होने के पहले कही.औरंगजेब विवाद से जुड़े को लेकर सवालउन्होंने कहा कि ऐसा कोई विवाद सही नहीं है. पुलिस मामले की जांच कर रही है और जो भी जरूरी होगा पुलिस कार्रवाई करेगी. इस बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष पर होगी चर्चाआंबेकर ने ऐसा कतई प्रासंगिक नहीं है.आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक 21-23 मार्च को बंगलूरू में होनी है. इस बैठक मेंसंघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों पर चर्चा की जाएगी और पिछले वर्ष के कार्यों की समीक्षा की जाएगी.भाजपा के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आरएसएस) के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले निकाय ‘अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा’ की तीन दिवसीय बैठक (21-23 मार्च) को बंगलूरू में होनानिश्चित किया गया है. इस बैठक में संघ के सर्वोच्च पदाधिकारी मोहन भागवत,दत्तात्रेय होसबोले और सभी सहयोगी संस्थाओं के राष्ट्रीय अध्यक्ष औरमहामंत्री सहित 1480 कार्यकर्ता शामिल होंगे.विवादों का ताजा दौर फिल्म ‘छावा’ की रिलीज के बाद शुरू हुआ जिसमें मराठा राजा छत्रपति संभाजीमहाराज के इतिहास और औरंगजेब द्वारा उनकी हत्या को दिखाया गया है. विश्व हिंदू परिषद ने कब्र हटाने की थी मांगसोमवार को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने खुल्दाबाद में औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. विरोध प्रदर्शन के दौरान औरंगजेब के पुतले को चादर सहित आग के हवाले कर दिया गया. हालांकि अफवाह फैली कि कुछ धार्मिक सामग्री जलाईगई है जिससे इलाके में तनाव फैल गया इसके कारण महल और हंसपुरी इलाकों में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ और आगजनी हुई. भीड़ ने निवासियों केघरों को भी निशाना बनाया और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया.इसको लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि हिंसा की योजना बनाईगई थी. पेट्रोल बम तुरंत प्राप्त नहीं किए जा सकते. उन्हें पहले से तैयार किया गया था यह किसी उकसावे के कारण नहीं हुआ हमारा विरोध शांतिपूर्णथा.
इंदौर की रंगपंचमी गेर में हादसों की बाढ़, छवि पर पड़ा धब्बा

इंदौर की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध रंगपंचमी गेर इस बार हादसों और हुड़दंग के कारण बदनाम हो गई है। गेर के दौरान कई अप्रिय घटनाओं ने इसकीछवि को धूमिल कर दिया है। गेर शुरू होते ही विभिन्न स्थानों पर हुड़दंगियों ने उत्पात मचाना शुरू कर दिया। गेर में युवक की मौत से मची सनसनीगेर के प्रारंभ में ही एक दर्दनाक हादसे में 24 वर्षीय युवक संदीप मोरे की मौत हो गई। टोरी कॉर्नर पर पानी के एक ट्रैक्टर के नीचे आकर संदीप गंभीररूप से घायल हो गया। लोग गेर की मस्ती में डूबे हुए थे, तभी अचानक यह हादसा हो गया। स्थानीय लोगों ने उसे तुरंत एम्बुलेंस तक पहुंचाया, लेकिन अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने ट्रैक्टर चालक को हिरासत में ले लिया है। मुख्यमंत्री ने की आर्थिक सहायता की घोषणामुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, जो गेर में शामिल होने इंदौर आए थे, ने घटना की गंभीरता को देखते हुए अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया। उन्होंने मृतक केपरिवार को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। गेर में घबराहट और चोट के कई मामलेगेर के दौरान कई लोग घबराहट और अफरा-तफरी के कारण बेहोश हो गए। एमजी रोड पुलिस और प्रशासन ने कई घायलों को अस्पताल में भर्तीकराया। प्रमुख रूप से प्रवीण जोशी सहित आधा दर्जन लोग घायल या बीमार हुए। प्राथमिक उपचार के बाद अधिकतर घायलों को अस्पताल सेछुट्टी दे दी गई। महिलाओं और बच्चों को बनाया निशानागेर में हुड़दंगियों ने महिलाओं, युवतियों और बच्चों को भी नहीं छोड़ा। पानी के गुब्बारे और गुलाल के पैकेट तेज रफ्तार से फेंकने के कारण कई लोगोंकी आंखों में चोट आई। कुछ महिलाओं और बच्चियों को रोते हुए भी देखा गया। उत्पाती तत्वों से बदनाम हुई गेरगेर को अंतरराष्ट्रीय धरोहर बनाने के प्रयास में जुटे प्रशासन के सामने यह घटनाएं बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं। प्रशासन की ओर से विदेशी पर्यटकों औरएनआरआई को आकर्षित करने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन कुछ हुड़दंगियों के कारण गेर की छवि पर बुरा प्रभाव पड़ा है। कलेक्टर ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा कि यदि गेर को अंतरराष्ट्रीय धरोहर का दर्जा दिलाना है, तो इसे सुरक्षित और शालीन बनाना होगा। उन्होंने कहा किमहिलाओं की सहभागिता को सुनिश्चित करते हुए सुरक्षित आयोजन करना हमारी प्राथमिकता है। कलेक्टर ने बताया कि गेर मार्ग पर सीसीटीवी कैमरोंऔर पुलिस बल की तैनाती के साथ एंबुलेंस और फायर फाइटर्स भी मुस्तैद थे। शहरवासियों की उम्मीदों पर फिरा पानीसरकार और प्रशासन लगातार प्रयास कर रहे हैं कि इंदौर की गेर को यूनेस्को की सूची में शामिल किया जाए। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों कोध्यान में रखते हुए आयोजन किया जा रहा है। लेकिन इस बार हुई घटनाओं ने शहरवासियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।