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नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली ने राजशाही बहाल करने पर कह दी बड़ी बात,लोकतंत्र में नहीं होता रिवर्स गियर

नेपाल में राजशाही समर्थक समूहों पर कटाक्ष करते हुए प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने रविवार को कहा कि लोकतंत्र एक राजमार्ग की तरह है, जिसमेंकोई रिवर्स गियर नहीं होता है.उन्होंने कहा कि कभी-कभार अंधे मोड़ के कारण क्षणिक रूप से पीछे हटना पड़ता है। उन्होंने आगे बढ़ने के महत्व पर बलदिया। पिछले हफ्ते पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह के सैकड़ों समर्थकों ने काडमांडू में पूर्व राजा के स्वागत में एक रैली का आयोजन किया था। 77 वर्षीयज्ञानेंद्र जैसे ही देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक स्थलों का दौरा करने के बाद पोखरा से रविवार को त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे उनकेसमर्थकों ने उनके पक्ष में नारे लगाने शुरू कर दिए। रैली का उद्देश्य नेपाल में राजशाही की बहाली के लिए समर्थन प्रदर्शित करना था। महिला नेतृत्वशिखर सम्मेलन 2025 में बोलते हुए प्रधानमंत्री ओली ने राजशाही समर्थक समूहों द्वारा हाल ही में किए गए विरोध प्रदर्शनों की ओर इशारा कियाऔर कहा कि हमें हमेशा आगे बढ़ने की जरूरत है। पीछे मुड़ना नहीं चाहिए। रिवर्स गियर कभी-कभी तभी लगाया जाता है, जब सड़क पर तीखे मोड़हों. उन्होंने कहा कि हाईवे पर कोई बैक गियर नहीं होता और लोकतंत्र ही हमारा हाईवे है। वहीं, रविवार को संसद (प्रतिनिधि सभा) में सत्तारूढ़ औरविपक्षी सांसदों के बीच राजशाही की वापसी की बढ़ती मांग को लेकर गरमागरम बहस हुई। उन्होंने कहा कि रिवर्स गियर कभी-कभी तब लगाया जाताहै जब सड़क पर तीखे मोड़ हों. लोकतंत्र से पूर्व राजा का समर्थनहाइवे पर कोई बैक गियर नहीं है और लोकतंत्र हमारा राजमार्ग है पूर्व राजा के समर्थक गत कई दिनों से काठमांडू और पोखरा सहित देश के विभिन्नहिस्सों में रैलियां निकाल रहे हैं और 2008 में खत्म की गई राजशाही को एक बार फिर बहाल करने की मांग कर रहे हैं. राजतंत्र समर्थक फरवरी मेंलोकतंत्र दिवस के बाद तब सक्रिय हुए जब ज्ञानेंद्र ने कहा था. समय आ गया है कि हम देश की रक्षा करने और राष्ट्रीय एकता लाने की जिम्मेदारीलें.इस रैली का उद्देश्य नेपाल में राजशाही की फिर स्थापना के प्रति समर्थन प्रदर्शित करना था. ओली ने रविवार को यहां महिला नेतृत्व शिखर सम्मेलन2025 को संबोधित करते हुए राजशाही समर्थक समूहों द्वारा हाल ही में किए गए विरोध प्रदर्शनों की ओर इशारा किया. उन्होंने कहा कि हमें हमेशाआगे बढ़ने की जरूरत है. पीछे मुड़ना नहीं चाहिए.पिछले हफ्ते पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह के सैकड़ों समर्थकों ने राजधानी में उनके स्वागत में रैली निकालीथी। ज्ञानेंद्र (77) पिछले सप्ताह रविवार को जैसे ही देश के विभिन्न भागों में धार्मिक स्थलों का दर्शन कर पोखरा से काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीयहवाई अड्डे पर पहुंचे समर्थकों ने उनके पक्ष में नारे लगाने शुरू कर दिए. रैली का उद्देश्य था राजशाही की पुन:स्पाथना करनाइस रैली का उद्देश्य नेपाल में राजशाही की पुनः स्थापना के प्रति समर्थन प्रदर्शित करना था. ओली ने रविवार को यहां महिला नेतृत्व शिखर सम्मेलन2025 को संबोधित करते हुए राजशाही समर्थक समूहों द्वारा हाल ही में किए गए विरोध प्रदर्शनों की ओर इशारा किया।उन्होंने कहा हमें हमेशा आगेबढ़ने की जरूरत है. पीछे मुड़ना नहीं चाहिए रिवर्स गियर (वाहन को पीछे ले जाने में सक्षम) कभी-कभी तब लगाया जाता है जब सड़क पर तीखे मोड़हों. राजमार्ग पर कोई ‘बैक गियर’ नहीं है और लोकतंत्र हमारा राजमार्ग है. पूर्व राजा के समर्थक गत कई दिनों से काठमांडू और पोखरा सहित देश केविभिन्न हिस्सों में रैलियां निकाल रहे हैं और 2008 में समाप्त की गई राजशाही को पुनः बहाल करने की मांग कर रहे हैं. राजतंत्र समर्थक फरवरी मेंलोकतंत्र दिवस के बाद तब सक्रिय हुए जब ज्ञानेन्द्र ने कहा था. समय आ गया है कि हम देश की रक्षा करने और राष्ट्रीय एकता लाने की जिम्मेदारी लें.

पाकिस्तान के अब्दुल पर बरसाई गई जबरदस्त गोलियां,फिर से की गई एक हाई प्रोफाइल किलिंग

पाकिस्तान के आतंकी गतिविधियों से जुड़े लोगों को सफाया हो रहा है. जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई) के वरिष्ठ नेता मुफ्ती अब्दुल बाकीनूरजई की रविवार रात क्वेटा के एयरपोर्ट रोड पर हत्या कर दी गई.अज्ञात बंदूकधारियों ने उसपर गोलियां चलाई. पुलिस ने जानकारी के मुताबिकहमले में वो बुरी तरह घायल हो गया था, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया.रविवार को क्वेटा में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के विद्रोहियों नेआतंकी हमले को अंजाम दिया है. क्वेटा के ताफ्तान जा रहे सेना के काफिले पर आतंकी हमला हुआ. इस हमले में सात सैनिकों की मौत हो गई.21 घायल हो गए बलूच लिबरेशन आर्मी ने 90 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत का दावा किया है बलूच लिबरेशन आर्मी ने इस हमले की जिम्मेदारी भी लीहै.रविवार को पाकिस्तान में आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा के मोस्ट वांटेड आतंकी अबु कताल सिंघी की हत्या कर दी गई है। शनिवार रात 8 बजेअबु कताल को मौत के घाट उतार दिया गया. उसने भारत में भी कई बड़े हमलों को अंजाम दिया था. NIA ने उसे वांटेड घोषित कर रखा था. वोहाफिज सईद (Hafiz Saeed) का करीबी माना जाता रहा है.यह हत्या पाकिस्तान में पिछले कुछ वर्षों से बढ़ रही राजनीतिक हिंसा और आतंकवादीहमलों की कड़ी में एक और जोड़ है. आतंकवादी समूहों ने बनाया कई सदस्यों को निशानापाकिस्तान और पीओके में अज्ञात बंदूकधारियों ने अब तक लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकवादी समूहों के कईसदस्यों को निशाना बनाया है. पाकिस्तान में कई धार्मिक और राजनीतिक नेताओं को पिछले कुछ वर्षों में इसी तरह के हमलों का सामना करना पड़ाहै. पाकिस्तान में राजनीतिक और धार्मिक नेताओं की सुरक्षा को लेकर सरकार द्वारा पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं.क्वेटा(Quetta) में हुई इस घटना नेएक बार फिर पाकिस्तान में सुरक्षा स्थिति पर अपनी कार में जा रहे थे. अज्ञात हमलावरों ने उनकी कार पर ताबड़तोड़ फायरिंग की जिसकेपरिणामस्वरूप वह गंभीर रूप से घायल हो गए उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया लेकिन अत्यधिक खून बहने के कारण वह बच नहीं पाएउनका निधन हो गया नूरजई के निधन से पाकिस्तान में धार्मिक और राजनीतिक हलकों में शोक की लहर है. नहीं मिला कोई हमलावरों का सुरागइस हमले के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है लेकिन अब तक हमलावरों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है.इससे पहले11 मार्च को क्वेटा से पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस को बीएलए के विद्रोहियों ने हाईजैक कर लिया था.इस ट्रेन को दोपहर 1.30 बजे सिब्बीपहुंचना था लेकिन बोलान के माशफाक टनल में हमला हुआ इस हमले को BLA ने पूरी प्लानिंग के साथ अंजाम दिया था BLA के लड़ाके पहले सेही घात लगाकर बैठे थे हमले के लिए BLA ने अपने सबसे घातक लड़ाके मजीद ब्रिगेड और फतेह को तैयार किया था.पाकिस्तान में बीते कुछ समयमें लगातार आतंकी हमले हो रहे हैं.रविवार को क्वेटा से ताफ्तान जा रहे सेना के काफिले पर आतंकी हमला हुआ, जिसमें सात सैनिकों की मौत हुईजबकि 21 घायल हुए.इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने 90 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत का दावा किया.

अंतरिक्ष यात्री सुनीत विलयम्स और उनके साथी को NASA ने धरती पर वापसी की बताई तारीख,”जानें कब तक वापस आएंगी विलियम्स”

भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर फंसे अंतरिक्ष यात्री बुच विल्मोर की धरतीपर वापसी की तारीख तय हो गई है.अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने बताया है कि ये दोनों और दो अन्य अंतरिक्ष यात्री मंगलवार शाम को धरती परवापस लौटेंगे. नासा ने बताया कि सुनीता विलियम्स, बुच विल्मोर और एक अन्य अमेरिकी अंतरिक्षयात्री निक हेग और एक रूसी अंतरिक्षयात्रीएलेक्जेंडर गोरबुनोव स्पेसएक्स के ड्रैगन क्राफ्ट यान से फ्लोरिडा के तट पर मंगलवार शाम करीब छह बजे धरती पर उतर सकते हैं. पहले इनके बुधवारको धरती पर लौटने की उम्मीद थी.स्पेसएक्स का ड्रैगन क्राफ्ट यान रविवार को चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पहुंचा था. सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर बीते करीब नौ महीने से अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन पर फंसे हैं. दोनों बीते साल जून में बोइंग के स्टारलाइनर यान सेअंतरिक्ष पहुंचे थे लेकिन स्टारलाइनर यान में तकनीकी खराबी के चलते दोनों वापस नहीं आ सके.एनडीटीवी ने नासा के सेवानिवृत्त अंतरिक्ष यात्री कैडीकोलमैन के हवाले से बताया कि अंतरिक्ष यात्रियों के लिए कोई विशेष ओवरटाइम वेतन नहीं है. ऐसे में अंतरिक्ष यात्री संघीय कर्मचारी है इस स्थिति मेंअंतरिक्ष में उनके समय को पृथ्वी पर किसी भी नियमित कार्य यात्रा की तरह ही माना जाता है. नौ महीनों से फंसी सुनीत विलियम्स और उनके साथीअंतरिक्ष में नौ महीनों से फंसी सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर प्रत्येक को को संभवतः अतिरिक्त मुआवज़े के रूप में सिर्फ़ 1,148 डॉलर (लगभग 1 लाख रुपये) मिलेंगे. हालांकि ये केवल अनुमान है बता दें कि नासा ने हाल के एक बयान में कहा कि तकनीकी रूप से अंतरिक्ष यात्री फंसे नहीं हैं नासाका तर्क है कि वे आई.एस.एस. पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं.नासा के अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को जीएस-15 वेतन ग्रेडके अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है. इसके अनुसार सामान्य अनुसूची (जीएस) प्रणाली के तहत संघीय कर्मचारियों के लिए उच्चतम स्तर है.तीसरी बारसुनीता विलियम्स 5 जून, 2024 को आठ दिन के लिए अंतरिक्ष में गई थीं लेकिन बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट में खराबी की वजह से वह वापसनहीं आ पाईं. वो बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट की पहली टेस्ट फ्लाइट भी थी इसके बाद से वह नौ महीने से अंतरिक्ष में फंसी हुई हैं. अब क्रू-10 मिशन के स्पेस स्टेशन पर पहुंचने के बाद उनके वापस आने का रास्ता साफ हो गया है इस बार वह अपने साथ भगवान गणेश की मूर्ति लेकर गई हैं. भगवान गणेश को मानती है अपना आराध्यअंतरिक्ष में जाने से पहले उन्होंने कहा था कि भगवान गणेश को अपने लिए लकी मानती है इसलिए भगवान गणेश की मूर्ति लेकर जाएंगी. अंतरराष्ट्रीयअंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पिछले 9 महीने से फंसी भारतीय अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके अमेरिकी साथी बुच विल्मोर के इंतजार कीघड़ियां अब खत्म होने वाली है. वे दोनों मंगलवार शाम को धरती पर लौट आएंगे. नासा ने रविवार शाम को कहा कि इन अंतरिक्ष यात्रियों की वापसीमंगलवार को फ्लोरिडा तट पर समुद्र में उतरने का समय शाम 5:57 बजे (भारतीय समयानुसार 19 मार्च की सुबह 3:30 बजे) होगी. इससे पहले यहवापसी बुधवार से पहले होने की उम्मीद नहीं जताई जा रही थी.बुच विल्मोर और सुनीता विलियम्स एक अन्य अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और एक रूसीकॉस्मोनॉट के साथ स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन यान से वापस आएंगे जो रविवार सुबह ISS पर पहुंचा था. विल्मोर और विलियम्स जून 2023 से आईएसएसपर हैं. वे बोइंग स्टारलाइनर यान के पहले मानवयुक्त परीक्षण उड़ान में गए थे लेकिन उसमें तकनीकी खराबी आ गई जिससे वह सुरक्षित वापसी केलिए ठीक नहीं रहा.

बिहार में पांच साल में कितनी बदली सियासत, बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने ली तीन बार शपथ “अबकी बार क्या है बदल सकती है सरकार”

Bihar Assembly Election: बिहार में विधानसभा चुनाव का एलान होने में करीब छह महीने का समय बचा है. इस बीच राज्य में सियासी उथल-पुथल भी जारी है हाल ही में भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में लंबे समय से खाली पड़े मंत्री पदों पर अपनी पार्टी के विधायकों को शपथ दिलाई. पार्टीने इस दौरान जातीय समीकरणों का खास ख्याल रखा. इसके साथ ही सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दलों में चुनाव बाद मुख्यमंत्री कौन बनेगा. इसकोलेकर भी बयानबाजी शुरू हो चुकी है. नीतीश कुमार की सेहत भी अक्सर चर्चा में रहती है हालांकि अगर 2020 के बाद से बिहार की राजनीति को देखेंतो यह काफी उठा पटक वाली रही है. खासकर बिहार की सत्ता में बैठे गठबंधनों में तो लगातार बदलाव देखने को मिले चौंकाने वाली बात यह है किइन बदलावों के बावजूद राज्य में मुख्यमंत्री के पद में कोई बदलाव नहीं हुआ 2020 में नीतीश कुमार की जेडीयू को राज्य की तीन मुख्य पार्टियों मेंसबसे कम सीटें मिलने के बावजूद बीते पांच साल में वही सरकार के मुखिया रहे हैं बिहार में 2020 में हुए विधानसभा चुनाव 28 अक्टूबर 2020 से 7 नवंबर 2020 तक आयोजित किए गए थे. मतगणना 10 नवंबर को कराई गई. यह मुकाबला सत्तासीन एनडीए गठबंधन और महागठबंधन के बीचथा. उस वक्त एनडीए में भाजपा, जदयू, हम और वीआईपी शामिल थीं जबकि महागठबंधन में राजद वाम दल और कांग्रेस शामिल थीं.243 विधानसभा सीटों वाले बिहार में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) को 125 सीटों पर जीत मिली थी. इसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कोसबसे ज्यादा 74 सीटें हासिल हुई थीं.जबकि जनता दल यूनाइटेड (जदयू) को 43 सीटें मिली थीं. महागठबंधन को मिली थी 110 सीटों पर जीतइसके अलावा विकासशील इंसान पार्टी को 4 सीटें हासिल हुई थीं दूसरी तरफ महागठबंधन को बिहार में 110 सीटों पर जीत मिली थी. इनमें से राजदको सबसे ज्यादा 75 सीटें, कांग्रेस को 19 सीटें, वाम दलों (सीपीआई, सीपीएम, सीपीआई-एमएल) को 16 सीटें मिली थीं.वहीं अन्य दलों मेंलोकजनशक्ति पार्टी (लोजपा) जो कि अब एनडीए का हिस्सा है. जिसे 1 सीट और एआईएमआईएम को पांच सीटें मिली थीं. बसपा को एक और 1 निर्दलीय प्रत्याशी की भी जीत हुई थी.बिहार में 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत में सबसे अहम भूमिका भाजपा की रही. इसकेबावजूद पार्टी ने मुख्यमंत्री पद पर अपना दावा नहीं किया. 43 सीटें होने के बावजूद जदयू का मुख्यमंत्री पद पर दावा बरकरार रहा और नीतीश कुमारने एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. हालांकि इस बार कैबिनेट में भाजपा का बोलबाला रहा पार्टी को जदयू से ज्यादा मंत्रीपद मिले. साथ हीउसने दो उपमुख्यमंत्री भी नियुक्त किए.बिहार में एनडीए गठबंधन का सरकार में साथ दो साल से भी कम समय के लिए चला. यह राजनीतिकगठबंधन तब समाप्त हुआ जब नीतीश कुमार ने अगस्त 2022 में भाजपा पर अपनी पार्टी जदयू को तोड़ने और खत्म करने की कोशिश का आरोपलगाया. इसके बाद उन्होंने राजद  जेदयू का सिकुड़ता वोटर बेसएक बार फिर नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली बताया जाता है कि नीतीश के एनडीए छोड़ने की मुख्य वजह जदयू का सिकुड़ता वोटर बेसथा. दरअसल 2015 में जदयू को 71 सीटें मिली थीं जो कि 2020 में घटकर 43 पर पहुंच गई थीं. वहीं भाजपा की सीटें 53 से बढ़कर 74 पर पहुंचगई थी. नीतीश की पार्टी के नेताओं का कहना था कि चिराग पासवान और उनकी लोकजनशक्ति पार्टी को जदयू के खिलाफ प्रत्याशी उतारने से नरोककर भाजपा ने ही गठबंधन की अपनी साथी पार्टी की ताकत कम करने का काम किया. जदयू का मानना था कि भाजपा की शह पर लोजपा नेचुनाव में उसके वोट काटे जिसका असर उसकी सीटों पर पड़ा.इसके अलावा नीतीश के दोनों डिप्टी सीएम- रेणू देवी और तारकिशोर प्रसाद को लेकरअसहज महसूस करने की खबरें भी आने लगी थीं. दरअसल लंबे समय तक सुशील मोदी उनके साथ उपमुख्यमंत्री रहे थे और अब भाजपा ने दो नएनेताओं को उनके साथ लगाया था. इतना ही नहीं नीतीश के एनडीए से अलग होने का एक और कारण जदयू के तत्कालीन नेता और राष्ट्रीय अध्यक्षआरसीपी सिंह थे.जो कि केंद्र सरकार में मंत्री थे. अटकलें थीं कि भाजपा उन्हें अपने साथ मिलाकर जदयू को दो हिस्सों में बांटना चाहती थी. ऐसे मेंनीतीश ने अलग राह चुन ली.

आम आदमी पार्टी सरकार के तीन साल पूरे, केजरीवाल और भगवंत मान ने हरमंदिर साहिब में टेका मत्था

अमृतसर। आम आदमी पार्टी (AAP) की पंजाब सरकार के तीन साल पूरे होने पर राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान नेसचखंड श्री हरमंदिर साहिब में मत्था टेककर आशीर्वाद लिया। केजरीवाल अपनी पत्नी सुनीता केजरीवाल के साथ दस दिन की विपश्यना साधना केबाद अमृतसर पहुंचे थे। अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने गुरु साहिब के चरणों में सबकी खुशहाली, सुख-समृद्धि और उन्नति कीप्रार्थना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भगवंत मान भी अपने परिवार के साथ मौजूद रहे। नशा और भ्रष्टाचार के खिलाफ युद्धमीडिया से बातचीत में केजरीवाल ने कहा कि पंजाब में नशा और भ्रष्टाचार सबसे बड़ी समस्याएं हैं और आम आदमी पार्टी की सरकार ने तीन करोड़पंजाबियों के साथ मिलकर इनके खिलाफ युद्ध छेड़ा है। उन्होंने कहा कि यह न्याय की लड़ाई है और गुरु महाराज से शक्ति और मार्गदर्शन की प्रार्थनाकी है ताकि सरकार लोगों की सेवा करती रहे। रंगला पंजाब बनाने का संकल्पमुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य पंजाब को नशा मुक्त बनाकर शानदार शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदानकरना है। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल द्वारा दी गई गारंटियों और पार्टी की सोच के अनुरूप सरकार काम कर रही है। भगवंत मान ने बताया कि सरकार नशा और भ्रष्टाचार के खिलाफ योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई कर रही है। युवाओं को रोजगार देने के प्रति प्रतिबद्धताजताते हुए उन्होंने कहा कि अब तक 55 हजार से अधिक नौकरियां दी जा चुकी हैं। गुरु नगरी में आभार व्यक्तभगवंत मान ने एक्स पर लिखा कि गुरु नगरी अमृतसर में अरविंद केजरीवाल के साथ सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में मत्था टेकने का सौभाग्य प्राप्तहुआ। उन्होंने पंजाब और पंजाबियों के कल्याण के लिए प्रार्थना की और सरकार के तीन साल पूरे होने पर परमात्मा का धन्यवाद किया। आम आदमी पार्टी की सरकार ने 16 मार्च 2022 को शहीद-ए-आजम भगत सिंह के जन्मस्थल खटकड़ कलां में शपथ ली थी। सरकार का संकल्प हैकि नेक नीयत और ईमानदारी के साथ पंजाब को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाया जाए।

मऊगंज हिंसा: ASI समेत दो की हत्या पर बवाल, मुख्यमंत्री ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में शनिवार (14 मार्च) को दो गुटों के बीच हुए विवाद में दर्दनाक घटना घटी। इस हिंसक झड़प मेंएक सहायक उप निरीक्षक (ASI) रामचरण गौतम सहित दो लोगों की हत्या कर दी गई। घटना को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा दुखव्यक्त किया है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। घटना का कारण: अपहरण के बाद भड़की हिंसामिली जानकारी के अनुसार, सनी द्विवेदी नामक युवक के अपहरण की सूचना पर शाहपुर थाना पुलिस ग्राम गडरा पहुंची थी। पुलिस टीम युवक कोबचाने का प्रयास कर रही थी, तभी आक्रोशित भीड़ ने हमला कर दिया। इस हमले में ASI रामचरण गौतम सहित सनी द्विवेदी की भी मौत हो गई। मुख्यमंत्री का बयान: सख्त कार्रवाई के निर्देशमुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए इसे बेहद अमानवीय और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X परशोक संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि इस जघन्य अपराध में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों को दिए निर्देशमुख्यमंत्री ने DIG रीवा और SP मऊगंज को धारा 163 लागू कर स्थिति को नियंत्रण में लेने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ADG रीवा जोन को मौकेपर भेजा गया है, जबकि DGP स्वयं घटनास्थल पर पहुंचकर आवश्यक निर्देश देंगे। घटना की पृष्ठभूमि: हत्या के संदेह में अपहरणमऊगंज SP रसना ठाकुर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कुछ समय पहले अशोक कुमार नामक व्यक्ति की मृत्यु हुई थी। स्थानीयलोगों को संदेह था कि सनी द्विवेदी ने उसकी हत्या की है, हालांकि जांच में यह सामने आया कि अशोक कुमार की मौत एक दुर्घटना में हुई थी। इसीसंदेह के आधार पर कुछ लोगों ने सनी द्विवेदी का अपहरण कर लिया था। जब पुलिस उसे छुड़ाने पहुंची, तो विवाद हिंसा में बदल गया और इसदर्दनाक घटना को अंजाम दिया गया। दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाईमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार किसी भी प्रकार की हिंसा और कानून व्यवस्था को बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।उन्होंने कहा कि इस घटना में शामिल अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

बलूचिस्तान में बड़ा हमला: पाकिस्तानी सेना पर बलूच आतंकियों का काफिले पर हमला

पाकिस्तान में एक बार फिर बड़ा आतंकी हमला हुआ है। इस बार बलूच आतंकियों ने पाकिस्तान सेना को निशाना बनाया है। हमले की घटनाबलूचिस्तान के नोश्की इलाके में हुई, जहां सुरक्षाबलों के काफिले पर हमला किया गया। इस हमले की तुलना भारत में हुए पुलवामा हमले से की जारही है। हमला: सुरक्षाबलों के काफिले पर बम और ग्रेनेड से हमलाहमले में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उसकी फिदायी इकाई मजीद ब्रिगेड ने नोश्की में आरसीडी हाईवे पर रखशानमिल के पास आत्मघाती हमला किया। जानकारी के अनुसार, काफिले में सात बसें और दो कारें थीं। एक बस को वाहन-जनित इम्प्रोवाइज्डएक्सप्लोसिव डिवाइस (VBIED) से निशाना बनाया गया, जो आत्मघाती हमले का संकेत देता है। दूसरी बस को क्वेटा से ताफ्तान जाते समय रॉकेटसंचालित ग्रेनेड (RPG) से हमला कर नष्ट कर दिया गया। हताहतों की संख्या: विरोधाभासी दावेपाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में पांच जवान मारे गए और 13 अन्य घायल हुए हैं। वहीं, बलूच लिबरेशन आर्मी ने दावा किया है किहमले में करीब 90 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं। नोश्की के SHO सुमालानी ने भी आशंका जताई है कि मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ सकतीहै, क्योंकि कई घायलों की हालत गंभीर है। बलूच लिबरेशन आर्मी का बयानBLA ने हमले के बाद एक बयान जारी करते हुए कहा कि उनकी मजीद ब्रिगेड ने इस हमले को अंजाम दिया। हमले में आठ बसों वाले काफिले कोनिशाना बनाया गया, जिसमें से एक बस विस्फोट में पूरी तरह नष्ट हो गई। BLA के अनुसार, फतेह दस्ते ने दूसरी बस को घेरकर उसमें सवार सभीसैनिकों को मार गिराया। घायल सैनिकों का उपचारहमले में घायल जवानों को नोश्की और FC कैंप में उपचार के लिए ले जाया गया है। कई घायलों की हालत गंभीर होने के कारण मृतकों की संख्यामें और वृद्धि की आशंका है।

निर्वाचन आयोग का बड़ा कदम, वोटर आईडी और आधार लिंकिंग पर पुनर्विचार

देश में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों का स्थायी और वैज्ञानिकसमाधान निकालने की ठान ली है। आयोग अब वोटर आईडी (EPIC) को आधार से लिंक करने की योजना पर पुनर्विचार कर रहा है। इस कदम काउद्देश्य उन मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करना है जो एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत हैं। केंद्र सरकार के साथ बैठकनिर्वाचन आयोग ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के साथ मिलकर एक नई योजना तैयार की है। आगामी मंगलवार को आयोग के उच्चाधिकारियों, केंद्रीयगृह सचिव, विधि सचिव और UIDAI के सीईओ के साथ महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक में वोटर आईडी से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चाकी जाएगी। मुख्य निर्वाचन आयुक्त का बयानमुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस पहल को आवश्यक बताते हुए कहा कि इससे फर्जी मतदाताओं के नाम सूची से हटाने में मदद मिलेगी।उनका मानना है कि एक ही मतदाता के नाम और पहचान को सही करने के लिए यह कदम उठाना महत्वपूर्ण है। विपक्षी दलों के आरोपयह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (UBT), एनसीपी (SCP) और बीजेडी जैसे कई राजनीतिक दलों ने एक ही EPIC नंबर वाले मतदाताओं के मुद्दे को उठाया है। आयोग ने स्वीकार किया है कि कुछ राज्यों में खराब अल्फान्यूमेरिक सीरीज के कारण गलती से एक हीनंबर दोबारा जारी कर दिया गया था, लेकिन इसे फर्जीवाड़ा नहीं माना जा सकता। जिला स्तर पर बैठकेंनिर्वाचन आयोग ने 800 से अधिक जिलों में जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्थानीय राजनीतिक दलों के साथ मिलकर 5,000 से अधिक बैठकों का आयोजन करें। इन बैठकों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं को 31 मार्च तक आयोग को प्रस्तुत किया जाएगा। आधार और वोटर आईडी लिंकिंग पर पुनर्विचार2023 में सुप्रीम कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका (PIL) के जवाब में आयोग ने स्पष्ट किया था कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आधारनंबर अनिवार्य नहीं है। हालांकि, अब आयोग विभिन्न हितधारकों के साथ चर्चा कर इस पर कानूनी और तकनीकी समाधान निकालने की दिशा में कामकर रहा है। संभावना है कि आधार और पैन की तरह ही आधार और वोटर आईडी को लिंक करने का प्रावधान लागू किया जा सकता है।

तेज प्रताप यादव के सुरक्षाकर्मी का वर्दी में डांस, पुलिस ने हटाया ड्यूटी से बिना हेलमेट स्कूटी चलाने पर 4000 का चालान

पटना में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेज प्रताप यादव के सुरक्षाकर्मी द्वारा वर्दी में डांस करने का मामला तूल पकड़ चुका है। इस घटना के वीडियोके वायरल होने के बाद पटना पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया है। वर्दी में ठुमके लगाने वाले कांस्टेबल दीपक कुमार को सुरक्षा ड्यूटी से हटा दिया गयाहै और उन्हें लाइन हाजिर कर दिया गया है। डांस का वीडियो हुआ वायरलसोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में देखा गया कि तेज प्रताप यादव मंच से कांस्टेबल दीपक कुमार का नाम लेकर उन्हें डांस करने के लिए कहतेहैं। तेज प्रताप मजाकिया लहजे में कहते हैं, “डांस नहीं करोगे तो सस्पेंड कर दिए जाओगे, बुरा ना मानो होली है।” वीडियो के सार्वजनिक होते हीपुलिस विभाग हरकत में आ गया और कांस्टेबल को तुरंत ड्यूटी से हटा दिया गया। पुलिस की सख्ती: तेज प्रताप का चालान कटातेज प्रताप यादव के खिलाफ भी कार्रवाई हुई है। जिस स्कूटी से वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पहुंचे थे, उसका चालान काट दिया गया है।चालान की कुल राशि 4,000 रुपये है। चालान के पीछे की वजहपटना ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, तेज प्रताप यादव द्वारा चलाई गई स्कूटी का न तो बीमा था और न ही प्रदूषण प्रमाण पत्र। इसके अलावा, उन्होंनेहेलमेट भी नहीं पहना था। ट्रैफिक पुलिस एसएचओ ब्रजेश कुमार चौहान ने बताया कि सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद यह कार्रवाईकी गई। स्कूटी मोहम्मद कमरुद होदा के नाम पर रजिस्टर्ड पाई गई। होली के दिन हुआ था विवाद15 मार्च को होली के मौके पर तेज प्रताप यादव ने अपने सरकारी आवास पर होली मिलन समारोह आयोजित किया था। समारोह के बाद उन्होंनेस्कूटी से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास का रुख किया और वहां पहुंचकर नीतीश कुमार को “पलटू चाचा” कहकर संबोधित किया। कानून से ऊपर कोई नहींइस पूरे मामले में पटना पुलिस ने साफ संदेश दिया है कि चाहे कोई भी हो, कानून का पालन करना अनिवार्य है। तेज प्रताप यादव और उनकेसुरक्षाकर्मी दोनों के खिलाफ कार्रवाई करके पुलिस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डी की कड़ी चेतावनी, फेक न्यूज फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई, पत्रकारिता की आड़ में अपमान बर्दाश्त नहीं

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने हाल ही में विधानसभा में एक तीखा बयान दिया है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्रीपोस्ट करने वालों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें सार्वजनिक रूप से शर्मसार कियाजाएगा। आलोचना स्वीकार, लेकिन परिवार पर हमला अस्वीकार्यमुख्यमंत्री रेड्डी ने स्पष्ट किया कि आलोचना का स्वागत है, लेकिन परिवार के सदस्यों को निशाना बनाना पूरी तरह अनुचित है। हाल ही में दो महिलापत्रकारों की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उनके और उनके परिवार के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां की जा रही हैं।उन्होंने सवाल उठाया कि सार्वजनिक जीवन में होने के बावजूद उनके परिवारों को क्यों निशाना बनाया जा रहा है। पत्रकारिता की आड़ में अपमानजनक सामग्री पर रोकमुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पत्रकारिता के नाम पर अपमानजनक सामग्री फैलाने की प्रवृत्ति को रोकना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब तकइस तरह के कृत्यों पर लगाम नहीं लगाई जाएगी, वे चुप नहीं बैठेंगे। सख्त लहजे में चेतावनी: “लाखों लोग सड़कों पर उतर आएंगे”विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री रेड्डी ने कड़े शब्दों में कहा कि अगर कोई सोचता है कि वे मुख्यमंत्री होने के कारण चुप रहेंगे, तो यह गलतफहमी है।उन्होंने चेतावनी दी कि उनके कहने पर लाखों लोग सड़कों पर उतर आएंगे और ऐसे लोगों को सबक सिखाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कियाकि वे कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई करेंगे। फर्जी पत्रकारों की पहचान के लिए लिस्ट बनाने का आदेशमुख्यमंत्री रेड्डी ने आईटी मंत्री डी. श्रीधर बाबू और सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी को मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची तैयार करनेका निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग इस सूची में शामिल नहीं होंगे, उन्हें पत्रकार नहीं बल्कि अपराधी माना जाएगा और उनके खिलाफ कड़ीकार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया पर फेक न्यूज फैलाने वालों पर सख्त रुखमुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर झूठी खबरें फैलाने वालों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि नकाब पहनकर झूठी जानकारी फैलाने वालों कापर्दाफाश किया जाएगा। यूट्यूब चैनल शुरू कर लेने मात्र से कोई पत्रकार नहीं बन सकता।वित्तीय संकट पर भी जताई चिंताविधानसभा में मुख्यमंत्री रेड्डी ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार को हर महीने कर्मचारियों को वेतन देने मेंकठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों की डीए (महंगाई भत्ता) मांग को न्यायोचित मानते हुए उन्होंने कर्मचारियों से राज्य की मौजूदाआर्थिक स्थिति को देखते हुए अधिक दबाव न बनाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के इन बयानों से स्पष्ट है कि वे फेक न्यूज और पत्रकारिता की आड़ में हो रहे दुरुपयोग के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के लिएप्रतिबद्ध हैं। साथ ही उन्होंने राज्य की वित्तीय चुनौतियों को भी गंभीरता से लिया है।