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अखिलेश यादव की योगी सरकार से महाकुंभ में वाहनों को टोल मुक्त करने की मांग

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ मेला धूमधाम से जारी है, और लाखों श्रद्धालु विभिन्न मार्गों से यहां पहुंच रहे हैं। इस दौरान समाजवादी पार्टी केराष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने योगी सरकार से एक अहम मांग की है। उन्होंने महाकुंभ के दौरान यात्रा में हो रहीपरेशानियों को लेकर राज्य में वाहनों को टोल मुक्त करने की सिफारिश की है। जाम से राहत की उम्मीद: अखिलेश यादव ने रविवार को एक पोस्ट के जरिए सरकार से यह आग्रह किया कि महाकुंभ के मौके पर राज्य में वाहनों कोटोल मुक्त कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि इससे न केवल यात्रा में आसानी होगी, बल्कि जाम की समस्या भी कम हो जाएगी। इसके अलावा, अखिलेश यादव ने टोल शुल्क हटाने को लेकर एक तार्किक सवाल उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “महाकुंभ के अवसरपर उत्तर प्रदेश में वाहनों को टोल मुक्त किया जाना चाहिए, ताकि यात्रा में कोई रुकावट न आए और जाम की समस्या हल हो सके।” टैक्स फ्री फिल्में और टोल मुक्त वाहन: अखिलेश यादव ने योगी सरकार से सवाल करते हुए कहा, “जब फिल्मों को मनोरंजन टैक्स मुक्त किया जासकता है, तो महाकुंभ के दौरान वाहनों को कर मुक्त क्यों नहीं किया जा सकता?” उन्होंने कहा कि यह कदम श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उठायाजाना चाहिए, खासकर जब लोग धार्मिक यात्रा पर आ रहे हैं। सड़क हादसों का खतरा: अखिलेश ने यह भी बताया कि महाकुंभ के दौरान प्रयागराज जाने वाली सड़कों पर लंबा जाम लग रहा है, जिससे श्रद्धालुसड़क पर चलने पर मजबूर हो रहे हैं। वह सड़क किनारे बैठकर आराम भी कर रहे हैं, जिससे गंभीर हादसों का खतरा बढ़ सकता है। इस स्थिति कोध्यान में रखते हुए उन्होंने सरकार से तत्काल कदम उठाने की अपील की है।

तब क्यों चुप रहे?” अन्ना हजारे के बयान पर संजय राउत ने उठाए सवाल, कहा- ‘केजरीवाल की हार पर खुश हैं हजारे

दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के बयान ने राजनीति में नया घमासान खड़ा कर दिया है। उनकेइस बयान पर शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने तीखा सवाल उठाया है। राउत ने आरोप लगाया कि अन्ना हजारेदिल्ली चुनाव में अरविंद केजरीवाल की हार से खुश हैं, और उन्होंने यह सवाल भी किया कि जब केंद्र सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप सामनेआए थे, तब हजारे चुप क्यों रहे? संजय राउत ने क्या कहा?संजय राउत ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “जब मोदी सरकार में भ्रष्टाचार हुआ, तब अन्ना हजारे कहां थे? केजरीवाल की हार पर वह खुश हैं, लेकिन जब देश का खजाना लूटा जा रहा था और एक ही उद्योगपति के हाथों में सारा धन जा रहा था, तो अन्ना हजारे चुप क्यों थे?” उन्होंने यह भीसवाल किया कि इस चुप्पी के पीछे क्या कारण हो सकता है। दिल्ली और महाराष्ट्र में मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोपइसके बाद संजय राउत ने दिल्ली और महाराष्ट्र में मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाया। उनका कहना था कि हजारे ने इस मुद्दे पर भी चुप्पीसाधी हुई है, जबकि हरियाणा में भी ऐसी शिकायतें आई थीं। उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले बिहार चुनावों में भी इस तरह की समस्याएं सामनेआ सकती हैं। चुनावों में जोड़–तोड़ और धनबल का आरोपराउत ने 2014 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा, “चुनावों में संवैधानिक प्रक्रियाओं कापालन नहीं किया जा रहा है। जीती हुई सीटें जोड़-तोड़ और धनबल से हासिल की जा रही हैं।” उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुएकहा कि बीजेपी ने 70 सदस्यीय विधानसभा में 48 सीटें जीतकर आम आदमी पार्टी की सरकार को खत्म किया, और इसके पीछे जोड़-तोड़ औरधनबल का हाथ था।

टीम केजरीवाल की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, भाजपा सरकार भ्रष्टाचार मामलों की जांच के लिए एसआईटी का गठन करेगी

दिल्ली में 10 वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद अब टीम केजरीवाल के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दिल्ली में 27 साल बाद सत्ता में वापसी करने वालीभारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) ने अपनी नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्णय लिया है। भा.ज.पा. दिल्ली इकाई के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ “कतई बर्दाश्त नहीं” कीनीति अपनाती है और घोटाले में शामिल लोगों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।कैबिनेट की पहली बैठक में पेश होगी कैग रिपोर्ट:सचदेवा ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार कहा है, और हमने भी कहा है कि कैबिनेट की पहली बैठक में कैग (कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) की रिपोर्ट पेश की जाएगी। हम भ्रष्टाचार के सभी मामलों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का भी गठन करेंगे।” उन्होंने दिल्लीविधानसभा चुनाव में भा.ज.पा. की जीत पर प्रधानमंत्री मोदी और पार्टी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा को श्रेय देते हुए कहा कि दिल्ली के मतदाताओं ने विकासके लिए भा.ज.पा. का समर्थन किया और मोदी के नेतृत्व में विश्वास व्यक्त किया। कांग्रेस की हार पर सचदेवा का बयान:कांग्रेस की लगातार तीसरी बार हार पर सचदेवा ने कहा कि यह ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण पार्टी के लिए एक बुरी स्थिति है और उन्हें कड़ी मेहनतकरनी चाहिए। दिल्ली में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के बारे में सचदेवा ने कहा कि पार्टी एक व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाती है और इस निर्णय कोकेंद्रीय नेतृत्व पर छोड़ देती है, जैसा कि अन्य राज्यों में देखा गया है।

भा.ज.पा. नेताओं ने एलजी से मुलाकात के लिए मांगा समय, दिल्ली में सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे

दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे शनिवार को सामने आए, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 70 विधानसभासीटों में से 48 सीटों पर जीत हासिल की। यह जीत भा.ज.पा. के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है और इसके बाद पार्टी के नेताओं नेउपराज्यपाल से मुलाकात के लिए समय मांगा है। पार्टी के नेता जल्द ही एलजी से मुलाकात कर दिल्ली में सरकार बनाने का अपना दावा पेश करेंगे।इस जीत के बाद देशभर में भा.ज.पा. कार्यकर्ता खुशी के जश्न में डूबे हुए हैं। आतिशी का इस्तीफा: दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। हार के बाद, आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी ने दिल्लीके मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आज सुबह 11 बजे अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपा। इस्तीफा देने के बाद, आतिशी राजनिवासपहुंचीं और वहां अपना इस्तीफा एलजी को सौंपा। वहीं, अरविंद केजरीवाल ने अपने सभी 22 जीते हुए विधायकों को चाय पर बुलाया और 4:30 बजे बैठक आयोजित की, जिसमें 19 विधायक अरविंद केजरीवाल के आवास पर पहुंच चुके हैं। दिल्ली का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? दिल्ली विधानसभा चुनाव में भा.ज.पा. की ऐतिहासिक जीत के बाद, पार्टी नेतृत्व मुख्यमंत्री के चेहरे परविचार कर रहा है। जल्द ही विधायक दल की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें मुख्यमंत्री के उम्मीदवार का चयन किया जाएगा। फिलहाल, जिन नामोंकी चर्चा मुख्यमंत्री पद के लिए हो रही है, उनमें प्रवेश वर्मा का नाम प्रमुख है, क्योंकि उन्होंने नई दिल्ली सीट से अरविंद केजरीवाल को हराया है।इसके अलावा, अगर पार्टी किसी सिख चेहरे को आगे करती है, तो मनजिंदर सिंह सिरसा का नाम भी सामने आ रहा है। वहीं, वीरेन्द्र सचदेवा का नामभी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल है।

बिहार कांग्रेस का मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, प्रवासी भारतीयों के अमानवीय व्यवहार पर पुतला दहन

बिहार कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। यहविरोध अमेरिका में प्रवासी भारतीयों के साथ किए गए अमानवीय व्यवहार के विरोध में था, जहां उन्हें जबरन मालवाहक विमानों में बेड़ियों में जकड़करभारत वापस भेजा गया। इनकम टैक्स चौराहे पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पुतलादहन किया गया। विरोध प्रदर्शन के दौरान डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि देश की कमजोर नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के प्रमुख नरेंद्र मोदी अमेरिका से भारत भेजेगए अप्रवासी भारतीयों के अमानवीय तरीके से वतन वापसी के मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर की आलोचना करते हुएकहा कि विदेश मंत्री जब मुखर होकर बयानबाजी करते हैं, तब भी उन्होंने इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यह स्थिति दर्शाती है कि केंद्रकी भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने भारतीयों का सम्मान अमेरिकी सरकार के सामने गिरवी रख दिया है। डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह ने यह भी कहा कि हमारे प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स में व्यस्त रहते हैं, लेकिन भारत के नागरिकों केसम्मान के लिए वे कोई ठोस कदम नहीं उठाते। उन्होंने कहा, “नमस्ते ट्रंप और हाउडी मोदी जैसे इवेंट्स में करोड़ों रुपए खर्च करने वाली सरकार अपनेनागरिकों के लिए एक भी यात्री विमान नहीं उपलब्ध करा सकी।” कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा कि विदेश मंत्री का बयान कि यह अमेरिकी नीति है, साफ तौर पर यह दर्शाता है कि भारत की सरकार वैश्विक मंच परअपनी स्थिति को मजबूत करने के बजाय केवल इवेंट्स के जरिए अपनी छवि बनाने में लगी है। विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन कार्यक्रम में डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह के अलावा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा, प्रो. राम जतन सिन्हा औरसैंकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया है, और बिहार के विभिन्न जिलों में भी इस मुद्देपर विरोध किए गए हैं।

दिग्विजय सिंह ने पत्रकार वार्ता में की भाजपा और संघ के खिलाफ तीखी टिप्पणी, कहा- कांग्रेस विचारधारा की लड़ाई लड़ी है

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने रीवा में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(RSS) पर जोरदार हमला किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा विचारधारा की लड़ाई लड़ी है और संघीय विचारधारा के साथ कभी समझौतानहीं किया। दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि आगामी बिहार चुनाव में कांग्रेस, आरजेडी और लेफ्ट मिलकर विचारधारा की लड़ाई लड़ेंगे। पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, “जब अरविंद केजरीवाल इंडिया अगेंस्ट करप्शन का अभियान चला रहे थे और अन्ना हजारे को उनका मुखौटाबनाया गया था, तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उनका समर्थन कर रहा था। मैंने उस समय कहा था कि यह केवल एक मुखौटा है, ये भ्रष्टाचार मिटाने नहींआए हैं, बल्कि उनका उद्देश्य गरीबों का कांग्रेस के पक्ष में वोट बिगाड़ना है। और वही सही साबित हुआ।” उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर भी कटाक्ष करते हुए कहा, “दिल्ली के चुनाव में मोदी ने आरोप लगाया कि केजरीवाल ने शीशमहल बनाया है, लेकिनकेजरीवाल ने जवाब दिया कि मोदी जी ने राजमहल बनाया है। कांग्रेस ने कभी राजमहल या शीशमहल नहीं बनाया, हम गरीबों, मजदूरों और छोटेव्यापारियों के लिए योजनाएं लेकर आए और जनता के पैसे का दुरुपयोग नहीं किया।” इसके बाद दिग्विजय सिंह ने चुनाव आयोग पर भी निशाना साधते हुए कहा, “चुनाव आयोग भाजपा का एजेंट बनकर काम कर रहा है। भाजपा कीसरकार का प्रचार इस तरह किया जा रहा है जैसे वह जनता के पैसे से राजमहल और शीशमहल बना रहे हों।” उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बारे में टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, “कुंभ मेले की व्यवस्था के बारे में मुख्यमंत्री ने दावा किया था किउन्होंने 100 करोड़ लोगों के लिए व्यवस्था की। लेकिन यह दावा सिर्फ प्रचार का हिस्सा था। असल में लोगों के जाने के लिए परिवहन की व्यवस्थापूरी तरह से नाकाम रही, जिसके कारण वीआईपी कल्चर का प्रकोप भी देखने को मिला। और जो भगदड़ मची, उसमें कितने लोगों की मौत हुई, इसपर सरकार को जवाब देना चाहिए।” दिग्विजय सिंह ने इस अवसर पर कहा कि कांग्रेस पार्टी में कमजोरियां हो सकती हैं, लेकिन यह पार्टी हमेशा विचारधारा की लड़ाई लड़ती रही है।”हमने कभी संघीय विचारधारा के साथ समझौता नहीं किया,” उन्होंने कहा। बिहार के आगामी चुनावों के बारे में पूछे जाने पर, दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस, आरजेडी और लेफ्ट मिलकर चुनाव लड़ेंगे। “यह एक विचारधाराकी लड़ाई है,” उन्होंने कहा, और उन्होंने इस गठबंधन को मजबूत बताया। अंत में, उन्होंने शीला दीक्षित के कार्यकाल को दिल्ली का “स्वर्णिम युग” बताया और कहा कि अरविंद केजरीवाल ने भ्रष्टाचार के खिलाफ इंडियाअगेंस्ट करप्शन की मुहिम छेड़ी थी, लेकिन उनका परिवार और उनके मंत्रियों पर सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं।

दिल्ली की हार का असर पंजाब पर भी: विपक्ष ने मान सरकार को घेरा

दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी (AAP) की हार के बाद पंजाब में विपक्षी दलों ने मान सरकार पर हमला बोल दिया है। विपक्षीनेताओं का कहना है कि दिल्ली में मिली हार के बाद पंजाब में भी आम आदमी पार्टी का भविष्य संकट में है। विपक्ष का यह भी मानना है कि दिल्ली मेंभाजपा की शानदार वापसी ने पंजाब में भी आप के पतन की शुरुआत कर दी है। AAP को लगा दोहरा झटकादिल्ली में भाजपा ने आम आदमी पार्टी (AAP) को करारी शिकस्त दी, जिससे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। यह पार्टी केलिए दूसरा बड़ा झटका है, क्योंकि इससे पहले लोकसभा चुनाव में पंजाब में AAP को भारी नुकसान हुआ था। लोकसभा चुनावों में पंजाब में AAP केवल 3 सीटें जीत सकी थी, जबकि उसने 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में 92 सीटें जीती थीं। विपक्ष ने किया वादों के खिलाफ आरोपविपक्षी दलों ने शनिवार को मान सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि दिल्ली में AAP को मिली हार ने इस पार्टी के झूठ और धोखेबाजी कोउजागर कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा, “अब पंजाब में AAP में अंदरूनी सत्ता संघर्ष होगा।” उन्होंने यह भी आरोपलगाया कि दिल्ली में हार के बाद भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल के बीच मतभेद गहरे हो सकते हैं। कांग्रेस और भाजपा का हमलाकांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने कहा कि दिल्ली की हार “नकली क्रांतिकारियों की हार” है, जो अपने वादों से मुकर गए थे। वहीं भाजपा ने भीAAP के विकास मॉडल को पूरी तरह खारिज कर दिया है। भाजपा के पंजाब इकाई के महासचिव सुभाष शर्मा ने कहा, “यह अरविंद केजरीवाल केझूठ और धोखेबाजी की हार है।” भाजपा के उपाध्यक्ष अरविंद खन्ना ने कहा कि दिल्ली की जनता ने AAP के तथाकथित विकास मॉडल को नकारदिया है। रवनीत बिट्टू का बयानकेंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने भी इस हार पर प्रतिक्रिया दी और कहा, “दिल्ली में इतिहास फिर से लिखा गया है। 27 साल बाद भाजपा को शानदारजनादेश मिला है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी के ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण को स्वीकार किया गया है।”

CM नीतीश ने दिल्ली में जीत पर BJP को दी बधाई, पीएम मोदी के नेतृत्व को सराहा

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) की शानदार जीत के बाद, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा कोबधाई दी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए दिल्ली की जनता के विश्वास को सलाम किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर नीतीश कुमार ने लिखा, “दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की भारी बहुमत से जीत पर बधाई एवं शुभकामनाएँ।दिल्ली की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व पर अपना पूर्ण विश्वास व्यक्त किया है। इस ऐतिहासिक जीत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी जी को बहुत-बहुत बधाई।” दिल्ली में भाजपा का शानदार प्रदर्शनदिल्ली विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 70 में से 48 सीटों पर जीत हासिल करके एक ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इसके साथ ही आमआदमी पार्टी (AAP) की 10 साल से चली आ रही सत्ता का अंत हो गया है, और वह केवल 22 सीटों तक सिमट कर रह गई। वहीं, कांग्रेस पार्टी कोइस चुनाव में लगातार तीसरी बार कोई सीट हासिल नहीं हुई। भाजपा ने न केवल अपनी परंपरागत ताकत दिखाई, बल्कि आम आदमी पार्टी के बड़ेनेताओं को भी हराया। भा.ज.पा. के सहयोगी दलों को मिली हारभा.ज.पा. के सहयोगी दलों, जैसे कि जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और लोक जनशक्ति पार्टी-रामविलास (लोजपा-आरवी) को दिल्ली विधानसभाचुनाव में हार का सामना करना पड़ा। जदयू के उम्मीदवार शैलेन्द्र कुमार को बुराड़ी सीट से आम आदमी पार्टी के मौजूदा विधायक संजीव झा ने20,601 वोटों के अंतर से हराया। वहीं, लोजपा-आरवी के दीपक तंवर को देवली सीट पर आम आदमी पार्टी के प्रेम चौहान ने 36,680 वोटों केअंतर से हराया।

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025: मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और सौरभ भारद्वाज को किन नेताओं ने हराया?

दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे 8 फरवरी को घोषित किए गए, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 48 सीटों के साथ 27 साल बाद दिल्लीमें सत्ता में वापसी की। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) को इस बार बड़ा झटका लगा और वह केवल 22 सीटों पर सिमट गई। इस चुनाव में AAP के प्रमुख और कई वरिष्ठ नेता हार का सामना करने के बावजूद, भाजपा के उम्मीदवारों ने उन्हें कड़ी टक्कर दी। आइए जानते हैं कि बीजेपी के किनउम्मीदवारों ने AAP के प्रमुख नेताओं को हराया। AAP के दिग्गज नेताओं को मिली हारअरविंद केजरीवालसीट: नयी दिल्लीहारने वाले उम्मीदवार: भाजपा के प्रवेश वर्मामतों का अंतर: 4,089 वोटों से हार मनीष सिसोदियासीट: जंगपुराहारने वाले उम्मीदवार: भाजपा के तरविंदर सिंह मारवाहमतों का अंतर: 675 वोटों से हार सौरभ भारद्वाजसीट: ग्रेटर कैलाशहारने वाले उम्मीदवार: भाजपा की शिखा रॉयमतों का अंतर: 3,188 वोटों से हार सत्येंद्र जैनसीट: शकुर बस्तीहारने वाले उम्मीदवार: भाजपा के करनैल सिंहमतों का अंतर: 20,998 वोटों से हार सोमनाथ भारतीसीट: मालवीय नगरहारने वाले उम्मीदवार: भाजपा के सतीश उपाध्यायमतों का अंतर: 2,131 वोटों से हार दुर्गेश पाठकसीट: राजिंदर नगरहारने वाले उम्मीदवार: भाजपा के उमंग बजाजमतों का अंतर: 1,231 वोटों से हारAAP के इन मंत्रियों ने हासिल की जीतबीजेपी के सामने इस बार AAP के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने जीत भी हासिल की, जिनमें से प्रमुख मंत्री और प्रमुख चेहरों ने अपनी सीट बरकरार रखी: गोपाल रायसीट: बाबरपुरहारने वाले उम्मीदवार: भाजपा के अनिल कुमार वशिष्ठमतों का अंतर: 18,994 वोटों से जीत मुकेश अहलावतसीट: सुल्तानपुर माजराहारने वाले उम्मीदवार: भाजपा के करम सिंह कर्मामतों का अंतर: 17,126 वोटों से जीत इमरान हुसैनसीट: बल्लीमारानहारने वाले उम्मीदवार: भाजपा के कमल बागड़ीमतों का अंतर: 29,823 वोटों से जीत आतिशीसीट: कालकाजीहारने वाले उम्मीदवार: भाजपा के रमेश बिधूड़ीमतों का अंतर: 3,521 वोटों से जीत

मिल्कीपुर उपचुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत, चंद्रभानु ने सपा को 61,639 मतों से हराया

मिल्कीपुर उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रत्याशी अजीत प्रसाद को 61,639 मतों से हराकर एक बड़ीजीत दर्ज की है। यह जीत न केवल बीजेपी के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि सपा को भी एक बड़ा झटका देती है, खासकर उन परिणामों के बादजब सपा के अवधेश प्रसाद ने लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लल्लू सिंह को हराकर अयोध्या की सीट को सपा के पक्ष में किया था। लोकसभा चुनाव में सपा की जीत का जवाब दियाचार जून 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के अवधेश प्रसाद ने अयोध्या की सीट से बीजेपी के लल्लू सिंह को 54,567 मतों से हराया था। यहपरिणाम न केवल बीजेपी के लिए एक बड़ा झटका था, बल्कि पूरे देश में हलचल मचा दी थी। सपा और विपक्ष ने इसे सेकुलरिज्म की जीत के रूप मेंप्रचारित किया, और इसके बाद कई जगहों पर चर्चा होने लगी कि मथुरा और काशी से अधिक महत्वपूर्ण यह जीत थी। लेकिन मिल्कीपुर उपचुनाव मेंबीजेपी ने अपनी ताकत दिखाई और सपा के दावे को नकारते हुए इस सीट पर बड़ी जीत हासिल की। बीजेपी की रणनीति ने किया रंग, चंद्रभानु की धमाकेदार जीतमिल्कीपुर उपचुनाव में बीजेपी ने अपनी रणनीति को पूरी तरह से बदलते हुए लोकसभा चुनाव के अनुभव से सीख लिया। पहले के चुनाव में सपा केमुकाबले हारने के बाद बीजेपी ने स्थानीय कार्यकर्ताओं के फीडबैक पर ध्यान केंद्रित किया और एक ऐसे प्रत्याशी को मैदान में उतारा, जो पार्टी केलिए मजबूत स्थिति बना सके। चंद्रभानु पासवान को बीजेपी ने अपना उम्मीदवार बनाया और उन्होंने सपा के प्रत्याशी अजीत प्रसाद को भारी मतों सेहराया, और पार्टी की हार का बदला ले लिया। सपा की कई गलतियां बनीं हार का कारणसपा के खिलाफ इस जीत का एक महत्वपूर्ण कारण पार्टी की अंदरूनी गलतियां रही। पार्टी द्वारा उम्मीदवार के चयन में की गई गलतियां और अतिउत्साह ने बीजेपी के लिए जीत की राह आसान कर दी। बीजेपी ने लोकसभा चुनाव से सबक लेते हुए अपने प्रचार और रणनीति को सुधारा और इसेमैदान में उतारा। निष्कर्ष: बीजेपी की मजबूत वापसीमिल्कीपुर उपचुनाव में बीजेपी की यह जीत न केवल सपा के लिए एक बड़ा संदेश है, बल्कि बीजेपी के लिए आत्मविश्वास और मजबूती का प्रतीकबनकर उभरी है। इस जीत ने यह साबित कर दिया कि सपा की लोकसभा चुनाव में मिली जीत महज एक संयोग थी, और अब बीजेपी ने पूरी तरह सेहिसाब बराबर कर लिया है।