काशी में 19 साल के युवा ने हजारों मंत्रों का कंठस्थ पाठ कर सबको चौंकाया, प्रधानमंत्री मोदी और योगी आदित्यनाथ भी हुए देवव्रत की उपलब्धि के मुरीद

बिना किसी किताब को देखे, बिना रुके, लगातार 50 दिनों तक हजारों कठिन संस्कृत मंत्रों का शुद्ध उच्चारण करना आज के दौरान में किसी के लिएअसंभव सा लगता है, पर इसे 19 वर्ष के एक युवक ने इसे सच कर दिखाया। महाराष्ट्र के एक 19 वर्षीय युवा देवव्रत महेश रेखे ने वह कर दिखाया हैजो पिछले 200 वर्षों में किसी ने नहीं किया। उनकी इस कठिन ‘साधना’ ने न केवल काशी के विद्वानों को चौंका दिया, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीऔर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी उनका मुरीद बना दिया। देवव्रत महेश रेखे मूल रूप से महाराष्ट्र के अहिल्या नगर के रहने वाले हैं। महज 19 वर्ष की आयु में उन्होंने वेदों के प्रति वह समर्पण दिखाया है जो बड़े-बड़े विद्वानों के लिए भी दुर्लभ है। देवव्रत वर्तमान में वाराणसी (काशी) के रामघाटस्थित वल्लभराम शालिग्राम सांगवेद विद्यालय के छात्र हैं। देवव्रत एक वैदिक परिवार से आते हैं। उनके पिता वेदब्रह्मश्री महेश चंद्रकांत रेखे स्वयं एकप्रतिष्ठित वैदिक विद्वान हैं और उन्होंने ही देवव्रत को इस कठिन मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित किया है। पांडुरंग पुराणिक ने बताया किदेवव्रत ने जिस उपलब्धि को हासिल किया है, उसे वैदिक शब्दावली में ‘दंडकर्म पारायण’ कहा जाता है। यह वेदों के पाठ की सबसे जटिल विधियों मेंसे एक है। यह पाठ शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिन शाखा से संबंधित है। इसमें करीब 2,000 मंत्र शामिल हैं। इसके पाठ के नियम भी कठिन हैं।देवव्रत को बिना किसी ग्रंथ को देखे (कंठस्थ), पूरी शुद्धता और लय के साथ इन मंत्रों का उच्चारण करना था, और उन्होंने इसे कर दिखाया। यहअनुष्ठान लगातार 50 दिनों तक चला। उन्होंने 2 अक्तूबर से 30 नवंबर तक बिना किसी बाधा के इस उपलब्धि हो हासिल किया। 30 नवंबर कोदंडक्रम पारायण की पूर्णाहुति के बाद उन्हें शृंगेरी शंकराचार्य ने सम्मान स्वरूप सोने का कंगन और 1,01,116 रुपये दिया गया। दंडक्रम पारायणकर्ताअभिनंदन समिति के पदाधिकारियों चल्ला अन्नपूर्णा प्रसाद, चल्ला सुब्बाराव, अनिल किंजवडेकर, चंद्रशेखर द्रविड़ घनपाठी, प्रो. माधव जर्नादन रटाटेव पांडुरंग पुराणिक ने बताया कि नित्य साढ़े तीन से चार घंटे पाठ कर देवव्रत ने इसे पूरा किया। ये सफलता हमारी आने वाली पीढ़ियों की प्रेरणा बनने वादेवव्रत की उपलब्धि का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका इतिहास है। ऐसा माना जाता है कि ‘दंडकर्म पारायण’ का यह कठिन स्वरूप पिछले 200 वर्षोंमें किसी ने पूर्ण नहीं किया था। इससे पहले, लगभग दो सदी पूर्व नासिक के वेदमूर्ति नारायण शास्त्री देव ने यह उपलब्धि हासिल की थी। आज केडिजिटल दौर में, जब याददाश्त पर तकनीक हावी है, एक 19 साल के युवा द्वारा हजारों मंत्रों को कंठस्थ करना और उन्हें त्रुटिहीन सुनाना एक चमत्कारजैसा है। देवव्रत की इस सिद्धि ने देश के शीर्ष नेतृत्व का ध्यान अपनी ओर खींचा।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर देवव्रत की प्रशंसा करते हुए लिखा, “19 वर्ष के देवव्रत महेश रेखे जी ने जो उपलब्धिहासिल की है, वो जानकर मन प्रफुल्लित हो गया है। उनकी ये सफलता हमारी आने वाली पीढ़ियों की प्रेरणा बनने वाली है… काशी से सांसद होने केनाते मैं विशेष रूप से आनंदित हूं।”
रूस-अमेरिका की 5 घंटे की बैठक में ट्रंप की यूक्रेन योजना पर विवाद जारी, यूक्रेन संघर्ष पर अमेरिका और रूस के बीच चर्चाएं बेनतीजा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका की ओर से विशेष प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ के बीच बुधवार को हुई बैठक में ट्रंप की ‘यूक्रेन योजना’ पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं हो सका। रूसी राष्ट्रपति के सहायक यूरी उशाकोव ने बताया कि बातचीत लगभग पांच घंटे चली, जिसमेंअमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर भी शामिल थे। रूसी मीडिया समूह- रशिया टुडे (आरटी) के मुताबिक, उशाकोव ने कहा किअमेरिकी प्रस्तावों में कुछ बिंदु रूस को स्वीकार करने लायक लगे, हालांकि कई पक्ष ऐसे थे जो क्रेमलिन के हितों के तहत नहीं थे। उन्होंने कहा, “अबतक कोई समझौता नहीं हुआ है। कुछ अमेरिकी प्रस्ताव रूस को स्वीकार्य हैं, लेकिन कुछ नहीं। हमने मुद्दों के सार पर बात की, न कि विशेष शब्दों यासमाधान पर। दोनों पक्ष सहयोग की बड़ी संभावनाएं देखते हैं।” उशाकोव ने यह भी पुष्टि की कि बैठक में क्षेत्रीय मुद्दे पर भी चर्चा हुई। यह पूछे जानेपर कि क्या इन बातचीत से शांति करीब आई है, उन्होंने कहा, “निश्चित रूप से दूर नहीं हुई है।” दूसरी तरफ क्रेमलिन के अफसर किरिल दिमित्रिएव नेबैठक को उत्पादक बताया। ट्रंप द्वारा सुझाए गए शांति प्रयासों में अड़चन पैदा कर रहेरिपोर्ट के मुताबिक, वॉशिंगटन ने 28 बिंदुओं वाला एक संशोधित शांति प्रस्ताव साझा किया है, जिसे कीव और यूरोपीय देशों की आपत्तियों के बादबदला गया था, क्योंकि शुरुआती मसौदे को मॉस्को की शर्तों के प्रति काफी नरम माना गया था। गौरतलब है कि चर्चा से कुछ घंटे पहले ही पुतिन नेएक निवेश मंच से अपने संबोधन के दौरान कहा था कि अगर यूरोपीय देश टकराव का रास्ता चुनते हैं, तो रूस सैन्य मुकाबले के लिए तैयार है। पुतिनने कहा हम यूरोप से युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अगर वे शुरू करेंगे, तो हम तैयार हैं। यूरोपीय नेता बातचीत को प्राथमिकता नहीं दे रहे। उन्होंने आरोपलगाया कि यूरोपीय देश अमेरिका और ट्रंप द्वारा सुझाए गए शांति प्रयासों में अड़चन पैदा कर रहे हैं। हालांकि कुछ पर आपत्ति भी जताई गईइधर, इसी समय यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदमिर जेलेंस्की आयरलैंड पहुंचे, जहां उन्होंने यूरोपीय नेताओं से समर्थन को मजबूत करने की कोशिश की।जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका और रूस की बातचीत के बाद मिलने वाले संकेत आगे की रणनीति तय करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन हर दिनजानें गंवा रहा है, इसलिए अब ठोस नतीजों की जरूरत है, केवल बातों से काम नहीं चलेगा। उधर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कीव कीराष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद प्रमुख रुस्तेम उमेरोव के साथ बैठक की। रुबियो ने चर्चा को उपयोगी लेकिन जटिल बताया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्डट्रंप ने कुछ समय पहले ही यूक्रेन में जारी संघर्ष को रोकने के लिए 28 बिंदुओं की एक योजना रखी थी। इसे लेकर यूक्रेन-यूरोप के अलावा रूस को भीमनाने की कोशिशें की जा रही हैं। प्रस्ताव के कई बिंदुओं पर दोनों पक्षों में सहमति है, हालांकि कुछ पर आपत्ति भी जताई गई है।
लोकदल अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने सरकार और FSSAI की लापरवाही पर जताई चिंता, मिलावटी कफ सिरप और खाद्य उत्पादों कोबताया राष्ट्रीय स्वास्थ्य खतरा

लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह जी ने सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों की लापरवाही को बेरहमी से कफसिरप के नशे कारोबार कोउजागर कर दिया है। दूषित कफ सिरप से लेकर घटिया और नकली दवाइयों तक, और मिलावटी खाद्य पदार्थों तक, पूरा बाजार ज़हर बेचने का अड्डाबन चुका है और सरकार इसे देख रही है, लेकिन कुछ कर नहीं रही। आज भी बच्चों की जान लेने वाले दूषित कफ सिरप खुलेआम बिक रहे हैं। बाजारनकली और कम गुणवत्ता वाली दवाइयों से भरा पड़ा है। मिलावटी खाद, जिसमें ज़हर और केमिकल मिलाए जाते हैं, सीधे कैंसर जैसे जानलेवा रोगोंका कारण बन रही है।यह पूरा मिलावट तंत्र हर परिवार के स्वास्थ्य पर सीधा हमला है। लोकदल अध्यक्ष ने FSSAI की भूमिका पर भी बड़ा सवालखड़ा किया है। देशभर में ज़हरीले उत्पाद बिक रहेकहा जाँच एजेंसियाँ सो रही हैं या किसी दबाव में हैं? जब देशभर में ज़हर बिक रहा है, तो FSSAI की कार्रवाई सिर्फ कागज़ों पर क्यों दिखती है? लोकदल अध्यक्ष ने कहा है कि अगर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में इसका विनाशकारी असर दिखेगा। लोकदल अध्यक्ष ने FSSAI की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जाँच एजेंसियाँ या तो सो रही हैं या किसी दबाव में हैं। उनका कहना था कि जब देशभर में ज़हरीलेउत्पाद बिक रहे हैं, तो FSSAI की कार्रवाई केवल कागज़ों तक सीमित क्यों है। चौधरी सुनील सिंह ने चेतावनी दी कि अगर तुरंत ठोस कार्रवाई नहींहुई, तो इस मिलावट तंत्र का विनाशकारी असर आने वाले समय में दिखाई देगा और यह हर परिवार की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन जाएगा।
राजनाथ सिंह के नेहरू-बाबरी बयान पर विपक्ष का हमला, “सबूत दो या माफी मांगो” विपक्ष बोला “इतिहास मत तोड़िए”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान को लेकर आज कई विपक्षी पार्टी के नेताओं ने कड़ी आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश के पहलेप्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू बाबरी मस्जिद को सरकारी पैसों से बनवाना चाहते थे। विपक्ष का आरोप है कि ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। राजनाथ सिंह ने मंगलवार को गुजरात के वडोदरा के पास ‘एकता मार्च’ के दौरान कहा था, ‘पंडित जवाहरलाल नेहरूबाबरी मस्जिद को सरकारी पैसे से बनवाना चाहते थे, लेकिन अगर किसी ने इसका विरोध किया तो वो सरदार वल्लभभाई पटेल थे।’ इस बयान परविपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, ‘ये सब असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए है। रोज नए मुद्देखड़े किए जाते हैं ताकि जनता की असली समस्याओं पर बात ही न हो।’ वहीं मनीष तिवारी ने कहा, ‘रक्षा मंत्री को इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने केबजाय देश की रणनीतिक चुनौतियों पर ध्यान देना चाहिए।’ इस तरह के बयान शोभा नहीं देतेइमरान मसूद ने कहा, ‘अगर ऐसा कोई तथ्य है तो उसे दस्तावेज के साथ रखें। सिर्फ बोल देने से कोई मान नहीं लेगा।’ उन्होंने कहा कि ‘एकऐतिहासिक दस्तावेज तो ऐसा भी है जिसमें सरदार पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई की थी, और सब कुछ नेहरू के नेतृत्व में हुआथा।’ तारिक अनवर ने कहा. ‘भाजपा की सरकार का काम ही पुरानी बातें और विवाद उठाना रह गया है। नेहरू अब नहीं हैं, इसलिए उन पर आरोपलगाना आसान है।’ वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि ‘रक्षा मंत्री इतने वरिष्ठ नेता हैं, उन्हें देश की सेना और सैनिकों से जुड़े मुद्दोंपर ध्यान देना चाहिए।’ टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा, ‘या तो राजनाथ सिंह सबूत पेश करें या माफी मांगकर इस्तीफा दें। इस तरह के बयानशोभा नहीं देते।’ शरद पवार गुट की सांसद फौजिया खान ने इस पर कहा कि, ‘मस्जिद के लिए पैसा ईमानदारी से जुटना चाहिए, सरकारी पैसे सेमस्जिद बनाने की बात ही गलत है।’ देश के तमाम विपक्षी सांसदों की तरफ से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान की कड़ी आलोचना की गई है।दरअसल, राजनाथ सिंह ने कहा था कि पूर्व पीएम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू बाबरी मस्जिद को सरकारी पैसों से बनवाना चाहते थे। इस परविपक्ष ने उनसे सबूत मांगा है।
संचार साथी ऐप पर केंद्र का बड़ा U-Turn, प्री-इंस्टॉल अनिवार्यता खत्म ऐप पर केंद्र–विपक्ष आमने-सामने

संचार साथी एप कर केंद्र सरकार का बड़ा बयान सामने आया है। सरकार ने फोन में इस एप के प्री-इंस्टॉलेशन को जरूरी नहीं बताया है। दूरसंचारमंत्रालय ने एक्स (X) पर एक पोस्ट जारी कर इस एप की प्री-इंस्टॉलेशन की अनिवार्यता को हटाने की जानकारी दी है। मंत्रालय ने एक्स पोस्ट मेंकहा, “सभी नागरिकों को साइबर सुरक्षा का लाभ देने के उद्देश्य से सरकार ने सभी स्मार्टफोन्स में संचार साथी एप को प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य कियाथा। यह एप पूरी तरह सुरक्षित है और इसका मकसद सिर्फ नागरिकों को साइबर दुनिया के अपराधियों से बचाना है… संचार साथी की बढ़तीलोकप्रियता को देखते हुए, सरकार ने मोबाइल निर्माताओं के लिए अनिवार्य प्री-इंस्टॉलेशन को हटाने का फैसला लिया है।” बता दें कि केंद्र सरकारके इस कदम को एपल के फैसले से भी जोड़कर देखा जा रहा है। 28 नवंबर को सरकार से आदेश मिलने के बाद स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी एपल(Apple) ने इसका पालन करने से इंकार कर दिया था। कंपनी ने कहा था कि यह कदम iPhone यूजर्स के निजी डेटा को खतरे में डाल सकता है।एपल ने रॉयटर्स के हवाले से कहा था कि कंपनी अपनी चिंताएं सरकार के सामने रखेगी। निजता और आजादी पर खुला हमलामंत्रायल के मुताबिक यह एप “जन भागीदारी” को बढ़ावा देता है, क्योंकि नागरिक किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की रिपोर्ट कर सकते हैं औरखुद को सुरक्षित रख सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस एप का कोई अन्य उद्देश्य नहीं है और यदि उपयोगकर्ता चाहें तो वे इसे कभी भीअनइंस्टॉल कर सकते हैं। बता दें कि स्मार्टफोन में एप के प्री-इंस्टॉलेशन को 90 दिनों के भीतर अनिवार्य बनाने के आदेश के बाद विपक्ष ने संसद मेंकड़ा विरोध दर्ज कराया था। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने दूरसंचार विभाग के निर्देश पर कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज कराते हुए इसे तानाशाही बताया।विपक्ष के कई नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार फ्रॉड को रोकने के नाम पर नागरिकों की जासूसी करना चाहती है। वहीं, आम आदमी पार्टी केराष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार का फोन में संचार सारथी एप इंस्टॉल करने का आदेश लोगों की निजता औरआजादी पर खुला हमला है। दर्शाता है कि लोग अपनी सुरक्षा के लिएहालांकि, विपक्ष के सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि ‘संचार साथी’ एपके जरिए जासूसी बिल्कुल भी संभव नहीं है। यह एप लोगों की सुरक्षा और मदद के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इस एप से लोगों कीगतिविधियों पर नजर रखने की सरकार की कोई मंशा नहीं है।सरकार द्वारा एक्स पर जारी बयान के मुताबिक, अब तक 1.4 करोड़ लोग यह एप डाउनलोड कर चुके हैं और रोजाना लगभग 2000 ऑनलाइन फ्रॉडमामलों की जानकारी भेज रहे हैं। बयान में कहा गया, “एप डाउनलोड करने वाले उपयोगकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। एप को अनिवार्य बनानेका उद्देश्य अधिक से अधिक जागरूकता फैलाना था, ताकि कम तकनीक-जानकार लोग भी इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकें। केवल पिछले एकदिन में ही 6 लाख लोगों ने एप डाउनलोड करने के लिए रजिस्ट्रेशन किया है, जो कि सामान्य से 10 गुना अधिक है। यह दर्शाता है कि लोग अपनीसुरक्षा के लिए इस ऐप पर भरोसा कर रहे हैं।”
भारत के साथ रिश्ते अटूट अमेरिकी दबाव बेअसर, रूस बोला तेल सप्लाई किसी भी कीमत पर नहीं रुकेगी

पश्चिम देशों के कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और अमेरिका की ओर से टैरिफ वॉर चलाने के बीच रूस ने भारत के साथ अपने संबंधों पर बयान दिया है। रूस नेसाफ किया है कि नई दिल्ली के साथ उसका रिश्ता किसी ‘तीसरे पक्ष’ के दबाव में खत्म नहीं होने वाला। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने एकअहम बयान में न केवल तेल व्यापार को सुरक्षित रखने का संकल्प लिया है, बल्कि भारत के लिए सिरदर्द बन चुके ‘व्यापार घाटे’ को सुलझाने कारोडमैप भी पेश किया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और यूरोपीय देश रूस की अर्थव्यवस्था को अलग-थलग करने के लिए हर संभवप्रयास कर रहे हैं। भुगतान तंत्र के जरिए यह प्रवाह जारी रहेगाक्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मॉस्को यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है कि अमेरिकी प्रतिबंधोंकी परछाई भारत के साथ होने वाले तेल व्यापार पर न पड़े। पेस्कोव ने कहा, “हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि व्यापार की मात्रा में, विशेषकर तेल के क्षेत्र में, कोई कमी न आए।” रूसी अधिकारी का यह बयाान भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछलेदो वर्षों में रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। पश्चिमी देशों ने ‘प्राइस कैप’ और टैंकरों पर प्रतिबंध लगाकर इस सप्लाईचेन को तोड़ने की कोशिश की है, लेकिन रूस का यह आश्वासन बताता है कि ‘शैडो फ्लीट’ और वैकल्पिक भुगतान तंत्र के जरिए यह प्रवाह जारीरहेगा। बाजार के दरवाजे और चौड़े कर सकतापेस्कोव ने कूटनीतिक रूप से अमेरिका का नाम लिए बिना साफ संदेश दिया कि दोनों देशों को अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए एक ‘सुरक्षाकवच’ तैयार करना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा, “भारत और रूस को अपने द्विपक्षीय व्यापार को बाहरी दबाव और तीसरे देशों के हस्तक्षेप से सुरक्षितरखना होगा।” विश्लेषकों का मानना है कि यह इशारा सीधे तौर पर स्विफ्ट (SWIFT) बैंकिंग सिस्टम से अलग, एक स्वतंत्र भुगतान प्रणाली (जैसेरुपये-रूबल व्यापार या डिजिटल करेंसी) को और मजबूत करने की ओर है। भारत-रूस संबंधों में वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती ‘एकतरफा व्यापार’ है।भारत रूस से तेल और हथियार तो खूब खरीद रहा है, लेकिन रूस को भारतीय निर्यात कम है, जिससे एक बड़ा व्यापार घाटा पैदा हो गया है और रूसके पास भारतीय रुपये का जमावड़ा लग गया है। पेस्कोव ने कहा, “रूस भारत की चिंताओं और व्यापार घाटे की समस्या से पूरी तरह अवगत है। हमभारत से आयात बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।” यह नई दिल्ली के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। इसका सीधा अर्थ है कि आने वालेदिनों में रूस भारतीय मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि उत्पादों और ऑटो कंपोनेंट्स के लिए अपने बाजार के दरवाजे और चौड़े कर सकता है।
संचार साथी एप अनिवार्य नहीं, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का बड़ा बयान, जासूसी विवाद पर लगी मुहर

दूरसंचार विभाग (DoT) के जरिए 28 नवंबर को जारी एक दिशा-निर्देश के अनुसार, अब हर एक स्मार्टफोन्स में ‘संचार साथी’ एप का प्री-इंस्टॉलेशनजरूरी होगा। यानी सभी मोबाइल कंपनियों को ये आश्वस्त करना होगा कि वे अपने स्मार्टफोन्स में ‘संचार साथी’ एप अनिवार्य रूप से रखें। कंपनियों कोइस नियम को लागू करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है। विपक्ष इसे ‘निगरानी एप’ बताकर विरोध कर रही थी पर अब इस पर केंद्रीय संचारमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का बड़ा और राहत देने वाला बयान आया है। विवादों को लेकर मंत्री ने स्पष्ट किया कि संचार साथी एप किसी भी तरह कीजासूसी या कॉल मॉनिटरिंग नहीं करता। उन्होंने कहा, “यह एप पूरी तरह वैकल्पिक है। इसे आप अपनी इच्छा से एक्टिवेट या डीएक्टिवेट कर सकतेहैं। अगर नहीं चाहिए, तो इसे किसी भी अन्य एप की तरह डिलीट किया जा सकता है। हमारी कोशिश सिर्फ उपभोक्ता सुरक्षा को मजबूत करने की है” सिंधिया के मुताबिक, सरकार की जिम्मेदारी है कि इस एप की सुविधा हर उपभोक्ता तक पहुंचे, लेकिन फोन में रखना या न रखना पूरी तरहउपयोगकर्ता की पसंद पर निर्भर है। अधिक मोबाइल उनके मालिकों को वापस किए गएसंचार साथी एप को लेकर जारी बहस पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने विपक्ष की आलोचनाओं को सख्ती से खारिज किया। मंत्री नेकहा कि जब विपक्ष के पास ठोस मुद्दे नहीं होते, तो वे जबरदस्ती विवाद खड़ा करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का मुख्यउद्देश्य केवल उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सिंधिया ने बताया कि संचार साथी पोर्टल को अब तक 20 करोड़ से ज्यादा लोग इस्तेमालकर चुके हैं, जबकि एप के 1.5 करोड़ से अधिक डाउनलोड हो चुके हैं। उनके मुताबिक, इस प्लेटफॉर्म की मदद से करीब 1.75 करोड़ फर्जी मोबाइलकनेक्शन बंद किए गए हैं। साथ ही, 20 लाख चोरी हुए मोबाइल फोन ट्रेस किए गए और 7.5 लाख से अधिक मोबाइल उनके मालिकों को वापसकिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत, बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ पोक्सो ट्रायल पर रोक “जानें क्या है पूरा मामला”

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएस येदियुरप्पा को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ चल रहे पोक्सो मामले मेंसुनवाई पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने बीएस येदियुरप्पा की याचिका पर राज्य सरकार को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीशसूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने येदियुरप्पा की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश दिया, जिसमें कर्नाटक हाईकोर्ट के मामले को रद्द करने से इनकार करने के आदेश को चुनौती दी गई है।सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘नोटिस जारी करें। इस बीच, ट्रायल पर रोक रहेगी।’ पीठ ने कहा कि नोटिस मुख्य रूप से मामले को हाई कोर्ट कोवापस भेजने पर विचार करने के लिए जारी किया जा रहा है। येदियुरप्पा का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि हाई कोर्ट नेमहत्वपूर्ण सबूतों को नजरअंदाज किया और उन बयानों पर विचार नहीं किया, जिनसे पता चलता है कि कथित घटना के दौरान ऐसा कुछ नहीं हुआ।लूथरा ने कहा, ‘कुछ बयान ऐसे होते हैं जिन्हें अभियोजन पक्ष दबा देता है। उच्च न्यायालय ने तथ्यों को नजरअंदाज किया। वह चार बार मुख्यमंत्री रहचुके हैं।’ पूर्व सीएम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख कियापोक्सो कानून के तहत 14 मार्च, 2024 को एक महिला की शिकायत पर पूर्व सीएम के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। शिकायतकर्ता महिलाकी अब मौत हो चुकी है। शिकायत में महिला ने आरोप लगाया था कि जब वे येदियुरप्पा से मदद मांगने के लिए उनके घर गईं तो पूर्व सीएम नेउसकी 17 साल की बेटी के साथ छेड़छाड़ की। उसने आगे आरोप लगाया कि पूर्व सीएम ने पैसे देकर घटना को दबाने की कोशिश की। उसकीशिकायत के आधार पर, पुलिस ने पोक्सो कानून के अलग-अलग प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। 4 जुलाई, 2024 को, एक ट्रायलकोर्ट ने न केवल येदियुरप्पा के खिलाफ, बल्कि तीन अन्य लोगों के खिलाफ भी सबूत नष्ट करने और मामले को दबाने की कोशिशों के आरोप मेंअपराधों का संज्ञान लिया। इसके बाद कर्नाटक उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट को इस पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया। इसके बाद, 28 फरवरी को, फास्ट-ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने एक नया आदेश जारी किया और येदियुरप्पा और दूसरे आरोपियों को 15 मार्च को पेश होने के लिए बुलाया।येदियुरप्पा ने 28 फरवरी के आदेश और शिकायत को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। पूर्व सीएम ने कहा कि उन पर लगे आरोप राजनीति से प्रेरित हैं।हालांकि, हाई कोर्ट ने पिछले महीने मामले को रद्द करने से मना कर दिया, जिसके बाद पूर्व सीएम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
दिल्ली विधानसभा का डिजिटल सफर – अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता का बड़ा कदम

सरिता साहनी02,दिसंबर 2025, नई दिल्ली डिजिटल दस्तावेज़ों के साथ पर्यावरण संरक्षण की पहलदिल्ली विधानसभा में इस बार एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक परिवर्तन शुरू किया गया है। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि अबविधानसभा में तैयार होने वाला हर डिजिटल दस्तावेज़ पर्यावरण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक होगा। उनका कहना है कि जब सरकारी संस्थाएँखुद पेपरलेस होंगी, तभी समाज में भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। इसी सोच के साथ विधानसभा ने अपने सभी दस्तावेज़ों, प्रक्रियाओं और कार्यों को डिजिटल रूप में बदलने का फैसला लिया है। शीतकालीन सत्र से पूरी तरह डिजिटल कार्यप्रणालीआगामी शीतकालीन सत्र में दिल्ली विधानसभा में अब कोई भी कागज़ी दस्तावेज़ उपयोग में नहीं आएगा। चाहे प्रश्न हों, विधेयक हों, प्रस्तुत पत्र होंया अन्य सभी विधायी कार्य सब कुछ डिजिटल प्रणाली के माध्यम से होगा। यह बदलाव केवल एक तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि समय की मांग है।अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता का कहना है कि डिजिटल कामकाज से विधानसभा की गति बढ़ेगी, पारदर्शिता आएगी और दस्तावेज़ों का प्रबंधन अधिक सरलऔर सुरक्षित होगा। अधिकारियों को नेवा (NEVA) पर डिजिटल प्रशिक्षणइस बदलाव को सफल बनाने के लिए दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों को दिल्ली विधानसभा में नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन(NEVA) पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। IT विभाग के विशेषज्ञों ने अधिकारियों को यह सिखाया कि विधानसभा के सभी दस्तावेज़ कैसेऑनलाइन तैयार किए जाएँगे, कैसे भेजे जाएँगे और किस प्रकार डिजिटल मॉड्यूल के माध्यम से विधानसभा से समन्वय स्थापित किया जाएगा।सामाजिक कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण, सहकारी विभाग, श्रम, रोजगार, विधि, न्याय, चुनाव, विकास, संस्कृति, भाषा, पर्यटन, उद्योग, खाद्य–आपूर्ति और पर्यावरण एवं वन विभाग के अधिकारी इस प्रशिक्षण में शामिल हुए। शेष विभागों को अगले दिन प्रशिक्षण दिया जाएगाताकि सभी विभाग पूरी तरह डिजिटल रूप में काम करने के लिए सक्षम हो सकें। पेपरलेस विधानसभा की दिशा में बड़ा कदमविधानसभा अध्यक्ष ने इस कार्यक्रम में विश्वास जताया कि डिजिटल प्रणाली अपनाने से कागज़ की भारी मात्रा की बचत होगी। उन्होंने कहा कि जबसभी दस्तावेज़ डिजिटल होंगे, तो विभागों और विधानसभा के बीच संवाद तेज बनेगा। उत्तर भेजने की प्रक्रिया में देरी नहीं होगी और पूरा काम समयबद्धतरीके से पूरा होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कागज़ रहित व्यवस्था न केवल पर्यावरण हितैषी है, बल्कि विधानसभा को और अधिकआधुनिक, संवेदनशील और सक्षम बनाती है। यह बदलाव सुशासन में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक मजबूत बनाने की पहलविजेंद्र गुप्ता ने कहा कि डिजिटल प्रणाली से विधानसभा की प्रक्रियाएँ और अधिक पारदर्शी बनेंगी। अब दस्तावेज़ों के खोने, गड़बड़ी होने या देरी सेपहुँचने की समस्या नहीं रहेगी। हर जानकारी सुरक्षित रहेगी और आसानी से खोजी जा सकेगी। इससे विधानसभा का कामकाज अधिक व्यवस्थित होगाऔर जनता के प्रति जवाबदेही भी बढ़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल व्यवस्था अपनाने से विधायी प्रक्रिया का स्तर बढ़ेगा और यह सुधार देश कीअन्य विधानसभाओं के लिए भी एक प्रेरक मॉडल बन सकता है। भविष्य की ओर बढ़ता दिल्ली विधानसभा सचिवालयदिल्ली विधानसभा ने स्पष्ट किया है कि वह एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ रही है जहाँ हर दस्तावेज़ डिजिटल होगा, हर प्रक्रिया समयबद्ध होगी और हरकदम पर पारदर्शिता का पालन होगा। विधानसभा सचिवालय ने यह संकल्प दोहराया कि वह पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी नवाचार के साथ-साथलोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि विभागों की सक्रिय भागीदारी के साथ दिल्लीविधानसभा पूरी दृढ़ता के साथ एक पेपरलेस व्यवस्था की ओर आगे बढ़ रही है, जो आने वाले वर्षों में पूरे देश के लिए आदर्श बन सकती है।
ठंड से बचाने के लिए दिल्ली सरकार की बड़ी तैयारी – मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

सरिता साहनी02,दिसंबर 2025, नई दिल्ली सर्दी से बेघरों को बचाने के लिए सरकार का मजबूत इंतजामदिल्ली में सर्दी धीरे-धीरे बढ़ रही है और हर साल की तरह इस बार भी सबसे ज्यादा कठिनाई बेघर और गरीब लोगों को होती है। इसी चुनौती कोध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ऐलान किया है कि दिल्ली सरकार ने इस बार पहले से ज्यादा मजबूत और व्यापक विंटर एक्शन प्लान तैयारकिया है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि सरकार की कोशिश है कि कोई भी व्यक्ति ठंडी रात में खुले आसमान के नीचे न सोए और हर गरीब को सुरक्षितजगह मिले। रैन बसेरों में सभी जरूरी सुविधाएँ उपलब्धमुख्यमंत्री ने दिल्ली सचिवालय में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की, जिसमें उन्हें बताया गया कि राजधानी में कुल 197 स्थायी रैन बसेरे कामकर रहे हैं। इन रैन बसेरों में लगभग अठारह हजार लोगों के रहने की सुविधा है। इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर बेघरों को रखने के लिए बनाए जानेवाले अस्थायी रैन बसेरों की तैयारी भी लगभग पूरी हो चुकी है। सरकार द्वारा बनाए गए 250 अस्थायी रैन बसेरों में से 204 अब पूरी तरह से तैयार हैं।इन रैन बसेरों में लोगों के लिए बिस्तर, गद्दे, साफ चादरें, तकिए, गर्म कंबल, बिजली की व्यवस्था, मच्छर भगाने वाले उपकरण, पीने के लिए पानीऔर महिलाओं के लिए सीसीटीवी तथा सुरक्षा गार्ड जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था सिर्फ एक छत देने केलिए नहीं, बल्कि बेघरों का सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई है। लगातार निगरानी और रैन बसेरा ऐप की सुविधामुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को अधिकारियों ने यह भी बताया कि सभी रैन बसेरों की निगरानी 15 मार्च तक लगातार की जाएगी। किसी भी रैन बसेरे में भीड़न बढ़े और किसी को असुविधा न हो, इसके लिए प्रत्येक शेल्टर की रिपोर्ट नियमित रूप से ली जाएगी। इसके साथ ही सरकार का रैन बसेरा ऐप भीकाम कर रहा है, जिसकी मदद से बेघरों को नजदीकी रैन बसेरे की जानकारी आसानी से मिल जाती है। यह ऐप यह भी बताता है कि कहाँ कितनीजगह खाली है और किन जगहों पर ज्यादा जरूरत है। इससे बेघरों और प्रशासन दोनों को सुविधा होती है। अस्पतालों में सर्दी से बचाव के लिए विशेष ध्यानमुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि सिर्फ बेघरों को ही नहीं, बल्कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों को भी ठंड से बचाना जरूरी है। इसी कारण उन्होंनेस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को आदेश दिया है कि दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में कंबल, रजाइयाँ और गर्म कपड़े उपलब्धरहें। किसी भी अस्पताल में मरीज को ठंड की वजह से परेशानी नहीं होनी चाहिए। स्कूली बच्चों को ठंड से बचाने की तैयारीमुख्यमंत्री ने बैठक में स्कूलों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सर्दियों में खासकर छोटे बच्चों को ठंड से बचाना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसउम्र में ठंड का असर उनके स्वास्थ्य पर जल्दी पड़ता है। इसलिए शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि स्कूलों में बच्चों के लिए गर्म माहौल बनानेकी योजना तैयार की जाए। सरकार की यह भी तैयारी है कि यदि जरूरत पड़े तो कंपनियों की सीएसआर मदद से बच्चों के लिए गर्म जैकेट, स्वेटर, मफलर और अन्य सामान उपलब्ध कराया जाए, ताकि ठंड की वजह से उनकी पढ़ाई बाधित न हो। आंगनवाड़ी और पालना केंद्रों के लिए विशेष इंतजाममुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आंगनवाड़ी और पालना केंद्रों पर भी गहरी चिंता जताई है। उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि इन केंद्रों में छोटे बच्चों औरमहिलाओं को ठंड से बचाने के लिए सभी व्यवस्थाएँ पूरी तरह दुरुस्त रहें। छोटे बच्चों को ठंड से जल्दी नुकसान होता है, इसलिए इन केंद्रों में गर्मकपड़ों, हीटर, साफ बिस्तर और गर्म पानी जैसी सुविधाएँ सुनिश्चित की जा रही हैं। सरकारी इमारतों में गार्डों के लिए हीटर लगाने के निर्देशमुख्यमंत्री ने इस बार एक नया आदेश भी जारी किया है। उन्होंने कहा कि सरकारी इमारतों में रात-दिन ड्यूटी करने वाले सुरक्षा गार्डों को भी ठंड सेबचाने की जरूरत होती है। इसलिए सभी सरकारी भवनों में गार्डों के लिए हीटर लगाने और उन्हें गर्म कपड़े उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। कोई भी नागरिक ठंड में बिना छत के न रहे सरकार का संकल्पबैठक के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार का संकल्प स्पष्ट है बेघर, गरीब, बच्चे, मरीज, महिलाएँ कोई भी ठंड से परेशान न हो।सरकार ने इस बार पिछले वर्षों की तुलना में ज्यादा बड़ा और संवेदनशील प्लान बनाया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के रैन बसेरे सिर्फ आश्रय स्थल नहींहैं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और मानवीय संवेदना के प्रतीक हैं। सरकार हर संभव कोशिश करेगी कि सर्दियों के पूरे मौसम में हर नागरिक सुरक्षित रहे।