तेलंगाना के NMIMS में 80 से अधिक छात्र फूड पॉइजनिंग का शिकार, मैनेजमेंट पर लगे गंभीर आरोप

तेलंगाना के जाडचेरला स्थित नरसी मोनजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (NMIMS) में 80 से अधिक छात्र फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए।भोजन करने के बाद छात्रों को उल्टी, मतली, पेट दर्द और बुखार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। मैनेजमेंट पर घटना दबाने का आरोपछात्रों ने आरोप लगाया कि संस्थान के प्रशासन ने बीमार छात्रों को अस्पताल ले जाने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश की। मीडिया रिपोर्ट्स केअनुसार, बीमार छात्रों का इलाज यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी और कॉमन रूम के फर्श पर एक निजी डॉक्टर द्वारा किया गया। विधायक अनिरुद्ध रेड्डी ने प्रशासन को फटकार लगाईघटना की जानकारी मिलते ही जाडचेरला के विधायक पी. अनिरुद्ध रेड्डी संस्थान पहुंचे और छात्रों के प्रति प्रशासन के व्यवहार पर नाराजगी जाहिर की।उन्होंने डॉक्टरों की योग्यता और चिकित्सा सुविधाओं की कमी पर सवाल उठाते हुए तत्काल छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराने का निर्देश दिया। छात्रों को एंबुलेंस तक नहीं मिलीछात्रों ने आरोप लगाया कि प्रशासन न केवल सुरक्षित और स्वच्छ भोजन देने में विफल रहा, बल्कि उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की भीव्यवस्था नहीं की गई। छात्रों के दबाव बनाने पर ही एंबुलेंस की व्यवस्था की गई, जिससे संस्थान के प्रशासन की लापरवाही उजागर हुई। भोजन की गुणवत्ता को लेकर पहले भी की गई थी शिकायतछात्रों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब मेस के भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। उन्होंने पहले भी विश्वविद्यालय प्रशासन से खाने कीगुणवत्ता, किराने की सामग्री, सब्जियों और खाना पकाने के तेल की खराब स्थिति को लेकर शिकायत की थी, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। विधायक के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए छात्रविधायक रेड्डी ने अधिकारियों से कहा, “आप सिर्फ विश्वविद्यालय को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बच्चों की जिंदगी की चिंता नहीं कर रहे।अगर उन्हें कुछ हो गया तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?” उनके हस्तक्षेप के बाद ही छात्रों को महबूबनगर और हैदराबाद के अस्पतालों में भर्ती करायागया। यह घटना विश्वविद्यालय प्रशासन की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है और छात्रों की सुरक्षा तथा भोजन की गुणवत्ता को लेकर उठते सवालों कोऔर मजबूत करती है।
न्यूजीलैंड कोर्ट का बड़ा फैसला: बलतेज सिंह को 22 साल की सजा

न्यूजीलैंड की अदालत ने 32 वर्षीय बलतेज सिंह को 700 किलो मेथेमफेटामाइन (ड्रग) रखने के आरोप में दोषी पाते हुए 22 साल की सजा सुनाईहै। ऑकलैंड हाई कोर्ट ने 21 फरवरी को यह फैसला सुनाया। गोपनीय रखा गया नामबलतेज के वकीलों ने अदालत से उसका नाम गुप्त रखने की अनुमति मांगी, जिसे स्वीकृति भी मिल गई। हालांकि, इसके पीछे का कारण स्पष्ट नहींकिया गया है। परिवार ने फैसले को बताया ‘फेक न्यूज़’पंजाब में बलतेज के परिवार ने इस मामले को ‘फेक न्यूज़’ करार दिया है। उनका कहना है कि अब तक उन्हें इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारीनहीं मिली है। ड्रग्स तस्करी में गिरफ्तारीऑकलैंड पुलिस ने 2023 में मनुकाउ स्थित एक छोटे गोडाउन पर छापा मारा था, जहाँ बीयर के कैन में छिपाकर रखी गई मेथ ड्रग्स बरामद हुई थी।इसी दौरान बलतेज को गिरफ्तार किया गया था। मौत के बाद हुई छापेमारीयह छापा 21 वर्षीय आइडेल सगला की संदिग्ध मौत के बाद मारा गया था। उसे कथित तौर पर बीयर के रूप में मेथेमफेटामाइन दी गई थी, जिससेउसकी जान चली गई। इस मामले में हिमतजीत “जिमी” सिंह को मैनस्लॉटर के आरोप में दोषी ठहराया गया। जिमी ने अदालत में दावा किया कि उसेएक व्यापारी दोस्त ने धोखा दिया था, जो असल में बलतेज सिंह था और ड्रग्स तस्करी का मास्टरमाइंड था। पैरोल नहीं मिलेगी, दस साल तक अनिवार्य सजाहालांकि बलतेज पर आइडेल सगला की मौत से जुड़े आरोप नहीं लगे, लेकिन उसे मेथ ड्रग सप्लाई रैकेट का मुख्य साजिशकर्ता माना गया। कोर्ट नेउसे 22 साल की सजा दी, जिसमें कम से कम 10 साल तक उसे पैरोल का अधिकार नहीं मिलेगा। भारत और पारिवारिक पृष्ठभूमिबलतेज सिंह के पिता सरवन सिंह अगवान, सतवंत सिंह (भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारे) के भाई हैं। उनका परिवार 1980 के दशकमें न्यूजीलैंड जाकर बसा था और ऑकलैंड में एक किराना स्टोर चलाता था। बलतेज 2019 में अंतिम बार भारत आया था और करीब ढाई महीने तकयहां रुका था। खालिस्तान समर्थक गतिविधियों से जुड़ावस्थानीय गुरुद्वारों में बलतेज को सतवंत सिंह के भतीजे के रूप में पहचाना जाता था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसे खालिस्तान समर्थक गतिविधियों में भीशामिल माना जाता था, लेकिन ड्रग तस्करी और मेथ सप्लाई के कारण वह कानून की गिरफ्त में आ गया।
रेखा गुप्ता का नया फेरबदल, आतिशी के निजी स्टाफ की सेवाएं की खत्म”सारे अफसरों को भेजा मूल कैडर

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक बड़ा ऐलान किया है दरअसल दिल्ली की पूर्व सरकार ने पहले अधिकारियों और कर्मचारियों को दूसरी जगहनियुक्त किया था. अब उन्हें वापस अपने मूल विभागों में रिपोर्ट करने को कहा है. कई अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति पर एक दूसरे बोर्डकॉरपोरेशन में भी भेजा गया था. अब दिल्ली में नई सरकार की गठन के साथ ही कई बड़े और बेहतरीन फैसले लिए गए हैं. जिससे दिल्ली सरकार केकई अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने मूल विभागों में रिपोर्ट करने को कहा गया है. इस पर पूर्व मुख्यमंत्री और मंत्रियों के व्यक्तिगत स्टाफ की भीसेवाओं को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है. पूर्व सरकार ने किया था दूसरी जगह नियुक्तदरअसल दिल्ली की पूर्व सरकार ने जिन अधिकारियों और कर्मचारियों को दूसरी जगह नियुक्त किया गया था. अब उन्हें तुरंत अपने मूल विभागों मेंरिपोर्ट करने को कहा गया है. इन कई अधिकारियों और कर्मचारी को प्रति नियुक्ति पर एक दूसरे बोर्ड कॉर्पोरेशन में भेजा गया था. अब लगभग एकहफ्ते भर पहले सभी विभागों से पूर्व सरकार की ओर से कॉन्ट्रैक्ट और व्यक्तिगत स्टाफ की जानकारी की मांग की गई थी. उन्हें कहा गया था की मूलविभागों में उनको लौटना है.जिसको लेकर आगे की प्रक्रिया चल रहीं है.
आखिरकार कौन सी है वो पावर, जो नहीं होगीं दिल्ली की मुख्यमंत्री के पास”आइए जानते है इससे जुड़ी जानकारी’

Delhi New CM: दिल्ली की नई सीएम का ऐलान हो चुका है. अब कम को लेकर अलग-अलग मुख्यमंत्रियों ने सवाल उठाए है और दिल्ली कीसीएम को लेकर ज्यादा पावर की डिमांड की है. क्योंकि दिल्ली में भी अब बीजेपी की सरकार बन चुकी है अब हम आपको बताएंगे कि दिल्ली केसीएम के पास वह कौन सी पांच पावर है जो और किसी अन्य राज्य के मुख्यमंत्री के पास नहीं होती है. लॉ एंड ऑर्डरलॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने की जिम्मेदारी दरअसल सेंट्रल गवर्नमेंट की होती है दिल्ली सरकार किसी भी तरह के सुरक्षा बलों को तैनात करने या हटानेका फैसला नहीं ले सकती है.सुरक्षा बलों को हटाने एवं तैनात करने का फैलसा सिर्फ और सिर्फ सेंट्रल गर्वमेंट के पास ही होता है. इसके बाद दिल्लीसरकार दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के तहत आती है. जो की दिल्ली की कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण पर दिल्ली सरकार काकोई सीधा कंट्रोल नहीं है. मतलब कि दिल्ली में अगर कुछ होता है तो दिल्ली की मुख्यमंत्री पुलिस को कोई भी सीधा आदेश नहीं दे सकती दिल्ली मेंउपराज्यपाल की भूमिका बहुत अहम मानी जाती है दिल्ली सरकार कोई भी कानून या नीति बनाती है तो उसे लागू करने के लिए उपराज्यपाल कीमंजूरी लेनी पड़ती है. दिल्ली के राज्यपाल के पास होती है वीटो पावरकुछ मामले में उपराज्यपाल के पास वीटो पावर भी होती है यानी वह किसी कानून को यानी वह किसी कानून को पास होने से रोक सकते हैं. और उसमामले को केंद्र सरकार को भेज भी सकते हैं. लेकिन यही योजना दूसरे राज्यों में लागू नहीं होती वहां राज्यपाल की भूमिका इतनी महत्वपूर्ण नहीं होतीहै. इसके अलावा दिल्ली में जमीन से जुड़े सभी मामलों का मैनेजमेंट केंद्र सरकार का शहरी विकास मंत्रालय ही देखा है इसका अर्थ है. कि दिल्लीसरकार अपनी मर्जी से रियल स्टेट या कहे तो सरकारी जमीन के बारे में कोई फैसला नहीं ले सकती उन्हें इन सब मामलों में केंद्र सरकार से सलाह वीइजाजत लेनी ही पड़ती है.
मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिबनाम ने दी ट्रंप को धमकी, अगर हमारी संप्रभुता का किया उल्लंघन तो नहीं करेंगें बर्दाश्त

ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद लगातार कई देशों को ज्यादा टैरिफ लगाने की धमकी देते हुए आ रहे हैं. ऐसे में मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडियाशिबनाम ने एक बड़ा बयान दिया है. जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दी जा रही धमकियों से ना डरने की बात कही है. उन्होनें डोनाल्डट्रंप की धमकियों को लेकर कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से ज्यादा टैरिफ लगाने ड्रग कैटल के खिलाफ सनी एक्शन लेने और निर्वासितों कोवापस भेजने को लेकर दी जा रही चेतावनी पर टिप्पणी कर रही थी. ऐसे में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान उनसे पूछा गया की क्या मेक्सिकन राष्ट्रपति डोनाल्डट्रंप की धमकियों से डरती है. तो शिबनाम ने कड़ा जवाब देते हुए कहा कि मुझे देश की जनता का समर्थन प्राप्त है. और जब किसी के पास निश्चिताऔर दृढ़ विश्वास होता है.तो वह पूरी तरीके से जानता का है. ट्रंप की चिंताओं और उपायों को किया दूरउनके सिद्धांतों को लेकर कहा है कि उन्होंने ट्रंप के उपाय और चिताओं को दूर करते हुए कहा कि हमारे दोनों देशों के बीच अभी बातचीत की जा रही हैमेक्सिको की संप्रभुता का उल्लंघन हम कभी नहीं होने देंगे लेकिन अगर इसका उल्लंघन होता भी है तो मातृभूमि की रक्षा के लिए हमारा पूरा देश एकसाथ खड़ा होगा. डोनाल्ड ट्रंप की ओर से आरोप है कि दरअसल मैक्सिन को ड्रग कार्टेल द्वारा चलाया जाता है जो एक आपराधिक संगठन है जिसेअमेरिकी सरकार ने आतंकवाद घोषित कर दिया है.ट्रंप ने वैक्सीन अधिकारियों पर लाखों लोगों पर अवैध रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रवेश करनेकी अनुमति देने का भी गंभीर आरोप लगाया था. और अब प्रवचन के प्रभाव को रोकने के लिए अपनी मदद की पेशकश की दोनों देशों के अधिकारीइस सप्ताह वाशिंगटन के मैक्सिन उत्पादों पर टैरिफ के निलंबन और नशीली दवोंओं की तस्करी विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में फेंटेलाइन केप्रभाव से निपटाने की रणनीतियां पर बातचीत करने के लिए मिलेंगे. शिबनाम ने कहा हम करते है संप्रभुता का बचावदरअसल शिबनाम की पुष्टि की सरकार ड्रग कार्टेल या संगठित अपराध का बचाव नहीं करती है उन्होनें कहा कि हम संप्रभुता का बचाव करतेहै.मेक्सिको कार्टेल को आतंकवादी संगठन के रुप में नामित करने से उत्पन्न होने वाले किसी भी विदेशी उपाय को स्वीकार नहीं करेगा. अभी इन सबको लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत चल रहीं है. आगे इसको लेकर जो भी प्रक्रिया आएगी उसकी जानकारी को लोगों तक साझा किया जाएगा.
आरबीआई ने लाँन्च किया ‘आरबीआई डाटा ऐप”, जानें क्यों है खास आम जनता के लिए

भारतीय रिजर्व बैंक ने RBIDATA नामक एक नया मोबाइल एप्लीकेशन लॉन्च किया है. जो भारतीय अर्थव्यवस्था से संबंधित आर्थिक और वित्तीयडाटा तक आसान मंच प्रदान करेगा.इसे विशेष रुप से शोधकर्ताओं, छात्रों नीति निर्माता और आम जनता के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है. जिसमें 11000 से अधिक आर्थिक डेटा श्रृंखलाओं का अध्ययन कर सकते हैं इसका मुख्य उद्देश्य उपयोगकर्ताओं के लिए आर्थिक आंकड़ों कोसुव्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करना है यह ऐप ios के लिए विशेष रूप से उपलब्ध है और इसे RBI Database on Indian on economy सेजोड़ा गया है जिससे आर्थिक डाटा तक पहुंचने से पहले यह अधिक आसान हो गया है. RBI DATA डाटा प्रदर्शित और पहुंच को बढ़ाने की दिशा मेंएक महत्वपूर्ण कदम है. इस ऐप में कई सारी विशेषताएं हैं. आसानी से मिलेगी जानकारीजो उपयोगकर्ताओं को आर्थिक जानकारी तक आसानी से पहुंचा सकती हैं इससे खास तौर पर 11,000+ डाटा श्रृंखलाओं का पता लगा सकते हैं जोविभिन्न आर्थिक पहलुओं का आसानी से पता करेगी. इसमें खास तौर पर इंटरएक्टिव विजुलाइजेशन ग्राफ का चार्ट के माध्यम से समय श्रृंखला डाटाका विश्लेषण किया जाएगा. जिससे वित्तीय रुझानों को समझना आसान होगा इसमें शक्तिशाली सर्च फीचर के माध्यम से उपयोगकर्ता आवश्यकउत्तर खोज सकते हैं. और लोकप्रिय रिपोर्ट्स क्षेत्र में अक्सर एक्सेस की जाने वाली रिपोर्ट उपलब्ध रहती है. जिसमें उपयोगकर्ता 20 किलोमीटर कीसीमा के भीतर बैंक शाखाएं वित्तीय सुविधा को आसानी से ढूंढ सकते हैं. बैकिंग सेवाओं तक पहुंचने में होगी आसानीइससे बैंकिंग सेवाओं तक पहुंचने में आसानी होगी. इस ऐप में खास तौर पर SAARC देश के वित्तीय आंकड़े भी उपलब्ध है. जिससे क्षेत्रीय आर्थिकके तुलना संभव होगी.यह पहल खास तौर पर RBI की एक डिजिटल परिवर्तन रणनीति का हिस्सा है जो वित्तीय जानकारी के प्रसार को अधिक सुलभऔर संरक्षित बनाने का प्रयास कर रही है. इससे विभिन्न क्षेत्रों के हिटधारकों को विश्वसनीय डाटा के आधार पर सूचित निर्णय लेने में मदद मिलेगी.
मनु भाकर को बीबीसी इंडियन स्पोर्ट वुमन ऑफ द ईयर पुरस्कार से किया गया सम्मानित, जानें क्यों है खास ये अवार्ड

ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर को बीबीसी इंडियन स्पोर्ट वुमन ऑफ द ईयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंगकॉरपोरेशन द्वारा किए जाने वाला यह प्रतिष्ठित भारतीय महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियां और उनके खेल में योगदान को मान्यता देता है.इसकेलिए 22 वर्षीय मनु भाकर ने पेरिस 2024 ओलंपिक में इतिहास रच दिया. इसमें इन्होनें महिला 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में कांस्य पदक जीतकरओलंपिक में पदक जीतने वाली पहले भारतीय महिला निशानेबाज बनने का गौरव प्राप्त किया है.इसके अलावा मनु भाकर ने सरबजीत सिंह के साथमिश्रित मीटर एयर पिस्टल इवेंट में भी कांस्य पदक जीता है. जिसके कारण वह स्वतंत्रता के बाद एक ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहलीभारतीय खिलाडी बन गयी. मानू भाकर की इस शानदार जीत से लोगों के बीत खुशी का माहौल है काफी लोग इनकी इस प्रेरणा से प्रेरित भी हो रहीहै. बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्स की शुरुआत हुई 20219 मेंदरअसल बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्स वूमेन ऑफ़ द ईयर की शुरुआत 2019 में की गई थी. और इसे भारतीय खेल पत्रकारों और विशेषज्ञ द्वारा नामांकितखिलाड़ियों के बीच सार्वजनिक मतदान के माध्यम से दिया जाता है. इससे पहले पूर्व भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज कोलाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया था. इन्होंने 2024 से 2022 तक भारतीय महिला क्रिकेट टीम का नेतृत्व किया. जिससे वहअंतरराष्ट्रीय क्रिकेट इतिहास में सबसे लंबे समय तक कप्तान रहने वाली खिड़की बनी. इनका भारतीय महिला क्रिकेट में योगदान आने वाली पीढियां केलिए एक प्रेरणा बन चुका है.लोग इनसे प्रेरित होकर अपने सपनों को पूरा करते है.
ममता बनर्जी ने महाकुंभ को बताया’मृत्यु कुंभ’ , बीजेपी पर साधा निशाना

ममता बनर्जी अभी से अलर्ट मोड में आ गई हैं. ममता बनर्जी ने बीजेपी पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि 2014 से बीजेपी दिल्ली जीतने में जुटीहुई थी. यह मिशन अब जाकर कामयाब हुआ है और अब उसकी निशानी पर पश्चिम बंगाल ही है दरअसल ममता बनर्जी ने महाकुंभ को लेकर इतनीबड़ी बात कर दी कि लोगों के सुनकर होश उड़ गए. ममता ने कहा कि महाकुंभ तो मृत्यु कुंभ है. तो वहीं दूसरी तरफ लालू यादव ने महाकुंभ को फालतूबता दिया. अब ममता बनर्जी ने महाकुंभ पर बिल्कुल वैसा ही स्टैंड लिया है जैसा अयोध्या में राम मंदिर उद्घाटन के समय उन्होंने लिया था अयोध्या मेंराम मंदिर उद्घाटन के वक्त इन्होंने समारोह के बहिष्कार की बात को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की तरफ से कहा गया था. इसके बाद कांग्रेस औरविपक्षी गठबंधन इंडिया के सहयोगी दलों ने भी अपना रुख साफ किया था ममता बनर्जी ने ऐसा बोलकर बीजेपी को निशाना बनाया है लेकिन इस परभी कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लपेटे में ले लिया ममता बनर्जी का यह बयान राहुल गांधी के महाकुंभ में डुबकी लगाने के ठीक पहले आया है. महाकुंभ बना मृत्यु कुंभ- ममता बनर्जीमृत्यु कुंभ बोलकर ममता बनर्जी ने राहुल गांधी को भी अचंभे में डाल दिया हो सकता है आने वाले दिनों में राहुल गांधी महाकुंभ स्नान के लिए विपक्षकी तरफ से कटघरे में खड़े कर दिए जाएंगें. पर फिलहाल राहुल गांधी परिवार समेत महाकुंभ में स्नान के लिए जाएंगे यह उनकी तरफ से तय कर दियागया है इस पर मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि राहुल गांधी के संगम में डुबकी लगाने का कार्यक्रम तय होना अपने आप में दिलचस्प है. इससे पहलेमहू में रैली हुई थी जिसमें मल्लिका अर्जुन खड़गे ने कहा था की गंगा में डुबकी लगाने से गरीबी दूर होती है क्या? ममता बनर्जी की तरफ से सबसे बड़ासवाल यह है कि महाकुंभ मृत्यु कुंभ में बदल चुका है वीआईपी लोगों को महाकुंभ में खास सुविधाएं दी जा रही है तो वही गरीब लोगों को भगदड़ कीघटनाओं का सामना करना पड़ रहा है भगदढ़ में न जाने कितनी श्रद्धालुओं की मौत हुई है. भगदड़ की घटना के बाद कितने आयोग महाकुंभ भेजे गएममता बनर्जी की तरफ से सवाल किया जा रहा है.
भाजपा द्वारा ‘USAID फंड’ की 21 मिलियन डॉलर की क्या है कहानी, आखिरकार विदेशी हस्तक्षेप की कौन सी है नई रणनीति

भाजपा, मोदी सरकार के मंत्रियों, उसके आर्थिक सलाहकार, आईटी सेल प्रमुख, आरएसएस-भाजपा इको सिस्टम और भाजपा के अनुकूल मीडिया केएक हिस्से द्वारा फैलाई गई पूरी ‘USAID फंड की 21 मिलियन डॉलर की कहानी’ भारत में कांग्रेस सरकारों को अस्थिर करने के लिए विदेशी फंड काइस्तेमाल करने के अपने पापों से ध्यान हटाने के लिए बनाई गई थी. दरअसल‘USAID फंड की 21 मिलियन डॉलर की राशि’ भारत को नहीं, बल्किबांग्लादेश को दी गई थी. आधिकारिक दस्तावेज इस बात को साबित करते हैं. मोदी जी के सबसे अच्छे दोस्त ट्रम्प ने शायद जानबूझकर या अनजानेमें DOGE के माध्यम से एक गलती की थी. आरएसएस-भाजपा इको सिस्टम तंत्र ने तथ्यों की जांच किए बिना बेशर्मी से इस पर कब्जा कर लिया. भारत के लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने में अपने स्वयं के कमीशन के कृत्यों को छिपाना चाहते थे. कैसे कुछ शासन-अनुकूल पत्रकारों को यादृच्छिकफ्लोचार्ट के साथ आधिकारिक हैंडआउट दिए जा रहे हैं ताकि उस फर्जीवाड़े को आगे बढ़ाया जा सके. लेकिन सच्चाई के अपने पैर होते हैं. आपातकाल के दौरान सीआईए से ली थी सहायताश्रीमती इंदिरा गांधी सही थीं जब उन्होंने भाजपा के वैचारिक पूर्वजों और जनता पार्टी के ‘विदेशी हाथ’ की ओर इशारा किया था. यह कोई रहस्य नहींहै कि आपातकाल के दौरान और उसके पहले आरएसएस ने सीआईए की सहायता ली थी. पीएन धर की पुस्तक ‘इंदिरा गांधी, आपातकाल औरभारतीय लोकतंत्र’ में स्पष्ट रूप से बताया गया है. कैसे “अमेरिका ने जेपी और 1974 में इंदिरा गांधी सरकार से लड़ने में उनकी भूमिका की प्रशंसा की. निक्सन प्रशासन 1971 में अमेरिका के प्रति उनकी अवज्ञा और बाद में भारत के पहले परमाणु परीक्षण करने के लिए उन्हें दंडित करना चाहताथा.आरएसएस-बीजेपी का भारत की चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने हमारे लोकतंत्र में दखल देने और हमारे संविधान को अपवित्र करने का घिनौनारिकॉर्ड है. अतीत और हाल के कई उदाहरण स्पष्ट रूप से इसी बात की ओर इशारा करते हैं.उन्होनें इस पर विशेष सवालों को पूछा जिसमें उन्होनें पहलेके अतीत का जिक्र किया है.भाजपा के आधिकारिक प्रचार चैनल मोदी आर्काइव में कहा गया है. यह यात्रा जो 10 जुलाई से 23 जुलाई के बीच हुईइसमें अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा राजनीतिक नेताओं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों अमेरिकी नीति निर्माताओं और व्यापार उद्योग के प्रतिनिधियों केसाथ कई बैठकें शामिल थीं. वैश्विक भागीदारी विकास एजेंसियो नहीं मानते बेईमाननरेंद्र मोदी ने प्रमुख कांग्रेसियों सीनेटरों राज्यपालों और महापौरों के साथ अमेरिकी राजनीति विदेश नीति और अन्य मामलों पर चर्चा के माध्यम सेव्यापक जानकारी प्राप्त की.भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पहले ही भारत में यूएसएआईडी फंडिंग पर श्वेत पत्र की मांग की है. यह स्पष्ट कर दें कि हमवैश्विक भागीदारी विकास एजेंसियों यूएसएआईडी जैसी सहायता तंत्रों को बेईमान नहीं मानते हैं. यह भाजपा ही है जिसने सबसे पहले डीप स्टेट नैरेटिवशुरू किया और यूएसएआईडी को बदनाम करना शुरू किया. हालांकि हमारे पास पर्याप्त सबूत हैं कि आरएसएस-भाजपा भारतीय लोकतंत्र को अस्थिरकरने और हमारे संविधान को ध्वस्त करने के लिए विदेशी एजेंसियों से गुप्त सहायता ले रही है.
रेखा गुप्ता ने शपथ ग्रहण के बाद राष्ट्रपति से की मुलाकात, 27 साल बाद दिल्ली में बीजेपी की बनी सरकार

गुरुवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुए भव्य शपथ ग्रहण समारोह में शालीमार बाग की विधायक रेखा गुप्ता ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने भाजपा नेताओं प्रवेश वर्मा, आशीष सूद और मनजिंदर सिंह सिरसा को कैबिनेट मंत्री पद की शपथ दिलाई। मनजिंदरसिंह सिरसा ने पंजाबी में शपथ ली। इनके अलावा रविंद्र इंद्राज सिंह, कपिल मिश्रा और पंकज कुमार सिंह ने भी मंत्री पद की शपथ ली। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति से की मुलाकातमुख्यमंत्री पद संभालने के बाद रेखा गुप्ता ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने दिल्ली केविकास को लेकर अपनी योजनाओं पर चर्चा की। कार्रवाई के मूड में नई सरकारशपथ लेने के बाद ही मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने काम की शुरुआत कर दी है। भाजपा सरकार ने दिल्ली की सड़कों की हालत सुधारने, स्वास्थ्य सेवाओंको मजबूत करने और यमुना नदी की सफाई को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। आयुष्मान भारत योजना को दी मंजूरीरेखा गुप्ता ने शुक्रवार को समर्थकों से मुलाकात की और जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि पहली कैबिनेट बैठक में आयुष्मान भारतयोजना को मंजूरी दी गई है, जिसे पिछली सरकार ने रोक दिया था। जल्द ही यह योजना लागू होगी, जिससे दिल्ली के नागरिकों को मुफ्त औरबेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। जनता से संवाद और कार्य योजनाएँमुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शालीमार बाग स्थित अपने आवास पर जनता से मुलाकात की। बड़ी संख्या में लोग उन्हें बधाई देने पहुंचे। इस दौरान उन्होंनेदिल्लीवासियों से संवाद किया और उनकी समस्याओं को सुना। गड्ढों और जल संकट पर होगी त्वरित कार्रवाईमीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) और जल बोर्ड के अधिकारियों की बैठक बुलाई है।उनका मुख्य फोकस दिल्ली की सड़कों को गड्ढामुक्त करना और जल आपूर्ति में सुधार लाना है। रेखा गुप्ता ने आश्वासन दिया कि भाजपा सरकार दिल्ली को स्वच्छ, सुरक्षित और विकसित शहर बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।