सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास से निकाली तिरंगा यात्रा, बोले राष्ट्रीय संकट के समय धैर्य और एकता ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्रीय संकट के समय धैर्य और एकता ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी होती है. इस माहौल में जवानों के कारणभारत ने पाकिस्तान के हौसले पस्त किए दुनिया ने पाकिस्तान व उसके आकाओं के बेशर्मी भरे उस चेहरे को भी देखा. जिसमें आतंकियों के जनाजे मेंवहां के नेता व सैन्य अधिकारी भी शामिल हुए यह चीजें दिखाती हैं कि पाकिस्तान विफल राष्ट्र है और 70-75 वर्षों में उसने केवल आतंकवाद के बीजबोए हैं पाकिस्तान ने अपनी विफलता की कहानी ही दुनिया को बताई है. आतंकवाद को दिए जा रहे प्रश्रय इस बात को साबित करते हैं किआतंकवाद एक दिन पाकिस्तान को भी निगल देगा. खोखला हो चुका पाकिस्तान आज जिस प्रकार का दुस्साहस कर रहा है, ऑपरेशन सिंदूर उसकाजवाब था आने वाले समय में यह तय है कि भारत की तरफ जो भी अंगुली उठाएगा और बहन-बेटियों के सम्मान के विरुद्ध सुरक्षा में सेंध लगाने काकार्य करेगा, उसके जनाजे में कोई रोने वाला भी नहीं मिलेगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद सेना के शौर्य कोसलामी देने के लिए बुधवार को अपने सरकारी आवास से भारत शौर्य तिरंगा यात्रा को रवाना किया. सीएम योगी ने हाथ में तिरंगा लेकर यात्रा कानेतृत्व किया सीएम योगी ने प्रदेशवासियों की तरफ से ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जवानों, पूर्व सैनिकों, नौजवानों काअभिनंदन किया. भारतीय सेना के शौर्य व पराक्रम को किया सैल्यूटसीएम ने कहा कि पूरा देश भारतीय सेना के शौर्य व पराक्रम को सैल्यूट करते हुए बहादुर जवानों का अभिनंदन करने के लिए उतावला दिखाई दे रहा है. तिरंगा यात्रा में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी तिरंगा यात्रा में मौजूद रहे। देशभक्ति के जयघोष केबीच बच्चों ने 2000 फीट लंबा तिरंगा का प्रदर्शन किया. सीएम योगी ने कहा कि पाकिस्तान परस्त आतंकियों ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर केपहलगाम में वीभत्स व बर्बर घटना को अंजाम दिया था. जिसकी निंदा देश-दुनिया ने की थी लेकिन आतंकवाद का पोषक पाकिस्तान व उसके आकामौन रहे. भारत के आन-मान-शान की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हमारी सरकार ने सारे प्रमाण दिए, उसके बाद भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाजनहीं आया तो अंततः ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया गया. पहले ही दिन 100 से अधिक आतंकियों व प्रत्यक्ष रूप से आतंकवाद के विषबेल को पालने-पोसने में योगदान देने वाले उनके परिवार से जुड़े लोगों को वीभत्स कृत्य की सजा दी गई. सभी ने भारतीय सेना के पराक्रम व शौर्य का लोहा मानापाकिस्तान की हिमाकत का थल, वायु व नौसेना के बहादुर जवानों ने मजबूती से जवाब दिया और दुनिया को भी संदेश दिया कि हम छेड़ेंगे नहीं, लेकिन छेड़ने वालों को छोड़ेंगे नहीं. जवानों के सम्मान में तिरंगा यात्रामुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जवानों के सम्मान में भाजपा द्वारा तिरंगा यात्रा प्रारंभ की गई है. यह तिरंगा भारत के आन, मान-शान तथाशौर्य-पराक्रम का प्रतीक है तिरंगा के प्रति सम्मान का भाव व्यक्त करने, सैनिकों को सर्वोच्च सम्मान देने व पीएम मोदी के प्रति आभार व्यक्त करने केलिए यूपी में आज से तिरंगा यात्रा का शुभारंभ हो रहा है. भीषण गर्मी के बावजूद इतनी सुबह आपकी उपस्थिति भारतीय सेना के प्रति सम्मान कीअभिव्यक्ति का सुंदर उदाहरण है. यही धैर्य व समर्पण का भाव भारतीय नागरिकों ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत सैनिकों व देश की सरकार के प्रति व्यक्तकिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी का पहले दिन से ही संकल्प रहा है कि जब हम नए और विकसित भारत की बात करते हैं तो हमारा ध्येय राष्ट्रप्रथम होना चाहिए. विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए आवश्यक है कि हम राष्ट्र प्रथम के भाव के साथ काम करें. जब राष्ट्र प्रथमका भाव 140 करोड़ भारतीयों की प्राथमिकता होगी तो अपने-अपने क्षेत्र में कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए हर भारतवासी लगेगा, फिर दुनिया कीकोई ताकत भारत के सामने टिक नहीं पाएगी. सीएम ने पीएम मोदी के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने पूरे देश को एकजुट रखा और पंजाब केआदमपुर में जाकर बहादुर जवानों के हौसलों को बढ़ाया.
उत्तर प्रदेश के जेवर में ₹3,706 करोड़ के सेमीकंडक्टर प्लांट को दी गई मंजूरी, एचसीएल और फॉक्सकॉन में लगाने की दी जाएगी साझेदारी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश के जेवर में एक ₹3,706 करोड़ के सेमीकंडक्टर प्लांट को मंजूरी दे दी है. यह प्लांट एचसीएल और फॉक्सकॉन कीसाझेदारी में लगाया जाएगा और इसमें मोबाइल, लैपटॉप और गाड़ियों के लिए डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स बनाए जाएंगे. मामले में सूचना एवं प्रसारण मंत्रीअश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह देश का छठा सेमीकंडक्टर प्लांट होगा और इसकी उत्पादन क्षमता 20,000 वेफर्स प्रति माह होगी, जिससे हर महीने3.6 करोड़ चिप्स तैयार की जाएंगी. केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश के जेवर में भारत की छठी सेमीकंडक्टर इकाई कोमंजूरी दे दी है. उन्होंने बताया कि भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत अब तक 5 सेमीकंडक्टर इकाइयों को मंजूरी दी गई है और वहां तेजी से निर्माणकार्य चल रहा है. एक इकाई में इसी साल उत्पादन शुरू हो जाएगा यह इकाई एचसीएल और फॉक्सकॉन का संयुक्त उपक्रम है. केंद्र सरकार की ओरसे जारी बयान में कहा गया है कि पांच सेमीकंडक्टर इकाइयां पहले से ही निर्माण के उन्नत चरणों में हैं. सेमीकंडक्टर उघोग को विकसित करने की यात्रा में आगे बढ़ रहा है भारतदरअसल इस छठी इकाई को मंजूरी मिलने के बाद भारत रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर उद्योग को विकसित करने की अपनी यात्रा में आगेबढ़ गया है. आज स्वीकृत इकाई एचसीएल और फॉक्सकॉन का संयुक्त उद्यम है. इसके साथ ही विज्ञप्ति नें कहा गया है, एचसीएल का हार्डवेयरविकसित करने और निर्माण करने का लंबा इतिहास रहा है. फॉक्सकॉन इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में एक वैश्विक प्रमुख कंपनी है वे मिलकर यमुनाएक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण में जेवर हवाई अड्डे के पास एक संयंत्र स्थापित करेंगे. यह संयंत्र मोबाइल फोन, लैपटॉप, ऑटोमोबाइल, पीसी और डिस्प्ले वाले अन्य उपकरणों के लिए डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स का निर्माण करेगा. संयंत्र को प्रति माह 20,000 वेफर्स के लिए डिजाइन कियागया है. इस इकाई की उत्पादन क्षमता प्रति माह 36 मिलियन यूनिट है. इससे पहले मंगलवार को जापानी कंपनी रेनेसास ने भारत में सेमीकंडक्टर चिपबनाने के दो केंद्रों की शुरुआत की. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को नोएडा और बंगलूरू में जापानी कंपनी रेनेसास के नए सेमीकंडक्टरडिजाइन केंद्रों का उद्घाटन किया था सबसे अहम बात यह है कि, यह कंपनी भारत में दुनिया की सबसे छोटी 3 नैनोमीटर की चिप बनाएगी.
मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विजश शाह की बढ़ सकती है मुश्किलें, कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान को लेकर हाईकोर्ट ने एफ आई आर दर्ज करने के दिए निर्देश

मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विजय शाह की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए विवादित बयान पर अब मप्र हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञानलेकर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं हालांकि मंत्री पहले ही मामले को लेकर माफी मांग चुके हैं. दरअसल, मोहन सरकार के मंत्री विजय शाहने मानपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान दे डाला था. इसका कांग्रेस ने विरोध किया है और मंत्री कोपद से हटाने की मांग कर डाली मानपुर में आयोजित हलमा कार्यक्रम में मंत्री शाह ने पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए कहा, जिन आंतकियों नेपहलगाम में लोगों को मारा, उनके कपड़े उतरवाए, उन आंतकियों ने हमारी बहनों का सिंदूर उजाड़ा. मंत्री शाह ने कहा, पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हीं कीबहन को भेजकर उनकी ऐसी-तैसी करवाई. बयान को लेकर जब राजनीति गरमा गई तो उन्होंने कहा कि हमारी बहनों का सिंदूर उजाड़ने वाले वालों कोहमने उन्हीं की भाषा में जवाब दिया है. उनके भाषण को अलग संदर्भ में नहीं देखना चाहिए। वो हमारी बहनें हैं। उन्होंने पूरी ताकत से सेना के साथमिलकर काम किया है. हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन तथा जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने मंत्री के विवादित बयान को संज्ञान में लेते हुएयाचिका के रूप में सुनवाई करते हुए उनके खिलाफ चार घंटे में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं. युगलपीठ ने पुलिस विभाग को शाम 6 बजेतक एफआईआर करने के निर्देश दिए हैं. प्रकरण दर्ज करने के आदेश किए जारीयुगलपीठ ने मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में करते हुए उक्त आदेश जारी किये. युगलपीठ ने मंत्री के खिलाफ बीएनएस की धारा 196 तथा 197 के तहत प्रकरण दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं. याचिका में प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को अनावेदक बनाया गया है युगलपीठ नेअपने आदेश में कहा है कि एफआईआर दर्ज किए जाने के संबंध में न्यायालय को अवगत कराया जाए. याचिका पर अगली सुनवाई गुरुवार की सुबह10.30 बजे निर्धारित की गई है. मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर मध्यप्रदेश के मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने कहा कि हमने मध्य प्रदेश के मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफएफआईआर दर्ज कराई है. राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि वह सशस्त्र बलों की वीरता को सलाम करते हैं, और उन्होंने यह भीकहा कि पूरा देश इस कठिन समय में सशस्त्र बलों के समर्थन में खड़ा है. मध्य प्रदेश के एक मंत्री ने सेना के अधिकारियों और बहनों का अपमानकिया. इस पर भाजपा चुप क्यों है? अगर उन्हें 24 घंटे के भीतर बर्खास्त नहीं किया गया, तो हम देश के सभी पुलिस थानों में कुंवर विजय शाह केखिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे. राजनीतिक दल है हमलावरदरअसल विवादित बयान सामने आने के बाद कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दल हमलावर हैं. मंत्री विजय शाह के इस्तीफे की मांग तक की जा रही हैपुतले जलाए जा रहे हैं उन पर कार्रवाई की मांग तेज हो रही है. इधर भाजपा संगठन ने भी सख्त नाराजगी जताई है. पार्टी आलाकमान ने तत्काल उन्हेंभोपाल स्थित प्रदेश मुख्यालय तलब किया संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा और बाद में प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से मुलाकात कर शाह ने सफाई दीऔर खेद जताया. उनका इरादा किसी का अपमान करने का नहीं था और यदि उनके बयान से किसी को ठेस पहुंची हो तो वे कई बार माफी मांगने कोतैयार हैं. उन्होंने यह भी कहा कि उनका परिवार सैन्य परंपरा से जुड़ा रहा है. मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि कर्नल सोफिया कुरैशी मेरे लिए सगीबहन से बढ़कर हैं, जिन्होंने उनका बदला लिया. मेरा किसी को ठेस पहुंचाने का न तो कोई इरादा था और न ही कोई इच्छा अगर मेरी किसी बात सेकिसी को बुरा लगा हो, तो मैं दिल से माफी मांगता हूं. मंच से दिए गए अपने बयान पर उन्होंने भावनात्मक प्रतिक्रिया बताते हुए कहा कि यदि उनकेशब्दों से किसी धर्म या व्यक्ति को ठेस पहुंची हो तो वह क्षमाप्रार्थी हैं. पार्टी की ओर से दी गई फटकार और विपक्ष के हमलों के बीच मंत्री शाह केइस बयान ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है.
संजय सिंह का बीजेपी पर हमला: विजय शाह की टिप्पणी पर सवाल

आम आदमी पार्टी के वरिष्ट नेता राज्य सभा सांसद संजय सिंह ने आम आदमी पार्टी कार्यालय में प्रेस वार्ता कर मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह द्वाराकर्नल सोफ़िया कुरेशि पर अभद्र टिप्पणी पर संजय सिंह ने बीजेपी पर निशाना साधा राज्य सभा सांसद संजय सिंह ने मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह द्वारा दिए गए अभद्र टिप्पणी के बाद पूरा विपक्ष गरमाया है संजय सिंह ने प्रेस वार्ता नेकहा की विजय शाह ने जो देश की बहादुर बेटी सोफ़िया कुरेशि पर जो अभद्र टिप्पणी की है बहुत शर्म नाक है संजय सिंह ने कहा की सोफ़िया कुरैशीबहादुर है जिस पर पूरा देश गर्व कर रहा है जिस तरह से ऑपरेशन सिंदूर में जो बहादुरी दिखाई है उसके बहादुरी को पूरा देश देखा है किस तरह सेपाकिस्तान द्वारा किए गए हर एक प्रहार का डट कर मुक़ाबला किया पाकिस्तानी सेना डर की जिंदगी जीने लगे और ऐसी देश की बहादुर बेटी पर इसतरह की अभद्र टिप्पणी करना ये बेहद शर्मनाक है बीजेपी के नेताओं में मंत्रीयों को बोलने का तमीज़ नहीं है क्या बोलना चाहिए क्या नहीं ये बीजेपीभूल चुकी है। संजय सिंह ने अपने प्रेस वार्ता में कहा कि कर्नल सोफिया कुरैशी पर पूरे देश को गर्व है। लेकिन मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह नेउनको लेकर ‘गंदी बात’ कर दी। इतनी गंदी कि उसे बता भी नहीं सकता। बयान के वायरल होते ही हल्ला मच गया। सीधे शाह को भाजपा कार्यालयतलब कर लिया गया, जहां जाकर उन्होंने माफी मांग ली। आलाकमान के तेवर को देखते हुए मंत्री विजय शाह हवाई चप्पल में ही भागते हुए पार्टीऑफिस पहुंचे। पार्टी ने विजय शाह को इस तरह फटकार लगाई की मीडिया के सामने माफ़ी माँगनी पड़ी संजय सिंह ने कहा की बात ये है कीआख़िरकार विजय शाह ने शाह ने क्या सोच कर ये अभद्र टिप्पणी किया ऐसे ऐसे लोग बीजेपी में भरे हुए की उनको महिलाओं का सम्मान करने नहींआता है इसको देश कभी इसे स्वीकार नहीं करेगा देश कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। राज्य सभा सांसद संजय सिंह ने कहा की मंत्री विजय शाह को बर्खास्त करके और उसपर क़ानूनी करवाई गिरफ़्तार करे साथ ही संजय सिंह ने कहा कीपीएम मोदी सामने आए और इसका जवाब दे क्योंकि ye वो व्यक्ति है जिसने पूर्व सीएम की पत्नी पर भी आपत्ति जनक ब्यान था संजय सिंह ने की येहिमांशी नर्वाल को भी बदनाम कर रहे है शाहिद की पत्नी पर बोल रहे है विक्रम मिश्री को उनकी बेटी को उनके परिवार को ये गाली दे रहे है साथ हीसंजय सिंह ने कहा की सीस फ़ायर का निर्णय मोदी जी का था मोदी जी ज़िम्मेदार है पार्टी में ऐसे लोगों को रखने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को माफ़ीमाँगनी चाहिए और इस गंभीर मशले पर आप छिप नहीं सकते चुप नहीं रह सकते।
अरुणाचल प्रदेश के इलाकों के नामकरण के चीनी दुस्साहस पर भारत ने अपनाया अपना कड़ा रुख, चीन को लगाई फटकार बोले हरकतों से आना चाहिए बाज

अरुणाचल प्रदेश के इलाकों के नामकरण के चीनी दुस्साहस पर भारत ने सख्त रुख अपनाया है चीन को फटकार लगाते हुए दो टूक शब्दों में कहा हैकि उसे ऐसी हरकतों से बाज आना चाहिए ऐसी करतूतों से सच्चाई नहीं बदलने वाली विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘हमने देखा है कि चीन भारतीय राज्यअरुणाचल प्रदेश में कुछ स्थानों के नामकरण के अपने फर्जी और बेतुके प्रयासों में लगा हुआ है अपने सैद्धांतिक रुख को ध्यान में रखते हुए हम इसतरह के प्रयासों को साफ तौर पर खारिज करते हैं जबरन नाम बदलने से इस निर्विवाद वास्तविकता को नहीं बदलेगा कि अरुणाचल प्रदेश भारत काअभिन्न और अविभाज्य अंग था, है और हमेशा रहेगा भारत की यह प्रतिक्रिया चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश में कुछ स्थानों के लिए चीनी नामों कीघोषणा करने के जवाब में आई है, जिसे पड़ोसी देश तिब्बत का दक्षिणी भाग होने का दावा करता है. हथकंडे से नहीं बदलती सच्चाई-रणधीर जायसवालदरअसल विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल इस मुद्दे पर मीडिया के एक सवाल का जवाब दे रहे थे उन्होंने कहा कि चीन के इस हथकंडे सेसच्चाई नहीं बदल जाएगी कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अंग है और रहेगा. इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी कहा था कि अगरआज मैं आपके घर का नाम बदल दूं, तो क्या यह मेरा हो जाएगा? अरुणाचल प्रदेश भारत का एक राज्य था, है और हमेशा रहेगा. नाम बदलने सेकोई प्रभाव नहीं पड़ता मुझे लगता है कि हमने इसे सही ढंग से ऐसे हथकंडों को निरर्थक करार दिया है. बार-बार ऐसा करने से भी यह निरर्थक ही रहेगाहै इसलिए मैं बहुत स्पष्ट होना चाहता हूं अरुणाचल प्रदेश भारत था, है और हमेशा रहेगा. विदेश मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया था कि मुझे उम्मीदहै कि मैं इसे इतनी स्पष्टता से कह रहा हूं कि न केवल देश में, बल्कि देश से बाहर भी लोगों को यह संदेश बहुत स्पष्ट रूप से मिल जाएगा. भारत नेबार-बार चीन द्वारा भारतीय क्षेत्रों का नाम बदलने के निराधार तर्कों को दृढ़ता से खारिज किया है अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्यअंग था है और हमेशा रहेगा. 30 स्थानों के चीनी नोमों की थी सूची जारीपिछले साल अप्रैल में भी जब बीजिंग ने अरुणाचल प्रदेश में 30 स्थानों के चीनी नामों की सूची जारी की थी. तब भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी थीचीनी नागरिक मामलों के मंत्रालय ने 2017 में जांगनान में छह स्थानों के नामों की पहली सूची जारी की थी इसके बाद 2021 में 15 स्थानों की दूसरीसूची जारी की गई. फिर 2023 में 11 स्थानों के नामों वाली एक और सूची जारी की गई. हालांकि भारत न ऐसे हथकंडों को सिरे नकार दिया था औरकहा था कि इससे हकीकत नहीं बदलने वाली चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश में स्थानों के नामों की नई सूची ऐसे समय जारी की गई है. जब दोनोंदेशों की ओर से पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध से प्रभावित संबंधों को सामान्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है. लगभग पांच साल के अंतराल के बादभारत और चीन ने पिछले महीने कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने पर सहमत हुए थे. कैलाश मानसरोवर यात्रा को 2020 में कोरोनामहामारी और उसके बाद पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैन्य गतिरोध के कारण निलंबित कर दिया गया था.
पंजाब के फिरोजपुर में अंतराष्ट्रीय बॉर्डर पर गलती से पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश कर गए थे बीएसएफ जवान पूर्णम कुमार शॅा, लंबे इंतजार केबाद हुई वतन वापसी

पंजाब के फिरोजपुर में अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर गलती से पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश करने वाले बीएसएफ जवान पूर्णम कुमार शॉ की बुधवार को रिहाईहो गई है. वे सकुशल वापस पहुंच गए हैं. शॉ की सुरक्षित रिहाई के लिए बीएसएफ़ ने अथक प्रयास किया था. पाकिस्तान की कैद से 504 घंटे में हुईबीएसएफ जवान की रिहाई के लिए छह से अधिक फ्लैग मीटिंग की गई तो वहीं अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर 84 बार सीटी बजाई गई थी. सीओ लेवल कीमीटिंग के अलावा बीएसएफ और रेंजर्स के शीर्ष अधिकारियों ने भी इस मुद्दे पर बातचीत की. बता दें कि बीएसएफ जवान 23 अप्रैल को गलती सेपाकिस्तान की तरफ चला गया था. जवान की सकुशल रिहाई के लिए बीएसएफ द्वारा लगातार प्रयास जारी रखे गए. अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर परबीएसएफ, रोजाना तीन से चार बार सीटी बजाकर या झंडा दिखाकर पाकिस्तानी रेंजर्स को बातचीत का सिग्नल भेजा गया. कई बार फ्लैग मीटिंग भीहुई सूत्रों का कहना है कि जवान की रिहाई के लिए सभी तरह के प्रयास किए गए. यह बात तय हो गई थी कि पाकिस्तानी रेंजर्स के लिए लंबे समयतक बीएसएफ जवान को अपने कब्जे में रखना संभव नहीं होगा. सूत्रों के अनुसार, इस मामले में बीएसएफ और पाकिस्तानी रेंजर्स के बीच छह सेअधिक फ्लैग मीटिंग भी हुई है. सीटी बजाकर पाकिस्तानी रेंजर्स को बुलाने की कोशिशउसमें यही बताया गया कि जैसे ही रेंजर्स के शीर्ष नेतृत्व से हरी झंडी मिलेगी, जवान को छोड़ दिया जाएगा. बीएसएफ ने अपने जवान की रिहाई केलिए कोई भी कसर बाकी नहीं रखी. बॉर्डर पर रोजाना ही बीएसएफ की तरफ से जवान की रिहाई का प्रयास किया जा रहा. मसलन, बॉर्डर पर सीटीबजाकर पाकिस्तानी रेंजर्स को बुलाने की कोशिश होती रही. एक ही दिन में कई बार सीटी बजाने की प्रक्रिया को दोहराया गया. इतना ही नहीं, फ्लैगमीटिंग के लिए सीटी बजाने के अलावा झंडा भी दिखाया जाता है. बीएसएफ का मकसद है कि किसी भी तरह से पाकिस्तानी रेंजर्स, बातचीत के लिएसामने आएं. जब एक बार सीटी की आवाज का पाकिस्तान की तरफ से कोई जवाब नहीं मिलता तो कुछ समय बाद दोबारा से जवान वहां पर पहुंचतेथे. सूत्र बताते हैं कि गत सप्ताह के बाद से पाकिस्तानी रेंजर्स, फ्लैग मीटिंग से दूर भागने लगे रेंजर्स की तरफ से कोई ठोस रिस्पॉंस नहीं मिल रहा था. ऐसा लग रहा था कि जानबूझकर पाकिस्तानी रेंजर्स, फ्लैग मीटिंग को तव्वजो नहीं दे रहे. बीएसएफ ने अपनाया दूसरा तरीकादरअसल उसके बाद बीएसएफ ने बातचीत का दूसरा तरीका अपनाया. बीएसएफ जवान की रिहाई सुनिश्चित कराने के लिए डिप्लोमेटिक चैनल की भीमदद लेने की बात सामने आई है. डीजीएमओ की बैठक में यह मुद्दा उठाया गया. यह घटना 23 अप्रैल को तब हुई, जब बीएसएफ जवान पीके शॉ182वीं बटालियन, बॉर्डर के गेट संख्या 208/1 पर तैनात थे। वे फसल कटाई के दौरान भारतीय किसानों पर नजर रख रहे थे। बीएसएफ, किसानोंकी सुरक्षा भी करती है. लिहाजा तेज गर्मी के मौसम में जवान ने जब पेड़ की छांव में खड़े होने का प्रयास किया तो पाकिस्तानी रेंजर्स ने उसे हिरासत मेंले लिया. उनकी सर्विस राइफल भी जब्त कर ली गई. बताया जाता है कि वह कुछ समय पहले ही इस क्षेत्र में तैनात हुआ था. बीएसएफ के पूर्वआईजी बीएन शर्मा बताते हैं, ऐसे मामले कमांडेंट स्तर पर निपट जाते हैं. कई बार तो कुछ घंटों में ही जवान वापस आ जाते हैं. बशर्ते, कोई अपराधकी मंशा न हो हिरासत में जवान से पूछताछ की जाती है अगर सीओ के लेवल पर बात नहीं बनती है तो उसके बाद डीआईजी स्तर पर बातचीत होतीहै. इसके बाद आईजी स्तर पर बात की जाती है जब सभी तरह के रास्ते बंद हो जाते हैं तो कूटनीतिक प्रयास किए जाते हैं.
भारत न डरा है न डरेगा , न ही किसी के दबाव में मोदी जी आयेंगे…. सेना और सरकार के साथ है हर भारतीय…

भारत ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि वह ना तो डरता है, ना ही किसी भी प्रकार के आतंक के सामने झुकता है। पहलगाम, जम्मू-कश्मीर में 22 अप्रैल 2025 को हुए भीषण आतंकवादी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई और 17 लोग गंभीररूप से घायल हुए। यह हमला उस वक्त हुआ जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब दौरे पर थे और अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारतकी यात्रा पर थे। इस आतंकवादी हमले के बाद भारत ने जो प्रतिक्रिया दी, वह “ऑपरेशन सिंदूर” के रूप में इतिहास में दर्ज हो गई। आतंकवादी हमला: एक कायरता पूर्ण कृत्य इस हमले का निशाना बने अधिकांश लोग पर्यटक थे जो ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहे जाने वाले बायसरन की खूबसूरत वादियों में छुट्टियां बिताने आए थे।हमला इतने सुनियोजित और बर्बर तरीके से किया गया था कि इसकी तुलना 2019 के पुलवामा हमले से की जाने लगी। हमलावरों का उद्देश्य सिर्फजान-माल का नुकसान करना ही नहीं था, बल्कि भारत की सुरक्षा, अखंडता और वैश्विक छवि को भी चोट पहुँचाना था। ऑपरेशन सिंदूर की योजना और क्रियान्वयन भारत सरकार ने तत्काल प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) ने मिलकर उच्चस्तरीयसुरक्षा बैठकें कीं। 6 और 7 मई की दरम्यानी रात को भारतीय सशस्त्र बलों ने “ऑपरेशन सिंदूर” की शुरुआत की। इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तानअधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकवादी शिविरों को लक्षित किया गया। भारतीय वायुसेना और सेना के विशेष बलों ने एक संयुक्त अभियान मेंसिर्फ 25 मिनट के अंदर नौ अलग-अलग ठिकानों पर 24 सटीक हमले किए। ये हमले जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिज्ब-उल-मुजाहिदीनजैसे संगठनों के शिविरों पर केंद्रित थे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने यह कार्रवाई “सटीकता, एहतियात और करुणा” के साथ की, ताकि केवल आतंकवादी संरचनाओं को हीनुकसान पहुँचे और निर्दोष नागरिकों को कोई हानि न हो। उन्होंने इसे भारत के “जवाब देने के अधिकार” के तहत उचित ठहराया। पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और भारत का प्रत्युत्तर ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने भारत के जम्मू, पठानकोट और उधमपुर स्थित सैन्य ठिकानों को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाने कीकोशिश की। हालांकि, भारतीय वायु रक्षा प्रणाली, विशेषकर S-400, ने इन हमलों को नाकाम कर दिया और कई पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोनको मार गिराया। इसके तुरंत बाद भारत ने पाकिस्तान के वायु रक्षा ठिकानों पर जवाबी हमला किया। खासकर लाहौर में स्थित वायु रक्षा प्रणाली को निष्क्रिय कियागया। इस प्रतिक्रिया के बाद ही दोनों देशों ने 10 मई को “सभी फायरिंग और सैन्य कार्रवाई” को रोकने पर सहमति जताई। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत भारत का अधिकार संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 51 सदस्य राज्यों को आत्म-रक्षा का अधिकार देता है, यदि उन पर सशस्त्र हमला होता है। जबकि यू.एन. चार्टर विशेषरूप से यह नहीं कहता कि “सशस्त्र हमला” क्या है, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने इसे “बल के उपयोग का सबसे गंभीर रूप” कहा है। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अनुच्छेद 51 के अंतर्गत सही ठहराया, भले ही विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं किया। उन्होंने इनहमलों को “मापदंडित और गैर-उत्तेजक” करार दिया। 8 मई को उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के 15 में से 13 सदस्य देशों के राजदूतोंको हमलों की जानकारी दी। पाकिस्तान के राजदूत को आमंत्रित नहीं किया गया था। गैर–राज्य अभिनेताओं के खिलाफ आत्म–रक्षा का अधिकार यू.एन. चार्टर की राज्य-केंद्रित प्रकृति के कारण गैर-राज्य अभिनेताओं जैसे आतंकी संगठनों पर कार्रवाई करना जटिल हो जाता है। हालांकि, 9/11 केबाद, अमेरिका जैसे देशों ने यह तर्क दिया कि आत्म-रक्षा का अधिकार आतंकवादी संगठनों पर भी लागू होता है। ICJ की राय अधिक प्रतिबंधात्मक रही है, जो कहती है कि जब तक किसी राज्य को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, तब तक अनुच्छेद51 का प्रयोग नहीं किया जा सकता। भारत ने अपने बयानों में पाकिस्तान की मिलीभगत और आतंकियों को समर्थन देने के ठोस प्रमाण दिए, जिससेयह हमला एक राज्य-प्रायोजित आतंकवाद का उदाहरण बन गया। सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद की गोलाबारी के चलते जम्मू, राजौरी, पुंछ, बारामुल्ला और कुपवाड़ा जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में भय का वातावरण उत्पन्नहो गया। पाकिस्तानी सेना द्वारा की गई गोलाबारी में कम से कम 12 नागरिकों और एक सैनिक की मृत्यु हो गई, जबकि 51 अन्य घायल हुए। अधिकारियों ने इन क्षेत्रों में अस्थायी राहत शिविर स्थापित किए और प्रत्येक सीमावर्ती जिले को ₹5 करोड़ की राशि जारी की। मुख्यमंत्री उमरअब्दुल्ला ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपायुक्तों के साथ आपात बैठक कर राहत और बचाव कार्यों का निर्देश दिया। आतंकवादी संगठन और उनकी भूमिका जिन आतंकी शिविरों को निशाना बनाया गया, उनका संबंध प्रमुख प्रतिबंधित संगठनों जैसे जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिज्ब-उल-मुजाहिदीन से था। जैश-ए-मोहम्मद (JeM): इसका मुख्यालय पाकिस्तान के बहावलपुर में है, और इसे मसूद अजहर ने 2000 में स्थापित किया था। यह संगठन संसदपर हमले से लेकर पुलवामा आत्मघाती हमले तक कई हमलों में शामिल रहा है। लश्कर-ए-तैयबा (LeT): यह संगठन 2008 के मुंबई हमलों और 2006 के मुंबई ट्रेन धमाकों के लिए जिम्मेदार रहा है। इसका मुख्यालय पाकिस्तानके लाहौर के पास मुरीदके में है। भारत की सैन्य क्षमताएं और दक्षता भारत ने इस पूरे ऑपरेशन में अपनी सैन्य रणनीति और तकनीकी दक्षता का परिचय दिया। S-400 वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तान द्वारा दागी गईआठ मिसाइलों और कई ड्रोन को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया। जवाबी हमले में भारत ने पाकिस्तान के तीन फाइटर जेट्स को भी मार गिराया, जिनमें से एक F-16 और दो JF-17 थे। भारत ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि वह ना तो डरता है, ना ही किसी भी प्रकार के आतंक के सामने झुकता है। भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर उसकी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा पर खतरा आता है तो वह चुप नहीं बैठेगा।रक्षा मंत्रालय ने कहा कि भारतीय प्रतिक्रिया पाकिस्तान के समान ही तीव्रता के साथ उसी क्षेत्र में रही है, लेकिन भारत तनाव नहीं बढ़ाना चाहता। भारत की यह नीति स्पष्ट है: वह न तो पहले हमला करता है और न ही वह किसी भी उकसावे को अनदेखा करता है। “ऑपरेशन सिंदूर” इसका प्रमाणहै। यह न केवल सैन्य कार्रवाई थी, बल्कि यह एक कूटनीतिक और कानूनी संदेश भी था – कि भारत अपनी रक्षा के लिए सक्षम है और इसके लिएअंतरराष्ट्रीय मानदंडों का पालन करता है। ट्रंप की ‘संधि नीति’ और भारत में आक्रोश इस सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 मई को सोशल मीडिया पर अचानक घोषणा कर दी कि भारत और पाकिस्तान संघर्षविराम पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने दावा किया कि यह अमेरिका की मध्यस्थता से संभव हो पाया है और अब दोनों देश एक निष्पक्ष स्थान परबातचीत करेंगे। भारत में इस घोषणा को लेकर व्यापक आक्रोश फैल गया। भारतीय जनता ने ट्रंप के इस कदम को पाकिस्तान के प्रति नरम रुख और भारत की दृढ़रणनीतिक स्थिति को कमजोर करने वाला कदम माना। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत की उस ऐतिहासिक नीति के खिलाफ है जिसमें किसीतीसरे पक्ष को भारत-पाक मुद्दों में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाती। ट्रंप की धमकी और विपक्ष का आक्रामक रुख 12 मई को ट्रंप के एक और बयान ने इस विवाद को और गहरा कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि भारत और पाकिस्तान युद्ध नहीं रोकते, तो अमेरिकाउनके साथ व्यापार नहीं करेगा। इस धमकी जैसे बयान ने भारत में विरोधियों को प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधने का मौका दे दिया। विपक्षी पार्टियों ने सवाल उठाया कि क्या भारत अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता को अमेरिका के व्यापारिक हितों के लिए गिरवी रखेगा? कांग्रेस, आरजेडीऔर अन्य दलों ने सरकार से संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की ताकि ट्रंप की ‘चौधराहट’ को लेकर दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया जा सके। आरजेडी सांसद मनोज झा ने कड़े शब्दों में कहा कि ट्रंप को कश्मीर मुद्दे में हस्तक्षेप करने का अधिकार किसने दिया? वहीं आरजेडी की प्रवक्ता प्रियंकाभारती ने मोदी पर कटाक्ष करते हुए उन्हें ’56 इंच की भीगी बिल्ली’ तक कह डाला। ब्रह्मा चेलानी का विश्लेषण: नीति बनाम नेतृत्व विदेश मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने ट्रंप के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने पाकिस्तान को भारतीय सेना की सजा से बचा लिया।उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप का यह हस्तक्षेप दरअसल पाकिस्तान के उस एजेंडे को हवा देता है जो कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करना चाहता है। हालांकि चेलानी ने प्रधानमंत्री मोदी की उस आलोचना की सराहना की जो उन्होंने परोक्ष रूप से अपने संबोधन में ट्रंप को की थी। मोदी ने स्पष्ट करदिया कि भारत पाकिस्तान से केवल दो मुद्दों पर बात करेगा—पाक-अधिकृत कश्मीर की वापसी और आतंकवाद का खात्मा। भारतीय अमेरिकियों की नाराजगी अमेरिका में रहने वाले भारतीयों ने भी ट्रंप की आलोचना की। प्रमुख भारतीय अमेरिकी लेखक और टिप्पणीकार विभूति झा ने ट्रंप को संबोधित करतेहुए कहा कि आपने नरेंद्र मोदी और शहबाज शरीफ को एक ही तराजू में तौलकर ‘दोस्ती’ जैसे शब्द को अपमानित किया है। उन्होंने कहा कि जो नेताअपने सैनिकों और आतंकवादियों के बीच फर्क नहीं कर पाते, वे अच्छे लीडर नहीं कहे जा सकते। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर मोहन सिन्हा जैसे भारतीय अमेरिकियों ने भी ट्रंप की अज्ञानता पर तीखी प्रतिक्रिया दी और अमेरिका की दक्षिण एशिया नीति कोएकतरफा और ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान समर्थक बताया। ट्रंप के रुख में बदलाव: चुनावी रणनीति या अमेरिकी नीति? एक बड़ा सवाल यह है कि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में पाकिस्तान की सैन्य सहायता रोक दी थी, चीन के खिलाफ भारत का समर्थन किया था, फिर अब उन्होंने यह यू-टर्न क्यों लिया? विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप आगामी चुनावों में यह दिखाना चाहते हैं कि वे वैश्विक शांति लाने में सक्षम हैं। ट्रंप पहले ही रूस-यूक्रेन और इजरायल-हमास संघर्ष में कोई उल्लेखनीय भूमिका नहीं निभा पाए हैं। भारत-पाक संघर्ष उन्हें एक मौका लगा जिससे वेअपनी कूटनीतिक सक्रियता प्रदर्शित कर सकें। यह उनका घरेलू चेहरा चमकाने का प्रयास था। वहीं कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यह ट्रंप का व्यक्तिगत निर्णय नहीं बल्कि अमेरिका की पारंपरिक रणनीति है। पाकिस्तान की भौगोलिक स्थितिऔर वहां की सैन्य संरचना अमेरिका के लिए हमेशा से रणनीतिक रूप से अहम रही है। भारतीय हमलों के प्रभाव और पाकिस्तान पर परमाणु संकट की मार 12 मई को भारतीय सेना द्वारा की गई कार्रवाई में पाकिस्तान के प्रमुख हवाई ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसमें रफीकी एयरबेस (शोरकोट), नूरखान एयरबेस (रावलपिंडी), मलीर छावनी (कराची), और कई रडार साइटें शामिल थीं। इससे यह स्पष्ट हुआ कि भारत ने पाकिस्तान के हर रणनीतिकशहर में सैन्य ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। यह भी दावे किए जा रहे हैं कि भारत ने एक परमाणु सुविधा केंद्र पर भी हमला किया जिससे अमेरिका को अपना परमाणु सुरक्षा सहायता विमानबी350 AMS तैनात करना पड़ा। हालांकि भारत की सेना ने इन दावों को खारिज किया, क्यूंकि इससे तनाव की गंभीरता का अंदाजा लगाया जासकता है। कूटनीति और राष्ट्रीय स्वाभिमान का संतुलन इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब 1999 या 2001 वाला भारत नहीं है, जो बाहरी दबाव में झुकता था। हालांकि अमेरिका कीतरह के देशों के साथ रणनीतिक संबंध बनाए रखना भारत के लिए आवश्यक है, लेकिन यह संबंध किसी कीमत पर संप्रभुता की हानि के साथ नहीं होसकते। डोनाल्ड ट्रंप की हालिया भूमिका ने अमेरिका-भारत संबंधों की जटिलता को उजागर कर दिया है। यह भारत की विदेश नीति के लिए एक चुनौतीपूर्णमोड़ है—जहां उसे वैश्विक कूटनीति, क्षेत्रीय सुरक्षा और घरेलू राजनीति के बीच संतुलन साधना होगा। प्रधानमंत्री मोदी को चाहिए कि वे ट्रंप जैसेअप्रत्याशित नेताओं से पार पाने के लिए अधिक सक्रिय और पारदर्शी कूटनीति अपनाएं ताकि भारत की गरिमा और सुरक्षा को कोई आंच न आए।
अशोक गहलोत का बयान: इतिहास की यादें और अमेरिका का दबाव

13 मई 2025 – वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाल ही में एक प्रेस वार्ता में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने हालिया घटनाओं, विशेष रूप से पहलगाम हमले, सीज़फायर की अचानक घोषणा, और अमेरिका की भूमिकाको लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। लंबे अरसे बाद संवाद:अशोक गहलोत ने पत्रकारों से बातचीत की शुरुआत में कहा कि लंबे समय बाद संवाद हो रहा है और उन्हें खुशी है कि वे मीडिया से मुखातिब हैं। पीएम मोदी के भाषण से निराशा:गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रात को देश को संबोधित किया, लेकिन उनके भाषण से देश को बहुत निराशा हुई। उन्होंने भविष्य कीयोजनाएं बताईं, लेकिन वर्तमान हालात पर स्पष्टता नहीं दी। सीजफायर और गोपनीयता पर सवाल:उन्होंने कहा कि जिस तरह से सीजफायर की घोषणा की गई, वह पूरी तरह से गोपनीय और अस्पष्ट थी। देश समझ नहीं पा रहा कि यह कब और कैसेहुआ। गहलोत ने यह भी पूछा कि अगर आतंकवाद पर कार्रवाई जारी रहेगी, तो फिर सीजफायर का मतलब क्या है? सेना की तारीफ:गहलोत ने भारतीय सेना की तारीफ की कि उन्होंने बेहद संयम और समझदारी के साथ सिर्फ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इससे देश कीप्रतिष्ठा बढ़ी। ऐतिहासिक सन्दर्भ:गहलोत ने भारत के सैन्य इतिहास की याद दिलाई: 1961 में गोवा मुक्ति1971 में बांग्लादेश युद्ध जिसमें पाकिस्तान के 93,000 सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया। सिक्किम का भारत में विलयकारगिल युद्ध और कई अन्य संघर्षअमेरिका का दबाव:उन्होंने कहा कि भारत पर हमेशा से अमेरिका का दबाव रहा है। 1971 में भी अमेरिका ने इंदिरा गांधी पर दबाव बनाया, लेकिन उन्होंने झुकने से इनकारकर दिया। आज की स्थिति में भी ट्रंप जैसे नेताओं की टिप्पणियों को लेकर चिंता जताई। अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप पर आपत्ति:गहलोत ने ट्रंप के उस बयान की आलोचना की जिसमें उन्होंने कश्मीर मुद्दे को हल करने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान केबीच हुए शिमला समझौते के तहत कोई तीसरा पक्ष शामिल नहीं हो सकता। विपक्ष का समर्थन:गहलोत ने कहा कि आज विपक्ष सरकार के साथ खड़ा है, लेकिन सरकार पारदर्शिता से काम नहीं कर रही। प्रधानमंत्री को विपक्ष के साथ बातचीतकरनी चाहिए। मीडिया से अपील:उन्होंने मीडिया से अपील की कि वे “सूत्रों के हवाले” से खबरें न दिखाएं, बल्कि सरकार से स्पष्ट बयान की मांग करें। निष्कर्ष:अशोक गहलोत ने सरकार से अपील की कि वह सीधी और सच्ची जानकारी देश के सामने रखे। उन्होंने चेताया कि मौजूदा हालात संवेदनशील हैं औरउन्हें संभालने में चूक नहीं होनी चाहिए।
पाकिस्तान की पनाह में पल रहे आतंकवादियों को सबक सिखाने के बाद आदमपुर एयरबेस पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी, वायुसेना के बहादुर जवानों के साथ की बातचीत

ऑपरेशन सिंदूर’ से पाकिस्तान और उसकी पनाह में पल रहे आतंकियों को सबक सिखाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को पंजाब मेंआदमपुर एयरबेस पहुंचे. यहां उन्होंने सेना के जवानों से मुलाकात की जालंधर स्थित यह वही एयरबेस है, जिसे नुकसान पहुंचाने का फर्जी दावापाकिस्तान ने किया था हालांकि विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 11 मई की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही इस दावे का खंडन कर दिया था. अब पीएम मोदी नेयहां पहुंचकर दुनिया के सामने पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा को बेनकाब कर दिया है. जानकारी के मुताबिक आज सुबह-सुबह प्रधानमंत्री मोदी आदमपुरएयरबेस पहुंचे. उन्होंने वायु सेना के बहादुर जवानों से बातचीत भी की इस दौरान वायुसेना के जवानों ने मौजूदा हालात के बारे में जानकारी दी। दौरेकी कई तस्वीरें सामने आई हैं. इसमें एक तस्वीर में पीएम मोदी के पीछे भारतीय लड़ाकू विमान की तस्वीर दिखाई दे रही है और उस बाद प्रधानमंत्रीमोदी वायु सेना के विमान से जालंधर स्थित एयरबेस पहुंचे. पीएम मोदी और सशस्त्र बलों के जवानों ने ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारेलगाए. सभी का जोश इस बात की ओर इशारा कर रहा था कि ऑपरेशन सिंदूर 100 फीसदी सफल रहा और हमारी सेना ने पाकिस्तान को सबकसिखा दिया है. आदमपुर पहुंचकर किया प्रोपेगैंडा को तहस-नहसइस दौरे से एक बात और साफ हो गई कि अगर प्रधानमंत्री मोदी का विमान इस एयरबेस पर उतर सकता है तो इसे खरोंच तक नहीं आई है इस दौरे नेपाकिस्तान के नापाक चेहरे और झूठ की दुकान को दुनिया के सामने ला दिया है. आदमपुर पहुंचकर पीएम मोदी के पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा को भीतहस नहस कर दिया है दरअसल पाकिस्तान ने फर्जी दावा किया था कि उसने भारत के सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाया। इसे लेकर विदेश सचिवविक्रम मिसरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा था कि सिरसा और आदमपुर एयरबेस को नुकसान पहुंचाने के पाकिस्तानी दावे पूरी तरह से गलत हैं. प्रेसब्रीफिंग के दौरान इन एयरबेस की तस्वीरें भी दिखाई गईं थीं. जिनमें दिखाया गया कि वहां सबकुछ सामान्य है ऐसे में पीएम मोदी के आदमपुर दौरे नेपाकिस्तान के झूठ की पोल पूरी दुनिया के सामने खोल दी है. पीएम मोदी ने एयरबेस पहुंचकर यह दिखा दिया कि यह पूरी तरह से ऑपरेशनल है. आदमपुर एयरबेस भारत के लड़ाकू विमान मिग 29 का बेस है एयरबेस पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी थे आदमपुरएयरबेस पाकिस्तान की सीमा के करीब स्थित है इससे दुश्मन पर तेजी से प्रहार करने में मदद मिलती है. प्रधानमंत्री ने एक्स पर साझा की तस्वीरेंप्रधानमंत्री मोदी ने दौरे से जुड़ी कुछ तस्वीरें पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर साझा की. उन्होंने लिखा, ‘आज सुबह मैं वायुसेना स्टेशन आदमपुर गया और हमारेबहादुर वायु योद्धाओं और सैनिकों से मिला. साहस, दृढ़ संकल्प और निडरता के प्रतीक लोगों के साथ रहना एक बहुत ही विशेष अनुभव था भारतहमारे सशस्त्र बलों के प्रति हमेशा आभारी है, जो हमारे देश के लिए वे सब कुछ करते हैं. इससे पहले पीएम मोदी ने सोमवार को देश को संबोधितकिया था. पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ चलाए गए भारत के ऑपरेशन सिंदूर के लिए उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों को जमकर सराहा था. उन्होंनेकहा था कि बीते दिनों में हमने देश का सामर्थ्य और उसका संयम दोनों देखा है. मैं सबसे पहले भारत की पराक्रमी सेनाओं, सशस्त्र बलों, हमारीखुफिया एजेंसियों, हमारे वैज्ञानिकों को हर भारतवासी की तरह से सलाम करता हूं. हमारे वीर सैनिकों ने ऑपरेशन सिंदूर के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिएअसीम शौर्य का प्रदर्शन किया मैं हमारे देश की हर माता को, देश की हर बहन को और देश की हर बेटी को यह वीरता, साहस और पराक्रम समर्पितकरता हूं.
भूपेश बघेल का केंद्र पर बड़ा हमला: क्या अमेरिका के दबाव में झुकी भारत सरकार?

नई दिल्ली, 12 मई 2025 — कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी(AICC) मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर केंद्र सरकार पर राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा किकांग्रेस राष्ट्रहित में सरकार के साथ खड़ी है, लेकिन जवाबदेही भी जरूरी है। “इंदिरा गांधी से सीखा है ताकत की भाषा बोलना“बघेल ने 1971 के भारत-पाक युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा, “जब अमेरिका ने दबाव बनाया था, तब इंदिरा गांधी ने झुकने के बजाय पाकिस्तान कोकरारा जवाब दिया था। हमने उनसे सीखा है कि दुश्मन से बातचीत की मेज पर ताक़त दिखानी चाहिए, न कि कमजोरी।” “आतंकवाद के खिलाफ कांग्रेस का स्पष्ट रुख“उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ रही है। “हमने कभी देश की एकता से समझौता नहीं किया। इस संकट के समय कांग्रेस नेराजनीति नहीं, राष्ट्रवाद को प्राथमिकता दी। ‘जय हिंद यात्राओं’ के माध्यम से हमने सैनिकों को सलाम किया और पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी।” बीजेपी पर सिर्फ राजनीति करने का आरोपबघेल ने आरोप लगाया कि जहाँ कांग्रेस देशभर में एकजुटता का संदेश दे रही थी, वहीं बीजेपी केवल राजनीतिक लाभ उठाने में व्यस्त थी। “इसकेबावजूद कांग्रेस ने राष्ट्रहित में सरकार का समर्थन किया,” उन्होंने कहा।सरकार से जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार से कई तीखे सवाल पूछे:क्या अमेरिका द्वारा पहले युद्धविराम की घोषणा भारत की कूटनीतिक विफलता नहीं है?क्या हमने कश्मीर मुद्दे पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार कर ली है?क्या शिमला समझौता अब अप्रासंगिक हो गया है?पाकिस्तान से क्या समझौते या वादे किए गए?“क्या पहलगाम हमले के दोषी पकड़े गए?” उन्होंने कहा कि बीजेपी प्रवक्ता कह रहे हैं कि “पहलगाम का बदला ले लिया गया है”, लेकिन क्या सरकार बताएगी कि उस हमले के दोषीआतंकवादी मारे गए या गिरफ्तार हुए? और अगर सरकार खुद मानती है कि पहलगाम में सुरक्षा चूक हुई, तो उसके लिए ज़िम्मेदार कौन है?