दिल्ली में हुई स्वराज कौशल की शोकसभा, बेटी बांसुरी स्वराज सहित राजनीतिक और कानूनी हस्तियों नेताओं ने दी अंतिम श्रद्धांजलि

सरिता साहनी07 दिसंबर 2025, नई दिल्ली भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज के पिता, वरिष्ठ वकील और पूर्व मिजोरम राज्यपाल स्वराज कौशल का गुरुवार को निधन हो गया। वे 73 वर्ष के थे।स्वराज कौशल का जन्म 12 जुलाई 1952 को हिमाचल प्रदेश के सोलन में हुआ था। अपने जीवन में उन्होंने कानून और राजनीति के क्षेत्र मेंउल्लेखनीय योगदान दिया और समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाई।स्वराज कौशल सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता थे। उन्होंने वर्षों तक वकालत के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया और कानून के प्रति उनकी गहरी समझऔर न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें विशेष बनाती थी। वे केवल एक कुशल वकील ही नहीं, बल्कि समाज सेवा और देशभक्ति के क्षेत्र में भीसक्रिय रहे। स्वराज कौशल स्वर्गीय सुषमा स्वराज के पति थे, जो भारत की पूर्व विदेश मंत्री रही हैं। उनके परिवार में उनकी बेटी बांसुरी स्वराज भीशामिल हैं, जो वर्तमान में भाजपा सांसद हैं। भारत के सबसे कम उम्र के राज्यपाल बनेउनके निधन से राजनीतिक और कानूनी समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया (एक्स) पर अपने संदेश मेंलिखा: श्री स्वराज कौशल जी के निधन से दुख हुआ है। वे भारत के सबसे कम उम्र के राज्यपाल बने और मिजोरम के लोगों पर अपने कार्यकाल केदौरान गहरा प्रभाव छोड़ा। एक सांसद के रूप में उनके विचार भी महत्वपूर्ण रहे। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनकी बेटी बांसुरी और परिवार केअन्य सदस्यों के साथ हैं। ॐ शांति। निधन से देश ने एक संवेदनशील, ईमानदार और प्रभावशाली व्यक्तित्व खो दियास्वराज कौशल का राजनीतिक जीवन भी अत्यंत सक्रिय और प्रभावशाली रहा। वे भारत के सबसे कम उम्र के राज्यपाल बने और मिजोरम के लोगों केबीच अपने कार्यकाल के दौरान गहरा प्रभाव छोड़ा। उन्होंने अपने प्रशासनिक कौशल और दूरदर्शिता के जरिए राज्य में कई महत्वपूर्ण पहल की। उनकीशोकसभा समारोह आज यानी 7 दिसंबर को दिल्ली के PSOI क्लब, चाणक्यपुरी में आयोजित की गई. यह शोकसभा दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजेतक चली। इस अवसर पर उनके परिवारजन, करीबी मित्र और विभिन्न राजनीतिक व कानूनी हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह में उनकेयोगदान और व्यक्तित्व की चर्चा करते हुए उपस्थित लोगों ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। स्वराज कौशल ने अपने जीवन में कानून और राजनीति केक्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके निधन से देश ने एक संवेदनशील, ईमानदार और प्रभावशाली व्यक्तित्व खो दिया है। उनकी उपलब्धियों औरउनके व्यक्तित्व की छवि हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगी।
दिल्ली एआई ग्राइंड भविष्य की तकनीक की ओर दिल्ली का बड़ा कदम

सरिता साहनी07 दिसंबर 2025, नई दिल्ली दिल्ली में एआई शिक्षा की नई लहरदिल्ली सरकार ने दिल्ली एआई ग्राइंड की शुरुआत करके देश में एक नया इतिहास बनाया है। यह भारत का पहला ऐसा शहर-केंद्रित एआई औरइनोवेशन मूवमेंट है, जो दिल्ली के बच्चों और युवाओं को भविष्य की तकनीकी दुनिया के लिए तैयार करेगा। इस पहल से 1,000 से अधिक स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के पाँच लाख से ज्यादा छात्र लाभ ले सकेंगे। इसका लक्ष्य है कि हर छात्र एआई को समझे, सीखे और इसे अपने जीवनमें उपयोग करने लायक बने। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का दृष्टिकोण तकनीक से सशक्त होगी दिल्लीकार्यक्रम के उद्घाटन पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली ने एआई शिक्षा में देश में सबसे पहले कदम बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी द्वारा तकनीक को बढ़ावा देने की प्रेरणा से दिल्ली ने इस दिशा में काम तेज किया है। उनका मानना है कि नई तकनीक का लाभ हर बच्चा, हर कक्षा और हर समुदाय तक पहुँचना चाहिए। दिल्ली, राजधानी होने के नाते, यह जिम्मेदारी निभाने को तैयार है। एआई ग्राइंड क्या है सीखने और नवाचार का बड़ा आंदोलनदिल्ली एआई ग्राइंड सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसा आंदोलन है जो पूरी शिक्षा व्यवस्था को बदलने की क्षमता रखता है। इस अभियान केतहत छात्रों को एआई सीखने का मौका मिलेगा। वे डिजाइन थिंकिंग, समस्या को समझने, समाधान के तरीके खोजने और छोटे-बड़े प्रोटोटाइप बनानेजैसी क्षमता विकसित करेंगे। शिक्षा संस्थानों में एक ऐसा माहौल बनाया जाएगा, जहाँ छात्र अपने विचारों से वास्तविक जीवन की समस्याओं का हलढूँढ सकें। धीरे-धीरे ये संस्थान छोटे-छोटे इनोवेशन लैब्स में बदल जाएँगे। शिक्षा मंत्री आशीष सूद का भविष्य–तैयारी मॉडलशिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा कि यह पहल आने वाले एआई दशक को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। आनेवाले चार महीनों में हजारों शिक्षकों को एआई मेंटर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे स्कूलों में एआई सीखने का मजबूत माहौल बन सकेगा।उन्होंने बताया कि छात्रों द्वारा कई नए मॉडल और प्रोटोटाइप विकसित किए जाएँगे, जिन्हें विशेषज्ञों और उद्योग जगत के साथ मिलकर आगे बढ़ायाजाएगा। इसके अलावा दिल्ली के युवाओं के विचारों के आधार पर एक राष्ट्रीय इनोवेशन दस्तावेज भी तैयार होगा, जिसे पूरे देश में साझा कियाजाएगा। इससे दिल्ली एआई आधारित शिक्षा सुधारों की प्रयोगशाला के रूप में स्थापित होगी। युवाओं के लिए 10 मुख्य क्षेत्रों में काम करने का अवसरयह कार्यक्रम 10 से 25 वर्ष तक के युवाओं को विभिन्न सामाजिक और औद्योगिक क्षेत्रों में कार्य करने का मौका देगा। इनमें परिवहन, स्वास्थ्य, पर्यटन, ऊर्जा, पर्यावरण, शिक्षा, सुशासन, खाद्य प्रणाली, जल प्रबंधन और सार्वजनिक सेवाएँ शामिल हैं। इन क्षेत्रों में वास्तविक समस्याएँ होंगी, जिन पर छात्र अपने समाधान पेश करेंगे। इससे उन्हें सीखने, सोचने और समाज के लिए नया कुछ बनाने का अवसर मिलेगा। इनोवेशन मॉडल विचार से लेकर जमीन तक लागू होने की प्रक्रियादिल्ली एआई ग्राइंड एक वार्षिक आंदोलन होगा, जो हर साल नई शुरुआत के साथ आगे बढ़ेगा। इसके अंतर्गत कई चरण होंगे। पहले छात्रों कोएआई और इनोवेशन की समझ दी जाएगी। फिर उन्हें अपने-अपने जिलों में भाग लेने का मौका मिलेगा। बाद में शहर-स्तर पर उनके कामों कोदिखाया जाएगा। जो विचार अच्छे होंगे, उन्हें पायलट रूप में लागू करने की कोशिश की जाएगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह है कि किसी भी छात्र काविचार सिर्फ कागज़ पर न रह जाए, बल्कि उसे वास्तविक रूप दिया जाए। एआई शिक्षा का उद्देश्य बच्चे बनें तकनीक के निर्मातासूद ने कहा कि बच्चों को सिर्फ एआई का उपयोग करना नहीं आना चाहिए, बल्कि उन्हें यह भी समझना चाहिए कि तकनीक कैसे काम करती है औरउसे बेहतर कैसे बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चे सिर्फ उपभोक्ता न रहें, बल्कि तकनीक के ऐसे निर्माता बनें जो समाज की समस्याओं कोसमझकर नए समाधान तैयार कर सकें। एआई का जिम्मेदार उपयोग, पक्षपात को पहचानना और सुधारना जैसी सीखें भी इस कार्यक्रम के माध्यम सेदी जाएँगी। इसरो अंतरिक्ष यात्री का प्रेरक संदेशइस अवसर पर इसरो के अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अपने विचार रखते हुए कहा कि दिल्ली का यह कदम देश के भविष्य के लिए बहुतमहत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब नेतृत्व तकनीक और शिक्षा पर ध्यान देता है, तभी देश विकसित भारत 2047 की दिशा में आगे बढ़ सकता है।उनके अनुसार ऐसे कार्यक्रम आने वाले समय में छात्रों की सोच और क्षमता दोनों को नई दिशा देंगे। कार्यक्रम की खास झलकियाँ रचनात्मकता और तकनीक का संगमकार्यक्रम में कई विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षक, उद्योग प्रतिनिधि और सैकड़ों छात्र शामिल हुए। इस मौके पर दिल्ली एआई ग्राइंड का ब्रोशरजारी किया गया। स्कूल के बच्चों ने एआई पर आधारित जिंगल प्रस्तुत किया, जिससे कार्यक्रम में ऊर्जा और उत्साह भर गया। छात्र अपने बनाए पेपरप्रोटोटाइप लेकर मंच पर आए और अपने विचारों का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में आधिकारिक टीज़र भी लॉन्च किया गया। इसके अलावाInnovation Bus on Wheels को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, जो पूरे शहर में एआई आंदोलन को पहुँचाने का काम करेगी। दिल्ली की नई पीढ़ी अब एआई युग का नेतृत्व करने को तैयारदिल्ली एआई ग्राइंड एक मजबूत शुरुआत है, जो आने वाले समय में दिल्ली को एआई शिक्षा और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनाएगी। यह पहल छात्रोंमें आत्मविश्वास, रचनात्मकता और तकनीकी समझ दोनों को बढ़ाएगी। यह कार्यक्रम दिल्ली के बच्चों को सिर्फ तकनीक का उपयोग करना नहीं, बल्कि तकनीक को बनाने और समाज की भलाई के लिए आगे बढ़ाने की दिशा में तैयार करेगा।
दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण पर सबसे बड़ा एक्शन — पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिए कड़े निर्देश

सरिता साहनी07 दिसंबर 2025, नई दिल्ली दिल्ली सरकार का व्यापक मिशन साफ़ हवा, सुरक्षित भविष्यदिल्ली सरकार ने प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए एक बड़े और लगातार चलने वाले अभियान की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व मेंयह मिशन अब पूरे साल चलने वाला कार्यक्रम बन चुका है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने हाल ही में अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठककर स्पष्ट किया कि प्रदूषण रोकने के लिए अब किसी भी विभाग या एजेंसी की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। इंडस्ट्रीज़ का सात दिन में सर्वे गैर–अनुरूपित यूनिट्स पर ज़ीरो टॉलरेंसबैठक में सबसे अहम निर्णय यह लिया गया कि दिल्ली के सभी ज़िलों में मौजूद इंडस्ट्रीज़ का पूरा सर्वे सिर्फ़ सात दिनों में पूरा किया जाए। इसकाउद्देश्य यह है कि कौन-सी इंडस्ट्रीज़ कानूनी नियमों का पालन नहीं कर रहीं, उनकी तुरंत पहचान हो सके। कई इलाकों में बिना अनुमति, रिहायशी क्षेत्रोंमें या गैर-अनुरूपित ज़ोन में चल रही इंडस्ट्रीज़ प्रदूषण का बड़ा कारण बनती हैं। इसलिए मंत्री सिरसा ने निर्देश दिया कि ऐसे सभी यूनिट्स पर तुरंतकार्रवाई हो और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें बंद भी किया जाए। MCD को मैदान–स्तर पर निरीक्षण का आदेशMCD के डिविजनल कमिश्नर को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे नॉन-कनफॉर्मिंग इंडस्ट्रियल एरिया और दिल्ली में चल रही सभी निर्माण साइट्सका विस्तृत सर्वे करवाएँ। निर्माण स्थलों पर धूल उड़ना, कचरे का सही प्रबंधन न होना और सुरक्षा उपायों की कमी जैसे कारणों से प्रदूषण बढ़ जाताहै। इसलिए अब हर निर्माण स्थल की जाँच होगी और जहाँ भी नियमों का पालन नहीं मिलेगा, वहाँ जुर्माने और सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी। सड़कों और खाली प्लॉट्स से उठने वाली धूल पर सख़्त नियंत्रणदिल्ली की हवा में धूल की बड़ी मात्रा सड़कों की खराब स्थिति और खाली पड़े प्लॉट्स में जमा होती मिट्टी के कारण फैलती है। पर्यावरण मंत्री ने सभीविभागों को निर्देश दिया कि ऐसे सभी स्थानों की पूरी सूची तुरंत तैयार की जाए। सड़क की मरम्मत के काम को तेज़ किया जा रहा है और गड्ढों को भरनेकी प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है। इस साल अब तक 42,000 से अधिक गड्ढे भरे जा चुके हैं, जो पिछले साल की तुलना में दोगुने से भीअधिक है। यह धूल नियंत्रण की दिशा में बड़ी उपलब्धि है। DPCC की सख़्त कार्रवाई जुर्माने और साइट्स बंद करने से बढ़ी जवाबदेहीपिछले कुछ दिनों में DPCC की टीमें लगातार निरीक्षण कर रही हैं। इन निरीक्षणों में कई निजी और सरकारी दोनों तरह की एजेंसियाँ नियमों कापालन करते नहीं पाई गईं। 1,756 निर्माण स्थलों की जाँच में 556 नोटिस जारी किए गए और लगभग सात करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया।इसके साथ ही 48 निर्माण साइट्स को बंद किया गया। सरकारी एजेंसियों जैसे DDA, DSIIDC, MCD, PWD और DMRC पर भी नियमों केउल्लंघन के चलते एक करोड़ रुपये का नोटिस जारी किया गया। यह पहली बार है जब सरकारी विभागों पर भी इतनी कड़ी कार्रवाई हुई है, जिससे यहसंदेश गया है कि कानून सबके लिए बराबर है। रिहायशी इलाकों में अवैध इंडस्ट्रीज़ पर निगरानी बढ़ीदिल्ली के कई रिहायशी इलाकों में बिना अनुमति इंडस्ट्रीज़ चलती रही हैं, जो हवा में धुआँ और जहरीले तत्व छोड़कर लोगों की सेहत को नुकसानपहुँचाती हैं। DPCC की टीमें ऐसे स्थानों की नियमित पहचान कर रही हैं। पर्यावरण मंत्री ने कहा कि रिहायशी क्षेत्रों में अवैध इकाइयों को किसी भीकीमत पर नहीं चलने दिया जाएगा और इन पर लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। सड़क निर्माण, सफ़ाई और EV नीति से मिली नई गतिदिल्ली सरकार ने सड़क निर्माण और सफ़ाई पर भी तेज़ी से काम किया है। साफ़ सड़कों से न सिर्फ़ धूल कम फैलती है बल्कि शहर का जीवन भीबेहतर होता है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों का असर भी साफ़ दिख रहा है। दिसंबर 2024 में दिल्ली में 3.46 लाखइलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत थे, जो नवंबर 2025 तक बढ़कर 4.54 लाख हो गए। यह वृद्धि बताती है कि दिल्ली की EV नीति सफल हो रही है औरइससे प्रदूषण कम करने में मदद मिल रही है। खुले में कचरा और बायोमास जलाने पर पूरी तरह रोकखुले में कचरा या बायोमास जलाना भी प्रदूषण का बड़ा कारण बनता है। इसे रोकने के लिए 1,823 टीमें तैनात की गई हैं, जिनमें से 633 टीमेंविशेष रूप से ओपन बर्निंग रोकने में लगी हैं। दिल्ली सरकार मजदूरों को ठंड से बचाने के लिए इलेक्ट्रिक हीटर भी वितरित कर रही है ताकि वे आगजलाने पर मजबूर न हों। अब तक 1,407 RWAs को 3,377 हीटर दिए जा चुके हैं और कुल 10,000 हीटर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वैज्ञानिक अध्ययन और इनोवेशन से मिलेगा भविष्य का समाधानदिल्ली सरकार IIT Delhi और IITM के साथ मिलकर एक सोर्स एपॉर्शनमेंट स्टडी शुरू करने जा रही है, जिससे यह पता लगाया जा सकेगा किदिल्ली में प्रदूषण के मुख्य स्रोत कौन से हैं। साथ ही सरकार द्वारा शुरू किए गए इनोवेशन चैलेंज में 278 सुझाव आए, जिनमें से 200 को आगे कीप्रक्रिया के लिए चुना गया है। विशेषज्ञ इन सुझावों का मूल्यांकन करेंगे ताकि प्रदूषण कम करने के नए और प्रभावी उपाय लागू किए जा सकें। जनरेटरों पर सख़्त नियम रेट्रोफिटिंग अनिवार्यBS-IV और उससे नीचे के सभी जनरेटरों में एंटी-पॉल्यूशन डिवाइस लगाना अब ज़रूरी कर दिया गया है। बिना रेट्रोफिटिंग के कोई भी जनरेटर चलानेकी अनुमति नहीं होगी। यह बदलाव दिल्ली की हवा को साफ़ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सभी विभागों और नागरिकों की संयुक्त ज़िम्मेदारीपर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने स्पष्ट कहा है कि दिल्ली की हवा को साफ़ करना सिर्फ़ सरकार का काम नहीं, बल्कि सभी विभागों, एजेंसियोंऔर नागरिकों की ज़िम्मेदारी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के विज़न के अनुसार दिल्ली को ऐसा शहर बनाना है जहाँ साफ़ हवा सिर्फ़ सपना न रहे, बल्किलोगों की रोज़मर्रा की हकीकत बने। यह अभियान दिल्ली की हवा को सुरक्षित और प्रदूषण-मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है और आने वालेसमय में इसके और अधिक सकारात्मक परिणाम देखने की उम्मीद है।
सीएम योगी के बड़े ऐलान, बाबा साहब की मूर्तियों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला, चतुर्थ श्रेणी कर्मियों का मानदेय होगा सुनिश्चित

सीएम योगी ने शनिवार को कहा, बाबा साहब की मूर्तियों के साथ अक्सर शरारती तत्व छेड़छाड़ करते हैं। हमारी सरकार निर्णय ले रही है कि बाबासाहब की हर मूर्ति के आसपास सुरक्षात्मक बाउंड्री वॉल बनाई जाए, ताकि उनकी प्रतिमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। जिस मूर्ति के ऊपर छतनहीं होगी, वहां छत बनवाएंगे। यदि कहीं कोई काम छूट गया है, तो उसे भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। आज इस पावन अवसर पर मैं बाबा साहबकी पावन स्मृति को नमन करता हूं।अभी यहां लालजी प्रसाद निर्मलजी ने चतुर्थ श्रेणी संविदा सफाई कर्मियों की समस्या का उल्लेख किया। हमारीसरकार ने इस पर निर्णय ले लिया है। कॉरपोरेशन का गठन किया गया है और अगले एक-दो महीनों में यह सुनिश्चित कर दिया जाएगा कि हर चतुर्थश्रेणी के कर्मी और संविदा कर्मी को न्यूनतम मानदेय की गारंटी सरकार की ओर से मिले। यह कदम भी सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण पहलहै। बाबा साहब की दी हुई प्रेरणा का ही परिणामहम सबको यह समझना होगा कि जो भी सुविधाएं और सम्मान आज वंचित वर्गों को मिल रहा है, वह बाबा साहब की दी हुई प्रेरणा का ही परिणामहै। प्रधानमंत्री मोदीजी के नेतृत्व में देश ‘नए भारत’ की ओर बढ़ रहा है। पंचतीर्थ का निर्माण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के छात्रों के लिए नईछात्रवृत्ति योजनाएं यह सब बाबा साहब के समानता और आत्मसम्मान के विचारों को आगे बढ़ाने का कार्य है। डॉ. भीमराव आंबेडकर के महापरिनिर्वाणदिवस पर शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्रद्धांजलि अर्पित किया। हजरतगंज स्थित आंबेडकर महासभा कार्यालय में आयोजित श्रद्धांजलिसभा में वह बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ बौद्ध भिक्षुओं द्वारा बुद्ध वंदना एवं त्रिशरण पंचशील के पाठ से हुआ। संविधान की प्रति भेंट कीडॉ. आंबेडकर महासभा ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं सदस्य विधान परिषद डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने शुक्रवार को सीएम योगी से मिलकर संविधान की प्रतिभेंट की थी। उन्होंने सीएम से आग्रह किया था कि सरकारी पाठ्यक्रमों में संविधान की उद्देशिका, मौलिक अधिकारों, मौलिक कर्तव्य, नीति निर्देशकतत्व, संघीय ढांचा और न्यायपालिका की स्वतंत्रता आदि महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया जाए। वहीं दूसरी ओर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव परपलटवार करते हुए कहा कि सपा और उसके मुखिया शुरू से ही आरक्षण और दलितों के मसीहा डॉ. भीमराव आंबेडकर के विरोधी हैं। मुख्यमंत्री रहतेअखिलेश ने दलित कर्मचारियों के प्रोन्नति में आरक्षण खत्म किया। दो लाख दलित कर्मियों को पदावनत कर अपमानित किया। दलितों का वोट पानेकी खातिर वह आरक्षण और आंबेडकर की बात करने लगे हैं।
इंदौर में रह रहे पाकिस्तानी पति की बेवफाई, कराची की पत्नी ने PM मोदी से लगाई न्याय की गुहार, पंचायत ने डिपोर्ट करने की सिफारिश की

इंदौर में रह रहे एक पाकिस्तानी युवक की शिकायत पाकिस्तानी महिला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सिन्धी पंच मध्यस्थता से की है। महिला काकहना है कि इंदौर में रह रहे उसके पाकिस्तानी पति ने शादी के बाद उसे पाकिस्तान भेज दिया और अब दूसरी शादी करने की तैयारी कर रहा है। उसनेएक युवती से सगाई भी की है.सिन्ध कराची (पाकिस्तान) की नागरिक निकिता का इंदौर में रह रहे पाकिस्तानी नागरिक के साथ कराची में 26 जनवरी2020 को विवाह हुआ। निकिता को 26 फरवरी को पति इंदौर लेकर आया। 9 जुलाई 2020 को वीजा औपचारिकता के बहाने अटारी बॉर्डर परछोड़कर आया। पंचायत को लिखित शिकायत दर्ज कीपत्नी निकिता ने पंचायत को लिखित शिकायत दर्ज की। निकिता ने कहा कि मेरे पति ने दिल्ली की एक महिला के साथ सगाई कर ली है। मुझसेबिना तलाक लिए विवाह करने जा रहा है। समाज की पंचायत ने पति विक्रम नागदेव और कथित मंगेतर शिवानी को नोटिस जारी कर समझौता वार्ताकी, लेकिन समझौता वार्ता विफल होने पर मध्यस्थता अधिनियम 2023 का पालन करते हुए सिन्धी पंच मध्यस्थता और विधिक परामर्श केंद्र नेअपनी रिपोर्ट पेश की। उसमें कहा गया कि दोनों भारतीय नागरिक नहीं हैं। पति को पाकिस्तान डिपोर्ट किया जाए, क्योंकि न्यायालय क्षेत्र पाकिस्तानहै। केंद्र द्वारा मामला नहीं सुलझाने के कारण कोर्ट से ही इसका निराकरण हो सकता है। पत्नी इस मामले में कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। पतिकई वर्षों से इंदौर में रह रहा है।
डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रति कृतज्ञता और संकल्प का दिन — विजेंद्र गुप्ता

सरिता साहनी6,दिसंबर 2025, नई दिल्ली श्रद्धांजलि का गरिमामय अवसरडॉ. भीमराव अंबेडकर की 70वीं महापरिनिर्वाण दिवस पर दिल्ली विधान सभा परिसर में एक भावपूर्ण और गरिमामय श्रद्धांजलि सभा का आयोजनकिया गया। इस अवसर पर दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने संविधान निर्माता को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को यादकिया। इसके साथ ही विधायक संजय गोयल और विधान सभा सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। डॉ. अंबेडकर का संदेश लोकतांत्रिक संस्थाओं की आत्माश्रद्धांजलि समारोह में अपने विचार साझा करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि डॉ. अंबेडकर की विरासत हमें यह सिखाती है कि लोकतंत्र तभी मजबूतरहता है जब न्याय, समानता और मानव गरिमा हर संस्था और निर्णय का आधार बने। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर सिर्फ संविधान के निर्माता ही नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक आत्मा के संरक्षक भी थे। संविधान निर्माण में डॉ. अंबेडकर की निर्णायक भूमिका विजेंद्र गुप्ता के शब्दों मेंगुप्ता ने याद किया कि भारतीय संविधान की प्रारूप समिति का नेतृत्व करते हुए डॉ. अंबेडकर ने ऐसा ढांचा तैयार किया, जिसने न्याय, समान अवसरऔर व्यक्तिगत स्वतंत्रता को राष्ट्र के केंद्र में स्थापित किया। उन्होंने कहा कि उनकी संवैधानिक दृष्टि आज भी लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए उज्ज्वलमार्गदर्शक है, जो समाज के हर वर्ग को सुरक्षा और अधिकार प्रदान करती है। डॉ. अंबेडकर का जीवन प्रेरणा, संघर्ष और नेतृत्व का प्रतीकअपने संबोधन में विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सामाजिक भेदभाव से संघर्ष करते हुए डॉ. अंबेडकर का उठ खड़ा होना और आगे चलकर भारत के संविधानका निर्माण करना अदम्य साहस और अद्वितीय प्रतिभा का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि Dr. Ambedkar की यात्रा हमें यह विश्वास दिलाती है किज्ञान, दृढ़ता और समान अधिकारों के प्रति समर्पण समाज को बदल सकता है। महापरिनिर्वाण दिवस श्रद्धांजलि ही नहीं, एक संकल्पगुप्ता ने कहा कि यह दिवस केवल स्मरण का नहीं, बल्कि उस संवैधानिक नैतिकता को समझने और अपनाने का भी अवसर है, जिसका सपना डॉ. अंबेडकर ने देखा था। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि हम लोकतंत्र को मजबूत बनाना चाहते हैं तो हमें निष्पक्षता, संवाद और समान भागीदारी जैसेसिद्धांतों को जीवन और प्रशासन में लागू करना होगा। दिल्ली विधान सभा की प्रतिबद्धता संवैधानिक मूल्यों को आगे ले जाने का प्रयासअंत में विजेंद्र गुप्ता ने आश्वासन दिया कि दिल्ली विधान सभा नागरिक शिक्षा, संवैधानिक जागरूकता और डॉ. अंबेडकर के समावेशी भारत के सपनेको साकार करने वाले प्रयासों को निरंतर आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब हम एक ऐसे समाज कानिर्माण करें, जहाँ न्याय और समानता सबके लिए सुनिश्चित हो।
रणवीर सिंह की धमाकेदार वापसी जिसने बड़े पर्दे पर नई जान भर दी – धुरंधर

सरिता साहनी6,दिसंबर 2025, नई दिल्ली फिल्म धुरंधर एक ऐसी कहानी है जो भारतीय जासूसी तंत्र, पाकिस्तान के गैंगस्टर नेटवर्क, राजनीति और आतंकवाद की दुनिया को एक साथ जोड़करदर्शकों के सामने पेश करती है। निर्देशक आदित्य धर ने इस फिल्म को बहुत बड़े पैमाने पर बनाया है, और इसकी हर परत दर्शकों को भीतर तकझकझोर देती है। इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है रणवीर सिंह, जो लंबे समय बाद एक बेहद अलग और तीव्र किरदार में दिखाई देते हैं। फिल्म कीअवधि 3 घंटे 32 मिनट होने के बावजूद यह लगातार रोमांच बनाए रखती है। कहानीफिल्म की शुरुआत 30 दिसंबर 1999 से होती है, जब भारत तीन बेहद खतरनाक आतंकियों मसूद अज़हर, उमर शेख और मुश्ताक अहमद ज़रगर—को रिहा करने पर मजबूर होता है। इस निर्णय का विरोध इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अजय सान्याल करते हैं, जिन्हें आर. माधवन ने निभाया है।उनका विरोध दमदार है लेकिन नौकरशाही और मजबूरियों के सामने वह हार जाते हैं। इसी क्षण ‘प्रोजेक्ट धुरंधर’ की नींव रखी जाती है, जो कहानी कोएक बेहद रोचक और रोमांचक दिशा देता है। इसके बाद प्रवेश होता है जसकीरत सिंह उर्फ़ हमज़ा अली मज़ारी का, जिसे रणवीर सिंह ने इतनी तीव्रतासे निभाया है कि यह किरदार फिल्म की आत्मा बन जाता है। हमज़ा को पाकिस्तान के कराची शहर के सबसे खतरनाक इलाके ल्यारी में भेजा जाता है, जहाँ गैंगस्टर-राजनीति-आईएसआई का पूरा गठजोड़ भारत के खिलाफ साजिशें रचता है। फिल्म का यह हिस्सा बेहद वास्तविक और कठोर है, जहाँअपराध, सत्ता और आतंक एक-दूसरे में घुलते-मिलते दिखाई देते हैं। रणवीर सिंह का अभिनयरणवीर सिंह ने फिल्म में एक ऐसा किरदार निभाया है, जो भीतर से टूटा हुआ, बाहर से बेहद खतरनाक और हालातों से लड़ने के लिए मजबूर है। वहकभी जंगली दिखाई देते हैं, कभी चालाक, कभी ठंडे दिमाग से खेल खेलने वाले एजेंट और कभी एक ऐसा इंसान जिसमें दर्द और भावनाएँ अभी भीबची हैं। रणवीर की ऊर्जा, उनकी आँखों का गुस्सा, उनकी बॉडी लैंग्वेज और संवाद बोलने का अंदाज़—सब मिलकर इस किरदार को असाधारणबनाते हैं। लंबे समय बाद रणवीर अपने करियर का एक यादगार रोल लेकर आए हैं। आर. माधवन का महत्वपूर्ण किरदारअजय सान्याल के किरदार में आर. माधवन बेहद शांत, समझदार और दृढ़ नज़र आते हैं। वह कहानी के नैतिक पक्ष को दर्शाते हैं और शुरुआत कीघटनाओं में उनका योगदान फिल्म की दिशा तय करता है। उनकी आंतरिक लड़ाई, उनका अपने सिद्धांतों के प्रति झुकाव और उनकी मजबूरियों कोमाधवन ने बहुत संजीदगी से प्रस्तुत किया है। हर बार जब वह स्क्रीन पर आते हैं, फिल्म और भी गंभीर और प्रभावशाली हो जाती है। अक्षय खन्ना की मजबूत उपस्थितिअक्षय खन्ना ने ल्यारी के एक गैंगस्टर की भूमिका निभाई है और अपने अंदाज़ से वह हर दृश्य में दर्शकों को आकर्षित करते हैं। उनका चेहरा, उनकीआवाज़ और उनका अभिनय इस किरदार को बेहद गहरा बनाते हैं। वह न हिंसक होते हुए भी डर पैदा करते हैं और वह कराची के अंडरवर्ल्ड कीजटिलता को बड़ी खूबसूरती से पेश करते हैं। संजय दत्त का दमदार अंदाज़संजय दत्त इस फिल्म में एक सख़्त पाकिस्तानी सुपरकॉप से प्रेरित किरदार निभाते हैं। उनका व्यक्तित्व ही इस भूमिका को गंभीर और ताकतवर बनादेता है। उनकी आँखों में जो दृढ़ता है और संवादों में जो कड़कपन है, वह फिल्म के माहौल को और भी तनावपूर्ण बना देता है। संजय दत्त की स्क्रीनउपस्थिति इतनी मजबूत है कि उनके दृश्यों को नजरअंदाज करना संभव नहीं। अर्जुन रामपाल की तीखी छापअर्जुन रामपाल आईएसआई के मेजर इकबाल के रूप में सीमित समय के बावजूद गहरी छाप छोड़ते हैं। उनका किरदार ठंडे दिमाग से काम करनेवाला, खतरनाक और निर्दयी है। उनके द्वारा निभाए गए टॉर्चर सीन फिल्म के सबसे भारी और दिल दहला देने वाले हिस्सों में से हैं। वह कहानी में एकऐसा तनाव पैदा करते हैं जो दर्शकों को लंबे समय तक याद रहता है। सारा अर्जुन और अन्य कलाकारों का योगदानसारा अर्जुन ने यलीना के किरदार में एक नई ऊर्जा, विद्रोह और मासूमियत का मिश्रण दिखाया है। उनका किरदार छोटा है लेकिन अत्यंत प्रभावित करनेवाला। इसके अलावा राकेश बेदी और गौरव गेरा ने भी अपने किरदारों को दिलचस्प ढंग से निभाया है, जो फिल्म में थोड़ी राहत और अलग रंग भरतेहैं। हिंसा, सत्ता और मनोविज्ञान का टकरावफिल्म में हिंसा सिर्फ एक्शन नहीं है, बल्कि एक मानसिक दबाव है। कई दृश्य खासकर मेजर इकबाल वाले टॉर्चर वाले हिस्से दर्शकों को भीतर तकझकझोर देते हैं। फिल्म बार-बार यह दिखाती है कि सत्ता के खेल में इंसानियत कितनी आसानी से खत्म हो जाती है। रणवीर का किरदार भी इसीसंघर्ष से गुजरता है—एक तरफ वो एक हथियार है, दूसरी तरफ एक इंसान। संगीत और तकनीकी पक्षफिल्म का संगीत इसकी आत्मा जैसा है। शाश्वत सचदेव का बैकग्राउंड स्कोर हर दृश्य को और ज्यादा तीव्र और जीवंत बनाता है। पुराने मशहूर गीतों—हवा हवा, चुपके चुपके और आफ़रीन आफ़रीन का उपयोग कहानी के भावनात्मक पहलुओं को और गहरा कर देता है। सिनेमेटोग्राफी कराची औरल्यारी को इतने वास्तविक रूप में दिखाती है कि दर्शक खुद को उस माहौल का हिस्सा महसूस करने लगते हैं। कमज़ोरियांफिल्म का दूसरा भाग थोड़ा अलग और भारी महसूस होता है, जैसे कहानी अचानक दूसरी दिशा में मुड़ जाती है। साथ ही, इसके कई बड़े दृश्य पहले हीभाग दो के ट्रेलर में दिखाई दे चुके थे, जिससे दर्शकों का रोमांच थोड़ा कम होता है। फिल्म का दूसरा भाग 19 मार्च 2026 को रिलीज़ होगा। धुरंधरएक ऐसी फिल्म है जिसे बड़े पर्दे पर देखने का मज़ा ही अलग है। यह फिल्म सिर्फ एक्शन नहीं, बल्कि राजनीति, जासूसी, दर्द, मनोविज्ञान और मानवसंघर्ष की कहानी है। रणवीर सिंह अपनी पूरी ताकत और जुनून के साथ इस फिल्म में उभरते हैं और बाकी कलाकार कहानी को और मजबूत बनाते हैं।फिल्म अंत में एक सवाल छोड़ जाती है क्या भाग 2 इस कहानी को और ऊँचाई तक ले जाएगी? जो भी लोग रोमांच, गहरी कहानी और दमदारअभिनय पसंद करते हैं, उनके लिए धुरंधर जरूर देखने लायक फिल्म है।
असम सरकार का कड़ा कदम, कट्टरपंथी कंटेंट की बिक्री, प्रकाशन, शेयरिंग पूरी तरह वर्जित “जानें क्या है पूरा मामला”

असम सरकार ने प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से जुड़े कट्टरपंथी और जिहादी साहित्य पर बड़ा कदम उठाते हुए पूरे राज्य में उस पर पूर्ण प्रतिबंध लगादिया है। बुधवार को जारी अधिसूचना में सरकार ने साफ कर दिया कि ऐसे किसी भी साहित्य का प्रकाशन, बिक्री, वितरण, संग्रहण और डिजिटलप्रसार अब असम में पूरी तरह वर्जित रहेगा। सरकार का कहना है कि इस तरह की सामग्री राज्य की आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन चुकी थी। सरकार द्वारा जिन संगठनों के साहित्य पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनमें जमात-उल-मुजाहिदीनबांग्लादेश (जेएमबी), अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी), अंसार-अल-इस्लाम/प्रो-एक्यूआईएस और अन्य प्रतिबंधित आतंकी नेटवर्क शामिल हैं।ताजा पुलिस और विशेष शाखा की रिपोर्टों में यह पाया गया कि इन संगठनों से प्रेरित सामग्री ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से युवाओंतक पहुंच रही थी। कई डिजिटल चैनलों, वेबसाइटों और एन्क्रिप्टेड ग्रुपों में कट्टरपंथी संदेश साझा किए जा रहे थे। अब निगरानी के दायरे मेंअधिकारियों के अनुसार, जिन डिजिटल और प्रिंट सामग्री की जांच की गई, उनमें हिंसक जिहाद को बढ़ावा देने वाली भाषा, उग्र विचारधारा को वैधठहराने वाले कथन और युवाओं को आतंकी नेटवर्क की ओर आकर्षित करने वाली सामग्री पाई गई। सुरक्षा एजेंसियों ने चेतावनी दी कि यह साहित्य नसिर्फ युवाओं को गुमराह कर रहा है, बल्कि अलग-अलग समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव बढ़ाने का माध्यम भी बन रहा था। सरकार ने इसेराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताया। अधिसूचना में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि प्रतिबंधित साहित्य का डिजिटल रूप में प्रसार करनेवालों पर भी कड़ी कार्रवाई होगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन पोर्टल, मैसेजिंग ऐप, वेबसाइटें और एन्क्रिप्टेड ग्रुप अब निगरानी के दायरे मेंहैं। बीएनएसएस की धारा 98 और 99 ऐसी सामग्री को तत्काल जब्त करने का अधिकार देती हैं। इसके अलावा आईटी एक्ट की धारा 67 औरभारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 299 के तहत भी यह सामग्री आपत्तिजनक मानी गई है। कट्टरपंथी विचारों को फैलने से रोकने के लिए अत्यंत आवश्यकअसम पुलिस, सीआईडी, साइबर क्राइम यूनिट और जिला पुलिस प्रमुखों को आदेश दिया गया है कि वे इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू करें। सरकारने साफ किया है कि किसी भी उल्लंघन पर तुरंत कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। जिला स्तर पर विशेष टीमें गठित की जा रही हैं जो दुकानों, पुस्तकविक्रेताओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निगरानी रखेंगी। राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम समाज में कट्टरपंथी विचारों को फैलने से रोकने केलिए अत्यंत आवश्यक है। सरकार ने कहा कि जिहादी सामग्री राज्य के सौहार्दपूर्ण वातावरण को नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए इस पर रोकलगाना अनिवार्य था। प्रशासन का मानना है कि इस कड़ी कार्रवाई से युवाओं को गुमराह करने की कोशिशों पर लगाम लगेगी और राज्य में शांतिव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभियान लंबे समय तक जारी रहेगा और किसी भी प्रकार की कट्टरपंथी गतिविधिको बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुतिन की भारत यात्रा शशि थरूर का संदेश, उथल-पुथल भरी दुनिया में द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत रखना जरूरी

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय भारत यात्रा पर दिल्ली पहुंचे हैं। उनका पालम एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद जाकर उनकास्वागत किया। राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि की उथल-पुथल भरी दुनिया में, जहां बहुत सारे रिश्तेअनिश्चितता के घेरे में हैं, ऐसे में हमारे मौजूदा रिश्तों को मजबूत करना जरूरी हो जाता है। राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा पर बोलते कांग्रेस नेता शशिथरूर ने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण है। यह एक महत्वपूर्ण संबंध है और लंबे समय से रहा है। आज की इस उथल-पुथल भरी दुनिया में, जहां इतनेसारे संबंध अनिश्चित हो गए हैं। हमारे पास जो संबंध हैं उन्हें मजबूत करना महत्वपूर्ण हो जाता है। किसी को यह गलतफहमी नहीं होनी चाहिए किइसका असर दूसरे देशों के साथ हमारे रिश्तों पर पड़ेगा, क्योंकि भारत में विभिन्न सरकारोंके साथ स्वतंत्र संबंध रखने की क्षमता है। हम एक ऐसा राष्ट्र हैंजिसने हमेशा संप्रभु स्वायत्तता में विश्वास किया है। पुतिन को बताएंगे कि भारत इसे कैसे देखताथरूर ने आगे कहा कि अपनी मित्रता, अपनी साझेदारियों और अपने राष्ट्रीय हितों को तय करने की हमारी स्वायत्तता हमारे डीएनए में समाहित है। हालके वर्षों में, विशेष रूप से दो क्षेत्रों में, रूसी मित्रता का महत्व सिद्ध हुआ है। हाल के वर्षों में हमें रूस से काफी तेल और गैस मिली है, और रूस से रक्षाआयात का महत्व ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एक बार फिर प्रदर्शित हुआ, जब एस-400 ने हमें दिल्ली सहित हमारे शहरों को निशाना बनाने वाली कईपाकिस्तानी मिसाइलों से बचाया। कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि अगर इस बैठक के दौरान समझौते होते हैं, तो यह एक महत्वपूर्ण रिश्ते को मजबूतकरने का एक हिस्सा होगा। मेरे विचार में यह संबंध अमेरिका या चीन के साथ हमारे रिश्तों की कीमत पर नहीं आते हैं।पूर्व राजनयिक केपी फैबियन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उम्मीद है कि वे द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के प्रयासों को जारी रखते हुए, मौजूदा रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत की स्थिति को स्पष्ट रूप से व्यक्त करेंगे। फैबियन ने कहा, यह पहली यात्रा है, और स्वाभाविक रूप से, प्रधानमंत्रीमोदी ने यह रुख अपनाया है कि यह युद्ध का युग नहीं है। वह राष्ट्रपति पुतिन को बताएंगे कि भारत इसे कैसे देखता है, क्योंकि भारत चाहता है कि यहयुद्ध जल्द से जल्द समाप्त हो। संबंधों को मजबूत रखना अहम हो जाताफैबियन ने कहा कि भारत के रुख के बावजूद, मास्को के दीर्घकालिक लक्ष्यों में बदलाव की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि इससेराष्ट्रपति पुतिन के स्पष्ट रणनीतिक उद्देश्य में कोई बदलाव आएगा, जिसका उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप से पुरजोर समर्थन प्राप्त है। इसके अलावा, उन्होंने कहाकि दोनों देश अपनी साझेदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा, दोनों देशों (रूस और भारत) को अपने द्विपक्षीय संबंधों को गहरा, मजबूत औरव्यापक बनाने से काफी फायदा होगा और प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन यही करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। रक्षा पर जोर दिया जाएगा। राष्ट्रपतिपुतिन के भारत दौरे के महत्व को रेखांकित करते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा है कि, उथल-पुथल भरी दुनिया में पुराने संबंधों को मजबूतरखना अहम हो जाता है। थरूर ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 की महत्वता पर खुलकर अपनी राय रखी।
दिल्ली-एनसीआर में जहरीली हवा का असर, पक्षियों की चहचहाहट हुई कम, प्रजनन क्षमता घटने लगी

दिल्ली-एनसीआर इन दिनों जहरीली हवा की गिरफ्त में है और इसका दुष्प्रभाव सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं रहा है। हवा में बढ़ते धूलकण, जहरीलीगैसें और घने स्मॉग ने पूरे पर्यावरण को बीमार-सा बना दिया है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि जहां इंसानी जीवन मुश्किल होता जा रहा है, वहींबेजुबान पशु-पक्षी भी प्रदूषण की मार को चुपचाप सह रहे हैं।कुदरत नहीं इंसानों की वजह से निरंतर बिगड़ती वायु गुणवत्ता ने पक्षियों के श्वसन तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिसकी वजह से वह ऊंचीउड़ान भी नहीं भर पा रहे हैं। बेजुबानों के लिए हालत इस कदर खराब हो गए हैं कि कई पक्षियों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। यही वजह है किसुबह सुनाई देने वाली पक्षियों की चहचहाहट भी कम सुनाई दे रही है। प्रदूषण के बढ़ते खतरे को कम करने के लिए समय रहते प्रभावी कदम नहींउठाए गए, तो दिल्ली–एनसीआर की जैव विविधता और मानव स्वास्थ्य दोनों ही गंभीर संकट में पड़ सकते हैं। विशेषज्ञों ने चेताया है कि वायु प्रदूषणसिर्फ पक्षियों को ही नहीं बल्कि कीड़े-मकौड़ों को भी नुकसान पहुंचा रहा है, जो स्वयं पक्षियों का भोजन होते हैं। हवा के सहारे उड़ते थेइस तरह पूरा पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है। अरावली और नीला हौज जैव विविधता पार्क के साइंटिस्ट इंचार्ज डॉ. शाह हुसैन कहते हैं किपक्षियों के फेफड़े इंसानों से ज्यादा नाजुक होते हैं, इसलिए प्रदूषण का असर उन पर अधिक गंभीर होता है। दिल्ली के चिकित्सालयों और रेस्क्यू सेंटर्समें घायल पक्षियों की संख्या बढ़ती जा रही है। इनमें कबूतर, तोते, चील, कोयल, कौए आदि शामिल हैं, जिनमें सबसे अधिक मामले कबूतरों के हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रदूषण पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले समय में पक्षियों की संख्या में बड़ी गिरावट देखी जा सकतीहै। कभी जहां नीली खुली हवा में हम पंख फैलाकर उड़ा करते थे,वहीं अब हर सांस भारी हो गई है।हमारे छोटे-छोटे फेफड़े इस धुएं में घुटते हैं। पेड़जिन पर हम बैठते थे, वही बीमार पड़ गए हैं। कभी सूरज की दिशा देखकर उड़ने वाले हम,अब धुएं की मोटी चादर में रास्ता टटोलते रहते हैं। हमचहकते थे, अब हम खामोश हैं। हम हवा के सहारे उड़ते थे, अब वही हवा हमें गिरा देने पर तुली लगती है। उनकी प्रजनन क्षमता घटने लगती हैवजीराबाद स्थित वाइल्डलाइफ रेस्क्यू सेंटर के अध्यक्ष मोहम्मद सऊद ने बताया कि प्रदूषण का सीधा असर पक्षियों की सेहत पर दिख रहा है। उन्होंनेकहा कि आसमान ही पक्षियों का घर होता है, लेकिन इंसानों की लापरवाही के कारण अब ये घर भी प्रदूषण से भर गया है। हाल ही, में एक घायलकोयल को उनके पास लाया गया, जिसे सांस लेने में भारी परेशानी हो रही थी। अरावली जैव विविधता पार्क की वन्यजीव पारिस्थितिकीविद डॉ. आयशा सुल्ताना ने कहा कि शहरी इलाकों के साथ-साथ जंगलों में रहने वाले पक्षी भी प्रदूषण से प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण बढ़ने से उनका भोजनढूंढना कठिन हो गया है। वह बताती हैं कि जब पक्षियों को पर्याप्त भोजन नहीं मिलता, तो उनकी प्रजनन क्षमता घटने लगती है।